दैनिक जागरण द्वारा 10 दिवसीय पौधरोपण कार्यक्रम का आगाज !

जिले के वायुमंडल को प्रदूषण मुक्त रखने हेतु “पौधरोपण जन अभियान” के तहत दैनिक जागरण द्वारा (18 से 28 जुलाई तक) 10 दिवसीय कार्यक्रमों में “पौधे लगाएं, वृक्ष बचाएं” का आगाज किया गया |

बता दें कि विश्व पर्यावरण को सुरक्षा प्रदान करनेवाले इस सामाजिक सरोकार के जन अभियान का शुभारंभ मधेपुरा कॉलेज परिसर में विभिन्न प्रकार के पौधरोपण कर किया गया जिसमें ब्यूरोचीफ धर्मेंद्र भारद्वाज की पूरी टीम के अलावे मुख्यरुप से भागीदारी निभाते हुए देखे गये- जिप अध्यक्ष मंजू देवी, डीडीसी मुकेश कुमार, समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी, एसडीएम वृंदालाल, एसडीपीओ मो.वसी अहमद, नप उपाध्यक्ष अशोक यदुवंशी, एचओडी डॉ.रामचंद्र मंडल, डॉ.आलोक कुमार, हरफनमौला ध्यानी यादव, वार्ड पार्षद विनीता भारती, मनीष कुमार मिंटू, कबड्डी संघ के सचिव अरुण कुमार, सृजन दर्पण के अध्यक्ष ओमप्रकाश , सचिव विकास कुमार की पूरी टीम सहित सोनू-रंजन, अभिषेक व निरंजन आदि को सक्रिय देखा गया |

यह भी जानें कि इस अभियान के तहत मधेपुरा जिले के सभी प्रखंडों में दैनिक जागरण परिवार की ओर से हजारों-हजार पौधरोपण के साथ-साथ उसकी सुरक्षा व्यवस्था के लिए संकल्प दिलाया जा रहा है, शपथ-ग्रहण भी कराया जा रहा है |

इस अवसर पर साहित्यिक संस्था सृजन दर्पण के रंगकर्मियों द्वारा विकास कुमार के निर्देशन में “हल्ला बोल” नाटक के माध्यम से लोगों को यह संदेश दिया गया कि बेसुमार वृक्षों की कटाई से पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है तथा संसार पर संकट के बादल मंडरा रहा है | इस लघु नाटक में रंगकर्मी – सौरभ-सुमन-राखी, निखिल-सत्यम-भारती एवं सुशील आदि की भूमिका प्रभावकारी रही जिसके माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के बाबत वृक्ष बचाने एवं पौधे लगाने हेतु जागरूकता पैदा की गई |

अंत में समाजसेवी साहित्यकार डॉ.मधेपुरी ने रंगकर्मियों से कहा कि भारत के ऋषि-मुनियों द्वारा आरंभ से ही पर्यावरण संरक्षण का ध्यान रखा गया है और कुछ वृक्षों को पूजनीय बना दिया गया जो खासकर रात्रि में भी ऑक्सीजन छोड़ते हैं, जैसे- पीपल….. तुलसी…… नीम आदि जिन्हें सभी पालते हैं, काटते नहीं……|

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महाकवि नीरज: लगेंगी सदियां उन्हें भुलाने में

