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वेतन मात्र 70₹ और सुरक्षा पर खर्च 156 करोड़

कौन नहीं जानता है कि सोशल साइट फेसबुक सुप्रीमो मार्क जुकरबर्ग द्वारा वेतन के रूप में मात्र एक डालर (यानी लगभग 70 रूपये) ही लिए जाते हैं…. परन्तु 2018 में जुकरबर्ग की सुरक्षा पर कंपनी द्वारा 226 लाख डॉलर (यानी लगभग 156 करोड रुपए) खर्च किए गये।

लोगों के समक्ष इस तथ्य का खुलासा तब हुआ जब अमेरिकी सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज कमीशन को इस प्रकार की जानकारी दी गई। जानकारी के रूप में कंपनी ने एक्सचेंज कमीशन को बताया कि उसने 31 दिसंबर 2018 तक जुकरबर्ग की सुरक्षा पर 226 लाख डॉलर खर्च किए हैं जिसमें मात्र दो करोड़ (यानी 200 लाख) डॉलर की राशि जुकरबर्ग और उनके परिवार को घर एवं दफ्तर में सुरक्षा मुहैया कराने के लिए खर्च की गई है तथा 26 लाख डॉलर की राशि निजी विमान से यात्रा कराने पर कंपनी द्वारा खर्च किए गये।

चलते-चलते यह बता दें कि अमेरिका में जुकरबर्ग के घर के सामने दिन हो या रात हमेशा हंसी हथियार-बंद सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं। घर और ऑफिस में बुलेट प्रूफ शीशे लगाए गये हैं। उनके ऑफिस के नीचे किसी गाड़ी को पार्क करने की इजाजत नहीं दी गई है।  उनके घर और ऑफिस में आने वाले प्रत्येक अनजान व्यक्ति की पूरी जाँच की जाती है।

यह भी जान लें कि जुकरबर्ग के घर एवं ऑफिस के डेस्क के पास एक पैनिक बटन है जिसे दबाते ही सुरक्षाकर्मी द्रुत गति से कार्यारम्भ कर देते हैं तथा सारे के सारे सुरक्षा उपकरण विद्युत गति से सक्रिय हो जाते हैं।

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प्रत्येक विश्वविद्यालय पुस्तकालय विकास हेतु राज्य सरकार द्वारा निर्गत की गई 5 लाख राशि

भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के केन्द्रीय पुस्तकालय विकास हेतु राज्य सरकार ने 5 लाख की राशि निर्गत कर दी है। साथ ही विश्वविद्यालय क्षेत्र के अंतर्गत सारे अंगीभूत कालेजों के लिए दो-दो लाख रूपये नैक कराने के मद्देनजर पुस्तकालय विकास हेतु निर्गत की गई है।

बता दें कि यह राशि विश्वविद्यालय एवं उसके अधीन सारे महाविद्यालयों को लाइब्रेरी मॉडिफिकेशन के लिए भेजी गई है। यदि विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय द्वारा पुस्तक खरीद प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किया गया तो संबंधित कुलसचिव एवं कॉलेज के प्रधानाचार्यों पर विधि संगत कार्रवाई की जाएगी।

चलते-चलते यह भी बता दें कि राज्य सरकार एवं राज भवन की ओर से गठित समिति द्वारा सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों के प्रधान को इस आशय का पत्र प्रेषित किया जाय कि इस राशि से केवल और केवल पुस्तकें ही क्रय की जाय और शीघ्रातिशीघ्र उपयोगिता प्रमाण-पत्र संबंधित पदाधिकारियों को उपलब्ध करा दिया जाय। क्योंकि महामहिम राज्यपाल लालजी टंडन ने कहा है कि बिहार में उच्च शिक्षा के विकास में वित्तीय सहायता में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं होगी, लेकिन जो विश्वविद्यालय या महाविद्यालय अपने दायित्वों को नहीं समझेंगे तथा विकास प्रयासों को आगे बढ़ाने में लापरवाही करेंगे, उनके विरुद्ध कार्यवाही भी होगी।

 

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अब मनचलों की खैर नहीं, दाँत खट्टे कर देंगी छात्राएँ

