संविधान दिवस पर लिया गया संविधान पालन का संकल्प

डॉ.भीमराव अंबेडकर के निर्देशन में 2 वर्ष 11 महीने 18 दिनों में हिन्दी तथा अंग्रेजी में हाथ से लिखकर तैयार किया गया भारतीय संविधान समस्त भारतवासियों को बेहतर जीवन जीने के लिए समृद्ध संवैधानिक संदेश 26 नवंबर, 1949 से निरन्तर देता चला आ रहा है |

इस अवसर पर जहां सिविल कोर्ट के न्यायिक पदाधिकारियों एवं अधिवक्ताओं द्वारा संविधान दिवस पर “संविधान की रक्षा” का संकल्प लिया गया, वहीं प्रखंड से लेकर जिले के प्रशासनिक पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा संयुक्त रुप से भारत के संविधान की उद्देशिका का एक स्वर से पाठ कर संकल्प लिया गया |

यह भी बता दें कि जहां मधेपुरा जिले के डायनेमिक डी.एम. मो.सोहैल (भा.प्र.से.) ने यही कहा कि भारतीय संविधान संपूर्ण संसार में सराहनीय दृष्टि से देखा जाता है, अस्तु हम भारतीय नागरिकों का कर्तव्य बनता है कि हम सभी संविधान सम्मत कार्य करने के लिए संकल्पित हों- वहीँ समस्त प्रशासनिक अधिकारियों-कर्मचारियों को यह कहा “कि संविधान सर्वोपरि है, इस पर कोई प्रश्न नहीं उठाया जा सकता” डी.एम.  ने संकल्प दिलाया –

“हम भारत के लोग, भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए…….. राष्ट्र की एकता……. अखंडता…….. बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्प होकर…….. आज तारीख 26 नवंबर………… को एतद द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं |”

इस संविधान संकल्प के दरमियान डीडीसी मिथिलेश कुमार, सदर एसडीएम संजय कुमार निराला सहित अन्य पदाधिकारी व कर्मचारीगण उपस्थित थे | इस अवसर पर एस.एन.पी.एम. स्कूल के प्रधान डॉ.निरंजन कुमार, दुर्गा उच्च वि.घैलाढ के प्रधान सुभाष मोहन मिश्र आदि विभिन्न विद्यालयों के प्रधान के नेतृत्व में दिनभर विचार गोष्ठी, निबंध प्रतियोगिता, क्विज़ कॉन्टेस्ट एवं भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता रहा | प्रत्येक कार्यक्रम से पूर्व छात्र-छात्राओं को संविधान के प्रस्तावना का पाठ कराया गया | संविधान दिवस के दिन उत्सवी माहौल रहा तथा छात्र-छात्राओं के बीच नई ऊर्जा का संचार भी होता रहा |

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सामाजिक क्रान्ति का श्रीगणेश होगा मद्यनिषेध से…..!

जहां एक ओर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ‘नोटबंदी’ एक राष्ट्रीय क्रान्ति का रुप धारण कर चुका है वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का “शराबबंदी” सामाजिक क्रान्ति के स्वरुप में ढल चुका है |

यह भी बता दें कि मद्यनिषेध दिवस पर दिनभर विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों के आयोजन होते रहे | प्रात: काल एस.एन.पी.एम. स्कूल के मैदान में “मद्यनिषेध मार्च” को प्रो.श्यामल किशोर यादव व डीपीओ सुरेंद्र प्रसाद ने हरी झंडी दिखाते हुए यही कहा कि नशाबंदी के आशातीत परिणाम सामने आने के बावजूद कुछ असामाजिक तत्व अभी भी इसके विरुद्ध सक्रिय हैं | नशाबंदी के बाबत वातावरण निर्माण में समन्वयक जानेश्वर शर्मा, स्काउट एण्ड गाइड के आयुक्त जय कृष्ण यादव, प्राचार्य डॉ.निरंजन कुमार, भीम शंकर सिंह, रेखा देवी, मुरलीधर यादव आदि को सक्रिय देखे गये |

