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घर से घाट तक….. लोक आस्था का (चार दिवसीय) महापर्व छठ !

महापर्व छठ देखकर बिहार की ऊँचाई को देश ही नहीं विदेश के लोग भी महसूसते रहे हैं। सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक है छठ जिसमें मुस्लिम और अन्य धर्मावलंबी भी बढ़-चढ़कर लेते हैं भाग…..। कहीं कोई कलह-कोलाहल नहीं…. कई जगह पर तो मुस्लिम महिलाएं भी करती हैं छठ। इस पर्व के अवसर पर दूर देशों में रहने वाले लोगों को भी खींच लाती है अपनी सरजमीन…..।

बता दें कि देश में ही नहीं…… विदेशों में भी एक दिन कद्दू भात, दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य और चौथे दिन प्रातः उगते सूर्य को अर्घ्य देकर छठ पूजा की अद्भुत छटा विखेरते रहे हैं सात समंदर पार के लोग। सिंगापुर से लेकर बहरीन…… मॉरीशस से लेकर कैलिफोर्निया में बसे बिहारियों में छठ पर्व को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है। सूर्योपासना के इस महापर्व छठ के साथ-साथ पद्मश्री शारदा सिन्हा के कर्णप्रिय छठि मैया के गीतों पर देशी महिलाऔं के साथ-साथ विदेशी महिलाएं भी झूम उठती हैं।

यह भी जानिए कि छठ ही एक ऐसा पर्व है, जिसकी पूरी सत्ता मातृ प्रधान है। इस पर्व में महिलाएं स्वामिनी की भूमिका में होती हैं और पुरुष सेवक भाव में खड़ा दिखता है। महिलाएं अर्घ्य – गीत गाती हुई घाटों की ओर जा रही होती हैं तो पुरुष अपने माथे पर पूजन सामग्रियों की टोकरी लिए हुए चलते दिखते हैं…… यानी घर से घाट तक यह पुरुष प्रकृति के सामने नतमस्तक दिखता है। तभी तो प्राचीन भारतीय समाज में पुत्र अपनी मां के नाम से जाना जाता था।

बच्चों को यह जानना जरूरी है कि यह छठ पर्व हमें देता है- प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण का संदेश। सूर्योपासना का यह पर्व हमें प्रकृति के करीब तो लाता ही है साथ ही किसी भी प्रतिकूल परिणाम को अनुकूल बना देता है। जब लोग जल में खड़े होकर अर्घ्य देते हैं तो हानिकारक पराबैंगनी किरणें अवशोषित होकर ऑक्सीजन में परिणत हो जाती है और लोग उन किरणों के कुप्रभावों से बचते हैं। यह भी सच है कि सूर्य ही जल के स्रोत को राह देता है।

आगे यह भी जानिए कि इस पर्व के केंद्र में कृषि, किसान और मिट्टी है। हर फल व सब्जी इस पर्व का प्रसाद है। मिट्टी के बने चूल्हे पर हर तरह का प्रसाद बनाया जाता है तथा बांस से बनी सूप में पूजन सामग्री रखकर अर्घ्य दिया जाता है। बाट से लेकर घाट तक की सफाई की जाती है। आपदा प्रबंधन व सुरक्षा व्यवस्था हेतु प्रशासन एवं पब्लिक दोनों सचेत दिखते हैं।

छठ पर्व पर गाए जाने वाले गीतों में एक गीत बेटी मांगने वाला भी है। हमारे बिहार के  ग्राम्य जीवन में ‘कुंवारे आंगन’ जैसे शब्द भी हैं यानी जिस आंगन में बेटी के विवाह के फेरे नहीं पड़े तो वह आंगन कुंवारा रह गया…. ऐसा माना जाता है। परंतु सरकार द्वारा प्रायोजित ‘बेटी बचाओ…… बेटी पढ़ाओ’ कार्यक्रम अब इस महापर्व के जरिये प्रखरता से ऊंचाई ग्रहण करता जा रहा है…..!

