रेल इंजन फैक्ट्री ही बदल देगी कोसी की सूरत

रेल इंजन फैक्ट्री बदलेगी कोसी की सूरत और मेडिकल, इंजीनियरिंग कॉलेज के पूरा होते-होते बेहतर दिखेगा कोसी का आने वाला कल | तब कोसी के विकास की गाड़ी सौ के स्पीड में दौड़ेगी और सूबे बिहार में सबसे विकसित जिलों में लिखा जायेगा ‘मधेपुरा’ का नाम- ये बातें जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष व राज्यसभा सांसद शरद यादव ने जिला जदयू कार्यालय में आयोजित एक दिवसीय कार्यकर्ता सम्मेलन में कही |

अपनी हार-जीत की परवाह किये बगैर सुलझे सोच के राजनेता शरद यादव ने कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि विभिन्न बीमारियों से ग्रसित समाज के लोग यदाकदा भटक जाते हैं, लेकिन जनसेवायुक्त राजनीति का स्वाद हमेशा मीठा लगता है | जनता में जिसकी साख बनेगी उसकी बातों को कोई नहीं टाल सकता | उन्होंने सरकार की उपलब्धिओं को गिनाते हुए कहा कि सरकार नित्य नये विकास की गाथा लिख रही है |

Rashtriya Adyaksh Sharad Yadav is being honoured by Zila Adyaksh (JDU) in Party Worker's Meeting at Madhepura
Rashtriya Adyaksh Sharad Yadav is being honoured by Zila Adyaksh (JDU) in Party Worker’s Meeting at Madhepura

पूर्व सांसद डॉ.रवि ने विस्तार से दिए गये अपने वक्तव्यों में कहा कि शरद यादव एक ऐसे राजनेता हैं जिन्हें लोग लोहिया-अम्बेडकर की तरह याद करते हैं और सदा करते रहेंगे | सूबे के पूर्व मंत्री व आलमनगर के विधायक नरेंद्र नारायण यादव, विधान पार्षद विजय कुमार वर्मा, विधायक प्रो.रमेश ऋषिदेव, रत्नेश सादा, निरंजन मेहता सहित पूर्व विधायक परमेश्वरी प्रसाद निराला, मणिन्द्र कुमार मंडल ने शरद यादव को सच्चा व पक्का नेता बताकर विस्तार से उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी ईमानदारी और संजीदगी की कोई तुलना नहीं है, तभी तो उन्हें ‘सर्वश्रेष्ठ सांसद सम्मान’ से सम्मानित किया गया है |

प्रारम्भ में सम्मेलन का उद्घाटन राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव के कर कमलों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर सम्मिलित रूप से किया गया तथा सियाराम यादव की अध्यक्षता में मंच संचालन का काम पार्टी के प्रवक्ता प्रो.फुलेन्द्र कुमार को सौंपा गया | स्वागतम कार्यक्रम के बाद मंच संचालक ने सभी प्रखंडों एवं विभिन्न प्रकोष्ठों के अध्यक्षों को अल्पावधि में स्वागत करने का निदेश देते हुए बारी-बारी  से आमंत्रित किया |

JDU Party Worker's Meeting at Madhepura Zila Party Karyalaya.
JDU Party Worker’s Meeting at Madhepura Zila Party Karyalaya.

घैलाढ प्रखंड के सियाशरण यादव, राजकिशोर यादव, प्रो.सुजीत मेहता, वीरेन्द्र आजाद सहित कुछ अन्य के स्वागत भाषण में लोकसभा की हार की टीस सुनाई दी | ‘स्वागत’ के साथ बार-बार ‘हार की गूंज’ सुनते रहने के बाद जदयू के वरिष्ठ नेता डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने उद्गार व्यक्त करने के क्रम में कार्यकर्ताओं से दो टुक बातें की और यही कहा-

किसान-मजदूर-अल्पसंख्यकों एवं शोषित-पीड़ित-वंचितों के दुःखहर्ता शरद यादव, जो हार-जीत की परवाह किये बिना अनवरत जन-सेवा में रमे रहते हैं, का स्वागत व अभिनन्दन कार्यकर्ता क्या करेगा…… डॉ.मधेपुरी ने स्वागत के बाबत बस यही कहा-

दीन दुखियों के हृदय की वेदना से
जो हृदय होगा द्रवित क्रन्दन करेगा
कल उसी का काल अभिनंदन करेगा |

इसके साथ ही डॉ.मधेपुरी ने यह भी कहा कि ‘हार’ का कारण केवल कार्यकर्ता ही नहीं बल्कि शरद जी भी हैं, क्योंकि वे अपने द्वारा किये गये कार्यों की जानकारी किसी को देते कहाँ हैं ? जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज की स्वर्णजयंती में तत्कालीन राष्ट्रपति महामहिम डॉ.शंकरदयाल शर्मा द्वारा उनकी अनुपस्थिति में सात बार नाम लेकर जिस ‘शरद यादव’ के गुण-धर्मों की चर्चा की गयी- उससे कार्यकर्ता आजतक अनभिज्ञ हैं ?

