बी.पी.मंडल को मिले भारतरत्न- डॉ.मधेपुरी

मंडल विचार मंच एवं भारत साहित्य संगम के तत्वावधान में 9 अगस्त को प्रो.श्यामल किशोर यादव की अध्यक्षता में संकल्प दिवस मनाया गया। इस मौके पर उपस्थित मंडल के लोगों ने एक स्वर से सामाजिक न्याय के पुरोधा सह सामाजिक वैज्ञानिक बी.पी.मंडल को भारतरत्न से सम्मानित किए जाने की मांग की।

इस अवसर पर समाजसेवी साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने अपने संबोधन में भारतरत्न डॉ.कलाम एवं भारतरत्न मदर टेरेसा के बीच हुई चर्चाओं को विस्तार देते हुए डॉ.कलाम की वाणी को यूँ उद्धृत किया- हे ईश्वर ! अभी मदर को धरती पर रहने दो, क्योंकि जिसे धरती पर अपना घर नहीं…… मदर का हृदय उसका घर है।

आगे डॉ.मधेपुरी ने कहा कि बी.पी. मंडल का भी हृदय उतना ही विशाल रहा है तभी तो उन्होंने भारत के सभी धर्मों की 3743 जातियों में जो जहाँ सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े मिले उन्हें सूचीबद्ध कर विशेष अवसर (27%आरक्षण) देकर विकास की मुख्यधारा में लाने की अनुशंसा अपने रिपोर्ट में की। अस्तु बी.पी.मंडल को भारतरत्न अवश्य मिले।

जहाँ अपने संबोधन के अंत में डॉ.मधेपुरी ने कहा कि संविधान के प्रावधानों में लुक-छिप कर संशोधन करना बिल्कुल गलत है। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट को संविधान में संशोधन का काम अपने ऊपर नहीं लेना चाहिए वहीं मंडल विचार के प्रो.श्यामल किशोर यादव एवं साहित्य संगम के संस्थापक डॉ.अमोल राय ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आरक्षित वर्ग की सीमा निर्धारित कानून को सरकार पूर्ववत बनाये रखने के लिए समुचित पहल करे।

मौके पर गुरुओं के गुरु रहे सुकवि सत्यनारायण पोद्दार ‘सत्य’ द्वारा रचित ग्रंथ “वज्रपात” का विमोचन साहित्यकारों- डॉ.मधेपुरी, प्रो.श्यामल किशोर, डॉ.अमोल राय, डॉ.इंद्र नारायण, डॉ.विनय कुमार चौधरी, सियाराम यादव मयंक, प्राचार्य डॉ.एस.पी.यादव द्वारा उनके सुपुत्र विश्वविद्यालय प्रोफेसर डॉ.समरेंद्र नारायण आर्य सहित अन्य पारिवारिक सदस्यों की उपस्थिति में किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत सम्मिलित रूप से दीप प्रज्वलित करने के बाद उनकी तस्वीर पर पुष्पांजलि द्वारा किया गया फिर स्थानीय गायक रोशन कुमार द्वारा गाये गये स्वागत गान एवं संगीतज्ञ गांधी कुमार द्वारा साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी के मंडल गीत बी.पी.वंदना की प्रस्तुति को दर्शकों ने खूब सराहा। लगे हाथ सृजन दर्पण के अध्यक्ष ओमप्रकाश एवं सचिव बिकास कुमार के निर्देशन में “मंडल मसीहा की आवाज” लघु नाटक का मंचन भी किया गया। मौके पर प्रमंडलीय शिक्षक संघ के सचिव परमेश्वरी प्रसाद यादव, मोहन मंडल, स्वदेश कुमार, राजेश मेहता, संजीव मेहता. योगी जनक सहित अधिवक्ता हरेंद्र नारायण आर्य, अंजनी कुमार, विदुषी डॉ.रेखा आर्या, डॉ.शैलेंद्र, कुमारी नूतन, प्रभाकर पोद्दार, राजेंद्र यादव आदि मौजूद रहे।

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असाधारण है राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश का सफर