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मधेपुरा में ब्रम्हाकुमारियों ने धूमधाम से मनाया भैया दूज

प्रत्येक वर्ष कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया को भैया दूज का पर्व मनाया जाता है। यह पर्व दीपावली के दो दिन बाद आने वाला ऐसा पर्व है जो भाई के प्रति बहन के अगाध स्नेह को अभिव्यक्त करता है।  बहनें अपने भाई की खुशहाली व सुख की प्राप्ति के साथ-साथ लंबी आयु एवं ऐश्वर्य की कामना करती हैं।

बता दें कि मिथिलांचल का अति महत्वपूर्ण भाई-बहन के अटूट प्रेम पर आधारित यह भैया दूज पर्व जिले के मुरलीगंज, उदाकिशुनगंज, आलमनगर, पुरैनी, शंकरपुर, घैलाढ़ आदि अन्य सभी प्रखंडों में सर्वाधिक हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। हर आंगन में भैया दूज पर्व को लेकर काफी चहल-पहल देखी गई। रंगोली बना-बनाकर एवं नए-नए वस्त्र धारण कर अपने भाई के लिए अक्षत, चंदन, चांदी का सिक्का आदि-आदि के साथ इंतजार करती बहनों को भी बांट जोहती खड़ी देखी गईं।

यह भी जानिए कि प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय मधेपुरा के सेवा केंद्र पर केंद्र प्रभारी राजयोगिनी बीके रंजू दीदी की टीम द्वारा लोक आस्था के इस पर्व “भैया दूज” के आध्यात्मिक रहस्य को विस्तार से बताया गया तथा शुक्रवार को धूमधाम से सभी भाइयों को आमंत्रित कर श्रद्धा पूर्वक यह पर्व मनाया गया। सत्कार पूर्वक भोजन भी कराया गया ……।

बता दें कि जहां सर्वप्रथम ब्रह्माकुमारी रंजू दीदी ने अपने संबोधन में यही कहा कि इस पर्व के अवसर पर बहन भाई के माथे पर सात रंग का टीका लगाती है जो आत्मा के सात गुणों को धारण करने की ओर इशारा करता है….. वहीं मुख्यवक्ता के रूप में मधेपुरा के भीष्म पितामह समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र  मधेपुरी ने कहा कि भौतिक संपन्नता के बावजूद आज मनुष्य दु:ख के रास्ते पर चल पड़े हैं तथा दु:खी होकर भय के वातावरण में जी रहे हैं। डॉ.मधेपुरी ने अंत में यही कहा कि जबसे ब्रम्हाकुमारी रंजू दीदी का मधेपुरा में आगमन हुआ है तब से इन्होंने कैंची की संस्कृति को नकारा है और सूई की संस्कृति को घर-घर फैलाया है।

मौके पर पूर्व प्रमुख विनय वर्धन उर्फ खोखा यादव, डॉ.गणेश प्रसाद यादव, डॉ.अजय कुमार, डॉ.एन.के.निराला, विजय वर्धन, दिनेश प्रसाद यादव, बीके जानकी, दुर्गा, संगीता आदि मौजूद थे।

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बहुत खास है पटना के गर्दनीबाग ठाकुरबाड़ी की चित्रगुप्त पूजा

पटना के गर्दनीबाग स्थित ठाकुरबाड़ी की परंपरा सामाजिक समरसता की रही है। श्रीचित्रगुप्त पूजा का अवसर यहां सबके लिए बड़ा आयोजन है। इस दिन यहां हजारों श्रद्धालु उमड़ते हैं और भगवान चित्रगुप्त से आशीर्वाद लेते हैं। खास बात यह कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी इस दिन यहां हर साल आते हैं और सभी श्रद्धालुओं के साथ प्रसाद और भोजन ग्रहण करते हैं। इस बार भी वे यहां के चित्रगुप्त पूजनोत्सव में केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद, विधानपार्षद प्रो. रणवीर नंदन, पूर्व मंत्री रंजीत सिन्हा एवं जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप के साथ शामिल हुए और बिहार की सुख, समृद्धि, विकास एवं खुशहाली की कामना की।

CM Nitish Kumar worshipping at Gardanibagh Thakurbari, Patna
CM Nitish Kumar worshipping at Gardanibagh Thakurbari, Patna.

