बीएनएमयू के दीक्षांत समारोह में महामहिम कुलाधिपति लालजी टंडन का होगा विराट अभिनंदन

बीएन मंडल विश्वविद्यालय के सर्वाधिक महत्वपूर्ण आयोजन “दीक्षांत समारोह” को सफल बनाने हेतु कुलपति डॉ.अवध किशोर राय, प्रतिकुलपति डॉ.फारूक अली, कुलसचिव कर्नल नीरज कुमार सहित वित्त परामर्शी सुरेश चंद्र दास की पूरी टीम ने एक सप्ताह से अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। कुलपति डॉ.राय ने 23 दिसंबर के दीक्षांत समारोह को सफल बनाने हेतु जहाँ एक ओर विश्वविद्यालय पदाधिकारियों के सहयोग की अपील की वहीं दूसरी ओर सभी शिक्षकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों एवं अभिभावकों को अपने-अपने दायित्वों का निर्वहन कर मंडल विश्वविद्यालय के नाम को रोशन करने का अनुरोध किया तथा हर किसी को समर्पण के साथ अपना सर्वोत्तम योगदान देकर अंतर्मन से इस यज्ञ को सफल बनाने हेतु विनम्र प्रार्थना भी की।

बता दें कि समस्त विश्वविद्यालय परिवार तन-मन-धन से इस दीक्षांत समारोह को सफल बनाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने में अहर्निश लगा रहता है। इस महापर्व को ऊंचाई देने हेतु किसी भी तरह की कोई भी कोताही नहीं बरती जा रही है। चारो ओर सेवा और समर्पण का भाव नजर आता है।

यह भी जानिए कि दीक्षांत मंच पर साज-सज्जा का काम जारी है। खूबसूरत मिथिला पेंटिंग उकेरा जा रहा है। दिनांक 21 एवं 22 दिसंबर को इस महायज्ञ में शामिल होने वाले प्रतिभागियों को उप कुलसचिव (अकादमिक) कार्यालय में परिधान (कॉस्टयूम) यानी अंगवस्त्रम पूर्वाहन 11:00 बजे से बांटा जाएगा। 22 दिसंबर को ही विद्वत शोभायात्रा में भाग लेने वालों सहित संबंधित पदाधिकारी, कर्मचारी व प्रतिभागियों को ‘मार्क ड्रील’ कराया जाएगा। विभिन्न कॉलेजों से चयनित एनएसएस एवं एनसीसी के वालेंटियर व केडेटो को भी दायित्व दिया जाएगा।

चलते-चलते यह भी कि कुलपति डॉ.ए.के.राय निरंतर यही निर्देश देते रहे हैं कि महामहिम कुलाधिपति के आने और जाने से लेकर कार्यक्रम के अंतिम क्षण तक जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन की तरह हम सबों को सतर्क रहना है। उन्होंने कहा कि हम सभी मिलकर समारोह को ऐसा बनाएं कि पूरे देश में बीएन मंडल विश्वविद्यालय का नाम रोशन हो। मौके पर डीन डॉ.शिवमुनि यादव , डीएसडब्ल्यू डॉ.नरेंद्र श्रीवास्तव, कॉमर्स डीन डॉ.एल झा , परीक्षा नियंत्रक डॉ.नवीन कुमार, स्टेट ऑफिसर डॉ.शैलेंद्र कुमार, एनएसएस कोऑर्डिनेटर डॉ.ए.के.सिंह, विकास पदाधिकारी डॉ.ललन प्रसाद अद्री, पीआरओ डॉ.सुधांशु शेखर सहित अन्य सभी पदाधिकारी व कर्मचारी मौजूद थे।

 

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प्रधानमंत्री का पद और महागठबंधन की परीक्षा

डीएमके अध्यक्ष एम के स्टालिन की ओर से प्रधानमंत्री पद के लिए राहुल गांधी का नाम प्रस्तावित किए जाने के बाद गठबंधन के सहयोगी असहज दिख रहे हैं। अब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि अभी यह सही समय नहीं है। ममता से पहले समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस पर असहमति जताई थी।

