बेटियाँ बोझ नहीं, जिन्दगी का दूसरा नाम होती है

भारतीय समाज में बेटियों के प्रति लोगों की मानसिकता सर्वाधिक क्रूर हो चुकी है। धारणा यहाँ तक बन गयी है कि बेटियाँ परिवार के लिए बोझ होती है। बेटियाँ सिर्फ लेने के लिए होती है, देने के लिए नहीं। तभी तो अधिकांश परिवारों में बेटियों को बासी और बेटों को ताजा भोजन परोसा जाता है। बेटा को अच्छे पोशाक के साथ अच्छे स्कूलों में पढ़ने के लिए भेजा जाता है।

बता दें कि समाज में बेटी के महत्व को लेकर लोगों को जागरुक करने तथा लिंगानुपात के अंतर को पाटने हेतु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ सामाजिक योजना की शुरुआत 2015 के 22 जनवरी को की। इस योजना के लागू होते ही नन्ही-मुन्नी बेटियाँ क्या कहने लगी है अपने पापा से-

चलते-चलते थक गई….. कंधे पे बिठा लो ना पापा !

अंधेरे से डर लगता है….. सीने से लगा लो ना पापा !

अब स्कूल पूरा हो गया….. कॉलेज में पढ़ने दो ना पापा !

धरती पर बोझ नहीं होती बेटियाँ…. दुनिया को समझा दो ना पापा !

ये समझाने की नहीं, बल्कि गहराई में उतर कर महसूसने की बातें हैं। हाल ही में कोलकाता की 19 वर्षीय राखी दत्ता नाम की बेटी अपने पिता के लीवर की गंभीर बीमारी का इलाज कराते-कराते थक चुकी थी। जब कोलकाता के डॉक्टरों द्वारा इलाज करने की पूरी कोशिश नाकामयाब हो गई तो वह बेटी राखी अपने पिता को लेकर हैदराबाद के एआईजी (Asian Institute of Gastroenterology) अस्पताल चली गई।

यह भी जान लीजिए कि जांचोपरांत वहाँ के सभी डॉक्टरों ने एक स्वर से यही कहा कि इस मरीज की लंबी आयु के लिए केवल और केवल लीवर ट्रांसप्लांट ही करना होगा। यह सुनते ही बेटी राखी ने तुरंत हाँ कर दी। सारी औपचारिकताओं को पूरी करने के बाद राखी दत्ता ने अपने पिता को 65% लीवर डोनेट कर उन्हें दूसरी नई जिंदगी दे दी……। तब से जितने लोगों ने यह कहानी सुनी….. सबों ने एक स्वर से यही कहा- “बेटियाँ बोझ नहीं….. जिंदगी का दूसरा नाम होती है।”

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मधेपुरा जिले में शत-प्रतिशत मतदान कराने हेतु प्रशासनिक पहल

संपूर्ण जिले में लोकसभा चुनाव में 9579 पंजीकृत दिव्यांग मतदाताओं के लिए कुल 102 दिव्यांग बूथ बनाये गये हैं। दिव्यांग मतदाताओं को सरकारी स्तर पर हर प्रकार की सुविधा दिये जाने की व्यवस्था की गई है ताकि शत-प्रतिशत दिव्यांग मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर सके।

बता दें कि मधेपुरा जिले के आलमनगर विधानसभा में 22 दिव्यांग बूथ, बिहारीगंज विधानसभा में 34 दिव्यांग बूथ, सिंहेश्वर विधानसभा में 34 दिव्यांग बूथ एवं मधेपुरा विधानसभा में 12 दिव्यांग बूथ चिन्हित किये गये हैं। इन सभी चिन्हित 102 मतदान केंद्रों पर रैंप की व्यवस्था की गई है। साथ ही व्हील चेयर के अतिरिक्त पेयजल, बिजली एवं शौचालय की भी व्यवस्था की गई है।

