बिहार में कोरोना जांच का दायरा बढ़ गया है। अब तक सात स्थानों पर कोरोना की जांच की जा रही थी, अब सात नए स्थानों पर भी कोरोना की जांच शुरू कर दी गई है। इस प्रकार बिहार में 14 स्थानों पर जांच प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इससे कोरोना के संक्रमण की जांच में अपेक्षित तेजी आ सकेगी।
गौरतलब है कि बिहार में सात जिलों के स्वास्थ्य संस्थानों में कोरोना की जांच ट्रू नेट मशीन से शुरू की गई है। इनमें पावापुरी मेडिकल कॉलेज अस्पताल (नालंदा), कर्पूरी ठाकुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल (मधेपुरा), गया मेडिकल कॉलेज अस्पताल (गया), सीवान मेडिकल कॉलेज अस्पताल (सीवान), सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल (बेतिया), जिला अस्पताल (मुंगेर) और जिला अस्पताल (मोतिहारी) शामिल हैं। इसके पूर्व आरएमआरआई (पटना), पीएमसीएच (पटना), एम्स (पटना), एसकेएमसीएच (मुजफ्फरपुर), जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल (भागलपुर) और डीएमसीएच (दरभंगा) में कोरोना की जांच की जा रही थी।
बता दें कि पहले राज्य के सात स्वास्थ्य संस्थानों में औसतन 1050 सैम्पलों की जांच की जा रही थी, जबकि यह औसत बढ़कर अब दो हजार सैम्पल रोज हो गई है। ध्यातव्य है कि राज्य सरकार ने कोरोना जांच की क्षमता प्रतिदिन 10 हजार करने का निर्देश दिया है।
पृष्ठ : मधेपुरा अबतक
भारतीय बच्ची श्रव्या को ट्रंप ने कोविड-19 को लेकर पुरस्कृत किया
अमेरिका में कोरोना ने जो तांडव मचा रखा है वह किसी से छिपा नहीं है। अमेरिकन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कोरोना से निपटने के लिए अग्रिम मोर्चे पर तैनात डॉक्टरों, नर्सों एवं दमकल विभाग के कर्मचारियों को कुकीज व कार्ड भेजने वाली आंध्र प्रदेश की 10 वर्षीय श्रव्या अन्नापरेड्डी को सम्मान के साथ पुरस्कृत किया।
बता दें कि श्रव्या के माता-पिता वर्तमान में अमेरिका में ही रहने लगे हैं और श्रव्या “गर्ल स्काउट ग्रुप” की सदस्य भी है। 10 वर्षीय श्रव्या मैरीलैंड के हनोवर हिल्स एलीमेंट्री स्कूल के क्लास फोर्थ की छात्रा है।
यह भी बता दे कि श्रव्या अन्नापरेड्डी जो ‘गर्ल स्काउट’ की उन तीन बच्चियों में शामिल है जिन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एवं अमेरिका की प्रथम महिला मिलेनिया ट्रंप ने शुक्रवार को कोरोना वायरस संकट से निपटने के लिए अग्रिम मोर्चे पर तैनात कोरोना वारियर्स की मदद करने हेतुु ससम्मान पुरस्कृत किया।
चलते-चलते यह भी कि राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि जो कोई इस कठिन समय में हमें मदद कर अपने स्नेह में बांधता है और हमें नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है उसे सम्मानित करना हमारा परम कर्तव्य है। इन लड़कियों ने कोरोना वारियर्स को कुकीज के 100 डिब्बे भेजे थे तथा हाथ से बनाकर 200 कार्ड भी स्नेह की डोरी से बांधकर भेजे थे।
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बिहार में ऑनलाइन एजुकेशन प्रणाली के विस्तार पर बल दें: नीतीश
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार, 19 मई 2020 को केन्द्र के आर्थिक पैकेज पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से वित्त विभाग, शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग, नगर विकास एवं आवास विभाग, श्रम संसाधन विभाग, ऊर्जा विभाग तथा खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के साथ विचार-विमर्श किया तथा कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए।
