डॉ.मनीष मंडल ने ब्रेन डेड घोषित रोहित के अंगों का दान ठिकाने लगाकर मिसाल पेश की

नौंवी कक्षा के 17 वर्षीय छात्र रोहित ने बचपन में ही अपने समाजसेवी पिताश्री रवीन्द्र कुमार से प्रेरित होकर मृत्योपरांत  अंगदान करने का फैसला खुद ही लिया था। परंतु, दुर्भाग्यवश 7 मार्च को ही मुजफ्फरपुर के कांटी में हुई स्कॉर्पियो और ट्रैक्टर की दुर्घटना में रोहित बुरी तरह घायल हो गया। भले ही रोहित की जान नहीं बच सकी, लेकिन रोहित के घर वालों ने उसके अंगदान करनेवाली इच्छा की पूर्ति करने के लिए आइजीआइएमएस के अधीक्षक डॉ.मनीष मंडल से सहयोग प्राप्त कर रोहित को अमरत्व प्रदान कर दिया।

बता दें कि मृत्यु के बाद रोहित के माता-पिता ने उसके किडनी, लीवर, हृदय तथा उसकी दोनों आंखों की काॅर्निया दान करने का निर्णय लिया… जिसके फलस्वरूप जीवन-मृत्यु के बीच झूल रहे छह लोगों को नया जीवन मिलने जा रहा है यानि दो आंखें, दो किडनियाँ, एक हार्ट और एक लीवर।

जानिए कि रोहित के ‘हृदय’ को ऑर्गन ट्रांसप्लांट एक्सपर्ट की देखरेख में ग्रीन कॉरिडोर बनाकर पूरी सुरक्षा के साथ कोलकाता भेज दिया गया जहां एक बच्चे में रोहित का हार्ट ट्रांसप्लांट कर दिया गया। दो किडनियों में एक को गत बुधवार को ट्रांसप्लांट कर दिया गया और दूसरी को एक दिन बाद वेटिंग लिस्ट के मरीज के लिए जीवन बचाने हेतु रखा गया है। दोनों आंखें भी आइजीआइएमएस के आई बैंक में सुरक्षित रख दिया गया है।

यह भी कि रोहित का लीवर एक 47 वर्षीय बिहारी मूल के व्यक्ति को आइजीआइएमएस में ही लगाया गया जो नीतीश सरकार के कार्यकाल का “पहला लिवर ट्रांसप्लांट” के रूप में सदा रोहित की याद बिहार वासियों को दिलाता रहेगा। रोहित के इस अंग दान एवं डॉ.मनीष के प्रयास से छह लोगों को नई जिंदगी मिलेगी…. और समाज के दूसरे लोगों को अंगदान करने की प्रेरणा…।

चलते-चलते यह भी कि आइजीआइएमएस के अधीक्षक डॉ.मनीष मंडल द्वारा पूर्व में भी कई बार पटना ट्रैफिक पुलिस से भरपूर सहयोग ले-लेकर ग्रीन कॉरिडोर बनाते हुए जीवन दायिनी मानव अंगों को कभी कोलकाता तो कभी दिल्ली भेजा जाता रहा है। मधेपुरा के लोकप्रिय शिशु चिकित्सक डॉ.अरुण कुमार मंडल के ऐसे सपूत डॉ.मनीष मंडल के प्रति मधेपुरा के भीष्म पितामह कहे जाने वाले समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने शुभकामनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि आगे आने वाले दिनों में डॉ.मनीष बिहार का नायक ही नहीं कहलायेगा, बल्कि स्वास्थ्य कल्याण के क्षेत्र में भारत का महानायक बनेगा।

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47वीं शहादत पर याद किए गए शहीद सदानंद

