संस्कृति रामायण तो धर्म इस्लाम !

जहां एक ओर इंडिया में बापू की तस्वीर नोटों पर छपती रही है और उनका भजन ‘ईश्वर-अल्लाह तेरो नाम…… यानी गंगा-जमुनी संस्कृति सदा से चलती रही है, वहीं दूसरी ओर दुनिया की सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी वाले देश इंडोनेशिया में धर्म इस्लाम का और संस्कृति रामायण की भली-भांति फलती-फूलती रही है तथा वहां के सभी लोग रामायण के दीवाने दिखते रहे हैं |

तभी तो इंडोनेशिया के ‘नोट’ के एक तरफ (रामायण के राम ने जिस देवाधिदेव महादेव की पूजा-अर्चना बारंबार की है, उन्हीं के पुत्र) ‘गणेश जी’ की तस्वीर छपती है तो दूसरे हिस्से पर वहां के बच्चों से भरी कक्षा की तस्वीर-इसीलिए छपी होती है कि इंडोनेशिया की बहुसंख्यक मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा भगवान गणेश को कला, शास्त्र एवं बुद्धिजीवी का भगवान माना जाता है | और तो और, इंडोनेशिया की आजादी के जश्न के दिन प्रत्येक साल बड़ी तादाद में राजधानी जकार्ता की सड़कों पर हनुमान जी का वेश धारण कर वहां के युवावर्ग सरकारी परेड में शामिल होते रहे हैं |

Indonesian Currency bearing picture of Kalashastri Ganesh Bhagwan on one side and the class of kids running smoothly on the other side.
Indonesian Currency bearing picture of Kalashastri Lord Ganesha on one side and the class of kids running smoothly on the other side.

यहाँ यह भी जान लें कि इंडोनेशिया को रामायण के मंचन के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर की ख्याति प्राप्त है | काश ! धरती पर बढ़ रही धार्मिक असहिष्णुता के इस दौर में यदि इंडोनेशिया अपनी सांस्कृतिक विरासत “रामकथा” का मंचन-प्रदर्शन दुनिया के अन्य देशों में भी कर देता और भाईचारे का पाठ पढ़ा देता तो दुनिया अमन-शांति के लिए कभी नहीं तरसती और ना कभी दुर्गापूजा-मुहर्रम आदि के अवसर पर प्रत्येक थाने में शांतिदूतों व गण्यमान्यों की मीटिंग ही बुलानी पड़ती और ना ही कभी किसी सन्मार्गी कवि को यह लिखना पड़ता –

होली ईद मनाओ मिलकर, कभी रंग को भंग करो मत |
भारत की सुंदरतम छवि को, मधेपुरी बदरंग करो मत ||

यह भी जानिये कि जहां मुहर्रम इस्लाम धर्म में विश्वास करनेवाले लोगों का एक प्रमुख त्योहार है- जो सच के लिए जान देने की जिंदा मिसाल है- वहीं दुर्गापूजा न्याय पाने के लिए बुराइयों पर अच्छाइयों की जीत का प्रतीक पर्व माना जाता है | सत्य, न्याय, राष्ट्रीय एकता एवं भाईचारे के निमित्त ही सभी त्यौहार मनाये जाते हैं- जैसा कि कटिहार जिले के ‘डहेरिया’’ में मुस्लिम समुदाय के लोग दुर्गा माता के दरबार को सजाते हैं, पूजा-प्रबंधन में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते हैं | हिन्दू-मुस्लिम दोनों समुदाय अपनी अटूट एकता के लिए मिलकर सौहार्द के गीत गाते हैं | तभी तो मुस्लिम समुदाय से दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष बनाये जाते हैं कटिहार नगर निगम के उपमहापौर मो.मंजूर खां, तो सबकी पसंद से महासचिव बनते हैं- संजय महतो | दोनों मिलकर ईश्वर-अल्लाह एक है, सबका मालिक एक है- इस मंत्र को जन-जन तक पहुंचाने में लीन रहते हैं, तल्लीन रहते हैं |

यह भी बता दे कि समस्तीपुर जिले में एक मुस्लिम महिला खुदनी बीबी के नाम पर ब्रिटिश काल में ही खुदनेश्वर शिवमंदिर स्थापित हुआ था जिसका शिवलिंग खुदनी द्वारा गाय चराने के दरमियान खुदवाया गया था और खुदनी महान शिव-भक्त भी बन गई थी | उसकी मृत्यु के बाद शिवलिंग के एक गज दक्षिण तरफ उसे दफनाया भी गया जिसे सभी शिवभक्त आदर से पूजते हैं, सभी श्रद्धा से सिर झुकाते हैं | कालांतर में नरहन स्टेट द्वारा मंदिर निर्माण कराया गया और हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रतीक के रूप में विकसित पर्यटक केंद्र बनाने के लिए बिहार धार्मिक न्यास परिषद् के अध्यक्ष किशोर कुणाल ने 2008 में खुद्नेश्वर शिव मंदिर को बेहतर आर्थिक सहयोग भी किया था |

Shivlingam & Mazar of Khudni inside Khudneshwar Shiv Temple , 17Kms. South-West from Samastipur District Town.
Shivlingam & Mazar of Khudni inside Khudneshwar Shiv Temple , 17Kms. South-West from Samastipur District Town.

