लगभग डेढ़ लाख शिक्षकों एवं तीन हज़ार तालीमी मरकजों व शिक्षा सेवकों की होगी बहाली

सूबे बिहार की नीतीश सरकार के शिक्षा मंत्री कृष्ण नंदन वर्मा ने छठे चरण के नियोजन के कार्यारंभ की घोषणा विधानसभा में करते हुए कहा कि राज्य में बड़ी संख्या में मध्य विद्यालयों को उच्च विद्यालयों में उत्क्रमित किया जा रहा है | यही कारण है कि स्कूलों में शिक्षकों, शिक्षा सेवकों एवं तालीमी मरकजों आदि की कमी होती जा रही है |

बता दें कि नीतीश सरकार के शिक्षा विभाग द्वारा इस वर्ष के अंत तक एक लाख चालीस हज़ार शिक्षकों एवं 2903 शिक्षा सेवकों के नियोजन की प्रक्रिया पूरी कर ली जायेगी | जानिए कि 2903 शिक्षा सेवकों में 1884 तालीमी मरकजों की बहाली किये जाने का भी निर्णय लिया गया है |

यह भी बता दें कि संपूर्ण सूबे के 38 जिलों में आवश्यकतानुसार शिक्षकों , शिक्षा सेवकों एवं तालीमी मरकजों की बहाली की जाएगी | जहाँ मधेपुरा एवं जमुई जिले में 100 से ऊपर यानि क्रमशः 143 एवं 121 शिक्षा सेवकों की बहाली होगी वहीं सीतामढ़ी व भागलपुर जिले में 195 एवं 196 तालीमी मरकजों की बहाली होने जा रही है | वैसे तो जमुई, वैशाली, मुजफ्फरपुर , चंपारण आदि जिले में 115 से लेकर 143 के बीच तालीमी मरकजों की नियुक्ति होगी |

चलते-चलते यह भी बता दें कि जल्द ही नीतीश सरकार राज्य में “योग-शिक्षक बहाली नीति” बनाने जा रही है | सरकार इस नीति के हर पहलू पर विचार करेगी क्योंकि आजकल कम उम्र के बच्चे भी हाई ब्लड प्रेशर , डायबिटीज, अनिद्रा आदि से पीड़ित होने लगे हैं | स्वस्थ जीवन जीने के लिए योग की भूमिका अहम मानी जाती है | योग के महत्वपूर्ण होने के कारण ही हर साल 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है | आज की जीवन शैली समस्त संसार के मानव को अनेक रोगों से परेशान कर रही है, इसीलिए यूएनओ द्वारा योग को अंतरराष्ट्रीय गौरव प्रदान किया गया है |

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बारिश खोल देती है सबकी पोल

बारिश के आते ही नगरों से लेकर महानगरों तक की हालात मत पूछिये…. मधेपुरा से लेकर मुंबई तक यानी नगर पंचायत से लेकर नगर निगम तक की पोल खोल देती है बारिश | यहाँ मधेपुरा के तीनों तरफ नदी है और वहाँ मुंबई के तीनों तरफ समंदर | एक ओर मधेपुरा में जल निकासी के नाम पर नाले-निर्माण में करोड़ों व्यय होने के बावजूद पानी बहता नहीं वहीं दूसरी ओर देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में जल निकासी के लिए 22 हज़ार करोड़ के बजटीय बाढ़ में सड़कों पर बाइक से लेकर कार व बसें भी तैरती हुई नजर आती है….. कहीं-कहीं बहती हुई दिखती हैं |

बता दें कि मानसून की पहली बारिश में ही बिगड़ गई शहरे मधेपुरा से लेकर मुंबई तक की सूरत | मधेपुरा एसडीएम श्री वृंदालाल के अनुमंडल कार्यालय की सूरते हाल तो जरा देखिए | बारिश के बाद चलना तो दूर अनुमंडल परिसर में तैरने की नौबत आ गई है…… एक वकील साब तो एसडीओ के गेट पर से ही पानी देखकर घर लौट गये……. जूते खोल हवाई चप्पल पहने और पुनः एसडीएम परिसर के घुटने भर पानी को पार कर अनुमंडल दंडाधिकारी के कोर्ट में बहस किये | चारो ओर अधिकारी से लेकर आम लोग तक जलजमाव के कारण परेशान दिखे…..!

