आइंस्टीन और हॉकिंग से अधिक है भारत की बेटी काश्मिया का आईक्यू

अल्बर्ट आइंस्टीन और स्टीफन हॉकिंग इस धरती पर मानव-मस्तिष्क के सर्वश्रेष्ठ उदाहरण हैं। अपनी बेजोड़ उपलब्धियों से इन महान वैज्ञानिकों ने मानव-मस्तिष्क की अद्भुत क्षमता से हमारा परिचय कराया। आज मानव-जाति ने टेक्नोलॉजी के मामले में अभूतपूर्व प्रगति कर ली है और करोड़ों मस्तिष्क दिन-रात ‘असंभव’ को ‘संभव’ बनाने की जंग में जुटे हुए हैं तब भी आइंस्टीन और हॉकिंग के आगे का रास्ता अभी तय नहीं हो पाया है। ऐसे में 11 साल की एक बच्ची आईक्यू के मामले में इन दोनों दिग्गजों को पीछे छोड़ दे तो इसे कुदरत के करिश्मा के अलावा क्या कहेंगे आप..? और जब आपको कहा जाय कि ये कमाल भारत की किसी बेटी ने किया है तो क्या प्रतिक्रिया होगी आपकी..?

जी हाँ, ब्रिटेन में रह रही भारतीय मूल की 11 वर्षीया काश्मिया वाही ने ‘मेनसा’ की आईक्यू परीक्षा में सौ फीसदी यानि 162 में से 162 अंक लाकर अल्बर्ट आइंस्टीन और स्टीफन हॉकिंग को पीछे छोड़ दिया है। काश्मिया की ये उपलब्धि कितनी बड़ी है इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि सार्वकालिक महान जिन दो वैज्ञानिकों के नाम ऊपर लिए गए हैं उनका आईक्यू 160 माना जाता है।

मुंबई में जन्मी काश्मिया के पिता विकास लंदन के एक बैंक में आईटी प्रबंधन से जुड़े हैं और माँ का नाम पूजा वाही है। पश्चिमी लंदन के नॉटिंग हिल एंड ईलिंग जूनियर स्कूल की इस छात्रा ने अपने माता-पिता की नज़र में खुद को साबित करने के लिए ‘मेनसा’ की प्रतिष्ठित परीक्षा में हिस्सा लिया था। बता दें कि ‘मेनसा’ संसार की सबसे बड़ी और सबसे पुरानी उच्च आईक्यू सोसायटी मानी जाती है और “कैटल-3 बी मेनसा” आईक्यू के आकलन की अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति रखने वाली प्रक्रिया है। इसके तहत कुल 150 सवाल पूछे जाते हैं और इस परीक्षा में शामिल होने की न्यूनतम आयु साढ़े दस साल है।

अपनी करिश्माई उपलब्धि के बाद काश्मिया ने कहा कि आइंस्टीन और हॉकिंग जैसी महान हस्तियों से तुलना किए जाने से अभिभूत हूँ। यह तुलना अकल्पनीय है। मेरा मानना है कि ऐसी महान हस्तियों की श्रेणी में शामिल होने के लिए ढेरों उपलब्धियां हासिल करनी होंगी। वहीं बेटी की सफलता से भाव-विभोर माता-पिता का कहना है कि हम हमेशा से महसूस करते थे कि उसके पास अलौकिक बुद्धि है और मौका दिया जाय तो अपनी बुद्धिमत्ता को वह साबित कर सकती है।

ये जानना दिलचस्प होगा कि मानव-मस्तिष्क का नया छोर बन चुकी काश्मिया शतरंज की बेजोड़ खिलाड़ी हैं और कई राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं जीत चुकी हैं। यही नहीं, उसे नेट बॉल खेलना भी पसंद है। अतुलनीय प्रतिभा की धनी भारत की इस बेटी को जगमगाते भविष्य के निमित्त मधेपुरा अबतक की ढेरों शुभकामनाएं।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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सुशील मोदीजी, बिहार में अगर अपराध बढ़े हैं तो जवाब सीएम देंगे या लालू..?

भाजपा समेत एनडीए के तमाम दल राज्य की कानून-व्यवस्था को मुद्दा बना बिहार की महागठबंधन सरकार को घेरने में लगे हैं। सरकार कहीं की और किसी भी पार्टी की हो, विपक्षी दल का काम ही है उसे घेरना। जरूरी हो तब भी, ना हो तब भी। इसमें कोई नई बात नहीं। जहाँ तक बिहार की कानून-व्यवस्था का प्रश्न है, उस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष की राय अलग-अलग हो सकती है और है भी। अगर थोड़ी देर के लिए मान लें कि बिहार में आपराधिक घटनाएं बढ़ी हैं तो भी सवाल सरकार के मुखिया से होना चाहिए ना कि सरकार में शामिल दलविशेष के मुखिया से। लेकिन बिहार में ऐसा नहीं हो रहा।

