मधेपुरा में ब्रम्हाकुमारियों ने धूमधाम से मनाया भैया दूज

प्रत्येक वर्ष कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया को भैया दूज का पर्व मनाया जाता है। यह पर्व दीपावली के दो दिन बाद आने वाला ऐसा पर्व है जो भाई के प्रति बहन के अगाध स्नेह को अभिव्यक्त करता है।  बहनें अपने भाई की खुशहाली व सुख की प्राप्ति के साथ-साथ लंबी आयु एवं ऐश्वर्य की कामना करती हैं।

बता दें कि मिथिलांचल का अति महत्वपूर्ण भाई-बहन के अटूट प्रेम पर आधारित यह भैया दूज पर्व जिले के मुरलीगंज, उदाकिशुनगंज, आलमनगर, पुरैनी, शंकरपुर, घैलाढ़ आदि अन्य सभी प्रखंडों में सर्वाधिक हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। हर आंगन में भैया दूज पर्व को लेकर काफी चहल-पहल देखी गई। रंगोली बना-बनाकर एवं नए-नए वस्त्र धारण कर अपने भाई के लिए अक्षत, चंदन, चांदी का सिक्का आदि-आदि के साथ इंतजार करती बहनों को भी बांट जोहती खड़ी देखी गईं।

यह भी जानिए कि प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय मधेपुरा के सेवा केंद्र पर केंद्र प्रभारी राजयोगिनी बीके रंजू दीदी की टीम द्वारा लोक आस्था के इस पर्व “भैया दूज” के आध्यात्मिक रहस्य को विस्तार से बताया गया तथा शुक्रवार को धूमधाम से सभी भाइयों को आमंत्रित कर श्रद्धा पूर्वक यह पर्व मनाया गया। सत्कार पूर्वक भोजन भी कराया गया ……।

बता दें कि जहां सर्वप्रथम ब्रह्माकुमारी रंजू दीदी ने अपने संबोधन में यही कहा कि इस पर्व के अवसर पर बहन भाई के माथे पर सात रंग का टीका लगाती है जो आत्मा के सात गुणों को धारण करने की ओर इशारा करता है….. वहीं मुख्यवक्ता के रूप में मधेपुरा के भीष्म पितामह समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र  मधेपुरी ने कहा कि भौतिक संपन्नता के बावजूद आज मनुष्य दु:ख के रास्ते पर चल पड़े हैं तथा दु:खी होकर भय के वातावरण में जी रहे हैं। डॉ.मधेपुरी ने अंत में यही कहा कि जबसे ब्रम्हाकुमारी रंजू दीदी का मधेपुरा में आगमन हुआ है तब से इन्होंने कैंची की संस्कृति को नकारा है और सूई की संस्कृति को घर-घर फैलाया है।

मौके पर पूर्व प्रमुख विनय वर्धन उर्फ खोखा यादव, डॉ.गणेश प्रसाद यादव, डॉ.अजय कुमार, डॉ.एन.के.निराला, विजय वर्धन, दिनेश प्रसाद यादव, बीके जानकी, दुर्गा, संगीता आदि मौजूद थे।

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बहुत खास है पटना के गर्दनीबाग ठाकुरबाड़ी की चित्रगुप्त पूजा

पटना के गर्दनीबाग स्थित ठाकुरबाड़ी की परंपरा सामाजिक समरसता की रही है। श्रीचित्रगुप्त पूजा का अवसर यहां सबके लिए बड़ा आयोजन है। इस दिन यहां हजारों श्रद्धालु उमड़ते हैं और भगवान चित्रगुप्त से आशीर्वाद लेते हैं। खास बात यह कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी इस दिन यहां हर साल आते हैं और सभी श्रद्धालुओं के साथ प्रसाद और भोजन ग्रहण करते हैं। इस बार भी वे यहां के चित्रगुप्त पूजनोत्सव में केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद, विधानपार्षद प्रो. रणवीर नंदन, पूर्व मंत्री रंजीत सिन्हा एवं जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप के साथ शामिल हुए और बिहार की सुख, समृद्धि, विकास एवं खुशहाली की कामना की।

CM Nitish Kumar worshipping at Gardanibagh Thakurbari, Patna
CM Nitish Kumar worshipping at Gardanibagh Thakurbari, Patna.

