प्रधानमंत्री के निदेश पर भारतीय रेल द्वारा महात्मा गांधी के जन्मोत्सव (2 अक्टूबर) को लेकर पूरे देश में स्वच्छता पखवाड़ा मनाया जा रहा है। पूर्व मध्य रेल समस्तीपुर के तत्वावधान में सहायक मंडल वित्त अधिकारी आदित्य कुमार आनंद द्वारा मधेपुरा के 3 सर्वश्रेष्ठ विद्यालयों के छात्र-छात्राओं के बीच स्वच्छता विषय से संबंधित पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन कराया गया।
बता दें कि इन तीनों स्कूलों में पेंटिंग कार्यक्रम आयोजित कराये जाने में समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ.मधेपुरी ने रेल वित्त अधिकारी आदित्य कुमार आनंद (आईएएस) एवं हाॅली क्रॉस की प्राचार्या डॉ.बंदना कुमारी, सचिव गजेंद्र कुमार, माया विद्या निकेतन की प्राचार्य डॉ.चंद्रिका यादव व किरण पब्लिक स्कूल के निदेशक अमन प्रकाश के बीच सेतु का काम किया।
बता दें कि हॉली क्रॉस स्कूल में जहाँ समाजसेवी डॉ.मधेपुरी ने खेद प्रकट करते हुए बच्चों से यही कहा कि पढ़े-लिखे लोग ही शहर में यत्र-तत्र गंदगी फैलाते हैं और अनपढ़ सफाई कर्मी सुबह-सवेरे उस गंदगी को साफ करने में लग जाते हैं जबकि पढ़े-लिखे लोग ही प्रायः बोला करते हैं- “स्वच्छता में ही ईश्वर का वास है।” वहीं डॉ.मधेपुरी ने कहा कि जब तक समस्त देशवासियों की इस काम में भागीदारी नहीं होगी तब तक ना तो देश स्वच्छ रहेगा और ना वहाँ के लोग स्वस्थ रह पायेंगे।
यह भी जानिए कि रेल की ओर से पर्यवेक्षक के रूप में पारसनाथ मिश्र, अवनीश कुमार सिंह एवं राघवेंद्र कुमार मौजूद रहे तथा तीनों स्कूलों के सफल छात्र-छात्राओं के पेंटिंग्स को रेलवे की ओर से पुरस्कृत भी किया गया। पुरस्कार प्रदान किये डॉ.मधेपुरी, सहायक रेल वित्त अधिकारी श्री आदित्य कुमार आनंद , प्रो.श्यामल किशोर यादव आदि ने।
चलते-चलते पूर्व मध्य रेल समस्तीपुर के सहायक मंडल वित्त अधिकारी आदित्य कुमार आनंद ने कहा कि स्वच्छता पखवाड़ा पर आयोजित पेंटिंग प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार पानेवाले छात्रों के पेंटिंग को दौराम मधेपुरा स्टेशन पर डिस्प्ले किया जाएगा।
पृष्ठ : मधेपुरा अबतक
डॉ.मधेपुरी सहरसा में शहीद भोला ठाकुर पथ बनाने को संकल्पित
क्या वर्ष 1942 में सहरसा रेलवे स्टेशन के पास अंग्रेजों की सेना को रोकने के लिए उमड़ पड़ी भीड़ के आंदोलनकारियों- जिनमें भोला ठाकुर (चैनपुर), केदारनाथ तिवारी (नरियार), कालेश्वर मंडल (बलहा) तथा पुलकित कामत एवं हरिकांत झा (बनगांव) शहीद हुए थे- ने कभी यह सोचा भी होगा कि आजादी खातिर उनके प्राण न्योछावर करने के बाद आजाद भारत में उनकी पत्नी व बच्चों को बीमारी की अवस्था में भी दवा तक नसीब नहीं होगी और उसी आजाद भारत के कुछ लोग हजारों-हजार करोड़ रुपये सर्वाधिक सहूलियत के साथ लेकर विदेशों में मौज-मस्ती व ऐश करते रहेंगे और भारत सरकार मुंह देखती रहेगी !