बहरहाल, ममता बनर्जी ने इस संदर्भ में बड़े सधे हुए तरीके से कहा कि ‘यह सही समय नहीं है, चुनाव आने दीजिए। हम सब मजबूती से साथ हैं और साथ काम कर रहे हैं। जो भी पार्टियां तय करेंगी, वही इसका जवाब होगा।’  इससे पहले तृणमूल कांग्रेस की ओर से कहा गया था कि राहुल के नाम का ऐलान किए जाने से संभावित गठबंधन में शामिल होने वाले दलों में फूट पड़ सकती है इसलिए इसपर लोकसभा चुनाव के बाद फैसला लिया जाना चाहिए।

बता दें कि ममता से पहले बुधवार को समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा था कि ‘लोग बीजेपी से नाराज हैं। तेलंगाना के मुख्यमंत्री (केसीआर), ममताजी और शरद पवारजी ने प्रयास किया है कि सभी नेता साथ आएं और एक गठबंधन बनाएं। ऐसे में अगर कोई अपनी राय दे भी रहा है तो इसका मतलब यह नहीं है कि गठबंधन की भी वही राय है।’ गौरतलब है कि तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि की प्रतिमा के अनावरण मौके पर डीएमके प्रमुख एम के स्‍टालिन ने आगामी लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री पद की उम्‍मीदवारी के लिए राहुल गांधी के नाम का प्रस्‍ताव रखा था और कहा था कि कांग्रेस अध्‍यक्ष में मोदी सरकार को हराने की काबिलियत है।

कुल मिलाकर देखा जाय तो स्टालिन ने जिस तरह मुखर होकर कांग्रेस अध्यक्ष की वकालत की है, वैसी किसी और सहयोगी दल ने अब तक नहीं की है। अभी-अभी आए पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद कांग्रेस का आत्मविश्वास बढ़ा जरूर है लेकिन वह अभी से गठबंधन का नेतृत्व अपने हाथ मे लेने की बात शुरू कर दे, यह संभव नहीं दिखता। सच यह है कि अभी सभी दल गठबंधन में अपने को मजबूत दिखाने और सीटों के गणित में आगे निकलने की होड़ में लगे हैं। महागठबंधन के लिहाज से समझदारी अभी इसी में है कि सभी दल पहले एनडीए के विरुद्ध अपनी एकता कायम रखें, अहं को आड़े ना आने दें और बड़े लक्ष्य के लिए छोटे त्याग करने से ना चूकें। अगर ऐसा नहीं होता है तो एनडीए 2019 में गिरते-पड़ते ही सही, सरकार बना ले जाएगी।

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राष्ट्र निर्माण में नेहरू युवा केंद्र के युवाओं की भूमिका अहम

नेहरू युवा केंद्र द्वारा ‘देश भक्ति और राष्ट्र निर्माण’ विषय पर टी.पी.कॉलेज मधेपुरा के सभागार में जिला स्तरीय भाषण प्रतियोगिता का आयोजन प्राचार्य डॉ.के.पी.यादव की अध्यक्षता में किया गया….. जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी, विशिष्ट अतिथि सिंडीकेट सदस्य डॉ.जवाहर पासवान, प्राचार्य डॉ.आलोक कुमार, माया अध्यक्ष राहुल यादव एवं केंद्र समन्वयक अजय कुमार गुप्ता आदि ने सम्मिलित रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। एक भारत श्रेष्ठ भारत, देश भक्ति एवं राष्ट्र निर्माण विषय पर आयोजित भाषण प्रतियोगिता में जिले केे तेेेेरहो प्रखंडों से लगभग 40 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।

बता दें कि मुख्य अतिथि समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी द्वारा सर्वप्रथम प्रतिभागियों को विस्तार से स्वामी विवेकानंद की देशभक्ति की झांकी प्रस्तुत करते हुए यही कहा गया कि इरादे मजबूत हों तो दुनियाॅ में कुछ भी पाना आसान हो जाता है। डॉ.मधेपुरी ने आगे यही कहा कि बच्चे…. युवा या बड़े जो जहाँ हैं वे अपने आस-पास को ही भारत समझें और भारत निर्माण के प्रति अपने-अपने हृदय में समर्पण का भाव रखें। उन्होंने अतीत का स्मरण कराते हुए कहा कि युवाओं में प्रतिभाओं की कमी नहीं है…. केवल जरूरत है उचित मार्गदर्शन की।