महान गीतकार, महाकवि गोपालदास नीरज, दिनकर ने जिन्हें ‘हिन्दी की वीणा’ कहा था, नहीं रहे। 19 जुलाई की शाम 93 वर्ष के नीरज जी का दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में निधन हो गया। ‘दर्द दिया है’, ‘आसावरी’, ‘बादलों से सलाम लेता हूँ’, ‘गीत जो गाए नहीं’, ‘नीरज की पाती’, ‘नीरज दोहावली’, ‘गीत-अगीत’, ‘कारवां गुजर गया’, ‘पुष्प पारिजात के’, ‘काव्यांजलि’, ‘नीरज संचयन’, ‘नीरज के संग-कविता के सात रंग’, ‘बादर बरस गयो’, ‘मुक्तकी’, ‘दो गीत’, ‘नदी किनारे’, ‘लहर पुकारे’, ‘प्राण-गीत’, ‘फिर दीप जलेगा’, ‘तुम्हारे लिये’, ‘वंशीवट सूना है’ और ‘नीरज की गीतिकाएँ’ जैसी रचनाओं से हमारी भाषा और संवेदना को समृद्ध करने वाले नीरज जीवन भर कविता लिखने में लगे रहे। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हिन्दी के माध्यम से जहां उन्होंने साधारण पाठकों के मन और मस्तिष्क में अपनी जगह बनाई वहीं गंभीर पाठकों को भी झंझोरा। उनकी अनेक कविताओं के अनुवाद गुजराती, मराठी, बंगाली, पंजाबी, रूसी आदि भाषाओं में हुए।

गोपाल दास नीरज का जन्म 4 जनवीर 1925 में उत्तर प्रदेश के इटावा के एक गांव में हुआ था। प्रारंभ में उनके ऊपर हरिवंश राय बच्चन जी का गहरा प्रभाव रहा। बाद में उन्होंने अपना रास्ता खुद तलाश किया। बकौल नीरज जी बच्चन जी से पहले हिन्दी कविता आकाश में घूम रही थी, वह जीवन से संबंधित नहीं थी। बच्चन जी ने आकाशीय कविता को उतारकर जमीन पर खड़ा कर दिया और सामान्य आदमी जैसा सुख-दुख भोग रहा है, उस सुख-दुख की कहानी उन्होंने अपनी कविता के माध्यम से कही। ठीक यही काम नीरज जी ने किया। देश की कई पीढ़ियों के दिल की आवाज़ को वे आजीवन गुनगुनाहट में बदलते रहे। इसमें शायद ही किसी की दो राय हो कि बच्चन जी के बाद मंच पर किसी ने पूरी ठसक और धमक के साथ राज किया तो वे नीरज ही थे। एक बार की बात है कि बस में वे और बच्चनजी एक साथ यात्रा कर रहे थे। जगह कम होने के काऱण बच्चन जी ने उनसे कहा था कि मेरी गोद में बैठ जाओ। तब नीरज जी ने कहा था, आपकी गोद में तो बैठा ही हूँ, लेकिन आपकी गोद का भी सम्मान रखूँगा, एक दिन इसी तरह लोकप्रिय होऊँगा जिस तरह आप हुए हैं। बच्चन जी ने इस पर आशीर्वाद दिया था उन्हें और ये आशीर्वाद किस कदर लगा इसका सबूत उनके लाखों चाहने वाले देंगे आपको।

पद्मभूषण से सम्मानित गोपाल दास नीरज ने कई प्रसिद्ध फिल्मों के गीतों की रचना भी की। महज पाँच साल के फिल्मी सफर में उन्होंने तीन बार फ़िल्म फेयर पुरस्कार जीता। ‘कारवाँ गुजर गया गुबार देखते रहे’, ‘जीवन की बगिया महकेगी’, ‘काल का पहिया घूमे रे भइया!’, ‘बस यही अपराध मैं हर बार करता हूँ’, ‘ए भाई! ज़रा देख के चलो’, ‘शोखियों में घोला जाए फूलों का शबाब’, ‘लिखे जो खत तुझे’, ‘दिल आज शायर है’, ‘खिलते हैं गुल यहां’, ‘फूलों के रंग से’, ‘रंगीला रे! तेरे रंग में’, ‘आदमी हूं आदमी से प्यार करता हूं’ जैसे गीतों को भला कौन भूल सकता है। ये गीत हिन्दी सिनेमा के लिए किसी धरोहर से कम नहीं।