हाल ही में अमेरिका के मैसाचुएट्स प्रांत के फोस्टन शहर निवासी 17 वर्षीय मुस्लिम बालिका ‘हन्नान’ स्थानीय सहेली के साथ भागलपुर के मनोहरपुर गांव आकर दुर्गामाता के दर्शन करने जाती है | हन्नान “अंतरराष्ट्रीय संबंधों का अध्ययन” विषय पर शोध करती है और कई जगहों पर घूमने के बाद मीडिया से कहती है- यहां सभी समुदायों में बेहद अपनापन है | पारिवारिक मूल्यों को तवज्जो दी जाती है | भीड़ के बावजूद पूजा के दौरान अनुशासन है | महिलाओं को देवी का दर्जा दिया जाता है, जैसा कहीं भी देखने को नहीं मिलता | और ‘हन्नान’ अब अपनी सहेली एशना सिन्हा के साथ ‘काली पूजा व छठ’ तक रहने का मन बना लेती है |

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मोदी ने यूं ही नहीं चुनी दिल्ली की जगह लखनऊ की रामलीला

लखनऊ के ऐशबाग की रामलीला… तकरीबन 500 साल का इतिहास समेटे यह रामलीला मुगलकाल में अकबर के समय शुरू हुई और नवाबी दौर में खूब फली-फूली। इस रामलीला को इस बात का गौरव हासिल है कि इसकी शुरुआत स्वयं गोस्वामी तुलसीदास ने की थी। ऐशबाग की ये रामलीला इतिहास के अनगिनत पन्नों की गवाह रही है और इस साल इसमें एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। जी हाँ, इस बार दशहरे के दिन यहाँ स्वयं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मौजूद रहेंगे और रावण-वध देखेंगे।

यूं तो दशहरे के दिन हर साल देश के प्रधानमंत्री दिल्ली की रामलीला में शिरकत करते रहे हैं, लेकिन ये पहला मौका होगा कि कोई प्रधानमंत्री इस दिन दिल्ली में ना होकर लखनऊ में हों। अब देखने वाले इसमें प्रधानमंत्री मोदी की सियासत देखेंगे कि चुनावी साल में वे यहाँ की रामलीला में शिरकत कर रहे हैं और आलोचना करने वाले आलोचना भी करेंगे लेकिन इस सिक्के का दूसरा पहलू भी है और वो ये कि पिछले 70 सालों से लखनऊ की ऐशबाग रामलीला समिति देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को बिना भूले न्योता भेजती रही है और पहली बार किसी प्रधानमंत्री ने इस रामलीला का निमंत्रण स्वीकार किया है।

बहरहाल, ऐशबाग की रामलीला देश की सबसे पुरानी रामलीला मानी जाती है। करीब 500 साल पहले यहीं से रामलीला की शुरुआत हुई थी जब गोस्वामी तुलसीदास ने एक साथ चित्रकूट, वाराणसी और लखनऊ में इसकी नींव रखी। कहते हैं कि चौमासा में जब अयोध्या से साधु-संत निकलते थे तो चार महीनों के लिए इसी ऐशबाग में उनका डेरा डलता था और दशहरे के वक्त वे इस मैदान में रामकथा का मंचन करते थे। तुलसीदास की प्रेरणा से रामलीला का जो सिलसिला शुरू हुआ उसे असल पहचान दी अवध के नवाब असफउद्दौला ने। असफउद्दौला सच्चे अर्थों में यहाँ की गंगा-जमुनी तहजीब के जनक थे। उन्होंने ना केवल यहाँ ईदगाह और रामलीला के लिए एक साथ बराबर-बराबर साढ़े छह एकड़ जमीन दी बल्कि खुद भी रामलीला में बतौर पात्र शिरकत करते रहे।

तुलसीदास से लेकर 1857 की क्रांति तक यहाँ रामलीला का अनवरत मंचन होता रहा। क्रांति के दौरान यानि 1857 से 1859 तक ये रामलीला बंद रही। लेकिन 1860 में ऐशबाग रामलीला समिति का गठन हुआ और तब से लेकर आज तक रामलीला का मंचन अबाध रूप से होता चला आ रहा है। जानना दिलचस्प होगा कि आज़ादी से पूर्व इस रामलीला को अंग्रेज अफसरों से सहायता मिलती थी और अब उस काम को नगर निगम कर रहा है।

बदलते समय के साथ रामलीला का स्वरूप भी बदला है। पहले यहाँ रामलीला मैदान के बीचोंबीच बने तालाबनुमा मैदान में रामलीला होती थी और चारों ओर ऊँचाई पर बैठे लोग इसे देखते थे। लेकिन पिछले कुछ दशकों से रामलीला मंच पर होने लगी। मैदानी रामलीला की जगह अब यहाँ आधुनिक तकनीकों से लैस रामलीला होती है। बड़े एलईडी स्क्रीन, लेजर लाइट्स और नामचीन कलाकार रामलीला मंच की शोभा बढ़ाते हैं। चलते-चलते बस इतना ही कि ऐशबाग की यह रामलीला ना केवल ऐतिहासिकता में बल्कि भव्यता में भी अपनी कोई सानी नहीं रखती, यह कहने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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मधेपुरा जिला फिर राज्य में नंबर-वन पर

