राहुल नहीं माने, अधीर होंगे लोकसभा में कांग्रेस के नेता

पश्चिम बंगाल के बेहरामपुर से सांसद अधीर रंजन चौधरी लोकसभा में कांग्रेस के नेता होंगे। राहुल गांधी द्वारा यह पद ग्रहण करने से इनकार करने के बाद यह निर्णय लिया गया। मंगलवार सुबह इस पर लंबी रणनीतिक चर्चा के बाद यह फैसला किया गया। इस दौरान राहुल गांधी और उनकी मां व यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी भी मौजूद थीं। अधीर रंजन चौधरी के साथ-साथ केरल के नेता के. सुरेश, पार्टी प्रवक्ता मनीष तिवारी और तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर भी इस पद के लिए दौड़ में शामिल थे। लेकिन अधीर को उनके अनुभव के आधार पर लोकसभा में कांग्रेस का नेता चुना गया। वे बेहरामपुर से लगातार पांचवीं बार (1999 से लगातार) चुनाव जीतकर संसद पहुंचे हैं।

गौरतलब है कि पार्टी के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे इस बार चुनाव हार गए थे। उनके हारने के बाद लोकसभा में कांग्रेस के नेता का विकल्प देना जरूरी था। पार्टी की आम राय थी कि राहुल गांधी लोकसभा में पार्टी के नेता हों, लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष पद तक से इस्तीफे की पेशकश कर चुके राहुल इसके लिए हरगिज तैयार नहीं थे। वे इस राय पर अडिग थे कि इस पद पर नेहरू-गांधी परिवार से बाहर का कोई व्यक्ति बैठे।

बहरहाल, कांग्रेस ने अधीर रंजन चौधरी का उल्लेख करते हुए लोकसभा को पत्र लिखकर बता दिया है कि वे सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के नेता होंगे। पत्र में यह भी लिखा गया है कि वे सभी महत्वपूर्ण चयन समितियों में पार्टी का प्रतिनिधित्व भी करेंगे।

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ओम बिड़ला होंगे अगले लोकसभा अध्यक्ष

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक बार फिर पूरे देश को चौंका दिया। राजस्थान के कोटा से भाजपा सांसद ओम बिड़ला लोकसभा के अगले अध्यक्ष होंगे। इसके साथ ही इस प्रतिष्ठित पद के लिए लगाई जा रही सारी अटकलें खत्म हो गईं। गौरतलब है कि लोकसभा अध्यक्ष बनने की रेस में पूर्व केन्द्रीय मंत्री मेनका गांधी, राधामोहन सिंह, रमापति राम त्रिपाठी, एसएस अहलुवालिया और डॉ. वीरेंद्र कुमार जैसे नाम शामिल थे लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने आगे किया ओम बिड़ला का नाम। राष्ट्रपति पद के लिए रामनाथ कोविन्द का चयन हो या विदेश मंत्री के रूप में एस जयशंकर को सामने लाना, मोदी पहले भी अपने निर्णयों से चौंकाते रहे हैं।

बहरहाल, ओम बिड़ला बुधवार को लोकसभा अध्यक्ष के तौर पर नामांकन कर सकते हैं। जानकारी के मुताबिक उनके नाम का प्रस्ताव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रखा था। उनकी उम्मीदवारी को 10 पार्टियों – शिवसेना, जदयू, लोजपा, अकाली दल, नेशनल पीपुल्स पार्टी, मिजो नेशनल फ्रंट, वाईएसआर कांग्रेस, अन्ना द्रमुक, अपना दल और बीजेडी – ने समर्थन दिया है। कांग्रेस ने हालांकि समर्थन पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किया है, लेकिन वह भी उनके नाम का विरोध नहीं करेगी।

चलने से पहले बता दें कि सांसद बनने से पहले ओम बिड़ला तीन बार कोटा सीट से विधायक भी रह चुके हैं। हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में बिड़ला ने कोटा संसदीय सीट से कांग्रेस के राम नारायण मीणा को 2.5 लाख से अधिक मतों से हराया था।

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कई सीनियर नेताओं को राज्यपाल बनाएगी भाजपा !