बहरहाल, नीरजजी कारवां लेकर आगे गुजर गए लेकिन उसका गुबार सदियों तक कायम रहेगा। उन्होंने बिल्कुल सही कहा था – इतने बदनाम हुए हम तो इस ज़माने में, लगेंगी आपको सदियाँ हमें भुलाने में। शब्दो के उस मसीहा को मेरा शत्-शत् नमन।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. अमरदीप

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डॉ.मधेपुरी ने विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग को दस हज़ार ₹ देने की घोषणा की- प्रतिकुलपति डॉ.फारुख अली

बी.एन.एम.यू. (नॉर्थ कैंपस) के स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग में ʼकाव्य-संगीतोत्सवʼ का सरस आयोजन विभागाध्यक्ष डॉ.सीताराम शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित की गई। इस अवसर पर साहित्य साधिका व हिन्दी विभाग में कार्यरत यूनिवर्सिटी प्रोफेसर डॉ.मंजुरानी सिंह सहित संगीत में प्रवीणता प्राप्त स्वर-साधक डॉ.अजय कुमार राय विश्वभारती शांतिनिकेतन से पधारे अतिथि द्वय को शाॅल-पाग व बुके आदि से सम्मानित किया भू.ना.मंडल विश्वविद्यालय के विद्वान प्रतिकुलपति डॉ.फारुख अली एवं विश्वविद्यालय के विभिन्न पदों पर कार्यरत रह चुके समाज सेवी – साहित्यकार डॉ. भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने । लगे हाथ प्रतिकुलपति डॉ.फारुख अली सहित डॉ.मधेेेपुरी  एवं वर्तमान विभागाध्यक्ष डॉ.सीताराम शर्मा को भी  पाग-शाॅल एवं माला देकर सम्मानित किया गया।

बता दें कि कार्यक्रम का आरंभ उद्घाटनकर्ता डॉ.फारुख अली प्रतिकुलपति एवं डॉ.मधेपुरी सहित अतिथि द्वय डॉ.मंजू-डॉ.अजय आदि ने सम्मिलित रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। प्रतिकुलपति ने अपने संबोधन में कहा कि नौ रसों से सराबोर काव्य जब संगीत में ढलता है तो प्रेरणा के साथ-साथ जीवन को गतिशील रखने के लिए लय देने का भी काम करता है | डॉ.मधेपुरी ने जहाँ विश्वभारती शांतिनिकेतन से आई प्रोफ़ेसर डॉ.मंजु रानी को साहित्य साधिका बताते हुए यही कहा कि साहित्य समाज का दर्पण है वहीं स्वर साधक डॉ.अजय के सुर-साधना की प्रशंसा करते हुए कहा कि संगीत समाज की धड़कन है |

यह भी जानिए कि नव निर्माण की प्रेरणा देनेवाला संगीत के सशक्त स्वर साधक डॉ.अजय राय जब विभिन्न कवियों की रचनाओं को माईक के बिना ही स्वर देने में कठिनाई महसूसने लगे तो डॉ.मधेपुरी सरीखे संवेदनशील साहित्यकार ने प्रतिकुलपति के कानों में कुछ कहा और लगे हाथ उद्घाटनकर्ता प्रतिकुलपति डॉ.फारुख अली ने मनमोहक गीतों के समापन के तुरंत बाद ही यह घोषणा कर दी- “पीजी हिन्दी विभाग के साहित्यिक कार्यक्रमों के उद्घाटन एवं संचालन हेतु एक बेहतरीन दीप एवं एक सुन्दर पोर्टेबल स्पीकर सेट गिफ्ट करने के लिए दस हज़ार रु. दान देंगे समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.मधेपुरी……..इनकी भावनाओं का कद्र हम सभी तालियों की गडगडाहट  के साथ करें |”