मुख्यमंत्री एवं उनके साथ समारोह में शामिल हुए विशिष्ट लोगों के अलावे भी इस अवसर पर कई महत्वपूर्ण लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज की, जिनमें सिक्किम के राज्यपाल गंगा प्रसाद, विधानपार्षद संजय कुमार सिंह उर्फ गांधीजी, विधानपार्षद सूरजनंदन मेहता, विधायक अरुण सिन्हा एवं विधायक नितिन नवीन शामिल हैं। बिहार सरकार के मुख्य सचिव दीपक कुमार, एडीएम लॉ एंड ऑर्डर राजेश वर्मा, सूचना आयुक्त अरुण कुमार वर्मा सहित कई बड़े अधिकारी भी इस खास मौके पर मौजूद रहे।

इस पुनीत आयोजन का एक बड़ा आकर्षण यह भी रहा कि आज यहां समाज के कई वैसे लोगों को सम्मानित भी किया गया, जिन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य किया है। यही नहीं, गर्दनीबाग ठाकुरबाड़ी चित्रगुप्त पूजा समिति द्वारा महादलित समाज के 25 बच्चों को एक साल के खर्च के रूप में छात्रवृत्ति भी दी गयी। इसके साथ ही, इस दौरान लगभग पांच हजार लोगों ने सामाजिक समरसता भोज में हिस्सा लिया जो निश्चित तौर पर समिति के सभी सहयोगियों की बड़ी उपलब्धि है।

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अब देश में मिट्टी से बनेगी बिहार मॉडल की पक्की सड़कें

बिहार सरकार के ग्रामीण कार्य विभाग और विश्व बैंक के आर्थिक सहयोग से पटना एनआईटी में चल रहा है मिट्टी से पक्की सड़क बनाने पर काम जिसमें सीमेंट, चूना-पत्थर और फ्लाई-ऐश को मिट्टी में मिलाकर पत्थर जैसी मजबूती वाली सड़क (प्रति किलोमीटर ₹50 लाख रूपये  बचत के साथ) वरदान साबित हो रही है। क्योंकि, पिछले एक दशक में गिट्टी की कीमत में 3 गुने की वृद्धि हुई है।
बता दें कि प्रथम चरण में भागलपुर, पूर्णिया आदि जिलों की ग्रामीण सड़कों में प्रायोगिक तौर पर इसका प्रयोग सफल रहा है। इस प्रकार की सड़कों में बाढ़ और बहाव में भी टिके रहने की क्षमता प्रायोगिक रूप से देखी गई है।
जानिए कि कंकड़-पत्थर और अलकतरे से बनने वाली सड़कें अब पुरानी हुई। फिलहाल मिट्टी में सीमेंट, चूना-पत्थर और थर्मल पावर प्लांट से निकली फ्लाई-ऐश (राख़) मिलाकर पत्थर जैसी मजबूत सड़क पटना के नेशनल इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी द्वारा बनाने की तैयारी चल रही है। इससे मिट्टी की भार सहन क्षमता कई गुना बढ़ जाती है। साथ ही धूप, नमी, पानी आदि का प्रभाव भी बहुत कम हो जाता है।
यह भी बता दें कि पटना एनआईटी के सिविल इंजीनियरिंग ब्रांच के प्रोफेसर संजीव सिन्हा के नेतृत्व में विभागीय शिक्षकों एवं छात्रों के सहयोग से सड़क बनाने की जिस तकनीक पर काम चल रहा है उसे टिकाऊ एवं सस्ती बताई जा रही है। यह भी कि इसमें सड़कों की लागत लगभग आधी हो जाएगी यानी एक करोड़ में बनने वाली सड़क इस विधि से मात्र ₹50 लाख़ में ही तैयार हो जाएगी।
चलते-चलते यह भी बता दें कि दक्षिण बिहार के 10 जिलों में 20 स्थानों की मिट्टी की जाँच एनआईटी द्वारा की जा रही है। अधिकांश जिले बाढ़ प्रभावित होने के कारण यहाँ की सड़कें पानी में डूब जाने के बाद भी टिकी रहे- ऐसी क्षमता विकसित की जा रही है। कौन सी मिट्टी इस नई तकनीक के लिए बेहतर होगी, इसकी पड़ताल भी पिछले 6 माह से की जा रही है।

