बिहार सरकार ने प्रदेश में कोरोना की स्थिति का जायजा लेते हुए यह तय किया है कि प्रदेश में 8 फरवरी से सभी सरकारी या निजी स्कूलों के 6 से 8 तक की कक्षाएं खुलेगी तो जरूर, परंतु प्रतिदिन प्रत्येक वर्ग में 50% बच्चे ही आएंगे।
बता दें कि जहां इस बार शत-प्रतिशत शिक्षकों को स्कूल आने की दी गई है छूट, वहीं बच्चों के स्कूल जाने के लिए अभिभावक की सहमति भी कर दी गई है जरूरी। कोरोना की नई गाइडलाइन 28 फरवरी तक प्रभावी रहेगी। मुख्य सचिव दीपक कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में ये निर्णय लिए गए हैं।
चलते-चलते यह भी कि स्कूल कोरोना की गाइडलाइन का पालन करते हुए खोले जाएंगे और स्कूल बच्चों पर दबाव नहीं बनाएंगे। स्कूल खोलने के लिए ये शर्तें आवश्यक होंगी- 1. सरकारी स्कूल के बच्चों को दिए जाएंगे दो-दो मास्क। 2. सभी स्कूल मास्क और शारीरिक दूरी के नियमों का पालन करेंगे। 3. एक बेंच पर दो से अधिक बच्चे नहीं बैठेंगे….. फरवरी के बाद आवश्यकतानुसार ढील दी जाएगी। फिलहाल महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों को 10 मार्च से खोलने की योजना बनाई जा रही है।
महात्मा गांधी की प्रतिमा पर आज दिन के 10:30 बजे प्रातः डीडीसी विनोद कुमार सिंह, एडीएम सह लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी शिवकुमार शैव, समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी, एसडीएम नीरज कुमार, एसडीपीओ अजय नारायण यादव सहित विभिन्न महकमें के अधिकारीगण व कर्मचारीगण आदि द्वारा बापू की प्रतिमा पर माल्यार्पण व पुष्पांजलि की गई।
बाद में जयकृष्ण यादव एवं विजय झा के संचालन में सर्वधर्म प्रार्थना एवं बापू के कुष्ठ निवारण हेतु संकल्पों को एडीएम शिव कुमार शैव द्वारा आगे-आगे पढ़ा गया और सभी उन संकल्पों को दोहराते गए। इसी संकल्प के साथ दो मिनट का मौन सायरन बजाकर पूरा किया गया।
राजधानी पटना के गायघाट और हाजीपुर के बीच गंगा पर महात्मा गांधी सेतु बना तो सही….. लोगों की सेवाएं भी की, परंतु वाहनों की बढ़ती संख्या के चलते पुल की स्थिति बिगड़ती रही और अब आवश्यकतानुसार नीतीश सरकार ने उसी पुल के समानांतर एक फोरलेन पुल के निर्माण की घोषणा कर दी है। इस फोरलेन पुल का निर्माण कार्य फरवरी माह से शुरू हो जाएगा।
बता दें कि यह फोरलेन 14.5 किलोमीटर लंबा होगा और इस फोरलेन पुल के निर्माण पर 1794 करोड़ से अधिक रुपए खर्च होंगे। नीतीश सरकार के पथ निर्माण मंत्री मंगल पांडे ने गायघाट परियोजना स्थल पर निरीक्षण के बाद यह घोषणा की और यह भी कहा कि फोरलेन पुल को लेकर निविदा आदि की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। उन्होंने कहा कि कार्यारंभ होने के बाद 42 महीने यानी साढ़े तीन वर्ष में पुल का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
संपूर्ण बिहार में शीतलहर से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है। कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के कारण लोगों के साथ-साथ पशु-पक्षियों को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लगातार धूप नहीं निकलने के कारण लोग घर से निकल नहीं पा रहे हैं।
