इंटर स्कूल स्पेलिंग बी. प्रतियोगिता में 100 प्रतिभागी हुए पुरस्कृत

पार्वती विज्ञान कॉलेज सभा कक्ष में स्पेलिंग बी. एसोसिएशन के बैनर तले तृतीय स्पेलिंग स्पर्धा में लगभग सौ सफल प्रतिभागियों को एसोसिएशन के संरक्षक व समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी एवं अध्यक्ष सह कुलानुशासक डॉ.बी.एन.विवेका ने अपने संबोधन में जमकर प्रोत्साहित किया तथा पुरस्कार के रूप में मेडल-कप व प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित भी किया |

समारोह की अध्यक्षता कर रहे डॉ.विश्वनाथ विवेका, दमयंती-शत्रुघन एकेडमी के प्राचार्य अरुण कुमार सिंह तथा हॉली क्रास स्कूल के सचिव गजेंद्र कुमार को प्रिय शिष्य बताते हुए डॉ.मधेपुरी ने उपस्थित प्रतिभागियों से भरे सभा-भवन में भारतरत्न डॉ.कलाम की चर्चा करते हुए बच्चों को खूब प्रोत्साहित किया | उन्होंने एसोसिएशन के सचिव सावंत कुमार रवि, कोषाध्यक्ष सोनीराज सहित संचालक मंडली के अन्य सभी सदस्यों को हृदय से साधुवाद दिया व सम्मानित किया |

Patron Dr.Bhupendra Madhepuri giving medal-momento and certificate to 'Naisa' from Little Bird School, Shahid Chulhai Marg, Madhepura.
Patron Dr.Bhupendra Madhepuri giving medal-momento and certificate to ‘Naisa’ from Little Bird School, Shahid Chulhai Marg, Madhepura.

यह भी बता दें कि कार्यक्रम को सहयोग देकर शानदार बनाने वाले राज इन्फोटेक के श्याम जी, एम.सी.ए. के अध्यक्ष प्रशांत कुमार, टी.भी.एस. के पुष्पेंद्र कुमार, सोनी पुस्तक के कुंदन जी., ऑटोजोन के मौनी सिंह एवं सैफ्टी जोन के सद्दाम साहब सहित विनोद कुमार,पत्रकार संजय परमार आदि को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए सम्मानित किया संरक्षक डॉ.मधेपुरी एवं अध्यक्ष डॉ.विवेका आदि ने |

उद्घाटन भाषण में डॉ.मधेपुरी ने प्रतिभाओं को प्रेरित करनेवाले प्रसंगों की चर्चा करते हुए कहा कि बच्चों में प्रतियोगिता की भावना जगाना जरूरी है | उन्होंने भारत की बेटियाँ सिंधु एवं साक्षी सहित मधेपुरा की बेटियों सोनीराज-प्रियांशी-पायल की चर्चा करते हुए कहा कि आज बाजार से सब्जी लाने एवं ओलंपिक से मेडल लाने हेतु बेटियों को ही जाना पड़ता है |

यह भी जानें कि मधेपुरा के पूर्व एसपी कुमार आशीष (वर्तमान एसपी नालंदा) ने कन्फेरेंसिंग के जरिये समारोह में उपस्थित बच्चों एवं उनके अभिभावकों को शुभकामनाएं दी, जिसमें तीस स्कूलों के बच्चों ने भाग लिया था | डी.एस एकेडमी के ‘प्रशान्त’ एवं लिटल वर्ड्स की ‘नायसा’ को सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार प्राप्त हुआ | उपस्थित सभी सहयोगियों को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया….. और……

Chief Editor - Kosi Times , Advocate , Aakashvani and TV Channel Reporter and Social Activist - Dr.Devashish Bose is no more. He left the world leaving Old Mother Shaifalee Bose , Wife Sapna Bose and Daughter Mehul Bose.
Chief Editor – Kosi Times , Advocate , Aakashvani and TV Channel Reporter and Social Activist – Dr.Devashish Bose is no more. He left the world leaving Old Mother Shaifalee Bose , Wife Sapna Bose and Daughter Mehul Bose.

अंत में डॉ.मधेपुरी द्वारा अपने संघर्षशील पड़ोसी, आकाशवाणी संवाददाता, अधिवक्ता एवं कोसी टाइम्स के प्रधान संपादक डॉ.देवाशीष बोस के आकस्मिक निधन की जानकारी देते हुए समारोह में उपस्थित सभी जनों को उनकी आत्मा की शांति हेतु दो मिनट के मौन के लिए आग्रह किया गया और मिनट-दो-मिनट के संवेदनशील मौन के साथ सभा समाप्ति की घोषणा कर दी गई |

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कराहते सीरिया का सच

क्या आप ओमरान दक्नीश को जानते हैं? यकीनन आपमें से ज्यादातर लोग उसके नाम से वाकिफ नहीं होंगे, लेकिन अगर आपके हाथ में स्मार्ट फोन है या इंटरनेट से आपका दूर का भी वास्ता है या देश-दुनिया की ख़बरों में आपकी थोड़ी-सी भी रुचि है तो ऊपर दी गई तस्वीर को पहचान जरूर लेंगे। खून और मिट्टी से सना ये पाँच साल का बच्चा ओमरान दक्नीश है, जो एंबुलेंस में बैठा है और जिसकी सूनी आँखें जंग से कराहते सीरिया का सच बयां कर रही हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी ये तस्वीर सीरिया के मौजूदा हालात का प्रतीक बन गई है।