इसके साथ ही संकायाध्यक्ष डॉ.ज्ञानांजय द्विवेदी सहित सभी विभागों के अध्यक्षों व शिक्षकों डॉ.आर.के.पी रमण , डॉ.नरेश, डॉ.मनोरंजन, डॉ.भागवत, डॉ.सुभाष, डॉ.गणेश, डॉ.विमलसागर, सियाराम यादव मयंक , डॉ.अरविन्द , डॉ.आलोक , डॉ.अरुण, डॉ.मनोज, डॉ.आनंद , डॉ.अरविन्द, सोनम सिंह सहित एडवोकेट आर्यादास (गोल्ड मेडलिस्ट), रंगकर्मी विकास कुमार आदि को संचालक द्वय डॉ.चौधरी एवं डॉ.काश्यप ने संयुक्तरूप से साधुवाद दिया |

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ट्रंप-पुतिन की ऐतिहासिक मुलाकात

ट्रंप के अगुआई में अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच जमी बर्फ के पिघलने के बाद अब रूस के साथ भी अमेरिका का तनाव भरा संबंध सामान्य होने की राह पर है। पूरी दुनिया के लिए ये खुशी की बात है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच सोमवार को फिनलैंड की राजधानी हेलसिंकी में ऐतिहासिक मुलाकात हुई। इस मौके पर ट्रंप ने जहां एक असाधारण रिश्ते का वादा किया, वहीं पुतिन ने कहा कि दुनियाभर के विवादों को खत्म करने का यह सही समय है। भले ही अमेरिका और रूस के संबंध उतार-चढ़ाव भरे रहे हों, पर सोमवार को जब दोनों देशों के नेता फिनलैंड की राजधानी हेलसिंकी में मिले तो उनमें बेहतरीन रिश्ते बनाने की ललक साफ दिखाई दी।

समिट के दौरान ट्रंप ने कहा कि सच कहूं तो हम पिछले कई सालों से साथ नहीं हैं। पर मेरा मानना है कि दुनिया हमें साथ देखना चाहती है। हम दोनों महान परमाणु शक्तियां हैं। मैं केवल पिछले दो सालों से राष्ट्रपति हूं लेकिन मुझे उम्मीद है कि हमारा रिश्ता असाधारण रहने वाला है। बता दें कि रूस के साथ तनावपूर्ण संबंधों के लिए अपने पूर्ववर्ती नेताओं की मूर्खताओं को जिम्मेदार ठहराते हुए ट्रंप इस सम्मेलन में शामिल हुए हैं। वहीं, रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि ट्रंप ने हमेशा फोन के जरिए और अतंरराष्ट्रीय इवेंट्स के दौरान मुलाकात करके संपर्क बनाए रखा। उन्होंने आगे कहा कि अब समय आ गया है कि हम अलग-अलग अतंरराष्ट्रीय समस्याओं और संवेदनशील मुद्दों पर बात करें।

गौरतलब है कि दोनों राष्ट्रपतियों की बातचीत अकेले में हुई। मुलाकात के लिए कमरे में जाने से पहले ट्रंप ने कहा कि हमारे पास बात करने के लिए कई अच्छी चीजें हैं। हम व्यापार से लेकर सेना, मिसाइल से लेकर परमाणु और चीन तक पर बात करेंगे। हालांकि इनके अकेले मिलने पर कई समीक्षक चिन्ता जता रहे थे कि बैठक के दौरान दोनों देशों के राष्ट्रपति के अकेले होने से कोई इस बात को देखने के लिए वहां मौजूद नहीं होगा कि आखिर उन दोनों के बीच क्या बातचीत हुई।

बहरराल, दोनों महाशक्तियों की मुलाकात के दौरान एक बड़ी दिलचस्प बात हुई। ट्रंप ने मुलाकात के दौरान जहां सबसे पहले पुतिन को फीफा विश्व कप के शानदार आयोजन की बधाई दी, वहीं पुतिन ने ट्रंप को इस ऐतिहासिक मुलाकात के मौके पर एक फुटबॉल भेंट की और कहा, “मिस्टर प्रेजिडेंट, मैं आपको यह बॉल देता हूँ और अब बॉल आपकी कोर्ट में है।“

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जिले के किसानों को नि:शुल्क दिया जाएगा 1 लाख कीमती पौधा

