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रामदरश मिश्र, मनमोहन झा, शमीम तारिक और साइरस मिस्त्री को साहित्य अकादमी पुरस्कार

‘असहिष्णुता’ को लेकर पुरस्कारवापसी का शोर अभी थमा ही था कि साहित्य अकादमी ने साल 2015 के लिए पुरस्कारों की घोषणा कर दी। हिन्दी में रामदरश मिश्र, मैथिली में मनमोहन झा, उर्दू में शमीम तारिक और अंग्रेजी में साइरस मिस्त्री को इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए चुना गया है। अकादमी के अध्यक्ष विश्वनाथ प्रसाद तिवारी की अध्यक्षता में कल हुई कार्यकारी मंडल की बैठक में 23 भारतीय भाषाओं के लिए पुरस्कार घोषित किए गए। बांग्ला भाषा के लिए पुरस्कार की घोषणा बाद में की जाएगी। पिछले दिनों 39 साहित्यकारों ने देश में कथित तौर पर बढ़ती ‘असहिष्णुता’ और साहित्य अकादमी के बोर्ड मेंबर एम. एम. कलबुर्गी की हत्या के विरोध में अपने पुरस्कार वापस कर दिए थे। अकादमी ने इस बाबत बड़ा निर्णय लेते हुए कहा कि लौटाए गए पुरस्कार वापस नहीं लिए जाएंगे। अकादमी की ओर से श्रीकांत बाहुलकर को भाषा सम्मान दिए जाने की घोषणा भी की गई।

अकादमी के सचिव के. श्रीनिवासन राव के द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार इस साल पुरस्कार के लिए छह कविता-संग्रह, छह कहानी-संग्रह, चार उपन्यास, दो निबंध-संग्रह, दो नाटक, दो समालोचना और एक संस्मरण का चयन किया गया है। रामदरश मिश्र को उनके कविता-संग्रह ‘आग की हंसी’, मनमोहन झा को कहानी-संग्रह ‘खिस्सा’, शमीम तारिक को समालोचना ‘तसव्वुफ और भक्ति’ और साइरस मिस्त्री को उनके उपन्यास ‘क्रॉनिकल ऑफ द कॉर्प्स बियरर’ के लिए पुरस्कार से नवाजा जाएगा। संस्कृत में इस वर्ष रामशंकर अवस्थी को उनके कविता-संग्रह ‘वनदेवी’ के लिए पुरस्कृत किया जाएगा।

भारतीय मानचित्र में सबसे ऊपर बैठे जम्मू-कश्मीर को देखें तो कश्मीरी में बशीर भद्रवाही को ‘जमिस त कशीरी मंज कशीर नातिया अदबुक’ (समालोचना) और डोगरी में ध्यान सिंह को ‘परछामें दी लो’ (कविता) के लिए सम्मानित किया जाएगा। ‘जन-गण-मन’ के ‘पंजाब-सिंध-गुजरात-मराठा’ की ओर चलें तो पंजाबी में जसविन्दर सिंह को उपन्यास ‘मात लोक’, सिंधी में माया राही को कहानी-संग्रह ‘महंगी मुर्क’, गुजराती में रसिक शाह को निबंध-संग्रह ‘अंते आरंभ’ (खंड एक और दो) और मराठी में अरुण खोपकर को संस्मरण ‘चलत-चित्रव्यूह’ के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाजा जाएगा। राजस्थानी में यह सम्मान मधु आचार्य ‘आशावादी’ को उनके उपन्यास ‘गवाड़’ और कोंकणी में उदय भेंब्रे को उनके नाटक ‘कर्ण पर्व’ के लिए दिया जाएगा।

‘द्रविड़’ यानि दक्षिण भारतीय भाषाओं की बात करें तो तमिल में ए. माधवन को ‘इक्किया सुवडुकल’ (निबंध), तेलुगु में वोल्गा को ‘विमुक्त’ (कहानी), कन्नड़ में के. वी. तिरूमलेश को ‘अक्षय काव्य’ (कविता) और मलयालम में के. आर. मीरा को ‘आराचार’ (उपन्यास) के लिए अकादमी पुरस्कार दिया जा रहा है। ‘उत्कल’ की ओर रुख करें तो ओड़िया में विभूति पटनायक को ‘महिषासुर मुहन’ (कहानी) के लिए चुना गया है।

उत्तर-पूर्व की ओर बढ़ने पर असमिया में कुल सेइकिया को ‘आकाशेर छबि आर अनन्न गल्प’ (कहानी) के लिए, मणिपुरी में क्षेत्री राजन को ‘अहिड़ना येकशिल्लिबरा मड़’ (कविता)  के लिए, बोडो में ब्रजेन्द्र कुमार ब्रह्मा को ‘बायदी देंखे बायदी गाब’ (कविता) के लिए, संथाली में रबिलाल टुडू को ‘पारसी खातिर’ (नाटक) के लिए और नेपाली में गुप्त प्रधान को ‘समयका प्रतिविम्बहरू’ (कहानी) के लिए  पुरस्कार से नवाजा जा रहा है।