मुख्यमंत्री एवं उनके साथ समारोह में शामिल हुए विशिष्ट लोगों के अलावे भी इस अवसर पर कई महत्वपूर्ण लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज की, जिनमें सिक्किम के राज्यपाल गंगा प्रसाद, विधानपार्षद संजय कुमार सिंह उर्फ गांधीजी, विधानपार्षद सूरजनंदन मेहता, विधायक अरुण सिन्हा एवं विधायक नितिन नवीन शामिल हैं। बिहार सरकार के मुख्य सचिव दीपक कुमार, एडीएम लॉ एंड ऑर्डर राजेश वर्मा, सूचना आयुक्त अरुण कुमार वर्मा सहित कई बड़े अधिकारी भी इस खास मौके पर मौजूद रहे।

इस पुनीत आयोजन का एक बड़ा आकर्षण यह भी रहा कि आज यहां समाज के कई वैसे लोगों को सम्मानित भी किया गया, जिन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य किया है। यही नहीं, गर्दनीबाग ठाकुरबाड़ी चित्रगुप्त पूजा समिति द्वारा महादलित समाज के 25 बच्चों को एक साल के खर्च के रूप में छात्रवृत्ति भी दी गयी। इसके साथ ही, इस दौरान लगभग पांच हजार लोगों ने सामाजिक समरसता भोज में हिस्सा लिया जो निश्चित तौर पर समिति के सभी सहयोगियों की बड़ी उपलब्धि है।

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अब देश में मिट्टी से बनेगी बिहार मॉडल की पक्की सड़कें

बिहार सरकार के ग्रामीण कार्य विभाग और विश्व बैंक के आर्थिक सहयोग से पटना एनआईटी में चल रहा है मिट्टी से पक्की सड़क बनाने पर काम जिसमें सीमेंट, चूना-पत्थर और फ्लाई-ऐश को मिट्टी में मिलाकर पत्थर जैसी मजबूती वाली सड़क (प्रति किलोमीटर ₹50 लाख रूपये  बचत के साथ) वरदान साबित हो रही है। क्योंकि, पिछले एक दशक में गिट्टी की कीमत में 3 गुने की वृद्धि हुई है।
बता दें कि प्रथम चरण में भागलपुर, पूर्णिया आदि जिलों की ग्रामीण सड़कों में प्रायोगिक तौर पर इसका प्रयोग सफल रहा है। इस प्रकार की सड़कों में बाढ़ और बहाव में भी टिके रहने की क्षमता प्रायोगिक रूप से देखी गई है।
जानिए कि कंकड़-पत्थर और अलकतरे से बनने वाली सड़कें अब पुरानी हुई। फिलहाल मिट्टी में सीमेंट, चूना-पत्थर और थर्मल पावर प्लांट से निकली फ्लाई-ऐश (राख़) मिलाकर पत्थर जैसी मजबूत सड़क पटना के नेशनल इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी द्वारा बनाने की तैयारी चल रही है। इससे मिट्टी की भार सहन क्षमता कई गुना बढ़ जाती है। साथ ही धूप, नमी, पानी आदि का प्रभाव भी बहुत कम हो जाता है।
यह भी बता दें कि पटना एनआईटी के सिविल इंजीनियरिंग ब्रांच के प्रोफेसर संजीव सिन्हा के नेतृत्व में विभागीय शिक्षकों एवं छात्रों के सहयोग से सड़क बनाने की जिस तकनीक पर काम चल रहा है उसे टिकाऊ एवं सस्ती बताई जा रही है। यह भी कि इसमें सड़कों की लागत लगभग आधी हो जाएगी यानी एक करोड़ में बनने वाली सड़क इस विधि से मात्र ₹50 लाख़ में ही तैयार हो जाएगी।
चलते-चलते यह भी बता दें कि दक्षिण बिहार के 10 जिलों में 20 स्थानों की मिट्टी की जाँच एनआईटी द्वारा की जा रही है। अधिकांश जिले बाढ़ प्रभावित होने के कारण यहाँ की सड़कें पानी में डूब जाने के बाद भी टिकी रहे- ऐसी क्षमता विकसित की जा रही है। कौन सी मिट्टी इस नई तकनीक के लिए बेहतर होगी, इसकी पड़ताल भी पिछले 6 माह से की जा रही है।