बिहार के मुख्य विपक्षी दल भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी बिहार में ‘अपराधियों के कोहराम’ की बात करते हैं लेकिन सवाल पूछते हैं राजद के मुखिया लालू प्रसाद यादव से कि ‘ऐसा कब तक चलेगा’। मुख्यमंत्री की कुर्सी पर अगर पहले की तरह राबड़ी होतीं या सरकार तेजस्वी के नेतृत्व में चल रही होती या फिर मुख्यमंत्री राजद से ही कोई होता तो सुमो का लालू से सवाल करना समझ में आता। तब ये भी मान लिया जाता कि सरकार ‘रिमोट’ से चल रही है और सुमो बीच में वक्त जाया ना कर सीधे ‘रिमोट’ से मुखातिब हैं। लेकिन यहाँ सामने नीतीश हैं। ना केवल चुनाव उनके नेतृत्व में लड़ा गया बल्कि मुख्यमंत्री पद के वो घोषित उम्मीदवार थे। महागठबंधन के सरकार में आने के पीछे ये बहुत बड़ा, शायद सबसे बड़ा फैक्टर रहा है। मुख्यमंत्री के तौर पर नीतीश की क्षमता और सामर्थ्य भी संदेह से परे है। फिर सवाल उनसे ना कर लालू से क्यों..?

सुशील कुमार मोदी का कहना है कि लालू की नसीहत के बाद भी सरकार अपराधियों पर नकेल कसने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि बैंक लूट, निर्माण कम्पनियों के अधिकारियों व कर्मियों को धमकाने और हत्या का सिलसिला अभी थमा भी नहीं कि अपराधियों ने पुलिस को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। वैशाली में एएसआई अशोक कुमार यादव की हत्या राज्य सरकार के लिए गम्भीर चुनौती है। लगभग डेढ़ माह पहले वैशाली के ही लालगंज में एक दारोगा की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। मोदी ने कहा कि ऐसी स्थिति में सरकार के बड़े घटक दल का नेता होने के नाते लालू को अपनी चुप्पी तोड़नी चाहिए और बताना चाहिए कि बिहार में अपराधियों का यह कोहराम कब तक चलता रहेगा।

इसमें कोई दो राय नहीं कि इस तरह की घटनाएं चिन्ता का विषय हैं। इनकी कड़ी निन्दा और भर्त्सना होनी चाहिए। लेकिन बात केवल यहीं तक नहीं रहती। राजनीति की ‘गुंजाइश’ ऐसे मौकों पर भी निकल जाती है या निकाल ली जाती है। अभी दो दिन बीते हैं जब एनडीए के घटक दल ‘हम’ के नेता मांझी ने कानून-व्यवस्था के ही मुद्दे पर नीतीश के ‘बेचारा’ होने की बात कही थी और ‘बदनामी’ मोल लेने के बजाए मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा देने की सलाह दी थी। इस्तीफे की सलाह देकर मांझी जहाँ पहुँचे, लालू से सवाल कर मोदी भी वहीं पहुँच रहे हैं लेकिन अलग कोण से। स्पष्ट है कि नीतीश को लालू के बहाने घेरने की कोशिश की जा रही है। यही कोशिश चुनाव के दौरान भी की गई थी। परिणाम क्या रहा, ये सबके सामने है। कम-से-कम कानून-व्यवस्था और विकास के मुद्दे पर तमाम दलों के बीच सीधा संवाद हो तो बेहतर है। वैसे भी नीतीश के साथ काम करने का सुमो का लम्बा अनुभव है। बदली हुई परिस्थितियों में दोनों आज भले ही अलग-अलग हों, राज्य के हित में कुछ मुद्दों पर तो साथ होकर सकारात्मक भूमिका निभा ही सकते हैं।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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मध्य प्रदेश नाट्य विद्यालय भोपाल से प्रशिक्षित मो. शहंशाह ने पेश की एक अदभुत प्रस्तुति..!

टी.पी. कॉलेज के विशाल सभा भवन में ठसमठस भरे दर्शकों के समक्ष मध्य प्रदेश नाट्य विद्यालय, भोपाल से प्रशिक्षण प्राप्त मो. शहंशाह ने  मधेपुरा में ‘नवाचार रंग मंडल’ का गठन कर अपनी प्रथम प्रस्तुति – ‘कुमतिनगर का किस्सा’ – का सफल निर्देशन एवं मंचन कर खूब तालियाँ बटोरीं। कार्यक्रम की सफलता हॉल के अन्दर बारम्बार बज रही तालियों की अनुगूंज और बाहर खड़े दर्शकों द्वारा आँकी जाती रही।

संसाधनों की कमी के बावजूद भी हास्यशैली पर आधारित लेखक राजकमल नायककृत  “कुमतिनगर का किस्सा” अपने उद्देश्य में सफल होता है और दर्शकों पर पूरा प्रभाव छोड़ता है।

एक राज्य है कुमतिनगर, जहाँ का राजा अपने राज्य में लोगों के शिक्षित होने पर पाबंदी लगा देता है। फिर भी गुरु की भूमिका निभाने वाले मो. शहंशाह अपने एक शिष्य ‘आनंद’ के साथ कुमतिनगर के लोगों को पढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। आरम्भ में शिष्य ‘आनंद’ गुरु एवं गुरु ग्रन्थ की अनदेखी कर और लोगों को ठग कर बस अच्छा-अच्छा भोजन ग्रहण करने में लग जाता है। इसके बावजूद राजा ‘आनंद’ को कोतवाल बना देता है। दूसरी तरफ शिक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने वाले गुरु (मो. शहंशाह) पर राजद्रोह करार कर सिर कलम करने की घोषणा कर देता है।