पत्रकारिता जगत के बड़े स्तंभ, शालीन व्यक्तित्व के धनी, जदयू के प्रखर सांसद और एनडीए के उम्मीदवार हरिवंश राज्यसभा के उपसभापति चुने गए। भारत जैसे बड़े देश के इतने बड़े संवैधानिक पद पर पहुँचने के मूल में सबसे पहले तो उनका अपना व्यक्तित्व है, साथ ही जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बड़े कद और कैनवास का सबूत भी इससे मिला है। भाजपा जानती थी कि उसके पास इस पद के लिए पर्याप्त संख्याबल नहीं है, लिहाजा उसने जदयू के हरिवंश का नाम आगे किया ताकि नीतीश कुमार के प्रभाव से वैसे दलों का साथ (बीजेडी, टीआरएस, पीडीपी आदि) भी उसे मिले, जो किसी अन्य स्थिति में उसे शायद ही मिलते।

बहरहाल, गुरुवार को उपसभापति चुने जाने के बाद 62 वर्षीय हरिवंश ने अपने बचपन के संघर्ष के दिनों को याद किया। सम्पूर्ण क्रांति के जनक जयप्रकाश नारायण के गांव सिताब दियारा में पैदा हुए हरिवंश ने कहा, ‘मैंने पेड़ के नीचे पढ़ाई की, मैं एक साधारण प्राइमरी स्कूल में पढ़ा। लुटियंस दिल्ली तक मेरा सफर केवल आप सबकी वजह से तय हो पाया है। हमारे गांव में सड़क नहीं थी। अगर कोई बीमार होता था तो उसे 15 किलोमीटर तक चारपाई पर ले जाना पड़ता था। हमने कई वर्षों के बाद बिजली देखी। हम दीये में पढ़ाई किया करते थे।’
हरिवंश का जन्म 1956 में बलिया उत्तर प्रदेश के सिताब दियारा गांव में हुआ था। उन्होंने 1977 में बीएचयू से अर्थशास्त्र में पोस्ट ग्रैजुएशन किया। इसके बाद उन्होंने ‘धर्मयुग’ से पत्रकारिता की शुरुआत की। 1990 से 91 तक उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के सलाहकार के रूप में पीएमओ में भी काम किया। 1990 से 2017 तक हरिवंश बिहार-झारखंड के प्रतिष्ठित समाचार पत्र ‘प्रभात खबर’ के मुख्य संपादक रहे और इसके सर्कुलेशन को उन्होंने 400 से लाखों तक पहुँचाया। 2014 में जेडीयू की तरफ से उन्हें राज्यसभा सांसद चुना गया। उन्होंने 19 किताबें लिखी हैं और हिन्दी के सम्मान और स्थान के लिए सदैव संघर्षरत रहे हैं। समाज के वंचित वर्ग, विशेषकर आदिवासियों की तो वे आवाज ही रहे हैं। बता दें कि दशरथ मांझी के संघर्ष को आज जो राष्ट्रीय पहचान मिली है, उसके मूल में हरिवंश ही हैं।

चुनाव की औपचारिकता पूरी होने के बाद अपने संबोधन में हरिवंश ने कहा कि वे राज्यसभा की गरिमा बनाए रखने का हमेशा प्रयास करेंगे और आशा जताई कि बहस, सर्वसम्मति और मार्गदर्शन से मतभेदों को सुलझाया जाएगा। आगे उन्होंने दिल को छू लेने वाली एक बेहद महत्वपूर्ण बात कही कि वह इस पद पर उसी तरह रहेंगे जैसे अपने गांव में गंगा और घाघरा दो नदियों के बीच रह चुके हैं। वहां अकसर बाढ़ का खतरा बन जाता था और लोग सोचते थे कि हो सकता है यही उनका आखिरी दिन हो। इतनी गहरी सोच रखने वाले हरिवंश जी को इतने बड़े पद पर पहुँचने और कलम का सम्मान करने वालों का मान विशेष तौर पर बढ़ाने के लिए हम ह्रदय से बधाई देते हैं।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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क्या आपको आखिरी बार ‘अप्पा’ पुकार सकता हूँ ?

करीब छह दशक तक तमिलनाडु की सियासत के केन्द्र बिन्दु रहे, द्रविड़ अस्मिता के प्रतीक, डीएमके प्रमुख एम करुणानिधि बुधवार शाम चेन्नई के मरीना बीच पर चिर निद्रा में सो गए। करुणानिधि को उनके लाखों चाहने वालों की मौजूदगी में उनके गुरु अन्‍नादुरई के समीप पूरे राजकीय सम्‍मान के साथ समाधि दी गई। करुणानिधि को द्रविड़ नेताओं द्वारा अपनाई परम्परा के मुताबिक एक ताबूत में रखकर दफनाया गया जिस पर 33 साल पहले खुद उन्‍हीं का लिखा हुआ स्मृति-लेख अंकित था। तमिल में लिखे इस स्‍मृति लेख का हिन्दी में अर्थ है – “एक शख्स जो बिना आराम किए काम करता रहा, अब वह आराम कर रहा है।” करुणानिधि के इस स्‍मृति लेख में उनके पूरे जीवन का सार छिपा हुआ है।