बिहार में विशेष रूप से छात्राओं के स्कूल आने-जाने के दौरान मनचलों द्वारा बढ़ रहे हमले एवं छेड़छाड़ की घटनाओं पर गंभीरतापूर्वक विचार करते हुए प्रदेश मुख्यालय के पटना जिला प्रशासन द्वारा इस साल से उच्च माध्यमिक विद्यालयों की 9वीं एवं 10वीं वर्ग की छात्राओं को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग दिलवाना आरंभ कर दिया गया है।

बता दें कि इस साल शुरू किये गए छात्राओं द्वारा इस सेल्फ डिफेंस कार्यक्रम के तहत पटना जिले के 120 माध्यमिक विद्यालयों की 4600 छात्राओं को ट्रेंड किया गया है। प्रशासन के कुछ उत्साहित एवं समर्पित अफसरों द्वारा इस कार्यक्रम को और अधिक विस्तार दिये जा रहे हैं।

यह भी जानिए कि छात्राओं को 46 मास्टर ट्रेनर्स द्वारा इस सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग में जूडो-कराटे व ताइक्वांडो आदि विधाओं की ट्रेनिंग दी जा रही है जिससे सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। ट्रेनिंग प्राप्त छात्राएं अब अपने स्कूल की दूसरी लड़कियों को सिखायेंगी। आधिकारिक जानकारी के अनुसार नए वित्तीय वर्ष में अलग से बजट स्वीकृत होते ही सेल्फ डिफेंस ट्रेनिंग का दूसरा शेड्यूल जारी कर दिया जाएगा। तब मनचलों की खैर नहीं रहेगी…. दाँत खट्टे कर देगी यह सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग प्राप्त छात्राएं।

मधेपुरा अबतक द्वारा समाजसेवी-शिक्षाविद डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी से जूडो-कराटे के बाबत विशेष जानकारी हेतु पूछे जाने पर उन्होंने इतिहास को संदर्भित करते हुए कहा कि वर्ष 1932 में जापान ने चीन पर हमला कर कुछ क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया था। युद्ध में चीनी सैनिकों के हाथ से हथियार छूट जाने पर हाथ (यानी ‘कर’) से ही अपनी सुरक्षा करने की विधियों की ईज़ाद की गई जिसे ‘कराटे’ नाम दिया गया। तभी से उस ‘कराटे’ शब्द को चायनीज हैंड एवं जापानी भाषा में ‘Empty Hand’ कहा जाने लगा। संक्षेप में उसी निहत्थे युद्ध प्रणाली को कराटे कहा जाता है जिसे ओलंपिक खेल में शामिल किये जाने हेतु डाॅ.मधेपुरी का प्रयास जारी है। यदि इस प्रयास में डाॅ.मधेपुरी को सफलता मिली तो मधेपुरा की कराटे-क्वीन सोनीराज एक-न-एक दिन ओलंपिक मेडल जीतकर मधेपुरा की शान बनेगी एवं परचम लहरायेगी….।

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मधेपुरा में पाँच बूथों पर 100% मतदान जानिए कौन-कौन ?

मिथिलांचल और सीमांचल के बीच अवस्थित इस कोसी अंचल के मधेपुरा संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे कुल 13 प्रत्याशियों में से तीन के बीच कांटे की टक्कर दिखाई दे रही है। ये तीनों हैं- एनडीए प्रत्याशी दिनेश चन्द्र यादव, महागठबंधन प्रत्याशी शरद यादव और जनधिकार पार्टी की ओर से राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव।

जहाँ एक ओर एनडीए की एकजुटता अटूट नजर आती है वहीं गठबंधन के शीर्ष नेतृत्व अब तक एक मंच पर भी साथ-साथ नहीं दिखे…… फिर भी गठबंधन के नेताओं को जातिगत समीकरण का वोट शत-प्रतिशत अपने ही पक्ष में नजर आ रहे हैं। गठबंधन वाले  छोट-भैया नेता भी कहीं ‘माय समीकरण’ तो कहीं ‘मुनिया समीकरण’ (मुस्लिम-निषाद-यादव) पर ताल ठोक रहे हैं।