एक ओर तो संसार के सभी देश चीन से निकले कोरोना वायरस से आम आवाम को सुरक्षित रखने के लिए संघर्ष कर रहा है और दूसरी ओर 1974 के जेपी आंदोलन में शहीद हुए सदानंद की 47वीं शहादत पर आंदोलन में संघर्षरत रहने वाले विजय कुमार वर्मा, डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी, इन्द्र नारायण प्रधान, जय किशोर यादव, रमन सिंह, परमेश्वरी प्रसाद निराला, उत्तम प्रसाद यादव, प्रसन्न कुमार, अनिल कुमार के साथ-साथ राजेंद्र यादव, डॉ.विजेंद्र, जयकांत, अमरेश आदि ने उस शहीद को सादगी के साथ याद किया।

बता दें कि सदर एसडीएम कार्यालय गेट के सामने 1974 के 19 मार्च को शहीद हुए सदानंद की स्मृति स्मारक पर सबों ने अपने साथ लाये पुष्पों का अर्पण किया। जेपी सेनानी विजय वर्मा ने मीडिया से कहा कि पीएम सेनानियों को ट्रेन में आने-जाने की सुविधा प्रदान करें वहीं छत्तीसगढ़ के सीएम द्वारा दिए जा रहे सम्मान पर रोक लगाए जाने को पूर्व एमएलसी ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया।

इस अवसर पर समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने कहा कि आजादी से पूर्व जहां मधेपुरा में दो शहीद हुए- एक शहीद बाजा साह और दूसरा शहीद चुल्हाय यादव, वहीं आजादी के बाद जेपी आंदोलन में मधेपुरा से मात्र एक शहीद सदानंद हुए। डॉ.मधेपुरी ने बताया कि इन तीनों शहीदों को जिन्हें भारतीय सेना में हुए मधेपुरा के 3 शहीदों के साथ “शहीद पार्क” में स्थापित किया गया है… वे सदा जिले के संघर्षशील युवाओं को आत्मरक्षा, देश की सुरक्षा एवं अन्याय के खिलाफ लड़ने हेतु प्रेरित करते रहेंगे।

चलते-चलते यह भी कि करोना के कहर को याद रखते हुए तथा प्रशासन के निर्देशानुसार 50 से अधिक लोग एक साथ इकट्ठा ना हो….. को भी ध्यान में रखते हुए 25 से 30 लोग पुष्पांजलि अर्पित करते हुए आगे-पीछे आते-जाते रहे। संपूर्ण कार्यक्रम 20 से 25 मिनट में समाप्त हो गया।

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कोरोना को हराने के लिए कोरोना से लापरवाही करो ना- डॉ.मधेपुरी

आज वैश्विक समस्या बन गया है चीन का कोरोना वायरस ! मंदी और मौत का दरवाजा खोल दिया है कोरोना वायरस ! संसार के कई देशों में कर्फ्यू लगा दिया है कोरोना वायरस ! मंदिरों में ताला लगवा दिया है कोरोना वायरस…। ये बातें कोसी आईटीआई में साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था सृजन दर्पण के अध्यक्ष व सचिव द्वारा आयोजित विचार गोष्ठी में मुख्यवक्ता के रूप में समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने कही।

बता दें कि कोरोना पर आयोजित विचार गोष्ठी में डॉ.मधेपुरी ने कहा कि दुनिया में अब तक 6705 लोगों की जान इस वायरस ने ले ली है। उन्होंने कहा कि विश्व के 195 देशों में 158 देश के 1 करोड़ 74 लाख लोग आज संक्रमित हैं।

सृजन दर्पण के अध्यक्ष डॉ.ओम प्रकाश व सचिव विकास कुमार ने कहा कि कोरोना वायरस से देश व समाज को जागरूक होना चाहिए, भयभीत नहीं। “कोरोना को हराना है…. जिंदगी को बचाना है” के साथ-साथ योग क्रियाओं की चर्चा करते हुए डॉ.एनके निराला एवं संगीत-साहित्य व कविता के माध्यम से प्रो.योगेंद्र नारायण यादव, डॉ.सिद्धेश्वर कश्यप, डॉ.विनय कुमार चौधरी एवं अन्य ने अपने विचार व्यक्त किए।