केन्द्र सरकार की राष्ट्रीय कृषि वानिकी योजना के तहत जिला वन विभाग जिले के प्रत्येक किसान को बारिश के मौसम में ऐसे-100 पौधे उपलब्ध कराएगी जो खेत व बागान के मेड़ पर भी लगाकर किसान कम समय में बेहतर आमदनी कर सकते हैं | इस योजना के तहत किसानों को प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी |

इस बावत वन विभाग के अधिकारी ने बताया कि पौधों के बड़े हो जाने पर उस पेड़ पर किसानों का ही पूर्ण रूप से अधिकार होगा | उससे होने वाली आय पर भी किसानों का ही हक होगा |

बता दें कि जिले के प्रत्येक किसान को महोगनी, सागवान, शीशम, यूकेलिप्टस जैसी कीमती सौ पौधे मुफ्त में दी जाएगी जिसके लिए किसानों को कुछ पात्रता पूरी करनी होगी- (a) आवेदक कृषक के नाम से भूमि होनी चाहिए | (b) या फिर जमीन उसके नाम से लीज पर हो | (c) इसके साथ ही आवेदन वन प्रमण्डल पदाधिकारी के नाम देकर पौधे प्राप्त कर सकते हैं |

यह भी जान लें कि वन विभाग रोपे गये पौधों की देख-रेख के लिए किसानों को अगले 3 वर्षों तक पैसा भी देगा | प्रोत्साहन के तौर पर उत्तर जीविता के अनुसार प्रथम वर्ष के अंत में ₹14 प्रति पौधा, दूसरे, तीसरे एवं चौथे वर्ष के अंत में 7-7 रु प्रति पौधा किसानों को दिया जाएगा |

चलते-चलते यह भी बता दें कि भारत सरकार की इस योजना से किसानों की दोहरी आय बढ़ने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण व विस्तार में यह मील का पत्थर साबित होगा |

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फीफा विश्वकप फ्रांस के नाम

जो जीता वही सिकंदर। महत्वपूर्ण मौकों पर स्कोर करने की अपनी काबिलियत और शानदार किस्मत की बदौलत फ्रांस ने फीफा विश्वकप के रोमांचक फाइनल में दमदार क्रोएशिया को 4-2 से हराकर दूसरी बार विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। उपविजेता रहा क्रोएशिया पहली बार फाइनल में पहुंचा था। उसने अपनी तरफ से हर संभव प्रयास किए और अपने कौशल और चपलता से दर्शकों का दिल भी जीता लेकिन आखिर में जालटको डालिच की टीम को दूसरे स्थान से ही संतोष करना पड़ा।

फाइनल में दोनों ही टीमें 4-2-3-1 के संयोजन के साथ मैदान पर उतरी थीं। क्रोएशिया ने अच्छी शुरुआत की और पहले हाफ में न सिर्फ गेंद पर अधिक कब्जा जमाये रखा बल्कि इस बीच आक्रामक रणनीति भी अपनाए रखी। उसने दर्शकों में रोमांच भरा जबकि फ्रांस ने अपने खेल से निराश किया। पर भाग्य फ्रांस के साथ था और वह बिना किसी खास प्रयास के दो गोल करने में सफल रहा। फ्रांस को पहला मौका 18वें मिनट में मिला और वह इसी पर अंत तक बढ़त बनाए रखने में कामयाब रहा।

बहरहाल, फ्रांस ने 18वें मिनट में मारियो मैंडजुकिच के आत्मघाती गोल से बढ़त बनाई लेकिन इवान पेरिसिच ने 28वें मिनट में बराबरी का गोल दाग दिया। फ्रांस को हालांकि जल्द ही पेनल्टी मिली जिसे एंटोनी ग्रीजमैन ने 38वें मिनट में गोल में बदला जिससे फ्रांस हाफ टाइम तक 2-1 से आगे रहा। फ्रांस की ओर से पॉल पोग्बा ने 59वें मिनट में तीसरा गोल दागा जबकि किलियान एमबापे ने 65वें मिनट में फ्रांस की बढ़त 4-1 कर दी। जब लग रहा था कि अब क्रोएशिया के हाथ से मौका निकल चुका है तब मैंडजुकिच ने 69वें मिनट में गोल करके उसकी उम्मीद जगाई। पर नियति ने मानो फ्रांस की जीत तय कर दी थी।