वहीं संध्याकाल में बी.एन. मंडल स्टेडियम में लगे राष्ट्रीय व्यापार मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रम हेतु बनाये गये मंच से शिक्षा व  मद्यनिषेद विभाग द्वारा आयोजित चित्रकला में सर्वश्रेष्ठ तीन प्रतिभागियों- संतोष कुमार, अंकिता काश्यप एवं ब्यूटी कुमारी तथा निबन्ध प्रतियोगिता में संदीप कुमार, रीतु रानी एवं कीर्ति लता आर्य को समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी, प्रो.श्यामल किशोर यादव, डॉ.शांति यादव एवं प्राचार्य डॉ.एच.एल.एस.जौहरी की मौजूदगी में जिले के डायनेमिक डीएम मो.सोहैल (भा.प्र.से.) द्वारा सम्मानित किया गया |

इस अवसर पर डी.एम. मो.सोहैल ने कहा कि प्रतिभाशाली छात्रों को हर जगह मिलता है सम्मान और साथ ही यह भी कि बिना पढ़ाई के बेहतर जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती | अंत में उन्होंने आह्वान किया कि 21 जनवरी, 2017 को सभी लोग अपने-अपने घर से निकलकर नशाबंदी के पक्ष में ‘मानव श्रृंखला’ बनाएंगे |

मौके पर उत्पाद विभाग के इंस्पेक्टर राजकिशोर सिंह, वार्ड पार्षद ध्यानी यादव, मद्यनिषेध को समर्पित गंगा दास, स्काउट गाइड के जयकृष्ण यादव, प्रभारी डी.ई.ओ. शिव शंकर राय आदि मौजूद थे |

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नीतीश के रुख से सकते में लालू-सोनिया

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा की बढ़ती नजदीकियों और उनके बीच ‘गुप्त’ बातचीत की अटकलों से महागठबंधन के सहयोगियों में बेचैनी है। इस बीच आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से फोन पर बातचीत की है। कांग्रेस से जुड़े सूत्र बताते हैं कि रविवार को हुई इस बातचीत के दौरान बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष और शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी भी मौजूद थे। इस बाबत पूछे जाने पर कोई भी टिप्पणी करने से आरजेडी के लोग परहेज कर रहे हैं।

गौरतलब है कि नोटबंदी के मुद्दे पर नीतीश कुमार जिस तरह खुलकर मोदी सरकार का समर्थन कर रहे हैं उसके कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। राजनीति के जानकारों का कहना है कि नीतीश का ‘नैतिक’ समर्थन अब ‘व्यावहारिक’ समर्थन में तब्दील हो गया है। तभी तो वो नोटबंदी के मुद्दे पर सोमवार को आयोजित विपक्षी दलों के ‘भारत बंद’ और ‘आक्रोश रैली’ से भी अपनी पार्टी को दूर रख रहे है, और उधर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान उनके ‘निर्णय’ और ‘सहयोग’ की खुली सराहना और स्वागत कर रहे हैं।

नीतीश के इस ‘यू-टर्न’ से आरजेडी और कांग्रेस का सकते में आना स्वाभाविक है। नोटबंदी का खुलकर विरोध कर रहीं दोनों पार्टियां यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि आखिर क्या वजह है जिससे नीतीश एक बार फिर से भाजपा के करीब जाने को मजबूर हैं। यह सही है कि राजनीति में कोई स्थाई दोस्त या दुश्मन नहीं होता लेकिन किसी के करीब जाने या किसी से दूर होने की कोई छोटी या बड़ी, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष वजह तो होनी ही चाहिए। नहीं तो कल तक जो नीतीश मिशन-2019 को ध्यान में रख एक-एक कदम बढ़ाने और मोदी के बरक्स खुद को खड़ा करने में लगे थे, आज भाजपा के लिए उनका सोया (या मोदी के उदय के बाद मर चुका) प्यार यूं अचानक जग न गया होता!