इस उच्चस्तरीय बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में ऑनलाइन एजुकेशन प्रणाली के विस्तार पर बल दें। कक्षावार तैयार किए गए ई-कंटेंट को टेलीविजन के माध्यम से दिखाएं और कक्षा 06 से 12 की तरह कक्षा 01 से 05 के लिए भी ई-कंटेंट विकसित किया जाय।
आगे उन्होंने कहा कि राज्य में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के विभिन्न पहलुओं पर समुचित कार्रवाई करें। श्रमिकों के ओवरटाइम का पारिश्रमिक क्या हो इस बारे में श्रम संसाधन विभाग स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करे। उन्होंने कहा कि लम्बी अवधि से यह दिशा-निर्देश दिया जा रहा है कि शहरी क्षेत्र के गरीब लोगों के लिए अफोर्डेबल हाउसिंग योजना के तहत मकान बनाने की योजना शुरू हो। इस पर काम शुरू करें। इस संदर्भ में शहरी विकास एवं आवास विभाग ठोस कार्रवाई करे।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने स्ट्रीट वेंडरों की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि बिहार में बड़ी संख्या में स्ट्रीट वेंडर हैं। सभी स्ट्रीट वेंडरों का व्यवस्थित रूप से सर्वे कराएं। यह ध्यान रखें कि कोई छूटे नहीं। सभी को योजनाओं का लाभ मिल सके।
ऊर्जा क्षेत्र को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार इस क्षेत्र में रिफॉर्म करने जा रही है। इस पर नजर रखी जाए। ऊर्जा के क्षेत्र में बिहार पहले ही काफी नई पहल एवं सुधारात्मक प्रयोग कर चुका है। यह अच्छी बात है कि केन्द्र सरकार अब बिहार मॉडल को अपना रहा है।
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भारत सरकार के आर्थिक पैकेज पर मुख्यमंत्री ने किया विचार-विमर्श
सोमवार, 18 मई को 1, अणे मार्ग स्थित नेक संवाद में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केन्द्र सरकार द्वारा घोषित आर्थिक पैकेज से संबंधित गहन समीक्षा की और यह जानने का प्रयास किया कि पैकेज से हमें क्या मदद मिल सकती है और कैसे किसान, श्रमिक, उद्योगकर्मी, मनरेगाकर्मी आदि को लाभ पहुंचाया जा सकता है। इस दौरान उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, मुख्य सचिव दीपक कुमार, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार समेत कई वरीय अधिकारी मौजूद थे, जबकि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कृषि तथा पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री प्रेम कुमार, ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, उद्योग मंत्री श्याम रजक तथा सहकारिता मंत्री राणा सिंह चौहान समेत विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
इस महत्वपूर्ण बैठक में विचार-विमर्श के मुख्य बिन्दु ये रहे – 1. हर हिन्दुस्तानी की थाल में बिहार का एक व्यंजन हो, यह हमारा उद्देश्य है। मखाना इसे पूरा कर सकता है, इससे कृषि रोडमैप में निर्धारित लक्ष्य भी पूरा हो सकेगा। 2. मखाना के साथ-साथ शाही लीची, चिनिया केला, आम, मेंथा तेल, खस तेल, करतनी चावल एवं अन्य कृषि उत्पादों के क्लस्टर को भी बढ़ावा दें। 3. बिहार में शहद उत्पादन की असीम संभावनाएं हैं। इसके लिए शहद की प्रोसेसिंग यूनिट तथा मार्केटिंग एवं ब्रांड वैल्यू पर विशेष बल दिया जाय। 4. जीविका द्वारा की जा रही कन्ट्रैक्ट फार्मिंग को बढ़ावा दें तथा उसका विस्तार करें। 5. केन्द्र सरकार द्वारा घोषित आर्थिक पैकेज का अधिक से अधिक लाभ कृषकों एवं श्रमिकों को हो सके, इसके लिए अनिवार्य कार्रवाई करें।