गौरतलब है कि फ्रांस ने इससे पहले 1998 में विश्व कप जीता था। तब उसके कप्तान डिडियर डेसचैम्प्स थे जो अब टीम के कोच हैं। इस तरह से डेसचैम्प्स खिलाड़ी और कोच के रूप में विश्व कप जीतने वाले तीसरे व्यक्ति बन गये हैं। उनसे पहले ब्राजील के मारियो जगालो और जर्मनी फ्रैंक बेकनबऊर ने यह उपलब्धि हासिल की थी।

चलते-चलते कहना पड़ेगा कि क्रोएशिया ने बेहतर फुटबॉल खेली लेकिन फ्रांस अधिक प्रभावी और चतुराईपूर्ण खेल दिखाया, यही उसकी असली ताकत है जिसके दम पर वह 20 साल बाद फिर चैंपियन बनने में सफल रहा। पेरिस की सड़कें जश्न से सराबोर हैं आज। निश्चित रूप से चैम्पियन टीम बधाई की हकदार है। पर क्रोएशिया को विशेष साधुवाद देना भी एक सच्चे खेलप्रेमी का दायित्व बनता है।

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सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि नियोजित शिक्षकों को 26 हज़ार ही क्यों ?

सूबे बिहार में 3 लाख 70 हज़ार नियोजित शिक्षक कार्यरत हैं जिन्हें 20-25 हज़ार रूपये वेतन मिलता है | यदि पटना उच्च न्यायालय के न्यायादेश को सुप्रीम कोर्ट द्वारा मान लिया जाता तो इन शिक्षकों को 35-44 हज़ार रु. वेतन हो जाता |

बता दें कि 2017 में पटना हाईकोर्ट ने इन समाज के सृजनहार शिक्षकों को समान काम के लिए समान वेतन देने का आदेश दिया था जिसके खिलाफ सूबे की सरकार सुप्रीम कोर्ट चली गई | सुप्रीम कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई अब जुलाई के 31 तारीख को होगी |

यह भी जानिए कि शिक्षकों के वेतन का 70% केंद्र सरकार और 30% सूबे की सरकार देती है | इसलिए तो सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार से पूछा भी है कि जब चपरासी को ₹36 हज़ार रूपये वेतन दे रहे हैं तो समाज के रक्षक और राष्ट्र निर्माता शिक्षकों को केवल 26 हज़ार क्यों ?

सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों से कहा है कि केंद्र सरकार की रिपोर्ट का अध्ययन कर लें और 31 जुलाई के पहले अपना पक्ष काउंटर एफिडेविट के माध्यम से कोर्ट के सामने उपस्थित करें |

चलते-चलते यह भी बता दें कि बिहार के नियोजित शिक्षकों को केंद्र सरकार इसलिए समान वेतन नहीं देना चाहती क्योंकि बिहार के बाद अन्य राज्यों की ओर से भी इस तरह की मांग उठने लगेगी…………|

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शरद यादव की सदस्यता मामले पर अंतिम सुनवाई की तारीख तय