यह सही है कि बिहार में लालू के दोनों लाल के साथ सत्ता संभालने में नीतीश बहुत ‘सहज’ नहीं महसूस करते लेकिन नैतिकता का तकाजा यह है कि वो मैनडेट का सम्मान करें और ईमानदारी से गठबंधन धर्म निभाएं। अन्यथा, आने वाले समय में जनता की सहानुभूति लालू (कांग्रेस के साथ) बटोर ले जाएं तो कोई आश्चर्य की बात नहीं।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप 

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मनोज वाजपेयी ने जीता एशिया पेसिफिक स्क्रीन अवार्ड

अपने संजीदा अभिनय से बॉलीवुड में बिहार को गौरवान्वित करने वाले अभिनेता मनोज वाजपेयी ने ‘एशिया पेसिफिक स्क्रीन अवार्ड्स’ (आप्सा) में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार हासिल किया। नवाजुद्दीन सिद्दीकी को इसी कैटेगरी में स्पेशल अवार्ड से सम्मानित किया गया। फिल्म उद्योग में सर्वोच्च सम्मान के तौर पर पहचाने जाने वाले इस पुरस्कार की घोषणा शुक्रवार रात ब्रिस्बेन में हुए एक समारोह के दौरान की गई। इस समारोह को ऑस्ट्रेलियाई अभिनेता डेविड वेल्हम ने होस्ट किया।

बता दें कि इस साल आप्सा का 10वां सीजन था। आप्सा सिनेमा के लिए सजग विश्व के 70 देशों का साझा मंच है और यह पुरस्कार इन देशों में सिनेमा की उत्कृष्टता और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए प्रदान किया जाता है। इसके आयोजन में इन सभी देशों की झलक एक साथ देखने को मिलती है। कहने की जरूरत नहीं कि इतने बड़े और विशिष्ट मंच पर ‘सर्वश्रेष्ठ’ कहलाना कितनी बड़ी उपलब्धि है।

मनोज वाजपेयी को यह पुरस्कार हंसल मेहता की फिल्म ‘अलीगढ़’ में निभाई उनकी प्रोफेसर सिरास की अविस्मरणीय भूमिका के लिए मिला। आप्सा में यह उनका दूसरा नॉमिनेशन था। इससे पहले 2012 में अनुराग कश्यप की फिल्म ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ के लिए उन्हें नॉमिनेशन मिला था। नवाजुद्दीन को इस साल अनुराग कश्यप की ही फिल्म ‘रमन राघव 2.0’ के लिए स्पेशल अवार्ड मिला।

फिल्म अलीगढ़ में मनोज ने प्रोफेसर सिरास की भूमिका को इतना जीवंत कर दिया है कि दर्शक न केवल उनके किरदार से बंध जाता है बल्कि उसे जीने लग जाता है। आप्सा इंटरनेशनल के जूरी सदस्य जेन चैपमैन ने उनकी भूमिका के लिए कहा कि “यह बेहतरीन और दमदार अभिनय है। इसके मानवीय पक्ष और गहराई ने मुझे प्रभावित किया।” जूरी के एक अन्य सदस्य श्याम बेनेगल के शब्दों में “उन्होंने असाधारण और बेहतरीन अभिनय किया। हर छोटी बात को विस्तार और गहराई से दर्शाया गया है, जो अभिनय में नज़र आता है।”

गौरतलब है कि अप्रैल में मनोज को अलीगढ़ के लिए ही दादा साहब फाल्के पुरस्कार (क्रिटिक्स च्वाइस) के लिए चुना गया। यहाँ भी उन्होंने सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार अपने नाम किया। बिहार के इस लाल को ‘मधेपुरा अबतक’ की बधाई।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप  

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अमेरिका को थर्राने वाले फिदेल कास्त्रो नहीं रहे

क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति और वहाँ की विश्वप्रसिद्ध क्रांति के जनक फिदेल कास्त्रो नहीं रहे। अमेरिका के पड़ोस में रहकर 50 साल तक उसकी आँख की किरकिरी बने रहे इस कम्युनिस्ट सिपाही ने शुक्रवार को हमेशा के लिए आँखें मूंद लीं। जैतून के रंग की वर्दी, बेतरतीब दाढ़ी और सिगार पीने के अपने अंदाज के लिए मशहूर कास्त्रो न केवल दुनिया के सबसे बड़े कम्युनिस्ट नेताओं में शुमार किए जाते थे बल्कि वे दुनिया के तीसरे ऐसे नेता थे जिन्होंने किसी देश पर लंबे समय तक राज किया हो। उन्होंने साल 1959 में क्यूबा की सत्ता संभाली और साल 2008 में खराब स्वास्थ्य के कारण सत्ता अपने भाई राउल कास्त्रो को सौंपी। हालांकि तब भी पर्दे के पीछे असली ताकत वही बने रहे।