बता दें कि मीडिया के माध्यम से जब लोगों को आज की तारीख में यह जानकारी मिली कि सहरसा जिले के चैनपुर में शहीद भोला ठाकुर की पत्नी बेचनी देवी अभी भी जिंदा हैं तथा हृदय रोग से ग्रसित हैं……. इन्हें अपनी कोई संतान भी नहीं । हाँ ! बेरोजगार भातीज अजय ठाकुर अपनी पत्नी एवं दो बच्चों के साथ बूढ़ी माता बेचनी देवी को मिलने वाले पेंशन पर ही सपरिवार गुजर-बसर भी करता है तथा बारी-बारी से पति-पत्नी जग-जग कर वर्तमान बेईमान सरकारी तंत्र के बीच ईमानदारी से माता बेचनी देवी की सेवा में लगा भी रहता है।
मधेपुरा के डॉ.कलाम कहलाने वाले सर्वाधिक संवेदनशील साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने अपने निकटतम मित्र आर.एम. कॉलेज सहरसा के प्रभारी प्राचार्य डॉ.विनय कुमार चौधरी को साथ चलने की बात कही तथा जाड़े को दृष्टिपथ में रखते हुए कंबल, साडी- व साॅल आदि विभिन्न चीजों के साथ- पांच हज़ार की अल्प राशि लिए पहूँच गये चैनपुर और 2 घंटे तक ग्रामीणों के बीच चैनपुर की माताश्री से बातें की और अपनी “आजादी” कविता सुनाते रहे। चलते समय डॉ.मधेपुरी ने माता बेचनी देवी का आशीष प्राप्त कर बस इतना ही कहा- जब तक हम सबों की ये माताश्री धरती पर रहेंगी तब तक प्रत्येक महीने के प्रथम सप्ताह में वे (डॉ.मधेपुरी) ₹1000 का मनीऑर्डर भेजते रहेंगे……!! साथ ही उन्होंने यह भी कहा- शहीदों को हम भुला नहींं सकते, वो थेे तभी तो आज हम हैं। बता दें कि डॉ.मधेपुरी ने पहलेे भी शहीदोंं, स्वतंत्रता सेनानियों के नाम सार्वजनिक स्थलोंं का निर्माण करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है , जिनमें शहीद चुल्हाय मार्ग, शहीद चुल्हाय पार्क, डॉ. एपीजेे अब्दुल कलाम पार्क मधेपुरा, शहीद पार्क मधेपुरा, भूपेन्द्र नारायण मंडल वाणिज्य महाविद्यालय मधेपुरा, भूपेन्द्र चौक आदि प्रमुख हैं। इसके अलावे ₹10 लाख रुपये की जमीन महामहिम राज्यपाल के पदनाम रजिस्ट्री कर मधेपुरा वार्ड नंबर- 1 में दार्जिलिंग पब्लिक स्कूल की ओर जाने वाला डॉ.मधेपुरी मार्ग भी…..।
चैनपुर गाँव के अधिकांश सेवानिवृत्त वरिष्ठ नागरिकों सहित अंत तक अपनी उपस्थिति बनाये रखे- सुंदरकान्त ठाकुर उर्फ टुनटुन झा, सचिव ‘समाधान’, अजय कुमार ठाकुर, श्री कृष्ण झा, ब्रह्मदेव ठाकुर, जीतन मिश्र, राजेंद्र मिश्र, राजेंद्र ठाकुर, सुभाष चंद्र मिश्र, मंटू जी आदि।
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मधेपुरा में अखबार बेचकर कुलदीप ने कन्हैया को बनाया कंप्यूटर इंजीनियर