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दीपावली पर भी नहीं माने तेजप्रताप

आरजेडी सुप्रीमो के परिवार का इंतजार दीपावली जैसे मौके पर भी पूरा नहीं हुआ। तेजप्रताप नहीं माने। उनके परिवार को पूरी उम्मीद थी कि वे पत्नी ऐश्वर्या और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ दीपावली मनाने घर आएंगे। पर तेजप्रताप हैं कि कभी बनारस तो कभी वृंदावन का रुख कर रहे हैं, पर घर लौटने का नाम नहीं ले रहे।

बता दें कि लालू के बड़े लाल व बिहार के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप अपनी पत्नी ऐश्वर्या राय को तलाक देने के लिए पटना परिवार न्यायालय में अर्जी दाखिल करने के बाद से लगातार घर से गायब रह रहे हैं। उन्हें इस मामले में अपने परिवार से भी समर्थन नहीं मिल रहा। बल्कि सभी उनकी पत्नी के पक्ष में खड़े दिखाई दे रहे हैं।

गौरतलब है कि पत्‍नी से तलाक की अर्जी दाखिल करने के बाद तेजप्रताप शुक्रवार को घर से निकले। शनिवार को वे रांची में पिता लालू प्रसाद यादव से मिले, जहां आरजेडी सुप्रीमो ने उन्हें समझाने की भरपूर कोशिश की। उसके बाद पटना आने के बदले वे बोधगया में ठहर गए। फिर वहां से चुपचाप बनारस चले गए। इसके बाद अब उनके वृंदावन जाने की बात कही जा रही है।

बनारस में तेजप्रताप ने कहा कि वे गायब नहीं हुए हैं, पूजा करने आए हैं। पूजा के बाद उन्होंने कहा कि जल्द ही बहुत कुछ अच्छा होने वाला है। हालांकि ये ‘अच्छा’ क्या है, इसका खुलासा उन्होंने नहीं किया। बहरहाल, इस बीच उन्‍हें समझाने की कोशिशें लगातार जारी है। उधर पार्टी के स्‍तर पर भी डैमेज कंट्रेाल की कवायद जारी है।

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कर्नाटक में भाजपा की उम्मीदों पर फिरा पानी

कर्नाटक की 3 लोकसभा और 2 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजों में कांग्रेस-जनता दल (सेक्युलर) गठबंधन मजबूत होकर उभरा है। दो विधानसभा और 2 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज कर गठबंधन ने भाजपा को तगड़ा झटका दिया है। भाजपा के हाथ केवल शिमोगा लोकसभा सीट आई है जबकि कांग्रेस-जेडी (एस) गठबंधन ने मांड्या और बेल्लारी लोकसभा सीटें अपने नाम की हैं। वहीं, रामनगर और जामखंडी विधानसभा सीट भी गठबंधन के खाते में गई हैं। इसी के साथ भाजपा की विधानसभा में ताकत बढ़ाने की उम्मीदों पर पानी फिर गया है।