सभी घोषित पुरस्कार 16 फरवरी 2016 को दिल्ली के फिक्की सभागार में दिए जाएंगे। बता दें कि पुरस्कार के तौर पर विजेताओं को ताम्रपट्टिका, शॉल और एक लाख रुपये प्रदान किए जाते हैं।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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भारतीय जन लेखक संघ, मधेपुरा इकाई द्वारा विरह-मिलन के प्रखर गीतकार सुबोध कुमार सुधाकर का किया गया सम्मान

भारतीय जन लेखक संघ द्वारा सुकवि ‘सुधाकर’ के लिए आयोजित सम्मान समारोह का उद्घाटन किया प्रो.दयानन्द और अध्यक्षता की भू.ना.मंडल वि.वि. के हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो.इन्द्र ना.यादव ने |

संघ के महासचिव महेन्द्र ना.पंकज, सचिव सुरेन्द्र भारती, पश्चिम बंगाल के आलोक सुन्दर सरकार, प्रो.सीताराम शर्मा, प्रो.नारायण कुमार, ई.हरिश्चन्द्र मंडल, प्रमोद कुमार सूरज, डॉ.विनय कुमार चौधरी आदि की सहभागिता से- “साहित्य में दलित एवं पिछड़ो के अस्तित्व” विषयक परिचर्चा पर गहराई से विमर्श हुआ |

Dr.Madhepuri felicitating Geetkaar Sudhakar Jee .
Dr.Madhepuri felicitating Geetkaar Sudhakar Jee .

साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने कौशिकी के अद्यक्ष व सुधाकर जी के काव्य-गुरु हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ की चर्चा करते हुए सुकवि ‘सुधाकर’ को पुष्प गुच्छ अर्पित कर सम्मानित किया और परिचर्चा के विषयानुरूप स्वरचित ग्रन्थ- ‘इतिहास पुरुष शिवनंदन प्रसाद मंडल’ भेंट करते हुए परिचर्चा को सर्वाधिक गंभीर भी बना दिया | अन्त में डॉ.मधेपुरी ने कहा कि जब भी वे उत्तर दिशा की ओर नजर उठाते हैं तो हिमालय की तरह अडिग और स्थितप्रज्ञ होकर साहित्य सृजन करते हुए नजर आते हैं- तारानन्दन तरुण और सुबोध कुमार सुधाकर एवं हिमालय की सबसे ऊँची चोटी एवेरेस्ट पर भारतीय तिरंगा को फहराती हुई नजर आती है- देश की बेटी संतोष यादव |

 Audience attending the meeting of Bhartiya Jan Lekhak Sangh at Madhepura .
Audience attending the meeting of Bhartiya Jan Lekhak Sangh at Madhepura .

दूसरे सत्र में प्रखर गीतकार एवं क्षणदा के संपादक ‘सुधाकर’जी, जिन्होंने साहित्यिक सम्मान के रूप में राष्ट्रभाषा रत्न, साहित्य रत्न, काव्य प्रवीण तथा संपादकश्री आदि अर्जित किया है, के सम्मान में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें फर्जी हास्य कवि डॉ.अरुण कुमार, राकेश कुमार द्विजराज, धर्मेन्द्र कुमार आनन्द, प्रतिभा कुमारी, मो.अबरार आलम, उल्लास मुखर्जी, डॉ.नारायण, शम्भुनाथ अरुणाभ, संतोष सिन्हा, भूपेन्द्र यादव, डॉ.विनय कुमार चौधरी, डॉ.मधेपुरी आदि ने अपनी रचनाओं से ऐसा समां बंधा कि कार्यक्रम के दोनों सत्रों में सात घंटे कैसे निकल गये, किसी को पता भी नहीं चला |

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अगले गैंगरेप पर अगली कविता लिखने तक

[निर्भया कांड केवल एक दुर्घटना नहीं, अमानवीयता की पराकाष्ठा थी। 16 दिसम्बर 2012 को देश की राजधानी दिल्ली में छह नरपशुओं ने चलती बस में 23 वर्षीया निर्भया का गैंगरेप किया। बर्बरता की सारी हदें पार कर दी थीं उन दरिंदों ने। उन सबने असंख्य जख्म दिए निर्भया को। फिर भी जीना चाहती थी वो। तेरह दिनों तक मौत से लड़ती रही वो जब तक कि एक-एक कर उसके सारे अंगों ने काम करना बंद नहीं कर दिया। 29 दिसंबर 2012 को हमेशा के लिए सो गई निर्भया। लेकिन सोने से पहले सारे देश को झकझोर दिया था उसने। ऐसी कोई आँख ना थी जिसमें आँसू और आक्रोश ना हो।