जानिए कि अस्पताल गेट पर और अंदर जहाँ-तहाँ जलजमाव के कारण बेहद परेशानी होती है….. खासकर महिला मरीजों को | कर्पूरी चौक से लेकर थाना चौक और पूर्व सांसद डॉ.रवि के घर होकर पंचमुखी चौक तक के जल निकासी का अब तक कोई स्थाई समाधान नहीं किया जा सका है | जल निकासी पर विचार किये बिना टुकड़े-टुकड़े गैंग की तरह टुकड़े-टुकड़े नाले का निर्माण किया जाता रहा है जिससे स्थानीय लोगों का जीना दुश्वार हो गया है | कब तक सोया रहेगा यह नगर पंचायत और नगर निगम ….?

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बिहार में 75 प्रतिशत संवेदनशील कब्रिस्तानों की घेराबंदी का काम पूरा

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को कब्रिस्तान की घेराबंदी के संबंध में विधानसभा में महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए कहा कि राज्य के 75 प्रतिशत संवेदनशील कब्रिस्तानों की घेराबंदी कराई जा चुकी है। बाकी 25 प्रतिशत का काम भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा। आरजेडी विधायक रघुवंश कुमार यादव के तारांकित प्रश्न के जवाब के दौरान हस्तक्षेप करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने बिहार के सभी कब्रिस्तानों का सर्वेक्षण कराया है और इनमें से 8064 कब्रिस्तानों को संवेदनशील मानते हुए घेराबंदी कराने का फैसला लिया गया है।

मुख्यमंत्री के जवाब का विपक्षी दलों ने विरोध किया और आरोप लगाया कि कब्रिस्तानों के सर्वेक्षण की सूची गलत है। विपक्ष के विरोध पर मुख्यमंत्री ने बताया कि यह 2006 की सूची है। अगर सूची में किसी विवादित या संवेदनशील कब्रिस्तान का नाम छूट गया है तो क्षेत्रीय विधायक भी संशोधित करवा सकते हैं। उनका सुझाव आमंत्रित है।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि प्रदेश में वैसे कब्रिस्तानों की घेराबंदी का फैसला लिया गया है, जहां विवाद है या होने की आशंका है। संबंधित जिलों के डीएम एवं एसपी को विवादित और संवेदनशील कब्रिस्तानों को चिह्नित करने का जिम्मा दिया गया है। उन्हें घेराबंदी की प्राथमिकता तय करने के लिए भी अधिकृत किया गया है। प्राथमिकता वाले अबतक 8064 कब्रिस्तानों की सूची बनाई गई है।

गौरतलब है कि घेराबंदी के लिए बजट का भी प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि कब्रिस्तानों की घेराबंदी के लिए राज्य सरकार की कोई कमिटी नहीं है। विधायक और विधानपार्षद भी चाहें तो वह मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना से कब्रिस्तानों की घेराबंदी करा सकते हैं।

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भारतीय गाँवों में शास्त्रीय संगीत का दिलचस्प शतकीय समारोह

भारत की सारी सभ्यताओं में संगीत सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। शास्त्रीय संगीत ध्वनि प्रधान होता है, शब्द प्रधान नहीं। इसमें महत्व ध्वनि के उतार-चढ़ाव का होता है….. न कि शब्द और उसके अर्थ का। ऐसे क्लासिकल म्यूजिक को नहीं समझने के कारण ही अनेक लोग ऊब जाते हैं जिसका कारण लोगों में जानकारी की कमी होती है…… न कि संगीत साधक की कमजोरी।

बता दें कि भारत के गाँवों में भी शास्त्रीय संगीत की समझ एवं उसमें गहरी रुचि रखने वाले ग्रामीणों की संख्या कम नहीं है। एक ओर जहाँ जालंधर शहर में हरिवल्लभ शास्त्रीय संगीत समारोह 144 वर्षों से, आंध्र प्रदेश में पंडित त्यागराज शास्त्रीय संगीत महोत्सव 119 वर्षों से तथा मध्यप्रदेश में तानसेन संगीत समारोह 94 वर्षों से टूटी कड़ियों के साथ जारी है वहीं दूसरी ओर इन साधन संपन्न महानगरों से दूर मध्य प्रदेश के दमोह जिले का निपट देहाती गाँव “बकायन” विगत 125 वर्षों से शास्त्रीय संगीत का अनवरत आयोजन कर रहा है।