गौरतलब है कि जिन पांच सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजे आए हैं, उनमें चार सीटें इस्तीफे की वजह से और एक सीट विधायक के निधन की वजह से खाली हुई थी। शिमोगा लोकसभा सीट बीएस येदियुरप्पा (बीजेपी), बेल्लारी लोकसभा सीट श्रीमुलु (बीजेपी) और मांड्या संसदीय सीट सीएस पुट्टाराजू (कांग्रेस) के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। वहीं रामनगर सीट से सीएम कुमारस्वामी (जेडीएस) के इस्तीफे और जामखंडी सीट कांग्रेस विधायक सिद्धू न्यामगौड़ा (कांग्रेस) के निधन के बाद खाली हुई थी। अब नतीजों के बाद बेल्लारी और मांड्या कांग्रेस के खाते में गई तो बीजेपी को सिर्फ शिमोगा से संतोष करना पड़ा। बाकी दो विधानसभा सीटों पर भी कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन को ही जीत मिली। कुल मिलाकर बीजेपी को एक लोकसभा सीट का नुकसान उठाना पड़ा।

इन उपचुनावों पर सभी की निगाहें इसलिए टिकी थीं क्योंकि इनके नतीजों का असर कांग्रेस और जेडीएस गठबंधन पर पड़ना तय था। मई में हुए चुनावों के दौरान दोनों पार्टियां एक दूसरे के खिलाफ लड़ी थीं लेकिन नतीजे आने के बाद गठबंधन कर लिया था। पांच सीटों में कांग्रेस ने जामखंडी और बेल्लारी और जेडीएस ने शिमोगा, रामनगर और मांड्या में प्रत्याशी उतारे। ऐसे में 2019 चुनाव से पहले गठबंधन की ताकत, आपसी तालमेल और जनता पर असर की परख इन चुनावों में देखने को मिली।

कहना गलत ना होगा कि कर्नाटक में गठबंधन के प्रदर्शन से भाजपा के लिए मुश्किल हालात पैदा हो गए हैं। इन नतीजों से गठबंधन की राजनीति को ताकत मिलने की उम्मीद है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे बड़े राज्यों में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं और अगले साल लोकसभा चुनाव होंगे। इन राज्यों के चुनावों पर कमोबेश कर्नाटक उपचुनाव का असर जरूर पड़ेगा। ऐसे में कर्नाटक में मिली जीत गठबंधन की राजनीति के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।

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विद्युतीय क्षेत्र में ‘ट्रांसमिशन का बिहार मॉडल’ पूरे देश में लागू होगा- ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र

विद्युत ट्रांसमिशन के बिहार मॉडल को केंद्रीय ऊर्जा सचिव ने इस कदर सराहा कि केंद्र सरकार द्वारा सभी राज्यों को पत्र लिखकर बिहार की ट्रांसमिशन परियोजना पर काम करने को कहा गया। पत्र में यह रेखांकित करते हुए निर्देश दिया गया कि विद्युत संचरण यानी ट्रांसमिशन के मामले में संपूर्ण देश ‘बिहार मॉडल’ का अनुसरण करेगा।
बता दें कि भारत सरकार के ऊर्जा सचिव अजय भल्ला ने बिहार को छोड़कर देश के सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को विशेष रूप से पत्र लिखकर कहा है कि केंद्र सरकार की ओर से सौभाग्य, इंटीग्रेटेड पावर डेवलपमेंट स्कीम एवं दीनदयाल उपाध्याय ज्योतिग्राम योजना के तहत जितनी भी बिजली परियोजनाएं चल रही हैं उन सारी की सारी परियोजनाओं में ‘बिहार मॉडल’ पर ही काम करने को निर्देशित किया जाय। इस मॉडल के जरिये देश के सभी नागरिकों तक सातों दिन 24 घंटे बिजली की सुविधा उपलब्ध होती रहे।
यह भी जानिए कि सबों को बिजली उपलब्ध कराना केंद्र सरकार के महत्वपूर्ण लक्ष्यों में से एक है। इस लक्ष्य को पाने के लिए कुछ दिन पहले बिजली की परियोजनाओं में “डिस्ट्ररीब्यूशन बिहार मॉडल” केंद्र सरकार द्वारा अपनाया गया था और अब “ट्रांसमिशन का बिहार मॉडल” अपनाकर बिजली की अनुपलब्धता वाले राज्यों को आसानी से गुणवत्तापूर्ण बिजली देकर लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ने लगा है।
राज्य सरकार के ऊर्जावान ऊर्जा मंत्री श्री बिजेंद्र प्रसाद यादव के चलते राष्ट्रीय स्तर पर बिहार को जिस तरह गौरव प्राप्त हो रहा है इससे प्रभावित होकर समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने उन्हें हृदय से बधाई दी है और पटना के पीएमसीएच को संसार का सबसे बड़ा अस्पताल बनाने के लिए साढ़े पाँच हज़ार करोड़ रु. की स्वीकृति कैबिनेट द्वारा दिये जाने पर सूबे के मुखिया नीतीश कुमार का डॉ.मधेपुरी ने इस्तकबाल किया है।