इससे पहले पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष एमके स्टालिन ने एक नेता और कार्यकर्ता की भूमिका से आगे बढ़कर एक बेटे के नाते दिवंगत कलाईनार (कलाकार) से उन्हें ‘अप्पा’ कहने की इजाजत मांगते हुए बेहद मार्मिक पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्‍होंने करुणानिधि के स्‍मृति लेख का जिक्र करते हुए लिखा है – “आप जहां भी जाते थे ,वह जगह मुझे बताते थे। अब आप मुझे बिना बताए कहां चले गए? आप हमें लड़खड़ाता छोड़ कहां चले गए? 33 साल पहले आपने बताया था कि आपकी स्मृति में क्या लिखा जाना चाहिए – ‘यहां वह शख्स लेटा है जिसने सारी जिंदगी बिना थके काम किया।’ क्या अब आपने तय कर लिया है कि आप तमिल समाज के लिए काम कर चुके हैं?”

स्टालिन ने आगे लिखा – “या आप कहीं छिप कर देख रहे हैं कि क्या कोई आपके 80 साल के सामाजिक जीवन की उपलब्धियों को पीछे छोड़ सकता है? 3 जून को अपने जन्मदिन पर मैंने आपसे आपकी क्षमता का आधा मांगा था… क्या आप अपना दिल मुझे देंगे? क्योंकि उस बड़े दान से हम आपके अधूरे सपनों और आदर्शों को पूरा करेंगे।”

पत्र के अंत में स्टालिन ने करुणानिधि से उन्हें एक आखिरी बार ‘पिता’ कहने की इजाजत मांगी, तो जिसने भी इसे पढ़ा उसकी आंखें नम हो गईं। उन्होंने लिखा “करोड़ों उडनपिरपुक्कलों (डीएमके काडर) की ओर से मैं आपसे अपील करता हूं कि बस एक बार ‘उडनपिरप्पे’ बोल दीजिए और हम एक सदी तक काम करते रहेंगे। मैं आपको अप्पा कहने की जगह अपने जीवन में ज्यादातर समय ‘थलाइवर’ (नेता) कहता रहा। क्या आपको आखिरी बार ‘अप्पा’ पुकार सकता हूँ?”

बता दें कि पांच बार तमिलनाडु के सीएम रहे एम करुणानिधि का मंगलवार देर शाम चेन्‍नई के कावेरी हॉस्पिटल में निधन हो गया था। तमिलनाडु की राजनीति में उनका करीब 6 दशकों तक दखल रहा। एमजी रामचंद्रन और जे जयललिता के अलावा वह इकलौते ऐसे नेता थे जिन्होंने हर वर्ग में अपनी जगह बनाई। अनवरत साठ वर्षों तक विधायक, मंत्री, मुख्यमंत्री आदि पदों पर रहते हुए उन्होंने केन्द्र में प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू से लेकर वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र तक के कार्यकाल को देखा – ऐसा बिरला अवसर देश में किसी को नहीं मिला। करुणानिधि केवल एक दिग्गज नेता ही नहीं थे, वे एक आला दर्जे के कलाकार (कलाईनार), साहित्यकार और संपादक भी थे। उनकी शख्सियत एक संस्था में तब्दील हो चुकी थी, जिसने कई पीढ़ियों को संस्कारित और आंदोलित किया था। अखिल भारतीय ही नहीं अंतर्राष्ट्रीय ख्याति रखने वाले और 94 साल तक हम सबके बीच रहे उस हाड़-मांस वाले ‘आंदोलन’ को हमारा प्रणाम..!