यह भी जानिए कि बकायन गाँव में इस वर्ष के जन जलसे का 125वाँ शास्त्रीय संगीत समारोह 16-17 जुलाई (गुरु पूर्णिमा) को होने जा रहा है। इस आयोजन में पहली बार राष्ट्रीय नाट्य अकादमी एवं अन्य सांस्कृतिक केंद्रों के जुड़ने से राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर के क्लासिकल कलाकारों के आने की सूचनाएं मिलने लगी हैंं।

चलते-चलते यह भी बता दें कि बकायन का मृदंगाचार्य नाना साहेब पानसे स्मृति समारोह इस मायने में सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। यह आयोजन निपट देहात में होता है जहाँ के ग्रामीण भी गजब के श्रोता हैं। वे बड़े-बड़े विकट शास्त्रीय संगीतज्ञों को दो दिनों तक सुनने के लिए दिन-रात जुटे रहते हैं। कुछ श्रोतागण जहाँ 5-10 किलोमीटर दूर से पैदल चलकर क्लासिकल म्यूजिक का रसास्वादन करने आते हैं वहीं कुछ विकट श्रोतागण दो दिनों तक अपनी दुकानें बंद कर पहुंच जाते हैं….. यहाँ तक कि क्लासिकल कत्थक की प्रस्तुति देखने गाँव की पढ़-अपढ़ महिलाओं का भी तांता लग जाता है।

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बुजुर्ग माता-पिता की अनदेखी करने वाले बच्चे जाएंगे जेल

प्रत्येक माता-पिता अपनी संतान का भाग्य विधाता होता है। जहाँ माता संपूर्ण घर के दिल की धड़कन होती है वहीं पिता साहस, इज्जत और सम्मान का दर्पण। मुफ्त में तो केवल माता-पिता का प्यार ही मिलता है….. शेष हर रिश्ते के लिए इस दुनिया में कुछ-न-कुछ तो चुकाना ही पड़ता है। फिर भी कुछ को छोड़कर अधिकतर बेटा बुजुर्ग माता-पिता से बात-बात पर यही कहता है आप दोनों को तो कुछ ना कुछ तो लगा ही रहता है……।

बता दें कि जिस माँ की ममता और पिता के प्यार के चलते बेटा शोहरत हासिल करता है वही बेटा बड़ा होकर बुजुर्ग माता-पिता की अनदेखी करता है….. जो अब वैसी संतान के लिए महंगा साबित होगा। बुजुर्ग माता-पिता की अनदेखी व परित्याग करने वाले बच्चों के लिए जहाँ एक ओर जेल व जुर्माना के मौजूदा प्रावधान में सरकार ढेर सारे बदलाव करने जा रही है वहीं दूसरी ओर सरकार द्वारा बच्चों की परिभाषा का दायरा भी विस्तृत करने का मन बनाया जा रहा है।

जानिए कि केन्द्र की मोदी सरकार ने वर्तमान कार्यकाल के पहले 100 दिनों के कामकाज में बुजुर्गों की सुरक्षा और कल्याण संबंधी कानून को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम 2007 के तहत सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय ने अपने बुजुर्ग माता-पिता का परित्याग करने वालों या उनके साथ दुर्व्यवहार करने वालों के लिए मौजूदा 3 महीने की सजा को बढ़ाकर 6 महीने करने का प्रस्ताव किया है।

यह भी कि बच्चों की परिभाषा का दायरा बढ़ाकर इसमें दत्तक पुत्र-पुत्री या सौतेले बच्चे, दामाद-बहू, नाती-पोतों तथा कानूनी अभिभावक द्वारा पालन पोषण किए गए नाबालिक बच्चों को भी शामिल किया गया है। वर्तमान में इस परिभाषा के अंतर्गत अपनी संतान और नाती-पोते ही आते हैं। भरण पोषण की राशि पर पुनः गंभीरतापूर्वक विचार किया जाएगा।

 