बीएन मुस्टा के महासचिव एवं सीनेटर डॉ.नरेश कुमार ने ‘सेल्फ क्वॉरेंटाइन’ पर चर्चा करते हुए कहा कि जागरूकता ही कोरोना को हटाने का महत्वपूर्ण हथियार है। इस अवसर पर शौकत अली, बैजनाथ यादव, डॉ.आलोक कुमार, प्रो.अभिनंदन, प्रो.अरुण कुमार ने विचार व्यक्त किया। मौके पर सृजन दर्पण कर्मी सुशील, पुष्पा, मनीषा, अंजलि, रूपा, रितिका, कृतिका ने मास्क लगाकर लोगों को जागरूक रहने की बातें बताई।

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एक महिला आईएएस ने पहली बार सरकारी अस्पताल में प्रसव करा कर इतिहास रचा

गोड्डा जिले के डीसी के रूप में कार्यरत महिला आईएएस श्रीमती किरण कुमारी पासी के पति श्री पुष्पेंद्र सरोज गोड्डा के पुंसिया स्थित एग्रीकल्चर कॉलेज में डीन के पद पर कार्यरत हैं। सरकारी अस्पताल में पहली बार किसी आईएएस ने प्रसव कराया है… यह संदेश समाज के लिए मील का पत्थर साबित हो रहा है।

बता दें कि आज की तारीख में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री की बात तो छोड़िए… विधायक भी अपना इलाज या ऑपरेशन अपने क्षेत्र के सरकारी अस्पताल में नहीं कराते हैं। यही कारण है कि वे इन अस्पतालों में जन सुविधाएं उपलब्ध कराने पर ध्यान नहीं देते। यदि मंत्री, विधायक या सांसद अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने लगे और सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने लगे तो धरती पर स्वर्ग उतर आएगा। तब सरकारी स्कूलों एवं अस्पतालों को ठीक होने में कितना समय लगेगा ?

जानिए कि जनहित में विकास के प्रति समर्पित डीसी किरण कुमारी पासी को अपने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर इतना गहरा विश्वास था कि उन्होंने नि:संकोच होकर गोड्डा केे ही सदर अस्पताल में अपना दूसरा शल्य प्रसव कराया। प्रसव कराने के बाद स्त्री रोग विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ.प्रभारानी प्रसाद की टीम ने डीसी को थैंक्स करते हुए यही कहा कि क्षेत्र के लिए आपके द्वारा किए गए विकास कार्यों पर आपकी गहरी विश्वास के फलस्वरूप ही शल्य प्रसव बड़ी ही आसानी से कराया जा सका।

यह भी कि दूसरा शल्य प्रसव रहने से सचेत थी मेडिकल टीम। शल्य प्रसव के बाद 48 घंटे के परीक्षण में डीसी श्रीमती पासी के साथ बालक शिशु को डॉक्टरों की मेडिकल टीम की देखरेख में सदर अस्पताल में ही रखा गया। चिकित्सक डॉ.प्रभा के अनुसार जच्चा एवं बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है।

 

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कोरोना वायरस पर बिहार सरकार की बड़ी घोषणा