अचानक कोतवाल बने शिष्य ‘आनंद’ का अंतर्मन जागृत हो जाता है। वह गुरु को सूली पर नहीं चढ़ाने के लिए राजा से प्रार्थना करता है। इसी के साथ शिष्य के अंतर्मन में शिक्षा-शिक्षक एवं ग्रन्थ के प्रति सम्मान व संस्कार जाग उठता है। ऐसा लगता है जैसे शिष्य का स्वप्न टूट चुका हो।

Students & Guardians observing Play “Kumati Nagar ka Kissa” in T.P. College Sabha Bhawan
Students & Guardians observing Play “Kumati Nagar ka Kissa” in T.P. College Sabha Bhawan

कालांतर में वह शिष्य ‘आनंद’ अपने गुरु (मो. शहंशाह) के साथ शिक्षा के प्रचार-प्रसार में अहर्निश इस कदर काम करने लगता है जैसे आधुनिक बिहार के निर्माता अमर स्वतंत्रता सेनानी एवं बिहार के प्रथम विधि मंत्री बाबू शिवनंदन प्र. मंडल के जीवन-दर्शन –

….Not a single soul should remain uneducated on the Earth.

को कुमतिनगर की घरती पर जन-जन तक ले जाने के बाद ही दम लेंगे दोनों। दोनों गुरु-शिष्य मिलकर ज्ञान के तिरस्कार को खत्म करते हैं और विनाश के द्वार को बंद कर देते हैं।

टी.पी. कालेज के विशाल सभागार में “नवाचार रंग मंडल” की प्रथम प्रस्तुति ‘कुमतिनगर का किस्सा’ का उद्घाटन प्रधानाचार्य डॉ. एस.एल.एस. जौहरी, डॉ. मधेपुरी, प्रो. एस. के. यादव, डॉ. जे. पासवान, डॉ. के.डी. यादव, दशरथ प्र. सिंह, ध्यानी यादव आदि ने सम्मिलित रूप से दीप प्रज्वलित कर डॉ. विश्वनाथ विवेका, डॉ. अरुण, प्रो. अद्री, डॉ. अरविन्द एवं रुपेश कुमार आदि की उपस्थिति में किया। इस अवसर पर प्रधानाचार्य डॉ. जौहरी ने कहा कि कला और संस्कृति जीवन को संस्कारित करती है। जीवन का अहम हिस्सा बनकर उसे आगे बढाती है। मौके पर अन्य वक्ताओं ने कहा कि पहाड़ भी प्रतिभाओं के सामने बाधा बनकर खड़ा नहीं रह सकता।

वहीँ डॉ. मधेपुरी ने कहा कि मधेपुरा के नाम को रोशन करने वाली प्रतिभाओं के प्रतीक – सोनी, पायल, रियांशी, रवि, हर्षवर्धन सिंह राठौड़, मो. शहंशाह आदि – को आर्थिक मदद देते रहने के लिए वे हमेशा खड़े रहे हैं और भविष्य में भी प्रतिभाओं के रास्ते में पैसे की बाधा को दूर करने के लिए वे हमेशा तत्पर व मुस्तैद रहेंगे। नाटक की सफलता के लिए मो. आतिफ, इमरान, दीपक, राहुल, रवि, बमबम, श्रीकांत, संदीप, कैसर, आनंद, सुमित, निशा, कार्तिक के साथ-साथ गायक रोशन कुमार, अंशु, गुड्डू, प्रिया, कशिश, परवीण आदि ने अपनी अच्छी उपस्थिति दर्ज करायी।

वस्त्र-रूप व मंच सज्जा सहित विभिन्न प्रकार के सहयोग के लिए सोनी राज, प्रीति, शिवानी, दिलखुश, अंजलि, आदित्य, शुभम-अमल-मिथुन सहित शहनवाज-शकील एवं उज्ज्वल-हर्षवर्धन-रिजवान-विजय आदि पताका फहराते रहे। मंच संचालन अंशु एवं हर्षवर्धन सिंह राठौड़ ने किया।

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नीतीश के ‘बेचारा’ और ‘बदनाम’ होने से क्यों परेशान हैं मांझी..?

जी हाँ, कल तक जो मांझी नीतीश को ‘कीचड़’ से नहलाते नहीं थक रहे थे, आज वही परेशान हैं उनके ‘बेचारा’ और ‘बदनाम’ होने से। मांझी की मानें तो नीतीश ‘बेचारा’ हो गए हैं क्योंकि आज बिहार में ताज किसी और का और राज किसी और का है। ऐसे में बेवजह ‘बदनाम’ होने से बेहतर है कि नीतीश मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दें।

गुरुवार को अपने पटना स्थित सरकारी आवास पर पत्रकारों से बात करते हुए बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और ‘हम’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतन राम मांझी ने कहा कि बिहार में महागठबंधन की सरकार बनने के बाद से बढ़ते ‘अनुचित दबाव’ के कारण राज्य के करीब 35 आईएएस और आईपीएस अधिकारी लिखित रूप से केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने की इच्छा जता चुके हैं। इससे बिहार में शासन-व्यवस्था की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। मांझी ने हाल के दिनों में दरभंगा और वैशाली जिलों में अभियंताओं की हत्या की चर्चा की और राज्य की बिगड़ती कानून-वयवस्था पर चिन्ता जताते हुए दावा किया कि बिहार में पिछले 60 दिनों के भीतर रंगदारी, अपहरण, बैंक डकैती, लूट और हत्या जैसी करीब 600 आपराधिक घटनाएं घटी हैं और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ठोस कार्रवाई करने के बजाए ‘गीदड़ भभकी’ देने में लगे हैं।