यह भी बता दें कि इन दिव्यांग बूथों पर दिव्यांग एवं वृद्ध व लाचार मतदाताओं के सहायतार्थ स्काउट एवं एनसीसी कैडेट तैनात रहेंगे। जिला स्काउट एंड गाइड के जिला आयुक्त जयकृष्ण यादव ने कहा कि जिला प्रशासन ने स्काउट एंड एनसीसी कैडेटों के बेहतर कार्यों को देख देखकर उन्हें दिव्यांग बूथों पर तैनात करने का निर्देश दिया है। उन्होंने जानकारी दी कि दिव्यांग व वृद्ध एवं लाचार मतदाताओं की सहायता के लिए स्थानीय केशव  कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय में स्काउट एण्ड एनसीसी कैडेटों को विधिवत ट्रेनिंग देने हेतु प्रशिक्षण शिविर का भी आयोजन किया गया।

जिला आयुक्त श्री यादव ने मधेपुरा अबतक से कहा कि चुनाव के दिन यानि 23 अप्रैल को सभी प्रशिक्षित कैडेट अपने-अपने गणवेश में सभी चिन्हित बूथों पर तैनात रहेंगे। सभी को चुनाव विभाग द्वारा निर्गत परिचय-पत्र दिया जाएगा। इन प्रशिक्षित कैडेटों का काम होगा – दिव्यांगों को बूथ पर लाना ,बैठाना, पानी पिलाना…… मतदान कराकर वापस सही सलामत भूत से बाहर वाहन तक पहुंचाना। डीएम नवदीप शुक्ला (IAS) ने हेल्पलाइन नंबर 1950 जारी किया है जिसके जरिये दिव्यांग मतदाता मतदान संबंधी अन्य आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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विश्व धरोहर दिवस की शुरुआत कब से और क्यों जरूरी है ?

सर्वप्रथम ट्यूनीशिया में इंटरनेशनल काउंसिल आफ माउंटेंस एंड साइट द्वारा आयोजित एक संगोष्ठी में 18 अप्रैल 1982 को विश्व धरोहर दिवस मनाने का सुझाव दिया गया, जिसे कार्यकारी समिति द्वारा सर्वसम्मति से मान लिया गया। अगले वर्ष 1983 के नवंबर में यूनेस्को सम्मेलन के 22वें सत्र में यह प्रस्ताव पारित कर दिया गया कि अब प्रतिवर्ष 18 अप्रैल को विश्व धरोहर दिवस मनाया जायेगा यानी 18 अप्रैल 1984 से अब तक प्रतिवर्ष 18 अप्रैल को World Heritage Day मनाया जाता है।

बता दें कि अबतक संसार में लगभग 1052 स्थलों को विश्व विरासत स्थल घोषित किया जा चुका है। इनमें इटली की 49, चीन की 45, स्पेन की 44, फ्रांस व जर्मनी की 38 और भारत की 35 धरोहरें शामिल हैं- जिनमें प्रमुख भारतीय धरोहरें हैं- ताजमहल, आगरा का किला, अजंता की गुफाएं, सांची का बौद्ध स्मारक, एलोरा की गुफाएं, खजुराहो, हुमायूं का मकबरा, बोध गया मंदिर, लालकिला, नालंदा विश्वविद्यालय आदि।

यह भी बता दें कि जब 15 जुलाई 2016 को यूनेस्को ने प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के अवशेष को वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल किया तो विश्व के प्रथम विश्वविद्यालय नालंदा की खोई प्रतिष्ठा को नई ऊंचाई मिल गयी। विश्व धरोहर में शामिल होने वाली यह भारत की 33वीं धरोहर है।

जानिए कि इस नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना 450 ई. के आस-पास गुप्त वंश के शासक कुमार गुप्त ने की थी…… 12वीं शताब्दी तक यह दुनिया का पहला आवासीय अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय बना रहा और इसमें दुनिया भर के 10 हज़ार छात्र रहकर शिक्षा ग्रहण करते रहे।

800 वर्षों तक शिक्षा दान का केन्द्र बना यह विश्वविद्यालय नालंदा जिसे तुर्क आक्रमणकारी बख्तियार खिलजी द्वारा जला दिया गया। वहाँ के पुस्तकालयों में इतनी पुस्तकें थी कि 6 महीने तक आग सुलगती रही, बुझ नहीं पायी। पांचवी से बारहवीं शताब्दी में नालंदा बौद्ध शिक्षा का प्रमुख केंद्र बना रहा। लाल ईंट से बनी प्रार्थनालय वाली इमारतें आज भी सुरक्षित हैं | परंतु, वहाँ एक अदद अच्छा सा होटल तक पर्यटकों के लिए उपलब्ध नहीं है….. और आगे………।