2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के कई वरिष्ठ नेता नहीं उतरे थे। माना जा रहा था कि आने वाले समय में पार्टी उन्हें संगठन या किसी अन्य भूमिका में ला सकती है। ऐसे में चुनाव से दूर रहे भाजपा के कई नेताओं का नाम राज्यपाल पद की रेस में है। इसके पीछे वजह यह है कि वर्तमान में देश के 11 राज्य ऐसे हैं जहां के राज्यपालों का कार्यकाल अगले दो से तीन महीनों में खत्म हो रहा है। अगर इन राज्यपालों का सेवा विस्तार नहीं हुआ तो इन सभी राज्यों में नए राज्यपालों का दिखना तय है।

दरअसल इस बात की चर्चा तब शुरू हुई जब कुछ दिन पहले केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने ट्वीट कर सुषमा स्वराज को आंध्र प्रदेश का राज्यपाल बनने की बधाई दी थी। हालांकि सुषमा ने इसका खंडन किया और कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है। लेकिन इस घटनाक्रम के बाद भाजपा के कई सीनियर नेताओं को राज्यपाल बनाए जाने की चर्चा ने जोर पकड़ लिया है।

बहरहाल, जिन नेताओं के नाम राज्यपाल बनाए जाने को लेकर चर्चा में हैं उनमें मुरली मनोहर जोशी, बंडारू दत्तात्रेय, कलराज मिश्र, करिया मुंडा, भगत सिंह कोश्यारी, बिजोय चक्रवर्ती, सुमित्रा महाजन और राधामोहन सिंह जैसे नाम चर्चा में हैं। सूत्रों की मानें तो राज्यपाल बनाकर पार्टी अपने वरिष्ठ नेताओं को साधने की कोशिश में है।

जिन राज्यों के राज्यपाल का कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है, वे हैं गोवा (मृदुला सिन्हा), गुजरात (ओम प्रकाश कोहली), कर्नाटक (वजुभाई रुडा भाई वाला), केरल (जस्टिस पी सदाशिवम), महाराष्ट्र (विद्यासागर राव), नगालैंड (पद्मनाथ बालकृष्ण आचार्य), राजस्थान (कल्याण सिंह), त्रिपुरा (कप्तान सिंह सोलंकी), उत्तर प्रदेश (राम नाईक), पश्चिम बंगाल (केशरीनाथ त्रिपाठी) और आंध्र प्रदेश (में ई. एस. एल. नरसिम्हन)। गौरतलब है कि इनमें से ज्यादातर राज्यों में राज्यपालों की उम्र 70 से पार या 80 के आसपास है। ऐसे में इन्हें दोबारा मौका मिलने की संभावना नहीं दिखती। इस प्रकार नए चेहरों को मौका मिलना तयप्राय है।

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चमकी बुखार और लू से निपटने को तत्पर है सरकार

बिहार चमकी बुखार (एईएस) और हिट वेव की आपदा एक साथ झेल रहा है। सोमवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस संदर्भ में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की, जिसमें स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय समेत स्वास्थ्य विभाग के सभी आला अधिकारी मौजूद रहे। मंगलवार को हालात का जायजा लेने के लिए वे मुजफ्फरपुर जा रहे हैं। बता दें कि बिहार के मुजफ्फरपुर में अब तक चमकी बुखार से 100 से ज्यादा बच्चों की मौत हो चुकी है। बिहार सरकार इस स्वास्थ्य आपदा से जूझ ही रही थी कि बिहार में लू का कहर भी शुरू हो गया। रिपोर्ट के मुताबिक प्रचंड गर्मी और लू से बिहार में अब तक 78 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। इसमें से 35 मौतें सिर्फ गया में हुई हैं, जबकि 47 लोग औरंगाबाद में मरे हैं।