मौके पर गुड्डी देवी-इन्दिरा-बुलबुल- मीणा सहित भुवनेश्वरी, कमलराम, जुम्मन शेख, डॉ.विजेंद्र, महेंद्र पटेल, नरेश पासवान, प्रो.सत्यजीत, प्रो.विजेंद्र, डॉ.नीलाकांत, अशोक चौधरी, विष्णुदेव चौधरी, अमरेन्द्र चंद्रवंशी, डॉ.रत्नदीप, मनोज भट्नागर, प्रभु ना.मेहता, शिवनारायण आदि ने कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करते हुए जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव के सम्मान में अपनी बातें कही |

ये सारी बातें सुनने के बाद जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव ने अपने द्वारा व्यक्त किये गये उद्गार में यह बात कबूल कर ली कि- “चुनाव हार कर भी मैं जीत गया……. लोगों का प्यार कदापि नहीं भुला पाऊंगा !”

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मधेपुरा में ‘प्रजापिता ब्रह्माबाबा’ की 47वीं पुण्यतिथि मनी

संसार के 137 देशों में ‘प्रजापिता ब्रह्माबाबा’ की 47 वीं पुण्य तिथि मनाई जा रही है | इस अवसर पर कार्यक्रम का श्री गणेश करते हुए नारी शक्ति स्वरूपा ब्रह्मा कुमारी रंजू दीदी ने विषय प्रवेश करते हुए कहा –

प्रजापिता ब्रहमाकुमारी ईश्वरीय वि.वि.की स्थापना (वर्ष 1930, राजस्थान में) करने वाले श्रद्धेय लेखराज कृपलानी जी हैं जो शिष्यों के बीच ‘ब्रह्मा बाबा’ के नाम से और आज की तारीख में ‘प्रजापिता ब्रह्मा’ के नाम से जाने जाते हैं |

यह वि.वि. विश्व के 137 देशों में अपनी 8500 से अधिक शाखाओं के साथ 10 लाख विद्यार्थियों को प्रतिदिन आध्यात्मिक शिक्षा प्रदान कर रहा है और धर्म को नये मानदंडों के साथ परिभाषित कर रहा है |

ब्रह्मा कुमारी रंजू दीदी ने यह भी कहा कि जीवन की दौड़-धूप से थक चुके मनुष्य शांति की तलाश में आज इस संस्था की ओर तेजी से प्रवृत्त हो रहे हैं |

Dr. Madhepuri paying tributes to Prajapati Brahma Baba on his 47th Death anniversary.
Dr. Madhepuri paying tributes to Prajapita Brahma Baba on his 47th Death anniversary.

वहीँ मुख्य अतिथि के रूप में शिक्षाविद् साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने अपने संबोधन में कहा कि आज हम सभी एकत्र होकर ‘ब्रह्मा बाबा’ के चित्र में ‘ओम शांति ’ वाला उज्जवल चरित्र एवं दिव्य व्यक्तित्व की तलाश कर रहे हैं तथा सम्मिलित होकर जीवन को उत्सवमय बना रहे हैं |

डॉ. मधेपुरी ने ऋषि तुल्य जीवन के धारक भारतरत्न डॉ.कलाम के संदेश को परोसते हुए कहा– ‘ये आँखे दुनियां को दोबारा नहीं देख पायेगी, अतएव आपके अन्दर जो बेहतरीन है उसे दुनिया को देकर जाइए |

डॉ.मधेपुरी ने यह भी कहा कि पहले व्यक्ति का मन विकृत होता है, तब तन को रोग पकड़ता है | उन्होंने साधना के माध्यम से मन को नियंत्रित करने तथा आत्मविश्वास को मन-प्राणों में उतारने की बात यह कहते हुए कही कि ‘आत्मविश्वास’ आदमी के जीवन में कोई भी चमत्कार ला सकता है |

विशिष्ट अतिथि के रूप में शांतिकुंज गायत्री परिवार से जुड़े चैतन्य कुमार वर्मा ने कहा कि संसार को सकारात्मक सोच से भरनेवाले जितने भी दिव्य पीठ हैं– सभी मिल-बैठकर निरंतर प्रयास में लगे रहेंगे तो अंधेरा से हमें एक-न-एक दिन मुक्ति मिलेगी ही मिलेगी |

मधेपुरा में इस संस्था के चौखम्भा के रूप में स्थापित सर्वश्री पूर्व प्रमुख विनयवर्धन उर्फ़ खोखा बाबू, प्रो. अजय कुमार, प्रो. निरोध कुमार निराला एवं दिनेश सर्राफ सहित प्रो. अनिल कुमार, डॉ.नरेश कुमार, प्रो. अभय कुमार, प्रो.त्रिवेणी यादव, प्रो.अशोक पोद्दार एवं ओम शांति परिवार के सभी सदस्यों कविता, पूजा, माला, अनिल, विजय, वैद्यनाथ, नगीना आदि की सार्थक उपस्थिति से ब्रह्मा बाबा की श्रद्धांजलि सभा श्रद्धापूर्वक सम्पन्नता की ओर बढ़ती रही |