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मधेपुरा जिले के 9579 पंजीकृत दिव्यांग मतदाता वोट डालेंगे

मधेपुरा जिले के 6700 पुरुष एवं 2879 महिला यानी कुल मिलाकर 9579 दिव्यांगों की पहचान कर सूचीबद्ध किया जा चुका है। इस बाबत सभी मतदान केंद्रों पर रैंप की व्यवस्था की गई है। साथ ही व्हील चेयर के अतिरिक्त पेयजल, बिजली व शौचालय की भी व्यवस्था है।

यह भी बता दें कि नि:शक्त जनों को सहज मतदान कराने में सहयोग के लिए वालंटियर की भी प्रतिनियुक्ति की गई है। और हाँ ! 18 वर्ष से कम उम्र वाले इन वॉलिंटियर्स को प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जाएगी।

यह भी जान लें कि प्रत्येक प्रखंड में नि:शक्त मतदाताओं यानी दिव्यांगों के लिए वाहन की भी व्यवस्था की गई है जिसे मांग के अनुसार उपलब्ध कराया जाएगा। लोकसभा चुनाव 2019 में दिव्यांग जनों द्वारा सहज रूप से भागीदारी किया जा सके……. इस बाबत चुनाव आयोग के निर्देशानुसार तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा चुका है।

मधेपुरा समाहरणालय के सभागार में मंगलवार को राज्य नि:शक्तता आयुक्त डॉ.शिवाजी कुमार ने निर्वाचन आयोग द्वारा दिव्यांगों को मिलने वाली सुविधाओं की तैयारी की गहन समीक्षा की। समीक्षा के दरमियान आयुक्त डॉ.कुमार ने मधेपुरा अबतक को बताया कि पहली बार ईवीएम में ब्रेल लिपि की व्यवस्था की गई है ताकि जो आँख से नहीं देख सकते हैं वैसे नेत्रहीन दिव्यांग भी वोट डाल सके। ऐसे दिव्यांग की पहचान करें जिन्हें आइकॉन बनाया जा सके।

यह भी जान ले कि वोटिंग के दौरान ग्रीन चैनल के माध्यम से उन्हें बिना पंक्ति में लगाये….. सीधा मतदान करने की विशेष सुविधा प्रदान की गई है। यह भी तय किया गया है कि पहली बार वोट डालने वाले सभी दिव्यांगों को सम्मान-पत्र प्रदान किया जाएगा।

और हाँ ! मानसिक और बौद्धिक रूप से दिव्यांगों को उनके माता-पिता या कानूनी अभिभावक के सहयोग से मतदान की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। बैठक में डीडीसी, पीजीआरओ, सिविल सर्जन, डीईओ, डीसीएलआर, डीपीआरओ रजनीश कुमार, उप-निर्वाचन पदाधिकारी पवन कुमार, डीपीओ गिरीश कुमार आदि उपस्थित थे।

चलते चलते यह भी बता दें कि वैसे दिव्यांग मतदाता जो मतदान केंद्र पर आने में असमर्थ हैं उन्हें पोस्टल बैलेट उपलब्ध कराया जाएगा, साथ ही हेल्पलाइन नंबर- 1950 के जरिये दिव्यांग मतदाता मतदान से संबंधित किसी भी प्रकार की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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मधेपुरा जिला अधिवक्ता संघ का 7वाँ द्विवार्षिक चुनाव संपन्न

मधेपुरा बार एसोसिएशन का सातवां द्विवार्षिक चुनाव सोमवार को भारी गहमागहमी के बीच शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया | कुल 21 पदों के लिए हो रहे चुनाव में कुल 37 प्रत्याशी मैदान में थे जिसमें दो प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हुए यानी चुनाव में तब 19 पद के विरुद्ध कुल 35 प्रत्याशी ही मैदान में रहे |

बता दें कि कुल मतदाता 493 को 19 पदों के विरुद्ध खड़े 35 प्रत्याशियों में से चुनने हेतु 5 मतदान केंद्र बनाये गए थे जिसमें प्रत्येक बूथ पर 100 मतदाताओं द्वारा मतदान करने की व्यवस्था की गई थी | कुल 480 वोटरों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया यानी कुल 97.36% मतदाताओं ने वोट डाले | ये सारे जागरूक मतदाता सवेरे से मतदान को लेकर उत्सुक दिखे |