बिहार में  एईएस (एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम) यानि चमकी बुखार का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (एसकेएमसीएच) और केजरीवाल अस्पताल में 375 बच्चे एडमिट हैं। चमकी बुखार से पीड़ित मासूमों की सबसे ज्यादा मौतें मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच अस्पताल में हुई हैं। वहीं चमकी बुखार की आंच अब मोतिहारी तक पहुंच गई है, जहां एक बच्ची बुखार से पीड़ित है।

लू की बात करें तो बिहार के गया में अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज में लू के कारण मरने वालों की संख्या 35 तक पहुंच चुकी है। इनमें से 28 की इलाज के दौरान मौत हो गई तो सात को मृत हालात में ही लाया गया था। वहीं 106 मरीजों का फिलहाल इलाज चल रहा है।

गौरतलब है कि बिहार में गर्मी को लेकर रेड अलर्ट जारी कर दिया गया है। गया में गर्मी को लेकर धारा 144 लागू कर दी गई है। वहीं भीषण गर्मी के कारण 22 जून तक बिहार के सभी स्कूल बंद कर दिए गए हैं। इससे पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दोनों आपदा के सभी मृतकों के परिजनों को तत्काल चार-चार लाख रुपए अनुग्रह अनुदान देने और इन विपदाओं से जूझ रहे सभी लोगों के लिए हरसंभव चिकित्सकीय सहायता की व्यवस्था करने का निर्देश दे चुके हैं।

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मधेपुरा में मेधा की कमी नहीं

मधेपुरा में ना तो मेधा की कमी रही है और ना ही समाज सेवा में अपना बहुत कुछ न्योछावर करने वालों की कमी | यहाँ एक ओर जहाँ पटना उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति के रूप में जस्टिस आरपी मंडल, जस्टिस एससी मुखर्जी व जस्टिस के.के.मंडल ने मधेपुरा का परचम लहराया है वहीं चिकित्सा के क्षेत्र में सर्जन डॉ.अमरेंद्र कुमार यादव, डॉ.मनीष मंडल व डॉ.अरविंद सर्राफ आदि ने आमजन की सेवा में बहुत कुछ न्योछावर किया है |

बता दें कि 1981 ई. में तत्कालीन मुख्यमंत्री (बिहार) डॉ.जगन्नाथ मिश्र द्वारा मधेपुरा को जिला बनाये जाने के बाद सर्वप्रथम जिस जीवन सर्राफ के नाम वाले ‘जीवन सदन’ की दो कोठरियों में मधेपुरा के जिला कार्यालय का प्रथम डीएम श्री एसपी सेठ द्वारा कार्यारंभ किया गया था उसी जीवन सर्राफ के पौत्र शिवप्रसाद सर्राफ के घर में उनके पुत्र आनंद सर्राफ के प्रतिभावान बेटे ऋषि सर्राफ द्वारा समस्त भारत के लिए आयोजित किये गये JEE Advance परीक्षा में प्रशंसनीय रैंक हासिल कर मधेपुरा जिला को पुनः गौरवान्वित किया गया है |

यह भी जान लें कि जिला मुख्यालय मधेपुरा नगर परिषद के वार्ड न.-20 के स्थाई निवासी पिता आनंद सर्राफ व माता श्वेता सर्राफ के प्रतिभावान पुत्र ऋषि सर्राफ ने 2019 की इंजीनियरिंग की सर्वाधिक प्रतिष्ठित परीक्षा JEE में उत्कृष्ट रैंक 89 वाँ रैंक हासिल कर जिले का मान बढ़ाया है तथा पढ़नेवाले छात्रों का हौसला अफजाई किया है | ऋषि की सफलता पर संपूर्ण मधेपुरा मंत्रमुग्ध है | प्रतिभा को सम्मान देने वाले विद्वत जन ऋषि के दादा-दादी एवं माता-पिता के अलावे उसी वंश के जनसेवी एमएलसी ललन सर्राफ को भी बधाई दे रहे हैं |

