विश्वविद्यालयों में नए शिक्षकों की नियुक्ति विवि सेवा आयोग द्वारा

शिक्षकों की किल्लत से जूझ रहे बिहार के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों कि लिए उम्मीद की नई किरण! जी हाँ, राज्य के विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों पर नई नियुक्तियां बीपीएससी के स्थान पर अब राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग के माध्यम से होंगी। बता दें कि राज्य मंत्रिमंडल ने मंगलवार को बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग (संशोधन) विधेयक 2018 के प्रारूप को मंजूरी दे दी। अब इस विधेयक को विधानमंडल के दोनों सदनों में पेश किया जाएगा।

गौरतलब है कि मंगलवार को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में शिक्षा विभाग के प्रस्ताव पर विमर्श के बाद मंत्रिमंडल ने विश्वविद्यालय सेवा आयोग (संशोधन) विधेयक 2018 के प्रारूप को मंजूरी दी। आयोग गठन के लिए पूर्व से स्वीकृत प्रस्ताव में यह व्यवस्था थी कि विश्वविद्यालय और कॉलेज शिक्षकों की नियुक्तियां बिहार लोक सेवा आयोग के स्थान पर विश्वविद्यालय सेवा आयोग के माध्यम से हों। संशोधन के बाद इसमें ‘नई नियुक्तियां’ शब्द जोड़ा गया है।

यहां बता दें कि 2014 में सरकार ने बिहार लोक सेवा आयोग को विश्वविद्यालय शिक्षकों के 3354 रिक्त पदों पर नियुक्ति की अधियाचना भेजी थी। जिसमें से बीपीएससी ने तकरीबन 17 सौ पदों पर नियुक्तियां कर ली हैं। आयोग गठन के बाद शेष नियुक्तियां इसके माध्यम से करने में नियुक्तियों में विलंब की आशंका थी। साथ ही बिहार लोक सेवा आयोग से होने वाली नियुक्तियों पर रोक भी लगानी होती। इस समस्या के समाधान के लिए यह फैसला हुआ है कि विश्वविद्यालय सेवा आयोग को नई नियुक्तियों की अधियाचना दी जाएगी। बीपीएससी को जिन नियुक्तियों का प्रस्ताव दिया गया है वे बीपीएससी के माध्यम से ही होंगी।

वैसे चलते-चलते बता दें कि 3354 पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति होने के बाद भी विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के करीब सात हजार चार सौ पद रिक्त रह जाएंगे। उम्मीद की जानी चाहिए कि आयोग को इन नई नियुक्तियों के लिए अधियाचना भेजे जाने में अनावश्यक विलंब नहीं होगा।

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शहीद सदानंद का 45वाँ शहादत दिवस सादगी के साथ मना

मधेपुरा अनुमंडल कार्यालय के सन्निकट 1974 के जे.पी. आन्दोलन में 19 मार्च को शहीद हुए धुरगांव के सदानंद का 45वाँ शहादत दिवस सभी आंदोलनकारियों की उपस्थिति में सादगी के साथ मनाया गया |

बता दें कि पूर्व विधान पार्षद विजय कुमार वर्मा, पूर्व विधायक परमेश्वरी प्रसाद निराला, समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी, इन्द्रनारायण यादव, प्रधान, विजेंद्र प्रसाद यादव, डॉ.नरेश कुमार, जयकिशोर यादव, रमण कुमार सिंह, प्रसन्न कुमार, कमल दास, जयकांत, डॉ.विजेंद्र, गोपाल, फुलेन्द्र, गणेश, प्रो.शोभाकान्त, सदरुल होदा, मो.जुमन, अजय-अनिल-उमेश-दिनेश व नवीन आदि युवाओं द्वारा शहीद सदानंद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित किया गया |

इस अवसर पर उपस्थित आंदोलनकारियों द्वारा ‘सदानंद अमर रहे’ के नारे लगाये गये | डॉ.मधेपुरी ने Ex-MLC एवं Ex-MLA सहित मीडिया के लोगों को संबोधित करते हुए यह जानकारी दी कि संवेदनशील डीएम मो.सोहैल द्वारा बिहार दिवस (22 मार्च) के दिन जिला अतिथि गृह के सामने वाले चिल्ड्रन पार्क को “शहीद पार्क” नामित कर जिले के सभी शहीदों के नाम के साथ शहादत तिथियों को अंकित कर सम्मानित किया जायगा |