अभावों की जिंदगी जीने वाला हॉकर यानि अखबार घर-घर पहुंचाने वाला कुलदीप ने अपने एकमात्र पुत्र कृष्ण कुमार कन्हैया को दिल्ली में पढ़ाकर तथा कंप्यूटर इंजीनियर बनाकर एक मिसाल कायम कर दिया है। कुलदीप ने बेटी कोमल को अच्छी तालीम दिला कर प्राइवेट स्कूल की संचालिका ही नहीं बनाया बल्कि अखबार बेचकर ही उसने एक शिक्षक लड़का से बेटी कोमल की शादी धूमधाम के साथ किया। इस शादी में कुलदीप ने शहर के उन तमाम बुद्धिजीवियों को आमंत्रित किया था जिन्होंने अभावों के इस कुबेर कुलदीप को किसी-न-किसी रूप में हौसला बढ़ाया था…… उत्साहित एवं प्रोत्साहित किया था।
बता दें कि सहरसा जिले के सौर प्रखंड के काँप गांव में रहने वाला कुलदीप गरीबी की मार झेलने के दरमियान घर चलाने हेतु 1980 में मधेपुरा आकर अखबार बेचने का काम शुरू किया। आरंभ में कुलदीप ने मात्र 50 पेपर लेकर और पांव पैदल चलकर उसे घर-घर पहुंचाने लगा। फिर कुलदीप की मेहनत रंग लायी और साल लगते-लगते वह साइकिल पर सवार होकर लगभग 200 तक पेपर बेच लिया करता। फिलहाल वह बाईक पर सवार होकर 700 से अधिक पेपर की बिक्री करने लगा है।
यह भी जानिए कि निष्ठा पूर्वक अपने धंधे में लगे रहने वाले कुलदीप ने पेपर बेचकर ही मधेपुरा में अपनी जमीन खरीदकर मकान भी बना लिया है तथा अपने परिवार को सुखमय जीवन देकर वह दिनोंदिन शहर में चर्चित होता जा रहा है। शहर के प्रतिष्ठित लोग भिन्न-भिन्न अनुष्ठानों में कुलदीप को आमंत्रित करना नहीं भूलते हैं। भला क्यों नहीं कुलदीप ने तो अपनी पत्नी को भी उच्च शिक्षा देकर शिक्षिका जो बना लिया है। कुलदीप के घर में चतुर्दिक खुशियों का माहौल बरकरार है।
चलते-चलते यह भी बता दें कि सर्वाधिक अनुभवी हॉकर कुलदीप यादव विगत कुछ वर्षों से जिले के अखबार बिक्रेताओं की कतिपय समस्याओं के समाधान के लिए हमेशा तत्पर रहा करते हैं। तभी तो हॉकरों ने उन्हें वर्षों से जिला हॉकरों संघ का अध्यक्ष बनाये रखा है।
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अब कोसी के ही चालक चलायेंगे विद्युत इंजन लगी ट्रेनें
कोसी यानी सहरसा जंक्शन से अब विद्युत इंजन लगी ट्रेनों को छपरा, दरभंगा, पटना….. आदि स्टेशनों तक ले जाने के लिए समस्तीपुर एवं दरभंगा के प्रशिक्षित चालकों को यहाँ ड्यूटी पर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि सहरसा के ही छह लोको पायलट- के.के.यादव, कमलेश्वरी दास, उमेश प्रसाद मंडल, कल्याण पीहू, अभिषेक कुमार, राहुल कुमार सिंह एवं एक लोको इंस्पेक्टर जे.के.सिंह को हाल ही में मुगलसराय रेल इलेक्ट्रिक ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट से प्रशिक्षित करा लिया गया है। मुख्य क्रू नियंत्रक अशोक कुमार के अनुसार कुल सात- जिनमें छह लोको पायलट एवं एक लोको इंस्पेक्टर विद्युत इंजन लगी ट्रेनों को चलाने का प्रशिक्षण लेकर सहरसा लौट चुके हैं।