आप सोच रहे होंगे कि इस मासूम बच्चे को आखिर किस गुनाह की सजा मिली है? तो जान लें कि इस बच्चे का गुनाह ये है कि इसका घर सीरिया के ‘विद्रोहियों’ के इलाके में मौजूद है और ये ‘गुनाह’ इस बात के लिए काफी है कि सीरियन आर्मी और रूस उसके घर पर हवाई हमला कर सकें। बता दें कि अलेप्पो मीडिया सेंटर ने इस पूरी घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर शेयर किया है।

वैसे ये कहानी केवल ओमरान दक्नीश की नहीं। ओमरान तो फिर भी खुशकिस्मत है कि जीवित है। आप याद करें अयलान कुर्दी को। एक तीन साल का बच्चा जो सितंबर 2015 में अपने माता-पिता के साथ सीरिया से भागकर यूरोप आ रहा था कि नाव पलट गई और उसकी नन्ही-सी लाश बहकर समुद्र के किनारे आ लगी। अयलान ने अपने पिता से आखिरी शब्द कहे थे – “मैं आपका हाथ नहीं पकड़ूँगा, आप मेरा हाथ पकड़ो पापा, मेरा हाथ छूट जाएगा”…। हाथ सचमुच छूट गया था और समुद्र के किनारे बहकर आई उस नन्ही-सी लाश का वजन पूरी दुनिया ने अपनी छाती पर महसूस किया था।

सीरिया सब दिन ऐसा नहीं था। कभी इसे समृद्ध देशों में शुमार किया जाता था। पर इसकी खुशहाली को किसी की नज़र लग गई। आज आईएसआईएस, रेबल ग्रुप, सीरियन सरकार, नाटो और रशियन आर्मी ने इसे जंग के मैदान में तब्दील कर दिया है। इस जंग में अब तक करीब डेढ़ लाख लोग मारे गए हैं और  एक करोड़ से ज्यादा लोगों को विस्थापन झेलना पड़ा है। एक अनुमान के मुताबिक अब तक 76 लाख लोग भागकर यूरोप के देशों में पहुँचे हैं और ये अभी भी लगातार जारी है।

सीरिया का ये संकट साल 2011 में वहाँ की बशर अल असद के नेतृत्व वाली ‘बाथ सरकार’ के समर्थकों और विरोधियों के बीच सशस्त्र संघर्ष से शुरू हुआ था, जो अब विध्वंशकारी रूप ले चुका है। विद्रोही चाहते हैं कि राष्ट्रपति असद पदत्याग करें और बाथ पार्टी के शासन का अंत हो। कहने को यह सीरिया का गृहयुद्ध है पर वास्तविकता यह है कि सीरिया को लेकर पूरी दुनिया दो खेमों में बंट गई है। अपने-अपने हितों को देखते हुए एक ओर रूस और ईरान जैसे देश इस बात पर अड़े हैं कि बशर अल असद ही सीरिया के राष्ट्रपति बने रहेंगे तो दूसरी ओर अमेरिका, सऊदी अरब और तुर्की जैसे देश हैं जो सीरिया के असदविरोधी गठबंधन ‘नेशनल कोएलिशन’ के समर्थक हैं और उनकी हर संभव मदद कर रहे हैं।

सीरिया संकट एशिया की दो महाशक्तियों भारत और चीन की विदेश नीति की परीक्षा भी है। अपने-अपने व्यापारिक हितों के कारण दोनों देश इस मुद्दे पर खुलकर कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं लेकिन किसी भी सैनिक कार्रवाई का विरोध करते रहे हैं।

बहरहाल, कूटनीति अपनी जगह है और संवेदना अपनी जगह। हो सकता है सीरिया के विद्रोहियों की हर मांग जायज और राष्ट्रपति बशऱ अल असद की हर इनकार नाजायज ना हो। लेकिन इन सबमें अयलान कुर्दी या ओमरान दक्नीश का क्या कसूर?  मानवीय संवेदना को मारकर हमने तख्तोताज हासिल भी कर लिया तो क्या? अयलान की मुंदी हुई और ओमरान की सूनी पड़ी आँखें क्या हमारी ‘कंगाली’ की गवाही नहीं दे रही होंगी?