यह भी जानिए कि देश की रक्षा एवं सीमा की सुरक्षा में हुए शहीदों की सूची उपलब्ध कराने की जवाबदेही डॉ.मधेपुरी को दी गई है जो निम्न प्रकार है- (1) शहीद बाजा शाह, किसुनगंज (20 अगस्त 1942) (2) शहीद चुल्हाय यादव, मनहरा (30 जनवरी 1943), (3) शहीद सदानंद , धुरगाँव (19 मार्च 1974) (4) शहीद प्रमोद कुमार, फुलकहा (9 मई 2001) (5) शहीद प्रमोद कुमार, चामगढ़ (25 सितंबर 2002) (6) शहीद शंकर प्रसाद रजक, मधेपुरा (13 सितंबर 2003)

अंत में उपस्थित आंदोलनकारियों सहित पूर्व विधान पार्षद एवं पूर्व विधायक ने इस कृत्य के लिए संवेदनशील जिलाधिकारी मो.सोहैल को हृदय से धन्यवाद ज्ञापित किया और जिले के शहीदों को सर्वप्रथम समुचित सम्मान देनेवाले डायनेमिक डीएम मो.सोहैल के इस नेक कार्य की भरपूर सराहना समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.मधेपुरी सहित सभी उपस्थित जनों ने की |

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शिक्षा जगत के विश्वकर्मा रहे हैं कोसी के कीर्ति नारायण

शिक्षा जगत को अपने जीवन की आहुति देने वाले अमर पुरुष कीर्ति नारायण मंडल को कोसी अंचल ही नहीं बल्कि, आने वाले दिनों में, संपूर्ण राष्ट्र उन्हें याद करेगा, नमन करेगा | बिना किसी की बातों पर ध्यान दिये, सूरज की तरह अपने काम में लगे रहना और शिक्षा का दीप जला-जला कर अज्ञानता के अंधकार को मिटाते  रहना ही उस विश्वकर्मा के जीवन का उद्देश्य रहा |

कोसी के सातो जिलों में तीन दर्जन से अधिक महाविद्यालयों की स्थापना करने वाले उस महामना मालवीय कहलाने वाले कीर्ति बाबू की 102वीं जयंती उनकी माता श्री के नाम वाले पार्वती विज्ञान महाविद्यालय परिसर में स्थित उनकी प्रतिमा के समक्ष इप्टा कर्मियों द्वारा 18 मार्च को आयोजित किया गया |

बता दें कि श्रद्धानवत अनुयायियों द्वारा कीर्ति बाबू की प्रतिमा पर पुष्पांजलि करने के बाद उनके मानवीय गुणों को करीब से महसूसने वाले समाजसेवी-साहित्यकार प्रो.(डॉ.) भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने सर्वप्रथम अध्यक्षता कर रहे डॉ.नरेश कुमार सहित उपस्थित शिक्षकों-छात्रों को संबोधित किया और यही कहा कि कीर्ति बाबु का जीवन महात्मा कबीर जैसा रहा- जो घर जोर आपनों चले हमारे साथ….. से लेकर….. जस की तस धर दीन्ही चदरिया तक जाकर वे दुनिया को अलविदा कह गये |

इप्टा के संरक्षक डॉ.मधेपुरी विस्तार ने उनके साथ बिताये क्षणों की चर्चा करते हुए अपने संबोधन में यही कहा कि कीर्ति बाबू को जानने के लिए राम-कृष्ण, बुद्ध-महावीर, नानक और मालवीय को जानना होगा | स्वाभिमानी व सत्यवादी कीर्ति नारायण मंडल लोगों को अति साधारण दिखते परंतु उनकी क्षमता असाधारण रही है | समाज के लिए जीना-मरना और कल करो सो आज करना- में विश्वास करने के कारण ही उन्होंने कोसी और सीमांचल के ऊसर वन में तीन दर्जन कॉलेजों की स्थापना कर शिक्षा का दीप जलाया |

मुख्य इप्टा संरक्षक प्रो.श्यामल किशोर यादव, डॉ.विनय कुमार चौधरी, दशरथ प्रसाद सिंह, डॉ.सिद्धेश्वर कश्यप, डॉ.एम.आई.रहमान आदि ने अपने विस्तृत संबोधनों में जहां कोई उन्हें मालवीय तो कोई सर सैयद कहा वहीं किसी ने यहां तक कह डाला कि यदि वे यूपी, महाराष्ट्र में जन्मे होते तो देश की हर चौक-चौराहे पर उनकी प्रतिमा लगी होती………!