बता दें कि आए दिन समस्तीपुर-दरभंगा के चालकों को यहाँ ड्यूटी पर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अब सहरसा के ही प्रशिक्षित लोको पायलट विद्युत इंजन लगी ट्रेन लेकर मधेपुरा होते हुए पूर्णिया-कटिहार… और आगे….. एवं पटना-दरभंगा और आगे जाएंगे और आएंगे। जानिए कि चंद रोज कबल भी तो मुख्य लोको इंस्पेक्टर एस.सी.झा एवं लोको पायलट मनीष कुमार को मुगलसराय ट्रेनिंग हेतु भेजा गया है।
मुख्य क्रू नियंत्रक ने मधेपुरा अबतक को बताया कि समस्तीपुर एवं दरभंगा से लाए गए 6 लोको पायलटों को अपने पैतृक स्थान पर जल्द ही वापस भेज दिये जायेंगे- जिनमें से रंजन कुमार सिन्हा, मोहम्मद कमरुद्दीन एवं बैजनाथ राय को समस्तीपुर और बी.के.पंडित, राजेंद्र कामती एवं दया शंकर राय को दरभंगा वापस भेजा जाएगा।
यह भी जानिए कि कुछ अन्य ट्रेनों के अतिरिक्त सहरसा-राजेंद्रनगर टर्मिनल के बीच चल रही इंटरसिटी एक्सप्रेस में लगी डीजल इंजन की जगह विद्युत इंजन चलेगी तो प्रतिदिन लगभग 50 हज़ार लीटर डीजल की बचत होगी।
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मधेपुरा में जल्द बनेगा रेल थाना
अपराध के बढ़ते ग्राफ को देखते हुए तथा रेल दुर्घटना या ट्रेन से गिरकर मौत हो जाने के बावजूद रेल पुलिस के देर से पहुंचने अथवा यदाकदा विधि-व्यवस्था को शीघ्रातिशीघ्र कंट्रोल न कर पाने…. आदि पर सम्यक विचार करते हुए मधेपुरा के साथ-साथ अररिया और कुरसेला में भी रेलथाना खोलने के लिए मांगे गये कागजातों के साथ कटिहार रेल एसपी डॉ.दिलीप कुमार मिश्र ने राज्य मुख्यालय से स्वीकृति प्राप्ति हेतु प्रस्ताव भेजा है। रेल थाना भवन निर्माण के लिए डीआरएम को भी 30×20 मी. जमीन चिन्हित कर देने के लिए पत्र भी लिखा गया है।
बता दें कि फिलहाल मधेपुरा , अररिया और कुरसेला रेल परिसर की निगरानी अलग-अलग जिले के रेल थानों द्वारा की जाती है | फलस्वरूप दूरी अधिक होने के कारण कभी-कभी विधि व्यवस्था की स्थिति भी बन आती है |
यह भी जानिए कि बुधमा स्टेशन तक का परिसर सहरसा रेल थाना की देख-रेख में है और उससे आगे का क्षेत्र बनमनखी रेल थाना के क्षेत्राधिकार में पड़ता है, जिसकी दूरी अधिक है। अस्तु मधेपुरा में तो रेल थाना बनना ही बनना है | कुरसेला और अररिया को भी इसी योजना में शामिल कर लिया गया है।
चलते-चलते यह भी बता दें कि सुपौल और सरायगढ़ में भी रेल थाना खोलने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि इसमें कुछ वक्त लगेगा, क्योंकि फिलहाल सहरसा-सुपौल-सरायगढ़ रेल लाइन पर ट्रेनों का परिचालन बंद है। इस रेलखंड पर आमान परिवर्तन कार्य किया जा रहा है।
मौके पर रेल एसपी डॉ.मिश्रा ने मधेपुरा अबतक को बताया कि सभी रेल थानाध्यक्षों को 24 घंटे चेकिंग , यात्री सुरक्षा तथा नशा खुरानी की घटना नहीं हो इसके लिए हमेशा चौकसी बरतने के लिए कड़े निर्देश दिये गये हैं।
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शिक्षक ब्रह्मा-विष्णु-महेश से भी ऊपर…..!!