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विद्युतीय क्षेत्र में ‘ट्रांसमिशन का बिहार मॉडल’ पूरे देश में लागू होगा- ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र

विद्युत ट्रांसमिशन के बिहार मॉडल को केंद्रीय ऊर्जा सचिव ने इस कदर सराहा कि केंद्र सरकार द्वारा सभी राज्यों को पत्र लिखकर बिहार की ट्रांसमिशन परियोजना पर काम करने को कहा गया। पत्र में यह रेखांकित करते हुए निर्देश दिया गया कि विद्युत संचरण यानी ट्रांसमिशन के मामले में संपूर्ण देश ‘बिहार मॉडल’ का अनुसरण करेगा।
बता दें कि भारत सरकार के ऊर्जा सचिव अजय भल्ला ने बिहार को छोड़कर देश के सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को विशेष रूप से पत्र लिखकर कहा है कि केंद्र सरकार की ओर से सौभाग्य, इंटीग्रेटेड पावर डेवलपमेंट स्कीम एवं दीनदयाल उपाध्याय ज्योतिग्राम योजना के तहत जितनी भी बिजली परियोजनाएं चल रही हैं उन सारी की सारी परियोजनाओं में ‘बिहार मॉडल’ पर ही काम करने को निर्देशित किया जाय। इस मॉडल के जरिये देश के सभी नागरिकों तक सातों दिन 24 घंटे बिजली की सुविधा उपलब्ध होती रहे।
यह भी जानिए कि सबों को बिजली उपलब्ध कराना केंद्र सरकार के महत्वपूर्ण लक्ष्यों में से एक है। इस लक्ष्य को पाने के लिए कुछ दिन पहले बिजली की परियोजनाओं में “डिस्ट्ररीब्यूशन बिहार मॉडल” केंद्र सरकार द्वारा अपनाया गया था और अब “ट्रांसमिशन का बिहार मॉडल” अपनाकर बिजली की अनुपलब्धता वाले राज्यों को आसानी से गुणवत्तापूर्ण बिजली देकर लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ने लगा है।
राज्य सरकार के ऊर्जावान ऊर्जा मंत्री श्री बिजेंद्र प्रसाद यादव के चलते राष्ट्रीय स्तर पर बिहार को जिस तरह गौरव प्राप्त हो रहा है इससे प्रभावित होकर समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने उन्हें हृदय से बधाई दी है और पटना के पीएमसीएच को संसार का सबसे बड़ा अस्पताल बनाने के लिए साढ़े पाँच हज़ार करोड़ रु. की स्वीकृति कैबिनेट द्वारा दिये जाने पर सूबे के मुखिया नीतीश कुमार का डॉ.मधेपुरी ने इस्तकबाल किया है।

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पीएमसीएच बनेगा दुनिया का सबसे बड़ा अस्पताल

बिहारवासियों के लिए बड़ी खबर। पटना स्थित पीएमसीएच विश्व का सबसे बड़ा अस्पताल बनने जा रहा है। महज कुछ वर्षों के भीतर यहां बेड की संख्या 5462 होगी। जी हाँ, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में बिहार कैबिनेट ने शनिवार को पीएमसीएच को विश्व का सबसे बड़ा और अत्याधुनिक अस्पताल बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके लिए 5540 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं। अस्पताल का विस्तारीकरण तीन चरणों में और सात वर्ष के भीतर पूरा किया जाएगा। हालांकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस काम को और भी पहले कर लेने की आवश्यकता जताई है।

कैबिनेट विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार के अनुसार पीएमसीएच अपने नए अवतार में पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल और ग्रीन बिल्डिंग के मानकों के अनुरूप होगा। अस्पताल परिसर में 450 बेड का धर्मशाला भी बनाया जाएगा। उनके द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार यहां एमबीबीएस की सीटों की संख्या को 150 से बढ़ा कर 250 किया जाएगा। वहीं पीजी सीटों की संख्या को 146 से बढ़ा कर 200 किया जाएगा। सुपर स्पेशियलिटी सीटों की संख्या 8 से बढ़ा कर 36 की जाएगी।