अंत में अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ.नरेश कुमार ने कहा कि कीर्ति बाबू का रहन-सहन एवं पहनावा बिल्कुल साधारण परंतु आंतरिक व्यक्तित्व बेहद असाधारण रहा है | वे जो भी ठान लेते, सुबह होते-होते उसे आरंभ कर देते |

कार्यक्रम में अंत तक मौजूद रहने वालों में प्रमुख रहे- डॉ.बी.के.दयाल, डॉ.मधुसूदन यादव, इप्टा उपाध्यक्ष आशीष सोना, प्रदेश सचिव सुभाष चंद्र, तुर्वसु, धीरज कुमार आदि | मंच संचालन किया सुभाष चंद्र ने एवं धन्यवाद ज्ञापन किया तुर्वसु ने |

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भारतीय नववर्ष को आप कितना जानते हैं ?

आधुनिकता की अंधी दौड़ में हम क्या-क्या छोड़े चल रहे हैं क्या इसके बारे में कभी सोचा है आपने? शहरों में रहने की हवस या जरूरत की खातिर हम अपने गांव की मिट्टी की सोंधी सुगंध भूल गए। कम्प्यूटर और स्मार्टफोन ने हमारे बच्चों की मासूमियत छीन ली। अंग्रेजी स्कूल स्टेटस का पैमाना क्या हुए हमारे बच्चे हिन्दी की गिनती तक बिसरा गए। ऐसे में हिन्दी नववर्ष और हिन्दी महीनों से वे अनजान रहें तो क्या आश्चर्य! बहरहाल, आज हिन्दी नववर्ष यानि भारतीय नववर्ष है… विक्रम संवत् 2075 का पहला दिन और साथ ही चैत्र नवरात्रि का पहला दिन भी। इसलिए पहले इस दिन के निमित्त मंगलकामनाएं और फिर कुछ जरूरी और दिलतचस्प बातें।

चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की प्रथम तिथि से आरंभ होता है हमारा भारतीय नववर्ष। इसे सृष्टि-दिवस, नवसंवत्सर या हिन्दू नववर्ष भी कहते हैं। मान्यता है कि इसी दिन यानि आज से एक अरब, 97 करोड़, 39 लाख, 49 हजार व 115 वर्ष पूर्व सूर्योदय से ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना शुरू की थी। लंका पर विजय हासिल करने के पश्चात् प्रभु राम का और 5120 वर्ष पूर्व धर्मराज युधिष्ठिर का राज्याभिषेक इसी दिन हुआ था। यही विक्रम संवत् का प्रथम दिन है। 2073 वर्ष पूर्व सम्राट् विक्रमादित्य ने इसी दिन अपना अखंड राज्य स्थापित किया था। यही नहीं, भारत सरकार का पंचांग शक संवत् भी आज ही के दिन से शुरू होता है।

अब आगे चलें। विक्रमादित्य की भांति शालिवाहन ने हूणों को परास्त करके दक्षिण भारत में श्रेष्ठतम राज्य स्थापित करने हेतु यही दिन चुना था। सिंध प्रांत के प्रसिद्ध समाज-रक्षक वरुणावतार माने जाने वाले संत झूलेलाल इसी दिन प्रकट हुए थे। महान बलिदानी सिक्ख परंपरा के द्वितीय गुरु श्री अंगद देव का प्रगटोत्सव इसी दिन हुआ था और समाज को श्रेष्ठ मार्ग पर ले जाने हेतु स्वामी दयानंद सरस्वती ने इसी दिन को आर्यसमाज की स्थापना के लिए चुना था।

मां आदि शक्ति के नवरात्र यानि बासंतिक नवरात्र का पहला दिन भी यही है। किसी भी कार्य को प्रारंभ करने के लिए इस दिन का मुहूर्त अत्यंत शुभ माना जाता है। इस समय प्रकृति की ओर देखें तो वह नया श्रृंगार करती दिखेगी। नए रंग-बिरंगे फूलों से पौधे लदे हुए मिलेंगे। यही समय फसल काटने का होता है और किसानों को उनकी मेहनत का फल मिलता है। अर्थात् हमारा भारतीय नववर्ष वैज्ञानिक दृष्टि के साथ-साथ प्राकृतिक एवं सामाजिक संरचना को भी प्रस्तुत करता है।