इसके अतिरिक्त इस बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने निर्देश दिया कि बिहार के बाहर से आ रहे श्रमिकों के लिए उनकी स्किल मैपिंग के अनुसार रोजगार सृजन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाय। इसके लिए राज्य में संचालित इकाईयों में उनके स्किल के अनुरूप रोजगार उपलब्ध कराया जाय। साथ ही नई निर्माण इकाईयों की स्थापना की दिशा में भी समुचित कार्रवाई की जाय। उन्होंने कहा कि नए उद्योगों को लगाने में सरकार पूरी मदद करेगी। श्रमिकों के स्किल की विवरणी के अनुरूप क्या-क्या नए उद्योग लगाए जा सकते हैं, क्या मदद दी जा सकती है, इस पर विचार करें। साथ ही, मनरेगा में अधिकतम श्रम दिवस की सीमा को 100 से 200 करने तथा स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों के बीमा से संबंधित तिथि विस्तार हेतु केन्द्र से अनुरोध करें।
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लालू की कविता का जदयू ने डॉ. अमरदीप की कविता से दिया जवाब
राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की कविता, जो उन्होंने 13 मई को अपने ट्वीटर हैंडल पर लिखी थी, का जदयू ने कविता में ही जवाब दिया। 14 मई 2020 को यह कविता जदयू मीडिया सेल के अध्यक्ष डॉ. अमरदीप ने अपने ट्वीटर हैंडल पर लिखी जिसे जदयू के आधिकारिक ट्वीटर हैंडल से भी रीट्वीट किया गया। बेहद सधे हुए जवाब के कारण यह कविता सोशल मीडिया पर तत्काल वायरल हो गई।
डॉ. अमरदीप ने अपनी कविता में लालू प्रसाद यादव पर निशाना साधते हुए कहा – 15 साल का जंगलराज/ घोटालों के आप सरताज, 15 साल का जंगलराज/ बिगड़े बिहार के सारे काज, 15 साल का जंगलराज/ नीतीश कुमार ने बदला आज, हम न्याय के साथ विकास के पैरोकार/ और आपकी कहानी खुद कह रहा होटवार।
बता दें कि लालू प्रसाद यादव ने अपने ट्वीट में नीतीश सरकार पर बेहद तल्ख पंक्तियां लिखी थीं। उन्होंने लिखा था – 15 साल की पंक्चर सरकार/ गरीब मजदूर की दुश्मन सरकार, 15 साल की पंक्चर सरकार/ जमीनी विकास में बंजर सरकार, 15 साल की पंक्चर सरकार/ बर्बाद कर दिया पूरा बिहार, बिलखता नौनिहाल, तड़पता मजदूर, मरता किसान/ डबल इंजन सरकार बंद करो झूठ का दुकान। डॉ. अमरदीप ने इसी कविता का जवाब अपनी कविता से दिया।
बहरहाल, 14 मई को ही कविता के साथ ही जारी अपने बयान में डॉ. अमरदीप ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने 15 वर्षों के कार्यकाल में बिहार का कायाकल्प करके रख दिया। नीतीश कुमार के कार्यों की सराहना आज देश और दुनिया में हो रही है लेकिन बिहार के मुख्य विपक्षी दल और इसके नेताओं को नकारात्मक राजनीति से फुरसत नहीं।
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बुजुर्ग एवं गर्भवती महिला प्रवासी मजदूरों की सुरक्षित घर वापसी हेतु बिहार महिला समाज की मांग
बिहार महिला समाज के सदस्यों एवं विभिन्न इकाइयों के अध्यक्षों द्वारा अपने-अपने घरों में 11बजे से 2 बजे अपराह्न तक सरकार एवं प्रशासन के खिलाफ धरना दिया गया जिसमें मांग की गई कि कोरोना के कारण प्रवासी बुजुर्ग, गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिला मजदूरों की सुरक्षित घर वापसी की व्यवस्था की जाए। महिला समाज के सदस्यों ने तख्तियों, नारों या कोई-कोई वीडियो के जरिए कई सवालों को भी उठाया।
बता दें कि भारतीय महिला फेडरेशन का समर्थन भी प्रवासी मजदूरों, बुजुर्ग, गर्भवती व दूध पिलाती महिलाओं को राहत देने की वकालत करता रहा। साथ ही यह भी कहा गया कि सरकार की लापरवाही के कारण रेल की पटरियों पर सो रहे मजदूरों की मौत हो गई। सरकार उनके परिजनों को दुख-दर्द की भरपाई के लिए कम से कम 50-50 लाख रुपए अविलंब आवंटित करें।