यह भी बता दें कि सुबह से ही सारे अधिवक्ता मतदाता संघ भवन में बनाये गये मतदान केंद्रों पर पहुंचने लगे और वोट डालने की होड़ सी लगी रही | यह भी कि जूनियर अधिवक्ता द्वारा अपने सिनियरों को मतदान करने या कराने में वरीयता का ध्यान हमेशा रखा जाता था | यूँ तो 12:00 बजे तक मतदान संपन्न होने के बावजूद अपराह्ण 3:00 बजे से मतों की गिनती शुरु हुई और देर शाम तक गिनती होती रही |

अधिवक्ता संघ के जिला निर्वाची पदाधिकारी सह वरीय अधिवक्ता अजय कुमार सहाय वर्मा ने मधेपुरा अबतक को बताया कि मतदान बिना किसी शिकायत के शांतिपूर्ण एवं निष्पक्ष वातावरण में संपन्न हुआ | पर्यवेक्षक राजकिशोर यादव, सोहन झा एवं विनोद कुमार सिंह की निगरानी में अध्यक्ष सचिव एवं कोषाध्यक्ष सहित 19 पदों के लिए खड़े 35 प्रत्याशियों को डाले गये मतों की गणना भी की गई | सारे कार्यों को संघ के मॉडल रूल के तहत किया गया…… चाहे वोटर लिस्ट प्रकाशन…… नाम सुधार…… पर्चा दाखिल करना या नाम वापस लेना अथवा पीठासीन/पर्यवेक्षक/गणक की नियुक्ति ही क्यों ना हो |

चलते-चलते यह भी बता दें कि इस बार भी चुनाव मैदान में अध्यक्ष पद के लिए खड़ी आर्या दास द्वारा नाम वापस लेने पर एक ही महिला उम्मीदवार सीमा कुमारी मैदान में बच गई | हालांकि अध्यक्ष चयनित हुए पुलकित यादव, प्रधान सचिव संजीव कुमार और कोषाध्यक्ष सदानंद यादव |

तीन उपाध्यक्ष चुने गये- गजेंद्र प्रसाद यादव, अशोक कुमार झा एवं शशि भूषण | संयुक्त सचिव के पद पर जिन तीन का चयन हुआ वे हैं – जय नारायण यादव, विजय कुमार और संतोष मानव | सहायक सचिव के रूप में तीन आये- रविंद्र कुमार मंडल, सीमा कुमारी एवं नवीन कुमार |

अंकेक्षक के 2 पदों पर अभिनंदन यादव और धरणीधर सिंह दोनों को निर्विरोध चुन लिया गया था और शेष कार्यकारिणी सदस्यों के नामों की घोषणा निर्वाचित पदाधिकारी द्वारा कर दी गयी |

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अब बाबा विशु के समाधि स्थल पर लगने लगा है चार दिवसीय राजकीय मेला

मधेपुरा जिले के चौसा प्रखंड मुख्यालय से 8 किलोमीटर दक्षिण लौआलगान पूर्वी पंचायत के पचरासी में लोकदेव बाबा विशु राउत का समाधि स्थल है जहां 425 वर्षों से 14-17 अप्रैल यानी चार दिवसीय मेला लगता है। जानिए कि पचरासी बहियार स्थित पशुपालकों के लोकदेव बाबा विशु की समाधि स्थल पर अब नीतीश सरकार ने कई वर्षों से 4 दिवसीय मेला को राजकीय मेला घोषित कर दिया है।

बता दें कि अब इस मेले में बिहार के कोने-कोने से आये श्रद्धालुओं के अलावा झारखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, नेपाल, भूटान आदि से भी भारी संख्या में लोग आने लगे हैं। इस मेले में प्रत्येक दिन कम से कम एक लाख पशुपालक कच्चे दूध का दुग्धाभिषेक करते हैं।

यह भी बता दें कि सर्वोच्च मेला समिति, चरवाहा कल्याण संघ और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने मधेपुरा अबतक को बताया कि रविवार को अहले सुबह 2:00 बजे से ही समाधि स्थल का कपाट खोलकर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ समाधि की पूजा की गई तत्पश्चात कपाट खुलते ही हजारों भक्तों की लंबी कतार दुग्धाभिषेक करने के लिए आगे खिसकने लगी।