संक्षिप्त अध्यक्षीय भाषण देते हुए प्राचार्य डॉ.के.पी.यादव, स्काउट एंड गाइड आयुक्त जय कृष्ण यादव, डॉ.जवाहर पासवान, डॉ.आलोक कुमार, राहुल यादव सहित राजेश-सुधांशु-जय कुमार…… पूजा कुमारी आदि ने कहा कि भाषण प्रतियोगिता में प्रतिभागियों के जज्बे को देखकर ऐसा लगता है कि युवाओं में राष्ट्रभक्ति की भावना प्रबल हुई है। समन्वयक अजय कुमार गुप्ता ने कहा कि नेहरू युवा केंद्र युवाओं को अनुशासित कर समाज और देश को आगे बढ़ाने का एक बड़ा प्लेटफार्म है।

Pratibhagi Priyanka Kumari (Madhepura), Swati Suman (Gwalpara) and Nishant Suman (Kumarkand) having 1st, 2nd & 3rd positions respectively with cheques & certificates.
Pratibhagi Priyanka Kumari (Madhepura), Swati Suman (Gwalpara) and Nishant Suman (Kumarkand) having 1st, 2nd & 3rd positions respectively with cheques & certificates.

जानिए कि मधेपुरा प्रखंड की प्रियंका कुमारी जहाँ प्रथम पुरस्कार के रूप में 5 हज़ार ₹ के चेक एवं प्रशस्ति पत्र द्वारा पुरस्कृत की गई वहीं ग्वालपाड़ा प्रखंड की स्वाति सुमन द्वितीय एवं कुमारखंड के निशांत सुमन तृतीय स्थान लाकर प्रशस्ति पत्र के साथ क्रमशः 2 हज़ार एवं एक हज़ार ₹ का चेक प्राप्त किया।

यह भी बता दें कि प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली प्रियंका कुमारी को राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में मधेपुरा जिले का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिलेगा। यदि प्रियंका वहाँ से चयनित होकर दिल्ली पहुंची तो लाखों रुपए का चेक पा सकती है। जहाँ भाषण प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों ने देश के नवनिर्माण में युवाओं की भूमिका को अहम बताया वहीं भाषण आरंभ होने से पूर्व डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी, डॉ.के.पी.यादव, डॉ.जवाहर पासवान, डॉ.आलोक कुमार, जयकृष्ण यादव, राहुल यादव एवं समन्वयक अजय गुप्ता की पूरी टीम द्वारा स्वामी विवेकानंद की तस्वीर पर पुष्पांजलि की गई। इससे पूर्व एक प्रतिभागी द्वारा स्वागत गान गाकर अतिथियों का सम्मान किया गया।

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बीएनएमयू के पीआरओ डॉ.सुधांशु निरंतर ऊँचाइयों को छू रहे हैं

डॉ.सुधांशु शेखर का बीपीएससी से दर्शनशास्त्र विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में ज्यों ही चयन किया गया कि वे 3 जून 2017 को टीपी कॉलेज मधेपुरा में योगदान कर लेते हैं। साठ दिनों के अंदर ही वे विश्वविद्यालय के पीआरओ (जनसंपर्क पदाधिकारी) बन जाते हैं और 250 दिनों के अंदर ही विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर दर्शन शास्त्र विभाग में इन्हें प्रतिनियोजित कर लिया जाता है।

बता दें कि अब तक डॉ.सुधांशु के दो दर्जन से अधिक शोध-पत्रों के प्रकाशन तथा एक दर्जन रेडियो वार्ताओं के प्रसारण हो चुके हैं। साथ ही वे शोध-पत्रिका ‘दर्शना’ एवं ‘सफाली’ जर्नल ऑफ सोशल रिसर्च का संपादन भी करते रहे हैं। इसके अतिरिक्त ‘लोकतंत्र : नीति और नियति’ a1 ‘भूमंडलीकरण और पर्यावरण’ आदि आधे दर्जन पुस्तकों का डॉ.सुधांशु ने संपादन भी किया है। इनकी सर्वाधिक लोकप्रिय दो पुस्तकें हैं- सामाजिक न्याय : आंबेडकर विचार… (2014) एवं गांधी विमर्श (2015)।

यह भी जानिए कि पीआरओ डॉ.सुधांशु शेखर को पटना में आयोजित 41वें दर्शन परिषद बिहार का प्रदेश संयुक्त सचिव बनाया गया जबकि वे परिषद के मीडिया प्रभारी के साथ-साथ परिषद की अर्धवार्षिक शोध-पत्रिका ‘दार्शनिक अनुगूंज’ के संपादक मंडल के सदस्य भी रहे हैं। समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी के अनुसार- ऐसा लगता है कि दर्शन परिषद बिहार का लाइफ लाइन बन गया है बीएनएमयू का पीआरओ डॉ.सुधांशु शेखर।