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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नीतीश की राह में केजरीवाल का रोड़ा

हमारे नीतीशजी इन दिनों बड़ी शिद्दत से अपने ‘अखिल भारतीय’ अभियान पर हैं। ‘विकास-पुरुष’ का जो तमगा उन्हें बिहार के लिए मिला उस पर पूरे देश की ‘मुहर’ चाहते हैं वो। 2019 में प्रधानमंत्री मोदी के बरक्स खुद को खड़ा करने करने के लिए शराबबंदी को राष्ट्रीय मुद्दा बनाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ नीतीशजी। वैसे देखा जाय तो 2019 के लिए मैदान में ‘भीड़’ है भी नहीं और मोदी के जवाब के तौर पर उन्हें राहुल गांधी से बेहतर मानने वालों की भी कमी नहीं। पर मोदी हैं कि हाथ लग ही नहीं रहे। और तो और, उनके और मोदी के बीच, बीच में ‘टपकने’ के लिए मशहूर अरविन्द केजरीवाल भी कूद पड़े हैं।

जी हाँ, इंडिया टुडे और कार्वी इनसाइट्स के सर्वे के मुताबिक गुड गवर्नेंस और लोकप्रियता में तो मोदी देश के किसी भी राजनेता से कोसों आगे हैं ही, मुख्यमंत्री के तौर पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल भी बिहार के मुख्यमंत्री से अधिक लोकप्रिय आंके गए हैं और मोदी के लिए ‘खतरे’ के तौर पर भी राहुल के बाद नीतीश के साथ-साथ लगभग बराबरी पर खड़े हैं।

सर्वे के मुताबिक देश के 53 प्रतिशत लोग बतौर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का प्रदर्शन शानदार मानते हैं। सर्वे में शामिल आधे लोगों ने उन्हें देश का नंबर वन नेता माना है और प्रधानमंत्री पद के लिए बेहतर उम्मीदवार बताया है, जबकि 13 प्रतिशत लोग इसके लिए कांग्रेस उपाध्यक्ष और 6 प्रतिशत उनकी माँ सोनिया गांधी को सही मानते हैं।

अगले लोकसभा चुनाव की बात करें तो राहुल गांधी मोदी को कड़ी टक्कर दे सकते हैं। 23 प्रतिशत लोगों ने 2019 के लिए राहुल को मोदी के लिए सबसे बड़ा खतरा माना है, जबकि 13 प्रतिशत लोगों ने नीतीश और 12 प्रतिशत लोगों ने केजरीवाल के पक्ष में अपनी राय दी है।

मुख्यमंत्रियों की बात करें तो दिल्ली के अरविन्द केजरीवाल देश के सबसे बेहतर मुख्यमंत्री हैं। बिहार के नीतीश कुमार को दूसरा स्थान मिला है और तीसरे स्थान पर पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी हैं। हालांकि केजरीवाल की लोकप्रियता 2015 के मुकाबले 2016 में कम हुई है, लेकिन मुख्यमंत्री के रूप में वो लोगों की पहली पसंद हैं।

बता दें कि इंडिया टुडे और कार्वी इनसाइट्स का ये सर्वे 15 जुलाई से 2 अगस्त के बीच किया गया और 19 राज्यों के 97 संसदीय और 194 विधानसभा क्षेत्रों में 12,321 लोगों से राय ली गई।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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सिंधू और साक्षी : देश की दो अनमोल बेटियां

आज ऑफिस से जल्दी आया था। करोड़ों भारतीयों की तरह मैं भी चाहता था कि ‘इतिहास’ को बनता हुआ देखूं। साक्षी के ब्रॉन्ज के बाद सिंधू का सिल्वर तो कल ही तय हो चुका था, पर आज उस सिल्वर का रंग ‘सुनहला’ होते देखना चाहता था। 21 साल की सिंधू ने दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी स्पेन की मरीन के साथ खेला भी लगभग बराबरी पर। पर खेल तो खेल है। जीत किसी एक की ही होनी थी, सो मरीन जीत गई। सिंधु के सिल्वर का रंग ‘सुनहला’ होते-होते रह गया। पर क्या हुआ कि सोने का पदक नहीं मिला सिंधू को, उसने तो वो कर दिखाया कि सोने से भी उसे तौल दें तो कम होगा। इतिहास तो देश की ये दोनों बेटियां कल ही रच चुकी थीं। रक्षाबंधन पर इन दोनों ने पूरे देश को वो उपहार दिया जो अद्भुत, अभूतपूर्व, अविस्मरणीय है।

बहरहाल, सिंधू ने आज रियो में बैडमिंटन महिला सिंगल्स का सांस रोक देने वाला फाइनल खेला और शुरुआत में पिछड़ने के बावजूद पहला सेट 21-19 से अपने नाम कर लिया। दूसरे सेट में मरीन ने वापसी की और 12-21 से जीत दर्ज की। निर्णायक तीसरे सेट में एक-एक प्वाइंट के लिए दोनों खिलाड़ियों का संघर्ष देखने लायक था। एक समय तो 10-10 की बराबरी पर थीं दोनों, पर अंतत: मरीन का अनुभव काम आया और उसने 15-21 से फाइनल जीत लिया।

सिंधू हारीं जरूर लेकिन सिल्वर जीतकर वो ओलंपिक में ऐसा करने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बन गईं। यही नहीं, भारतीय ओलंपिक इतिहास में ये किसी भी खिलाड़ी द्वारा चौथा व्यक्तिगत सिल्वर मेडल है। इससे पहले ये सफलता राज्यवर्द्धन सिंह राठौर (ट्रैप शूटिंग), सुशील कुमार (कुश्ती) और विजय कुमार (शूटिंग) ने हासिल की है।