चलते-चलते यह भी बता दें कि स्थानीय हॉली क्रॉस स्कूल मधेपुरा में ऋषि ने प्रारंभिक पढ़ाई पूरी कर दसवीं कक्षा की पढ़ाई DPS सिलिगुड़ी से पूरी की तथा आगे की पढ़ाई ऋषि ने हैदराबाद से की | ऋषि बचपन से ही इंजीनियर बन कर समाज में अपनी अलग पहचान बनाने की तमन्ना पाल रहा था जिसे आज उसने पंख लगा दिया है |

 

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नीति आयोग: सार्थक रही ‘टीम इंडिया’ की बैठक

शनिवार को राष्ट्रपति भवन के सांस्कृतिक केंद्र में नीति आयोग की बैठक हुई जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने की। ‘टीम इंडिया’ की इस बैठक प्रधानमंत्री ने हर भारतीय को अधिकार सम्पन्न बनाने और लोगों की जिंदगी अधिक सुगम बनाने के कार्य पर जोर दिया और देश में गरीबी, बेरोजगारी, सूखा, बाढ़, प्रदूषण भ्रष्टाचार एवं हिंसा आदि के खिलाफ सामूहिक लड़ाई का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस मौके पर अपने संबोधन में कहा कि “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” के मंत्र को पूरा करने में नीति आयोग को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है। उन्होंने आयोग की संचालन परिषद के सभी सदस्यों से सरकार का ऐसा ढांचा तैयार करने में मदद का आह्वान किया जो कारगर हो और जिसमें लोगों का भरोसा हो। सहयोगपूर्ण संघवाद के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि देश को 2024 तक 5,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन इसमें राज्यों के संयुक्त प्रयास के साथ इसे हासिल किया जा सकता है। मार्च 2019 में भारत की अर्थव्यवस्था का आकार 2,750 अरब डालर होने का अनुमान है।

देश के विकास में निर्यात की अहमियत को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने के लिये केन्द्र तथा राज्य दोनों को निर्यात में वृद्धि की दिशा में काम करना चाहिए। पूर्वोत्तर समेत कई राज्यों में निर्यात के क्षेत्र में काफी संभावनाएं हैं जिनका उपयोग नहीं हुआ है। संबोधन के दौरान उन्होंने कृषि में संरचनात्मक सुधारों को लेकर कुछ राज्यों के मुख्यमंत्रियों तथा केन्द्रीय मंत्रियों को लेकर एक उच्च अधिकार प्राप्त समिति गठित करने की घोषणा भी की।

नीति आयोग की इस महत्वपूर्ण बैठक में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चन्द्रशेखर राव को छोड़कर लगभग सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ केन्द्रीय मंत्री शामिल हुए। पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिन्दर सिंह स्वास्थ्य कारणों से शामिल नहीं हो पाए जबकि हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर जर्मनी में होने के कारण नहीं आ सके।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बैठक में अपने संबोधन और सुझावों से सबका ध्यान खींचा। उन्होंने एक बार फिर बिहार के लिए विशेष राज्य के दर्जे की मांग की और अपनी मांग के पक्ष में तमाम जरूरी तथ्य और तर्क रखे। इसके साथ ही उन्होंने केन्द्र प्रायोजित योजनाओं, आपदा अनुग्रह अनुदान एवं किसान सम्मान निधि योजना के क्रियान्वयन समेत कई मुद्दों पर महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

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सभी बुजुर्गों को पेंशन देने वाला बिहार बना पहला राज्य

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री सचिवालय, पटना स्थित ‘संवाद’ कक्ष में वृद्धजन पेंशन योजना का शुभारंभ किया। इस योजना के शुभारंभ के साथ बिहार सभी बुजुर्गों को पेंशन देने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। बता दें कि बिहार में 35 से 36 लाख ऐसे लोग हैं, जिन्हें इस योजना का लाभ मिलना चाहिए। इस योजना पर हर वर्ष राज्य सरकार की तरफ से 1800 करोड़ रुपए व्यय होंगे। इस योजना के तहत अभी तक दो लाख आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से सत्यापन के बाद एक लाख 35 हजार 928 लोगों के खाते में मार्च और अप्रैल 2019 की राशि भी ट्रांसफर कर दी गई। इस योजना के तहत 60 वर्ष से अधिक आयु के गरीब लोगों को प्रति माह 400 रुपए और 80 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को प्रतिमाह 500 रुपए मिलेंगे।

