बच्चों को पटाखों से दूर रखें !

याद करें, धनतेरस के दिन हम धनवंतरि की जयंती मनाते हैं। धनतेरस के दिन से ही पांच दिवसीय दीपावली पर्व की शुरुआत हो जाती है। वही धनवंतरी जिन्हें “फादर ऑफ़ आयुर्वेदा” कहा जाता है। वस्तुत: हमारा वास्तविक धन तो हमारा स्वास्थ्य ही है। अंग्रेजी में कहावत भी है- Health is Wealth.

भगवान धनवंतरि की जयंती मनाते हुए समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने बच्चों से यही कहा-

हम एक दूसरों के लिए भौतिक, आध्यात्मिक, मानसिक एवं भावनात्मक रूप से बेहतरीन स्वास्थ्य हेतु प्रार्थनाएं करें ना कि दिन-रात पटाखे फोड़-फोड़ कर पर्यावरण को प्रदूषित करते रहें। हैप्पी धनतेरस और हैप्पी दीपावाली कहना अब अर्थहीन सा लगने लगा है। दीपावली में कितने बच्चों की आंखें चली जाती हैं और कितनों की जानें।

इस बार दीपावली में बच्चों को संकल्प दिलायें कि हम चारो ओर अच्छाइयों का प्रकाश फैलाते रहेंगे। भले ही सर्वशक्तिमान सूरज बनकर ना सही, माटी का एक छोटा सा दीप बनकर ही सही। प्रकाश पर्व में मन के अंदर प्रकाश भरेंगे। अंदर के दुर्गुणों को दूर करेंगे। अंदर और बाहर की सफाई में जुटेंगे। स्वच्छता को अपनाएंगे। प्रदूषण दूर करने हेतु कम से कम एक पौधा जरूर लगाएंगे। मेरी मानें तो-

कुछ दीप जलाएं हम छत पर, कुछ दीप जलाएं खेतों में।श्रमदीप मगर वह सर्वोत्तम, जो फूल खिलाएं रेतों में।।

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