अब जरा कल के दिन अपने ‘पसीने’ से रियो ओलंपिक में भारत के मेडल का ‘सूखा’ खत्म करने वाली साक्षी मलिक की बात। इस 23 वर्षीया भारतीय महिला पहलवान ने रियो में महिला रेसलिंग के 58 किलोग्राम फ्री स्टाइल मुकाबले में किर्गिस्तान की एसुलू तिनिवेकोवा को 8-5 से हराकर ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। साक्षी पहली भारतीय महिला पहलवान हैं जिन्होंने फ्री स्टाइस कुश्ती में ये कामयाबी हासिल की है। इसके अलावा वो भारतीय ओलंपिक इतिहास की चौथी महिला खिलाड़ी हैं जिन्होंने कांस्य हासिल किया है। उनसे पहले कर्णम मलेश्वरी, मैरी कॉम और साइना नेहवाल ही ये कमाल कर पाई हैं।

‘मधेपुरा अबतक’ अपनी और अपने तमाम पाठकों की ओर से देश की इन दोनों बेटियों को सलाम करता है। काश कि हम ‘स्पोर्ट्स कल्चर’ और हमारी सरकारें ‘स्पोर्ट्स इन्फ्रास्ट्रक्टर’ के प्रति जागरुक और ईमानदार रहें और गौरव के ऐसे क्षण बार-बार आएं!

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

 

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अनोखे रक्षाबंधन का साक्षी बना मधेपुरा

कोई महामानव इस धरती पर शोर मचाकर नहीं आता। वो बड़ी खामोशी से अपना काम करता है और चला जाता है। उसके जाने के बाद मानव-जाति को ये एहसास होता है कि वो अपने समय और समाज की दशा और दिशा बदल कर गया है। कुछ ऐसा ही कहा जा सकता है इस धरती पर डेढ़ सौ वर्ष  पूर्व अवतरित होने वाले लेखराज खूबचन्द कृपलानी के बारे में। इस महामानव ने माउंटआबू में प्रजापिता ब्रह्माबाबा का रूप लेकर ‘प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय’ की स्थापना की। आज इस विश्वविद्यालय की शाखाएं दुनिया के 135 देशों में हैं और करोड़ों श्रद्धालुओं के मन और मस्तिष्क को ईश्वरीय ज्ञान और वरदान से सींच रही है।

मधेपुरा शाखा की ब्रह्माकुमारी रंजु दीदी उसी महामानव के कार्यों को विस्तार देने के निमित्त समर्पित हैं। इसी क्रम में रक्षाबंधन पर्व को अपने पुनीत उद्देश्य का माध्यम बनाते हुए उन्होंने ब्रह्मा बाबा में आस्था, श्रद्धा एवं विश्वास रखने वाले भाइयों की कलाई पर राखी बांधी, उनका तिलक किया और ‘ओमशांति’ का उद्घोष करते हुए सबका मुँह मीठा किया।

Brahmakumari Ranju Didi tying Rakhi to Dr. Madhepuri .
Brahmakumari Ranju Didi tying Rakhi to Dr. Madhepuri .

बता दें कि इस अनोखे रक्षाबंधन के अवसर पर समाजसेवी साहित्यकार डॉ. भूपेन्द्र मधेपुरी, पूर्व प्राचार्य श्यामल किशोर यादव, घैलाढ़ प्रखंड के पूर्व प्रमुख विनयवर्द्धन उर्फ खोखा बाबू, सदर अस्पताल के सीएस डॉ. गदाधर पांडेय, प्रमुख व्यापारी दिनेश सर्राफ, सहयोगी ओम प्रकाश एवं दिनेश प्रसाद यादव आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे।

कार्यक्रम का श्रीगणेश दीप प्रज्वलित कर किया गया। फिर ब्रह्माकुमारी रंजु दीदी ने डॉ. मधेपुरी को तिलक कर उन्हें राखी बांधी और उनका मुँह मीठा किया। इस अनोखे पल ने मानो भाई-बहन के वैश्विक रिश्ते को अमरत्व प्रदान कर दिया हो। डॉ. मधेपुरी ने इस पल को स्वामी विवेकानंद से जोड़ते हुए कहा कि उस महापुरुष ने भी तो अमेरिका के अपने इतिहारृसप्रसिद्ध संबोधन की शुरुआत “लेडीज एंड जेंटलमैन” की जगह “ब्रदर्स एंड सिस्टर्स” से की थी। एक तरह से यह उन विचारों पर मुहर ही तो थी जिसकी नींव महामानव कृपलानी ने रखी थी।

अंत में “मधेपुरा अबतक” से बात करते हुए डॉ. मधेपुरी ने कहा कि अगर रक्षाबंधन को ऐसा ही विस्तार मिलता रहा तो ये धरती सचमुच रहने लायक बन जाएगी, जिसकी चिन्ता करते हुए महामानव डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम यहाँ से कूच कर गए थे।

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स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन

इंग्लिश स्टडी सेंटर एवं लाइफ साइंस क्लासेज द्वारा मधेपुरा कॉलेज के विशाल सभा भवन में प्राचार्य डॉ.अशोक कुमार की अध्यक्षता में 70 वां स्वतंत्रता दिवस समारोह को सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए जानदार एवं शानदार बनाने की पुरजोर कोशिश की गईं |
इस अवसर पर उद्घाटनकर्ता के रुप में हिन्दी व अंग्रेजी साहित्य के मर्मज्ञ, बी.एन.मंडल विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति डॉ.रमेन्द्र कुमार यादव रवि, पूर्व सांसद ने दोनों भाषाओं में विस्तार से प्रकाश डालते हुए आजादी एवं इंग्लिश स्टडी सेंटर की प्रशंसा की | उन्होंने शहीदों एवं सेनानियों की विस्तार से चर्चाएं की |
यह भी बता दें कि मुख्य अतिथि के रुप में बी.एन.एम.यू. के पूर्व परीक्षा नियंत्रक डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने आजादी के लिए अंग्रेजों द्वारा 15 अगस्त चुनने के बाबत कहा कि अंग्रेज चाहते थे कि 1948 में भारत को आजादी दी जाय लेकिन बापू के सत्य एवं अहिंसा ने अंग्रेजो को इस कदर मजबूर कर दिया कि ब्रिटिश सरकार ने मित्र देश जापान के द्वितीय समर्पण वर्षगांठ यानी 15 अगस्त 1947 को ही हमें आजाद कर दिया | ज्ञातव्य हो कि जापान ने 15 अगस्त 1945 को दक्षिण कोरिया को आजादी दी थी |
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि प्रो.श्यामल किशोर यादव प्रो.विज्ञानानंद सिंह एवं डॉ.आलोक कुमार, मो.मुस्ताक सहित निदेशक सत्य प्रकाश व ओम प्रकाश ने अपने संबोधन में इंग्लिश स्टडी सेंटर एवं साइंस क्लासेज की कामयाबी के साथ-साथ आजादी के जश्न की जमकर चर्चाएं की |
आरंभ में बच्चों ने अतिथियों को स्वागतगान से एवं बुके देकर सम्मानित किया और अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया | अंत में बच्चों ने रंगारंग कार्यक्रमों द्वारा 70 वां स्वतंत्रता दिवस को यादगार बनाने की भरपूर चेष्टा की | गीत-संगीत एवं नाटक का निर्देशन विकास कुमार ने किया |

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रजनीकांत : कद, करिश्मा और ‘कबाली’

आमतौर पर बॉलीवुड के बड़े स्टार अपनी फिल्म की रिलीज के लिए दिवाली और ईद जैसे छुट्टी वाले दिन चुनते हैं लेकिन रजनीकांत की फिल्म जिस दिन रिलीज होती है उस दिन छुट्टी डिक्लेयर हो जाती है। रजनीकांत पर बने चुटकुलों में कई अविश्वसनीय बातें कही जाती हैं और आप शायद सोच रहे होंगे कि ये भी वैसी ही कोई बात है। अगर ऐसा है तो आप गलत हैं। पिछले महीने तमिल, तेलगु, हिन्दी और अंग्रेजी में एक साथ रिलीज हुई रजनीकांत की फिल्म ‘कबाली’ ने ऐसी कई असंभव-सी बातों को संभव कर दिया है।

जी हाँ, चेन्नई की तमाम बड़ी-छोटी कम्पनियों ने जिस दिन कबाली रिलीज हुई उस दिन यानि 22 जुलाई को छुट्टी घोषित कर दी थी। दक्षिण भारतीय महानायक की इस फिल्म की माया कुछ ऐसी थी  कि मलेशिया, जहाँ फिल्म मलय भाषा में रिलीज हुई, की सरकार ने रजनीकांत के सम्मान में ‘कबाली स्टैम्प’ जारी किया, एक एयरलाइन कम्पनी ने स्पेशल ‘कबाली फ्लाइट’ लॉन्च की और पूरे हवाई जहाज को ‘रजनीमय’ कर दिया, गूगल प्ले ने ‘कबाली ऐप’ लॉन्च किया और केरल की कम्पनी मुथूट फिनकॉर्प ने खास ‘कबाली चांदी के सिक्के’ जारी किए जिन पर रजनीकांत अपने ‘कबाली’ अवतार में छपे हुए हैं।

इतना सब सुनने के बाद सहज रूप से उत्सुकता होती है कि आखिर ‘कबाली’ में ऐसा क्या है? क्या कहानी है इसकी? कैसा अभिनय, कैसा निर्देशन, कैसा गीत-संगीत है इसका? किस क्रिटिक ने इसके रिव्यू में क्या लिखा? वगैरह-वगैरह। पर जनाब जिस फिल्म को देखने के लिए फैन्स रात के तीन बजे से ही टिकट काउंटर पर लाईन लगा लें और फिल्म की रिलीज से पहले ही सिनेमाघर हाउसफुल हो जाएं उस फिल्म को किसी रिव्यू की क्या दरकार? रजनीकांत की फिल्म में लोग केवल रजनीकांत को देखने आते हैं, बाकी क्या, क्यों और कैसा है, उनके फैन्स को ये सोचने की ना तो जरूरत होती है, ना फुरसत।