विश्वविद्यालय के क्षेत्रान्तर्गत डॉ.सुधांशु के आभामंडल से प्रभावित होकर कुलपति डॉ.अवध किशोर राय, प्रतिकुलपति डॉ.फारूक अली एवं डीन डॉ.शिवमुनि यादव ने कहा कि उनकी इस उपलब्धि से मंडल विश्वविद्यालय गौरवान्वित हुआ है। तभी तो शिक्षक के रूप में अपनी पहचान बनाए रखने वाले डॉ.शेखर को इनकी उपलब्धियों के लिए वित्त परामर्थी एससी दास, डीएसडब्ल्यू डॉ.नरेंद्र श्रीवास्तव, डॉ.ज्ञानंजय द्विवेदी, सीनेटर एवं बीएन मुस्टा के महासचिव डॉ.नरेश कुमार, डॉ.एम.आई.रहमान, खेल पदाधिकारी डॉ.फजल, विकास पदाधिकारी ललन प्रसाद अद्री आदि ने हृदय से बधाई दी है।

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मधेपुरा में पहला अटल टिंकरिंग लैब किरण पब्लिक स्कूल को मिला

जेपी नगर पीपरपत्ता में किरण पब्लिक स्कूल की शाखा को अटल टिंकरिंग लैब स्थापित करने हेतु अटल इनोवेशन मिशन के तहत 20 लाख की राशि नीति आयोग द्वारा अनुदान के रूप में मिला। जिले के पहले टिंकरिंग लैब का उद्घाटन जिलाधिकारी नवदीप शुक्ला (आईएएस), प्रो-वीसी डॉ.फारूक अली, समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी, डीईओ उग्रेश प्रसाद मंडल, निदेशिका किरण प्रकाश आदि ने सम्मिलित रूप से किया।

बता दें कि डीएम नवदीप शुक्ला ने भव्य समारोह को संबोधित करते हुए यही कहा कि यहाँ के छात्रगण सर्वाधिक भाग्यशाली हैं जिन्हें इतनी कम उम्र में इतनी बड़ी सुविधा मिलने जा रही है। ऐसे बच्चे अपनी क्षमता का पूरा-पूरा उपयोग एटीएल लैब के माध्यम से कर सकेंगे। उन्होंने यहां तक कहा कि स्कूल ऐसी व्यवस्था करे ताकि जिले के अन्य बच्चे भी यहाँ आकर अपने सपनों को साकार कर सकें।

समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने कहा कि दुनिया का पहला वैज्ञानिक कोई बच्चा ही रहा होगा क्योंकि बच्चों को नई-नई चीजें जानने की सर्वाधिक जिज्ञासा होती है तथा उनके अंदर अद्भुत क्रिएटिविटी भी होती है। डॉ.मधेपुरी ने केपीएस के प्रबंध निदेशक अमन प्रकाश, निदेशिका किरण प्रकाश एवं सहयोगी शिक्षकों को बधाई देते हुए यही कहा कि आजादी मिलने के बाद बापू ने सबों को गांव की ओर चलने को कहा…… आज पीपरपत्ता गांव के जयप्रकाश नगर में उनके सपनों को साकार होते हम देख रहे हैं।

मुख्य अतिथि प्रो-वीसी डॉ.फारूक अली ने अटल टिंकरिंग लैब को मील का पत्थर मानते हुए यही कहा कि इस अटल लैब से बच्चों को लाभान्वित होने के लिए प्रशासन, शिक्षा विभाग तथा स्कूल प्रबंधन को सम्मिलित रूप से काम करना होगा। उन्होंने कहा कि विज्ञान के लिए आईडिया के साथ-साथ सकारात्मक सोच की जरूरत होती है तभी इसका लाभ आम लोगों को मिल पाता है।