मांझी ने हाल में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव द्वारा कथित तौर पर पटना स्थित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस) का निरीक्षण करने को लोकतांत्रिक दृष्टि से अनुचित बताया। उन्होंने कहा कि पूरे देश में चर्चा है कि बिहार में ताज किसी और का और राज किसी और का है। अगर नीतीश कुमार इस कदर ‘बेचारा’ हो गए हैं और इतने दबाव में हैं कि कोई एक्शन नहीं ले सकते तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। बिहार में सचमुच जिनका राज है वे ही सत्ता चलाएं, नीतीश क्यों बेवजह बदनाम हो रहे हैं..?

इतना सब कुछ कहने के बाद मांझी ये कहना भी नहीं भूले कि वे नीतीश कुमार के प्रति ‘हमदर्दी’ रखते हैं क्योंकि नीतीश ने ही उन्हें मुख्यमंत्री बनने का मौका दिया था। यही कारण है कि वे उन्हें बेहतर सलाह दे रहे हैं। मांझी की मानें तो नीतीश इस्तीफा देकर ‘बदनाम’ होने से बच सकते हैं।

मांझी ने बहुत दिनों के बाद लेकिन बहुत सम्भल कर मुँह खोला है। एक ओर सरकार के कामकाज और राज्य की कानून-व्यवस्था पर तल्ख टिप्पणी और दूसरी ओर नीतीश को इस्तीफे के लिए कहना लेकिन उनके ‘योगदान’ को याद कर और उनसे ‘हमदर्दी’ जताते हुए, ये वास्तव में एक तीर से कई निशाने को साधने की कोशिश है। मांझी ने बेशक कड़ी आलोचना की है लेकिन हर बात के लिए ठीकरा सरकार में भागीदार लालू और उनकी पार्टी राजद पर फोड़ा है। बता दें कि विधानसभा चुनाव से पूर्व वो लालू ही थे जिन्होंने मांझी को भाजपा छोड़ महागठबंधन में आने का न्योता तक दिया था लेकिन आज जब मांझी ने मुँह खोला है तो उनके निशाने पर वही लालू हैं।

आखिर लालू के खिलाफ मोर्चा खोल क्या हासिल करेंगे मांझी..? चुनाव में एकमात्र अपनी सीट (और वो भी दो सीटों पर लड़ने के बाद) बचाने वाले मांझी को इन दिनों भाजपा से कोई तरजीह नहीं मिल रही। ऐसे में कहीं नई जमीन तलाशने की कोशिश तो नहीं कर रहे मांझी..? या फिर ‘बड़े भाई – छोटे भाई’ के बीच दरार पैदा करने के लिए ये भाजपा का ही ‘गेमप्लान’ है..?

जो भी हो, राजनीति में कभी सीधी चाल नहीं चली जाती। और आजकल तो ‘टेढ़ी’ चाल में भी इतने ‘मोड़’ और ‘घुमाव’ होने लगे हैं कि कुछ भी कहना बहुत मुश्किल हो गया है। हाँ, इतना जरूर है कि बदले हुए हालात में मांझी को अपनी ‘नाव’ और ‘पतवार’ दोनों पर फिर से विचार करना पड़ रहा है। ऐसा करना उनकी राजनीतिक मजबूरी भी है। नहीं तो कल तक तक खुद को बिहार में महादलितों का सबसे बड़ा नेता कहने वाले को कुछ दिनों के बाद ‘अस्तित्व’ के संकट से जूझना पड़ जाय तो कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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मधेपुरा में जारी है मानवता के विरुद्ध घृणित अपराध

बाल कल्याण समिति मधेपुरा द्वारा विगत एक्स-मास की छुट्टी में 10 बच्चों को मजदूरी कराने के लिए दिल्ली-पंजाब ले जा रहे गिरोह से छुटकारा दिलाकर उन्हें उनके अभिभावकों को सौंप दिया गया |

‘Madhepura Abtak’ को प्राप्त जानकारी के अनुसार ऐसे घृणित अपराध के तीन ठीकेदारों द्वारा मधेपुरा जिले के विभिन्न गाँवों के दस किशोरों को माँ की ममतामयी छांव से दूर ले जाने का प्लान रचा गया | फलस्वरूप उन दसो-बालकिशोरों –आलमनगर के एक मुकेश कुमार, रतवाड़ा के तीन- ध्रुव-मिथुन-सौरभ कुमार, खुरहान के दो- राधे और रिपन, चिरौरी के कन्हैया, गंगापुर के पवन, मोरसंडा के गौरव कुमार एवं घुरगाँव के रविन्द्र कुमार को वे तीनो घृणित अपराध कर्मी अपने कब्जे में कर लिये |

ये सभी किशोर सरकारी स्कूल के वर्ग 3 से 8 में पढने की बात कहते रहे जिनमें से चार तो मधेपुरा अबतक को स्कूली ड्रेस में ही दिखे | ऐसे उन्मुक्त बचपन को बाल मजदूरी की खाई में गिरने से पहले ही जी.आर.पी. की सूचना पर चाईल्ड लाइन सहरसा के अधिकारियों ने छापेमारी कर अपने कब्जे में ले लिया और माँ-बाप के ममत्व भरे मंदिर में पूजा-अर्चना करने हेतु वापस करने के लिए बाल कल्याण समिति (सी.डब्लू.सी.) सहरसा को हस्तगत करा दिया |