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को घोषणा की कि राज्य में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों के इलाज का पूरा खर्च सरकार वहन करेगी। बिहार विधानसभा में कोरोना वायरस से बचाव को लेकर सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों के बारे में बोलते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों के इलाज पर होने वाले सारे खर्च का भुगतान मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष से राज्य सरकार करेगी। उन्होंने बताया कि अब तक राज्य में किसी भी व्यक्ति की कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि नहीं हुई है। साथ ही कहा कि कोरोना वायरस से मौत होने की स्थिति में मृतक के निकटतम संबंधी को चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में आगे कहा कि शिक्षकों और सरकारी कर्मियों को भी इस रोग के बचाव के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस से खतरे को लेकर सरकार पूरी तरह सजग है और इसके संक्रमण को रोकने के लिए लगातार कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने और इसके इलाज के लिए व्यापक स्तर पर व्यवस्था की गई है एवं सरकारी जिला अस्पतालों और चिकित्सा महाविद्यालय अस्पतालों में पृथक वार्ड और जीवन रक्षक की व्यवस्था की गई है। स्वास्थ्य विभाग को सौ अतिरिक्त वेंटीलेटर की व्यवस्था करने का निर्देश दिया है और उसपर काम शुरू हो गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के सीमावर्ती देश नेपाल और राज्य उत्तर प्रदेश में इस रोग के मामले सामने आ चुके हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के कई जिलों से विदेशों में लोगों का आना-जाना लगा रहता है जिससे यहां भी संक्रमण का खतरा बना हुआ है। उन्होंने बताया कि पटना और गया हवाई अड्डे पर प्रभावित देशों से आने वालों की सघन स्क्रीनिंग की जा रही है। साथ ही बिहार और नेपाल की सीमा पर 49 स्थानों पर आने वाले यात्रियों की सघन स्क्रीनिंग की जा रही है एवं प्रभावित देशों से आने वालों को अलग से रखने की जाने की व्यवस्था की जा रही है और इसके लिए पटना स्थित होटल पाटलिपुत्र अशोक को इसके लिए चुना गया है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि संक्रमण को रोकने के उपायों के तहत शिक्षण संस्थाओं, सिनेमा हॉल और सार्वजनिक पार्को को 31 मार्च तक बंद कर दिया गया है। माध्याह्न भोजन की राशि बच्चों के अभिभावकों के खाते में देने का निर्णय लिया गया है। साथ ही सभी प्रकार के सरकारी आयोजनों को स्थगित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि सभी सरकारी विभागों के समूह ‘ग’ और समूह ‘घ’ कर्मियों को एक दिन छोड़कर कार्यालय आने का निर्देश दिया गया है ताकि कार्यालय परिसरों में भीड़ से बचा जा सके।

बिहार विधानमंडल के बजट सत्र के आखिरी दिन नीतीश कुमार ने कहा कि इस रोग को लेकर कहीं से सभी कोई सूचना मिलने पर हमारे कार्यालय में भी लोग फोन कर सकते हैं और उसकी हम व्यवस्था करेंगे। उल्लेखनीय है कि बजट सत्र 31 मार्च तक चलना था लेकिन कोरोना वायरस के चलते समय से पूर्व ही सदन की कार्यवाही को अनिश्चित काल के लिए स्थगित करने का फैसला किया गया। कोरोना वायरयस को लेकर बिहार के 4-5 जिलों में धारा 144 लगाए जाने के बारे में बिहार विधानसभा परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि इसको लेकर निर्देश दिए गए हैं कि इसकी आवश्यकता नहीं। उन्होंने कहा कि गलतफहमी के कारण ऐसा किया गया क्योंकि यह कोई कानून व्यवस्था का मामला तो है नहीं।

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कोरोना के कहर से कोने-कोने में कोहराम

जहां कोरोनावायरस के बढ़ते संक्रमण की चिंता ने शेयर बाजार में कोहराम मचा दिया है वहीं कोरोना वायरस से बिहार को बचाने के लिए सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य के सभी स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी, कोचिंग, आंगनबाड़ी केंद्र, सिनेमा हॉल से लेकर म्यूजियम तक को भी बंद करा दिया है। मिड-डे मील की जगह उसकी राशि छात्रों-अभिभावकों के खातों में भेज दी जाएगी।