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मधेपुरा जिला को 31 दिसम्बर तक ओडीएफ घोषित करें- डीएम

डीआरडीए के झल्लू बाबू सभागार में जिले के विकास योजनाओं की समीक्षात्मक बैठक की अध्यक्षता कर रहे डीएम नवदीप शुक्ला ने जिला मुख्यालय सहित सभी प्रखंडों के पदाधिकारियों व कर्मचारियों को शौचालय निर्माण को लेकर कई निर्देश दिए और गंभीरता पूर्वक उपस्थित अधिकारियों, पदाधिकारियों एवं इस कार्य में लगे कर्मचारियों से यही कहा कि हर हाल में जिले को 31 दिसंबर 2018 तक ओडीएफ घोषित करने में लग जाएं।

बता दें कि जिले को ओडीएफ घोषित किए जाने के अलावे मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना से बन रहे गली नाली योजना,  प्रधानमंत्री आवास योजना एवं दाखिल-खारिज सहित अन्य विभिन्न योजनाओं की समीक्षा डीएम ने गंभीरता पूर्वक की तथा पीएम आवास योजना की स्थिति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए अन्य सभी योजनाओं के कार्यान्वयन में तेजी लाने पर बल दिया।

यह भी कि डीएम नवदीप शुक्ला (भा.प्र.से.) ने मुख्यमंत्री द्वारा चलाए जा रहे बसेरा अभियान कार्य में तेजी लाने का निर्देश देते हुए सख्त हिदायत दी कि किसी भी योजना को समय से पूरा नहीं करने की लापरवाही को कभी भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। डीएम ने जिले के सभी सीओ को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि 8 अगस्त तक हर हाल में “दाखिल-खारिज” के कार्यों का निष्पादन करें।

अंत में सूबे में धड़ल्ले से हो रहे महिला यौन शोषण एवं उत्पीड़न के मद्देनजर जिले भर में महिला सशक्तिकरण को लेकर डीएम ने महिला उत्थान के निमित्त जिला, अनुमंडल, प्रखंड एवं पंचायत स्तर तक ‘यौन उत्पीड़न शिकायत निवारण केंद्र’ खोले जाने की घोषणा की। उस कमिटी में स्थानीय स्तर पर एक सामाजिक कार्यकर्ता को नामित किया जाएगा वहीं समाज कल्याण तथा महिला विकास का एक पदाधिकारी भी होगा।

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मधेपुरा के एथलीट गीतांजलि की राह चलें

बिहार की उड़नपरी कहलाने वाली राष्ट्रीय एथलीट एवं सूबे की राजधानी पटना के सीआईडी विभाग में कार्यरत कोसी की बेटी गीतांजलि की स्मृति में पांचवी बार आयोजित गीतांजलि स्मृति रोड रेस में भाग ले रहे सौ धावकों को समाजसेवी साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी, प्रभारी एसपी वसी अहमद, एसडीएम वृंदा लाल एवं उप प्रमुख जयकांत यादव ने सम्मिलित रूप से हरी झंडी दिखाकर कार्यक्रम का श्रीगणेश किया। मालूम हो कि बिहार के लिए राष्ट्रीय स्तर पर दर्जनों मेडल जीतने वाली धाविका गीतांजलि की असामयिक मृत्यु 6 अगस्त 2013 को पटना के कुर्जी हॉस्पिटल में हो गई थी।

बता दें कि गीतांजलि की स्मृति में लगभग 5 किलोमीटर का यह मैराथन दौड़ साहुगढ़ दुर्गा स्थान के मैदान से मधेपुरा भूपेन्द्र चौक के बीच खेल प्रशिक्षक संत कुमार की सतर्कता एवं सुरक्षा व्यवस्थानुरूप आयोजित की गई थी। लड़कियों के लिए खेदन बाबा चौक से ही यह दौड़ शुरू की गई । भले ही लड़कियों की संख्या इस बार कम थी परंतु ये जज्बाती धाविकाएं गीतांजलि को कभी मरने नहीं देंगी…..। इतनी लंबी दौड़ पूरी कर समस्त धावक-धाविकाओं ने गीतांजलि को श्रद्धांजलि दी और वे सभी गीतांजलि फाउंडेशन की ओर से पुरस्कृत भी हुए।

Udghatankarta Dr.Bhupendra Madhepuri in presence of Up-Pramukh Jaikant Yadav, Dr.Alok Kumar, Prithwiraj Yaduvanshi, Sanjeev Kumar, Anand Kumar & others giving Special Prize to "Khel Guru" Sant Kumar on the occasion of the 5th Gitanjali Memorial Road Race at Madhepura.
Udghatankarta Dr.Bhupendra Madhepuri in presence of Up-Pramukh Jaikant Yadav, Dr.Alok Kumar, Prithwiraj Yaduvanshi, Sanjeev Kumar, Anand Kumar & others giving Special Prize to “Khel Guru” Sant Kumar on the occasion of the 5th Gitanjali Memorial Road Race at Madhepura.