बता दें कि उत्तर-पश्चिम दिशा से आ रही पर्वतीय इलाकों की ठंडी हवा के चलते मैदानी इलाकों में कपकपी की स्थिति कई दिनों से बरकरार है। लगातार भारी ठंड के कारण सूबे के 12 जिलों में भारी ठंड की को लेकर “अलर्ट” जारी कर दिया गया है। भागलपुर और पूर्णिया जिले में घने कोहरे के कारण सड़कों पर वाहनों को चलने में भी परेशानी होती है।
चलते-चलते यह भी जान लें कि पटना के अलावा सुपौल, सहरसा, अररिया, किशनगंज, गया, नालंदा, बेगूसराय, लखीसराय और नवादा आदि कई जिलों में अधिकतम तापमान सामान्य से काफी नीचे आ गया है। सूबे के अंदर मौसम विभाग के अनुसार डेहरी सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 5.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
देश में जूनियर खिलाड़ियों द्वारा विभिन्न खेलों में लगातार बेहतरीन प्रदर्शन किए जा रहे हैं। 15 साल से कम उम्र के अनेक खिलाड़ी ऐसे हैं जिन्हें भविष्य का बड़ा स्टार माना जा रहा है। इन खिलाड़ियों ने फुटबॉल, टेनिस एवं शूटिंग सहित कई खेलों में अपना लोहा मनवा लिया है, जिनसे देश ओलंपिक मेडल जीतने की उम्मीद करने लगा है।
बता दें कि मात्र 9 साल का प्रीतम ब्रह्मा गुवाहाटी सिटी एफसी बेबी लीग में खेलते हुए सर्वाधिक कीमती खिलाड़ी चुने गए हैं। प्रीतम ने फुटबॉल में अपनी टीम की ओर से 18 गोल करने के साथ 16 गोल के लिए असिस्ट भी किए थे। तभी तो लेफ्ट विंगर प्रीतम को जर्मन फुटबॉलर ‘ओजिल’ ने उनकी कला-कौशल और काबिलियत के लिए जर्सी भेजी है। लिटिल चैंप्स के बड़े कमालों को लेकर भारत आने वाले ओलंपिक में पदक जीतने की भरपूर उम्मीद कर रहा है।
मधेपुरा जिला मुख्यालय पुलिस के लिए 72वां गणतंत्र दिवस यानि सोमवार का दिन अत्यंत सराहनीय और उपलब्धि भरा रहा। मधेपुरा में डीएसपी के पद पर कार्यरत अमरकांत चौबे को उनके उत्कृष्ट कार्यो के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक के लिए चयनित किया गया।
बता दें कि भारत सरकार के केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सोमवार को डीएसपी अमरकांत चौबे को उनके सराहनीय कार्यों के लिए 72वें गणतंत्र पर राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किए जाने की घोषणा कर दी थी। अधिसूचना जारी करते ही बिहार के पुलिस महानिदेशक ने पुलिस पदक से सम्मानित होने वाले सभी 18 पुलिस पदाधिकारियों एवं पुलिस कर्मियों को उनकी वीरता व विशिष्ट सराहनीय कार्यों के लिए बधाई दी।
बता दें कि भभुआ में जन्मे एवं बनारस में शिक्षा प्राप्त किए किसान पिता मदन बिहारी चौबे व मां लीलावती के सुपुत्र अमरकांत चौबे द्वारा अपराध नियंत्रण के क्षेत्र में सतत किए गए कार्यों का यह इनाम है। सर्वप्रथम 1989 में दरोगा बने और 2016 में डीएसपी बनकर गया, नवादा, जहानाबाद एवं रोहतास जिले में सराहनीय कार्यों का निष्पादन करते हुए 2019 में मधेपुरा सदर के डीएसपी बनाए गए।
यह जानिए कि अमरकांत को 32 साल की सेवा में अपराध नियंत्रण, नक्सली उन्मूलन एवं बेहतरीन पुलिसिंग के कारण राष्ट्रपति पुलिस पदक से नवाजा गया। सदैव उत्कृष्ट कार्य करने में विश्वास रखने वाले अमरकांत चौबे को मधेपुरा के समाजसेवी -शिक्षाविद डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने राष्ट्रपति द्वारा पदक दिए जाने पर हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं दी है।