आज उस नृशंस घटना के तीन साल हो गए। लेकिन क्या बदला..? कुछ भी तो नहीं। 2012 बीतने को था जब निर्भया कांड हुआ। उसके बाद के तीन सालों में क्या हुआ ये जानना चाहिए आपको। राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो के मुताबिक राजधानी दिल्ली में 2013 में दुष्कर्म के 1441, 2014 में 1813 और इस साल यानि 2015 में 31 अक्टबूर तक 1856 मामले दर्ज हुए। बात यहीं खत्म नहीं होती। इन मामलों में 46 प्रतिशत दुष्कर्म पीड़ित नाबालिग हैं। कहाँ चली गई हमारी इंसानियत..? क्या कर रहा है हमारे देश का कानून..? क्यों इस कदर मर गया हमारी आँखों का पानी..? एक तरफ बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा और दूसरी तरफ हर रोज एक नई निर्भया..? क्या शर्म नहीं आनी चाहिए हमें..

जहाँ भी होगी निर्भया, आज भी बेचैन होगी। पेश है उस निर्भया को समर्पित उन्हीं दिनों लिखी गई डॉ. ए. दीप की बहुचर्चित कविता जिसका शीर्षक है अगले गैंगरेप पर अगली कविता लिखने तक]

कविता

अगले गैंगरेप पर अगली कविता लिखने तक

किसी ने तुम्हें वेदना कहा
किसी को तुम दामिनी दिखी
किसी ने निर्भया कहकर पुकारा
और तकनीकी शब्दावली में
गैंगरेप-पीड़िता थीं तुम…
जो भी नाम हो तुम्हारा
नमन करता हूँ तुम्हें
कि तुम जागी रहीं तब तक
जब तक बारी-बारी से
सो नहीं गए
तमाम अंग तुम्हारे।

आत्मा का आवरण ही नहीं
आत्मा भी लहूलुहान थी तुम्हारी
फिर भी
पूरे तेरह दिनों तक
तुम जीवित बैठी रहीं चिता पर
सोई नहीं
हमारे जागने से पहले।

मलाला का मलाल
अभी साल ही रहा था
कि जाना
छह-छह पशुओं ने मिलकर
बनाया तुम्हें शिकार
अपनी हवस का…
आज मैं लज्जित हूँ
अपने पुरुष होने पर
कि वे सारे पशु
पुरुष जाति के थे।

तुम निढ़ाल
नंगी पड़ी रहीं
सड़क के किनारे
पर कृष्ण के इस देश ने
देर कर दी
दो गज कपड़ा तक जुटाने में…
बस में उन पशुओं ने
जो तुम्हारे शरीर के साथ किया
वही दुष्कर्म करते रहे
तुम्हारे अस्तित्व के साथ
वहाँ से गुजरने वाले
न जाने कितने पिता, पुत्र, पति और भाई…
लज्जित हूँ
कि उन पशुओं के साथ-साथ
ये भी पुरुष जाति के थे।

यकीन मानो
उस दिन से आज तक
नजरें चुरा रहा हूँ
अपनी दो साल की बेटी से
और हो जाता हूँ कुंठित
जाकर पास पत्नी के
कि मैं
पुरुष जाति का हूँ।

तुम्हीं बताओ
अब कैसे करूँ पाठ
दुर्गा सप्तशती का
कैसे चढ़ाऊँ जल
पवित्र तुलसी को
कैसे दूँ बहन को
रक्षा का वचन
और कैसे दबाऊँ पैर
अपनी माँ के
कि मैं पुरुष जाति का हूँ।

लज्जित हूँ
कि पकड़े गए केवल वही छह
और बाहर हैं उनकी जाति के
बाकी हम सारे पशु।

लज्जित हूँ
कि हमारी सभ्यता के
हजारों साल होने को आए
पर हम अदद पशुता को भी
जीत नहीं पाए।

लज्जित हूँ
कि अब भी वीर्य बहता है
हमारे भीतर
और आदम की भूमिका
अब भी निभाएगा
आदमी ही।

लज्जित हूँ
कि तुम्हारे जगाने के बाद
जागकर ये कविता तो लिख दी…
अब शायद बैठ जाऊँगा
अगले गैंगरेप पर
अगली कविता लिखने तक।

डॉ. ए. दीप की कविता

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डॉ.मधेपुरी ने की प्रो.चन्द्रशेखर से मो.कुदरतुल्लाह के नाम पर सड़क के नामकरण की माँग

अमर स्वतंत्रता सेनानी, पूर्व एम.एल.सी. एवं प्रखर समाजसेवी मो.कुदरतुल्लाह काजमी की 48वीं पुण्यतिथि समारोह स्थानीय कुदरतुल्लाह यूनानी दवाखाना के प्रांगण में सम्मानपूर्वक आयोजित किया गया जिसके प्रेरक रहे हैं- डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी एवं आयोजक मो.शौकत अली |