इतना ही नहीं, बिहार दिवस समारोह से लेकर पंचायत उपचुनाव और वर्ग 1 से 8 तक की परीक्षाएं भी रोक दी गई हैं। वहीं वनडे क्रिकेट रद्द किया गया तो कहीं 15 अप्रैल तक आईपीएल टाल दिया गया।  कहीं स्विमिंग पूल बंद कर दिया गया तो कहीं पार्क और जू तत्काल 31 मार्च तक आपको बंद मिलेगा।

यह भी जानिए कि स्पोर्ट्स एवं कल्चरल इवेंट्स पर ही रोक नहीं लगी है बल्कि पटना के एस के मेमोरियल हॉल, ज्ञान भवन और बापू भवन सरीखे हॉल तक की बुकिंग भी 31 मार्च तक के लिए रद्द कर दी गई है। इतना ही नहीं, सरकारी कार्यालयों में भीड़-भाड़ कम करने तक पर विचार किया जाने लगा है कि कर्मियों की उपस्थिति के मामले में अल्टरनेट व्यवस्था की जाय यानी एक दिन कुछ कर्मी आए तो दूसरे दिन दूसरे कर्मी। किसी-किसी कार्यालय के प्रधान द्वारा तो कर्मियों को घर पर ही काम करने के निर्देश दिए जा रहे हैं।

यह भी कि विश्वस्तरीय निशानेबाजी और इंडियन ओपन गोल्फ जैसी खेल प्रतियोगिताएं भी स्थगित कर दी गई हैं जबकि ओपन बैडमिंटन सहित कुछ और टूर्नामेंट का आयोजन तो दर्शकों की गैरमौजूदगी में ही किया जाएगा। ऐसे-ऐसे निर्णय इसलिए लिए जा रहे हैं कि विगत बुधवार को डब्ल्यूएचओ ने कोरोना वायरस के संक्रमण को महामारी घोषित कर दिया है। डॉक्टरों की छुट्टियां रद्द कर दी गई है। सरकार सतर्क है। लोग जागरूक रहें… सहयोग करें… डरने की जरूरत नहीं है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि पीएम, सीएम से लेकर डीएम नवदीप शुक्ला की पूरी टीम भी कोरोना वायरस के संक्रमण को लेकर चौकन्ना है, चौकस है… तभी तो बिहार दिवस के आयोजन हेतु बुलाई गई बैठक से लेकर मधेपुरा के डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम पार्क  को भी डीएम के आदेश पर बंद कर दिया गया है।

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पत्नी को उठाकर दौड़ने वाले चैंपियनशिप में 150 पति दौड़े

यह एक विचित्र खेल है जिसमें प्रत्येक पति अपनी पत्नी को उठाकर बाधाओं के बीच दौड़ लगाने वाले चैंपियनशिप में भाग लेता है। शर्त यही कि पत्नी का वजन कम से कम 50 किलो होना ही चाहिए। इस दौड़ चैंपियनशिप में विशेष सुविधा भी प्रदान की जाती है कि यदि प्रतिभागी पति को पत्नी नहीं हो तो वह इस विचित्र खेल के नियमानुसार पत्नी उधार भी ले सकते हैं।

बता दें कि ऐसे प्रत्येक प्रतियोगिता के लिए नए नियमों एवं पुरस्कारों में परिवर्तन किए जा सकते हैं। इस विचित्र खेल में विजेता को पत्नी के वजन (किलोग्राम में) का 300 से 500 गुना तक नगद भुगतान देकर पुरस्कृत किया जाता है।

यह भी जानिए कि ब्रिटेन की 300 साल की इस पुरानी रेस में अकेले नहीं बल्कि पत्नी को पीठ पर बिठाकर दौड़ने वाला चैंपियनशिप आरंभ हुआ था। विगत रविवार को डार्किंग में 400 मीटर का यह रेस आयोजित किया गया था जिसमें लगभग डेढ़ सौ यानी 150 पति दौड़े। दिलचस्प बात यह है कि रेस जीतने के लिए महिलाएं 3 महीने पूर्व से ही अपना वजन कम करने में लगी थी ताकि वह 50 किलोग्राम के करीब आ जाए।