सितम्बर माह के 29 तारीख की ही तो बात है- मधेपुरा के डायनेमिक डीएम मो.सोहैल (आई.ए.एस.)  ने मधेपुरा को औद्योगिक हब बनाने के लिए फ्रांस की कंपनी आल्सटॉम और जर्मनी की कंपनी नार ब्रेस्म सहित दर्जनों ख्यातिप्राप्त कंपनियों के प्रतिनिधियों को बुलाकर यहां के भू-स्वामियों से रू-ब-रू कराया, जिसका उद्घाटन करते हुए कोसी के आयुक्त माननीय कुंवर जंग बहादुर सिंह ने कहा था कि ऐसे आयोजन सूबे के अन्य जिलों में भी आयोजित किया जाना चाहिए |

और सप्ताह गुजरते ही ऑन लाइन रिपोर्टिंग में मधेपुरा जिला फिर राज्य में नंबर-वन पर आ गया | राज्य सरकार के पोर्टल पर इंदिरा आवास एवं मनरेगा योजना में मोबाइल आधारित फील्ड रिपोर्टिंग में इस जिले के काम की सराहना की गयी |

यह भी बता दें कि बिहार के टॉप 5 जिलों में मधेपुरा के नंबर-वन पर रहने का कारण यहां के डी.एम.  मो.सोहैल की टीम का बेहतर मॉनिटरिंग सिस्टम है | डायनेमिक डी.एम.  मो.सोहैल एवं डीडीसी मिथिलेश कुमार खुद इन योजनाओं पर नजर रखते हैं | हालांकि इन योजनाद्वय का ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत होने के कारण डीडीसी की सतर्कता एवं निगरानी के साथ-साथ डी.एम. के व्हाट्सएप  से जुड़े रहने तथा औचक निरीक्षण से लेकर रिपोर्ट प्राप्ति के लिए नई-नई तकनीक का इस्तेमाल करते रहने का फल है- मधेपुरा का नंबर-वन पर जाना |

यह भी जान लें कि सरकार के ग्रामीण विकास विभाग के वेबसाइट के अनुसार राज्य में पांचवें स्थान प्राप्त ‘सारन’ जिले द्वारा 2093 रिपोर्ट दर्ज कराया गया वहीं चौथा स्थान प्राप्त ‘गया’ जिला द्वारा 2839  रिपोर्ट | और जहां तीसरे पायदान पर पहुंचे कटिहार जिले का रिपोर्ट 3216  दर्ज किया गया वही दूसरा स्थान प्राप्त करने वाला ‘भोजपुर’ जिला 3413 पर ही ठहर गया |

बता दें कि मधेपुरा जिला मात्र दो-चार  की बढत लेकर नंबर-वन पर नहीं पहुंचा है, बल्कि प्रथम स्थान पाने वाला ‘मधेपुरा’ जिला 3 महीने में 6560 रिपोर्ट वेबसाइट पर भेजकर ही तो नंबर-वन पर गया है | तभी तो पूरे राज्य में प्रथम स्थान पाने वाले मधेपुरा के जिला प्रशासन को परियोजना प्रबंधक, बिहार श्री अनुपम सिंह ने संदेश भेजकर बधाई दी है | मधेपुरा आज पुनः गौरवान्वित हुआ है |.

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इस साल किन्हें और क्यों मिले विज्ञान के नोबेल ?

इस साल के लिए विज्ञान के तीनों पुरस्कार – चिकित्सा शास्त्र, भौतिकी और रसायन शास्त्र – घोषित हो चुके हैं। इस बार के पुरस्कार जिन खोजों के लिए दिए गए हैं उनमें से कोई ऐसी नहीं जो फंडामेंडल साइंस को झकझोर दे, बल्कि ये खोजें चिकित्सा शास्त्र, भौतिकी और रसायन शास्त्र के विकासमान क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करती हैं और हमारे जीवन पर इनका असर अगले दस-बीस वर्षों में पड़ने वाला है।

एशिया के लिए गौरव की बात है कि चिकित्सा शास्त्र का नोबेल अकेले जापान के डॉ. योशिनोरी ओहसुमी को प्राप्त हुआ है। उनका कार्यक्षेत्र ऑटोफैगी है, यानि वह प्रक्रिया, जिसके जरिये शरीर लगातार खुद को नया करता रहता है और इस क्रम में अपने पुराने हिस्से को रिसाइकल करता रहता है। डॉ. ओहसुमी ने इसका समूचा जेनेटिक और मेटाबोलिक मेकेनिज्म खोज निकाला है और भविष्य में इसका उपयोग पार्किंसंस डिजीज और कुछ खास तरह के कैंसर के इलाज में किया जा सकता है।

रसायन शास्त्र का नोबेल भी एक मायने में चिकित्सा शास्त्र के लिए अत्यंत उपयोगी क्षेत्र के लिए दिया गया है। यह क्षेत्र है आण्विक मशीनों का, जिन्हें बनाने में काम आने वाले मेकेनिज्म का इस्तेमाल करके अभी पिछले साल विकसित किए गए कॉम्बरस्टैटिन ए-4 नाम के रसायन को कैंसर के इलाज के लिए आजमाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। फ्रांसीसी ज्यां पिएर सावेज, डच बर्नार्ड फेरिंग और अमेरिकी जेम्स फ्रेजर स्टोडार्ट ने अपनी तीस साल लंबी साधना से इतनी सूक्ष्म रासायनिक मशीनें तैयार करने का हुनर विकसित कर दिया है, जो सबसे ताकतवर इलेक्ट्रॉनिक माइक्रोस्कोपों से भी धुंध जैसी शक्ल में ही देखी जा सकती हैं।

