नीतीश कैबिनेट द्वारा आईजीआईएमएस में मुफ्त इलाज के फैसले पर मधेपुरा वासियों ने दी बधाई

इंदिरा गांधी इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंस पटना में अब मरीजों के सभी प्रकार के इलाज निशुल्क होंगे। सभी प्रकार की जांच फ्री, दवा फ्री यहां तक कि सुपर स्पेशलिटी ऑपरेशन जिसमें किडनी ट्रांसप्लांट, हार्ट ट्रांसप्लांट आदि आता है, वह भी फ्री। इतनी फ्री सुविधाओं के बावजूद मरीज को केवल रजिस्ट्रेशन चार्ज ही लगेगा और यदि मरीज सुपर डीलक्स वार्ड में रहना चाहेंगे तो उन्हें सिर्फ बेड चार्ज लगेगा। जनहित में दिए गए इन सुविधाओं के लिए नीतीश सरकार को सालाना 60 करोड़ रुपये वहन करने होंगे।

जनहित के ऐसे कार्य के लिए मधेपुरा के शिक्षाविदों, बुद्धिजीवियों, व्यापारियों आदि ने कोटि-कोटि साधुवाद अर्पित किया है। समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी एवं सीए मनीष सर्राफ ने ऐसे पावन कृत्य के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एवं उनके कैबिनेट सदस्यों सहित मधेपुरा की माटी के लाल आईजीआईएमएस के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट व उपनिदेशक डॉ.मनीष मंडल के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की है।

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भारतरत्न से सम्मानित हो हरित क्रांति के जनक डॉ.एमएस स्वामीनाथन- मधेपुरी

भारत के प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक एवं हरित क्रांति के जनक डॉ. एमएस स्वामीनाथन का 28 सितंबर गुरुवार को चेन्नई में निधन हो गया। भूख के खिलाफ जीवन भर लड़ने वाले इस योद्धा ने “विश्व खाद्य पुरस्कार” पाने वाला दुनिया का पहला व्यक्ति बनकर भारत को गौरवान्वित ही नहीं, बल्कि विश्व भर में महिमा मंडित भी किया।

समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने शोक प्रकट करते हुए कहा कि डॉ.स्वामीनाथन के जाने से भारतीय कृषि एवं कृषक वर्ग को भारी क्षति हुई है। उन्होंने दुनिया भर के विश्वविद्यालयों द्वारा हरित क्रांति के जनक को डॉक्टरेट की 84 मानद डिग्री दिए जाने, भारत सरकार द्वारा राज्यसभा सदस्य बनाए जाने के साथ-साथ पद्मश्री, पद्मभूषण एवं पद्मविभूषण से सम्मानित किए जाने पर प्रसन्नता जाहिर की। साथ ही डॉ.मधेपुरी ने भारत सरकार से मांग की है कि भारतीय कृषि एवं कृषक के लिए डॉ.स्वामीनाथन की अभूतपूर्व देन एवं क्रांतिकारी योगदान को चिरस्मरणीय बनाए रखने हेतु उन्हें मरणोपरांत ‘भारतरत्न’ से सम्मानित किया जाए।

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हंसकर शूली को चूमने वाला भगत सिंह शहीद-ए-आज़म कहलाया- डॉ.मधेपुरी

मधेपुरा में आज शहीद-ए-आज़म भगत सिंह की 117वीं जयंती समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने अपने ‘वृंदावन’ निवास पर बच्चों के बीच मनाई। डॉ.मधेपुरी ने ज्ञानदीप निकेतन के बच्चों से कहा कि ब्रिटिश भारत में पंजाब प्रांत के लायलपुर जिले के बंगा गांव में वर्ष 1907 के 28 सितंबर के दिन पिता सरदार किशन सिंह के घर क्रांतिवीर बालक भगत सिंह का जन्म हुआ था। किशोरवय के भगत सिंह जलियांवाला बाग कांड में जनरल डायर की क्रूरता की जानकारी पाते ही देशवासियों के अपमान का बदला लेने को मचलने लगे। भगत सिंह ने “हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी” नामक क्रांतिकारी दल का गठन किया, जिससे चंद्रशेखर आजाद, सुखदेव, राजगुरु सरीखे अन्य बहुत से क्रांतिवीर जुड़ते चले गए।