सर्वोच्च मेला समिति के सदस्यों के अनुसार मेला को राजकीय मेला घोषित किये जाने के बाद यहाँ की व्यवस्था दिन प्रतिदिन सुदृढ़ होती जा रही है। दूध को सुरक्षित रखकर खीर बनाकर प्रसाद वितरण की व्यवस्था की जाएगी। फिलहाल चढ़ाए गये दूध को प्रसाद के रूप में आस-पास के 25-30 गांवों के बड़े और बच्चे ले जाते हैं। फिर भी 20% दूध को बहने से कोई रोक नहीं पाता है। समाधि स्थल पर गिरती दूध की अविरल धारा से बाल्टी व टिन में दूध भर कर ले जाने वालों कि जहां दिनभर भीड़ लगी रहती है वहीं श्रद्धालुओं द्वारा दुग्धाभिषेक के साथ-साथ बताशा और गांजा भी चढ़ावे में जाते हैं। पहले दिन लगभग सवा लाख श्रधालुओं द्वारा ढाई लाख लीटर दूध से अभिषेक किया गया माना जाता है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि इस बार लोकसभा चुनाव को लेकर जारी किये गये आचार संहिता के चलते बड़े नेताओं व जनप्रतिनिधियों का आगमन नहीं हुआ। पुलिस-प्रशासन एवं स्थानीय वॉलिंटियर्स भीड़ एवं व्यवस्था को संभालने में जुटे हैं।

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वाराणसी में मोदी बनाम प्रियंका की संभावना !

राजनीति के गलियारे में इन दिनों एक चर्चा काफी जोर पकड़ रही है कि कांग्रेस की नवनियुक्त महासचिव प्रियंका गांधी वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ सकती हैं। जी हाँ, कांग्रेस के सूत्र कह रहे हैं कि इसे लेकर पार्टी में अभी कोई फैसला नहीं हुआ है, लेकिन प्रियंका चुनाव लड़ने के लिए तैयार हो चुकी हैं।

बात जहां तक कांग्रेस पार्टी की है तो वह भले ही इस मुद्दे पर अभी आधिकारिक तौर पर कुछ कहने को तैयार नहीं हो लेकिन इस बात पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है, इसमें कोई दो राय नहीं। पार्टी में ऐसा मानने वालों की कमी नहीं कि प्रियंका अगर वाराणसी से चुनाव लड़ती हैं तो मोदी को वहां घेरा जा सकता है। इसके पीछे दो तर्क दिए जा रहे हैं – पहला यह कि इस बार मोदी लहर जैसी कोई बात नहीं है और दूसरा यह कि पिछले चुनाव में करीब चार लाख वोट मोदी के खिलाफ लड़ रहे प्रत्याशियों में बंटे थे। अब अगर कांग्रेस को सपा और बसपा का सहयोग मिलता है तो मोदी को कड़ी चुनौती दी जा सकती है।

गौरतलब है कि पिछले चुनाव में वाराणसी से चुनाव जीते भाजपा उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी को 5,81,022 वोट मिले थे जबकि आप के अरविन्द केजरीवाल को 2,09,238 मत। वहीं कांग्रेस को यहां 75,614, बसपा को 60,579 और सपा को 45,291 मत हासिल हुए थे। कांग्रेस की सोच यह है कि अगर भाजपाविरोधी इन सारे मतों को एक जगह कर दिया जाए तो मोदी को न केवल कड़ी टक्कर दी जा सकती है बल्कि प्रियंका गांधी के व्यक्तित्व और नेहरू-गांधी परिवार का आकर्षण भी साथ में जोर दिया जाए तो चौंकाने वाला परिणाम भी मिल सकता है।

बहरहाल, ये सारे समीकरण अपनी जगह हैं। कांग्रेस और खासकर प्रियंका गांधी सीधे मोदी को चुनौती देने का मन बना पाते हैं या नहीं, यह देखने की बात होगी।

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मधेपुरा का दोनों चुनाव मॉडल रूल के अनुरूप होगा