क्यूबा के समयानुसार शुक्रवार रात साढ़े दस बजे मौजूदा राष्ट्रपति राउल कास्त्रो ने सरकारी टेलीविजन से घोषणा की कि क्यूबा की क्रांति के सर्वोच्च कमांडर फिदेल अब नहीं हैं। इस घोषणा के साथ ही क्यूबा शोक में डूब गया और सड़कें सूनसान हो गईं। वहाँ पूरे नौ दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया है। बता दें कि कास्त्रो को चाहने वाले भारत समेत दुनिया भर में हैं। भारत के तो वे अभिन्न मित्र थे। खासतौर पर जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी से उनके बड़े प्रगाढ़ संबंध रहे।

फिदेल कास्त्रो साम्यवादी व्यवस्था के बहुत बड़े और मजबूत स्तम्भ थे, इतने मजबूत कि सोवियत संघ के टूट जाने के बाद भी उसमें ‘दरारें’ तक नहीं आईं। साम्राज्यवादी व्यवस्था के शोषण के खिलाफ लड़कर उन्होंने क्यूबा में साम्यवादी सत्ता स्थापित की थी। अमेरिका की दहलीज के इतने करीब होते हुए भी उन्होंने ताज़िन्दगी क्यूबा में पूंजीवादी व्यवस्था को घुसने नहीं दिया। शायद यही वजह रही कि क्यूबा की गिनती आज भी दुनिया की सबसे खुशहाल जनता वाले देशों में होती है।

अमेरिका के खिलाफ खुलकर बोलने वाली इतनी मजबूत आवाज़ अब शायद कभी न हो। उनकी एक आवाज़ से पूरा अमेरिका थर्रा जाता था। 1962 में शीत युद्ध के दौरान सोवियत संघ को अपनी सीमा में अमेरिका के खिलाफ मिसाइल तैनात करने की मंजूरी देकर उन्होंने पूरी दुनिया को सकते में ला दिया था। इस शख्स से दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश कितना घबराता था, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए ने उन्हें एक अनुमान के मुताबिक 638 बार मारने की योजना बनाई पर कास्त्रो हर बार बच निकले। अमेरिका के एक नहीं, दो नहीं पूरे 11 राष्ट्रपति आए और चले गए पर कास्त्रो जहाँ थे वहीं रहे, चट्टान की तरह अडिग। उन्होंने डटकर आइजनहावर से लेकर क्लिंटन तक का सामना किया, अमेरिका की ओर से लगाए गए सभी आर्थिक प्रतिबंधों को झेला और तमाम साजिशों को अपनी चतुराई और कूटनीति से नाकाम किया। हाँ, ओबामा के शासनकाल में अमेरिका और क्यूबा के संबंधों में नए अध्याय जरूर जुड़े।

13 अगस्त 1926 को जन्मे कास्त्रो के पिता एक समृद्ध स्पेनी प्रवासी जमींदार थे और उनकी माँ क्यूबा की निवासी थीं। बचपन से ही कास्त्रो चीजों को बहुत जल्दी सीख जाते थे। वह बेसबॉल के प्रशंसक थे और कभी उनका सपना था कि नामचीन अमेरिकी लीगों में खेलें और खेल ही में अपना भविष्य बनाएं। लेकिन उनकी राह तो राजनीति देख रही थी। उन्हें आधुनिक क्यूबा का इतिहास जो गढ़ना था।

चलते-चलते

कास्त्रो जितने तेजतर्रार व्यक्तित्व के धनी थे, वक्ता भी उतने ही शानदार थे। संयुक्त राष्ट्र में सबसे लंबा भाषण देने का गिनीज रिकॉर्ड उन्हीं के नाम दर्ज है। उन्होंने 29 सितंबर 1960 को संयुक्त राष्ट्र में 4 घंटे 29 मिनट का भाषण दिया था। इतना ही नहीं, क्यूबा में में 1986 में दिया उनका एक भाषण तो 7 घंटे 10 मिनट लंबा था।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप    

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नीतीश फिर भाजपा के करीब !