समारोह के उद्घाटन सत्र का श्री गणेश दीप प्रज्ज्वलित कर बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन मंत्री प्रो.चन्द्रशेखर व डॉ.मधेपुरी सहित राजद जिलाध्यक्ष मो.खालिद, वरीय नेता विजेन्द्र प्र.यादव, जिलापरिषद अद्यक्षा मंजू देवी ने किया |

Minister Prof.Chandrashekhar addressing the people in the campus of Kudratullah Unani Dawakhana, Madhepura .
Minister Prof.Chandrashekhar addressing the people in the campus of Kudratullah Unani Dawakhana, Madhepura .

माननीय मंत्री प्रो.चन्द्रशेखर ने उस अजिम शख्सियत मो.कुदरतुल्लाह के सामाजिक योगदानों को रेखांकित करते हुए कहा कि आगे भी डॉ.मधेपुरी एवं शौकत अली जैसे समाजसेवी लोग उन्हें याद रखेंगे | मंत्री ने कहा कि समाज के वंचितों एवं बच्चों के लिए मधेपुरा में यूनानी दवाखाना तथा काजमी कन्या विद्यालय की स्थापना हेतु उन्होंने न केवल जमीन दान दी बल्कि आजादी खातिर यातनाएँ भी सही और जेल भी गये |

Chief Guest Dr.Madhepuri comparing Kudratullah with 1st Law Minister .
Chief Guest Dr.Madhepuri comparing Kudratullah with 1st Law Minister .

मुख्यअतिथि डॉ.मधेपुरी ने मधेपुरा के मंडल-त्रय गांधीवादी शिवनन्दन प्र.मंडल, समाजवादी भूपेन्द्र नारायण मंडल एवं सामाजिक न्याय के पुरोधा बी.पी.मंडल की चर्चा करते हुए कहा कि मो.कुदरतुल्लाह गांधीवादी शिवनन्दन प्र.मंडल के हमसफर थे | दोनों एक साथ पढ़े और आजादी की लड़ाई में संग-साथ रहकर जेल यात्रा पर भी गये | दोनों दो-दो टर्म एम.एल.ए. एवं एम.एल.सी. रहे | दोनों देश के लिए जीते रहे | देश की खातिर जीने वाला कभी मरता नहीं है |

डॉ.मधेपुरी ने सर्वप्रथम मंत्री महोदय को यह जानकारी दी कि बापू द्वारा ‘नशाबन्दी’ की घोषणा किये जाने पर कुदरतुल्लाह ने इसी सड़क पर अपने पिता की ताड़ी दूकान बंद करने हेतु धरना-प्रदर्शन किया था | फिर डॉ.मधेपुरी ने इसी रोड का नामकरण कुदरतुल्लाह मार्ग करने की माँग बिहार सरकार के मंत्री प्रो.चन्द्रशेखर से की |

जहाँ विशिष्ट अतिथि के रूप में जिला परिषद् अध्यक्षा मंजू देवी ने कुदरतुल्लाह के जीवन से बहुत कुछ सीखने की बातें कहीं वहीँ राजद जिलाध्यक मो.खालिद, वरीय नेता विजेन्द्र प्र.यादव ने उद्गार व्यक्त करते हुए काजमी साहब को प्रखर राष्ट्रवादी विचारक बताया | वैसे शिक्षा प्रेमी की पुण्य तिथि पर दस शिक्षकों को सम्मानित किये जाने की सराहना भी की |

People at Kudratullah Shraddhanjali Sabha .
People at Kudratullah Shraddhanjali Sabha .

अपने अध्यक्षीय भाषण में मो.शौकत अली ने उस यूनानी दवाखाने के सारे कचरे को हटाकर वहाँ आयुष चिकित्सालय की स्थापना की माँग की | मौके पर विद्वान डॉ.सैयाद परवेज आलम, मो.खतीबुर रहमान, मुर्तुजा अली, हाजी मनीरुद्दीन, अनवर जी आदि ने श्रधांजलि अर्पित की |

अंत में सेल-टैक्स एवं इनकम-टैक्स के वरीय अधिवक्ता जयनन्दन प्रसाद ने धन्यवाद् ज्ञापित किया |

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बी.पी.मंडल सेतु (डुमरी पुल) का रुका हुआ निर्माण कार्य शुरू……

Madhepura होकर गुजरनेवाली एन.एच.-107 (महेशखूंट-पूर्णिया) के 16वें कि.मी. पर अवस्थित ‘बी.पी.मंडल सेतु’ पर 2010 के अगस्त-सितम्बर माह से ही तीन-चार पाये के नीचे की मिट्टी खिसक जाने के कारण वाहनों का आवागमन बन्द कर दिया गया और आज तक परिचालन बन्द ही है- जिसके कारण कोसी अंचल के मधेपुरा-सहरसा-सुपौल वासियों को जितने प्रकार की परेशानियाँ उठानी पड़ीं हैं उससे कहीं अधिक तो निकट के ‘बेलदौर प्रखंड का विकास’ अवरुद्ध हुआ है | इसी बी.पी.मंडल सेतु को अधिकांश लोग अब भी डुमरी पुल ही कहते हैं |