मधेपुरा में आजकल सवेरे से ही दोनों चुनावों की चर्चा में गर्माहट आने लगती है। एक ओर 15 अप्रैल को होने वाले मधेपुरा अधिवक्ता संघ के चुनाव की सरगर्मी प्रातः 6:00 बजे से ही कोर्ट में परवान चढ़ने लगती है तो दूसरी ओर 23 अप्रैल को होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर प्रत्याशियों की प्रचार गाड़ियों से ध्वनि विस्तारक यंत्र द्वारा प्रस्फुटित गगनभेदी आवाज निकलने लगती है।

बता दें कि मधेपुरा लोकसभा चुनाव एवं मधेपुरा जिला अधिवक्ता संघ चुनाव को लेकर गहमागहमी तेज हो गई है। जहाँ जिला अधिवक्ता संघ के 21 पदों पर चुनाव होना है जिसके विरुद्ध कुल 37 अधिवक्ता प्रत्याशी चुनाव मैदान में खड़े हैं वहीं मधेपुरा लोकसभा क्षेत्र से एक सांसद पद के लिए चुनाव होना है जिसके निमित्त 13 प्रत्याशी चुनाव मैदान में डटे हैं।

यह भी जान लें की अधिवक्ता संघ चुनाव के निर्वाची पदाधिकारी अधिवक्ता अजय सहाय वर्मा और लोकसभा चुनाव के निर्वाचित पदाधिकारी डीएम नवदीप शुक्ला दोनों के दोनों चुनाव को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने को लेकर कृत संकल्पित हैं तथा पूरी तरह कटिबद्ध हैं। कहीं से भी कोई भेदभाव या किसी प्रकार के पक्षपात की कोई संभावना नहीं है।

यह भी बता दें कि मधेपुरा अधिवक्ता संघ के निर्वाची पदाधिकारी अजय सहाय वर्मा द्वारा संघ के 493 अधिवक्ता मतदाताओं सहित 14 पीठासीन सह गणक घोषित पदाधिकारियों को जानकारी दी गई कि 15 अप्रैल को सुबह 7:00 बजे से 12:00 बजे दिन तक अधिवक्ता संघ परिसर में बनाये गये 3 मतदान केंद्रों पर मतदान किये जाने हेतु सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है। मतदान के तुरंत बाद मतगणना होगी और विजयी उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी जायेगी।

चलते-चलते यह भी कि इस अधिवक्ता संघ चुनाव में सहायक निर्वाचक पदाधिकारी की भूमिका में लाल बहादुर सिंह एवं मुख्य प्रशिक्षक की भूमिका में राजेन्द्र कुमार ने सभी 14 पीठासीन सह गणक पदाधिकारियों को चुनाव व मतगणना से संबंधित नियमों व शर्तों की विशेष जानकारियाँ दे दी है।

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दिनभर प्रथम चरण की 4 सीटों पर मतदान, शाम में चैती छठ का अर्घ्यदान

जहाँ एक ओर लोकसभा चुनाव- 2019 के महासंग्राम के सात चरणों में होने वाले मतदान के प्रथम चरण का मतदान 11 अप्रैल (गुरुवार) को दिनभर बिहार की 4 सीटों- गया, नवादा, औरंगाबाद और जमुई में मिलाजुला कर शांतिपूर्वक चलता रहा वहीं लोक आस्था के महापर्व चैती छठ का अनुष्ठान सूबे बिहार में संध्या अर्घ्य के साथ संपन्न होता रहा।

बता दें कि बुद्ध और महावीर की इस पावन धरती पर इन दोनों महापर्वों का उत्साह चरम पर रहा। बिहार की इन 4 सीटों पर 2014 के लोकसभा चुनाव की तुलना में 2.27 फ़ीसदी अधिक वोट पड़े….. वह भी तब जब दिनभर सूरज की तपिश के कारण थर्मामीटर का पारा 37 से 39 डिग्री सेल्सियस के बीच नाचता रहा। छठ व्रतियों ने पहले लोकतंत्र के महापर्व में सम्मिलित होकर मतदान किया और बाद में लोक आस्था के छठ महापर्व में समर्पित होकर अस्ताचलगामी सूर्य को शाम में अर्घ्यदान किया।