बता दें कि वर्तमान में बेलग्रेड (सर्बिया) में दुनिया का सबसे बड़ा अस्पताल है। वहां कुल 3500 बेड हैं। कुछ वर्षों के बाद 5462 बेड के साथ यह गौरव पीएमसीएच के नाम हो जाएगा। फिलहाल यहां बेड की संख्या 1700 है।

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सरदार पटेल की जीवनी सभी स्कूलों के पाठ्यक्रमों में हो शामिल- डॉ.मधेपुरी

भारतरत्न सरदार बल्लभभाई पटेल भारत के स्वतंत्रता संग्राम के सर्वश्रेष्ठ सेनानी रहे और भारत की आजादी के बाद वे प्रथम गृह मंत्री एवं उप-प्रधानमंत्री बने | बारडोली सत्याग्रह का नेतृत्व कर रहे पटेल को सत्याग्रह की सफलता पर वहाँ की महिलाओं ने ‘सरदार’ की उपाधि से अलंकृत की……. | उसी लौह पुरुष सरदार पटेल को एकमात्र सक्षम व्यक्ति मानते हुए महात्मा गाँधी ने बहुत सोच-विचार करने के बाद ही राज्यों की जटिल समस्याओं का हल निकालने हेतु कदम उठाने को कहा था……… जिसे सरदार ने बखूबी करके दिखा दिया…….|

बता दें कि वैसे समर्पित महान देशभक्त सरदार पटेल की 143वीं जयंती कौशिकी क्षेत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ एवं सम्मेलन के सचिव डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी सहित अन्य साहित्यकारों व बुद्धिजीवियों द्वारा “राष्ट्रीय एकता दिवस” के रूप में स्थानीय कला कुटीर में मनाई गई |

यह भी जानिए कि इस अवसर पर इतिहास के साथ-साथ दर्जनों साहित्यक पुस्तकों के रचनाकार श्री शलभ ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगभग 3000 करोड़ की लागत से गुजरात में जहाँ संसार की सबसे ऊंची प्रतिमा हमारे लौह पुरुष सरदार पटेल की लगाकर हम भारतीयों को गौरवान्वित किया है वहीं इस सम्मेलन के यशस्वी सचिव डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी द्वारा उजागर किया गया यह विचार- “लौह पुरुष की जीवनी सभी राज्यों के स्कूली पाठ्यक्रमों में शामिल हो”- उस प्रतिमा की ऊंचाई से भी अधिक ऊंचा लगता है | भला क्यों नहीं; भारतरत्न डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम एवं समाजवादी चिन्तक भूपेन्द्र नारायण मंडल जैसी हस्तियों के सानिध्य में रह चुके डॉ.मधेपुरी इतिहास पुरुष रास बिहारी लाल मंडल व आधुनिक बिहार के निर्माता शिवनंदन प्रसाद मंडल आदि की जीवनी लिखकर समादृत जो होते रहे हैं और गत वर्ष तो इनकी रचना “छोटा लक्ष्य एक अपराध है” को झारखंड सरकार ने छठे वर्ग के पाठ्यक्रम में शामिल कर इन्हें भरपूर सम्मान दिया है |

अंत में कुछ कवियों ने कविता के जरिये तो उपस्थित कुछ लेखकों ने शब्द-पुष्पों के माध्यम से कठोर निर्णय लेने वाले राजनेता द्वय सरदार पटेल एवं इंदिरा गाँधी को (उनकी पुण्यतिथि पर) श्रद्धांजलि दी |

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राष्ट्र को समर्पित “स्टैच्यू ऑफ यूनिटी”

आज 31 अक्टूबर को कृतज्ञ राष्ट्र संपूर्ण श्रद्धा के साथ लौह पुरुष सरदार बल्लभ भाई पटेल की 143 वीं जयंती मना रहा है। सुबह सवेरे आयोजित “रन फॉर यूनिटी” ने यह साबित कर दिया कि संसार में सबसे बड़े हैं हमारे लौह पुरुष……. और लौह पुरुष की 182 मीटर सर्वाधिक ऊंची  स्टैच्यू ऑफ यूनिटी भी उन्हीं के समान है- अटल और अडिग। मजबूती ऐसी की 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाओं और 6.5 रिक्टर पैमाने पर आये भूकंप के झटकों में भी मूर्ति की स्थिति बरकरार रहेगी।