ज्ञातव्य हो कि ठीक एक साल के बाद ही 10 जून 2011 को 17 करोड़ की लागत से बी.पी.मंडल सेतु के बगल में एक स्टील ब्रिज का निर्माण राज्य सरकार द्वारा करके उस पर परिचालन आरम्भ कर दिया जाता है | परन्तु, बी.पी.मंडल सेतु की तरह ही स्टील ब्रिज के पाये के नीचे की मिट्टी खिसक जाती है और 8 जुलाई 2011 से इस ब्रिज पर भी परिचालन बन्द कर दिया जाता है | कोसी अंचल के लोगों का दुर्भाग्य है कि 17 करोड़ के इस ब्रिज को कोसी 27 दिनों में ही बहा ले जाती है | कोसी के तीनों जिले के लोगों की समस्याएँ जस की तस मुँह बाये खड़ी की खड़ी रह जाती हैं |

फिलहाल एक किलोमीटर लम्बा बी.पी.मंडल सेतु का रुका हुआ जीर्णोद्धार कार्य 50 करोड़ की राशि से केबुल स्टे ब्रिज की तर्ज पर शुरू हो चुका है जिसके जीर्णोद्धार का कार्य एस.पी.सिंगला कम्पनी को दिया गया है |

कम्पनी के प्रोजेक्ट मैनेजर के.के.रंजन ने  Madhepura Abtak को बताया कि दोनों किनारों पर 75-75 मीटर की दूरी पर एक-एक पाये का अतिरिक्त निर्माण होगा जिसके लिए रास्ते बनाये जाने का कार्यारम्भ भी हो गया है | उन्होंने यह भी कहा कि 290 मीटर के बीच के आठ पायों को तोड़ा जा चुका है और इस बार नदी के मध्य 140 मीटर में जल-प्रवाह को पूर्ण रूपेण मुक्त रखा जायेगा और यह भी कि इस कार्य को संपन्न होने में दो वर्ष लगेगा |

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बी.एस.एन.एल. की यही पहचान ! जिसकी सेवा से उपभोक्ता परेशान ….!!

बी.एस.एन.एल. (B.S.N.L.) यानी Bharat Sanchar Nigam Limited की मोबाइल सेवा लगभग-लगभग प्रत्येक महीने ग्राहकों और उपभोक्ताओं के लिए परेशानियाँ उत्पन्न करती रहती हैं |

विगत वर्षों में तो B.S.N.L के उपभोक्ताओं ने तंग आकर इसका नामकरण नये ढंग से यूँ कर दिया था – BSNL यानी भाई साहब नहीं लगेगा |

जब लोग काफी तंग होने लगे तो भारी संख्या में लोग अपने घर का बेसफोन कनेक्शन कटवाने लगे | तब BSNL के पदाधिकारियों एवं कर्मियों की नींद टूटी और वे इस तरह जगे कि उपभोक्ताओं ने लगे हाथ BSNL का पुनः नया नामकरण कर दिया – भाई साहब निश्चय लगेगा |

इधर फिलहाल छह महीनों से कभी मोबाइल सेवा तो कभी ब्रॉडबैंड सेवा समस्त उपभोक्ताओं को काफी परेशान कर रही है | इतना ही नहीं बी.एस.एन.एल. सेवा बाधित होने से इन्टरनेट आधारित कारोबार भी ठप्प हो जाता है |

बुधवार को सारा दिन सुबह से ही मधेपुरा जिले में बी.एस.एन.एल. की मोबाइल सेवा बाधित रही | मोबाइल सेवा बाधित होने से उपभोक्ताओं को सारा दिन परेशान होना पड़ा तथा बहुत कुछ सोचने के लिए मजबूर भी…….!!

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पप्पू यादव  के ‘जख़्मों’ पर ‘बायोपिक’ का मरहम वाया ‘अमेरिका’