प्रारम्भ में प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी संस्थान, मधेपुरा की ब्रह्मा कुमारी रंजू दीदी, मुख्य अतिथि-विशिष्ट अतिथि व अन्य के द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया और अंत में इच्छापूर्ण प्रसाद ग्रहण करने के बाद ही श्रद्धांजलि सभा में आये हुए श्रद्धालुओं को विदाकर समापन किया गया |

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पूंजीवाद का नंगा सच… 62 अमीरों के पास है दुनिया का आधा पैसा

दुनिया के सारे नेता चाहे जो भाषण दे लें, दुनिया भर की सरकारें चाहे जितनी नीतियां बना लें, आर्थिक असमानता के विश्लेषण के लिए चाहे जितने नोबेल पुरस्कार दे दिए जाएं… सच ये है कि हर बीतते दिन के साथ अमीर और गरीब के बीच की खाई और बड़ी, और गहरी होती जा रही है। क्या आप यकीन करेंगे कि दुनिया के आधे पैसे पर महज 62 लोगों का कब्जा है। इन 62 धनकुबेरों में 53 पुरुष और 9 महिलाएं हैं। जी हाँ, इसका खुलासा कल जारी की गई ‘ऑक्सफैम’ की रिपोर्ट ‘एन इकोनॉमी फॉर द वन परसेंट’ में हुआ है।

‘ऑक्सफैम’ की रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए गए हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के एक प्रतिशत अमीर लोगों की दौलत शेष 99 प्रतिशत लोगों की कुल संपत्ति के बराबर हो गई है। इसमें कहा गया है कि 2010 से लेकर अब तक दुनिया भर के अमीरों की सम्पत्ति में करीब 11 लाख करोड़ का इजाफा हुआ है। इस अवधि में अमीरों की सम्पत्ति जहाँ 44 प्रतिशत बढ़ी, वहीं गरीबों की सम्पत्ति में 41 प्रतिशत की कमी आई।

आंकड़े यह भी बताते हैं कि 1990 से लेकर 2010 तक वैश्विक गरीबी लगभग आधी हो गई थी। हालांकि इस दौरान आम लोगों की आमदनी में नाममात्र इजाफा हुआ। इस दौरान महज 10 प्रतिशत लोगों की सालाना आमदनी बढ़ी और वो बढोतरी थी केवल 180 रुपये की।

‘ऑक्सफैम’ की रिपोर्ट से आर्थिक असमानता की जो भयावह तस्वीर सामने आई है उसकी भविष्यवाणी गरीबों के लिए काम करने वाली इस संस्था ने 2015 में ही कर दी थी। उसने कहा था कि जल्द ही एक प्रतिशत आबादी के पास दुनिया के शेष लोगों से ज्यादा पैसा होगा। हालांकि ये समस्या इतनी जटिल और इतने स्तरों पर है कि इसका कोई एक कारण नहीं कहा जा सकता। स्वाभाविक रूप से इसके कई कारण हैं और सबसे बड़ा कारण है राष्ट्रीय आय में गरीबों की भागीदारी कम होना। यही कारण है कि दुनिया भर में दौलत कुछ लोगों के पास सिमट कर रह गई है। अधिकतर विकसित और विकासशील देशों में कर्मचारी और मजदूरों की आय लगातार कम हो रही है।

हैरानी की बात तो ये है कि दुनिया की सारी सरकारें सब कुछ देख और समझकर भी खामोश बैठी हैं। खामोश ही नहीं ये तमाम सरकारें पूंजीपतियों के हाथों की कठपुतली होकर रह गई है। ये पूंजीवाद का नंगा सच है और दिन-ब-दिन इसका रूप और विकराल और वीभत्स होता जाएगा। क्या हम कुछ नहीं करेंगे… कुछ भी नहीं..?

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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मधेपुरा कॉलेज में बाल चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित

मधेपुरा कॉलेज,  में स्थानीय सरकारी एवं प्राइवेट स्कूल के बच्चों ने सहरसा के ‘जेडी इन्स्टीच्यूट ऑफ फाइन आर्ट’ के बैनर तले आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में बड़ी संख्या में भाग लिया। प्रतियोगिता में शामिल बच्चों में कोई प्राकृतिक सौन्दर्य को उकेरने में लगा था तो कोई रंग-तूलिका से महापुरुषों के चित्रों को जीवंत कर रहा था।