यह भी बता दें कि इस विचित्र खेल में विजेता को ट्रॉफी के अतिरिक्त ₹15000 का पुरस्कार दिया गया। 300 साल से चलने वाली यह प्रतियोगिता बीच में बंद कर दी गई थी जिसे 13 साल पहले दोबारा शुरू किया गया। इसे पुनः शुरू करने का मकसद यही है कि लोगों को एक जगह इकट्ठा कर खुशियां बांटी जाय।

चलते-चलते यह भी जान लीजिए कि यह विचित्र खेल (वाइफ कैरेइंग रेस) फिनलैंड, अमेरिका, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, इंडिया, हांगकांग आदि के साथ-साथ अब विश्व के अन्य देशों में भी तेजी से फैलता जा रहा है।

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मधेपुरा के किसान शंभू शरण भारतीय को उत्कृष्ट व्याख्यान के लिए सम्मानित किया गया

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय एवं नेशनल मेडिसिनल प्लांट बोर्ड (नई दिल्ली) के पूर्वी जोन का CSIR द्वारा 24-28 फरवरी तक आयोजित सेमिनार सह औषधीय पौधा का अत्याधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण एवं कार्यशाला कोलकाता के यादवपुर यूनिवर्सिटी में बुलाया गया था। इस सेमिनार में बिहार, झारखंड, उड़ीसा एवं बंगाल राज्य से चयनित कर 23 किसानों को आमंत्रित किया गया था।

बता दें कि इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम का उद्घाटन यादवपुर विश्वविद्यालय कोलकाता के कुलपति प्रोफेसर सुरंजन दास ने किया। इस सेमिनार में मधेपुरा जिले से औषधीय किसान शंभू शरण भारतीय, जो बेबाकी से बात रखने के लिए सम्मानित होते रहे हैं, अकेले नहीं गए थे बल्कि उनके साथ दूसरे किसान शंकर कुमार भी आयोजन में शामिल हुए थे।

जानिए कि मधेपुरा जिले के औषधीय खेती में क्रांति लाने वाले किसान शंभू शरण भारतीय द्वारा सर्वोत्कृष्ट व्याख्यान देने के लिए भारत सरकार के सलाहकार डॉ.एन पद्माकुमार द्वारा सम्मानित किया गया तथा बेबाकी से बातों को रखने के लिए भूरि-भूरि प्रशंसा की गई। शंभू शरण ने किसानों की तालियां जमकर तब बटोरी जब उन्होंने कहा कि कोसी क्षेत्र में औषधीय खेती की अपार संभावनाएं हैं, जरूरत है किसानों को सरकार द्वारा प्रोत्साहित एवं पुरस्कृत करने की।

चलते-चलते यह भी बता दें कि इस आयोजन में विश्वविद्यालय के आला अधिकारियों के अतिरिक्त साउथ अफ्रीका के औषधीय किसान रिचर्ड हाववेस एवं क्रुक स्टोक की महत्वपूर्ण उपस्थिति रही। ऐसे अधिकारियों एवं कृषक वैज्ञानिकों को शंभू शरण भारतीय ने शतावर का चॉकलेट खिलाया जिसकी प्रशंसा सबों ने की। अंत में नेशनल मेडिसिनल प्लांट बोर्ड के जोनल डायरेक्टर डॉ.संजय वाला ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

 

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अब कोरोना से निपटने के लिए चीन ने उतारा रोबोट, सुपर कंप्यूटर और ड्रोन भी