मधेपुरा के सांसद पप्पू यादव पर भारतीय मूल के अमेरिकी निर्देशक परम गिल बायोपिक फिल्म बनाएंगे। हाल के विधानसभा चुनाव में उन्हें मिले जख़्मों पर ये ख़बर मरहम का काम करेगी। चुनाव से पहले उन्होंने लालू यादव से ‘उत्तराधिकार’ मांगा और इस बेतुकी मांग के बदले राजद से निकाले गए। फिर उन्होंने ‘जन अधिकार पार्टी’ बनाई लेकिन उनकी पार्टी के ‘जन’ को जनता से भी कोई ‘अधिकार’ नहीं मिला। इसके बाद ख़बरों से नदारद थे पप्पू यादव। हाँ, बीच में उन्होंने अपने उस बड़बोले दावे पर माफी जरूर मांगी थी जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर लालूजी के दोनों बेटे चुनाव जीत जाते हैं तो वे राजनीति छोड़ देंगे। बहरहाल, लम्बे अन्तराल के बाद उनकी कोई ख़बर आई है। ख़बर… ‘गैर’राजनीतिक … और वो भी ‘अमेरिकी कनेक्शन’ के साथ।

पप्पू यादव पर बनने वाली फिल्म की कहानी बिहार (Bihar) के अमरनाथ झा की किताब पर आधारित है। उन्होंने ही इसका स्क्रीनप्ले भी लिखा है। पप्पू यादव की आत्मकथा ‘द्रोहकाल का पथिक’ में उन्हें ‘फिल्मी’ मैटेरियल दिखा था। किताब में एक ओर पप्पू यादव की ‘हीरो’ जैसी ज़िन्दगी थी तो दूसरी ओर एक खूबसूरत लव स्टोरी जिसमें रॉबिनहुड की छवि वाले राजनेता को एक सिख लड़की से प्यार हो जाता है। वो इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने किताब के राइट्स खरीद लिए।

प्रस्तावित फिल्म में पप्पू के जीवन के हर पहलू को दिखाने की कोशिश होगी। फिल्म के निर्देशक परम गिल का मानना है कि पप्पू यादव ने अपनी ज़िन्दगी में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। उन्होंने पिछड़ी जातियों के अधिकार के लिए संघर्ष किया है जिसे दुनिया के सामने आना चाहिए। गिल के अनुसार उनकी कहानी काफी ‘दिलचस्प’ है जिसे पर्दे पर उतारना ‘व्यावसायिक’ तौर पर भी ‘फायदेमंद’ होगा। फिलहाल वो फिल्म के लिए कलाकारों के चयन में जुटे हैं। बता दें कि परम गिल अपनी हॉलीवुड फिल्म ‘गोइंग टू अमेरिका’ के लिए जाने जाते हैं।

बिहार (Bihar) के कोसी और सीमांचल के इलाके में पप्पू यादव की अच्छी पैठ है पर विधानसभा चुनाव में वो सीधे “मैं बदलूँगा बिहार” के नारे के साथ उतर गए। एक तो उन्होंने एकदम से अपना ‘कैनवास’ बहुत बड़ा कर लिया, दूसरा उनके नारे का ‘मैं’ ज्यादातर लोगों के गले नहीं उतरा और तीसरा बीजेपी से उनकी ‘सांठगांठ’ छिपी ना रह सकी। सीधे मुकाबले में तो पप्पू वैसे भी नहीं थे पर वो ‘असर’ छोड़ेंगे ये उम्मीद जरूर थी। चुनाव के नतीजे आने पर इसके उलट पप्पू खासे ‘बेअसर’ साबित हुए। वो जान गए कि अपने लिए वोट मांगना और अपने नाम पर औरों के लिए वोट जुटाना दो अलग बातें हैं। यहाँ तक कि जिस इलाके पर वो अपनी ‘मुहर’ लगाकर चल रहे थे वहाँ से भी उन्हें यही सबक मिला। जाहिर है कि इतना सब कुछ होने के बाद पप्पू के लिए स्थितियां सहज नहीं रहीं और उन्होंने सुर्खियों से दूर रहना ही ठीक समझा। अब जबकि उनके ऊपर फिल्म बनने की ख़बर सामने आई है, पप्पू को नए सिरे से लोगों का सामना करने में ‘सहूलियत’ होगी।

राजनेताओं के सार्वजनिक जीवन को लेकर इससे पहले भी कई फिल्में बनी हैं। इससे नाम और चर्चा जो मिले लेकिन ये नहीँ भूलना चाहिए कि बायोपिक बनाना लोगों को किसी के निजी जीवन में झाँकने के लिए खुला आमंत्रण देना है। बशर्ते कि वो ईमानदारी से बने। जीवन को ज्यों का त्यों दिखा देना बहुत साहस और जोखिम का काम होता है। ये देखने की बात होगी कि पप्पू यादव इस पैमाने पर कितना खरा उतरते हैं। अभी उन्हें एक लम्बा राजनीतिक जीवन जीना है। ऐसे में वो निर्देशक को किस हद तक ‘रचनात्मक स्वतंत्रता’ देते हैं, इस पर आलोचकों की निगाह होगी। उनके साथ ‘बाहुबली’ का टैग क्यों जुड़ा, फिल्म इस पर क्या और कैसे कहती है, यह देखना दिलचस्प होगा और सांसद पत्नी रंजीत रंजन के संग उनके प्रेम-प्रसंगों को लेकर भी उत्सुकता रहेगी। सम्भवत: उनके जीवन के कुछ अनछुए पहलू भी दुनिया के सामने आएं।

पप्पू यादव की आत्मकथा ‘द्रोहकाल का पथिक’ पहले ही प्रकाशित हो चुकी है और अब उनके जीवन पर फिल्म बनने जा रही है। उनसे बड़ी विनम्रता के साथ एक सवाल करने को जी चाहता है कि क्या उन्हें स्वयं को थोड़ा और वक्त नहीं देना चाहिए था..? तब शायद उनके जीवन में बताने और साझा करने लायक कुछ और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ जाते..!