सी.डब्ल्यु.सी के सदस्य डॉ.नरेश रमण एवं अध्यक्ष पूनम कुमारी दास ने मुक्त कराये गये इन बाल मजदूरों की सूचना सहरसा श्रम अधीक्षक को दे दी  | बच्चों ने बताया कि बिना अभिभावकों की सहमति के वे इन मानव व्यापारियों द्वारा दिये गये लोभ के कारण उनके साथ जाने को तैयार हुए थे जबकि बच्चों ने ठीकेदारों के नाम तक नहीं जानने की बात स्वीकार की |

सी.बी.आई. के हालिया रिपोर्ट के अनुसार 8 हजार मासूम बच्चियों को दिल्ली के रास्ते दुबई भेजा गया – जिसमें अधिकांश किशोरियों के माता-पिता के बिहार,झारखंड और बंगाल से होने की बात कही गई है | जरा सोचिये तो सही, ममता को तरसता मासूम बच्चा अपने माँ-बाप से अलग होकर कैसे रहता होगा  !!

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बिहार के बाद ‘मिशन असम’ पर हैं नीतीश और उनके ‘चाणक्य’

बिहार में महागठबंधन की जीत में बड़ी भूमिका निभाने वाले नीतीश के चाणक्य प्रशांत किशोर ने अब असम का रुख किया है। नीतीश ने उन्हें बिहार की तरह असम में भी ‘महागठबंधन’ की सम्भावना तलाशने भेजा है। सूत्रों के मुताबिक प्रशांत किशोर पिछले सप्ताह असम में थे और उन्होंने असम की पार्टी एआईयूडीएफ के नेता बदरूद्दीन अजमल से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ‘लम्बी’ बातचीत कराई है।

2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को असम में बड़ी कामयाबी मिली थी। तब सबको चौंकाते हुए उसने वहाँ की 14 में से 7 लोकसभा सीटें जीत ली थीं। राज्य में भाजपा की बढ़ती ताकत को देख उसे रोकने लिए तमाम विरोधी दल एक होने की जरूरत महसूसने लगे थे पर किसी ‘सम्भावना’ को ठोस आकार नहीं मिल पा  रहा था। बिहार में जेडीयू-राजद-कांग्रेस महागठबंधन की सफलता से इस सम्भावना को आकार और गति देने का फार्मूला मिल गया और उस फार्मूले को जमीन पर उतारने के लिए प्रशांत किशोर जैसा रणनीतिकार भी। लिहाजा राजनीति की नब़्ज पहचानने वाले नीतीश ने अपने ‘चाणक्य’ को ‘मिशन असम’ पर भजने में जरा भी देर नहीं की।

बता दें कि जेडीयू असम में एआईयूडीएफ, असम गण परिषद और कांग्रेस के ‘महागठबंधन’ को आकार देने में लगी है। पार्टी के महासचिव केसी त्यागी का मानना है कि इन दलों के एक साथ आने पर भाजपा को रोकना बहुत आसान होगा।

असम में नीतीश की ‘चहलकदमी’ अप्रत्याशित नहीं है। उनके शपथग्रहण में देश भर के तमाम मोदीविरोधी दलों और दिग्गज नेताओं के जमावड़े ने स्पष्ट कर दिया था कि वो पाँचवीं बार बिहार की सत्ता पाकर ही रुकने वाले नहीं हैं। उनका अगला कदम मोदीविरोधी राजनीति की धुरी बन स्वयं को मोदी के विकल्प के तौर पर पेश करना होगा। असम से उन्होंने इसी की शुरुआत की है। पश्चिम बंगाल और यूपी पर भी उनकी निगाह बराबर बनी हुई है। ये देखना खासा दिलचस्प होगा कि आँकड़ों के लिहाज से केवल बिहार में राजनीतिक वज़ूद रखनेवाले एक दल का नेता क्या केवल अपनी ‘छवि’ की बदौलत मोदी के राष्ट्रीय कद और भाजपा के राष्ट्रीय नेटवर्क का मुकाबला कर पाएगा..?

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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बिहार में बनी सरकार… तो मिल गया मोदी पर मुकदमे का अधिकार..?

बिहार में चुनाव खत्म हो चुके। महागठबंधन की सरकार भी बन चुकी। लेकिन विकास के नाम पर राजनीति अब भी जारी है। जुम्मा-जुम्मा आठ दिन बीते कि भाजपा को बिहार में ‘जंगलराज’ दिखने लगा और राजद विशेष पैकेज को मुद्दा बना प्रधानमंत्री को अदालत में घसीटने की तैयारी करने लगी। जी हाँ, राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह ने बिहार के लिए घोषित सवा लाख करोड़ के विशेष पैकेज को नहीं देने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अदालत में घसीटने की धमकी दी है।

पूर्व केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री ने कहा कि मोदी ने चुनाव के पहले ही बिहार को विशेष पैकेज देने की घोषणा की थी, जिसके मिलने की उम्मीद अभी तक नहीं दिख रही है। अब और इंतजार नहीं किया जा सकता। अब हिसाब होगा। ‘हिसाब’ करने के लिए राजद के इस दिग्गज नेता को ‘एकमात्र’ विकल्प अदालत का दिख रहा है और इसके लिए वो जल्द ही किसी अच्छे वकील से सलाह लेने वाले हैं।