और हाँ ! जदयू से निकलकर राजद में शामिल होने की मंशा लिए……. अटल मंत्रिमंडल में एनडीए के संयोजक व मंत्री रह चुके शरद यादव मधेपुरा लोकसभा सीट से वर्तमान में राजद-कांग्रेस गठबंधन का प्रत्याशी बनकर भाग्य आजमा रहे हैं। हद तो तब हो गई जब इस बार किसान के अनेक गाँव प्यासे हैं और एनएच-106 एवं एनएच-107 की स्थिति जर्जर है फिर भी यहाँ ‘पानी और सड़क’ चुनावी मुद्दा नहीं बन पाया…… उल्टे जातिगत समीकरण चतुर्दिक हावी होता दिख रहा है। कोई साख बचाने की तो कोई नाक बचाने की लड़ाई लड़नेे मेें मशगूल है।

बता दें कि मधेपुरा की सीट पर इस बार जज्बातों की जंग में त्रिकोणीय संघर्ष का पटाक्षेप 23 अप्रैल को होते-होते पुनः सुलगने लगा है…. जब यह बात खुलकर सामने आ गई कि पाँच बूथों पर 100% मतदान हुआ। और मधेपुरा संसदीय क्षेत्र के सभी छह विधानसभा क्षेत्रों में अवस्थित 1940 मतदान केंद्रों में से 6 बूथों पर लगभग 90%……. 264 बूथों पर तकरीबन 80%…….. 840 मतदान केंद्रों पर लगभग 70%….. और 50 मतदान केंद्रों पर 40% से कम वोट डाले गये तथा …..।

चलते-चलते बता दें कि 100% मतदान वाले बूथों में 4 बूथ हैं आलमनगर विधानसभा के- बूथ संख्या 17 (नवटोल), बूथ संख्या- 144 (फोरसाही), बूथ संख्या- 223 (सुखाड़ घाट) व बूथ संख्या- 235 (गंगापुर) तथा बिहारीगंज विधान सभा के एक बूथ संख्या- 173 (रही वाँया भाग में) सौ फ़ीसदी मतदान रिकॉर्ड किया गया।

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मधेपुरा के 8 लाख लोगों की जिन्दगी खतरे में

आई एम ए यानी इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के रिपोर्ट के अनुसार कोसी के लोग खून की कमी से बुरी तरह जूझ रहे हैं। खान-पान में अनियमितता के कारण एनीमिया पीड़ित लोगों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। कुल मिलाकर यहां लगभग 40% से अधिक लोग एनीमिया से ग्रसित हैं।

बता दें कि इस इलाके में 3 लाख महिलाएं रक्तअल्पता की शिकार हैं। साल लगते-लगते 140 लोग मौत के मुंह में धीरे-धीरे समाते चले जा रहे हैं। स्थिति भयावह है। प्रतिदिन बद् से बद्तर होती जा रही है। चिकित्सकों द्वारा मौत होने के कारण को रक्त अल्पता ही बताया जाता है।

यह भी जानिए कि डॉक्टरों के अनुसार यहाँ के लोगों की स्थिति प्राय: चाय-कॉफी एवं अन्य मिलावटी पदार्थों के सेवन से दिन-प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है। हाल ही में 2000 लोगों की जाँच किए जाने के बाद 80% लोगों के शरीर में खून की कमी पाई गई। यहाँ तक कि 40% लोगों में 10 ग्राम से भी कम खून पाया गया।

चिकित्सकों के अनुसार रक्त अल्पता के लक्षणों को लोग खुद भी महसूस सकते है। जब कभी किसी भी व्यक्ति को कमजोरी होने लगे, थकावट महसूस होने लगे तथा यादाश्त में तेजी से कमी होने लगे तो उसे शीघ्रातिशीघ्र मान लेना चाहिए कि उसके शरीर में रक्त की कमी होने लगी है। इसके अतिरिक्त समय से पूर्व चमड़ी में झुर्रियों के साथ-साथ मामूली कामों में भी सांसे फूलने लगे, घाव हो जाने पर ठीक होने में अधिक समय लगने लगे और दिल की धड़कने बढ़ने लगे तो शरीर को खून की कमी की बीमारी से ग्रसित मान कर तुरंत डॉक्टर से संपर्क साधना चाहिए। यदि किसी कारण से डॉक्टर से मिलने में विलंब हो तो तत्काल रक्त अल्पता से बचाव हेतु बिल्कुल बंद कर दें- चाय-कॉफी एवं अम्ल विरोधी खाद्य पदार्थों का उपयोग……… और शुरू कर दें हरा मटर, चना, अंडा, मछली, दूध, पालक, अखरोट, हरी सब्जी, दाल, काजू-किशमिश एवं बादाम, खजूर आदि।