भारतीय संस्कृति में वर्ष का ऐसा कोई दिन नहीं जिसके भीतर हमारे संस्कारों के कुछ बीज ना मिल जाएं। फिर यह तो वर्ष का पहला दिन है। इस दिन आप सुधी पाठकों से एक विनम्र निवेदन कि हम ‘आधुनिक’ जरूर बनें पर अपनी जड़ों को ना भूलें… अपने बच्चों को हम हिन्दी नववर्ष, हिन्दी महीनों और इनसे जुड़ी संस्कृति का ज्ञान जरूर दें..!! ये हर भारतीय का सांस्कारिक दायित्व है… इसके अभाव में हम भले ही चांद पर घर बना लें, मंगल को छूकर आ जाएं, ‘विश्वगुरु’ दुबारा कभी ना बन पाएंगे..!!!

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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मधेपुरा को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाई रंगकर्मी उज्जवल कुमार ने

चार वर्ष पहले यानि 2014 में मधेपुरा जिले के पहले रंगकर्मी के रूप में उज्जवल कुमार ने देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्था- NSD (राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय) की चुनौतीपूर्ण परीक्षा में उत्तीर्णता प्राप्त कर (मात्र 26 सीटों में से एक अपने नाम कर ) बाजी मारी थी | उज्जवल की तमन्ना थी की एनएसडी से निकलने के बाद वह कोसी अंचल की संस्कृति को नई पहचान देने का प्रयास करेगा |

बता दें कि उज्जवल का वह सपना अब पुर्णतः आकार लेता हुआ मधेपुरा के साथ-साथ सुबे बिहार को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए कदम बढ़ा चुका है | एनएसडी नई दिल्ली से नाट्यकला में पीजी डिप्लोमा की डिग्री प्राप्त करने के बाद मधेपुरा का बेटा उज्जवल कुमार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने निर्देशन की बारीकियों का लोहा मनवा रहा है | तभी तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने जा रहे ‘आठवें थिएटर ओलंपिक्स’ में उज्जवल कुमार द्वारा निर्देशित नाटक ’01-12-58’ को भी शामिल किया गया है जिसकी प्रस्तुति 8 अप्रैल 2018 को अभिमंच ऑडिटोरियम, नई दिल्ली में होने जा रही है |

यह भी जानिये कि इस थिएटर ओलंपिक्स में देश-विदेश की नाटकों को शामिल किया जाता है | मधेपुरा के उज्जवल द्वारा निर्देशित नाटक ’01-12-58’ लक्ष्मणपुर बाथे में हुए जनसंघार पर आधारित है | इस वर्ष आठवां थियेटर ओलंपिक्स का आयोजन 17 फरवरी से 8 अप्रैल तक होगा जिसमें 8 अप्रैल को उज्जवल के इस नाटक की प्रस्तुति होगी |

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डीएम मो.सोहैल ने कृषि वैज्ञानिकों के तर्कों को अस्वीकार किया !

मधेपुरा जिले में लगभग 50 हज़ार एकड़ में लगे मकई के खराब बीज के कारण फसल की ऐसी बर्बादी हुई है कि आलमनगर-मुरलीगंज सहित विभिन्न प्रखंडों के पंचायतों व गांवों के आक्रोशित किसानों ने लगातार प्रखंड मुख्यालयों पर धरना दिया, क्षतिपूर्ति की माँग की तथा आत्महत्या करने पर भी उतारू दिखे | विधानसभा में भी विपक्षी सदस्यों ने जमकर हंगामा किया |

बता दें कि सूबे में ऐसी समा बांधते देखकर जहाँ जिले के संवेदनशील एवं अति डायनेमिक डीएम मो.सोहैल एक ओर अपने कृषि वैज्ञानिकों व पदाधिकारियों की पूरी टीम को साथ लेकर मुरलीगंज प्रखंड के रामपुर- दीनापट्टी गाँव के अन्नदाता किसानों की लहलहाते बिना दाना वाले मकई के खेत की आड़ पर गिरते-संभलते एवं परेशानियों से रू-ब-रू होते दिख रहे हैं वहीं दूसरी ओर 22-23 मार्च को बिहार दिवस समारोह को भव्यता के साथ मनाने हेतु देश की रक्षा एवं सीमा की सुरक्षा में शहीद हुए इस जिले के जाँवाजों को सम्मान देने के लिए जिला अतिथि गृह के सामने वाले (तत्कालीन सांसद डॉ.रवि के विकास मद से बने) चिल्ड्रन पार्क को “शहीद पार्क” नामित कर उन शहीदों को सम्मानित करने के लिए (स्वतंत्रता संग्राम से अद्यतन) शहीदों की सूची उपलब्ध कराने व स्थल चयन करने हेतु डीएम मो.सोहैल ने समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी को जिम्मेवारी सौंप दी है |

Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri discussing with Senior Deputy Collector Md.Allama Mukhtar , Executive Engineer Building Mr.Manoj Kumar Singh & Asst. Engineer Mr.Madhusudan Kumar Karn & others regarding the construction of Shahid Platform in Shahid Park (Children Park) opposite District Guest House , Madhepura.
Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri discussing with Senior Deputy Collector Md.Allama Mukhtar , Executive Engineer Building Mr.Manoj Kumar Singh & Asst. Engineer Mr.Madhusudan Kumar Karn & others regarding the construction of Shahid Platform in Shahid Park (Children Park) opposite District Guest House , Madhepura.

डीएम मो.सोहैल (भा.प्र.से.) ने मधेपुरा आजतक को बताया कि मक्का की बाली में दाना नहीं आने का कारण जहाँ कृषि वैज्ञानिकों द्वारा “मौसम में बदलाव” को कारण माना जा रहा है वहीं डीएम ने कृषि वैज्ञानिकों के तर्कों को मानने से इनकार किया और कहा कि यदि ऐसा होता तो सभी खेत का मक्का दाना विहीन होता | जिला पदाधिकारी ने कहा कि पायोनियर कंपनी के 3535 नंबर के बीज वाले मक्का में भरपूर दाना है वहीं उसी कंपनी के 3522 नंबर वाले में दाना बिल्कुल नहीं है | तभी तो उन्होंने बीजो मुखिया द्वारा 3535 लगे खेत में पुरा दाना पाया वहीं विपीन यादव द्वारा पायोनियर 3522 लगे खेत में दाना विहीन फसल देखा |

यह भी जानिए कि डीएम ने कृषि वैज्ञानिकों को विश्लेषण करने की सलाह देते हुए आशंका व्यक्त किया कि कदाचित बीज के प्रोसेसिंग में गलती हुई है | जहाँ डीएम मो.सोहैल ने एक ओर पीड़ित किसानों से बिना किसी तरह की रसीद के ही आवेदन जमा लेने के बाबत सभी प्रखंड पदाधिकारियों को निदेश भेजा है वहीं दूसरी ओर पायोनियर 3522 में खराबी के लिए बीज कंपनी को ब्लैक लिस्टेड करने की कार्यवाई आरंभ कर दी है | इस बाबत डीएम द्वारा राज्य सरकार को पत्र भेजा जा रहा है वहीं केंद्र सरकार की जांच टीम को मधेपुरा बुलाई जा रही है | किसानों को मानसिक व आर्थिक परेशानी नहीं हो इसके लिए प्रभावित किसानों को 4% ब्याज पर लोन मुहैया कराने की बात चल रही है | अब तक जिले के 1860 किसानों ने शिकायत की है |

यह भी बता दें कि जहाँ डीएम द्वारा फसल सर्वेक्षण के दौरान डीएओ यदुनंदन प्रसाद यादव, बीएओ विनोद कुमार श्रीवास्तव, सीओ शशि भूषण कुमार, कृषि समन्वयक आनंद कुमार एवं कृषि सलाहकार रजनीश कुमार आदि कुछ ग्रामीण किसानों को साथ लिए चल रहे थे वहीं अतिथि गृह के सामने शहीदों को सम्मान वाले शिलापट्ट स्थल निर्माण को लेकर समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने विचार-विमर्श करते हुए स्थापना के वरीय उपसमाहर्ता मो.अल्लामा मुख्तार, भवन निर्माण के कार्यपालक अभियंता मनोज कुमार सिंह, सहायक अभियंता मधुसूदन कुमार कर्ण आदि से अनुरोध किया कि इस शहीद पार्क में अन्य आवश्यक सुविधाओं के साथ-साथ साफ-सफाई की भी व्यवस्था बिहार दिवस के आयोजन से पूर्व कर ली जाय |

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अब बसों में भी ट्रेन की तरह बायो टॉयलेट होगा

लंबी दूरी की बसों में ट्रेनों की तरह जरूरी है टॉयलेट | यूँ आरंभ में तो ट्रेनों में भी टॉयलेट नहीं हुआ करता था  | अर्धशतक बीत गया ट्रेन में टॉयलेट लगते-लगते |