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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मधेपुरा के भू.ना.मंडल वि.वि. में बी.एड. के छूटे परीक्षार्थियों की प्रैक्टिकल परीक्षा 17 एवं 18 दिसम्बर को

फिलहाल भू.ना.मंडल वि.वि. में दर्जनों बी.एड.कॉलेज चल रहे हैं- मधेपुरा-सहरसा में 3-3 तथा शेष पूर्णिया, कटिहार आदि अन्य जगहों पर | बी.एड.परीक्षा 2015 की प्रैक्टिकल परीक्षा देने से जो परीक्षार्थी वंचित रह गये उनकी यानी छूटे हुए परीक्षार्थियों की पुनर्परीक्षा हेतु तिथियाँ घोषित कर दी गयी हैं |

मंडल वि.वि. के परीक्षा नियंत्रक डॉ.नवीन कुमार ने मधेपुरा अबतक को बताया कि तमाम बी.एड.कॉलेजों के 2015 की प्रैक्टिकल परीक्षा से वंचित रह गये परीक्षार्थियों की पुनर्परीक्षा हेतु वि.वि. में केवल एक केन्द्र पर दो दिनों के लिए परीक्षाएं आयोजित की गई हैं | वह केंद्र है- पार्वती विज्ञान महाविद्यालय, मधेपुरा तथा दो दिनों की तिथियाँ होंगी-17 एवं 18 दिसम्बर | परीक्षार्थीगण अपना परीक्षा प्रवेश पत्र साथ में अवश्य लायेंगे |

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मधेपुरा विधानसभा क्षेत्र से सामाजिक न्याय के पुरोधा बी.पी.मंडल के बाद प्रो.चन्द्रशेखर ही बने बिहार सरकार के कबीना मंत्री

बिहार में पहली बार 16वीं विधानसभा चुनाव में राजद-जदयू एवं कांग्रेस समन्वित महागठबंधन की सरकार बनी है जो लालू-शरद-सोनिया के ताकतवर धर्मनिरपेक्ष विचारों का फल है | इस महागठबंधन की सरकार में नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री के रूप में पाँचवीं बार शपथ ग्रहण किया है तथा पहली बार उपमुख्यमंत्री बने हैं तेजस्वी यादव और आपदा प्रबंधन के कबीना मंत्री बने हैं- प्रो.चन्द्रशेखर |

यूँ तो मधेपुरा  जिले के प्रथम कबीना मंत्री (विधि मंत्री) बने शिवनंदन प्रसाद मंडल परन्तु मधेपुरा  विधानसभा क्षेत्र से प्रथम कबीना मंत्री बनने वाले बी.पी.मंडल के बाद प्रो.चन्द्रशेखर को ही कबीना मंत्री के रूप में जनता-जनार्दन की सेवा करने का अवसर प्राप्त हुआ है |

Dr.Bhupendra Madhepuri blessing the honourable minister Prof. Chandrashekhar.
Dr.Bhupendra Madhepuri blessing the honourable minister Prof. Chandrashekhar.

6 दिसम्बर 2015 को स्थानीय रासविहारी उच्च विद्यालय का वह ऐतिहासिक मंच और दर्शकों-सम्मानकर्ताओं से खचाखच भरा वह मैदान माननीय मंत्री प्रो.चंद्रशेखर के अद्वितीय एवं अपूर्व नागरिक महाअभिनंदन का गवाह बना- जिसे देखकर समाजसेवी एवं साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने विगत कालखंडों में इस मंच पर पधारे समाजवादी चिंतकों डॉ.लोहिया, भूपेन्द्र नारायण मंडल, चौधरी चरण सिंह, लोकनायक जयप्रकाश………. कर्पूरी ठाकुर आदि की चर्चा करते हुए अपने संबोधन के अन्त में अपने अनुज प्रो.चन्द्रशेखर को आशीर्वचन के रूप में यही कहा-

शिवनंदन-भूपेन्द्र बने रे, जिस कोसी तट की हरियाली !
शेखर उसी चमन का तुम भी, बन जा एक यशस्वी माली !!

Massive gathering for felicitating Cabinet Minister Prof.Chandrashekhar.
Massive gathering for felicitating Cabinet Minister Prof.Chandrashekhar.