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को देश का बही-खाता (बजट) पेश किया

भारत सरकार की पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को देश का बही-खाता (बजट) पेश किया। बजट में सीतारमण ने अमीरों को झटका, मध्यमवर्ग को थोड़ी राहत और गरीबों, किसानों व महिलाओं को विशेष लाभ देने की कोशिश की है।

बता दें कि जहाँ वित्त मंत्री निर्मला ने विशेष रूप से दो विषयों पर जोर दिया है- पहला यही कि ईज आफ डूइंग बिजनेस को बेहतर करने के लिए कदम उठाए गए हैं तथा दूसरा यह कि इज ऑफ लिविंग को बेहतर बनाने के उपाय किये गए हैं- वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बजट को देश को समृद्ध करने वाला, जन-जन को समर्थ करने वाला तथा विकास को गति देने वाला कहा है।

यह भी जानिए कि इस बजट में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क नहीं लेने की चर्चा करते हुए वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि जिनके पास पैन कार्ड नहीं है वो पैन कार्ड की जगह आधार कार्ड दे सकते हैं। साथ ही पर्यावरण को दृष्टि में रखते हुए इलेक्ट्रिक वाहनों पर पूर्व से लग रही 12 फ़ीसदी जीएसटी को घटाकर 5 फ़ीसदी करने की घोषणा वित्त मंत्री ने बजट में की है।

चलते-चलते यह भी कि वित्त मंत्री निर्मला के माता-पिता एवं उनकी पत्रकार पुत्री भी उनका पहला बजट भाषण सुनने संसद पहुंची थी। लाल रंग के मखमली कपड़े में लिपटे हुए बहीखाते को हाथों में लिए तथा मैरून रंग की साड़ी पहने पहली महिला वित्त मंत्री सीतारमण ने बजट पेश करने के दरमियान कभी चाणक्य नीति ” दृढ निश्चय से कार्य करेें तो कार्य पूरा होता है” या कभी मशहूर शायर मंजूर हाशमी का शेर “यकीन हो तो कोई रास्ता निकलता है….. हवा की ओट लेकर भी चिराग जलता है” पढ़ा। शेर पढ़ते ही मौजूद सांसदों ने मेच थपथपाई जिससे पूरा सदन गूंज उठा…. पूरे दो-ढाई घंटे के बजट भाषण में “नारी तू नारायणी” पर जमकर मेज थपथपाई गई….. मिनट-दो मिनट पर मेज थपथपाई जाती रही।

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बारिश नहीं होने के कारण सूख गये मधेपुरा जिले के 250 तालाब

मौसम की बेरुखी के कारण सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 250 से अधिक तालाब अब तक मधेपुरा जिले में सूख चुके हैं। सूखे तालाबों की सूची जिला प्रशासन द्वारा तैयार की जा चुकी है।

बता दें कि जिले में सरकारी तालाबों से कहीं अधिक संख्या में निजी तालाब हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जहाँ सरकारी तालाबों की संख्या 167 है…… वहीं जिले के अंतर्गत निजी तालाबों की संख्या 400 के आस-पास, परंतु इसमें से अधिकांश तालाब मृत अवस्था को प्राप्त कर चुके हैं।

यह भी जानिए कि अब सरकारी स्तर पर इन तालाबों के जीर्णोद्धार की योजना बनाई जा रही है। इन तालाबों का जीर्णोद्धार कब तक पूरा होगा यह सरकारी अधिकारियों द्वारा कह पाना मुश्किल है। क्योंकि, मधेपुरा जिला प्रशासन ने जिला मत्स्य विभाग से सूख चुके सरकारी तालाबों की सूची लिया है। सूखे तालाबों को ‘मनरेगा योजना’ से जीर्णोद्धार की बात कही जा रही है।

जहाँ तक निजी तालाबों के जीर्णोद्धार की बात है उसके लिए आम लोगों को जागरूक होने की जरूरत है। हाँलाकि जल संरक्षण को लेकर किसानों को प्रशासनिक स्तर पर जागरूक करने की पहल भी की जा रही है जबकि कोसी के इस इलाके में अभी तक पानी की समस्या नहीं देखी गई थी। लेकिन अब यहाँ का भूजल स्तर भी तेजी से नीचे जा रहा है। इसी कारण कोसी के इलाके में भी तालाब-पोखर सूखने लगे हैं। सरकारी और निजी मिलाकर कुल 250 से अधिक तालाब सूख चुके हैं।