वैसे पा रंजीत के निर्देशन में बनी इस फिल्म की कहानी टिपिकल रजनीकांत फिल्मों की तरह है जहाँ रजनी एक नेक दिल आदमी हैं और गरीबों, दीन-दुखियों की दिल खोलकर सेवा करते हैं। उनके इस काम के लिए पैसा कहाँ से आता है, इसका पता नहीं चलता लेकिन कुछ लोग उनको दबी जुबान में डॉन कहते हैं। इसके बाद कहानी फ्लैशबैक में जाती है और ‘कबाली द डॉन’ के ‘कबाली द समाजसेवी’ बनने तक का सफर सामने आता है। फिर एंट्री होती है एक चाईनीज बिजनेसमैन की जो हर गलत काम करता है और कबाली को बर्बाद कर देना चाहता है। क्या कबाली उसे रोक पाता है? आप ही बताएं, इसका जवाब भला किसे पता नहीं होगा? अपने इन्हीं ‘जवाबों’ से तो रजनीकांत अपने करोड़ों फैन्स को दशकों से लाजवाब करते आए हैं।

रजनीकांत अपने फैन्स को निराश नहीं करते और उससे भी बड़ी बात ये कि अगर निराश करना भी चाहें तो उनके फैन्स निराश नहीं होते। उनके एक-एक डायलॉग में वो अदा है जो आपको सीटी बजाने पर मजबूर कर देगी और हॉल का माहौल आपको ऐसा महसूस करा देगा मानो आप सदी की सर्वश्रेष्ठ फिल्म देख रहे हैं। और फिर इससे आगे फिल्म की बॉक्स आफिस रिपोर्ट तो है ही जहाँ लगभग 700 करोड़ का करिश्माई आँकड़ा आपका इन्तजार कर रहा है।

पर क्या ‘कबाली’ और रजनीकांत की चर्चा केवल इन्हीं बातों के लिए होनी चाहिए? प्रश्न यह उठता है कि साधारण शक्ल-सूरत और मामूली कद-काठी का, दक्षिण भारतीय लोगों की किसी भी भीड़ में आसानी से  खो जा सकने वाले एक सांवले शख्स में ऐसा क्या है जो उसे इतना खास बनाता है? सच तो यह है कि 70 के दशक में पर्दे पर जिस दमन, अन्याय और भ्रष्टाचार से लड़कर अमिताभ बच्चन हिन्दी फिल्मों के महानायक बने, वही ‘लड़ाई’ रजनीकांत आज तक लड़ रहे हैं, 65 साल की उम्र में भी। रजनीकांत का ‘महानायकत्व’ साबित करता है कि आम लोग आज भी ‘व्यवस्था’ से किस कदर त्रस्त हैं, कि उन्हें आज भी ‘मुक्ति’ का कोई मार्ग नहीं दिखता, कि वे पर्दे पर ‘रजनीकांत’ बनकर और समाज के ‘गुनहगारों’ को सजा देकर खुश हो लेते हैं। जब तक आम लोगों को ‘रजनीकांत’ बनकर खुशी मिलती रहेगी, ‘कबाली’ कमाल करती रहेगी।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप  

 

 

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मधेपुरा ने धूमधाम से मनाया स्वतंत्रता दिवस

गंगा-यमुनी तहजीब में महारत हासिल कर चुका मधेपुरा अपना 70वां स्वतंत्रता दिवस मनाते हुए स्वतंत्रता सेनानियों एवं शहीदों को याद किया एवं संस्थाओं व चौक-चौराहों पर तिरंगा लहराया |

यह भी जानिये कि वर्तमान भूपेन्द्र चौक (कॉलेज चौक) पर आरंभ में वार्ड आयुक्त मो.महमूद आलम द्वारा तिरंगा लहराया जाता रहा | बाद में स्वतंत्रता सेनानी शिवनंदन राय और वर्तमान में प्रतिवर्ष भूपेन्द्र प्रतिमा निर्माण समिति के संयोजक डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी अपने सहयोगी मो.युनूस, डॉ.आलोक कुमार, समाजसेवी शौकत अली, आनंद आदि के साथ श्रद्धापूर्वक अन्य कार्यक्रमों से बढ़-चढ़ कर राष्ट्रीय कार्यक्रमों में भागीदारी निभाते आ रहे हैं |

Dr.Bhupendra Madhepuri paying tribute before the statue of Great Freedom Fighter and Socialist Leader Bhupendra Narayan Mandal at Bhupendra Chowk Madhepura.
Dr.Bhupendra Madhepuri paying tribute before the statue of Great Freedom Fighter and Socialist Leader Bhupendra Narayan Mandal at Bhupendra Chowk Madhepura.