Sardar Ballabh Bhai Patel
Sardar Ballabh Bhai Patel

बता दें कि आज ही गुजरात के नर्मदा जिले के केवाडिया में सुबह 10:00 बजे लौह पुरुष की प्रतिमा का लोकार्पण कर राष्ट्र को समर्पित किया प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने- अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा-
सरदार पटेल एक ऐसी महान शख्सियत थे जिनकी भूमिका भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण रही। वे एक ऐसे जननेता थे जो सदैव किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध रहे। सरदार पटेल को आधुनिक भारत के निर्माता के रूप में याद किया जाता रहेगा…..! 550 से अधिक देशी रियासतों का एकीकरण कर एक संगठित भारत की रचना में उनके महत्वपूर्ण योगदानों को हमेशा याद करते रहेंगे हम…. सब ! भारत को एकता के सूत्र में पिरोने वाले उस महान शख्सियत सरदार पटेल की “स्टैच्यू ऑफ यूनिटी” के प्रति आज यह कृतज्ञ राष्ट्र श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है।
संपूर्ण भारत इस मायने में एक मत है कि एकीकृत भारत का पूरा श्रेय सरदार वल्लभ भाई पटेल के रणनीतिक कौशल और उनकी बुद्धिमत्ता को जाता है। पटेल ने एक के बाद एक समाधान निकाला और देश को एक सूत्र में बांधा। उन्होंने जूनागढ़ , हैदराबाद……. राजस्थान आदि अनेकानेक राजवाड़ा को मिला-मिला कर एकीकृत भारत का निर्माण किया। तभी तो पटेल को एक मात्र सक्षम व्यक्ति मानते हुए महात्मा गांधी ने राज्यों की जटिल समस्याओं का हल निकालने हेतु उनसे कदम बढ़ाने के लिए कहा था।
देश के ऐसे लौह पुरुष की प्रतिमा की ऊंचाई दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति के रूप में होने से भारत गौरवान्वित महसूस कर रहा है। पद्मश्री रामवनजी सुतार जैसे मूर्तिकार द्वारा डिजाइन किये गये “स्टेचू ऑफ यूनिटी” को तैयार करने में 33 महीने लगे और लगे 1700 टन ब्राँज एवं 6500 टन स्टील तथा कुल व्यय  2989 करोड़ लगे जहां मूर्ति निर्माण में सिर्फ 1653 करोड़ लगे।
भला क्यों न होगा चार धातुओं से बनी स्टेचू पर इतना खर्च जबकि 1,80,000 (एक लाख अस्सी हजार) टन सीमेंट-कंक्रीट एवं 18500 (अठारह हज़ार पाँच सौ) टन स्टील नींव में ही डाला गया है। इसके अलावे 169000 गांवों के किसानों से 135 मेट्रिक टन लोहे मूर्ति निर्माण हेतु दान मिले। यही कारण है कि अमेरिका की “स्टैचू ऑफ लिबर्टी” से दुगुनी ऊंची प्रतिमा बनी है भारत में पटेल की “स्टैच्यू ऑफ यूनिटी”- जिसे अनावरण करने के बाद प्रधानमंत्री ने भारत की 30 नदियों के जल से जलाभिषेक किया और सेना के हेलीकॉप्टरों द्वारा बरसाए गए फूल। सांस्कृतिक कार्यक्रमों की मची रही धूम।
इस राष्ट्रीय गौरव के अवसर पर जब मधेपुरा अबतक द्वारा समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी से बातें की गई तो डॉ.मधेपुरी ने कहा कि सरदार पटेल जैसे राष्ट्र पुरुष को सम्मान दिये जाने पर देश के रहनुमाओं को किसी प्रकार की ओछी राजनीति नहीं करनी चाहिए। सरदार पटेल न होते तो क्या आज यह एकीकृत भारत होता…….! कदापि नहीं !!