दिल्ली हाईकोर्ट ने जनता दल यूनाइटेड के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव की सदस्यता मामले पर सुनवाई के लिए अंतिम तारीख तय कर दी है। अंतिम सुनवाई के लिए 25 सितंबर की तारीख मुकर्रर की गई है। 25 सितंबर को दोनों पक्षों की मौजूदगी में कोर्ट की सुनवाई होगी। इससे पहले 11 सितंबर को कांग्रेस नेता और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल शरद यादव की तरफ से पक्ष रखेंगे। इसके बाद 18 सितंबर को जेडीयू के वकील को दिल्ली हाईकोर्ट ने पक्ष रखने का समय दिया है।
ध्यातव्य है कि इससे पूर्व बीते सात जून को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि शरद यादव बतौर सांसद मिलने वाले वेतन, भत्ते और दूसरी सुविधायें नहीं ले सकते, लेकिन वह सरकारी बंगले में रह सकते हैं। गौरतलब है कि शरद यादव को राज्यसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित किया जा चुका है, जिसे उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
बता दें कि शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के पिछले साल 15 दिसंबर के आदेश में संशोधन कर दिया है। इसी आदेश में शरद यादव को उनकी याचिका लंबित रहने के दौरान वेतन, भत्ते और दूसरी सुविधायें प्राप्त करने और सरकारी बंगले में रहने की अनुमति दी थी। जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव एवं शरद यादव के स्थान पर राज्यसभा में दल के नेता बनाए गए सांसद आरसीपी सिंह ने हाईकोर्ट में शरद यादव और अली अनवर को अयोग्य करार देने का अनुरोध करते हुए कहा था कि उन्होंने पार्टी के निर्देश का उल्लंघन करते हुए पटना में विपक्षी दलों की सभा में शिरकत की थी।
याद दिला दें कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा गठबंधन छोड़ पुन: एनडीए के साथ सरकार बना लेने से शरद यादव नाखुश थे। उनकी नाराजगी इस कदर बढ़ गई थी कि उन्होंने बागी तेवर अपना लिए थे। इस दौरान लालू प्रसाद यादव और उनकी पार्टी आरजेडी से उनके मधुर संबंध बने और अब अपनी पार्टी लोकतांत्रिक जनता दल (लोजद) बनाकर वे तेजस्वी के साथ कदमताल करने की कोशिश में जुटे हैं।

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शराबबंदी कानून में संशोधन

बिहार सरकार ने शराबबंदी कानून में बड़े बदलाव को मंजूरी दी है। बुधवार को कैबिनेट ने इसमें कई बदलाव किए। अब राज्य सरकार विधानसभा के मानसून सत्र में इसे पास कराएगी। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पिछले महीने ही इस कानून में संशोधन के संकेत दिए थे। कानून में किए गए बदलाव के अनुसार शराब मिलने पर सजा को नरम किया गया है। संशोधन के तहत शराब मिलने पर घर, वाहन और खेत जब्त करने के प्रावधानों में नरमी बरती गई है। साथ ही इसके तहत सामूहिक जुर्माने को खत्म करने के प्रस्ताव को भी कैबिनेट की तरफ से मंजूरी मिल गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार शराबबंदी से जुड़े पुराने कानून में सरकार ने आठ संशोधन किए हैं। नए कानून में जो प्रावधान किए जा रहे हैं उसके मुताबिक शराब पीकर पहली बार पकड़े जाने पर कम से कम पचास हजार रुपये जुर्माना देना होगा। इसके साथ ही तीन महीने की सजा का भी प्रावधान रहेगा। लेकिन, अपराध जमानती होगा। घर से शराब बरामद होने पर परिवार के सभी सदस्यों को अब सजा नहीं होगी। इस प्रावधान को हल्का कर दिया गया है। सजा पाया कोई व्यक्ति यदि दोबारा कानून का उल्लंघन करता है तो उसे दोगुनी सजा दी जाएगी, इस कानून को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है।

शराब को रखने और ट्रांसपोर्टेशन के लिए इस्तेमाल में लाए जाने वाले परिसर अथवा वाहन जब्त किए जाएंगे। लेकिन यदि किसी परिसर में कोई व्यक्ति शराब का सेवन करता पाया जाता है तो ऐसी स्थिति में उक्त परिसर को जब्त नहीं किया जाएगा। पुराने कानून में किसी गांव अथवा समूह में किसी व्यक्ति द्वारा शराब के सेवन पर समूह और गांव पर सामूहिक जुर्माने के प्रावधान थे। नए कानून में इस प्रावधान को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है।