11 बजे दिन से 5 बजे शाम तक चले मंत्री प्रो.चन्द्रशेखर के इस महानागरिक सम्मान समारोह में विशिष्ठ अतिथियों के रूप में शरीक हुए- पूर्व पर्यटन मंत्री अशोक कुमार सिंह, विधान पार्षद विजय कुमार वर्मा, विधायक रमेश ऋषिदेव, पूर्व विधायक परमेश्वरी प्रसाद निराला, वयोवृद्ध राजद नेता जगदीश प्रसाद यादव एवं राजद के जिला अद्यक्ष प्रो.खालिद, जदयू के सियाराम यादव, कांग्रेस के सत्येन्द्र सिंह, पूर्व प्रमुख सियाशरण यादव, डॉ.विजेंद्र, नरेश पासवान, डॉ.शांति यादव, गुड्डी देवी, प्रधान जी, डॉ.अरुण, पारो जी सहित जिले के कोने-कोने से आये महागठबंधन के सभी प्रखंडों के अद्यक्ष, विभिन्न प्रकोष्ठों के पदाधिकारीगण, किसान-मजदूर-छात्र-नौजवान तथा माता-बहनों की उपस्थिति में सम्मानित होनेवाले सभी स्वतंत्रता सेनानियों के साथ-साथ समाजसेवी साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी को भी माननीय मंत्री प्रो.चन्द्रशेखर ने शाल ओढ़ाकर एवं माला पहनाकर केवल सम्मानित ही नहीं किया बल्कि अपने सामाजिक ऋण को हल्का भी किया और आगे भी इस ऋण को अपनी सरकार के माध्यम से चुकाते रहने का संकल्प बार-बार दुहराया भी |

Samajsevi Sahityakaar Dr.Bhupendra Madhepuri being honoured by Minister Prof.Chandrashekhar .
Renowned Educationist Dr.Bhupendra Madhepuri being honoured by Minister Prof.Chandrashekhar at Madhepura .

माननीय मंत्री प्रो.चन्द्रशेखर ने भ्रष्टाचार-अनाचार-दुराचार के संवाहकों को कठोर दण्ड देने का संकल्प लेते हुए उपस्थित जनमानस के माध्यम से क्षेत्र के लोगों के बीच यह पैगाम प्रेषित किया कि-

मेरा घर खुला है, खुला ही रहेगा तुम्हारे लिए !
मोबाइल भी खुला ही रहेगा, तुम्हारी सेवा के लिए !!

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हम जहर पी रहे हैं सुनो बादशाह !

आज कोसी के लोग शुद्ध जल के लिए तरस रहे हैं | कुशहा त्रासदी 2008 में आई प्रलयंकारी बाढ़ के बाद आर्सेनिक का खतरा कोसी क्षेत्र में बढ़ गया है | कई स्थानों पर तो जांच के दौरान 100 पीपीएम तक आर्सेनिक पाए गये हैं जबकि इस बाबत सरकारी विभाग (पी.एच.ई.डी.) अभी भी अनभिज्ञ है |

एक तो कोसी क्षेत्र के पानी में आयरन की प्रचुर मात्राऔर अब ऊपर से आर्सेनिक की उपस्थिति- जानलेवा सिद्ध हो रही है | आर्सेनिक के शरीर में जाने से कैंसर सहित कई जानलेवा बीमारियाँ हो रही हैं |

महावीर कैंसर संस्थान पटना के निदेशक किशोर कुणाल को जब इस तरह की जानकारी मिली तो उन्होंने संस्थान के जांचकर्ताओं की एक टीम के द्वारा पानी की जांच भी कराई | रिपोर्ट में त्वचा कैंसर, गोलब्लाडर कैंसर जैसी अन्य जानलेवा रोग होने की संभावनाएँ अंकित की गयी है |

मधेपुरा अबतक द्वारा जब कोसीवासियों से इस बाबत चर्चा की गई तो उन्होंने कहा- कोसी में जल जीवन नहीं, बल्कि जहर है | कोसी की लगभग 60 लाख की आबादी इस कुदरती कोप को झेलने के लिए मजबूर है | सरकारी स्तर पर गंभीर पहल नहीं किया जा सका है | जबकि एक ओर जल-स्तर में जिस तरह गिरावट हो रही है उसी अनुपात में दूसरी ओर मौजूद जहरीले रसायनिक तत्वों की मात्रा में वृद्धि हो रही है | इतना ही नहीं आर्सेनिक, आयरन, फ्लोराइड, सीसा आदि जहरीले रसायनों के चलते आंत का कैंसर, मानसिक तनाव, किडनी, एमीविएसिस एवं दन्त-रोग आदि के घातक परिणामों से हमें कब तक रु-ब-रु होना पड़ेगा तथा कब हमें शुद्ध पेय जल मिलेगा- कहो बादशाह ??

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