प्रधानमंत्री पर बिहार की हकमारी और यहाँ की जनता के साथ धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए रघुवंश प्रसाद सिंह ने कहा कि उन्होंने बिहार को विशेष पैकेज देने का वादा करके उलटे कई केन्द्रीय योजनाओं की राशि में कटौती कर दी है। यह बिहार के साथ अन्याय है। खासकर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की राशि में कटौती कर नरेन्द्र मोदी सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के काम और विचारों की हत्या कर दी है।

रघुवंश प्रसाद सिंह ना केवल राजद बल्कि बिहार के चुनिंदा नेताओं में गिने जाते हैं। राज्य और केन्द्र में वो कई जिम्मेदार पदों पर रह चुके हैं। बिहार के लिए उनकी चिन्ता स्वाभाविक है और सराहनीय भी। लेकिन उनका ‘अधैर्य’ समझ के परे है। बिहार में महागठबंधन की सरकार बन जाने का ये अर्थ कतई नहीं कि उन्हें या उनकी पार्टी को कभी भी और किसी पर भी मुकदमे का अधिकार मिल गया। चुनाव से पहले नीतीश कुमार ने भी सात निश्चयों की घोषणा की थी। क्या सारे ‘निश्चय’ पूरे किए जा चुके..? बिहार ने नीतीश पर विश्वास किया है और वो उस विश्वास पर खरा उतरने की हर सम्भव कोशिश भी करेंगे लेकिन इसमें वक्त लगेगा। अगर नीतीश और उनकी राज्य सरकार को इसके लिए वक्त दिया जा सकता है तो केन्द्र की मोदी सरकार को क्यों नहीं..?

हर मुद्दे का राजनीतिकरण करने की प्रवृत्ति ठीक नहीं। लेकिन ये बीमारी महामारी की तरह फैल चुकी है। इतनी जल्दी ‘नाउम्मीद’ होने और ‘मुकदमा’ में समय और पैसा खर्च करने के बदले रघुवंश बाबू और उनकी पार्टी महागठबंधन के अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर प्रधानमंत्री और केन्द्र सरकार से बात करें तो शायद बिहार का अधिक भला हो। इस तरह के पैकेज की घोषणा चाहे केन्द्र की सरकार करे या राज्य की, उसे एक झटके में पूरा करना सम्भव नहीं। हमें समझना होगा कि कई तरह की प्रक्रियाओं से गुजरकर ही ऐसे वादों को अमलीजामा पहनाया जा सकता है। हमें थोड़ा ‘धैर्य’ और थोड़ा ‘विश्वास’ राजनीति से ऊपर उठकर रखना होगा। विकास के लिए ‘टकराव’ भी एक रास्ता हो सकता है लेकिन ‘सहयोग’ की हर सम्भावना खत्म होने के बाद।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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प्रखर शिक्षाविद एवं कुशल राजनीतिज्ञ डॉ.एम.पी.यादव की जयन्ती टी.पी.कॉलेज सभागार में समारोहपूर्वक मनी

प्रधानाचार्य, प्रतिकुलपति एवं कुलपति रह चुके कुशल राजनीतिज्ञ डॉ.महावीर प्रसाद यादव की 90वीं जयन्ती समारोह का आयोजन “डॉ.महावीर सामाजिक एवं सांस्कृतिक शोध संस्थान” ट्रस्ट के बैनर तले श्रद्धापूर्वक किया गया जिसकी सफलता के लिए उनके पुत्र डॉ.अरुण एवं पुलिस इन्स्पेक्टर मनोज कुमार की आकुल-व्याकुल उपस्थिति सराहनीय रही | बन्धु द्वय ने बिहार सरकार के वरिष्ठतम मंत्री व उद्घाटनकर्ता बिजेन्द्र प्रसाद यादव एवं विधायक अनिरुद्ध प्रसाद यादव सहित मंचासीन सभी अतिथियों को पुष्प-गुच्छ के साथ चादर ओढ़ाकर सम्मानित किया |

कार्यक्रम का श्रीगणेश “महावीर द्वार” शिलान्यास से आरम्भ किया गया तथा सभागार में सर्वप्रथम उनके तैलचित्र पर उद्घाटनकर्ता माननीय मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, विधायक अनिरुद्ध प्रसाद यादव, पूर्व कुलपति डॉ.जयकृष्ण प्रसाद यादव, डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी, डॉ.के.एन.ठाकुर, प्राचार्य-अध्यक्ष डॉ.एच.एल.एस.जौहरी, विधान पार्षद विजय कुमार वर्मा, विधायक रमेश ऋषिदेव, पूर्व विधायक परमेश्वरी प्रसाद निराला, प्रतिकुलपति डॉ.के.के.मंडल, पूर्व विधायक दिलकेश्वर मेहता सहित स्वागताध्यक्ष डॉ.शिवनारायण यादव, संयोजक डॉ.शैलेन्द्र कुमार, निवेदक डॉ.परमानन्द यादव, उद्घोषक डॉ.उदयकृष्ण व अंचलाधिकारी मिथिलेश कुमार आदि के साथ-साथ सभाभवन में महावीर बाबू के श्रद्धावनत शिष्यगण तथा उनमें आस्था रखनेवाले शिक्षानुरागी-बुद्धिजीवी, छात्र-छात्राओं द्वारा पुष्पांजलि अर्पित किया गया और संस्मरण, स्नेह एवं हृद्योदगार व्यक्त किया गया- जिनमें प्रमुख रूप से उपस्थित देखे गये सहरसा से गोपाल बाबू, डॉ.विद्यानंद मिश्र, सुपौल से केशर कुमार सिंह, डॉ.नरेश कुमार, आरक्षी निरीक्षक गजेन्द्र कुमार, प्रो.रीता कुमारी, शम्भू ना.यादव, प्रो.विजेन्द्र ना.यादव, पूर्व प्रमुख सिया शरण यादव, सीनेट सदस्य विद्यानन्द यादव आदि |