बता दें कि अंग्रेजों द्वारा 16 अप्रैल 1853 को भाप के इंजन के जरिये पहली ट्रेन चलाई गई थी जिसमें लगभग 400 यात्रियों ने बम्बई यानी मुंबई शहर के बोरीबंदर (वर्तमान छत्रपति शिवाजी टर्मिनल) से ठाणे स्टेशन तक की यात्रा बिना टॉयलेट वाली ट्रेन में पूरी की थी |

यह भी जानिये कि आगे 55 वर्षों तक यानी 1908 ई. तक ट्रेनों में यात्रियों के लिए टॉयलेट की सुविधा नहीं थी | बसों की तरह ही जब अनिवार्य एवं अपरिहार्य स्थिति हो जाती तब ट्रेन को भी बस की तरह रोकवाकर यात्री द्वारा मल-मूत्र का परित्याग कर लिया जाता था और फिर उसे बैठाकर ट्रेन खुलती थी |

यह भी बता दें कि अखिलेश चन्द्र सेन नामक यात्री को 1891  ई. में शौच/लघुशंखा करते छोड़कर ट्रेन खुल गई | श्री सेन द्वारा इसके विरोध में संघर्ष करते हुए दिये गये एक आवेदन के आलोक में अंततः 1909 ई. में जाकर फर्स्ट क्लास के डब्बे में सर्वप्रथम टॉयलेट बनाया गया और वह आवेदन पत्र आज भी दिल्ली के रेल संग्रहालय में सुरक्षित है जिसे कोई भी देख सकता है |

जानिए कि अब ट्रेनों में बायो टॉयलेट लगाया जाना शुरू हो गया है ताकि रेलवे स्टेशनों पर गाड़ी खड़ी होने पर भी गंदगी नहीं फैलेगी- क्योंकि मल-मूत्र को बायोलॉजिकल पद्धति से नष्ट कर दिया जाता है तथा हानिकारक पानी को क्लोरीन चेंबर होकर बाहर निकाल दिया जाता है |
जो भी हो ट्रेन के सभी कंपार्टमेंट में तो टॉयलेट बन गया फिर भी इंजन के ड्राइवर को स्टेशन के टॉयलेट में ही जाना पड़ता है | बाहरहाल केंद्र सरकार के रेल बजट में अब इंजन में भी बायो टॉयलेट बनाने की स्वीकृति के साथ-साथ बजट में भी प्रावधान कर दिया गया है |
अंत में यह कि आवश्यकता आविष्कार की जननी है | अस्तु आने वाले समय में लंबी दूरी की बसों में जरूरी लगता है टॉयलेट का होना | मोटर संशोधन विधेयक की समीक्षा के लिए सांसद  वी.पी.सहस्त्रबुद्धे की अध्यक्षता वाली 24 सदस्यीय संसदीय समिति ने “स्वच्छ भारत अभियान” के तहत इस पर सरकार से गंभीरता पूर्वक विचार करने को कहा है | फिलहाल भारत में बहुत कम बसों में टॉयलेट की व्यवस्था की गई है |

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भारत ने निशानेबाजी में अमेरिका और चीन को धूल चटाया

पहली बार भारत ने मेक्सिको में आयोजित आईएसएसएफ निशानेबाजी वर्ल्ड कप में ऐतिहासिक प्रदर्शन कर चीन व अमेरिका के दबदबे को धता बता दिया | बता दें कि जहाँ वर्ल्ड कप टूर्नामेंट में 4 स्वर्ण सहित कुल 9 पदकों के साथ भारत प्रथम स्थान पर रहा वहीं 3 स्वर्ण समेत 6 पदकों के संग अमेरिका को दूसरे स्थान पर और 2 स्वर्ण समेत 5 पदकों के साथ चीन को तीसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा |

यह भी बता दें कि हरियाणा के झज्जर की 16 वर्षीय मनु भाकर के दूसरे गोल्ड मेडल के साथ ही भारत शीर्ष पर पहुंच गया | मनु ने लगातार स्वर्ण जीतकर निशाने-बाजी जगत को हैरान कर दिया | और तो और भारत के लिए नंबर एक जोड़ी के रूप में प्रतिनिधित्व कर रहे- मनु भाकर और ओमप्रकाश की जोड़ी ने क्वालीफिकेशन में अद्भुत अंक जुटाये |

जानिये कि ग्यारहवीं कक्षा की निशानेबाज छात्रा मनु भाकर को विश्ववास नहीं हो रहा है कि वह विश्वकप जैसी प्रतियोगिता में 2 दिन के अंदर दो स्वर्ण पदक जीतने में सफल रही | ऐसा शानदार प्रदर्शन कि समस्त निशानेबाजी जगत को हैरान होना पड़ा |