इस आयोजन के मुख्य अतिथि के रूप में मधेपुरा कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अशोक कुमार तथा कॉलेज की सांस्कृतिक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लेने वाले प्रो. मो. मुस्ताक ने सम्मिलित रूप से दो सौ से अधिक छात्रों द्वारा प्रदर्शित चित्रों के मुआयने के क्रम में ‘मधेपुरा अबतक’ से कहा कि चित्रकला के जरिये संस्था द्वारा छात्रों में जिस तरह से राष्ट्रीय एकता व अखंडता का संस्कार डाला जा रहा है, वह प्रशंसनीय है। उन्होंने जानकारी दी कि फरवरी माह में मधेपुरा में बच्चों को ‘सुशान्त प्रतिभा चयन प्रतियोगिता’ के बैनर तले भी अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा।

संस्था के निदेशक योगेन्द्र सिंह,  मधेपुरा कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अशोक कुमार एवं प्रो. मो. मुस्ताक द्वारा चार ग्रुपों के प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान पाने वाले जिन प्रतियोगियों को पुरस्कृत किया गया, वे हैं आयुषी-मुस्कान-दिया, गोपाल-राज-अंकित, चंदन-प्रशस्ति-नीरज तथा हर्ष-आनंद-राजश्री।

अंत में स्थानीय ‘स्वर शोभिता संगीत महाविद्यालय’ के बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी पेश किया गया।

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बड़ी दिलचस्प है अमिताभ और शाहरुख के साथ मोदी की ये ‘जंग’

नरेन्द्र मोदी… यानि आज की तारीख में भारतीय जनता पार्टी के ‘पर्याय’, भारत के प्रधानमंत्री, विश्व के बड़े राजनेताओं में शुमार… पर ये परिचय पर्याप्त नहीं लगता इनके लिए। सत्ता के शीर्ष पर कोई शख्स पहली बार नहीं पहुँचा है, लोकप्रियता या विश्व भर में चर्चा भी किसी ने पहली बार हासिल की हो ऐसी बात नहीं, तो फिर क्या वजह है कि कोई भी परिचय पर्याप्त नहीं लगता इनके लिए..? चलिए आज की ख़बर और उसके विश्लेषण से इसका जवाब ढूँढ़ने की कोशिश करते हैं।

ख़बर ये है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर फॉलोअर्स की संख्या के लिहाज से बॉलीवुड के सुपरस्टार शाहरुख खान को पीछे छोड़ दिया है। कल यानि 16 जनवरी को मोदी के फॉलोअर्स की संख्या 1 करोड़ 73 लाख 71 हजार 600 थी, जबकि शाहरुख के 1 करोड़ 73 लाख 51 हजार 100 फॉलोअर्स थे। शाहरुख को पीछे छोड़ने के साथ ही मोदी ट्विटर पर दूसरे सबसे ज्यादा फॉलोअर वाले भारतीय बन गए हैं। उनसे आगे केवल ‘सदी के महानायक’ अमिताभ बच्चन हैं। अमिताभ के फॉलोअर्स की संख्या करीब 1 करोड़ 89 लाख है।

मोदी ने ट्विटर का बड़ा रचनात्मक उपयोग किया है। इसकी मदद से उन्होंने ना केवल ‘मेक इन इंडिया’, ‘स्वच्छ भारत’ और ‘सेल्फी विद डॉटर’ जैसे अभियानों को आगे बढ़ाया बल्कि देश के आम नागरिकों के साथ सीधा सम्पर्क भी स्थापित किया। उनके ट्विटर अकाउंट पर फॉलोअर्स की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। पिछले साल 22 नवंबर को उनके फोलाअर्स की संख्या डेढ़ करोड़ को पार कर गई थी। उसके बाद 20 नवंबर को यानि दो महीने से भी कम समय में उनके फॉलोअर्स की संख्या 1 करोड़ 60 लाख से अधिक हो गई। इस बार यानि 16 जनवरी को और भी कम समय में उनके फॉलोअर्स की संख्या में 10 लाख से ज्यादा वृद्धि हुई है।

नरेन्द्र मोदी ट्विटर पर 2009 से सक्रिय हैं। भारतीय नेताओं में उनके फॉलोअर्स की संख्या सर्वाधिक है। पूरी दुनिया के नेताओं की बात करें तो उनसे आगे केवल अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा हैं। देखा जाय तो मोदी के प्रति लोगों का ये आकर्षण अकारण नहीं है। सोशल मीडिया के दौर में बड़ी हो रही पीढ़ी ने स्टेट्समैन की ‘गरिमा’ के साथ एक फिल्मस्टार-सा ‘ग्लैमर’ किसी में देखा तो वो नरेन्द्र मोदी हैं। लोकप्रिय होना या और चर्चा में रहना एक बात है लेकिन आम से लेकर खास तक की दिनचर्या में जिस तरह मोदी शामिल हो गए हैं उस तरह पिछले दो-तीन दशकों में कोई शामिल नहीं हुआ। उससे भी बड़ी बात ये कि भारत की राजनीति के केन्द्र में ‘व्यक्ति’ पहले भी रहे लेकिन मोदी से पहले कभी ऐसा नहीं हुआ कि उस ‘व्यक्ति’ के कद के मुकाबले में कोई दूर-दूर तक ना दिखे – पक्ष और विपक्ष दोनों को मिलाकर भी।