5 सितंबर “शिक्षक दिवस” के मौके पर मधेपुरा के कलाम कहे जाने वाले समाजसेवी-साहित्यकार व शिक्षक डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने स्थानीय शिक्षण संस्थान में शिक्षकों एवं छात्र-छात्राओं की भारी भीड़ को संबोधित करते हुए कहा कि आदि काल से ही गुरु का स्थान देवताओं से भी ऊपर दिया जाता रहा है।
बता दें कि गुरु की महिमा को विभिन्न उदाहरणों से संदर्भित करते हुए डॉ.मधेपुरी ने छात्रों से कहा कि भारत की गौरवशाली भूमि पर डॉ.राधाकृष्णन, डॉ.जाकिर हुसैन एवं डॉ.कलाम जैसे त्रयी ऐसे महान शिक्षक हैं जो शिक्षक रहते हुए ‘भारतरत्न’ सरीखे सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित हुए थे। उन्होंने कहा कि ऐसे विचारक एवं सर्वोत्कृष्ट शिक्षकों का नाम लेते ही प्रत्येक भारतीय का सिर श्रद्धा से झुक जाता है।
यह भी जानिए कि भारतरत्न डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के संग बिताए गए अविस्मरणीय क्षणों की चर्चा करते हुए डॉ.मधेपुरी ने डॉ.कलाम के साथ लिखी पुस्तक ‘छोटा लक्ष्य एक अपराध है’ को झारखंड सरकार द्वारा छठे वर्ग के पाठ्यक्रम में शामिल करने की बात कही। उन्होंने कहा कि आज संपूर्ण देश में शिक्षकों को सम्मानित किया जा रहा है- भारत के राष्ट्रपति से लेकर राज्य के मुख्यमंत्रियों द्वारा और भिन्न-भिन्न संस्थाओं द्वारा भी।
इस अवसर पर डॉ.मधेपुरी ने कहा कि शिक्षक समाज का सृजनहार होता है, रक्षक एवं रखवाला होता है। शिक्षक समाज को दिशा देता है…… वह रहवर होता है। परंतु, खेद प्रकट करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षकों के स्तर में कुछ गिरावट आ गई है……. गुरु और शिष्यों के बीच दूरी बढ़ गई है, जिसे पाटने की जरूरत है, तभी देश मजबूत होगा……. समाज आगे बढ़ेगा……। अंत में संस्थान के प्रधान रंजन कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित किया और मंच संचालन पवनजी आनंद द्वारा किया गया।
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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी या योगेश्वर श्री कृष्ण !!
भगवान श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को महानिशीथ काल में हुआ था। कृष्ण ने देवकी के गर्भ में पलकर और रोहिणी नक्षत्र में जन्म लेकर अपने दोनों माताएं ‘देवकी और रोहिणी’ को प्रसन्न किया। कृष्ण जन्म तो लिया मथुरा में परंतु उनका भी बचपन बीता गोकुल, नंदग्राम, वृंदावन और बरसाने में । कृष्ण के जन्मोत्सव के लिए यह पावन भूमि आज सज-धज कर तैयार है।
बता दें कि दुनिया के कोने-कोने से 20 लाख से कहीं ज्यादा श्रद्धालु योगेश्वर श्रीकृष्ण के 5242वें जन्मोत्सव में शामिल होने के लिए ब्रज की भूमि पर पधार चुके हैं। अगणित सुरक्षा कर्मियों सहित ब्लैक कैट कमांडो को भी तैनात किया गया है। आज भारत के हर हिस्से के हर गांव और हर शहर में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव को उमंग एवं उत्साह के साथ लोग मना रहे हैं।
मधेपुरा भी किसी से पीछे नहीं रहा। अन्य कई जगहों के अतिरिक्त प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय संस्थान की संचालिका राजयोगिनी ब्रम्हाकुमारी रंजू दीदी की टीम ने संपूर्ण समर्पण के साथ राधा-कृष्ण और लक्ष्मी नारायण को माखन खिलाया। बच्चियों द्वारा राधा-कृष्ण पर आधारित मनमोहक नृत्य का प्रदर्शन भी किया गया।