मीडिया में आ रही ख़बरों के मुताबिक बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इन दिनों भाजपा के संपर्क में हैं। कहा जा रहा है कि भाजपा के एक बड़े नेता से उनकी बात हुई है और बहुत संभव है कि आने दिनों में जेडीयू और भाजपा फिर एक साथ दिखाई दें। दरअसल इस तरह की सुगबुगाहट तभी शुरू हो गई थी जब यूपी चुनाव को लेकर जेडीयू और आरजेडी ने अपनी राहें अलग कर लीं। पर पिछले दिनों नीतीश ने लालू और कांग्रेस के स्टैंड से एकदम उलट जिस तरह केन्द्र सरकार के नोटबंदी के फैसले की तारीफ की, उसके बाद इस चर्चा ने खासा जोर पकड़ लिया है।

टीवी रिपोर्ट्स के मुताबिक नीतीश ने भाजपा के एक बड़े नेता से बात की और नोटबंदी की तारीफ की। गौर करने की बात है कि यह ‘तारीफ’ उन तारीफों के अतिरिक्त है जो वे सार्वजनिक मंचों से कर रहे हैं। वैसे इन तारीफों के अलग मायने इसलिए भी लगाए जा रहे हैं क्योंकि हाल के दिनों में जेडीयू और आरजेडी के बीच तल्खियां आम हो चली हैं। उदाहरण के तौर पर नीतीश की निश्चय यात्रा का संदर्भ ही लें। आरजेडी के वरिष्ठ नेता और उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह ने इस यात्रा को ‘बेकार’ करार दिया। उन्होंने यहाँ तक कहा कि यात्रा के दौरान केवल बातें की जा रही हैं, धरातल पर काम नहीं दिख रहा। यह केवल जेडीयू की यात्रा बनकर रह गई है।

नोटबंदी जैसे बड़े मुद्दे पर लालू-नीतीश की बिखरती जुगलबंदी और खुलकर सामने आई। एक ओर लालू प्रसाद यादव अपने एक के बाद एक आक्रामक ट्वीट और बयानों में इसे ‘फर्जिकल स्ट्राइक’ करार दे रहे हैं तो दूसरी ओर नीतीश इस फैसले को ‘साहसिक’ बताते हुए इसका स्वागत कर रहे हैं। उनके बेहद करीबी और हाल में राष्ट्रीय महासचिव बनाए गए हरिवंश भी नोटबंदी के पक्ष में लेख लिख रहे हैं। हाँ, पार्टी के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव जरूर इसके विरोध में खड़े दिख रहे हैं, पर जेडीयू की अंदरूनी राजनीति से वाकिफ लोग बखूबी जानते हैं कि पार्टी में उनका ‘स्थान’ और ‘सम्मान’ केवल सांकेतिक है।

अंदरखाने इस बात की भी चर्चा है कि लालू को राष्ट्रीय राजनीति में नीतीश की बढ़ती दिलचस्पी रास नहीं आ रही। चाहे यूपी चुनाव में गठबंधन की कवायद हो या शराबबंदी को देशव्यापी अभियान बनाने की कोशिश, लालू अच्छी तरह समझ रहे हैं कि नीतीश दिन-रात एक कर 2019 में खुद को मोदी के बरक्स लाने में जुटे हैं। नीतीश की इस तरह की कोशिशों को लालू के करीबी ‘वादाखिलाफी’ करार देते हैं। कारण यह कि जब महागठबंधन की नींव रखी जा रही थी, तब तथाकथित तौर पर तय यह हुआ था कि नीतीश बिहार संभालेंगे और लालू देश भर में घूम-घूमकर महागठबंधन की राजनीति को विस्तार देंगे।

बहरहाल, कारणों को न खंगालें तो भी इतना तो तय है कि महागठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। नहीं तो प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी को न तो यह कहने की जरूरत पड़ती कि “महागठबंधन एकजुट है” और न यह दावा करने की कि “महागठबंधन में दरार पैदा करने की कोशिशें नाकाम साबित होंगी।”