चलते-चलते यह भी बता दें कि जिन तालाबों में अभी भी कुछ पानी बचा हुआ है उसमें पंप से पानी डालकर मछलियों को बचाया जा रहा है। स्थिति यह है कि बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र आलमनगर, चौसा, पुरैनी आदि क्षेत्रों में जहाँ पानी जमा रहता था वहाँ का जलकर क्षेत्र भी इस बार पूरी तरह सूख चुका है।

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बहुत कठिन है पूरे देश को पानी उपलब्ध कराना

गाँव से लेकर शहरों तक संपूर्ण भारत में घटता जा रहा है पानी और रिसता जा रहा है विकास। पानी का अभाव कितना गहरा है और पानी से उत्पादन पर कितना गहरा असर पड़ रहा है, वह बताने की नहीं, केवल महसूस में की जरूरत है।

बता दें कि बढ़ते जल संकट को अगर दूर नहीं किया गया तो आर्थिक विकास की रफ्तार कम होती चली जाएगी। एक ओर जहाँ जल संकट को दूर करने के लिए नरेंद्र मोदी की नई सरकार द्वारा “जलशक्ति मंत्रालय” का गठन कर 1 जुलाई से 15 जुलाई तक जनसहयोग से “जलसंरक्षण अभियान” का श्री गणेश भी कर दिया गया है वहीं दूसरी ओर नीतीश सरकार द्वारा बिहार के विभिन्न हिस्सों में गिरते भूगर्भ जल स्तर को रोकने की नई-नई कोशिशें शुरू की जा रही है…… क्योंकि औसतन 30 से 60 फुट तक पानी नीचे चला गया है…. हजारों चापाकल सूख गए हैं…. तालाब पोखर तक में पानी नहीं बचा है।

यह भी बता दें कि नीतीश सरकार के लिए खेती और किसान प्राथमिकता में है। वर्ष 2019 के अंत तक हर खेत को पानी मिलेगा। इसी साल खेती के लिए बिजली का अलग फीडर बनाने जा रही है नीतीश सरकार। इसके अलावा सोलर बिजली से 30 हजार पंपों द्वारा खेतों को पानी दिए जाने की व्यवस्था की जा रही है।

यह भी जानिए बिहार की सरकार संकल्पित है कि प्रदेश के सभी घरों को इस वर्ष के अंत तक नल का जल उपलब्ध हो जाए तथा सभी घरों को शौचालय भी हो जाए….. जबकि नीतीश सरकार संकल्पित है कि गांधी जयंती यानी 2 अक्टूबर तक ही बिहार खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) हो जाएगा। बिहार की योजना “हर घर नल का जल” अब पूरे देश में लागू करने जा रही है भारत सरकार।

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बिहार प्रादेशिक मारवाड़ी सम्मेलन मधेपुरा स्थित जीवन सदन में शान के साथ सम्पन्न हुआ

मधेपुरा के ऐतिहासिक धरोहर ‘जीवन सदन’ में रविवार को प्रादेशिक मारवाड़ी सम्मेलन का शानदार कार्यक्रम शाखा अध्यक्ष प्रो.गिरधारी लाल नेवटिया की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। सम्मेलन में मारवाड़ी समाज को कुरीतियों से मुक्ति दिलाने, बुजुर्गों का सम्मान करने, नई पीढ़ी को शिक्षा के प्रति जागरूक करने तथा प्रतिभाशाली बच्चे-बच्चियों को सम्मानित करने के साथ-साथ किसी भी जाति-धर्म के लोगों की विकलांगता से सूबे बिहार को मुक्त करने जैसे उत्कृष्ट कार्यक्रमों सहित सम्मेलन की सदस्यता विस्तार पर भी विशेष रूप से चर्चा, आपसी संवाद व समन्वय स्थापित करने में लगे रहे…. सम्मेलन के प्रति समर्पित प्रदेश अध्यक्ष विनोद तोदी।