पिछले कुछ दशकों में तकनीक को लेकर चीन ने बहुत काम किया है। यह काम चीन के विकास में दिखता भी है। फिलहाल कोरोना से मुकाबला करने के लिए चीन ने ड्रोन से लेकर सुपर कंप्यूटर तक सब कुछ झोंक दिया है। इतना ही नहीं, कोरोना से निपटने के लिए अब चीन ने रोबोट को भी उतार दिया है। बावजूद इसके यह काबू में अब भी नहीं आ पा रहा है। सचमुच यह तो चीन की तकनीक की भी परीक्षा है जहां बायोमेट्रिक हाजिरी पर भी रोक लगानी पड़ी है।

जानिए कि चीन ने सदा तकनीक को केंद्र में रखकर काम किया है। वेंचर कैपिटल फर्म क्लेनर पार्किंसन के अनुसार- दुनिया की सबसे मूल्यवान तकनीकी कंपनियों में से नौ कंपनियां चीन की ही हैं। कोरोना से मुकाबले के लिए चीन की दिग्गज तकनीकी कंपनियों ने मदद का हाथ बढ़ाया है। फिर चाहे बात इलाज ढूंढने हेतु तेजी से गणना के लिए सुपर कंप्यूटर की हो या फिर मानव से मानव के मध्य संपर्क को खत्म करने के लिए रोबोट के इस्तेमाल का हो।

यह भी जानिए कि जहां सुपर कंप्यूटर से शोधकर्ताओं को कोरोना का इलाज तलाशने में मदद मिल सकती है वहीं स्टार्टअप शंघाई टेमेराब ने वुहान में दर्जनों दवा छिड़कने वाले रोबोट उपलब्ध कराए हैं जो संक्रमण रोकने के लिए दवाओं के छिड़काव के साथ-साथ आईसीयू एवं अन्य स्थानों पर भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। कोरोना के प्रकोप को रोकने के लिए सैकड़ों ड्रोन की भी सहायता ली जा रही है तथा कमांड सेंटरों पर लगभग 200 कर्मचारी ड्रोन की निगरानी के लिए भेजा गया है। फिलहाल कोरोना प्रभावित 119 देशों में से 24 देशों में स्कूल पूरी तरह बंद है… दुनिया भर में 30 करोड़ बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं क्योंकि अब चीन से ज्यादा दूसरे देशों में कोरोना का कहर है।

बता दें कि एक महीने में ही बदल गए हालात। चीन में घट रही है संक्रमित लोगों की संख्या। दुनिया में चीन के मुकाबले 18 गुना तेजी से फैल रहा है कोरोना वायरस। डब्ल्यूएचओ द्वारा कोरोना से संक्रमितों की संख्या लाख पार होने पर दुनिया के देशों को गंभीरता दिखाने को कहा गया है। तभी तो चीन वायरस का टीका बनाने के करीब आ गया है और भारत ने जानवरों पर परीक्षण शुरू कर दिया है।

चलते-चलते यह भी कि कोरोना को लेकर मधेपुरा का स्वास्थ्य महकमा भी चौकस व चौकन्ना है। सिविल सर्जन सुभाष चंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि सदर अस्पताल में कोरोना वायरस को लेकर अलग वार्ड बनाया गया है तथा सीएचसी व पीएचसी में भी निर्देश जारी किए गए हैं। जहां ब्रिटेन में संसद भी बंद किए जाने की चर्चा है वहीं डब्ल्यूएचओ ने कोरोना को महामारी घोषित कर दिया है। विदेश से आने वाले यात्रियों के वीजा 15 अप्रैल तक केंद्र सरकार द्वारा निलंबित कर दिया गया है। जरूरी ना हो तो विदेश यात्रा से बचें….।

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आखिर ज्योतिरादित्य ने अलग कर ही ली अपनी राह

मध्यप्रदेश में आंतरिक कलह और वर्चस्व की लड़ाई की शिकार कांग्रेस आखिरकार बिखर ही गई। पार्टी के भीतर लगातार उपेक्षा के शिकार हो रहे ज्योतिरादित्य ने वहां कमलनाथ सरकार की जड़ें हिला दीं। यही नहीं, अब उनके भाजपा में जाने की खबर है। पार्टी उन्हें राज्यसभा भेज सकती है। चर्चा तो यह भी है कि राज्यसभा चुनाव के ठीक बाद उन्हें मोदी सरकार में मंत्री भी बनाया जा सकता है।