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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नोटबंदी पर सरकार के नए निर्देश

सरकार ने आज नोटबंदी से जुड़े कई अहम निर्देश जारी किए। 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को अब 24 नवंबर की आधी रात के बाद बैंक काउंटरों से एक्सचेंज नहीं कराया जा सकेगा। इसका मतलब यह कि शुक्रवार से इन नोटों को अब सिर्फ बैंक में जमा कराया जा सकेगा। ऐसे नोटों को जमा कराने की अवधि 30 दिसंबर तक है।

बता दें कि आज जारी निर्देशों में सरकार ने 1000 रुपये के पुराने नोटों को पूरी तरह बैन कर दिया है, पर राहत की बात यह कि कई जरूरी सेवाओं में 500 रुपये के पुराने नोटों के उपयोग की अवधि 15 दिसंबर तक के लिए बढ़ा दी गई है। इन नोटों के जरिए वर्तमान और बकाया बिजली और पानी के बिल भरे जा सकेंगे। साथ ही इनका इस्तेमाल पेट्रोल पम्पों, दवा दुकानों, अस्पतालों, रेलवे स्टेशनों एवं हवाई अड्डों पर किया जा सकेगा। 500 के पुराने नोटों से 3 दिसंबर से 15 दिसंबर तक टोल टैक्स भी दिया जा सकेगा। 3 दिसंबर से इसलिए क्योंकि सरकार ने 2 दिसंबर तक टोल टैक्स फ्री कर दिया है।

वित्त मंत्रालय द्वारा जारी निर्देशों के मुताबिक केन्द्र और राज्य सरकार के स्कूलों व म्युनिसिपैलिटी और स्थानीय निकाय के स्कूलों में भी प्रति छात्र 2000 तक की फीस 500 के पुराने नोटों के जरिए अदा की जा सकेगी। केन्द्र एवं राज्य सरकार के कॉलेजों की फीस भी इन नोटों से दी जा सकेगी। यही नहीं, उपभोक्ता सहकारी दुकानों से एक बार में अधिकतम 5000 की खरीद और 500 रुपये मूल्य तक के प्रीपेड मोबाइल फोन टॉप-अप में भी 15 दिसंबर तक 500 के पुराने नोट चलेंगे।

 

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शराबबंदी कानून में ‘जरूरी’ संशोधन को नीतीश तैयार

संसद से सड़क तक नोटबंदी पर हो रहे हो-हंगामे के बीच बिहार में शराबबंदी कानून पर सर्वसम्मति बनाने के उद्देश्य से बिहार सरकार ने सार्थक पहल की है। बिहार विधानसभा पुस्तकालय में शराबबंदी कानून पर बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में मुख्य विपक्षी दल भाजपा समेत सभी दलों की राय जानने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि इस बैठक और लोकसंवाद में मिले सुझावों पर कानूनविदों की राय लेंगे और जो प्रस्ताव होगा उसे सदन में लेकर आएंगे। इस बैठक के बाद यह साफ हो गया कि शराबबंदी कानून में ‘जरूरी’ संशोधन के लिए सरकार मन बना चुकी है।

गौरतलब है कि इससे पूर्व 14 नवंबर को मुख्यमंत्री ने लोगों से सीधा संवाद कर उनके सुझाव सुने थे। इन दोनों ही बैठकों में सबने शराबबंदी का खुले दिल से समर्थन किया, लेकिन इसके लिए बने कानून के कुछ प्रावधानों पर सवाल भी उठाए। सर्वदलीय बैठक में नीतीश ने कहा कि सबलोग एकजुट रहेंगे तो शराबबंदी अभियान में मजबूती आएगी। अलग-अलग विचार होने से गलत करने वालों का हौसला बढ़ता है। अगर कोई कानून अतिवादी है तो उसके बदले क्या होना चाहिए, इस पर बात हो। हम सदन के अंदर और बाहर कहते रहे हैं कि ठोस सुझाव दिए जाएं।