नए कानून में परिसर को भी परिभाषित किया गया है। पहले के कानून में भवन, दुकान, होटल, रेस्टोरेंट और बार शामिल थे। नए कानून में परिसर की परिभाषा में बूथ, नौका, छोटी नाव और वाहनों को भी शामिल किया गया है। शराब की सूचना रहने पर पुलिस को जानकारी नहीं देने पर पूर्व में सजा के प्रावधान थे, जिन्हें नए कानून में पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है।

बता दें कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आबकारी ऐक्ट के दुरुपयोग की शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए कानून में बदलाव का संकेत दिया था। उन्होंने कहा था कि “हमारा इरादा इस ऐक्ट में यथोचित संशोधन का है और हमने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में अपील की है, जिस पर अभी सुनवाई होनी है। हमें बताया गया है कि कानून के गलत इस्तेमाल को कम से कम करने के लिए बदलाव लाया जा सकता है। यह काम हम करेंगे। लेकिन शराब पर रोक जारी रहेगी। लोगों को अभी पता नहीं है कि इसका उनके जीवन खास तौर पर गरीब लोगों के जीवन पर कितना असर पड़ रहा है।”

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MLC डॉ.संजीव वित्तरहितों के बकाये सूद सहित दिलाने में लगे हैं

कोसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के MLC डॉ.संजीव कुमार सिंह ने बिहार विधान परिषद के 188 वें सत्र में तारांकित प्रश्न संख्या-ता.ई.-04 (दिनांक 23-03-2018) के माध्यम से यही प्रश्न किया था-

वित्त अनुदानित शिक्षण संस्थानों का अनुदान वर्षों से बकाया रहने के कारण प्रभावित शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों के अनुदान को सूद समेत भुगतान करने की तिथि सुनिश्चित की जाय |

बता दें कि संबंधित विषय पर डॉ.संजीव कुमार सिंह एम.एल.सी. द्वारा पूछे गये तारांकित प्रश्न का उत्तर तो सदन में दिया गया, परंतु उत्तरित जवाब से माननीय सदस्यों के असंतुष्ट रहने के कारण माननीय उप सभापति महोदय द्वारा यह निदेश देने की कृपा की गई –

“माननीय मंत्री- वित्तविभाग एवं शिक्षा विभाग तथा प्रधानसचिव- वित्त विभाग एवं शिक्षा विभाग के साथ एक बैठक बुलाई जाय !”

यह भी बता दें कि उक्त निदेश के आलोक में माननीय उप सभापति महोदय ने 16 जुलाई 2018 (सोमवार) को 3:00 बजे अपराहन से परिषद के नवनिर्मित भवन के कमरा नंबर- F-27 में वित्त विभाग एवं शिक्षा विभाग के माननीय मंत्रीगण सहित दोनों विभाग के प्रधान सचिवों व पदाधिकारियों सहित इस मुद्दे पर विचार-विमर्श करने हेतु एक बैठक आहुत करने की कृपा की है | जिसमें विचार-विमर्श हेतु परिषद के एक दर्जन विधान पार्षदों को भी आमंत्रित किया गया है |

मौके पर समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र ना.यादव मधेपुरी ने विधान पार्षद डॉ.संजीव कुमार सिंह को नियोजित शिक्षकों के बाबत ‘समान कार्य – समान वेतन’ दिलाने के लिए संघर्षरत रहने के साथ-साथ वित्तरहित कॉलेज शिक्षकों एवं कर्मियों के बकाये राशि को सूद सहित भुगतान करने हेतु जूझते रहने के लिए कोटि-कोटि साधुवाद दिया तथा हृदय से आशीर्वाद देते हुए यही कहा कि ताजिंदगी एमएलसी रहे अपने पिताश्री शारदा बाबू की तरह शिक्षकों के हित के लिए अहर्निश संघर्ष करते रहें ……!

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