कार्यक्रम का आरंभ मुख्य अतिथि समाजसेवी-साहित्यकार डॉ. भूपेन्द्र मधेपुरी, राजयोगिनी रंजू दीदी तथा खोखा यादव व दिनेश प्रसाद जैसे गणमान्यों द्वारा सम्मिलित रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया। रंजू दीदी ने उपस्थित मातृशक्ति सहित सभी श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि कृष्ण को हम सदा याद करें….. उनकी गीता का पाठ करें, जो ज्ञान का भंडार है।
मुख्य अतिथि डॉ.मधेपुरी ने अपने संबोधन के जरिये श्रीकृष्ण को श्रोताओं के समक्ष खड़ा कर दिया तथा उपस्थित बच्चे-बच्चियों एवं श्रद्धालु नर-नारियों से संक्षेप में बस यही कहा-
आप श्रीकृष्ण की तरह संपूर्णता में डूबकर ही किसी भी काम को करें। कल या फल की चिंता कभी ना करें। खुद कृष्ण बन जाँय- कृष्ण यानी कर्म ! कर्म से ही बजेगी आपके जीवन की बाँसुरी। यूँ कृष्ण को याद करना तो आसान है, परंतु श्रीकृष्ण को जीना बहुत कठिन है….।
डॉ.मधेपुरी ने पुनः कहा- योगेश्वर श्रीकृष्ण सरीखे अद्वितीय व्यक्तित्व के धारक जहाँ एक ओर सहज होकर गोपिकाओं के संग रास रचाते हैं वहीं दूसरी ओर युद्ध के मैदान में अर्जुन को गीता का गहन-गंभीर दर्शन भी सुनाते हैं। इस तरह के दो विपरीत ध्रुवों वाला जीवन केवल और केवल श्रीकृष्ण में होना ही संभव है। श्रीकृष्ण को दो माँ, दो बाप, दो पत्नी…… के अतिरिक्त एक तरफ बांसुरी…. दूसरी तरफ सुदर्शन….. ना जाने कितने विरोधाभाषों के बीच चैन की बंसी बजाता चला आ रहा है…. यह माखन चोर…. किसन कन्हैया……!!
अंत में राजयोगिनी रंजू दीदी के अध्यक्षीय भाषण के बाद प्रसाद वितरण के साथ ही कार्यक्रम समापन की घोषणा की गई।
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भारत के आई.पी.पी. बैंक का कारबार अहर्निश होगा आपके द्वार
मधेपुरा में भी आई.पी.पी बैंक (इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक) का शुभारंभ हो गया जिसका उद्घाटन 1 सितंबर को राष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में किया और सारे देशवासियों ने टीवी पर उसका सीधा प्रसारण भी देखा।
मधेपुरा मुख्य डाकघर के डाकपाल राजेश कुमार ने मधेपुरा अबतक को बताया कि शहीद चुल्हाय मार्ग स्थित बी.पी.मंडल नगर भवन में IPPB (India Post Payment Bank) के पाँच ब्रांच का शुभारंभ बिहार सरकार के कला संस्कृति मंत्री श्री कृष्ण कुमार ऋषि, एससी-एसटी मंत्री डॉ.रमेश ऋषि देव, समाजसेवी साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी, डीडीसी मुकेश कुमार सहित जेडीयू के जिलाध्यक्ष प्रो.विजेंद्र नारायण यादव, भाजपा के स्वदेश कुमार, डॉ.अमोल राय, ध्यानी यादव आदि की गरिमामय उपस्थिति में संपन्न हुई।
बता दें कि डाक सेवा के पदाधिकारीगण सर्वश्री शिवलेश सिंह, राजेश कुमार, जगदेव मंडल, संतोष कुमार चौधरी, विवेक कुमार एवं चंचल यादव आदि ने विभिन्न प्रकार की जानकारियाँ देने हेतु शुक्रवार को जागरूकता रैली निकालकर लोगों को बताया कि 31 दिसंबर तक जिले में आईपीपी बैंक की 204 शाखाएं शुरू करने की योजनाएं हैं।
ब्रांच मैनेजर शिवलेश सिंह ने कहा कि देश का सबसे बड़ा नेटवर्क होगा आईपीपी बैंक जिसका मुख्य लक्ष्य गांव के वंचितों एवं हासिये पर के लोगों को वित्तीय सुविधा से जोड़ना है। जिले में फिलहाल 500 खाते खोले जा चुके हैं जिसमें कुछ बचत खातेे हैं और कुछ चालूू खाता है।
समारोह को सर्वप्रथम मधेपुरा के भीष्म पितामह डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने संबोधित करते हुए यही कहा-