इस 70वां स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सामाजिक-साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में निरंतर अपनी भागीदारी देने वाले डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने भूपेन्द्र चौक पर तिरंगा लहराने एवं राष्ट्रगान समाप्ति के बाद अपने संक्षिप्त संबोधन में यही कहा कि 15 अगस्त 1947 भारतीय इतिहास का वह महत्वपूर्ण दिन है जिस दिन भारत को ब्रिटिश राज से आजादी मिली थी | भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है | आज की तारीख में हम भारत का 70वां जन्मोत्सव मनाते हैं | आजादी पाने के लिए आंदोलनकारियों एवं सेनानियों ने एक लंबी यात्रा तय की जिसमें अनेक राष्ट्रीय और क्षेत्रीय आंदोलन हुए और उन आंदोलनों में बापू के दो ही प्रमुख अस्त्र उपयोग में लाये गये- सत्य और अहिंसा |

इस अवसर पर भूपेन्द्र चौक के झंडोत्तोलन के बाद डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने यह घोषणा की कि आगामी भूपेन्द्र जयंती के अवसर पर जिले के वैसे विकास प्रेमी समाजसेवी या शिक्षाप्रेमी जो जनहित में लाखों की जमीन, सड़क या स्कूल के निमित महामहिम राज्यपाल के नाम रजिस्ट्री करेंगे- उन्हें जयंती के अवसर पर डॉ.मधेपुरी द्वारा श्रद्धापूर्वक सम्मानित किया जायेगा |

Principal Dr. H.L.S.Jauhari delivering speech after flag hoisting at T.P. College Madhepura campus .
Principal Dr. H.L.S.Jauhari delivering speech after flag hoisting at T.P. College Madhepura campus .

यह भी बता दें कि भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय में कुलपति डॉ.विनोद कुमार ने, बी.एन.मंडल स्टेडियम में डायनेमिक डी.एम. मो.सोहैल ने, टी.पी. कॉलेज में प्रधानाचार्य डॉ.एच.एल.एस. जौहरी ने तथा मधेपुरा नगरपरिषद में डॉ.विशाल कुमार बबलू सहित सभी छोटी-बड़ी संस्थाओं में अत्यंत धूम-धाम से श्रद्धापूर्वक भारतीय तिरंगा लहराया गया |

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लंदन का ये ‘आत्मविश्वास’ बनाए रखना तेजस्वी !

बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव दस दिनों के विदेश दौरे पर हैं। 8 से 15 अगस्त तक वो इंगलैंड में रहेंगे, जबकि 16 और 17 अगस्त को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र संघ के तत्वाधान में आयोजित बिहार आधारित एक कार्यक्रम में शामिल होंगे। अपनी इस यात्रा के दौरान 11 अगस्त को लंदन में उन्होंने प्रवासी भारतीयों से मुलाकात कर बिहार में निवेश की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की। उपमुख्यमंत्री ने प्रवासी भारतीयों को बिहार के गौरवशाली इतिहास के साथ-साथ विगत वर्षों में सकल घरेलू राज्य उत्पाद (जीएसडीपी) में बिहार राज्य के शीर्ष पर होने के कारणों की चर्चा भी की।

तेजस्वी ने बताया कि Ease of Doing Business में देश भर में बिहार कैसे प्रथम स्थान पर है और कैसे यहाँ की इंडस्ट्री पॉलिसी इन्वेस्टमेंट फ्रेंडली है। उन्होंने भारतीय मूल के व्यवसायियों को आंकड़ों के साथ बताया कि देश के तमाम विकसित राज्यों को पछाड़ते हुए बिहार 15.6 प्रतिशत विकास दर के साथ अव्वल राज्य रहा है।

तेजस्वी ने बिहार सरकार के सात निश्चय और इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की चर्चा करते हुए औद्योगिक समूहों को बिहार आने का न्योता दिया। बता दें कि प्रवासी भारतीयों ने बिहार में शिक्षा, स्वास्थ्य, टूरिज्म, स्पोर्ट्स एवं हॉस्पिटैलिटी के क्षेत्र में निवेश की इच्छा जाहिर की और उपमुख्यमंत्री ने सभी को बिहार सरकार की तरफ से हर प्रकार की सहायता का आश्वासन दिया। उन्होंने ब्रिटेन में फुटबॉल फॉर यूनिटी के संस्थापक चरणजीत गिल एवं साउथ हॉल फुटबॉल क्लब के प्रबंध निदेशक के साथ बिहार में फुटबॉल अकादमी खोलने की योजना पर भी गहन चर्चा की।

इससे पहले 10 अगस्त को तेजस्वी ने लंदन के इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियर्स को संबोधित किया और नॉलेज ट्रांसफर सेशन में भाग लिया। इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियर्स में उन्होंने बिहार को लेकर अपना विज़न पेश किया। उन्होंने कहा कि बिहार के लिए वैज्ञानिक और समयबद्ध तरीके से रोड मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। इस मास्टर प्लान के तहत अगले बीस वर्षों में 500 किमी नए नेशनल हाईवे, 6000 किमी नए स्टेट हाइवे और विभिन्न जिलों को जोड़ने वाली करीब 25000 किमी महत्वपूर्ण सड़कों के निर्माण का प्रस्ताव है और इस प्लान को पूरा करने में लगभग 14 बिलियन अमेरिकी डॉलर खर्च होंगे। गौरतलब है कि बिहार में पथ निर्माण विभाग उपमुख्यमंत्री तेजस्वी ही देख रहे हैं।

