23 अगस्त, 2023 के दिन भारत चाँद पर

भारत विश्व का पहला देश बन गया जब भारत का सबसे महत्वाकांक्षी मून मिशन चंद्रयान- 3 का लैंडर शाम 6:04 बजे चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरा। करोड़ों-करोड़ भारतीय उस पल को देखकर रोमांचित हुए। सारे विश्व में तिरंगा की शान अचानक बढ़ गई।

जैसे-जैसे चंद्रयान-3 का लैंडर चंद्रमा की सतह के निकट हो रहा होता कि इसरो के वैज्ञानिकों की तालियों की गड़गड़ाहट चतुर्दिक सुनाई देने लगती। 140 करोड़ देशवासियों ने ऐसा इतिहास बनते हुए देखकर देश के वैज्ञानिकों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की।

फिजिक्स के प्रोफेसर डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने उस पल का गवाह बनकर यही कहा कि यह घटना राष्ट्र के जीवन की चेतना बन गई है। साथ ही यह पल भारत के जय घोष का पल बन गया है। डॉ. मधेपुरी ने कहा- हर मुश्किल फाँदकर पहुंच गया भारत चाँद पर। दक्षिण अफ्रीका से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तिरंगा लहराकर इसरो के निदेशक एस.सोमनाथ सहित सभी वैज्ञानिकों को हृदय से बधाई दी और यही कहा कि साइंस एंड टेक्नोलॉजी देश के उज्जवल भविष्य का आधार बनेगा।

सम्बंधित खबरें


पद्मभूषण डॉ.बिंदेश्वर पाठक अपने कर्मों में सदैव जीवित रहेंगे- डॉ.मधेपुरी

सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक 80 वर्षीय पद्मभूषण डॉ.बिंदेश्वर पाठक नहीं रहे। मंगलवार 15 अगस्त को नई दिल्ली में सुलभ इंटरनेशनल के केंद्रीय कार्यालय में ध्वजारोहण के बाद उनकी तबीयत बिगड़ी और एम्स में इलाज के दौरान करीब दो बजे अपराह्न में उनका निधन हो गया। बुधवार को नई दिल्ली के लोदी गार्डन शवदाह गृह में उनका शरीर पंचतत्व में विलीन हो गया। पुत्र कुमार दिलीप ने उन्हें मुखाग्नि दी। बिहार के वैशाली जिला ने अपना ऐसा लाल खोया जिन्होंने अपनी क्रांतिकारी सोच के बूते विश्व में भारत का नाम रोशन किया था। उनके निधन से बिहार ही नहीं देश की अपूरणीय क्षति हुई है।

समाजसेवी डॉ भूपेंद्र नारायण यादव मधेपुरी ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि 80 के दशक में मैं भी मधेपुरा नगर पालिका का उपाध्यक्ष हुआ करता था। डॉ.पाठक के कार्यों से प्रभावित होने के कारण अपने मित्र पटना के पीएचईडी विभाग के कार्यपालक अभियंता विनोदानंद यादव के साथ उनसे मिलने उनके निवास पर गया था। कुछ ही देर की बातचीत में उनकी सोच से हम दोनों सर्वाधिक प्रभावित हुए थे, क्योंकि उन दिनों मधेपुरा नगरपालिका में भी मैला सिर पर ढोया जाता था।  डॉ.पाठक ने उन दिनों सुलभ शौचालय को सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बना दिया था। उनके इस मुहिम से देश में मनुष्यता की गरिमा सर्वाधिक बढ़ी। उनके इन्हीं कार्यों के लिए कई अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से भी इन्हें नवाजा गया था। डॉ.बिंदेश्वर पाठक अपने पर्यावरणीय सुरक्षा एवं स्वच्छता अभियान के कार्यों में सदैव जीवित रहेंगे। ईश्वर उनकी आत्मा को चिर शांति प्रदान करें।

सम्बंधित खबरें