भौतिकी का नोबेल प्राइज इस बार सुपर कंडक्टिविटी और सुपर लिक्विडिटी जैसी विचित्र परिघटनाओं के सिद्धांत पक्ष पर काम करने वाली ब्रिटेन के तीन वैज्ञानिकों डेविड थूलेस, डंकन हाल्डेन और माइकल कोस्टरलित्ज की टीम को मिला है। जिन लोगों का मानना है कि आम ज़िन्दगी में भौतिकी के असली चमत्कार अभी आने बाकी हैं, उनकी उम्मीदों को वैज्ञानिकों की इस अनोखी तिकड़ी के ‘सुपर’ फिजिक्स से खासा बल मिला है।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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हार्दिक पटेल संग क्या पका रहे केजरीवाल ?

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की निगाहें दिल्ली के बाद पंजाब पर तो थीं ही, अब उनकी ‘ताक-झाँक’ गुजरात में भी शुरू हो गई है। जी हाँ, इन दिनों उनकी पाटीदारों के नेता हार्दिक पटेल से खूब निभ रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इन धुर विरोधी नेताओं के बीच बढ़ती नजदीकियों का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि केजरीवाल हार्दिक के उन ट्वीट्स को रिट्वीट कर रहे हैं, जिनमें मोदी सरकार की आलोचना की गई है। बता दें कि गुजरात में अगले साल चुनाव होने वाले हैं और विरोधी अपने-अपने पक्ष में जमीन तैयार करने का कोई भी मौका नहीं छोड़ रहे।

राजनीति के गलियारों में पैठ रखने वाले सूत्र बता रहे हैं कि गुजरात में केजरीवाल-हार्दिक आने वाले चुनावों में हाथ मिला सकते हैं। गौरतलब है कि हार्दिक पटेल ने प्रधानमंत्री मोदी को लेकर ट्वीट किया था कि सर्जिकल स्ट्राइक का श्रेय सेना को जाता है, जबकि क्रेडिट मोदी ले रहे हैं। यह ट्वीट ‘आप’ और भाजपा के बीच सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर हो रही टीका-टिप्पणी के बाद सामने आया था। केजरीवाल ने इस ट्वीट को रिट्वीट किया। यही नहीं, केजरीवाल ने हार्दिक का वह ट्वीट भी रिट्वीट किया, जिसमें उन्होंने गुजरात में बेरोजगारी की समस्या पर मोदी सरकार को घेरने की कोशिश की थी।

जिन्होंने हार्दिक पटेल का ट्वीट ना देखा हो उन्हें उत्सुकता होगी कि आखिर उन दोनों ट्वीट में था क्या? सर्जिकल स्ट्राइक के बाद किए गए ट्वीट में हार्दिक के शब्द थे – “गोली खाई सेना ने, शहीद हुवा सेना का जवान, जवाब में आतंकी को मार गिराया सेना के जवानों ने, तो फिर उसका लाभ भाजपा और मोदी क्यों ले रहे हैं?” इसी तरह गुजरात में बेरोजगारी को लेकर हार्दिक ने अपने ट्वीट में कहा था – “गुजरात में सात वायब्रंट समिट के बाद भी 35 लाख लोग बेरोजगार हैं, सात प्रतिशत उद्योग और 31 फीसद फैक्ट्रियां बंद हैं।”

अरविन्द केजरीवाल खासे पढ़े-लिखे आदमी हैं। उनके पास ना तो डाटा की कमी होगी, ना सवाल उठाने में वो किसी से पीछे हैं। फिर गुजरात पर बात करने के लिए हार्दिक पटेल की ढाल क्यों? गौरतलब है कि मीडिया के माध्यम से हार्दिक के लिए ‘पारखी’ केजरीवाल का प्रेम तभी से सामने आता रहा है जब से पाटीदार आन्दोलन चर्चा में आया। प्रत्युत्तर में हार्दिक भी केजरीवाल में ‘सम्भावना’ जताते रहे हैं।

जो भी हो, इसमें कोई संशय नहीं कि केजरीवाल की महत्वाकांक्षा अब गुजरात के लिए हिलोड़ें मार रही हैं। लेकिन यहाँ एक सवाल यह उठता है कि क्या उनके पास गुजरात तक ‘पांव पसारने को चादर’ है? अगर नहीं तो समय से पहले पाली जा रही महत्वाकांक्षा की अकाल मृत्यु तय है। वैसे 16 अक्टूबर को केजरीवाल गुजरात यात्रा पर जाने वाले हैं, और आगे जो भी हो, वहाँ जाकर वो क्या और कितना गुल खिलाते हैं, इस पर निगाह तो रहेगी ही।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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चौंकाती है ये चुप्पी लालूजी की

आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव आजकल चुप-चुप से हैं। बिहार में सबसे बड़ी पार्टी उनकी, महागठबंधन के वो अभिभावक, दोनों बेटे सरकार में, बेटी को राज्यसभा भेज चुके… फिर भी सोशल मीडिया उनके तीखे, चुटीले और हंसोड़ बयानों के बिना सूना और नीरस है आजकल। लोग तरह-तरह की अटकलें लगा रहे हैं कि आखिर चुप क्यों हैं लालूजी? वैसे भी जिन्हें बिहार की राजनीति की थोड़ी भी समझ है वे जानते हैं कि लगभग तीन दशकों से बिहार की राजनीति पर छाए रहने वाले इस शख्स की ‘चुप्पी’ किस कदर मायने रखती है।