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इसे कहते हैं मजबूत लोकतंत्र के लिए मतदान के प्रति समर्पण

लोकसभा चुनाव को लेकर तीसरे चरण में कोसी क्षेत्र के मधेपुरा एवं सुपौल के मतदाताओं द्वारा मतदान के प्रति अटूट समर्पण देखने को मिला। मतदाताओं में मतदान के प्रति अजीबोगरीब जोश देखा गया….. कोई चचरी पर तो कोई नाव से नदी पार कर बूथ पर गए…… तो कोई स्ट्रेचर या ट्रैक्टर पर सवार होकर मतदान केंद्र तक पहुंच गए….।

यह भी बता दें कि सुपौल के एक परिवार के सर्वाधिक वृद्धजन के निधन हो जाने के बावजूद शेष सभी जन चल दिए पहले करने मतदान…… और बाद में गए श्मशान। उन लोगों ने तो “पहले मतदान फिर जलपान” जैसे स्लोगन को भी मात दे दिया।

जानिए कि अबतक 22 राज्यों के 302 लोकसभा सीटों पर चुनाव संपन्न हो चुका है। तीसरे फेज में जहां सबसे अधिक मतदान 80.74% के करीब असम में हुआ वहीं सबसे कम 12.86% वोटिंग जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग सीट पर हुई। और तो और, जहां कोसी क्षेत्र के मधेपुरा व सुपौल क्षेत्र में हल्की-फुल्की बारिश के बीच सुहावने मौसम में मतदाताओं ने अपने मताधिकार का निर्भीकतापूर्वक जमकर प्रयोग किया वहीं केरल में वोटिंग के दौरान बेशुमार गर्मी से 8 मतदाताओं की मौत हो गई तथा 4 पोलिंग अफसर बेहोश हो गए। देश के विकास के लिए वोटरों ने खूब बहाया अपना पसीना।

और तो और…. जहां गुजरात के जूनागढ़ लोकसभा सीट के बाणेज गाँव में मात्र 1 मतदाता के लिए एक मतदान केंद्र बनाया गया वहीं छत्तीसगढ़ के शेरडांड गांव में बनाए गए एक बूथ पर मात्र 4 मतदाताओं ने आधे घंटे में ही 100% मतदान का रिकॉर्ड बना लिया। इन दोनों बूथों पर वोट डालते हुए देखने के लिए देश ही नहीं विदेश से भी पत्रकार पहुचे थे… लाइव कवरेज भी किया गया जिसे सारा संसार देखता रहा।

यह भी बता दें कि पिछले लोकसभा चुनाव की तरह इस बार भी मतदान करने में महिलाएं पुरुषों से आगे रहीं जबकि पहली बार वोट डालने वाली युवा मतदाताओं ने मधेपुरा अबतक को बताया कि धर्म, जाति एवं क्षेत्रीयता से ऊपर उठकर देश की मजबूती के लिए उन्होंने मतदान किया है। सुहावने मौसम में वे 6:00 बजे प्रातः से ही वोटिंग के लिए पंक्ति में लग गई जबकि कहीं-कहीं ईवीएम में खराबी के चलते घंटे-डेढ़ घंटे तक मतदान प्रभावित रहा। उनकी शिकायत पर डीएम सह जिला निर्वाचन पदाधिकारी नवदीप शुक्ला द्वारा जानकारी मिलते ही मधेपुरा प्रखंड के बूथ नंबर 121 पर उसे बदल दिया गया। मतदान शुरू होने के दौरान ही 26 बैलट यूनिट एवं 22 वी वी पेट में खराबी आने के कारण बदला गया। कुल मिलाकर मतदान शांतिपूर्ण रहा। अपनी-अपनी जीत के दावे करने वाले तीनों प्रत्याशियों सहित मतदाताओं, चुनाव कर्मियों एवं जिला प्रशासन के शीर्ष पदाधिकारी डीएम नवदीप शुक्ला एवं एसपी संजय कुमार को मधेपुरा अबतक की ओर से कोटि-कोटि साधुवाद।

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तीसरे चरण में मधेपुरा समेत पांच सीटों पर मतदान संपन्न