चलते-चलते यह भी बता दें कि इन संगठनों का कहना है कि देश की आर्थिक हालात को बेहतर बनाने में जिन मजदूरों का खून-पसीना लगता रहा है उन मजदूरों के अधिकारों पर सरकार किसी प्रकार का हमला न करें बल्कि उन भूखे व बदहाल मजदूरों की हर संभव मदद के लिए नित नई योजनाएं बनाती रहे।
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कोरोना की धमकी से फिलहाल मुक्ति नहीं, बरतें सावधानियाँ
कोरोना की धमकियों से हाल-फिलहाल दुनिया मुक्त नहीं होने जा रही है। जीवन और जगत पर ब्रेक लग गया है। कोरोना के कारण कारागृह में कब तक बंद रहेगी दुनिया। इन सावधानियों के साथ जीवन को आगे बढ़ाएं-
1.शाकाहारी भोजन पसंद करें और इम्यूनिटी बढ़ाएं ! 2.प्रत्येक गुजर रहे सप्ताह में विशेष सावधानियां रखें ! 3.अनावश्यक मीटिंग को नकारें और जिसमें जाना आवश्यक हो तो मास्क लगाएं एवं सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ख्याल रखें। 4. मीटिंग में रुमाल, घड़ी, अंगूठी और बेल्ट आदि पहनकर नहीं जाएं। संभव हो तो सैनिटाइजर एवं टिशू पेपर को साथ रखें तथा आवश्यकतानुसार इस्तेमाल करें। 5. सैैलून या पार्लर से आने के बाद भी सर्वाधिक सावधानियों का ध्यान रखें…. संभव हो तो ब्लेड, तौलिया, कंघी-कैची … आदि अपना ही इस्तेमाल करें। 6.सालभर सिनेमा हॉल, मॉल, भीड़ भरी जगहों पर या पार्टियों में ना जाएं। 7. 1 साल तक घर से बाहर खाना ना खाएं एवं उत्सवों में अनावश्यक ना जाएं। 8.अनावश्यक की यात्रा ना करें 1 वर्ष और विदेश यात्रा पर न जाएं 2 वर्षों तक।
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लाॅकडाउन-3 के बीच मधेपुरा डीएम ने दुकान खोलने हेतु नई गाइडलाइन की जारी
सूबे बिहार की नीतीश सरकार द्वारा दुकान खोलने को लेकर जारी की गई नई गाइडलाइन एवं जिलाधीश को प्रदत्त विशेषाधिकार सहित मंथन करते हुए डीएम नवदीप शुक्ला ने अधिसूचना जारी की है कि कोविड-19 के मद्देनजर व्यावसायिक दुकानों/प्रतिष्ठानों के मालिकों द्वारा सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन किया जाएगा एवं भारत सरकार / राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर दिए गए निदेशों का अक्षरशः अनुपालन किया जाएगा।
बता दें कि पूर्व से खुली रहने वाली आवश्यक व इमरजेंसी दुकानों के अतिरिक्त लाॅकडाउन-3 में खोली जाने वाली दुकानों को 7 कैटेगरी में बांटी गई है जिसमें 6 कैटेगरी की दुकानें प्रत्येक दिन खुलेगी। एक कैटिगरी ही मात्र अल्टरनेट यानी सोम-बुध और शुक्रवार को 9:00 बजे प्रातः से 3:00 बजे अपराह्न तक खुली रहेगी जिसके अंतर्गत केवल ऑटोमोबाइल एंड स्पेयर्स की दुकानें होंगी।
यह भी जानिए कि प्रत्येक दिन खुलने वाली दुकानों में तीन कैटेगरी की दुकानें प्रातः 9:00 से 3:00 बजे तक ही खुली रहेगी और दो कैटेगरी दिन के 11:00 बजे से 5:00 बजे शाम तक खुली रहेगी।
चलते-चलते जानिए कि प्रातः 9:00 से 3:00 बजे तक खुलने वाली सभी तरह की दुकानें होंगी- गैरेज एण्ड वर्क शाॅप, ऑटोमोबाइल्स, टायर एंड ट्यूब/मोटरसाइकिल/स्कूटर मरम्मत सहित… सीमेंट, स्टील, बालू, गिट्टी, ईंट, हार्डवेयर, सैनिटरी फिटिंग, पेंटिंग, शटरिंग सामग्री।
दिन के 11:00 बजे से 5:00 बजे शाम तक खुली रहने वाली दुकानें होंगी- इलेक्ट्रिकल गुड्स, पंखा-कूलर, एयर कंडीशनर विक्रय सहित मरम्मत भी और प्रत्येक दिन खुलने वाली अंतिम 1 कैटेगरी के प्रतिष्ठान प्रदूषण जांच केंद्र के खुलने का समय 10:00 दिन से 5:00 शाम तक होगा।
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अब कोरोना से क्यों डरना ?