फिर उस महामना डॉ.महावीर की तरह चारो ओर शिक्षा के प्रकाश को फैलाने के लिए दीप प्रज्वलित कर सबों ने उनके प्रति उदगार व्यक्त किया | उदगार व्यक्त करने वालों में सहरसा के गोपाल बाबू ने एक मिनट में यही कहा- हरि अनंत हरि कथा अनंता……|

Intellectuals attending 90th Jayanti Samaroh of Dr.M.P.Yadav at T.P.College Sabha Bhavan Madhepura .
Intellectuals attending 90th Jayanti Samaroh of Dr.M.P.Yadav at T.P.College Sabha Bhavan Madhepura .

फिर डॉ. विद्यानंद मिश्र, सुपौल के केशर सिंह सहित प्रो.रीता कुमारी,डॉ.नरेश कुमार, प्रो. बिजेंद्र ….. आदि प्रमुख रहे जिन्होंने महावीर बाबू के विभिन्न स्वरूपों , संस्मरणों एवं कार्यों की चर्चाएँ की |

ज्योहिं अध्यक्ष – स्वागताध्यक्ष द्वारा वक्ताओं पर समय की पावंदी लगाई गई कि इसी बीच डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने अपने संबोधन में बस इतना ही कहा – महानुभाव ! संस्थापक प्राचार्य श्रधेय रतनचन्द ने वट वृक्ष के जिस नन्हें से शिक्षा बीज ( टी.पी.कालेज) को मधेपुरा की माटी में खड़ा किया था और कालांतर में जिसे डॉ.महावीर विश्वकर्मा बनकर इतना विराट बना दिया उसे समय के दो मिनट वाली कटोरी में समा देना क्या संभव होगा – शिवनारायण बाबू ! क्या इस पुनीत अवसर पर उद्घाटनकर्ता महोदय को भी संबोधित न करूँ जो बिहार सरकार के हाथ-पैर जैसे मंत्री नहीं बल्कि सरकार की रीढ कहे जाने वाले वरीय मंत्री हैं – बिजेंद्र बाबू ! जिन्होंने मधेपुरा को शिक्षा का हब बनाने के लिए बी.एन.एम.यू.निर्माण से लेकर कर्पूरी मेडिकल कालेज, बी.पी. मंडल इंजिनियरिंग कालेज के लिए लगभग एक हजार करोड की राशि अपने वित्त मंत्रित्वकाल में दिया था | इसी क्रम में मंचासीन अतिथियों ने विस्तार से महावीर बाबू के गुणों की चर्चा की |

अंत में उद्घाटनकर्ता माननीय मंत्री बिजेंद्र प्र.यादव ने अपने संबोधन में कहा कि रतनचंद एवं महावीर बाबू जैसे पुरुखों को याद कर हम ज्ञान अर्जित करके आगे बढ़ने का रास्ता तलाश सकते हैं | ऐसे ही लोग काम के बल पर पद से ऊपर उठ जाते हैं | शिक्षक, शिक्षा एवं शिक्षालयों में सुधार लाने के बाबत उन्होंने महात्मा गाँधी एवं टैगोर के बीच के संस्मरण सुनाकर यही कहा कि सिर्फ कहने से ही नहीं बल्कि करने से ही काम होता है | अंत में सदाशिव टेम्पुल एवं माया निकेतन की शिक्षिका शशि प्रभा के निर्देशन में छात्राओं ने “महावीर–गीत” प्रस्तुत किया | प्रो.विष्णुदेव यादव ने धन्यवाद् ज्ञापन किया |

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समाज का रक्षक एवं रखवाला होता है शिक्षक

भूपेन्द्र चौक मधेपुरा स्थित शांति आदर्श मध्य विद्यालय में गुरुवार (31 दिसम्बर 2015) को सेवानिवृत होनेवाली प्रधानाध्यापिका श्रीमती सरला कुमारी की विदाई एवं पदभार ग्रहण करनेवाली प्रधानाध्यापिका श्रीमती लता कुमारी का स्वागत समारोह विद्यालय परिवार द्वारा आयोजित किया गया |

वक्ताओं की लम्बी सूची होने के बाबजूद सबों ने श्रीमती सरला के लम्बे कार्यकाल में किये गये कार्यों, स्कूल संचालनों से जुड़े तथ्यों को गागर में सागर भरने की कुशलता के साथ सम्पन्न किया | उनके सरल स्वभाव एवं अहंकार शून्य चरित्र की सराहना सबों ने की |

Teachers and Students attending Vidai Samaroh
Teachers and Students attending Vidai Samaroh