आज अखबारों और पत्रिकाओं के साथ-साथ सैकड़ों चैनल, लाखों साइट्स और करोड़ों स्मार्टफोन की नज़र आप पर होती है। अनगिनत आँखों की मौजूदगी में भी आप ना केवल खुद को ‘साबित’ कर रहे हों बल्कि आपके कद में इजाफा भी हो रहा हो तो ये उपलब्धि ‘असाधारण’ कही जाएगी। एक बात और। ट्विटर और फेसबुक के ज्यादातर यूजर्स 18 से 25 साल के हैं और उन्हें लुभाने और भरमाने को हजारों चीजें हैं इंटरनेट पर, फिर भी 65 साल का कोई पॉलिटिशियन अमिताभ और शाहरुख से ना केवल होड़ लेता है बल्कि उनमें से एक को पीछे छोड़ देता है और दूसरे को भी पीछे छोड़ने की तैयारी में दिखता है तो ये सचमुच बड़ी बात है। जिस रफ्तार से इस करिश्माई राजनेता के फॉलोअर्स बढ़ रहे हैं उसे देखते हुए हो सकता है अगले कुछ महीनों में ट्विटर पर वो शीर्ष पर हों। नरेन्द्र मोदी ने राजनीति में कई जंगें लड़ी हैं और जीती हैं लेकिन इस ‘जंग’ और इसमें जीत के अलग मायने हैं।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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शरद यादव 16 जनवरी से आठ दिवसीय मधेपुरा दौरे पर

जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव आठ दिवसीय दौरे पर  मधेपुरा आ रहे हैं। वे 16 से 23 जनवरी तक मधेपुरा संसदीय क्षेत्र का दौरा करेंगे। इस दौरान वे अपने विकास मद की राशि से पूरी की गई विभिन्न योजनाओं का उद्घाटन और कुछ नई योजनाओं का शिलान्यास करेंगे।

बता दें कि शरद यादव 15 जनवरी को मकर संक्रान्ति के अवसर पर जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह द्वारा दिए गए चूड़ा-दही भोज में शामिल होने पटना आए थे। 16 से 23 जनवरी तक  मधेपुरा संसदीय क्षेत्र के सघन दौरे के उपरान्त वे 24 जनवरी को पटना में जननायक कर्पूरी ठाकुर की 93वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगे। पटना से ही वे दिल्ली के लिए प्रस्थान कर जाएंगे।

मधेपुरा एवं सहरसा जदयू के जिला अध्यक्षों ने कार्यकर्ताओं का आह्वान किया है कि वे 16 जनवरी को राष्ट्रीय अध्यक्ष के स्वागत व सम्मान के लिए सहरसा पहुँचें।

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राजनेता, समाजसेवी एवं शिक्षाविद आर.पी. यादव की 83वीं जयंती मनी

मधेपुरा के पूर्व सांसद, प्रखर समाजसेवी एवं शिवनंदन प्रसाद मंडल विधि विश्वविद्यालय के संस्थापक आर. पी. यादव के व्यक्तित्व व कृतित्व में आस्था एवं विश्वास रखने वाले समर्थकों व सहचरों द्वारा उनकी 83वीं जयंती श्रद्धापूर्वक और सादगीपूर्ण तरीके से मनाई गई। इस अवसर पर विधि महाविद्यालय में पुष्पांजलि कार्यक्रम के साथ-साथ विधि महाविद्यालय के प्राचार्य व आर.पी. साहब के पुत्र सत्यजीत यादव के निवास पर चूड़ा-दही-तिलकुट का भोज भी आयोजित था। मकर संक्रान्ति के दिन ही जयंती होने के कारण आयोजन में उत्सव-सा माहौल बन गया था।

उपरोक्त समारोह में बिहार के आपदा प्रबंधन मंत्री व स्थानीय विधायक प्रो. चन्द्रशेखर सहित विभिन्न दलों के नेताओं, भू.ना. मंडल विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों एवं बुद्धिजीवियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। प्रो. चन्द्रशेखर ने आर.पी. साहब के तैलचित्र पर माल्यार्पण के बाद उन्हें रचनात्मक प्रवृत्ति का सांसद बताते हुए कहा कि वे हमेशा अपने क्षेत्र के लोगों की सुधि रखने में तत्परता दिखाया करते थे। उन्हीं का अनुकरण करते हुए मैं अभी मधेपुरा वार्ड नं. 20 के प्रो. दिलीप कुमार यादव को चार लाख का चेक प्रदान करने आया हूँ जिनके 18 वर्षीय पुत्र मानस की मौत डूब जाने के कारण हुई थी।