संक्षेप में यह भी जान लीजिए कि जिन भारतीय निशानेबाजों ने इतिहास रचा वे हैं- 4 स्वर्ण पदक विजेता : शहजार रिजवी, मनुभाकर, अखिल श्योरण एवं मनु-ओमप्रकाश की जोड़ी | रजत पदक पदक विजेता में मात्र एक नाम दर्ज कराया है- अंजुम मुद्दगल ने | कांस्य पदक (4) के लिए जिन्होंने संघर्ष किया वे हैं- मेहुली घोष, जीतू राय, रवि कुमार और मेहुली-दीपक की जोड़ी |

मेडल जीतकर भारत को शीर्ष पर ले जाने के बाद भारतीय निशानेबाजों में अग्रणी मनु भाकर ने कहा कि अब हमारी जिम्मेदारी बढ़ गयी है | आगे इसे बरकरार रखते हुए भारतीय खेल प्रेमियों की उम्मीदों पर हमें अब खड़ा उतरना होगा |

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खुद को संवारेंगे या संस्कृति को सहेजेंगे संसद सदस्य ?

भारत अपने आप में एक महत्वपूर्ण विश्व विरासत है | विश्व विरासत की सूची में सांस्कृतिक संपदा के क्षेत्र में अग्रणी राष्ट्र है भारत | भारत के लिए अपनी संस्कृति को हर हाल में सहेजकर तथा सम्मान के साथ बचाकर रखना अपेक्षित है | परंतु, भारतीय संसद के सदस्यगण अपनी संस्कृति को सहेजने के बजाय खुद को नाना प्रकार की सुविधाओं से लैस करने एवं सँवारने में लगे रहते हैं |

तभी तो प्रेम व भाईचारे वाले त्यौहार जिसे आम लोगों द्वारा भी उमंग के साथ खुशियाँ बांटने वाला पर्व ‘होली’ कहकर संबोधित किया जाता है तथा मथुरा-वरसाने की वह ‘होली’ जो परम को भी प्रिय है | बावजूद इसके हमारे संसद सदस्यों की अवहेलना के चलते केंद्रीय डाक विभाग द्वारा आजादी के बाद से आज तक कोई डाक टिकट ‘होली’ को लेकर जारी नहीं किया गया | जबकि दक्षिण अमेरिका का ‘गुयाना’ दुनिया का एकलौता ऐसा देश है जिसने ‘होली’ पर लगभग 50 वर्ष पूर्व (26 जनवरी 1969) ही चार डाक टिकटो का खूबसूरत सेट जारी किया था जिसमें राधा-कृष्ण को होली खेलते हुए तथा रंग-गुलाल से बचते-बचाते हुए दिखाया गया है |

बता दें कि यह कितनी अफसोस की बात है कि जो भी त्यौहार यानी ‘होली, ईद….. आदि हमारे देश में इतना अहम हैं, उन पर संसद-सदस्यों द्वारा अभी तक ध्यान नहीं दिये गये हैं और ना ही डाक टिकटें जारी किये गये हैं  | अलबत्ता एक दो के अलाबे सभी सांसद सदस्यगण वेतन-भत्ता व अन्य सारी सुविधाओं में बढ़ोतरी के लिए सदैव ‘कागचेष्टा वकोध्यानंम….’ को भी मात देने में लगे रहते हैं बल्कि संस्कृति भांड़ में जाय तो जाय…… उसकी कभी चिंता नहीं करते |

हाँ ! 10 वर्षों की सतत मांग के बाद ही भारत में दीपावली पर 7 अक्टूबर 2008 को तीन डाक टिकट जारी किए गये | इसमें भी गुयाना हमें पीछे छोड़ दिया | क्योंकि , गुयाना लगभग 30 वर्ष पूर्व ही दिपावली पर चार टिकट जारी कर दिये थे जिसमें महालक्ष्मी के साथ दीप दान का चित्र बना है |

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इरादे हो नेक, हौसले सदाबहार……. आइए ! मिलकर बनायें अपना बिहार- MLC डॉ.संजीव कुमार

कोसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के विधान पार्षद डॉ.संजीव कुमार सिंह के द्वारा सदन में “नियोजित शिक्षकों के वेतन के विरुद्ध बैंक से लोन दिये जाने” के बाबत एक अल्प सूचित प्रश्न पूछा गया | सदन में MLC डॉ.संजीव ने माननीय अध्यक्ष महोदय से कहा कि जब राज्य सरकार के किसी भी कर्मी को वेतन के विरुद्ध लोन देने का प्रावधान है तो नियोजित शिक्षकों को इसके लिए इतनी परेशानी क्यों उठानी पड़ती है |

बता दें कि कोसी के शिक्षक प्रतिनिधि डॉ.संजीव कुमार सिंह के इस सवाल के जवाब में प्रभारी वित्त मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने यही कहा- “राज्य सरकार इस मामले को राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक में उठायेगी |”

यह भी जानिये कि MLC डॉ.संजीव कुमार सिंह ने सदन में माननीय अध्यक्ष महोदय के समक्ष सवाल उठाते हुए कहा कि विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा वर्ग दशम एवं बारहवीं कक्षा के छात्र-छात्राओं की परीक्षाओं से संबंधित सारी प्रक्रियाएं ‘ऑन लाइन’ कर दी गई है जो स्वागत योग्य है | परंतु, अधिकांश विद्यालयों/महाविद्यालयों को कंप्यूटर संबंधी सुविधाएं नहीं रहने के कारण वसुधा केंद्र या साइबर कैफे पर निर्भर करना पड़ता है | जिसके फलस्वरूप पंजीयन से लेकर परीक्षा प्रपत्रों में अनेक त्रुटियां रह जाती हैं और इन गलतियों के कारण प्रभारी शिक्षकों या प्राचार्यों को बेवजह दंड भुगतना पड़ता है | महोदय, क्या सरकार उक्त समस्या के समाधान हेतु ऐसे संस्थानों में कंप्यूटर कक्ष के साथ-साथ कंप्यूटर आदि की व्यवस्था बिहार विद्यालय परीक्षा समिति में जमा राशि के माध्यम से कराना चाहेगी ?

बता दें कि विधान पार्षद डॉ.संजीव ने सदन में आगे माननीय अध्यक्ष महोदय से पुनः अनुरोध किया कि विगत माध्यमिक परीक्षाओं में परीक्षार्थियों के कभी जूते खोले गये तो कभी चश्मे उतारे गये- ऐसी स्थिति में वे सहज होकर परीक्षा कैसे दे पायेंगे ? अच्छा होगा कि भविष्य में नजदीक के केंद्रों पर परीक्षा देने की व्यवस्था हो और जिन विद्यालयों में चहारदीवारी नहीं है वहां बाउंड्रीवाल बनाया जाय | परीक्षा कक्ष में प्रवेश से पूर्व यानि गेट से बाहर ही सहजतापूर्वक सघन जांच करा ली जाय |

और यह भी जानिए कि ताजिंदगी MLC रहने वाले शारदा बाबू के समय से अद्यतन उनके पुत्र एमएलसी डॉ.संजीव के कार्यकाल में भी वित्त रहित शिक्षकों एवं समान काम के लिए समान वेतन भुगतानादि की चर्चाएं करते रहने वाले बी.एन.मंडल कॉमर्स कॉलेज के फाउंडर एवं भू.ना.मंडल विश्वविद्यालय में विभिन्न पदों पर कार्यरत रहे डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी द्वारा शिक्षकों के कई महीनों से वेतन/पेंशन नहीं मिलने के सवाल को उठाते हुए विधान पार्षद डॉ.संजीव कुमार सिंह ने सदन में माननीय अध्यक्ष जी से यही कहा-

“महोदय ! विभागीय लापरवाही और संवेदनशीलता की कमी के कारण ही 6 महीने से शिक्षकों को वेतन/पेंशन नहीं मिला है | क्या सरकार वेतन/पेंशन भोगियों को इस विलंब के कारण हुई परेशानियों के बाबत सूद सहित वेतन/पेंशन का भुगतान सुनिश्चित करेगी- राजस्थान एवं हिमाचल प्रदेश के उच्च न्यायालयों के न्यायादेशों के अनुसार…….!!”

यूँ कहने के लिए सरकार के पास पैसे नहीं है जबकि शिक्षा विभाग द्वारा 1625 करोड़ की राशि सरेंडर किये जाने का समाचार चंद रोज कबल दैनिक जागरण में छपा है |

नोट- एमएलसी डॉ.संजीव को शिक्षकों के हितार्थ सदन में दहाड़ते हुए देखना व सुनना चाहते हैं तो नीचे क्लिक करें |

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