ऐसे में जाहिर है, कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना। लोगों की मानें तो लालू तभी से खामोश हैं जब से शहाबुद्दीन वापस जेल गए हैं। हाल ये है कि लालू ही नहीं, उनके दोनों बेटे तेजस्वी और तेजप्रताप से लेकर आरजेडी के तमाम बयानवीरों ने चुप्पी साधी हुई है। शहाबुद्दीन के वापस जेल जाने से लालू आहत थे ही कि दुष्कर्म के आरोपी विधायक राजवल्लभ यादव का मामला भी सामने आ गया। दोनों ही मामलों में बिहार सरकार का सुप्रीम कोर्ट जाना लालूजी को रास नहीं आया | लेकिन ‘गठबंधन धर्म’ की विवशता में वो ना कुछ कर सके, ना कुछ कह सके।

इधर लालू चुप हैं और उधर शहाबुद्दीन की पत्नी हिना शहाब ने एक चौंकाने वाला बयान दिया है। हिना ने कहा कि 2005 में जब सात दिन की सरकार बनी थी, तब शहाबुद्दीन ने आरजेडी को समर्थन दिया था। उसी का बदला निकालने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनके पति की जमानत रद्द करवा कर जेल भेज दिया। इसके लिए डीएम-एसपी को हथियार बनाया गया, जो सरकार की कानून-व्यवस्था को लेकर गलत रिपोर्ट भेजते थे। हिना ने तंज कसा कि नीतीश कुमार को लगता था कि शहाबुद्दीन के बाहर आने से बिहार में भय का माहौल पैदा हो गया है, तो उनके जेल जाने पर क्या अमन-शांति का माहौल है? हिना ने आगे कहा कि अगर कानून-व्यवस्था खराब रहती तो लाखों लोग सीवान नहीं पहुँचते। क्या यहाँ आने वाले सभी लोग भयभीत थे?

बहरहाल, हिना का आग उगलना समझ में आता है। बिहार सरकार और उसके मुखिया नीतीश कुमार को वो कोसेंगी ही, इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं। लेकिन लालू यहाँ फिर चुप हैं, ये जरूर चौंकाने वाली बात है। याद दिला दें कि शहाबुद्दीन ने जेल से निकलते ही लालू को अपना नेता बताया था और नीतीश को ‘परिस्थितियों का नेता’ कहा था और लालू तब भी चुप ही थे। अब देखना यह है कि लालूजी की ‘चुप्पी’ कब तक कायम रहती है, और टूटती है तो किस तरह टूटती है?

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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पाकिस्तान के ‘मौसेरे भाई’ ने पार की बेशर्मी की हद

चीन ने तिब्बत में अपनी एक पनबिजली परियोजना के लिए ब्रह्मपुत्र की एक सहायक नदी का पानी रोक दिया है। समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, चीन का कहना है कि वो इससे बिजली पैदा करेगा, पानी का इस्तेमाल सिंचाई के लिए करेगा और साथ ही इससे बाढ़ पर काबू पाने में मदद मिलेगी। लेकिन भारत और बांग्लादेश इससे चिन्तित हैं, क्योंकि इससे उनके इलाके में रहने वाले लाखों लोगों को पानी की आपूर्ति बाधित हो सकती है। गौरतलब है कि चीन से निकलकर ब्रह्मपुत्र नदी भारत के पूर्वोत्तर राज्यों अरुणाचल प्रदेश और असम से होती हुई बांग्लादेश तक जाती है।

चीन ने यह काम ऐसे वक्त में किया है जब उड़ी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान से सिंधु जल समझौते के तहत होने वाली बैठक रद्द कर दी और इस समझौते की समीक्षा करने का भी फैसला किया। भारत ने यह फैसला पाक पर दबाव बनाने के लिए किया था। ऐसे में चीन का ताजा रुख इस आशंका को बढ़ावा देता है कि कहीं वह पाकिस्तान के साथ मिलकर भारत पर दबाव तो नहीं बना रहा। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के विदेशी मामलों के सलाहकार सरताज अजीज ने ब्रह्मपुत्र को लेकर चीन की चाल की धमकी पहले ही दे दी थी।

बहरहाल, शिन्हुआ के मुताबिक, चीन ने इस पनबिजली परियोजना पर वर्ष 2014 में काम शुरू किया था, जिसे वर्ष 2019 तक पूरा करना है। इस परियोजना पर चीन ने 750 मिलियन डॉलर का निवेश किया है और यह उसकी सबसे महंगी परियोजना बताई जा रही है। बता दें कि यह परियोजना तिब्बत के जाइगस में है जो सिक्किम के नजदीक है। जाइगस से ही ब्रह्मपुत्र नदी अरुणाचल प्रदेश में दाखिल होती है।

दरअसल अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति में भारत की सक्रियता और खासकर अमेरिका से उसकी बढ़ती नजदीकी चीन को रास नहीं आ रही है। उसकी बौखलाहट का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पूरी दुनिया जिस मसूद अजहर को आतंकी मानती है, सारी नैतिकता और मर्यादा को ताक पर रख चीन उसे बचाने में जुटा हुआ है। संयुक्त राष्ट्र में अगर चीन ने वीटो नहीं लगाया होता तो भारत की मांग पर मसूद को संयुक्त राष्ट्र का आतंकी घोषित कर दिया जाता।