एक टाॅल फ्री फोन करने पर पोस्टमैन आपके द्वार पर दस्तक देगा। वह साथ में एक मशीन भी लाएगा जिससे वह किसी भी तरह की जमा या निकासी के लिए आपकी मदद करेगा। बिजली, गैस या पानी के बिल भुगतान करने के अलावे आप घर बैठे दूसरों के खाते में मनी ट्रांसफर भी कर सकते हैं। जीवन बीमा किस्त आदि का भी भुगतान कर सकते हैं।
जहां इस अवसर पर बिहार के कला एवं संस्कृति मंत्री श्री कृष्ण कुमार ऋषि ने प्रधानमंत्री के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा कि बैंकिंग क्षेत्र में अब एक नई क्रांति का संचार होगा तथा यह मील का पत्थर साबित होगा वहीं एससी-एसटी मंत्री डॉ.रमेश ऋषिदेव ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से शुभारम्भ हो रही इस योजना से ग्रामीण क्षेत्र के अंतिम व्यक्ति भी डिजिटल मेनस्ट्रीम का हिस्सा बनेगा ही बनेगा। अनपढ़ व्यक्ति भी इस प्रणाली का उपयोग कर सकता है क्योंकि उसे खाता अथवा पिन नंबर भी याद रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
कार्यक्रम का श्रीगणेश अतिथियों को बुके देकर किया गया तथा मंत्रीद्वय ने दीप प्रज्वलित कर सम्मिलित रूप से उद्घाटन किया। आरंभ से अंत तक कार्यक्रम का सफल संचालन अंतर्राष्ट्रीय उद्घोषक पृथ्वीराज यदुवंशी ने किया तथा ब्रांच मैनेजर शिवलेश सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
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मधेपुरा रेलवे स्टेशन सज रही है मधुबनी पेंटिंग से
मधेपुरा से मानसी एवं मधेपुरा से पूर्णिया रेलखंड के सभी स्टेशन बिहार की विरासत मिथिलांचल इलाके की प्रसिद्ध ‘मधुबनी पेंटिंग’ से सजेंगे | स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने का अवसर मिलेगा |
बता दें कि समस्तीपुर रेल मंडल के डीआरएम आरके जैन के निर्देशानुसार कोसी क्षेत्र के दौराम मधेपुरा स्टेशन से तत्काल इसकी शुरुआत कर दी गई है | अब पेसेंजरों को स्टेशन के कक्षों एवं दीवारों पर मिथिलांचल की प्रसिद्ध कलाकृतियाँ देखने को मिलेंगी |
डीआरएम श्री जैन ने मधेपुरा अबतक को बताया कि भारतीय रेल के प्रयास से अब जल्द ही मधेपुरा की तरह अन्य सारे स्टेशनों की सूरत बदली हुई दिखेंगी | उन्होंने कहा कि मिथिलांचल की इस पारंपरिक कला को बढ़ावा देने के लिए यह नई पहल की गई है | यात्रियों को स्टेशन के अंदर और बाहर मधुबनी पेंटिंग का अद्भुत नजारा देखने को मिलेगा | जंक्शन पर के वेटिंग हॉल सहित अन्य जगहों को भी मिथिला पेंटिंग से सजाया जा रहा है | अब तक 20 बोर्ड तैयार किये जा चुके हैं जिसे फिलहाल बाहर में लगाई जा रही है |
चलते-चलते यह भी बता दें कि मधेपुरा स्टेशन को मधुबनी पेंटिंग से सजाने की जिम्मेवारी रेलवे ने स्थानीय ग्वालपाड़ा प्रखंड की महिला व युवा कलाकारों को दी है जिसमें आशा, ममता, पुनम, रेखा व रंभा आदि शामिल हैं | चंद्रकला राजेश्वरी संस्थान एवं द चाइल्ड ऑफ इंडिया नामक दोनों संस्थानों से जुड़ी इन कलाकारों ने मधेपुरा अबतक को बताया कि लोक कला को प्रोत्साहन देने वाले सरकार की इस योजना का हिस्सा बनने से हम ग्रामीण कलाकार भी गौरवान्वित महसूस करने लगी हूँ | हम कलाकारों को भी इस बात की खुशी हो रही है कि इस स्टेशन पर आने वाले विदेशी यात्री बिहार की लोक कलाओं से अवगत होते रहेंगे |
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हे देव बहा दो अहंकार…….. दादी प्रकाशमणि की पुण्य तिथि पर !
ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय मधेपुरा शाखा के स्थानीय सेवा केंद्र प्रभारी राजयोगिनी रंजू दीदी की अध्यक्षता में ब्रम्हाकुमारी संस्था की मुख्य प्रशासिका रही दादी प्रकाशमणि की पुण्यतिथि को (11वीं वर्षगांठ पर) ‘स्नेह मिलन समारोह’ के रूप में आयोजित किया गया | समारोह में समाजसेवी साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी को मुख्य अतिथि, वरिष्ठ व्यापारी दिनेश सर्राफ एवं मंडल विश्वविद्यालय के HOD, Zoology डॉ.अरुण कुमार को विशिष्ट अतिथि के रुप में मंच संचालक बी.के. किशोर ने ससम्मान आसन ग्रहण कराया | कार्यक्रम का शुभारंभ सभी श्रद्धालुओं ने सम्मिलित रूप से दीप प्रज्वलित कर किया |
बता दें कि उपस्थित श्रद्धालु नर-नारियों को संबोधित करते हुए डॉ.मधेपुरी ने दादी प्रकाशमणि के बाबत यही कहा कि दादी जी में प्रेम-स्नेह, शील और शक्ति का अद्भुत समन्वय था | तभी तो 40 वर्षों तक ब्रम्हाकुमारी विश्वविद्यालय को नेतृत्व-प्रदान करने वाली दादी जी को विभिन्न देशों द्वारा राजकीय अतिथि का दर्जा दिया जाता रहा | संयुक्त राष्ट्र ने तो दादी प्रकाशमणि को “विश्व शांति दूत” सरीखे सम्मान से सम्मानित किया था | अंत में उन्होंने विश्वगुरु रवींद्रनाथ ठाकुर को संदर्भित करते हुए यही कहा कि दादी प्रकाशमणि का आध्यात्मिक प्रकाश जिस पर पड़ेगा वह व्यक्ति अहंकार शून्य हो जायेगा |रवींद्रनाथ ने भी यही कहा है- हे देव बहा दो अहंकार ….. मेरे ही आंसू जल में…..
अध्यक्षीय दायित्वों का निर्वहन करते हुए ब्रह्माकुमारी रंजू दीदी ने अपने संबोधन में यही कहा कि दादी जी सदा यही कहती रही कि जैसा कर्म हम करेंगे, वैसा ही फल हमें मिलेगा | सफाई और सच्चाई हर किसी के जीवन को सँवारता है | खुश रहने और खुशियाँ बांटने से वातावरण उत्साह-उमंग से भर जाता है | अंत में उन्होंने यही कहा कि शांति की कामना न करें बल्कि इच्छाओं को शांत रखें तो शांति खुद-ब-खुद पास आ जाएगी और परमात्मा से सम्बन्ध जुड़ता चला जाएगा |
मौके पर विनय वर्धन उर्फ खोखा यादव, उपेंद्र रजक, डॉ.एन.के.निराला, ओम प्रकाश यादव, रंजीत कुमार, विजय यादव, राजयोगिनी ब्रम्हाकुमारी बबीता देवी, दुर्गा बहन , संजीव भाई , बैजनाथ यादव एवं कार्यक्रम संचालक ब्रह्माकुमार किशोर भाई श्रद्धालुओं द्वारा सम्मानपूर्वक प्रसाद ग्रहण करने तक मौजूद रहे |
