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पीएमसीएच बनेगा दुनिया का सबसे बड़ा अस्पताल

बिहारवासियों के लिए बड़ी खबर। पटना स्थित पीएमसीएच विश्व का सबसे बड़ा अस्पताल बनने जा रहा है। महज कुछ वर्षों के भीतर यहां बेड की संख्या 5462 होगी। जी हाँ, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में बिहार कैबिनेट ने शनिवार को पीएमसीएच को विश्व का सबसे बड़ा और अत्याधुनिक अस्पताल बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके लिए 5540 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं। अस्पताल का विस्तारीकरण तीन चरणों में और सात वर्ष के भीतर पूरा किया जाएगा। हालांकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस काम को और भी पहले कर लेने की आवश्यकता जताई है।

कैबिनेट विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार के अनुसार पीएमसीएच अपने नए अवतार में पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल और ग्रीन बिल्डिंग के मानकों के अनुरूप होगा। अस्पताल परिसर में 450 बेड का धर्मशाला भी बनाया जाएगा। उनके द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार यहां एमबीबीएस की सीटों की संख्या को 150 से बढ़ा कर 250 किया जाएगा। वहीं पीजी सीटों की संख्या को 146 से बढ़ा कर 200 किया जाएगा। सुपर स्पेशियलिटी सीटों की संख्या 8 से बढ़ा कर 36 की जाएगी।

बता दें कि वर्तमान में बेलग्रेड (सर्बिया) में दुनिया का सबसे बड़ा अस्पताल है। वहां कुल 3500 बेड हैं। कुछ वर्षों के बाद 5462 बेड के साथ यह गौरव पीएमसीएच के नाम हो जाएगा। फिलहाल यहां बेड की संख्या 1700 है।

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सरदार पटेल की जीवनी सभी स्कूलों के पाठ्यक्रमों में हो शामिल- डॉ.मधेपुरी

भारतरत्न सरदार बल्लभभाई पटेल भारत के स्वतंत्रता संग्राम के सर्वश्रेष्ठ सेनानी रहे और भारत की आजादी के बाद वे प्रथम गृह मंत्री एवं उप-प्रधानमंत्री बने | बारडोली सत्याग्रह का नेतृत्व कर रहे पटेल को सत्याग्रह की सफलता पर वहाँ की महिलाओं ने ‘सरदार’ की उपाधि से अलंकृत की……. | उसी लौह पुरुष सरदार पटेल को एकमात्र सक्षम व्यक्ति मानते हुए महात्मा गाँधी ने बहुत सोच-विचार करने के बाद ही राज्यों की जटिल समस्याओं का हल निकालने हेतु कदम उठाने को कहा था……… जिसे सरदार ने बखूबी करके दिखा दिया…….|

बता दें कि वैसे समर्पित महान देशभक्त सरदार पटेल की 143वीं जयंती कौशिकी क्षेत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ एवं सम्मेलन के सचिव डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी सहित अन्य साहित्यकारों व बुद्धिजीवियों द्वारा “राष्ट्रीय एकता दिवस” के रूप में स्थानीय कला कुटीर में मनाई गई |