डीईओ उग्रेश प्रसाद मंडल ने जानकारी देते हुए यही कहा कि भारत में 54 सौ के करीब अटल टिंकरिंग लैब स्थापित किया गया है। इस जिले में 20-20 लाख की राशि अनुदान के रूप में प्राप्त करने वाले तीन स्कूल हैं- दो सरकारी- जवाहर नवोदय विद्यालय सुखासन और बी.एल.स्कूल मुरलीगंज एवं प्राइवेट स्कूलों में मात्र एक यही है- किरण पब्लिक स्कूल की शाखा, जेपी नगर पीपरपत्ता। उन्होंने विश्वास जताया कि इस लैब से प्राथमिक नवप्रवर्तन एवं वैज्ञानिक शिक्षा व्यवस्था में बड़ा रूपांतरण देखने को मिलेगा।

प्रबंध निदेशक अमन प्रकाश एवं प्राचार्य मो.आकिब द्वारा विद्यालय की उपलब्धियों को प्रकाश में लाया गया। सबों ने इस विद्यालय का चयन अटल टिंकरिंग लैब हेतु किये जाने को शान की बात कही।

आरम्भ में गायक किशोर जी एवं रोशन जी द्वारा गणेश वंदना एवं स्वागत गान प्रस्तुत किया गया। स्कूली बच्चों द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ सृजन दर्पण के निदेशक विकास कुमार की प्रस्तुतियां खूब तालियां बटोरी। आरंभ में निदेशिका किरण प्रकाश द्वारा अतिथियों को बुके एवं मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया।

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टूट गई रालोसपा, कुशवाहा के लिए संकट की घड़ी

अभी-अभी एनडीए से अलग हुई रालोसपा आज दो भागों में बंट गई। बिहार में पार्टी के दोनों विधायक और एकमात्र विधानपार्षद ने एनडीए के साथ रहने की घोषणा करते हुए रालोसपा पर दावा तक ठोंक दिया। इन नेताओं ने स्वयं को असली रालोसपा का नेता बताते हुए अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा पर व्यक्तिगत राजनीति करने का आरोप लगाया।

पटना में रालोसपा के दोनों विधायकों – सुधांशु शेखर और ललन पासवान – के साथ विधानपार्षद संजीव श्याम सिंह ने संवाददाता सम्मेलन कर एनडीए में रहने की घोषणा की और कहा कि वे एनडीए में थे और आगे भी रहेंगे। उन्होंने कहा कि रालोसपा एनडीए से कभी अलग हुई ही नहीं है। गौरतलब है कि कुछ ही दिन पूर्व रालोसपा अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा ने एनडीए में ‘सम्मान’ नहीं मिलने के कारण अलग होने की घोषणा की थी।

बहरहाल, संवाददाता सम्मेलन में तीनों नेताओं ने रालोसपा पर दावा ठोंकते हुए कहा कि अगर जरूरत पडे़गी तो वे लोग निर्वाचन आयोग से मिलकर अपनी बात रखेंगे। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि पार्टी के अधिकांश कार्यकर्ता भी उनके साथ हैं। उपेन्द्र कुशवाहा पर व्यक्तिवादी राजनीति करने का आरोप लगाते हुए इन नेताओं ने कहा कि वे केवल अपने लाभ की बात करते हैं। उन्हें ना पार्टी से मतलब रहा ना ही उन्हें बिहार से मतलब रहा।

कुल मिलाकर पहले ही कठिन दौर से गुजर रहे उपेन्द्र कुशवाहा के लिए ये सचमुच बहुत बुरी खबर है। पार्टी में दो फाड़ होने से स्पष्ट है कि महागठबंधन में भी उन्हें वो ‘भाव’ नहीं मिलेगा जिसकी उन्हेँ अपेक्षा होगी। कांग्रेस के दिन उधर अलग फिर गए हैं। तीन-तीन राज्यों में सत्ता में आने के बाद उसके हौसले बुलंद हैं और बहुत संभव है कि पार्टी बिहार में अधिक हिस्सेदारी चाहेगी। इसका खामियाजा भी कहीं ना कहीं रालोसपा को भुगतना पड़ेगा।

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अमिताव घोष को 2018 का ज्ञानपीठ पुरस्कार

अंग्रेजी के सुविख्यात साहित्यकार अमिताव घोष को वर्ष 2018 के लिए 54वां ज्ञानपीठ पुरस्कार दिया जाएगा। ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित होने वाले वे अंग्रेजी के पहले लेखक हैं। शुक्रवार को प्रतिभा रॉय की अध्यक्षता में आयोजित ज्ञानपीठ चयन समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया। उल्लेखनीय है कि अंग्रेजी को तीन साल पहले ज्ञानपीठ पुरस्कार की भाषा के रूप में शामिल किया गया था और अमिताव घोष देश के सर्वोच्च साहित्य पुरस्कार से सम्मानित होने वाले अंग्रेजी के पहले लेखक हैं।