वृद्धजन पेंशन योजना के तहत डीबीटी के माध्यम से लाभार्थियों को भुगतान का शुभारंभ करने के बाद नीतीश कुमार ने अपने संबोधन में आगे कहा कि इस वर्ष 01 मार्च से इस योजना की शुरुआत की गई थी, जिसकी राशि का भुगतान आज से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पहले से गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) के परिवारों को वृद्धा पेंशन योजना का लाभ दिया जा रहा था। विधवा पेंशन, दिव्यांगजनों को पेंशन जैसी अनेक योजनाएं चलाई जा रही थीं लेकिन 60 वर्ष से ऊपर के सभी वृद्धजनों चाहे स्त्री हो या पुरुष जिन्हें केंद्र या राज्य सरकार से कोई वेतन, पेंशन, पारिवारिक पेंशन या सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्राप्त नहीं हो रहा है, उन्हें इसका लाभ देने की योजना बनाई और इसे लागू कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि इससे वृद्धजनों का अपने परिवार में सम्मान बढ़ेगा और उनकी कुछ जरूरतें भी पूरी होंगी। कितना अच्छा लगेगा जब बुजुर्ग इससे अपने पोता-पोती को चॉकलेट लाकर देंगे। इस योजना के माध्यम से कम से कम ऐसी खुशी तो हम उन्हें दे ही सकते हैं।

इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने यह व्यवस्था भी कर दी है कि जो लोग माता-पिता की उपेक्षा करेंगे उनकी खैर नहीं। एसडीओ के यहां आवेदन देने से ही कार्रवाई हो जाएगी। अपील के लिए कोर्ट जाने की आवश्यकता नहीं। अब डीएम के स्तर पर तीस दिनों के अंदर फैसला हो जाएगा। उन्होंने कहा कि अब दूसरे राज्य यह पूछ रहे हैं कि हमने यह निर्णय किस तरह से लिया। वे लोग भी ऐसा करना चाह रहे हैं।

कार्यक्रम में मौजूद वृद्धजनों से मुख्यमंत्री ने यह अपील की कि सभी लोगों को इस योजना के बारे में बताएं ताकि ताकि अधिक से अधिक संख्या में आवेदन भरे जा सकें। इस योजना के शुभारंभ के अवसर पर समाज कल्याण मंत्री रामसेवक सिंह भी उपस्थित थे। चलते-चलते बता दें कि लोक सेवा केंद्र और ऑनलाइन माध्यम से इस योजना के लिए आवेदन किया जा सकता है।

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नीतीश हमेशा बड़ी लकीर खींचने वाले सकारात्मक सोच के व्यक्ति रहे हैं- डॉ.मधेपुरी

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भारतरत्न डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम की तरह बड़े-बड़े सपने देखने और उसे अमलीजामा पहनाने में विश्वास करते हैं | नीतीश ने सपना देखा है कि दिल्ली एम्स की तरह बने और उसकी बराबरी करे बिहार का आईजीआईएमएस (इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान) भी |

बता दें कि नीतीश कुमार ने आईजीआईएमएस के निदेशक डॉ.एन.आर.विश्वास को विश्वास के साथ कहा- दिल्ली एम्स की तर्ज पर बनावें बिहार का आईजीआईएमएस… सिर्फ इलाज नहीं….. शोध की श्रेष्ठता पर भी ध्यान रहे….. इसमें जितनी राशि लगेगी वह राज्य सरकार देगी |

ये बातें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंगलवार को आईजीआईएमएस परिसर में 500 बेड के अस्पताल भवन के शिलान्यास व कार्यारंभ के मौके पर प्रेस को संबोधित करते हुए बता रहे थे-

यह भवन 6 मंजिला होगा जो 2 वर्षों में बनकर तैयार होगा और इस निर्माण पर खर्च होने वाली राशि होगी लगभग 300 करोड़……. जल्द ही 1200 बेड के एक और अस्पताल भवन का निर्माण होगा तब इसकी क्षमता 2500 बेड की हो जाएगी…… वर्तमान में इसकी क्षमता 850 बेड की है |

CM Nitish Kumar is being honoured at IGIMS in cordial presence of Central Ministers and Deputy CM.
CM Nitish Kumar is being honoured at IGIMS in cordial presence of Central Ministers and Deputy CM.