कहने की जरूरत नहीं कि चाहे वीटो कर मसूद को बचाना हो या ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी का पानी रोकना, चीन का एकमात्र मकसद भारत से अपनी कटुता साधना है। पाकिस्तान के साथ उसकी ‘जुगलबंदी’ जगजाहिर है, और अब उस ‘जुगलबंदी’ से बेहयाई के सुर निकल रहे हैं। ये सुर जितने भद्दे हैं, उतने ही खतरनाक भी। भारत को चाहिए कि समय रहते इन ‘मौसेरे भाईयों’ का सही हल निकाल ले।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप   

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भारत ने पाकिस्तान से छीना टेस्ट का ताज

टीम इंडिया ने घरेलू मैदान पर खेले गए अपने 250वें टेस्ट को शानदार जश्न में तब्दील कर दिया। कोलकाता के प्रसिद्ध ईडन गार्डंस पर खेले गए दूसरे टेस्ट के चौथे दिन भारत ने न्यूजीलैंड को 178 रन से हराकर ना केवल तीन मैचों की सीरीज पर कब्जा जमाया, बल्कि अपने चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान से टेस्ट में नंबर वन का ताज भी छीन लिया।

विराट कोहली की युवा टीम ने न्यूजीलैंड को 376 रन का विशाल लक्ष्य दिया था जिसका दबाव कीवी झेल नहीं पाए और पूरी टीम 197 रन पर ढेर हो गई। भारतीय गेंदबाजों ने कसी हुई गेंदबाजी की और कीवियों को सांस लेने का मौका नहीं दिया। दूसरी पारी में अश्विन, जडेजा और शमी ने तीन-तीन विकेट आपस में बांटे, जबकि पहली पारी में पाँच विकेट लेने वाले भुवनेश्वर को इस पारी में एक विकेट मिला। पहली पारी में अर्द्धशतक लगाने वाले रिद्धिमान साहा ने दूसरी पारी में भी महत्वपूर्ण 58 रन बनाए। उन्होंने पूरे मैच में 112 रन बनाए और खास बात यह कि दोनों पारियों में अविजित रहे। उनके इस शानदार प्रदर्शन पर उन्हें ‘मैन ऑफ द मैच’ चुना गया।

बता दें कि कप्तान कोहली के धुरंधरों ने डेढ़ महीने बाद पाकिस्तान को शीर्ष रैंकिंग से हटाया है। अब भारत की अगली चुनौती होगी कि वह पाकिस्तान को पहले पायदान की पहुँच से दूर रखे। यह तभी संभव है जब वह इंदौर में सीरीज का तीसरा और आखिरी टेस्ट जीते या ड्रॉ कराए। वैसे भारतीय टीम अभी जिस तरह के फॉर्म में है, उसे देखते हुए नहीं लगता कि निकट भविष्य में पाकिस्तान अपना रुतबा दोबारा हासिल कर पाएगा। गौरतलब है कि टीम इंडिया लगातार 13 मैचों से अजेय है। इसमें 11 जीत और 2 ड्रॉ शामिल हैं। यह भी याद दिला दें कि कोहली के नेतृत्व में यह लगातार चौथी टेस्ट जीत है।

चलते-चलते बता दें कि भारतीय टीम इससे पहले भी शीर्ष पर रह चुकी है। नवंबर 2009 से अगस्त 2011 तक टीम इंडिया आईसीसी की टेस्ट रैंकिंग में शिखर पर रही थी। फिर जनवरी 2016 से फरवरी 2016 के बीच भी वह पहले स्थान पर काबिज हुई थी।

 ‘मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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मधेपुरा में 2 अक्टूबर को प्रशासन, पब्लिक और बच्चे सभी उत्साहित !

अहले सुबह से देर शाम तक मधेपुरा के विभिन्न संस्थानों में सत्य-अहिंसा के पुजारी राष्ट्रपिता बापू और जय जवान, जय किसान के उद्घोषक लाल बहादुर शास्त्री की प्रतिमाओं व तस्वीरों पर माल्यार्पण-पुष्पांजलि करने के साथ-साथ आजादी के लिए उनकी कुर्बानियों को याद किया जाता रहा |

एक ओर जहां समाहरणालय परिसर में मधेपुरा के डायनेमिक डीएम मो.सोहैल द्वारा हाल ही में स्थापित राष्ट्रपिता बापू की भव्य आदमकद प्रतिमा पर एस.पी. विकास कुमार, डीडीसी मिथिलेश कुमार, डीपीआरओ कयूम अंसारी, नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी मनोज कुमार पवन आदि की उपस्थिति में माल्यार्पण करते हुए यह कहा गया कि पूज्य बापू ने तो समस्त देशवासियों को सामाजिक समरसता का पाठ पढ़ाया और आगे जाकर शास्त्री जी ने देश को ‘जय जवान जय किसान’ का संदेश दिया |

Dr.Madhepuri inaugurating the Yog & Diabetes Programe of Patanjali arranged to pay Shrandhanjali to Mahatma Gandhi & Shastrijee in presence of Scout & Guide Aayukta Jaikrishna Yadav, Dr.Nandkishore and Prof.Reeta Kumari etc. at Keshav Kanya Hall, Madhepura.
Dr.Madhepuri inaugurating the Yog & Diabetes Programe of Patanjali arranged to pay Shrandhanjali to Mahatma Gandhi & Shastrijee in presence of Scout & Guide Aayukta Jaikrishna Yadav, Dr.Nandkishore and Prof.Reeta Kumari etc. at Keshav Kanya Hall, Madhepura.