बता दें कि अध्यक्ष श्री तोदी ने अपनी टीम के महामंत्री महेश जालान, क्षेत्रीय उपाध्यक्ष विवेक तुलस्यान, प्रमंडलीय उपाध्यक्ष अमर दहलान (सहरसा) एवं डॉ.विश्वनाथ सर्राफ (सुपौल)… सहित सम्मेलन के कर्ताधर्ता मनीष सर्राफ आदि द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का आरंभ किया। मधेपुरा शाखा के अध्यक्ष प्रो.नेवटिया द्वारा अतिथियों को अंगवस्त्रम एवं शिव का प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

Dr.Bhupendra Madhepuri along with President Vinod Todi felicitating Miss Khushi Pransukhka, the Harayana State topper in CBSC Exam.
Dr.Bhupendra Madhepuri along with President Vinod Todi felicitating Miss Khushi Pransukhka, the Harayana State topper in CBSE Exam.

यह भी कि जहाँ प्रदेश अध्यक्ष विनोद तोदी ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में विस्तारपूर्वक सम्मेलन द्वारा सेवा  व विकास के लिए किए जा चुके कार्यों…… भावी योजनाओं के साथ-साथ सदस्यता विस्तार तथा मरणोपरांत अपने अंगदान की घोषणा पर जमकर चर्चा की….. और तालियों की गड़गड़ाहट के माध्यम से नये प्रस्तावों पर समर्थन भी प्राप्त किया….. वहीं समाजसेवी साहित्यकार एवं डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के करीबी रहे डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने कोसी प्रमंडल की शान IAS Exam. में 89वाँ रैंक लाने वाले पुरैनी के नितेश जैन, IIT में 96वाँ रैंक लाने वाले (मधेपुरा के शिव प्रसाद सर्राफ के पोते व आनंद सर्राफ के पुत्र) ऋषि सर्राफ को हृदय से बधाई दी। सिंहेश्वर के अनितेश अग्रवाल, साकेत अग्रवाल सहित विभिन्न कोटि के प्रतिभा पुंज शुभम कुमार अग्रवाल, शुभम आनंद प्राणसुखका, सुश्री खुशी प्राणसुखका, खुशी सुल्तानियाँ, इशिका कुमारी, तनिष्का बंसल, प्राची बंसल, उमंग अग्रवाल, श्वेता शारदा LLM आदि जिन जिनने जिले का ही नहीं बल्कि प्रमंडल और सूबे का भी नाम रोशन किया उन सभी प्रतिभागियों के बीच डॉ.कलाम की चर्चा करते हुए डॉ.मधेपुरी ने यही कहा-

“यदि आप सभी आगे भी सूरज की तरह चमकना चाहते हो तो तुम्हें सूरज की तरह जलना होगा तथा किसी की बातों पर ध्यान दिये बगैर सूरज की तरह अपने कामों में लगे रहना होगा….।”

इस अवसर पर डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने कोसी के ऐतिहासिक पन्नों को फड़फड़ाते हुए अतिथियों को महत्वपूर्ण जानकारियाँ दी। डॉ.मधेपुरी ने सम्मेलन के समक्ष जनहित में खोले गए सहरसा के मनोहर लाल टेकरीवाल कॉलेज सहित विभिन्न विद्यालयों, मधेपुरा के जीवन सदन व सागर सदन आदि की विस्तार से चर्चा की। डॉ.मधेपुरी ने प्रांतीय अध्यक्ष विनोद तोदी से हरियाणा में CBSE में टॉप करने वाली (मधेपुरा व्यापार संघ के पूर्व अध्यक्ष योगेंद्र प्राणसुखका की पौत्री व आनंद प्राणसुखका की पुत्री) खुशी प्राणसुखका का परिचय कराते हुए सम्मानित किया तथा UPSC का टॉपर बन मधेपुरा को गौरवान्वित करने हेतु शुभाशीष भी दिया।

Dr.Madhepuri congratulating Nitesh Jain (IAS) & Shweta Sharda (LLM) along with the senior citizens Girdhar Chand & Dinesh Sarraf.