ध्यातव्य है कि गुरुवार (11 अप्रैल 2019) को बिहार दो महान पर्वों का साक्षी बना-  (1) लोकतंत्र का महापर्व – लोकसभा चुनाव का मतदान और (2) लोक आस्था का महापर्व चैती छठ का अनुष्ठान। जमुई में तो सूर्योदय के साथ ही मतदाता बूथ की ओर जाने लगे…… दिन भर वोट पड़े…… और शाम ढलते ही मतदातागण भगवान सूर्यदेव को अर्घ्य देने घाटों की ओर निकल पड़े। जमुई में कड़ी सुरक्षा के बीच 54% वोट डाले गये। फिर भी जहाँ पिछले चुनाव की अपेक्षा जमुई शहरी क्षेत्र में मतदान का प्रतिशत कम रहा वहीँ नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी चुनाव के प्रति मतदाताओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।

जहाँ गया के अधिकांश शहरी बूथों पर सशस्त्र महिला बटालियन की तैनाती देखी गयी, वहीं नवादा संसदीय क्षेत्र के कई बूथों पर ईवीएम में गड़बड़ी के कारण मतदान की शुरुआत विलंब से हुई….. साथ ही यह कि औरंगाबाद के सदर प्रखंड के बेली गांव के मतदाताओं द्वारा वोट के बहिष्कार करने के बावजूद पिछली बार की तुलना में लगभग पौने दो फ़ीसदी कम वोटिंग हुई।

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विश्व होम्योपैथी दिवस पर नीतीश ने लहराया ऐतिहासिक परचम

आज एक नहीं….. बिहार के दो-दो नीतीश का परचम चतुर्दिक लहरा रहा है। एक हैं डॉ.नीतीश जिसने मुंगेर केे  एक साधारण परिवार व ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर दुनिया के होम्योपैथी चिकित्सा क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है और दूसरे हैं इंजीनियर नीतीश जो बिहार में न्याय के साथ विकास की गंगा बहाने में लगे हैं और अपना बेशकीमती जीवन बिना किसी चाहत के दलितों-शोषितों के सेवार्थ न्योछावर करने में लगे हैं।

बता दें कि जर्मनी से….. बंगाल के रास्ते भारत पहूँची होम्योपैथी की सालाना ग्रोथ 22% है जो जल्द ही चिकित्सा का प्रमुख विकल्प होने जा रहा है। भला क्यों नहीं, फ्रांस में तो 47.5 प्रतिशत होम्योपैथी की दवा खपत होती है। दुनिया के लगभग 100 देशों में लोग होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति का लाभ ले रहे हैं तथा लगभग 50 देशों में होम्योपैथी को अलग औषधीय प्रणाली के रूप में मान्यता प्राप्त हो चुकी है।

आज मुंगेर जिले के कल्याणपुर गांव की गलियों से निकलकर होम्योपैथी के सरताज डॉ.नीतीश चंद्र दुबे का परचम दुनिया में लहरा रहा है। इस यात्रा के पीछे डॉ.नीतीश का अथक परिश्रम है। ये दोनों नीतीश- मुख्यमंत्री ई.नीतीश और डॉ.नीतीश द्वारा जन सेवा को ही सर्वोपरि समझा जाता है। एक शहर से दूसरे शहर की यात्रा के दौरान ही इनकी नींद पूरी होती है। भारत रत्न डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम से प्रेरित होने के चलते ये दोनों नीतीश यही कहते हैं….. आपके पास एक बड़ा उद्देश्य हो और सपना हो तो वो सोने नहीं देता है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि संपूर्ण विश्व के बड़े-बड़े मंचों पर दोनों नीतीश को बुलाया जाता है…… मुख्यमंत्री ई.नीतीश को पीएम मटेरियल कह कर नवाजा जाता है तो डॉ.नीतीश को लंदन में मेडिकल के छात्रों को होम्योपैथ के महत्व को बताने के लिए आमंत्रित किया जाता है। कभी डॉ.नीतीश को जर्मनी तो कभी स्विट्जरलैंड में अवार्ड देकर सम्मानित किया जाता है। हाल ही में  डेलहाइट्स की ओर से डॉ.नितीश को डॉ.त्रेहान के साथ सम्मानित किया जा चुका है। और तो और विगत नवंबर में ब्रिटिश पार्लियामेंट में आयोजित भारत कांक्लेव के दौरान भी डॉ.नीतीश को सम्मानित किया गया था।

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