इस अवसर पर डॉ. भूपेन्द्र मधेपुरी ने कहा कि लम्बे समय तक संसद में मधेपुरा का प्रतिनिधित्व करने वाले आर.पी. साहब क्षेत्र के लोगों के बीच जितने मृदुभाषी थे, उच्चाधिकारियों के लिए उतने ही कठोर अनुशासन वाले। प्रो. श्यामल किशोर यादव ने कहा कि सांसद के रूप में उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा। जयंती सह भोज समारोह में पूर्व जिला परिषद् सदस्य अरविन्द कुमार यादव, शिक्षक नेता परमेश्वरी प्रसाद यादव, प्रो. निरोद कुमार निराला, पूर्व प्राचार्य प्रो. सच्चिदानन्द यादव, डॉ. आलोक कुमार, प्रो. देवेन्द्र यादव, पूर्व विधायक परमेश्वरी प्रसाद निराला, प्रो. बिजेन्द्र नारायण यादव, तेजनारायण यादव, प्रो. गणेश कुमार, प्रो. अशोक कुमार, प्रो. अरुण कुमार, प्रो. सुजीत मेहता, बैद्यनाथ चौहान, पप्पू कुमार, युगल पटेल, आनंद मंडल, लोक अभियोजक इन्द्रकान्त चौधरी, राजद जिलाध्यक्ष देवकिशोर यादव आदि उपस्थित थे।

विश्वविद्यालय एवं शिक्षण-संस्थाओं से पुष्पांजलि व श्रद्धांजलि देने वालों की आवाजाही दिन भर देखी गई। इनमें कुलसचिव डॉ. कुमारेश प्रसाद सिंह, कुलानुशासक डॉ. विश्वनाथ विवेका, सम्पदा पदाधिकारी डॉ. शैलेन्द्र कुमार, सिंडिकेट सदस्य डॉ. परमानन्द यादव, डॉ. जवाहर पासवान, विद्यानन्द यादव, प्राचार्य डॉ. हजारी लाल साह जौहरी एवं विधि परामर्शी बीएनएमयू डॉ. शिवनारायण यादव प्रमुख थे।

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डॉ. मधेपुरी की सलाह पर डीएम ने परीक्षा तक लगाई थियेटर पर रोक

समाहरणालय सभा कक्ष में सिंहेश्वर मेला समिति की बैठक जिला पदाधिकारी सह समिति के अध्यक्ष मो. सोहैल की अध्यक्षता में हुई जिसमें समिति के सदस्यों, जिले के विभिन्न विभागों के पदाधिकारियों एवं धार्मिक न्यास परिषद् सिंहेश्वर के वर्तमान व पूर्व सदस्यों की उपस्थिति देखी गई।

बैठक में निर्णय लिया गया कि मेले में चौबीसो घंटे बिजली, पानी के लिए पर्याप्त संख्या में चापाकल, समुचित साफ-सफाई एवं चाक-चौबंद सुरक्षा की व्यवस्था की जाएगी। मेले में आने वालों की सुविधा हेतु आवश्यकतानुसार शौचालय-निर्माण का निर्णय भी लिया गया। इसके अतिरिक्त मेले में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर दवा व चिकित्साकर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ चौबीसो घंटे एम्बुलेंस तैनात रखने का निर्देश भी दिया गया।

मेले में मनोरंजन की चर्चा के दरम्यान डीएम सह अध्यक्ष मो. सोहैल द्वारा जब सिंहेश्वर न्यास के पूर्व एवं वर्तमान सदस्यों से एक-एक कर विगत मेलों में बंद किए गए थियेटर को पुन: चलाने पर विचार मांगा गया तो सबों ने थियेटर चलाने पर बल दिया – सिवाय शिक्षाविद्-साहित्यकार डॉ. भूपेन्द्र मधेपुरी के। डॉ. मधेपुरी ने इस बाबत तत्कालीन डीएम गोपाल मीणा द्वारा लिए गए निर्णय की च्रर्चा करते हुए मैट्रिक परीक्षा के दौरान परीक्षार्थियों, अभिवावकों एवं हेल्परों की भीड़ के बीच मेले की ‘भयावह’ भीड़ को सम्भालने में प्रशासन को होने वाली परेशानियों की ओर ध्यान आकृष्ट किया। पूरी बात को विस्तार से सुनने के बाद कदाचार के कट्टर विरोधी डीएम मो. सोहैल ने कदाचाररहित परीक्षा के संकल्प को दुहराते हुए यह घोषणा कर दी कि सिंहेश्वर मेले में थियेटर लगेगा लेकिन मैट्रिक परीक्षा के समापन (19 मार्च) के बाद क्योंकि परीक्षा की पवित्रता के बाद ही मनोरंजन का स्थान आता है।