यह भी जानिए की गीतांजलि रोड रेस कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया समस्त सामाजिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों को तत्परता के साथ संपन्न करने/कराने में लगे रहने वाले मधेपुरा के भीष्म पितामह कहे जाने वाले डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने। आगे डॉ.मधेपुरी ने सर्वप्रथम गीतांजलि की तस्वीर पर पुष्पांजलि किया तथा उपस्थित धावक-धाविकाओं व गणमान्यों को संबोधित करते हुए कहा कि समाज उसी को याद करता है जो अखंड जुनून के साथ समर्पित होकर समाज व राष्ट्र को कुछ देता है……. आज यदि गीतांजलि जीवित रही होती तो निश्चय ही वह ओलंपिक की उड़ान भर रही होती…. । डॉ.मधेपुरी ने अंत में यही कहा कि मधेपुरा के एथलीट गीतांजलि की राह चलें और भारतरत्न डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम की तरह अभाव में रहकर भी बड़े-बड़े सपने देखें……।

मौके पर इस कार्यक्रम की रीढ़ पृथ्वीराज यदुवंशी सहित जिला कबड्डी संघ के अध्यक्ष व उप प्रमुख जयकांत यादव एवं डॉ.आलोक कुमार द्वारा उद्गार व्यक्त किया गया और इनके अलावा सुशील कुमार, संजीव कुमार, नंद कुमार, अमरेश कुमार, समीक्षा यदुवंशी, मनीष कुमार, अमित कुमार, दिलखुश आनंद आदि द्वारा सर्वाधिक धावकों को घड़ी-जर्सी आदि देकर पुरस्कृत किया गया। उद्घाटनकर्ता डॉ.मधेपुरी ने प्रथम स्थान पाने वाले धावक एवं धाविका सहित खेल प्रशिक्षक संत कुमार को पुरस्कार देकर मान ही नहीं किया बल्कि सहृदय होकर उन्हें सर्वाधिक सम्मान भी दिया। अंत में खेल के प्रति संत कुमार के समर्पण को देखकर डॉ.मधेपुरी ने मधेपुरा के समस्त खेल-प्रेमियों से अनुरोध किया कि वे आज से ही उन्हें ‘खेल गुरु’ कह कर सम्मानित करते रहेंगे…… जिसे गगनभेदी करतल ध्वनि के साथ सहमति प्रदान की गई।

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अमित शाह का मिशन 22 करोड़

2014 में भाजपा जिस धूम और धमक के साथ केन्द्र की सत्ता में आई थी, इस बार वैसी बात नहीं दिखती। हालांकि इसमें कोई दो राय नहीं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अब भी आकर्षण के केन्द्र हैं लेकिन 2019 में उनका आभामंडल 2014 की तरह होगा, इसका दावा शायद उनके कट्टर समर्थक भी ना करें। महागठबंधन की बढ़ती सक्रियता से भी एनडीए को और सतर्क होने की जरूरत आन पड़ी है। ऐसे में भाजपा के चाणक्य अमित शाह कुछ ऐसा फार्मूला बनाना चाह रहे हैं जिससे 2019 में भाजपा की नैया निर्विघ्न पार हो जाए। उनके मिशन 22 करोड़ को ऐसा ही फार्मूला माना जा रहा है। आखिर क्या है ये मिशन 22 करोड़? चलिए, जानते हैं।
दरअसल 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले अमित शाह एक नये डेटा के साथ तैयार बैठे हैं। ये डेटा है 22 करोड़ का, जिससे भाजपा को वोटों की उम्मीद है। आपको बता दें कि ये 22 करोड़ का आंकड़ा देश के उन परिवारों का है जिनके बारे में भाजपा मानती है कि उन्हें नरेन्द्र मोदी सरकार की किसी ना किसी योजना का लाभ मिला है। 2019 में पार्टी इस आंकड़े को वोट में बदलना चाहती है। अमित शाह ने पार्टी को इन 22 करोड़ परिवारों तक पहुँचने का स्पष्ट निर्देश दिया है। यही कारण है कि भाजपा इन सभी 22 करोड़ परिवारों को खंगालने में लग गई है। टेलिग्राफ इंडिया डॉट कॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक हर राज्य में एक मॉनिटरिंग सेल बनाया जाएगा। इसके बाद पार्टी कैडर को इन परिवारों से लगातार संपर्क में रहने को कहा जाएगा।
गौरतलब है कि नरेन्द्र मोदी सरकार की योजना के लाभार्थियों तक पहुँचने के लिए भाजपा ने ‘हर बूथ, 20 यूथ’ का नारा तैयार किया है। इसके तहत हर पोलिंग स्टेशन के लिए 20 युवा तैयार किए जाएंगे जिनका काम केन्द्र की योजना के लाभार्थियों से लगातार संपर्क बनाए रखना और अंतत: उन्हें वोट में तब्दील करना होगा। भाजपा का मानना है कि अगर 22 करोड़ परिवारों के लक्ष्य का आधा भी हासिल कर लिया जाए तो भाजपा का काम हो जाएगा। 2019 के चुनाव में 2014 से भी बड़ी जीत के अमित शाह के दावे और आत्मविश्वास के पीछे इन्हीं 22 करोड़ परिवारों का गणित है और साथ में 11 करोड़ कार्यकर्ताओं के समर्थन भरोसा। आपको पता ही होगा कि भाजपा 11 करोड़ सदस्यों के साथ दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी होने का दावा करती है।
चलते-चलते बता दें कि पिछले चुनाव में भाजपा ने अपने दम पर 282 सीट जीते थे। उस चुनाव में उसे कुल 17 करोड़ वोट मिले थे जो कि कुल वोटों का 31 प्रतिशत है। इसमें प्रधानमंत्री मोदी की निजी लोकप्रियता और मिशन 22 करोड़ से बढ़े वोटों को जोड़ कर भाजपा पूरी तरह आश्वस्त दिख रही है।