साहित्य अकादमी और पद्मश्री सहित कई पुरस्कारों से सम्मानित अमिताव घोष का जन्म 1956 में पश्चिम बंगाल के कोलकाता में हुआ था। उन्हें लीक से हटकर काम करने वाले रचनाकार के तौर पर जाना जाता है। वे इतिहास के ताने बाने को बड़ी कुशलता के साथ वर्तमान के धागों में पिरोने का हुनर जानते हैं। ‘द सर्किल ऑफ रीजन’, ‘दे शेडो लाइन’, ‘द कलकत्ता क्रोमोसोम’, ‘द ग्लास पैलेस’, ‘द हंगरी टाइड’, ‘रिवर ऑफ स्मोक’ और ‘फ्लड ऑफ फायर’ आदि उनकी प्रमुख रचनाएं हैं।

बता दें कि ज्ञानपीठ पुरस्कार के रूप में 11 लाख रुपये की राशि, वाग्देवी की प्रतिमा और प्रशस्ति पत्र प्रदान किए जाते हैं। यह भी जानें कि पहला ज्ञानपीठ पुरस्कार 1965 में मलयालम लेखक जी शंकर कुरूप को प्रदान किया गया था।

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मधेपुरा में 67वाँ राज्यस्तरीय टे.टे.का चार दिवसीय समारोह

बी.पी.मंडल इंडोर स्टेडियम में चार दिवसीय (11-14 तक) टे.टे. प्रतियोगिता में 14 जिलों के 5 Age ग्रुपों में बांटे गये 125 खिलाड़ियों द्वारा रोज-रोज नए-नए जौहर दिखाये जायेंगे। खेल का आनंद लेने हेतु जिले के खेल प्रेमियों की भीड़ स्टेडियम में देखने योग्य रही।

इस अवसर पर उप विकास आयुक्त मुकेश कुमार, समाजसेवी साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी, मंडल विश्वविद्यालय के खेल पदाधिकारी डॉ.फजल, टे.टे.स्टेट सचिव मुकेश राज, प्रो.चंद्रशेखर, प्रशांत कुमार, विनय कुमार झा, संतोष झा , ध्यानी यादव, प्रदीप, संदीप आदि की उपस्थिति में जिलाधिकारी नवदीप शुक्ला (आईएएस) द्वारा दीप प्रज्वलित कर उद्घाटन किया गया। आये हुए टे.टे.खिलाड़ियों के मनोबल को बढ़ाते हुए डीएम ने स्वयं टेबल टेनिस प्रतियोगिता की शुरुआत की। जिलाधिकारी ने सभी खिलाड़ियों को बेहतर प्रदर्शन कर राज्य ही नहीं बल्कि राष्ट्र के नाम को रोशन करने की शुभकामनाएं दी। डीएम शुक्ला ने कहा कि पिछले कई वर्षों से मधेपुरा में State Level T.T. Competition का आयोजन बड़ी बात है।

सूबे बिहार के 14 जिले से आये 125 खिलाड़ियों 10 तकनीकी पदाधिकारियों एवं समस्त खेल प्रेमियों को संबोधित करते हुए मधेपुरा के कलाम कहे जाने वाले समाजसेवी डॉ.मधेपुरी ने अपने सारगर्भित संबोधन में बच्चों से यही कहा-

बच्चो ! पहले लोग यही बोला करते थे- पढ़ोगे-लिखोगे होगे नवाब, खेलोगे कूदोगे होगे खराब…… परंतु आजकल वह बात नहीं रही। आज यदि एक ओर प्रतिभा संपन्न गांधीयन मिसाइल मैन डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम को भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान “भारत रत्न” से नवाजा जाता है तो वहीं दूसरी ओर खेल की दुनिया का सरताज मिडिल पास सचिन तेंदुलकर को भी “भारत रत्न” से सम्मानित किया जाता है।