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आज मधेपुरा के हर घर में पहुँच रही है बिजली- ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र

नीतीश सरकार के ऊर्जावान ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव एवं राज्यसभा सांसद सह राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) आरसीपी सिंह ने मधेपुरा जिले के सिंहेश्वर-गमरिया पथ पर भैरवपुर के निकट स्थित बिहार स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड उपकेंद्र के संचरण प्रमंडल कोसी तथा संचरण अंचल कोसी का उद्घाटन संयुक्त रुप से दीप प्रज्वलित कर किया |

मौके पर आपदा प्रबंधन मंत्री दिनेश चन्द्र यादव, SC-ST मंत्री डॉ.रमेश ऋषिदेव, पूर्व मंत्री अशोक चौधरी, पूर्व मंत्री नरेंद्र नारायण यादव, विधान पार्षद ललन सर्राफ, विधायक अनिरुद्ध प्रसाद यादव सहित विभागीय कार्यपालक अभियंता की पूरी टीम की उपस्थिति देखी गई |

बता दें कि इस अवसर पर नीतीश सरकार के ऊर्जा विभाग के स्तंभ माने जाने वाले ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र यादव ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि जहाँ वर्ष 2006 में सूबे बिहार में ग्रीड की बातें करना भी मजाक लगता था वहींआज बिहार के हर घर में बिजली पहुंचाने का संकल्प निर्धारित समय से 2 माह पहले ही पूरा कर लिया गया है | उन्होंने उपस्थित भीड़ को यह जानकारी दी कि इस डिविजन में अब पांच स्थानों पर ग्रीड क्रियाशील हैं- मधेपुरा, सहरसा, सिमरी बख्तियारपुर, सोनबरसा और उदाकिशुनगंज में | साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अब मधेपुरा के सिंहेश्वर स्थान में डिविजन ऑफिस खुल जाने से इस क्षेत्र के विद्यत बोर्ड को काफी सुविधा मिलने लगी है बल्कि जिन विभागीय कार्यो के लिए उपभोक्ताओं एवं विद्युत विभाग के कर्मियों को पूर्णिया जाना पड़ता था अब उनका सारा काम यहीं निपट जाएगा |

यह भी जानिए कि बिहार-झारखंड अलग होने के समय जिस बिहार को 110 मेगावाट बिजली मिली थी वही बिहार आज 5,000 मेगावाट बिजली अपने उपभोक्ताओं को मुहैया करा रहा है | आरम्भ में बिहार में ग्रीड की संख्या 35 थी | उन दिनों यहाँ केवल 2 ग्रिड था- एक कटैया में और दूसरा सहरसा में | आज निर्धारित लक्ष्य से पूर्व ही हर घर में बिजली पहुंच गई है |

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बाबा की नगरी में गूंजा ‘मैं भी हूँ नीतीश कुमार’

रविवार को सिंहेश्वर, मधेपुरा में जदयू के दलित-महादलित प्रमंडलीय सम्मेलन का भव्य आयोजन हुआ। स्थानीय मवेशी हाट मैदान में आयोजित सभा का उद्घाटन राष्ट्रीय महासचिव व जदयू संसदीय दल के नेता आरसीपी सिंह ने किया, जबकि ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे।

Inauguration of JDU Dalit-Mahadlit Sammelan at Singheshwar.
Inauguration of JDU Dalit-Mahadlit Sammelan at Singheshwar.