आरंभ में प्रांतीय अध्यक्ष विनोद तोदी की टीम के सदस्यों व गणमान्यों द्वारा सम्मानित होने वाले प्रमंडलीय बुजुर्गों में- रतन सर्राफ, दामोदर सर्राफ, रामविलास सर्राफ, शिबू सर्राफ, दिनेश सर्राफ, गिरधर चाँद, युगल किशोर सुल्तानियाँ, घनश्याम दास, सत्यनारायण सुल्तानियाँ, बद्री प्रसाद सुल्तानियाँ, लखी प्रसाद अग्रवाल व पशुपति सुल्तानियाँ सहित…… सहरसा-सुपौल से आये 90 वर्षीय बुजुर्ग भी शामिल हुए। सभी सदस्यों ने सामाजिक कुरीतियों को मिटाने तथा बच्चों को पढ़ाई के प्रति जागरूक करने की बातें कही।

चलते-चलते यह भी बता दें कि इस प्रादेशिक मारवाड़ी सम्मेलन के आयोजन की सफलता का श्रेय सीए मनीष सर्राफ व विकास सर्राफ सहित मंच संचालक प्रदीप अग्रवाल, संजय सुल्तानियाँ, राजेश सर्राफ…. सरीखे युवाओं को जाता है। अंत में धन्यवाद ज्ञापन शाखा अध्यक्ष प्रो.गिरधारी लाल नेेवटिया ने किया।

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मधेपुरा जिले के कुमारखंड ब्लॉक ने फिर एक बार देश भर में सुर्खियाँ बटोरी

जहाँ एक ओर कुमारखंड ब्लॉक के इसराइन कला गाँव के निवासी एवं 1984 बैच के आईपीएस अरविंद कुमार 26 जून को इंटेलिजेंस ब्यूरो के 2 वर्ष के लिए नए डायरेक्टर बनने से पूर्व इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारी बनकर नक्सल आतंक के फन को कुचलने में कई कामयाब ऑपरेशन कर राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोर चुके थे…. तथा कश्मीर मामले के एक्सपर्ट माने जाने वाले आईपीएस अरविंद को नक्सलवाद प्रभावित इलाके में बेहतर पुलिसिंग के लिए महामहिम राष्ट्रपति द्वारा पुरस्कृत भी किया गया वहीं दूसरी ओर कुमारखंड निवासी दिल्ली पुलिस के डीजीपी एवं सीबीआई के ज्वाइंट डायरेक्टर रहे एनके सिंह बतौर एसपी कभी प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार करने का साहस जुटाकर देशभर में खूब सुर्खियां बटोरी।

यह भी बता दें कि केंद्र की मोदी सरकार और चुनाव आयोग के लिए आगे होने वाला जम्मू कश्मीर का विधानसभा चुनाव एक बड़ी चुनौती मानी जा रही है….. लिहाजा आईबी के डायरेक्टर के रूप में राजनीतिक विश्लेषकों द्वारा अरविंद कुमार की नियुक्ति को अहम मानी जा रही है। भला क्यों नहीं असम मेघालय कैडर के आईपीएस श्री अरविंद कुमार पूर्व से ही जम्मू-कश्मीर के विशेषज्ञ के रूप में जाने जाते हैं।

चलते-चलते यह भी बता दें कि श्री कुमार की प्रारंभिक पढ़ाई पूर्णिया में हुई जहां इनके पिताश्री सच्चिदानंद सिंह प्रखंड कार्यालय में बड़ा बाबू थे। फिर नेतरहाट… सायंस कॉलेज पटना और दिल्ली में पढ़ाई पूरी कर 1984 में आईपीएस बने। बावजूद इसके वे अपने गाँव-समाज से सदा जुड़े रहे तभी तो 23 अगस्त 2018 को चाचा नित्यानंद सिंह की अर्थी को कंधा देने गाँव पहुंच गए थे।

डायरेक्टर पद पर उनकी नियुक्ति की खबर सुनकर गाँव में जश्न का माहौल छा गया  गाँव के लोगों ने एक-दूसरे को मिठाइयाँ खिलाकर बधाई दी। उनके अपनों में खासकर भाई अनुराग, अभिजीत कुमार, भवेश, अखिलेश….. व भतीजे केशव, शांतनु सहित भतीजी खुशबू ,मोनिका, स्निग्धा आदि ने उत्साह और उमंग के बीच एक-दूसरे के साथ खुशियाँ साझा किया।

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