बैठक में सिंहेश्वर मेले का डाक 10 लाख 35 हजार की उच्चतम बोली लगाने वाली सिंहेश्वर न्यास समिति को दिया गया। बता दें कि गत साल न्यास द्वारा यह डाक 5 लाख 51 हजार में ही लिया गया था। समिति द्वारा एक अन्य निर्णय “सिंहेश्वर महोत्सव” के बाबत लिया गया कि 8, 9 एवं 10 मार्च को त्रि-दिवसीय महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए समिति ने बिहार सरकार के पर्यटन विभाग को विशेष रूप से साधुवाद दिया।

सम्पूर्ण कार्रवाई में सदर अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार ‘निराला’, सामान्य शाखा प्रभारी श्रीमती राखी, कार्यपालक पदाधिकारी विनय कुमार सिंह सहित कार्यपालक अभियंता पीएचईडी, विद्युत विभाग, वन विभाग सहित शिक्षा एवं चिकित्सा आदि अन्य विभागों के पदाधिकारीगण एवं न्याय समिति के पूर्व एवं वर्तमान सदस्य श्री हरि टेकरीवाल, विश्वनाथ प्राणसुक्खा, डॉ. दिवाकर सिंह, सरोज सिंह, डॉ. मधेपुरी सहित व्यवस्थापक महेश्वर प्रसाद सिंह आदि की उपस्थिति देखी गई।

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‘हम’ ने शुरू की अपने ‘होने’ का अहसास कराने की जद्दोजहद

विधानसभा चुनाव के ‘सदमे’ से उबरने में बेशक थोड़ा वक्त लगा हो लेकिन ‘हम’ ने बिहार में अपने ‘होने’ का अहसास नए सिरे से कराने की जद्दोजहद शुरू कर दी है। हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा – सेक्युलर (‘हम’) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतन राम मांझी के निर्देशन एवं प्रदेश अध्यक्ष वृषिण पटेल के आह्वान पर कल यानि सोमवार 12 जनवरी 2016 को पार्टी ने बिहार के सभी जिला मुख्यालयों पर ‘किसानविरोधी’ और ‘जनविरोधी’ सरकार के खिलाफ एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया।  मधेपुरा में भी जिला अध्यक्ष अध्यक्ष शौकत अली के नेतृत्व में ‘हम’ ने किसानों की समस्या एवं हत्या, अपहरण आदि की बढ़ती घटनाओं को लेकर राज्य सरकार के प्रति आक्रोश जताया और इस बहाने लोगों से जुड़ने और पार्टी की जड़ जमाने की कोशिश की।

मोहम्मद शौकत अली की अध्यक्षता में समाहरणालय गेट के सामने धरना देते हुए विभिन्न प्रखंडों के अध्यक्ष किसानों की धान की खरीद नहीं होने, बोनस नहीं दिए जाने और पूर्व बकाये का भुगतान नहीं किए जाने पर जमकर बरसे। मौके पर ‘हम’ के जिला छात्र अध्यक्ष नीतीश कुमार, उपाध्यक्ष रविन्द्र कुमार, जिला संगठन सचिव शिवदेव मंडल एवं जिला प्रवक्ता अशोक झा ने राज्य में अपराध व भ्रष्टाचार की बढ़ती घटनाओं को लेकर सरकार को घेरने की पुरजोर कोशिश की। इस अवसर पर जिला अध्यक्ष शौकत अली के साथ प्रखंड अध्यक्ष मनिका देवी (सिंहेश्वर), पवन गुप्ता (चौसा), राजेन्द्र चौधरी (बिहारीगंज), नित्यानंद ऋषिदेव (कुमारखंड), गुद्दर ऋषिदेव (घैलाढ़) सहित बनिलाल, प्रयाग व रामचन्द्र ऋषिदेव ने जिला पदाधिकारी को पार्टी की ओर से ज्ञापन भी सौंपा।

धरना-प्रदर्शन के बहाने ‘हम’ ने मधेपुरा का ध्यान तो खींचा लेकिन इसकी एक दूसरी वजह भी रही। जी हाँ, इसी दिन पार्टी की अन्दरूनी तनातनी और खेमेबाजी भी सामने आई। मोहम्मद शौकत अली की अध्यक्षता में समाहरणालय के समक्ष दिए जा रहे धरना के समानान्तर स्थानीय कला भवन के समक्ष एक और धरना दिया गया जिसकी अध्यक्षता सिंहेश्वर से पार्टी की प्रत्याशी रही मंजू देवी ने की और धरने का संचालन ‘हम’ के नेता ध्यानी यादव ने किया। इस धरने में चन्द्रदेव पंकज, मनोज यादव, भूषण झा, चन्दन मंडल, संजय राय, गजेन्द्र पासवान, सुरेन्द्र सरदार आदि उपस्थित थे।

उद्देश्य भले ही दोनों खेमों का समान हो और दोनों ही खेमे शीर्ष नेतृत्व के प्रति समर्पण भी जता रहे हों लेकिन जिले में चुनाव के बाद हो रहे पहले बड़े आयोजन में पार्टी के इस तरह दो खेमे में बंट जाने से इसके समर्थक निराश देखे गए। दोनों खेमे को आज नहीं तो कल ये समझना ही होगा कि उद्देश्य बड़ा हो तो छोटे मतभेदों को दूर कर लेना ही श्रेयस्कर होता है।

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‘बिहार’ की राजधानी ‘दिल्ली’ कहने वाले शिक्षकों का मूल्यांकन कैसे करेंगे पदाधिकारी..?