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बी.पी.मंडल जन्म शताब्दी समारोह का आगाज़ 9 अगस्त से ही

सामाजिक न्याय के वैज्ञानिक बी.पी.मंडल का जन्म सौ साल पूर्व 25 अगस्त 1918 को कबीर की नगरी काशी में हुआ था। 100वें सालगिरह पर जन्मोत्सव का आगाज़ 9 अगस्त यानि क्रांति दिवस के दिन से ही करने का निर्णय लिया गया है। तैयारी समिति ने निर्णय लिया है कि भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी की अध्यक्षता में बी.पी.मंडल जन्म शताब्दी समारोह का शुभारंभ दिन के 1:45 बजेे अपराह्न से किया जाएगा।

बता दें कि कार्यक्रम का श्रीगणेश ‘मंडल गीत’ एवं सृजन दर्पण द्वारा “मंडल मसीहा की आवाज” नाटक की प्रस्तुति द्वारा किया जाएगा….। तैयारी समिति में मंडल विचार के प्रधान संपादक प्रो.श्यामल किशोर यादव, डॉ.अमोल राय, डॉ.आलोक कुमार, डॉ.भागवत प्रसाद यादव सहित संयोजनकर्ता पीजी भौतिकी के डॉ.विमल सागर आदि गणमान्यों की उपस्थिति देखी गई। अध्यक्षता कर रहे डॉ.मधेपुरी ने अपने संबोधन में कहा-

बी.पी.मंडल कुल 632 दिनों तक कश्मीर से कन्याकुमारी एवं राजस्थान से बंगाल की खाड़ी तक घड़ी की सूई की तरह चलते रहे….. और उन्होंने सभी धर्मों एवं सभी वर्णों के 3743 जातियों की पहचान की जो सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों में आते हैं, जिनकी संख्या उन दिनों भारत की कुल जनसंख्या का करीब 52% हुआ करता था। परंतु, सुप्रीम कोर्ट द्वारा आरक्षण सीमा 50% दिए जाने के सुझाव के तहत मंडल कमीशन ने इन समस्त 3743 जातियों (जिनमें ब्राह्मण, राजपूत, कायस्थ….. आदि भी हैं) के लिए 27% आरक्षण देने की अनुशंसा की थी।

डॉ मधेपुरी ने आगे कहा कि मंडल रिपोर्ट को लागू करने हेतु ढेर सारी कुर्बानियां दी गईं । प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह कैबिनेट ने अपनी कुर्सियाँ गंवा दी और शरद-लालू-नीतीश, रामविलास-रंजन-रमई…….. सहित बहुतों ने अपना सुख-चैन गँवा दिया, फिर भी मंडल रिपोर्ट हु-ब-हू लागू नहीं किया जा सका। शरद यादव का ‘मंडल-रथ’ भी देश के विभिन्न हिस्सों से गुजरता हुआ अंततः क्रीमी लेयर के कीचड़ में फंस ही गया।