सर्वदलीय बैठक के बाद अब इस बात की पूरी संभावना है कि 25 नवंबर से शुरू हो रहे शीतकालीन सत्र में इस बाबत संशोधन विधेयक लाया जाए। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार घर में शराब मिलने पर सभी वयस्कों को सजा का प्रावधान तर्कसंगत नहीं माना जा रहा है। महिलाओं और बुजुर्गों को इससे बाहर रखने पर विचार चल रहा है। इसी तरह शराब मिलने पर उस मकान या परिसर की जब्ती, कारोबार होने पर पूरे गांव पर सामूहिक जुर्माना या जिलाबदर करने जैसे प्रावधान को भी कठोर माना जा रहा है।

प्रसन्नता की बात है कि ऐसे तमाम ‘जरूरी’ संशोधनों पर सरकार पूरी गंभीरता से मंथन में जुट गई है। हालांकि संशोधन में इसका पूरा ख्याल रखा जाएगा कि वे शराबबंदी के मूल उद्देश्य से अलग न हों। शराबबंदी पर सरकार की स्पष्ट राय है कि लोगों की असुविधा कम हो पर अवैध तरीके से कारोबार करने वालों पर शिकंजा बरकरार रहे।

चलते-चलते

क्या हमारे प्रधानमंत्री कुछ ऐसा ही कदम नोटबंदी को लेकर नहीं उठा सकते? ताकि कालेधन पर रोक तो लगे पर निरीह जनता की परेशानी न बढ़े!

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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विराट के वीरों की इंग्लैंड पर बड़ी जीत

कोहली और पुजारा की शानदार बल्लेबाजी, अश्विन के ऑलराउंड खेल और गेंदबाजों के दमदार प्रदर्शन की बदौलत भारत ने विशाखापत्तनम टेस्ट में शानदार जीत दर्ज करते हुए पाँच मैंचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली। सोमवार को पाँचवें और आखिरी दिन इंग्लैंड की दूसरी पारी 405 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए मात्र 158 रन पर ढेर हो गई। इसके साथ ही भारत को इंग्लैंड पर 246 रन की बड़ी जीत मिली। पहली पारी में 167 और दूसरी पारी में 81 रन बनाने वाले भारतीय कप्तान विराट कोहली ‘मैन ऑफ द मैच चुने गए।

ऐसा कम ही देखने को मिलता है कि ऐसी बड़ी जीत मिले और जीत का श्रेय बल्लेबाजों को दिया जाय कि गेंदबाजों को, ये तय करने में धर्मसंकट वाली स्थिति हो जाए। बल्लेबाजी की बात करें तो पहली पारी में विराट कोहली (167), चेतेश्वर पुजारा (119) और आर अश्विन (58) तो दूसरी पारी में फिर विराट कोहली (81), अजिंक्य रहाणे (26) और जयंत यादव (27 नाबाद) ने महत्वपूर्ण पारियां खेलीं। जहाँ तक गेंदबाजी की बात है तो उसकी धुरी हालांकि मैच में 8 विकेट (पहली पारी में 5 और दूसरी पारी में 3) लेने वाले आर अश्विन रहे लेकिन बाकी गेंदबाजों ने भी उम्दा खेल दिखाया। पहला टेस्ट खेल रहे जयंत यादव ने अपनी यादगार शुरुआत की। उन्होंने पहली पारी में 1 और दूसरी पारी में 3 विकेट लिए। दूसरी पारी में 27 महत्वपूर्ण रन बनाए सो अलग। रविन्द्र जडेजा और मोहम्मद शमी को मैच में 3-3 विकेट मिले। उमेश यादव की झोली भी खाली नहीं रही और उन्होंने 1 विकेट हासिल किया।

इस मैच में गेंदबाजों का दबदबा कैसा था, इसका अंदाजा इसी से लग जाता है कि जिस इंग्लैंड ने चौथे दिन 59.2 ओवर खेलकर दो विकेट गंवाए थे, पाँचवें दिन उसकी बल्लेबाजी 38.1 ओवर में ही ढेर हो गई। गौरतलब है कि दूसरी पारी में इंग्लैंड का पहला विकेट 75 रन पर गिरा था और बाकी के नौ विकेट गंवा कर उसने महज 83 रन पर हासिल किए। दूसरी पारी में उसके केवल चार खिलाड़ी – कुक (54), हमीद (25), रूट (25) और बेयरस्टा (34) – ही दहाई के आंकड़े तक पहुँच सके। बचे हुए बल्लेबाजों में तीन तो शून्य पर आउट हुए। जेम्स एंडरसन दोनों ही पारियों में शून्य पर आउट हुए।