अनुसूचित जाति-जनजाति कल्याण मंत्री रमेश ऋषिदेव की अध्यक्षता में आयोजित इस सभा में एक ओर जहां कोसी के तमाम दिग्गज चेहरे – आपदा प्रबंधन मंत्री दिनेश चन्द्र यादव, लोकसभा व राज्यसभा के पूर्व सांसद एवं बीएनएमयू के संस्थापक कुलपति डॉ. आर. के. यादव रवि, पूर्व मंत्री व विधायक नरेन्द्र नारायण यादव, विधानपार्षद ललन सर्राफ, विधायक बीना भारती आदि एक साथ दिखे, वहीं जदयू के वरिष्ठ दलित-महादलित नेताओं – राष्ट्रीय महासचिव सह विधायक श्याम रजक, भवन निर्माण मंत्री महेश्वर हजारी, परिवहन मंत्री संतोष निराला, पूर्व मंत्री सह विधानपार्षद अशोक चौधरी, विधायक सह जदयू दलित प्रकोष्ठ के अध्यक्ष रवि ज्योति, विधायक रत्नेश सदा, पूर्व विधानपार्षद रविन्द्र तांती और जदयू दलित-महादलित प्रकोष्ठ के प्रभारी विद्यानंद विकल – की पूरी टीम मंच पर विराजमान थी। जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप और प्रवक्ता निखिल मंडल ने भी इस मौके पर अपनी उपस्थिति दर्ज की। सभा का संचालन मधेपुरा जदयू के अध्यक्ष बिजेन्द्र नारायण यादव ने किया।

Speech of JDU General Secretary RCP Singh
Speech of JDU General Secretary RCP Singh

समारोह को संबोधित करते हुए आरसीपी सिंह ने कहा कि कुछ स्वार्थी तत्व दलितों के आरक्षण को लेकर भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। समाज में विद्वेष का जहर भरने वाले ऐसे लोगों का मंसूबा कभी पूरा नहीं होगा। जब तक भारत का संविधान कायम है, तब तक आरक्षण के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं कर सकता।

Speech of Minister Bijendra Narayan Yadav
Speech of Minister Bijendra Prasad Yadav

ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने कहा कि दलितों-महादलितों के लिए जो किसी भी राज्य में नहीं किया गया वह बिहार में हुआ है। वहीं, आपदा प्रबंधन मंत्री दिनेश चन्द्र यादव ने कहा कि नीतीश कुमार के शासनकाल में दलितों-महादलितों को बराबर का दर्जा दिया गया है।

Dr. RK Yadav Ravi, Ex-MP & Founder VC, addressing JDU Dalit-Mahadlit Sammelan at Singheshwar
Dr.R.K.Yadav Ravi, Ex-MP & Founder VC, addressing JDU Dalit-Mahadlit Sammelan at Singheshwar

लोकसभा व राज्यसभा के पूर्व सांसद तथा बीएनएमयू के संस्थापक कुलपति डॉ. आर. के. यादव रवि ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार केवल एक नाम नहीं बल्कि वे अब विचार और संस्कार में तब्दील हो चुके हैं। उन्होंने गांधी, जेपी, लोहिया और अंबेडकर के सपनों को मूर्त रूप दिया है।
पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सह विधायक श्याम रजक ने कहा कि नीतीश कुमार के अथक प्रयासों के कारण आज दलित समाज याचक नहीं दाता की भूमिका में है। पूर्व शिक्षामंत्री एवं विधानपार्षद अशोक चौधरी ने कहा कि दलितों के जीवन का कोई ऐसा पहलू नहीं जिस पर नीतीश कुमार की नज़र ना गई हो और उसके लिए सरकार के स्तर पर कार्य ना हुआ हो। वहीं, बिहार सरकार के मंत्रियों रमेश ऋषिदेव, महेश्वर हजारी एवं संतोष निराला ने दलितों-महादलितों के उत्थान व सर्वांगीण विकास के लिए किए गए कार्यों और चलाई जा रही योजनाओं की विस्तार से चर्चा की।

Dr. Amardeep, President, JDU Media Cell addressing Dalit-Mahadlit Sammelan at Singheshwar
Dr. Amardeep, President, JDU Media Cell addressing Dalit-Mahadlit Sammelan at Singheshwar.

जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप ने अपने जोशीले व काव्यमय संबोधन से खूब तालियां बटोरीं। उनकी बेहद चर्चित व लोकप्रिय कविता ‘मैं भी हूँ नीतीश कुमार’ ने जनसमूह में उत्साह भरने का काम किया। युवाओं ने उनके साथ ‘मैं भी हूँ नीतीश कुमार’ के जमकर नारे लगाए।

Big gathering in JDU Dalit-Mahadlit Sammelan at Singheshwar
Big gathering in JDU Dalit-Mahadlit Sammelan at Singheshwar

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