यह भी जानिए कि इस अवसर पर इतिहास के साथ-साथ दर्जनों साहित्यक पुस्तकों के रचनाकार श्री शलभ ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगभग 3000 करोड़ की लागत से गुजरात में जहाँ संसार की सबसे ऊंची प्रतिमा हमारे लौह पुरुष सरदार पटेल की लगाकर हम भारतीयों को गौरवान्वित किया है वहीं इस सम्मेलन के यशस्वी सचिव डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी द्वारा उजागर किया गया यह विचार- “लौह पुरुष की जीवनी सभी राज्यों के स्कूली पाठ्यक्रमों में शामिल हो”- उस प्रतिमा की ऊंचाई से भी अधिक ऊंचा लगता है | भला क्यों नहीं; भारतरत्न डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम एवं समाजवादी चिन्तक भूपेन्द्र नारायण मंडल जैसी हस्तियों के सानिध्य में रह चुके डॉ.मधेपुरी इतिहास पुरुष रास बिहारी लाल मंडल व आधुनिक बिहार के निर्माता शिवनंदन प्रसाद मंडल आदि की जीवनी लिखकर समादृत जो होते रहे हैं और गत वर्ष तो इनकी रचना “छोटा लक्ष्य एक अपराध है” को झारखंड सरकार ने छठे वर्ग के पाठ्यक्रम में शामिल कर इन्हें भरपूर सम्मान दिया है |

अंत में कुछ कवियों ने कविता के जरिये तो उपस्थित कुछ लेखकों ने शब्द-पुष्पों के माध्यम से कठोर निर्णय लेने वाले राजनेता द्वय सरदार पटेल एवं इंदिरा गाँधी को (उनकी पुण्यतिथि पर) श्रद्धांजलि दी |

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जदयू मीडिया सेल ने जारी की प्रखंड संयोजकों की सूची

गुरुवारल को पटना स्थित जदयू मीडिया सेल मुख्यालय में प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के बाद मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप ने प्रखंड मीडिया संयोजकों की पहली सूची जारी की। आज जारी सूची में कुल 320 प्रखंडों संयोजकों के नाम हैं। आज की महत्वपूर्ण बैठक में जिन प्रदेश पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया उनमें प्रभात रंजन झा, धनंजय शर्मा, डॉ. धीरज सिन्हा, कैप कुमार, विनीता स्टेफी, प्रवीण तिवारी, प्रभात कुमार आर्य, प्रिंस श्रीवास्तव, राहुल किशोर सिन्हा, राधा रानी, विकास कुमार सिंह एवं आशुतोष सिंह राठौड़ शामिल हैं।
प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप ने कहा कि नवंबर में ही शेष प्रखंडों के साथ-साथ सेक्टर संयोजकों की सूची भी जारी कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि आज की बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार दिसंबर में राजधानी पटना में प्रदेश, जिला एवं प्रखंड संयोजकों के साथ-साथ सभी प्रखंडों के चुने हुए कार्यकर्ताओं का विशाल सम्मेलन आयोजित किया जाएगा जिसमें जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष व माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, प्रदेश अध्यक्ष व राज्यसभा सदस्य बशिष्ठ नारायण सिंह एवं राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) व संसदीय दल के नेता आरसीपी सिंह शामिल होंगे। डॉ. अमरदीप ने कहा कि जदयू मीडिया सेल 2019 और 2020 के चुनाव में अपनी भूमिका को धारदार और प्रभावी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
ध्यातव्य है कि वर्तमान में जदयू मीडिया सेल की टीम में 28 प्रदेश कार्यसमिति सदस्य, 51 संगठन जिलों के संयोजक तथा 7 तकनीकी समिति के सदस्य शामिल हैं। इसके साथ ही पार्टी के 15 जाने-माने चेहरे परामर्शदात्री समिति में हैं।

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