बिहार में लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण की पांच सीटों – मधेपुरा, सुपौल, अररिया, खगड़िया और झंझारपुर – के लिए मतदान शांतिपूर्वक संपन्न हो गया। छिटपुट घटनाओं को छोड़ इस दौरान कहीं कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। इन सीटों पर कुल मिलाकर 60 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। अलग-अलग देखें तो मधेपुरा में 59.12 प्रतिशत वोटिंग हुई, जबकि सुपौल में मतदान का प्रतिशत 62.80, अररिया में 62.34, खगड़िया में 58.83 और झंझारपुर में 56.92 रहा।

बता दें कि इन पांचों लोकसभा क्षेत्रों में 89.09 लाख से ज्यादा मतदाताओं के लिए 9,076 मतदान केन्द्र केन्द्र बनाए गए थे। सुरक्षा के दृष्टिकोण से खगड़िया लोकसभा क्षेत्र के नक्सल प्रभावित सिमरी बख्तियारपुर, अलौली एवं बेलदौर विधानसभा क्षेत्रों में मतदान चार बजे ही समाप्त हो गया था, जबकि अन्य सभी क्षेत्रों में मतदान का कार्य शाम छह बजे तक जारी रहा। इस चरण के मतदान को लेकर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। सभी मतदान केन्द्रों पर अर्धसैनिक बलों और बिहार सैन्य बल की तैनाती की गई थी और मतदान के लिए 58 हजार से ज्यादा मतदानकर्मियों को लगाया गया। हालांकि प्रारंभ में कुछ स्थानों पर ईवीएम खराब होने की सूचना मिली थी, जिसे बाद में ठीक कर लिया गया।

गौरतलब है कि इस चरण की पांच सीटों के लिए पांच महिला उम्मीदवार सहित कुल 82 उम्मीदवार चुनावी मैदान में थे। मधेपुरा की चर्चित सीट के लिए जदयू के दिनेश चन्द्र यादव, राजद के शरद यादव और मौजूदा सांसद व जाप प्रमुख राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव के बीच मुकाबला है। मुकाबले के त्रिकोणीय होने से जदयू को लाभ होने की बात कही जा रही है। मधेपुरा के अलावे झंझारपुर में भी त्रिकोणीय मुकाबला होने की उम्मीद है। यहां जदयू के रामप्रीत मंडल, राजद के गुलाब यादव और निर्दलीय देवेन्द्र प्रसाद यादव के बीच दिलचस्प त्रिकोण बन रहा है। बाकी तीन सीटों सुपौल, अररिया और खगड़िया में आमने-सामने की लड़ाई है। सुपौल में जदयू के दिलेश्वर कामत और कांग्रेस की रंजीत रंजन, अररिया में भाजपा के प्रदीप सिंह और राजद के सरफराज आलम तथा खगड़िया में लोजपा के महबूब अली कैसर और विकासशील इंसान पार्टी के मुकेश सहनी के बीच सीधा मुकाबला है।

चलते-चलते बता दें कि बिहार की 40 लोकसभा सीटों के लिए सभी सात चरणों में मतदान होना है। पहले चरण में 11 अप्रैल को चार तथा दूसरे चरण में 18 अप्रैल को पांच लोकसभा क्षेत्रों में मतदान संपन्न हो चुका है। मतों की गिनती 23 मई को होनी है।

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मधेपुरा ने बनाया भरपूर मतदान का मन

लोकसभा चुनाव 2019 के तीसरे चरण के मतदान के लिए बिहार के मधेपुरा, सुपौल, अररिया, खगड़िया, झंझारपुर समेत देश के अन्य क्षेत्रों में प्रचार का शोर थम गया है। सारे राजनीतिक दल प्रचार के दौरान अपने-अपने वादे कर चुके हैं। अब कल 23 अप्रैल को जनता की बारी है।

बता दें कि चुनाव में सुरक्षा की चाक-चौबंद व्यवस्था के साथ-साथ निष्पक्ष, भयमुक्त एवं शांतिपूर्ण मतदान कराने के लिए मधेपुरा जिला प्रशासन संकल्पित है। चुनाव से संबंधित गश्ती दल, फ्लैग मार्च एवं अन्य तैयारियों को लेकर मधेपुरा डीएम नवदीप शुक्ला एवं एसपी संजय कुमार ने मधेपुरा अबतक से कहा कि मतदातागण अपने वोट का भविष्य निर्भीकतापूर्वक खुद ही तय करेंगे। भयमुक्त मतदान का संकल्प दोहराते हुए जिला प्रशासन ने कहा कि जिले के सीमाक्षेत्र के साथ-साथ सीमा से सटी नदियों में भी गश्ती दल की तैनाती की जाएगी। विशेष जानकारी के लिए हेल्पलाइन नं. 1950 जारी किया गया है।