डॉ.मधेपुरी ने कहा कि साइमन कमीशन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान हुए लाठी चार्ज में लाला लाजपत राय के सिर पर लाठी लगी। जिसके बाद 17 नवंबर, 1928 को उनका देहांत हो गया। भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव आदि ने लिया था इस हत्या का बदला अंग्रेज अफसर सांडर्स की हत्या करके। और मिली तीनों को फांसी की सजा तब जबकि ये तीनों क्रांतिकारी असेंबली में बम फेंक कर भागे नहीं, बल्कि खड़े रहे।

अंत में डॉ.मधेपुरी ने बच्चों सहित उनके प्राचार्य चिरामणि यादव से यही कहा की शहादत से एक दिन पहले कैदी साथियों के नाम लिखे पत्र में भगत सिंह ने हंसते हुए यही लिखा था- ‘उनके मन में देश व मानवता के लिए जितना करने की लालसा थी, वे उसका हजारवाँ हिस्सा भी नहीं कर पाए हैं………..जिंदा रहते तो शायद यह हसरत पूरी कर पाते।’

प्राचार्य चिरामणि यादव ने संक्षेप में उद्गार व्यक्त करते हुए बच्चों से कहा कि भगत सिंह यही कहा करते कि देश की आजादी के लिए बलिदान देने वालों की संख्या इतनी बढ़ जाएगी कि साम्राज्यवादी शक्तियों के लिए मिलकर भी इंकलाब को रोकना संभव नहीं होगा। अंत में प्राचार्य सहित सभी बच्चों ने बारी-बारी से शहीद-ए-आज़म भगत सिंह के तैल चित्र पर पुष्पांजलि की।

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राष्ट्रीय भावनाओं से ओत-प्रोत हैं दिनकर की रचनाएं- डॉ.मधेपुरी

कौशिकी क्षेत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन संस्थान के अंबिका सभागार में डॉ.केके मंडल की अध्यक्षता में साप्ताहिक हिन्दी दिवस मनाया गया। जिसमें हिन्दी के विकास के लिए सृजन दर्पण के सचिव विकास कुमार के मार्गदर्शन में नीरज, संध्या, स्नेहा, शिवानी एवं अभिलाषा कुमारी आदि ने हिन्दी नाटक का मंचन किया। मौके पर छात्रों के बीच हिन्दी में भाषण, निबंध, लेखन, चित्रकला एवं प्रोजेक्ट में तुलसी पब्लिक स्कूल के निदेशक सह कौशिकी के उप सचिव श्यामल कुमार सुमित्र के निर्देशन में चारो विधाओं में प्रथम आने वाले चार छात्र- छात्राओं वर्ग दस के पीयूष झा, अमीषा राज ,वर्ग नौ के प्रकृति सुरभि तथा वर्ग छह के विवेक कुमार को अध्यक्ष डाॅ.केके मंडल, मुख्य अतिथि प्रो.सचिंद्र एवं सम्मेलन के सचिव डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी द्वारा पुरस्कृत किया गया।

इस अवसर पर राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर को याद करते हुए बीएनएमयू के मानविकी के डीन प्रो.(डॉ.) विनय कुमार चौधरी का कौशिकी द्वारा सारस्वत सम्मान किया गया। जिन्होंने हिन्दी में डी.लिट् की उपाधि ही नहीं प्राप्त की है बल्कि तीन दर्जन पुस्तकों के रचनाकार भी हैं। डॉ.विनय ने अपने संबोधन में राष्ट्रकवि दिनकर को ओज और उत्साह का कवि कहते हुए विस्तार से उनकी काव्य यात्रा का वर्णन किया। मुख्य अतिथि प्रो.सचिंद्र ने कहा कि दिनकर जी विश्व मानवता के विकास में भारत की अग्रणी भूमिका चाहते थे।

मौके पर सम्मेलन के सचिव डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने कहा कि यशस्वी राष्ट्रकवि दिनकर की लोकप्रियता का कारण उनकी क्रांतिकारी और राष्ट्रीय भावनाओं से ओत-प्रोत उनकी रचनाएं हैं। डॉ.मधेपुरी ने दिनकर के खंडकाव्य ‘रश्मिरथी’ की चंद पंक्तियां सुनाकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और खूब तालियां बटोरी। प्रो.मणिभूषण वर्मा ने कहा कि दिनकर के काव्यों में भावों, अनुभूतियों एवं शिल्प की दृष्टि से विविधताएं दृष्टिगोचर होती रही हैं। मौजूद साहित्यकारों डॉ.अरुण कुमार, केबी वीमेंस कॉलेज के संस्थापक सचिव प्रो. प्रभाष चंद्र, डॉ.सीताराम शर्मा, डॉ.आलोक कुमार, कवि द्विजराज ने भी दिनकर के ओज-शौर्य तथा प्रो.(डॉ.) विनय कुमार चौधरी के सारस्वत सम्मान की भरपूर सराहना की।