अंत में डॉ.मधेपुरी ने कहा कि भारत की एकता व अखंडता को बनाये रखने के लिए भारतीय रेल, खेल, हिन्दी और गांधी की जितनी प्रशंसा की जाय वह कम होगी। साथ ही अर्थ के अभाव में किसी भी क्षेत्र में कुंठित व अर्थहीन हो रही प्रतिभा को बचाने का संकल्प वे बार-बार दोहराते रहे…… तथा इस खेल में मधेपुरा का नाम रोशन करने वाले सभी खिलाड़ियों-रियांशी, पायल, सुंदरम, हंसराज, वैष्णवी आदि की जमकर तारीफ करते रहे।

जिला टे.टे.के अध्यक्ष प्रो.चंद्रशेखर ने कहा कि खेल के सफल आयोजन हेतु बिहार से आये समस्त खिलाड़ियों के हर तरह की असुविधाओं को दूर करने का प्रयास किया जायेगा तथा उनकी सुख-सुविधा का ख्याल भी रखा जाएगा। कार्यक्रम को जहाँ प्रोत्साहित किया स्टेट टे.टे.सचिव मुकेश राज ने वहीं आयोजन समिति के सचिव अमित कुमार मुनि, अध्यक्ष प्रशांत कुमार, उपाध्यक्ष पुष्पेंद्र कुमार, पप्पू, एथलेटिक सचिव संत कुमार, कबड्डी सचिव अरुण कुमार, वालीबॉल सचिव अनिल राज सहित अशफाक आलम, दीपक प्रकाश, विकास-राजीव-अमित-आशीष…… आदि द्वारा आयोजन की सफलता पर हमेशा नजर रखी जा रही है।

खेल में जौहर दिखाने वाले नाम है- पटना की प्रगति, मुजफ्फरपुर के पंकज , मधेपुरा की रियांशी, पटना की ही माही गुप्ता , फाल्गुनी मुखर्जी और योगेश…..आदि।

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क्या कहते हैं पांच राज्यों के चुनाव-परिणाम ?

लोकसभा चुनाव के पूर्व सत्‍ता का सेमीफाइनल माने जा रहे पांच राज्‍यों के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भाजपा को पछाड़ दिया है। छत्‍तीसगढ़ और राजस्‍थान में जहां उसने भाजपा को करारी शिकस्‍त दी है, वहीं मध्‍य प्रदेश में भी कांग्रेस को बढ़त मिली है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के राष्‍ट्रीय राजनीति में उदय के बाद ऐसा पहली बार है जब कांग्रेस ने सीधी लड़ाई में भाजपा को मात दी है। हालांकि कांग्रेस को मिजोरम में मात खानी पड़ी है। राज्‍य में मिजो नेशनल फ्रंट को दो तिहाई बहुमत मिलने से वह उत्तर-पूर्व में अपना आखिरी किला भी गंवा चुकी है। वहीं, तेलंगाना में टीआरएस ने दो तिहाई बहुमत से जीत दर्ज कर चुनाव को एकतरफा कर दिया है।

बहरहाल, इन चुनावी नतीजों से ‘कांग्रेस मुक्‍त भारत’ का नारा देने वाली भाजपा को लोकसभा चुनाव से पहले तगड़ा झटका लगा है। मोदी और शाह की जोड़ी कहीं न कहीं ‘अति’आत्मविश्वास का शिकार हो चली थी। अब उन्हें नए सिरे से आत्ममंथन करने की जरूरत है। उधर पांच में से तीन राज्यों राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों के परिणाम कांग्रेस के लिए संजीवनी बनकर आए हैं। अब वह 2019 के आम चुनावों के लिए पूरे आत्‍मविश्‍वास के साथ मायावती, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, शरद पवार, चंद्रबाबू नायडू जैसे क्षत्रपों के साथ गठबंधन की टेबल पर बात कर सकेगी। इस संभावना से भी हरगिज इनकार नहीं किया जा सकता कि ये चुनाव-परिणाम निकट भविष्य में देश में कई नए समीकरणों और गठबंधनों को जन्‍म दे सकते हैं।

बहरहाल, पांचों विधानसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, हम जनादेश को विनम्रता से स्वीकार करते हैं। उन्होंने कहा, जीत और हार जीवन का अभिन्न हिस्से हैं। आज के परिणाम लोगों की सेवा करने और देश के विकास के लिए और कठोर परिश्रम करने के हमारे संकल्प को मजबूत करेंगे। उधर नए आत्मविश्वास से लबरेज राहुल गांधी ने प्रेस कांफ्रेंस कर भाजपा की विचारधारा पर निशाना साधते हुए कहा ”हम किसी को देश से हटाना या मिटाना नहीं चाहते हैं। हमारी लड़ाई भाजपा की विचारधारा से है। हमने उन्हें आज हराया है और 2019 में भी हराएंगे। कांग्रेस पार्टी ‘मुक्त’ करने की विचारधारा में विश्वास नहीं करती। विपक्ष को खत्म करने की सोच भाजपा की है।”