मुख्यमंत्री के हवाले से यह भी कहा गया-  दिल्ली एम्स की तरह यहाँ भी मरीजों को सेवा मिले…. इसके लिए हर स्तर पर काम हो चाहे वह आधारभूत संरचना का मामला हो अथवा विशेषज्ञों व कर्मियों की नियुक्ति का ही क्यों ना हो | ऐसी व्यवस्था व इंतजाम किए जाएं कि बिहार में सभी तरह के इलाज बेहतर तरीके से हो  | बिहार वासियों को इलाज के लिए बाहर नहीं जाना पड़े |

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद, उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी, मंत्री अश्विनी कुमार चौबे, मंगल पांडे आदि गणमान्यों की उपस्थिति में माननीय मुख्यमंत्री को संस्थान के निदेशक डॉ.एन.आर.विश्वास ने सम्मानित किया | मौके पर जहाँ केंद्रीय मंत्री रविशंकर ने कहा कि गरीबों की सेवा में सतत लगे रहने वाले पीएम और सीएम को कोटि-कोटि साधुवाद- वहीं उपमुख्यमंत्री मोदी ने आईजीआईएमएस की अपनी पहचान की चर्चा की | जहाँ केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री चौबे ने चिकित्सकों से कहा कि वे रोगियों का हृदय से स्वागत करें | वही राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने कहा कि किडनी ट्रांसप्लांट वाले मरीजों को दवाओं का खर्च मिलेगा |

चलते-चलते यह भी कि जब मधेपुरा अबतक द्वारा भारतरत्न डॉ.कलाम के करीबी रहे समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी से इस अस्पताल निर्माण के बाबत चर्चा की गई तो डॉ.मधेपुरी ने कहा कि मुख्यमंत्री ई.नीतीश कुमार सदा से ही डॉ.कलाम की तरह बड़ी लकीर खींचने वाले व बड़े-बड़े सपने देखने वाले सकारात्मक सोच वाले व्यक्ति रहे हैं | डॉ.मधेपुरी ने कहा कि वे बिहार के विकास के लिए बहुत कुछ किए भी हैं और आगे करने वाले भी हैं |

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अब प्रताड़ित माता-पिता डीएम कोर्ट में कर सकते हैं अपील- नीतीश

प्रताड़ना झेल रहे माता-पिता को अपनी शिकायत के लिए परिवार न्यायालय जाने से मुक्ति मिल गई है। पहले अपने बच्चे-बच्चियों व निकट संबंधियों से प्रताड़ित होने वाले माता-पिता को परिवार न्यायालय में जाना पड़ता था।

बता दें कि नीतीश सरकार ने अनुभव किया तथा कानूनविदों से राय लेने के बाद परिवार न्यायालय से अपील की सुनवाई करने का अधिकार स्थानांतरित कर जिलाधिकारी को सौंप दिया है। राज्य कैबिनेट द्वारा लिया गया यह फैसला गत मंगलवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में पारित किया गया। अब प्रताड़ित होने वाले माता-पिता व वृद्धजन प्रताड़ना को लेकर जिलाधिकारी के पास अपील कर सकते हैं।

यह भी जानिए कि समाज कल्याण विभाग द्वारा लाए गए इस प्रस्ताव को नीतीश सरकार ने माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक का भरण-पोषण व कल्याण अधिनियम 2007 के आलोक में गठित अपील अधिकरण के अध्यक्ष अब जिला पदाधिकारी को बनाने की मंजूरी दे दी है।