इंग्लैंड के कप्तान एलिस्टेयर कुक जहाँ इस हार से खासे निराश हैं, वहीं भारतीय कप्तान विराट कोहली का आभामंडल इस जीत के बाद और भी ‘विराट’ हो गया। मैच में 8 विकेट लेने वाले दुनिया के नंबर वन गेंदबाज आर अश्विन इस मैच के बाद इस साल सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बन गए। उनके विकेटों की संख्या अब 55 हो गई है। उनके बाद श्रीलंका के रंगना हेराब (54 विकेट) और इंग्लैंड के स्टुअर्ट ब्रॉड (46 विकेट) का स्थान है। इस मैच में भारत की एक और उपलब्धि अपना पहला टेस्ट खेल रहे जयंत यादव हैं। शानदार गेंदबाजी के साथ-साथ बल्लेबाजी में भी हाथ दिखा कर उन्होंने भविष्य के लिए उम्मीद जगा दी। स्वयं कप्तान कोहली उनकी तारीफ करते नहीं थक रहे।

 ‘मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप   

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लाइफ केयर क्लिनिक का भव्य उद्घाटन

राम रहीम रोड के पूर्वी किनारे पर “लाइफ केयर क्लिनिक” का उद्घाटन मधेपुरा के विशिष्ट समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी द्वारा स्थानीय साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों एवं व्यापारियों के बीच किया गया |

यह भी बता दें कि जहां एक ओर सर्जन डॉ.वरुण कुमार का वृंदावन नर्सिंग होम और दूसरी ओर सर्जन डॉ.डी.के. सिंह का द्रुवित हॉस्पिटल है, वहीं इन दोनों चिकित्सालयों के बीच मधेपुरा सदर अस्पताल में वर्षों अनुभव प्राप्त किये चिकित्सक डॉ.प्रिय रंजन भास्कर द्वारा स्थापित ‘लाइफ केयर क्लिनिक’ के व्यवस्थापक हैं सुनील कुमार एवं सहयोगी डॉ.विनीत कुमार |

उद्घाटन समारोह में उपस्थित डॉ.अमोल राय, पूर्व सीसीडीसी (बी.एन.एम.यू.), उनके सुपुत्र डॉ.प्रिय रंजन भास्कर, सहयोगी डॉ.विनीत कुमार, व्यवस्थापक सुनील कुमार सहित स्नातकोत्तर हिन्दी के विभागाध्यक्ष डॉ.इन्द्र नारायण यादव, डॉ.विनय कुमार चौधरी, डॉ.सिद्धेश्वर काश्यप, पूर्व प्राचार्य प्रो.श्यामल किशोर यादव, प्रो.विजय कुमार, डॉ.अंजनी कुमार, डॉ.राज किशोर सिंह, डॉ.प्रियंका सिंह व अन्य चिकित्सकों सहित उपस्थित जनों के बीच उद्घाटनकर्ता डॉ.मधेपुरी ने हर दिल अजीज भारतरत्न डॉ.कलाम को उद्धृत करते हुए इस बात की चर्चा की कि डॉ.ए.पी.जे.अब्दुल कलाम अपने सिरहाने में कुछ ग्रंथों के साथ-साथ नोबेल पुरस्कार प्राप्त डॉ.ए.कैरॉल की पुस्तक “Man The Unknown” भी रखते थे जिस पुस्तक में इस बात की चर्चा की गई है कि चिकित्सक किसी भी मरीज के केवल शरीर का ही इलाज नहीं करें बल्कि शरीर के साथ-साथ उसके मन का भी इलाज करे | ऐसा करने पर चिकित्सक के  इलाज के प्रति मरीज का विश्वास गहराता है |

उद्घाटन कार्यक्रम में महिलाओं की उपस्थिति से ऐसा लगने लगा जैसे स्वास्थ्य और शिक्षा के प्रति आधी आबादी की जागरुकता दिनानुदिन गतिशील होती जा रही है |

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