कुल मिलाकर, इन चुनाव परिणामों के बाद भाजपा को इस गलतफहमी से निकलना ही होगा कि सिर्फ मोदी के चेहरे को आगे कर सभी चुनाव जीते जा सकते हैं। अब वह एंटी-इनकम्बेन्सी फैक्टर को नजरअंदाज नहीं कर सकती। उसे फिर से विकास के एजेंडे पर लौटना ही होगा। उधर कांग्रेस को भी चाहिए कि वह खुशफहमी की शिकार ना हो। उसे ध्यान रहना चाहिए कि भाजपाशासित जिन तीन राज्यों में उसकी जीत हुई है, उन तीनों ही राज्यों में कांग्रेस के अलावे कोई और मजबूत विकल्प नहीं था। जिन राज्यों में क्षेत्रीय दल मजबूत हैं वहां दिल्ली जीतने के लिए उसे अभी बहुत मेहनत करनी होगी।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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विकसित समझ वाले 266 बाल वैज्ञानिक जुटेंगे राजधानी पटना में

राज्य स्तरीय 46वीं विज्ञान प्रदर्शनी में राज्य भर के 500 से अधिक बाल वैज्ञानिक तथा उनके मार्ग-दर्शक शिक्षक 20-21 दिसंबर को राज्य शैक्षिक शोध एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) द्वारा आयोजित राज्यस्तरीय विज्ञान, गणित एवं पर्यावरण प्रदर्शनी में भाग लेंगे। स्कूलों में पढ़नेवाले ये बच्चे जीवन की चुनौतियों के बाबत वैज्ञानिक समाधान प्रस्तुत करेंगे।

बता दें कि SCERT के डायरेक्टर विनोद कुमार सिंह के कथनानुसार यह विज्ञान प्रदर्शनी पटना के महेंद्रु स्थित SCERT कैंपस में होगी। जिसका उद्घाटन करेंगे शिक्षा मंत्री कृष्णानंद प्रसाद वर्मा और मुख्य अतिथि होंगे अपर मुख्य सचिव आर.के.महाजन।

यह भी जान लें कि एससीईआरटी के विज्ञान विभाग के अध्यक्ष टी.एन.प्रसाद के अनुसार प्रदर्शनी में शामिल होने के लिए सभी प्रतिभागीगण 19 दिसंबर को ही अपना निबंधन करा लेंगे। हिदायत के साथ श्री प्रसाद ने ऐलान कर दिया है कि 20 दिसंबर को पहुंचने वाले छात्र-छात्राएं इसका हिस्सा नहीं बन पायेंगे।

यह भी बता दें कि सूबे के छात्र-छात्राओं में वैज्ञानिक समझ विकसित करने के लिए प्रत्येक वर्ष राज्य स्तरीय विज्ञान प्रदर्शनी आयोजित की जाती है जिसका विषय एवं उप-विषय एनसीईआरटी (नेशनल कौंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग) द्वारा निर्धारित किया जाता है।

चलते-चलते यह भी जान लें कि प्रदर्शनी में हर जिले से चुनकर आयेंगे सर्वश्रेष्ठ सात बाल वैज्ञानिक जिसका मुख्य विषय है- “जीवन की चुनौतियों के लिए वैज्ञानिक समाधान”। इसके छह उपविषय रखे गये हैं- (1) कृषि एवं जैविक खेती (2) स्वास्थ्य एवं स्वच्छता (3) संसाधन प्रबंधन (4) अपशिष्ट प्रबंधन (5) परिवहन और संचार (6) गणितीय प्रतिरूपण। इनमें से कोई विषय चुनने के लिए विद्यार्थी स्वतंत्र है। यह भी याद कर लें कि इन सभी विषयों में प्रथम आने वाले बाल वैज्ञानिक पुरस्कृत किये जायेंगे……. और आगे NCERT द्वारा लगाई जाने वाली राष्ट्रीय विज्ञान प्रदर्शनी में अपने सुबे बिहार का प्रतिनिधित्व भी करेंगे।

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