बता दें कि ज्योतिरादित्य मंगलवार सुबह करीब 10:45 बजे गुजरात भवन पहुंचे। यहां से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह उन्हें अपने साथ 7, लोक कल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री आवास लेकर गए, जहां शाह की मौजूदगी में सिंधिया की प्रधानमंत्री से करीब घंटेभर बातचीत हुई। फिर शाह की ही कार में सिंधिया गुजरात भवन लौटे। इस मुलाकात के बाद दोपहर 12.10 बजे उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफे की चिट्ठी ट्वीट कर दी, जो सोमवार, यानी 9 मार्च को ही लिख ली गई थी।

गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव के पहले कांग्रेस ने सिंधिया का प्रचार के मुख्य चेहरे के रूप में इस्तेमाल किया था, लेकिन सीएम पद की दौड़ में वे पिछड़ गए। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए भी उनका नाम आगे रहा, लेकिन पद नहीं मिला। अटकलें थीं कि वे डिप्टी सीएम बनाए जा सकते हैं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उपेक्षा का दौर यहीं नहीं रुका, खबर यह भी है कि सिंधिया ने चार इमली में बी-17 बंगला मांगा, लेकिन वह कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ को दे दिया गया। रही-सही कसर भी तब पूरी हो गई जब 14 फरवरी को टीकमगढ़ में अतिथि विद्वानों की मांगों पर ज्योतिरादित्य ने कहा कि यदि वचन पत्र की मांग पूरी नहीं हुई तो वे सड़क पर उतरेंगे। इस पर कमलनाथ ने टका सा जवाब दिया कि ऐसा है तो उतर जाएं। इसी के बाद तल्खी और बढ़ गई और इतनी बढ़ी कि मौजूदा शक्ल अख्तियार कर ली। यह भी याद दिला दें कि करीब 4 महीने पहले 25 नवंबर 2019 को ही ज्योतिरादित्य ने ट्विटर पर अपनी प्रोफाइल से कांग्रेस का नाम हटा दिया था। इसकी जगह उन्होंने स्वयं को केवल जनसेवक और क्रिकेट प्रेमी बताया था।

एक ओर पृष्ठभूमि में इतनी बातें थीं हीं। ज्योतिरादित्य के सामने एक तरह से अस्तित्व का संकट था। ऐसे में राज्यसभा चुनाव आ गया। मध्यप्रदेश की 3 राज्यसभा सीटों में से 2 पर उसके उम्मीदवारों का जीतना तय था। दिग्विजय की उम्मीदवारी पक्की थी। दूसरा नाम ज्योतिरादित्य का सामने आया। बताया जा रहा है कि यहां भी उनके नाम पर कमलनाथ अड़ंगे लगा रहे थे। इसी से ज्योतिरादित्य नाराज थे। इसके बाद 9 मार्च को जब प्रदेश के हालात पर चर्चा के लिए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी से मिलने दिल्ली पहुंचे थे, तभी 6 मंत्रियों समेत सिंधिया गुट के 17 विधायक बेंगलुरु चले गए थे। इससे साफ हो गया कि सिंधिया अपनी राहें अलग करने जा रहे हैं। बहरहाल, उनके भाजपा में शामिल होने की विधिवत घोषणा भी अब हो ही जाएगी। उधर कमलनाथ अपने तरकश से कौन-कौन से तीर निकालते हैं और कांग्रेस सरकार की डूबती दिख रही नाव को किस तरह पार लगाते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा। वैसे वे ऐसा कर पाएंगे, इस पर मौजूदा स्थिति में यकीन कर पाना मुश्किल लगता है।

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