आगे डाॅ.मधेपुरी ने विनम्रता पूर्वक समाजवादी चिंतक मधुलिमये को उद्धृत करते हुए कहा कि संविधान के प्रावधानों में लुक-छिपकर संशोधन करना बिल्कुल गलत है। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट को संविधान में संशोधन करने का काम अपने ऊपर नहीं लेना चाहिए।

अंत में मंडल की लौ को धीमी होने पर चिंता व्यक्त करने के बाद डॉ.मधेपुरी ने इस बाबत हाल ही में मधेपुरा आये पूर्व सांसद डॉ.रंजन प्रसाद यादव एवं उच्च शिक्षा के पूर्व निदेशक डॉ.विद्यासागर यादव की चर्चा करते हुए यही कहा-

मेरे सीने में नहीं, तेरे ही सीने में सही……

हो जहाँ भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए !!

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मधेपुरा के राजशेखर को मिला दिल्ली हिन्दी अकादमी का काव्य-सम्मान

मधेपुरा जिले के  भेलवा गाँव निवासी प्रसिद्धि प्राप्त युवा गीतकार राजशेखर को हिन्दी अकादमी का “काव्य-सम्मान” दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने दिया। इस सम्मान अर्पण समारोह की अध्यक्षता हिन्दी अकादमी दिल्ली के उपाध्यक्ष विष्णु खरे ने की। समारोह में दिल्ली हिन्दी अकादमी के सदस्यों के साथ-साथ साहित्य से जुड़े गणमान्यों की अच्छी खासी उपस्थिति देखी गई।

बता दें कि फिल्म ‘तनु वेड्स मनु’ से ही अनवरत लोकप्रियता बटोरते रहे इस धरती पुत्र राजशेखर को 2017-18 के लिए हिन्दी अकादमी दिल्ली द्वारा यह काव्य सम्मान दिया गया है। जानिए कि पूर्व में यह सम्मान उन विद्वान विभूतियों को दिए गए हैं जिन्होंने साहित्य, संस्कृति, समाज सेवा एवं पत्रकारिता आदि क्षेत्रों में अपना उल्लेखनीय योगदान दिया है।

यह भी बता दें कि मौके पर दिल्ली सरकार के समाज कल्याण मंत्री राजेन्द्र पाल गौतम इस समारोह में विशिष्ट अतिथि रहे। इस कार्यक्रम में युवा गीतकार राजशेखर को 1लाख रूपया, ताम्रपत्र, प्रशस्ति पत्र एवं शाॅल आदि देकर डिप्टी सीएम द्वारा सम्मानित किया गया।

अंत में दिल्ली सरकार की कला संस्कृति व भाषा विभाग की सचिव रिंकू दुग्गा की उपस्थिति में अकादमी के सचिव डॉ. जीतराम भट्ट ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम समाप्ति की घोषणा की।

 

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कमाल के कोहली

कप्तान विराट कोहली की इंग्लैंड में पहली टेस्ट सेंचुरी की बदौलत बर्मिंगम टेस्ट में भारत की उम्मीदें अभी भी जिन्दा हैं। गुरुवार को बर्मिंगम में बेन स्टोक्स की गेंद पर चौका मारते ही कोहली ने इंग्लिश धरती पर पहली बार टेस्ट शतक लगाया। यह उनके टेस्ट करियर का 22वां शतक है। कोहली ने इस पारी में 149 रन बनाए। उनकी जुझारू पारी की बदौलत पहली पारी में भारत ने 274 रन जुटाए। हालांकि इंग्लैंड के स्कोर 287 से फिर भी वह 13 रन पीछे रहा। उधर दूसरे दिन का खेल खत्म होने तक इंग्लैंड ने एलिस्टर कुक का विकेट खोकर 9 रन बनाए और इस तरह उसकी कुल बढ़त 22 रनों की हो गई है।