केंद्र सरकार ने 72वें गणतंत्र दिवस पर लोजपा सुप्रीमो रामविलास पासवान सहित बिहार की पांच हस्तियों को पद्म पुरस्कार हेतु नामों की घोषणा की है। ये शेष चार नाम हैं- मृदुला सिन्हा, दुलारी देवी, रामचंद्र मांझी एवं डॉ.दिलीप सिंह।
बता दें कि भारत सरकार के विभिन्न विभागों में मंत्री रहे रामविलास पासवान को मरणोपरांत पद्म भूषण सम्मान से सम्मानित किया गया है। साथ ही मृदुला सिन्हा को भी मरणोपरांत शिक्षा के क्षेत्र में काम करने के लिए पद्मश्री सम्मान दिया गया है।
जानिए कि शेष 3 जिन जीवित व्यक्तियों को पद्मश्री से सम्मानित किया गया है, वे हैं- मधुबनी पेंटिंग कला के क्षेत्र के लिए दुलारी देवी, कला के क्षेत्र के लिए रामचंद्र मांझी और भागलपुर के पीरपैंती के डॉ.दिलीप कुमार सिंह को मेडिसीन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने हेतु पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया है।
जननायक कर्पूरी ठाकुर के सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन में आडंबर और दिखावे के लिए कोई जगह नहीं थी। उन्हें प्रायः लोग उत्तर भारत का पेरियर तो कोई-कोई महात्मा फूले, शाहूजी महाराज या अंबेडकर का उत्तराधिकारी भी बताते रहे। ये बातें डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने अपने वृंदावन निवास पर स्कूली बच्चों के बीच कोरोना काल के नियमों का पालन करते हुए जननायक कर्पूरी की 98वीं जयंती मनाने के क्रम में रविवार को कहीं।
जननायक कर्पूरी के सानिध्य में रहकर उनकी सादगी से प्रभावित डॉ.मधेपुरी ने कुछ स्कूली बच्चों के बीच ‘कर्पूरी की सादगी’ विषय पर निबंध प्रतियोगिता कराई तथा प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय आए छात्रों को पुरस्कृत भी किया।
अंत में शिक्षाविद् डाॅ.मधेपूरी ने बच्चों से कहा कि जब कर्पूरी ठाकुर ने सत्ता संभाली तो उन्होंने अंग्रेजी पर ऐसा प्रहार किया कि कर्पूरी डिवीजन आज भी लोगों को याद है। बिहार में शराबबंदी भी उन्होंने ही की थी। आरक्षण के कर्पूरी फार्मूला में ही सर्वप्रथम महिलाओं के आरक्षण की चर्चा हुई थी। महात्मा गांधी की तरह जननायक कर्पूरी ने भी जीवन भर किसानों की लड़ाई लड़ी थी।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारत की आजादी के लिए सदैव प्रतिबद्ध रहे। उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अंग्रेजी हुकूमत को चकमा देकर जर्मनी पहुंचे और आजाद हिंद फौज का गठन किया। अंग्रेजो के खिलाफ लड़ने के लिए उन्होंने “जय हिंद” कोो राष्ट्रीय नारा बना दिया। नेताजी का व्यक्तित्व भारतीय युवजनों के जीवन को अर्थपूर्ण बनाने के लिए आज भी प्रेरित करता है। उक्त बातें समाजसेवी-शिक्षाविद डॉ भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने नेताजी की 125वीं जयंती के अवसर पर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण व पुष्पांजलि करने के बाद कहीं।
Samajsevi-Shikshavid Dr.Bhupendra Madhepuri addressing youths along with senior RJD leader Bijendra Prasad Yadav, ADV. Shudhanshu Ranjan, AK Sinha, Damodar Pransukhka, Umesh Kumar Om and others on the 125th Jayanti Samaroh of Neta Jee Subhash Chandra Bose at Subhash Chowk, Madhepura.