वहीं दूसरी ओर केशव कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय में प्रो.नन्द किशोर व प्रो.रीता कुमारी द्वारा आयोजित पतंजलि के कार्यक्रमों में सम्मिलित राष्ट्रपिता एवं राष्ट्रनेता द्वय के श्रद्धांजलि समारोह का उद्घाटन करते हुए साहित्यकार व समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने स्काउट एंड गाइड के आयुक्त जय कृष्ण यादव सहित शिक्षकों एवं छात्रों की उपस्थिति में यही कहा-

गोखले तिलक गांधी सुभाष, नेहरु शास्त्री जयप्रकाश |

सभी दीवाने आजादी के, कर दिया एक क्षिति महाकाश ||

आओ सब मिलकर करें बंधु, आजादी का शत अभिनंदन |

                         इसके ललाट पर करें नित्य, अपने अन्त श्रम का चंदन ||                        

और तो और सर्वाधिक पुराने अंगीभूत टी.पी.कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ.एच.एल.एस जौहरी से लेकर सर्वाधिक समुन्नत मधेपुरा कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ.अशोक कुमार सहित सभी सरकारी एवं प्राइवेट स्कूल्स के प्रधान अपने-अपने शिक्षकों-छात्रों के बीच राष्ट्रपिता को पुष्पांजलि-श्रद्धांजलि देते रहे- हर तरफ ईश्वर-अल्लाह तेरे नाम…….. और वैष्णव जन तो तेने कहिए……..  का धुन बजता रहा |

उत्सवी माहौल के बीच कई संस्थानों द्वारा गांधी जयंती के अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया | जिला परिषद के डाक बंगला परिसर में बापू एवं शास्त्री जी की प्रतिमा व तस्वीर पर पुष्पांजलि किया- डीएम मो.सोहैल, डीडीसी मिथिलेश कुमार, डॉ.मधेपुरी, शौकत अली एवं जिला परिषद अध्यक्ष मंजू देवी, श्वेत कमल व अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने |

Nawachar Rang Mandal Sanrakshak Dr.Bhupendra Madhepuri paying tribute to Pujaya Bapu and Shastrijee in presence of Zila Parishad Adhyaksha Smt.Manju Devi, Shwet Kamal, Dr.J. Paswan, Spl.Guest Nikhil Mandal, Chief Guest Rajshekhar, Dr.Arun Kumar, Shambhusharan Bhartiya & Shwadesh Kumar at B.P.Mandal Nagar Bhawan Shahid Chulahay Marg , Madhepura.
Nawachar Rang Mandal Sanrakshak Dr.Bhupendra Madhepuri paying tribute to Pujaya Bapu and Shastrijee in presence of Zila Parishad Adhyaksha Smt.Manju Devi, Shwet Kamal, Dr.J. Paswan, Spl.Guest Nikhil Mandal, Chief Guest Rajshekhar, Dr.Arun Kumar, Shambhusharan Bhartiya & Shwadesh Kumar at B.P.Mandal Nagar Bhawan Shahid Chulahay Marg , Madhepura.

शाम में बी.पी.मंडल नगर भवन में नवाचार रंग मंडल के बैनर तले मो.शहंशाह एवं सुनीत साना आदि ने गांधी जयंती के अवसर पर हॉली क्रास, तुलसी पब्लिक, यू.के.इंटरनेशनल, मधेपुरा पब्लिक स्कूल, माया विद्या निकेतन व अन्य स्कूली बच्चों को स्थल चित्रकारी, निबंध प्रतियोगिता एवं जी.के. में प्रथम-द्वितीय- व तृतीय स्थान प्राप्त करने के उपलक्ष्य में रंगमंडल के संरक्षक डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी, जिला परिषद अध्यक्षा मंजू देवी, योजना समिति के सदस्य श्वेत कमल उर्फ़ बौआ जी, मुख्य अतिथि राजशेखर, विशिष्ट अतिथि निखिल मंडल, वेदव्यास कॉलेज के संस्थापक डॉ.रामचन्द्र मंडल, वार्ड पार्षद ध्यानी यादव, शंभू शरण भारतीय, स्वदेश कुमार, डॉ.अरुण कुमार, डॉ.जवाहर पासवान, चंद्रशेखर आजाद, राकेश सिंह, वंदना कुमारी आदि अन्य गणमान्यों द्वारा दर्जनों पुरस्कार दिये गये |

सर्वप्रथम रंगमंडल के संरक्षक डॉ.मधेपुरी ने ग्रामीण परिवेश से मुंबई में अपनी पहचान बनाने वाले इस कार्यक्रम के मुख्यअतिथि, तनु वेड्स मनु फिल्म के गीतकार, राजशेखर से कहा कि मधेपुरा में प्रतिभा की कमी नहीं है, केवल उसे निखारने की जरूरत है | अब मधेपुरा की नजर ‘राजशेखर’ पर है……| जिला अध्यक्षा मंजू देवी, श्वेत कमल, निखिल आदि ने राजशेखर को ऊंचाई प्राप्त करने और मधेपुरा का परचम सारे देश और देश से बाहर फहराते रहने की कामना की और सबों को स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत की शुभकामनाएं दी |