2020 के आरंभ से ही सारे विश्व में कोरोना के कहर के कारण अमेरिका, इटली, स्पेन… आदि जैसे देशों में भी कोहराम मचा है। विश्व का कदाचित कोई देश नहीं जो कोरोना से युद्ध नहीं लड़ रहा हो। अमेरिका में कोरोना वायरस के चलते मरने वालों की संख्या तेजी से लाख छूने ही वाली है।
बता दें कि भारत में अब तक 60 हजार के लगभग संक्रमित हैं और 2 हजार के पार लोगों की मौत हो चुकी है। लाॅकडाउन- 3 भी समाप्ति की ओर तेजी से बढ़ रहा है। डब्ल्यूएचओ द्वारा कोरोना को महामारी घोषित कर दिया गया है… जबकि बहुत सारे देश आर्थिक मंदी के दौर से गुजरने लगा है। ट्रेन से लेकर प्लेन तक अब और कितने दिनों तक बंद रखा जाएगा। संभव है अब जनहित व देशहित में सब कुछ धीरे-धीरे नॉर्मल स्थिति में लाए जाएं ताकि आर्थिक मंदी से भी निपटा जाए।
बता दें कि ऐसी परिस्थिति में भले ही लाॅकडाउन-3 के बाद कुछ जिलों में लाॅकडाउन समाप्त हो जाए फिर भी प्रत्येक व्यक्ति को ये सावधानियाँ बरतना आवश्यक है। इन्हें आप अपने दिनचर्या में समाहित कर लें। लाॅकडाउन हो या ना हो फिर भी अगले 6 से 12 महीने तक ये सावधानियाँ अति आवश्यक हैं- बस हमेशा याद रखें-
1.मास्क 2.हैंड सेनीटाइजर 3.सोशल डिस्टेंसिंग 4.बिना गए काम नहीं हो तभी बाहर जाएं 5.बाहर से आते ही हाथ -पैर धोकर ही घर में प्रवेश करें 6.यदि ऐसा लगे कि किसी संदिग्ध के संपर्क में आ गए हैं तो पूरा स्नान करें, भाप लें तथा गर्म काढ़ा पियें 7.जूते भी बाहर रखें 8.बेल्ट, अंगूठी, घड़ी, रुमाल का इस्तेमाल नहीं करें 9.सैनिटाइजर और टिश्यू पेपर साथ में रखें और जब जरूरी समझें तब इस्तेमाल करें। 10.सैलून जाने से बचें, दाढ़ी स्वयं शेव करें और बाल बनाने हेतु नाई को घर पर बुलाएं तो उसे मास्क पहना हो, हाथ सैनिटाइज कराएं तथा कंघी-कैंची-ब्लेड आदि सब समान आपका अपना हो।
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लॉक डाउन में रवीन्द्र नाथ टैगोर की 160वीं जयंती मधेपुरा में इस तरह मनी
मधेपुरा की सबसे पुरानी साहित्यिक संस्था कौशिकी क्षेत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन जहां कोरोना संक्रमण के कारण गुरुदेव रवीन्द्र नाथ ठाकुर की 160वीं जयंती 7 मई को आयोजित नहीं की जा सकी। सम्मेलन के अध्यक्ष हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ के निदेशानुसार सचिव डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने लाॅकडाउन के दरमियान सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन करते हुए अपने परिवार के सदस्यों के बीच नोबेल पुरस्कार से सम्मानित एक सशक्त कवि, कहानीकार, गीतकार, संगीतकार, निबंधकार, नाटककार, चित्रकार के साथ-साथ एक महान शिक्षक रवीन्द्र नाथ टैगोर की जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए यही कहा-
कि 7 मई के ही दिन 1861 ई. में कोलकाता के देवेंद्र नाथ टैगोर के घर चौदहवीं संतान के रूप में एक बालक रवीन्द्र ने जन्म ग्रहण किया था। उसने 8 वर्ष से लिखना आरंभ किया। उसकी कविता 12 वर्ष में एवं लघु कथा 16 साल की उम्र में प्रकाशित हुई। वर्ष 1910 में उन्होंने गीतांजलि की रचना की जिसे 10 दिसंबर 1913 को नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। विश्व का सर्वश्रेष्ठ सम्मान “नोबेल पुरस्कार” पाने वाला पहला भारतीय बने रवीन्द्र नाथ टैगोर।
अंत में डॉ.मधेपुरी ने पुनः कहा कि 3 देशों के राष्ट्रगान से गुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर का नाम जुड़ा है। भारत का राष्ट्रगान “जन गण मन…..” और बांग्लादेश का राष्ट्रगान “आमार सोनार बांग्ला….” तो उनकी ही रचनाएं हैं। तीसरा देश श्रीलंका जिसका राष्ट्रगीत “श्रीलंका मथा….” भी गुरुदेव की कविताओं की प्रेरणा से बना है।
चलते-चलते यह भी कि बचपन में इस नोबेल पुरस्कार विजेता को स्कूल की दीवारें बंधन जैसा लगता था जिसके कारण उन्होंने बड़े होकर शांति निकेतन की स्थापना की। आज दुनिया उसे विश्व भारती यूनिवर्सिटी के नाम से पुकारती है।
