अंत में अध्यक्षीय संबोधन में टीएमबीयू के पूर्व प्रति कुलपति एवं सम्मेलन की स्थाई अध्यक्ष डॉ.केके मंडल ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रकवि दिनकर हिन्दी साहित्य के इतिहास में छायावादोत्तर काल के सशक्त और लोकप्रिय कवि के रूप में प्रसिद्ध हुए। दिनकर राष्ट्र गौरव का गान करते हुए विदेशी दासता से मुक्त करने का आकुल आह्वान भी करते रहे। दिनकर को ओज, उमंग, अग्नि धर्मा, क्रांति दूत, पौरुष और शौर्य के कवि के रूप में मान्यता मिली।

आरंभ में राष्ट्रकवि दिनकर के तैल चित्र पर सबों ने माल्यार्पण व पुष्पांजलि की एवं उपस्थित अतिथियों ने दीप जलाकर कार्यक्रम का उद्घाटन किया । अंत में सम्मेलन के उपसचिव डॉ. श्यामल कुमार सुमित्र ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

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शिक्षक दिवस पर सम्मानित हुए डॉ.केके मंडल व डॉ.मधेपुरी

तुलसी पब्लिक स्कूल द्वारा विश्व के महान शिक्षक व दार्शनिक डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में समारोह पूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर टीपीएस के निदेशक डॉ.श्यामल कुमार सुमित्र द्वारा टीपी कॉलेज के दो वरीय शिक्षकों एवं कौशिकी क्षेत्र हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष एवं सचिव डॉ.केके मंडल व डॉ.भूपेंद्र नारायण यादव मधेपुरी को अंगवस्त्रम, पाग, बुके, कलम आदि देकर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के आरंभ में अतिथियों द्वारा डॉ.राधाकृष्णन के तैल चित्र पर माल्यार्पण व पुष्पांजलि की गई। तत्पश्चात स्कूल के छात्र-छात्राओं एवं अतिथियों द्वारा केक काटकर विश्व गुरु डॉ.राधाकृष्णन का जन्मदिन मनाया गया। लगे हाथ शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं अतिथियों द्वारा संयुक्त रूप से दीप जलाकर कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया।

इस अवसर पर भौतिकी के लोकप्रिय प्रोफेसर डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने कहा कि शिक्षक समाज का सृजनहार होता है, रक्षक-रहवर और रखवाला होता है। डॉ.कलाम को संदर्भित करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षक राष्ट्र निर्माता होता है और भविष्य द्रष्टा भी होता है। साधारण जीवन जीने वाले वाला शिक्षक ही असाधारण प्रतिभा वाले छात्रों को जन्म देता है। डॉ.मधेपुरी ने अपने गुरुओं को याद करते हुए यही कहा कि भारत के तीन राष्ट्रपति ऐसे हुए जो राष्ट्रपति होने से पहले शिक्षक के रूप में भारत रत्न से सम्मानित किए गये। वे हैं- डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन, डॉ.जाकिर हुसैन एवं डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम। वैसे शिक्षक प्रणम्य ही नहीं प्रातः स्मरणीय रहेंगे।

अंत में अध्यक्ष डॉ. केके मंडल ने बापू को संदर्भित करते हुए अपने संक्षिप्त संबोधन में यही कहा कि शिक्षक को चरित्रवान होना चाहिए तभी वह छात्रों में संस्कार भरने में सक्षम हो सकते हैं। अनुशासित शिक्षक ही अनुशासन का पाठ पढ़ा सकता है। अंत में अतिथियों के हाथों स्कूल के शिक्षकों का सम्मान करते-कराते निदेशक डॉ.श्यामल कुमार सुमित्र ने अतिथियों के स्वस्थ जीवन की कामना की और संयुक्त रूप से यही कहा कि शिक्षक दिवस पर आने वाली पीढ़ियां को आपका आशीर्वचन इसी तरह मिलता रहे, यही ईश्वर से मेरी प्रार्थना है।

मौके पर शिक्षक वरुण कुमार, सोनू निगम, मनोज कुमार सौरभ कुमार एवं शिक्षिका काजल कुमारी, सोनी कुमारी, शिवानी कुमारी, पूजा कुमारी आदि मौजूद थे।

 

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