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और बापू ने घी का दिया जलाने से ‘बा’ को मना कर दिया

आईये, गांधी जयंती पर जानें उस महामानव से जुड़ी चार बातें और हृदय पर हाथ रखकर स्वयं से पूछें कि क्या हम गांधीजी को सचमुच जानते हैं? अगर जानते हैं तो उनके बताए पर कितना अमल करते हैं? और सबसे बड़ी बात कि क्या अपनी अगली पीढ़ी के जीवन में हम गांधी का सहस्त्रांश भी भर रहे हैं?

घी के दिये पर आपत्ति

सेवाग्राम में बापू के जन्मदिन के मौके पर ‘बा’ ने एक बार घी का दिया जलाया। बापू एकटक घी के दीपक को देखते रहे और थोड़ी देर बाद ‘बा’ से कहा – “आज अगर घी का दिया नहीं जलता तो कोई फर्क नहीं पड़ता। हमारे आस-पास कई लोगों के पास खाने को सूखा टुकड़ा तक नहीं है। ऐसे में यह तो पाप है।” बापू की जयंती मनाने से पहले हमें देखना चाहिए कि हमने अपने आस-पास के निर्धन लोगों की तकलीफों से कितनी दूरी बना रखी है। अगर ऐसा नहीं होता तो हमारे लाखों बच्चे हर साल कुपोषण से नहीं मर रहे होते।

शिक्षा के साथ दो हुनर

गांधीजी ने कहा था कि शिक्षा-व्यवस्था ऐसी हो जिसमें विद्यार्थी कम-से-कम दो हुनर भी सीखें। अपने भोजन और रहने का खर्च खुद ही निकालें। इससे हमारे जैसे गरीब देश में सभी बच्चों के लिए शिक्षा का इंतजाम करना आसान होगा। उन्होंने जोर देकर कहा था कि अंग्रेजों की शिक्षा बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए नहीं है। लेकिन इसके उलट हमारी शिक्षा-व्यवस्था लगातार महंगी होती गई। अपने बच्चों को ‘एयरकंडीशन्ड’ स्कूलों में भेजना हमारा चरम लक्ष्य बन गया, ना कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाना।

फोटो खिंचवाने की तीन शर्तें

महात्मा गांधी के पोते कनु गांधी एक फोटोग्राफर थे। शुरुआत में गांधीजी ने पैसे की कमी का हवाला देते हुए कैमरा खरीदकर देने से कनु को मना कर दिया था। लेकिन बाद में कनु के जिद करने पर उन्होंने घनश्यामदास बिड़ला से इसके लिए मदद मांगी। उन्होंने कनु को 100 रुपये दिए जिससे कनु ने रॉलीफ्लेक्स कैमरा खरीदा। इसके बाद उन्होंने खुद की फोटोग्राफी के लिए कनु के सामने तीन शर्तें रखीं। पहला यह कि वह कभी कैमरे के फ्लैश का इस्तेमाल नहीं करेंगे, दूसरा कि वह कभी उन्हें पोज देने को नहीं कहेंगे और तीसरा कि कभी भी वह अपने शौक के लिए आश्रम से पैसे नहीं मांगेंगे। तीसरी शर्त तो आप समझ ही गए होंगे। पहली और दूसरी शर्तें इसलिए कि गांधीजी को जीवन में पल भर की ‘बनावट’ भी बर्दाश्त नहीं थी। क्या प्रदर्शन पर पैसे उड़ाने और बनावट में यकीन रखने वाली आज की पीढ़ी इससे सीख लेगी?

महात्मा की पदवी से कष्ट

गांधीजी ने कहा था कि “मुझे नहीं लगता कि मैं महात्मा हूँ। लेकिन मैं यह अवश्य जानता हूँ कि मैं ईश्वर के सर्वाधिक दीन-विनीत प्राणियों में से एक हूँ। इस ‘महात्मा’ की पदवी ने मुझे बड़ा कष्ट पहुँचाया है। मुझे एक क्षण भी ऐसा याद नहीं जब इसने मुझे गुदगुदाया हो।” उनका मानना था कि यह पदवी व्यर्थ है क्योंकि यह उनके बाह्य कार्यकलाप, उनकी राजनीति के कारण है, जो उनका लघुतम पक्ष है और इसलिए क्षणजीवी भी है। आगे उन्होंने कहा – “मेरा वास्तविक पक्ष है सत्य और अहिंसा के प्रति मेरा आग्रह, और इसी का महत्व स्थायी है। यह पक्ष चाहे जितना छोटा हो पर इसकी उपेक्षा नहीं करनी है। यही मेरा सर्वस्व है।” क्या छोटी-सी उपलब्धि और उपाधि पर इतराने से पहले हमें बापू की ये बात याद नहीं करनी चाहिए?

तो ऐसे थे बापू। आईये, उन्हें नमन करें। जितनी सामर्थ्य हो हमारी, उतना उन्हें अपने जीवन में उतारें और कुछ ऐसा करें कि हमारी आने वाली नस्लें उनका कुछ अंश भी अपने जीवन में उतार पाएं।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

 

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