बहरहाल, कोहली ने 172 गेंद की पारी में 14 चौके लगाकर अपनी सेंचुरी पूरी की। यह पारी उनकी आक्रामक पारी के विपरीत रही। उन्हें इंग्लैंड की मजबूत गेंदबाजी का सामना करना पड़ा। इसके अलावा पारी में काफी लंबे समय तक उन्होंने निचले क्रम के बल्लेबाजों के साथ उपयोगी साझेदारी की। उन्होंने पहले नौवें विकेट के लिए इशांत शर्मा के साथ 35 रन जोड़े जिसमें इशांत का योगदान पांच रनों का रहा। कोहली को इसके बाद उमेश यादव का अच्छा साथ मिला। यादव ने हालांकि एक ही रन बनाया लेकिन उन्होंने दसवें विकेट के लिए कोहली के साथ 57 रन जोड़े। कोहली की इस पारी की क्या अहमियत है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उनके बाद दूसरा सबसे बड़ा स्कोर शिखर धवन का रहा जो केवल 26 रनों का है।

गौरतलब है कि कोहली की 149 रनों की पारी किसी भारतीय कप्तान द्वारा खेली गई दूसरी सबसे बड़ी पारी है। 1990 में मोहम्मद अजहरुद्दीन ने मैनचेस्टर में 179 रनों की पारी खेली थी। वहीं मंसूर अली खान पटौदी ने 1967 के इंग्लैंड दौरे पर लीड्स में 148 रनों की पारी खेली थी।

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गावस्कर, कपिल, सिद्धू और आमिर होंगे इमरान के मेहमान

कभी खेल जगत के शीर्ष पर रहे व्यक्ति का अपने देश के शासन के शीर्ष पर जाना बड़ी बात है। इमरान खान ने यह उपलब्धि हासिल कर दुनिया भर का ध्यान अपनी ओर खींचा है। उन्हें चाहने वाले पहले भी दुनिया के हर हिस्से में थे पर सियासत में सक्रिय होने से लेकर उसके शिखर को छूने तक उनके व्यक्तित्व का दायरा काफी बढ़ चुका है। अब बात 11 अगस्त को होने वाले उनके शपथ-ग्रहण समारोह को ही लीजिए, भारत में इस बात की चर्चा जोरों पर थी कि उनकी ओर से किन शख्सियतों को बुलावा आएगा। मानकर चला जा रहा था कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पहले व्यक्ति होंगे जिन्हें इमरान निमंत्रण देंगे, लेकिन यह बड़े स्तर का कूटनीतिक निर्णय है जिसे लेने में पाकिस्तान को कई बिन्दुओं पर सोचना पड़ रहा है। लेकिन इस बीच भारत की चार शख्सियतों को इमरान का न्योता मिल चुका है। चलिए जानते हैं कौन हैं ये चारों..?

इमरान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) की ओर से जिन चार शख्सियतों को न्योता भेजा गया है उनमें दो भारतीय क्रिकेट के पर्याय और इमरान के साथ दर्जनों यादगार मैच खेले सुनील गावस्कर और कपिल देव हैं। न्योता पाने वाली तीसरी शख्सियत भी क्रिकेट से जुड़ी है और अब राजनीति में भी दखल रखती है। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं नवजोत सिंह सिद्धू की। और चौथी शख्सियत जिन्हें इमरान ने आमंत्रित किया है, वो हैं भारतीय सिनेमा के महत्वपूर्ण नाम आमिर खान। इमरान की पार्टी पीटीआई के प्रवक्ता फवाद चौधरी ने ये जानकारी मीडिया से साझा की।

इससे पहले इस तरह की भी खबरें आई थीं कि इमरान की ताजपोशी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत अन्य विदेशी नेताओं को न्योता दिया जा सकता है। इसका खंडन करते हुए प्रवक्ता फवाद चौधरी ने मंगलवार को ट्वीट कर लिखा कि मीडिया में जो अटकलें लगाई जा रही हैं, वह सही नहीं है, उनकी पार्टी पाकिस्तान के विदेश कार्यालयों से परामर्श करने के बाद सार्क देशों के प्रमुखों को बुलाने के बारे में निर्णय लेगी।

गौरतलब है कि 25 जुलाई को होने वाले आम चुनावों के नतीजों में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ सबसे बड़े दल के तौर पर उभरी थी। हालांकि सरकार बनाने के लिए 272 सदस्यों वाली नेशनल असेंबली में 137 सदस्यों की जरूरत होगी। वहीं इमरान की पार्टी 116 सीटों पर ही जीत हासिल कर पाई है और वो बहुमत से 21 सीट दूर है। इस बाबत फवाद चौधरी का दावा है कि पार्टी के पास सरकार बनाने के लिए पर्याप्त सदस्यों का समर्थन प्राप्त है। बकौल चौधरी इमरान की पार्टी को नेशनल असेंबली में 168 सदस्यों का समर्थन हासिल है।

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