यह भी बता दें कि जिला प्रशासन ने चुनाव आयोग के निर्देशानुसार शतप्रतिशत मतदान कराने के उद्देश्य से मधेपुरा की ‘कराटे क्वीन’ सोनी राज को जिले की इलेक्शन आइकॉन बनाया है। आज सुबह अपने दायित्व-निर्वहन के क्रम में सोनी राज मधेपुरा के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम पार्क पहुंची जहां बड़ी संख्या में शहर के स्त्री-पुरुष व बच्चे अपने-अपने खंडों के ओपन जिम में स्वास्थ्य लाभ कर रहे थे। वहीं मधेपुरा के कलाम कहे जाने वाले समाजसेवी-साहित्यकार डॉ. भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी के सहयोग से सोनी राज ने सबको एकत्रित किया और फिर उनसे अनुरोध किया कि वे कल के मतदान के लिए सबसे अपील करें।

इस मौके पर डॉ. मधेपुरी ने कलाम पार्क में आए बैंक लीड ऑफिसर एके झा, संतोष कुमार झा, प्रो. उपेन्द्र प्रसाद यादव, शब्बीर अहमद, निर्मल तिवारी सहित उपस्थित तमाम लोगों से कहा कि लोकसभा का यह चुनाव देश के रहनुमाओं का चुनाव है। उन्होंने कहा कि हमें ध्यान रहना चाहिए कि नेताओं के पास पथ छोड़ कुपथ पर जाने के हजारों रास्ते हो सकते हैं, परन्तु उन्हें सुपथ पर लाने के लिए हमारे पास बस एक ही हथियार है, और वह है हमारा वोट।

डॉ. मधेपुरी ने सभी को ‘पहले मतदान, फिर जलपान’ का संकल्प दिलाया और कहा कि इवीएम का बटन दबाते समय हम यह अवश्य सोचें कि देश किन हाथों में सुरक्षित रहेगा और उन्हें ही अपना बहुमूल्य मत दें। आप अपने आसपास के सभी मतदाताओं को साथ लेकर मतदान केन्द्र पर जाएं और मतदान में भागीदार बनकर लोकतंत्र को मजबूत बनाएं और देश की प्रगति का हिस्सा बनें।

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मधेपुरा जिले में शत-प्रतिशत मतदान कराने हेतु प्रशासनिक पहल

संपूर्ण जिले में लोकसभा चुनाव में 9579 पंजीकृत दिव्यांग मतदाताओं के लिए कुल 102 दिव्यांग बूथ बनाये गये हैं। दिव्यांग मतदाताओं को सरकारी स्तर पर हर प्रकार की सुविधा दिये जाने की व्यवस्था की गई है ताकि शत-प्रतिशत दिव्यांग मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर सके।

बता दें कि मधेपुरा जिले के आलमनगर विधानसभा में 22 दिव्यांग बूथ, बिहारीगंज विधानसभा में 34 दिव्यांग बूथ, सिंहेश्वर विधानसभा में 34 दिव्यांग बूथ एवं मधेपुरा विधानसभा में 12 दिव्यांग बूथ चिन्हित किये गये हैं। इन सभी चिन्हित 102 मतदान केंद्रों पर रैंप की व्यवस्था की गई है। साथ ही व्हील चेयर के अतिरिक्त पेयजल, बिजली एवं शौचालय की भी व्यवस्था की गई है।

यह भी बता दें कि इन दिव्यांग बूथों पर दिव्यांग एवं वृद्ध व लाचार मतदाताओं के सहायतार्थ स्काउट एवं एनसीसी कैडेट तैनात रहेंगे। जिला स्काउट एंड गाइड के जिला आयुक्त जयकृष्ण यादव ने कहा कि जिला प्रशासन ने स्काउट एंड एनसीसी कैडेटों के बेहतर कार्यों को देख देखकर उन्हें दिव्यांग बूथों पर तैनात करने का निर्देश दिया है। उन्होंने जानकारी दी कि दिव्यांग व वृद्ध एवं लाचार मतदाताओं की सहायता के लिए स्थानीय केशव  कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय में स्काउट एण्ड एनसीसी कैडेटों को विधिवत ट्रेनिंग देने हेतु प्रशिक्षण शिविर का भी आयोजन किया गया।