मौके पर अपने संबोधन में डॉ.मधेपुरी ने प्रखर पत्रकार रह चुके देवाशीष बोष एवं पटना हाई कोर्ट के जस्टिस रह चुके सुरेश चंद्र मुखर्जी के इस प्रतिमा निर्माण में योगदान की चर्चा करते हुए कहा- नेताजी की 125वीं जयंती को इस बार भारत सरकार ने “पराक्रम दिवस” के तौर पर मनाने हेतु 85 सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है।
समिति के लोगों द्वारा यह जानकारी दी गई कि 23 जनवरी को कोलकाता में नेताजी की जयंती ‘पराक्रम दिवस’ कार्यक्रम में भाग लेंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वहीं पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान उड़ीसा के कटक में होने वाले कार्यक्रम में भाग लेंगे, जहां नेता जी का जन्म हुआ था और गुजरात के सूरत जिले के हरिपुरा गांव में भी भव्य जयंती मनाई जाएगी, जहाँ 1938 में नेताजी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए थे।
मौके पर राजद के वरिष्ठ नेता व समाजसेवी बिजेंद्र प्रसाद यादव, उमेश कुमार ओम, एडवोकेट सुधांशु रंजन, अधिवक्ता अशोक कुमार सिन्हा, व्यापारी दामोदर प्राणसुखका, अक्षय दीप, आदित्य लल्लन यादव आदि ने भी विचार व्यक्त किए।
अंत में डॉ.मधेपुरी ने उपस्थित जनों से यही कहा कि देश के प्रथम अस्थाई सरकार के राष्ट्राध्यक्ष नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती समस्त भारत में 23 जनवरी को दिन भर समारोह पूर्वक मनाई जाएगी। ज्ञातव्य है कि उस अस्थाई सरकार को जर्मनी, जापान, चीन, कोरिया, इटली आदि कई देशों ने मान्यता भी दे दी थी। अपना बैंक और अपनी करेंसी भी नेता जी ने बना ली थी।
बिहार के मुख्यमंत्री व जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने साइकिल व पोशाक योजना लाकर लड़कियों को इस कदर जागरूक किया कि बिहार की बेटियां फाइटर विमान भी उड़ाने लगी और अब नए राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह ने महाराणा प्रताप की पुण्यतिथि पर जदयू मुख्यालय स्थित कर्पूरी सभागार में में यह कहते हुए 151 महिलाओं को जदयू की सदस्यता ग्रहण कराई कि वे बिहार के नवनिर्माण में बड़ी भूमिका निभाएंगी।
Shri RCP Singh & other JDU Leaders in Swabhiman Diwas Samaroh organised by Shri Sanjay Singh.
जदयू समाज सुधार सेनानी प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप किसी जाति नहीं बल्कि समाज के प्रणेता और उसके स्वाभिमान के रक्षक व नेतृत्वकर्ता थे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी बिहार का मान बढ़ाया और महाराणा प्रताप की तरह कभी बिहारियों के स्वाभिमान पर ठेस नहीं लगने दिया। नीतीश कुमार की नीति यही रही कि समावेशी विकास के जरिये बिहार की छवि बदलती जाय। एक ओर आत्मनिर्भर बिहार के सात निश्चय तो दूसरी ओर जल-जीवन-हरियाली जैसे अभियान से सबके चेहरे पर खुशियां छाती जाय। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष जीतेन्द्र नीरज ने की।
महाराणा प्रताप पुण्यतिथि पर बिहार जदयू के मुख्य प्रवक्ता संजय सिंह की अध्यक्षता में आयोजित एक अन्य कार्यक्रम में जदयू के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह ने कहा कि जिसके पास स्वाभिमान नहीं रहेगा, वह कुछ नहीं कर सकेगा… बिहारी जहां भी रहते हैं, स्वाभिमान के साथ रहते हैं… बिहारी भैया कहलाते हैं। स्वाभिमान दिवस के रूप में मनाए गए इस समारोह में जदयू के कई दिग्गज जुटे, जिनमें बशिष्ठ नारायण सिंह, अशोक चौधरी, संजय झा, श्रवण कुमार, नरेन्द्र नारायण यादव, कृष्णनंदन वर्मा, नीरज कुमार, लेसी सिंह, जयकुमार सिंह आदि प्रमुख हैं। इस कार्यक्रम का संचालन राणा रणधीर सिंह चौहान ने किया।