शिक्षा विभाग ने एक बड़ा फैसला लेते हुए प्राइमरी से प्लस टू तक के बच्चों एवं शिक्षकों के मूल्यांकन (एसेसमेंट) की घोषणा की है। मूल्यांकन का कार्य फरवरी 2016 से प्रारम्भ होगा। शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार को लेकर शिक्षा विभाग ने ये ‘भगीरथ’ संकल्प ले तो लिया है लेकिन मूल्यांकन की ‘गंगा’ आसानी से ‘धरती’ पर उतरने वाली नहीं हैं। जी हाँ, राह में कई मुश्किलें हैं और उनसे वाकिफ होने पर आप भी कुछ ऐसा ही सोचेंगे।

आगे बात करें उससे पहले मूल्यांकन की प्रक्रिया और उसके उद्देश्य को जानें। शिक्षा विभाग के निर्देश के अनुसार जिले से प्रखंड स्तरीय सभी शिक्षा पदाधिकारी एक-एक स्कूल का निरीक्षण करेंगे और किए गए एसेसमेंट के आधार पर जिले के सभी पदाधिकारी यानि डीईओ, डीपीओ, बीईओ आदि की रैंकिंग की जाएगी। रैंकिंग के आधार पर ही इन पदाधिकारियों को वेतन व अन्य सुविधाएं दी जाएंगी। कहने का मतलब ये कि शिक्षा विभाग ने बच्चों एवं शिक्षकों के मूल्यांकन के बहाने बड़ी सफाई से सभी अधिकारियों की नकेल भी कस दी है।

इसमें कोई दो राय नहीं कि शिक्षा विभाग का ये कदम स्वागतयोग्य है लेकिन ये तमाम पदाधिकारी उन शिक्षकों के एसेसमेंट में क्या लिखेंगे जो वर्ष के बारहों महीने का नाम अंग्रेजी में नहीं बोल पाते या फिर भारत की राजधानी पटना और बिहार की राजधानी दिल्ली बोलते हैं। समस्या केवल शिक्षकों की ‘अशिक्षा’ की ही नहीं है। दूसरी बड़ी समस्या ये है कि सैकड़ों की तादाद में शिक्षक ‘कामचोरी’ भी करते हैं। जी हाँ, वैसे शिक्षकों की तादाद भी कम नहीं है जो ‘साधन-सम्पन्न’ और ‘दबंग’ हैं और उनकी हाजिरी बिना उनके आए बन जाया करती है। बिना सूचना के कई दिनों या कुछ हफ्तों के लिए ‘गायब’ हो जाना तो मामूली बात है।

‘मधेपुरा अबतक’ ने जब इस बाबत स्थानीय शिक्षाविदों से बात की तो ना केवल उनकी चिन्ता और आक्रोश से हम रू-ब-रू हुए बल्कि कई महत्वपूर्ण सुझाव भी सामने आए। इन बुद्धिजीवियों की राय है कि ‘कामचोर’ व बिना सूचना के गायब रहने वाले शिक्षकों पर अविलम्ब कार्रवाई होनी चाहिए। जो शिक्षक पढ़ने-पढ़ाने में दिलचस्पी नहीं लें और उन्हें नौकरी में बनाए रखने की कोई ‘विवशता’ हो सरकार की तो उन्हें अन्य सरकारी कार्यों – पोलियो अभियान, जनगणना, चुनाव आदि – में स्थायी तौर लगा दिया जाना भी एक विकल्प हो सकता है। दूसरी ओर अच्छे शिक्षकों एवं अच्छी रैंकिंग वाले पदाधिकारियों को पर्याप्त सम्मान व सुविधा मिले, सरकार को ये सुनिश्चित करना चाहिए।

सच तो ये है कि संकल्पित और समन्वित प्रयास से ही शिक्षा की गुणवत्ता वापस लौट सकती है। केवल सरकार को कोसने से काम नहीं होगा। इसके लिए पहले हमें जागना होगा। एक जागरुक समाज में ‘अशिक्षित’ और ‘कामचोर’ शिक्षक की जगह ना तो होनी चाहिए, ना हो सकती है। और हाँ, जब शिक्षक ‘कसौटी’ पर खरे उतरने लगेंगे तब बच्चों की ‘कसौटी भी स्वत: तैयार हो जाएगी। पर क्या इस कार्य के लिए बच्चों और शिक्षकों से पहले हमें खुद का मूल्यांकन नहीं करना चाहिए..?

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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