जिला आयुक्त श्री यादव ने मधेपुरा अबतक से कहा कि चुनाव के दिन यानि 23 अप्रैल को सभी प्रशिक्षित कैडेट अपने-अपने गणवेश में सभी चिन्हित बूथों पर तैनात रहेंगे। सभी को चुनाव विभाग द्वारा निर्गत परिचय-पत्र दिया जाएगा। इन प्रशिक्षित कैडेटों का काम होगा – दिव्यांगों को बूथ पर लाना ,बैठाना, पानी पिलाना…… मतदान कराकर वापस सही सलामत भूत से बाहर वाहन तक पहुंचाना। डीएम नवदीप शुक्ला (IAS) ने हेल्पलाइन नंबर 1950 जारी किया है जिसके जरिये दिव्यांग मतदाता मतदान संबंधी अन्य आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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मधेपुरा जिले के 9579 पंजीकृत दिव्यांग मतदाता वोट डालेंगे

मधेपुरा जिले के 6700 पुरुष एवं 2879 महिला यानी कुल मिलाकर 9579 दिव्यांगों की पहचान कर सूचीबद्ध किया जा चुका है। इस बाबत सभी मतदान केंद्रों पर रैंप की व्यवस्था की गई है। साथ ही व्हील चेयर के अतिरिक्त पेयजल, बिजली व शौचालय की भी व्यवस्था है।

यह भी बता दें कि नि:शक्त जनों को सहज मतदान कराने में सहयोग के लिए वालंटियर की भी प्रतिनियुक्ति की गई है। और हाँ ! 18 वर्ष से कम उम्र वाले इन वॉलिंटियर्स को प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जाएगी।

यह भी जान लें कि प्रत्येक प्रखंड में नि:शक्त मतदाताओं यानी दिव्यांगों के लिए वाहन की भी व्यवस्था की गई है जिसे मांग के अनुसार उपलब्ध कराया जाएगा। लोकसभा चुनाव 2019 में दिव्यांग जनों द्वारा सहज रूप से भागीदारी किया जा सके……. इस बाबत चुनाव आयोग के निर्देशानुसार तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा चुका है।

मधेपुरा समाहरणालय के सभागार में मंगलवार को राज्य नि:शक्तता आयुक्त डॉ.शिवाजी कुमार ने निर्वाचन आयोग द्वारा दिव्यांगों को मिलने वाली सुविधाओं की तैयारी की गहन समीक्षा की। समीक्षा के दरमियान आयुक्त डॉ.कुमार ने मधेपुरा अबतक को बताया कि पहली बार ईवीएम में ब्रेल लिपि की व्यवस्था की गई है ताकि जो आँख से नहीं देख सकते हैं वैसे नेत्रहीन दिव्यांग भी वोट डाल सके। ऐसे दिव्यांग की पहचान करें जिन्हें आइकॉन बनाया जा सके।

यह भी जान ले कि वोटिंग के दौरान ग्रीन चैनल के माध्यम से उन्हें बिना पंक्ति में लगाये….. सीधा मतदान करने की विशेष सुविधा प्रदान की गई है। यह भी तय किया गया है कि पहली बार वोट डालने वाले सभी दिव्यांगों को सम्मान-पत्र प्रदान किया जाएगा।

और हाँ ! मानसिक और बौद्धिक रूप से दिव्यांगों को उनके माता-पिता या कानूनी अभिभावक के सहयोग से मतदान की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। बैठक में डीडीसी, पीजीआरओ, सिविल सर्जन, डीईओ, डीसीएलआर, डीपीआरओ रजनीश कुमार, उप-निर्वाचन पदाधिकारी पवन कुमार, डीपीओ गिरीश कुमार आदि उपस्थित थे।

चलते चलते यह भी बता दें कि वैसे दिव्यांग मतदाता जो मतदान केंद्र पर आने में असमर्थ हैं उन्हें पोस्टल बैलेट उपलब्ध कराया जाएगा, साथ ही हेल्पलाइन नंबर- 1950 के जरिये दिव्यांग मतदाता मतदान से संबंधित किसी भी प्रकार की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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