कैबिनेट की बैठक समाप्ति के बाद कैबिनेट सचिव संजय कुमार एवं समाज कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अतुल प्रसाद ने मधेपुरा अबतक को बताया कि यह कानून पहले से ही है। इस कानून में माता-पिता एवं वरीय नागरिकों के भरण पोषण व सुरक्षा की जिम्मेदारी संतान / निकटतम संबंधी द्वारा नहीं निभाने पर अनुमंडल स्तर पर एसडीओ की अध्यक्षता में गठित ट्रिब्यूनल में आवेदन दे सकते हैं। वहां के फैसले का पालन नहीं होने पर प्रताड़ित माता-पिता को जिले के परिवार न्यायालय में अपील के लिए जाना पड़ता था। परंतु 2007 से अब तक कोई प्रताड़ित माता-पिता व वृद्धजन कोर्ट की चक्कर से भयभीत होकर ना तो अदालत जाने का साहस जुटा पाते थे और ना ही इस कानून का लाभ  उठा पाते थे…. इसे देखते हुए कानूनविदो से राय लेकर… जिलाधिकारी के पास अपील करने वाले प्रस्ताव को इसलिए मंजूरी दी गई कि डीएम के पास कोई भी वरीय नागरिक सरलता से पहुंच सकता है तथा अपनी बात रख सकता है।

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आरबीआई के निर्देश पर ऑनलाइन पैसा भेजना अब होगा नि:शुल्क

ऑनलाइन पैसे भेजने यानि लेनदेन के लिए तीन तरीकों का इस्तेमाल होता है | ये तीन तरीके हैं- (1) आरटीजीएस (2) एनईएफटी और (3) आईएमपीएस | फिलहाल उपर्युक्त दो तरीकों से पैसा भेजने के बाबत सेवा-शुल्क को समाप्त करने की स्वीकृति पर आरबीआई ने सहमति दे दी है |

बता दें कि आईएमपीएस यानि तीसरे तरीके पर आरबीआई ने चुप्पी लगा दी है | आईएमपीएस यानि इमीडिएट मनी पेमेंट सर्विस भी एक प्रणाली है- तत्काल पैसा भुगतान सेवा…… इस सेवा का शुल्क एनईएफटी से अधिक होता है | आईएमपीएस का इस्तेमाल सिर्फ दो लाख रूपये तक के लेनदेन के लिए होता है |

अब स्पष्ट रूप से यह भी जान लें कि आरबीआई ने RTGS (रियल टाइम ग्रॉस सेटेलमेंट सिस्टम) एवं NEFT (नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर) के जरिये पैसे भेजने पर ग्राहकों को लगने वाली शुल्क को समाप्त करने की घोषणा कर दी है | साथ ही सभी बैंकों को इसका लाभ ग्राहकों को देने को कहा है | माना जा रहा है कि आरबीआई के निर्देश पर सभी बैंक जल्द ही इन दोनों माध्यमों से पैसा भेजने पर लगने वाले शुल्क को खत्म कर देंगे |

अंत में यह भी जान लें कि तत्काल दो लाख रुपये से अधिक की राशि दूसरे खाते में भेजने के लिए RTGS का उपयोग किया जाता है और दो लाख से कम राशि भेजने के लिए NEFT का इस्तेमाल होता है | इन दोनों जरिये से पैसे के लेनदेन पर अलग-अलग बैंक अलग-अलग शुल्क लेते है |

चलते-चलते यह भी बता दें कि जहाँ आरटीजीएस प्रणाली के तहत बड़ी राशि भेजी जाती है जिसे 30 मिनट के भीतर प्रत्येक बैंक द्वारा इस राशि को निर्देशित खाते में हस्तांतरित करना पड़ता है, वहीं दो लाख तक की राशि एनईएफटी के जरिये सोमवार से शुक्रवार तक 8:00 बजे सुबह से 7:00 बजे शाम तक एवं शनिवार को 8:00 बजे सुबह से 1:00 बजे दिन तक पैसे भेजे जा सकते हैं |

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