विदाई समारोह जिला प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष वीरेन्द्र कुमार यादव की अध्यक्षता में हुई और विशेष रूप से संघ के पदाधिकारीगण की उपस्थिति देखी गई | शिक्षक संघ के सचिव लाल बहादुर यादव, राज्य प्रतिनिधि आशीष कुमार, पूर्व प्रधानाध्यापिका प्रभावती देवी, द्रौपदी कुमारी, शैल कुमारी, माधुरी कुमारी सिन्हा, धर्मशीला-रेखा सहित समाजसेवी शौकत अली, वरीय अधिवक्ता सी.डी.सिंह आदि द्वारा अपने उद्गार व्यक्त किये गये |

पूर्व सचिव बैद्यनाथ यादव ने धन्यवाद ज्ञापित किया |

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‘विदेश-यात्रा’ ने फिर किया चमत्कार, इस बार राहुल ताजपोशी को तैयार

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी अभी यूरोप में हैं और इधर उनको कांग्रेस की बागडोर सौंपने की तैयारी की जा रही है। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार 8 जनवरी के बाद कभी भी उनकी वापसी हो सकती है और आने के साथ उनकी ताजपोशी की ‘औपचारिकता’ पूरी कर दी जाएगी। हाँ औपचारिकता क्योंकि ये तय था कि कांग्रेस के अगले अध्यक्ष वही होंगे। इस ‘सत्य’ को ना केवल कांग्रेस पार्टी बल्कि पूरा देश ‘स्वीकार’ कर चुका है कि कांग्रेस मतलब नेहरू-गांधी परिवार। अब आपको अच्छा लगे या बुरा, आप इसे परिवारवाद का नाम दें या कुछ और कहें लेकिन सच यही है कि कांग्रेस की बात आने पर वर्तमान अध्यक्ष सोनिया और उपाध्यक्ष राहुल के बाद अगर कोई तीसरा नाम जेहन में या जुबान पर आता है तो पार्टी में किसी पद पर ना होने के बावजूद वो नाम भी उसी परिवार के सदस्य का यानि प्रियंका गांधी का होता है।

बहरहाल, पिछले साल भी इस बात की खूब चर्चा रही कि राहुल गांधी को कांग्रेस की कमान सौंपी जा सकती है लेकिन सितम्बर में वर्किंग कमिटी की बैठक के बाद पार्टी के संगठनात्मक चुनावों को 2016 पर टाल दिया गया था। वैसे भी सोनिया का कार्यकाल इस साल दिसंबर में पूरा हो रहा है लिहाजा इस बात के कयास लगाए जाने लगे थे कि राहुल की ताजपोशी अब साल भर बाद होगी। यह भी कहा गया कि राहुल अभी इसके लिए तैयार नहीं है। लेकिन राहुल के विदेश जाते ही जाने क्या ‘चमत्कार’ हुआ कि वो अध्यक्ष पद संभालने को तैयार बताए जाने लगे।

अभी ज्यादा दिन नहीं हुए जब राहुल इसी तरह विदेश-यात्रा पर गए थे और लौटे तो एकदम नए अवतार के साथ। तब अपने अप्रत्याशित और आक्रामक तेवर से उन्होंने सबको चौंका दिया था और कांग्रेस में नई उम्मीद जग गई थी। कहा जाता है कि राहुल हर साल ‘विपश्यना’ के अभ्यास के लिए 10 दिनों के लिए विदेश जाते हैं। विपश्यना आत्मनिरीक्षण द्वारा आत्मशुद्धि की एक बौद्ध साधना है जिसका राहुल के व्यक्तित्व पर गहरा असर है।

सम्भावना है कि यूरोप दौरे से राहुल के लौटते ही कांग्रेस वर्किंग कमिटी की बैठक बुलाई जाएगी और संगठनात्मक चुनावों से पहले ही उन्हें अध्यक्ष का पद सौंप दिया जाएगा। पार्टी के एक नेता ने कहा कि इन बातों में कोई सच्चाई नहीं है कि राहुल असम विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस की कमान सम्भालना चाहते हैं। वह जिम्मेदारी सम्भालने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। देखा जाय तो कांग्रेस में राहुल की नई भूमिका को लेकर माहौल पहले ही बनाया जा चुका है। कुछ महीने पहले कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने कहा था कि जमीनी कार्यकर्ता राहुल को कांग्रेस की कमान सम्भालते देखना चाहते हैं लेकिन इस बारे में कोई भी फैसला अध्यक्ष को ही लेना है। कांग्रेस की स्थापना दिवस पर जब ये सवाल अध्यक्ष सोनिया तक पहुँचा तो उन्होंने कहा कि इसके बारे में खुद उनसे ही पूछें। कहने का अर्थ ये है कि सब कुछ पहले से तय था। बस राहुल के फैसला लेने की देर थी।

बता दें कि सोनिया गांधी ने 1998 में कांग्रेस अध्यक्ष का पद संभाला था। 129 साल पुरानी पार्टी की वो सबसे लम्बे समय तक अध्यक्ष रहने वाली नेता हैं। इधर कुछ वर्षों से उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं चल रहा है। अब कांग्रेस की बागडोर सम्भालने जा रहे राहुल ने उपाध्यक्ष के तौर पर अपनी पारी 2013 में शुरू की थी।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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