अपने युवा उपमुख्यमंत्री को लंदन में देखना और उनके मुँह से विकासशील बिहार की बात सुनना निश्चित तौर पर राज्य के लोगों को अच्छा लगना चाहिए। महज नौवीं पास होने के कारण जिन तेजस्वी के ऊपर ना जाने कितने ‘तंज’ कसे गए उन्हें अन्तर्राष्ट्रीय मंच पर आत्मविश्वास से लबरेज देखना सचमुच सुखद है। पर ये सब तब और ज्यादा अच्छा लगता जब बिहार में अक्षरश: वही माहौल होता जिसकी बात तेजस्वी लंदन में कर रहे हैं। ये अजीब विरोधाभास है कि जिस दौरान तेजस्वी लंदन के प्रवासी भारतीयों को बिहार में अच्छे माहौल का भरोसा दिला रहे थे उसी दौरान बेखौफ अपराधियों ने यहाँ बेतिया में पूर्व मंत्री वैद्यनाथ प्रसाद कुशवाहा से 1 करोड़ 20 लाख की रंगदारी वसूलने के लिए उनके घर पर बम फेंका, अरवल में पुलिस लाइन के सामने से रिटायर्ड दारोगा के पोते का अपहरण हुआ, मुजफ्फरपुर में एक कैश कलेक्शन एजेंसी के 4.84 लाख लूटे गए और पूर्णिया में 11 लाख की डकैती को अंजाम दिया गया।

बिहार के युवा उपमुख्यमंत्री अपने मुख्यमंत्री के साथ मिलकर बस इस विरोधाभास को दूर कर दें, फिर वो अपनी ऐसी तमाम यात्राओं के लिए विशेष बधाई के हकदार होंगे। वैसे उनका प्रयास अभी भी सही दिशा में है और इसके लिए उन्हें बधाई तो दी ही जानी चाहिए।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप 

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मधेपुरा के बुद्धिजीवियों व छात्रों ने की सड़क की सफाई

प्रधानमंत्री स्वच्छता अभियान के मद्देनजर मधेपुरा के गणमान्यों-बुद्धिजीवियों-चिकित्सकों एवं छात्रों द्वारा शहर की मुख्य सड़कों की सफाई की गयी | जहां एक ओर सौ छात्रों के हाथों में झाड़ू थे वहीं दूसरी ओर तीन जे.सी.बी. और एक दर्जन ट्रैक्टर भी सफाई अभियान में लगे थे | मधेपुरा के अतिरिक्त सिंहेश्वर के पूर्व प्रमुख उपेंद्र प्रसाद यादव भी पांच ट्रैक्टर ईंट के टुकड़े दान स्वरूप लाये तो 5 ट्रैक्टर पैसे देकर- जिन्हें हॉस्पिटल गेट, बस स्टैंड आदि जल जमाव वाले स्थानों पर डाला गया |

यह भी जानिये कि दो दिन बाद संपूर्ण देश अपना 70वां स्वतंत्रता दिवस धूमधाम से मनाने वाला है | अस्तु आज प्रातः 8:00 बजे भूपेन्द्र चौक से शहर सफाई अभियान को हरी झंडी दिखाकर विदा किया- आरक्षी अधीक्षक विकास कुमार, एसडीएम संजय कुमार निराला, समाजसेवी डॉ.मधेपुरी, शौकत अली, वुमन डिग्निटी की अध्यक्षा डॉ.शांति यादव, डॉ.नायडू-श्री चन्द्रशेखर आदि |

बता दें कि केंद्र सरकार के स्वच्छता अभियान के तर्ज पर राज्य सरकार भी “स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार योजना” का ऐलान किया है जिसमें सूबे के 20 प्रारंभिक एवं 20 माध्यमिक विद्यालयों को निर्धारित 5 मानकों के आधार पर चुनकर पुरस्कृत किया जायगा | वे 5 मानक हैं- स्वच्छ पेयजल, स्वच्छ शौचालय, स्वच्छ स्कूल परिसर, स्वच्छ पोशाक एवं छात्रों की स्वच्छ आदतें |

काश ! मधेपुरा के चिकित्सकों डॉ. डी.के.सिंह, डॉ. एस.एन.यादव, वार्ड आयुक्तों ध्यानी यादव, रविंद्र कुमार यादव के साथ-साथ स्काउट गाइड के आयुक्त जय कृष्ण यादव, कृष्ण मंदिर के सचिव चंद्रशेखर एवं समाजसेवी शौकत अली सहित किसान-मजदूर, छात्र-नौजवान, व्यापारी-व्यवसायी आदि ह्रदय से चाह ले तो मधेपुरा भी प्रधानमंत्री स्वच्छता अभियान के बाबत अपनी पहचान बनाने में सफल होगा और आने वाले दिनों में कभी न कभी पुरस्कृत भी होगा |

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