एम्स से छुट्टी पर भड़के लालू ने लिखा पत्र

आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) से छुट्टी मिल गई है। गौरतलब है कि लालू अपना इलाज कराने के लिए करीब एक महीना पहले एम्स में भर्ती हुए थे। एम्स प्रशासन ने अब उन्हें वापस जाने को कह दिया है, लेकिन एम्स द्वारा छुट्टी देना लालू को नागवार गुजरा। उन्होंने इस संबंध में बकायदा पत्र लिखकर एम्स प्रशासन से नाराजगी जाहिर की और कहा कि उन्हें अभी और इलाज की जरूरत है, लिहाजा उन्हें अभी एम्स में ही रहने दिया जाए।

एम्स से अपनी छुट्टी को ‘राजनीतिक दबाव’ बताने पर जोर दे रहे लालू प्रसाद यादव ने अपने पत्र में लिखा कि मुझे रांची मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान दिल्ली में अच्छे इलाज के लिए भेजा गया था। अभी भी मेरी तबीयत ठीक नहीं हुई है। मैं आपको अवगत कराना चाहता हूं कि मैं हृदय रोग, किडनी इन्फेक्शन, शुगर एवं कई बीमारियों से ग्रस्त हूं। कमर में दर्द है एवं बार-बार चक्कर आ रहा है। मैं कई बार बाथरूम में गिर भी गया हूं। इन सब बीमारियों का इलाज यहां चल रहा है। प्रत्येक नागरिक का यह मूलभूत संवैधानिक अधिकार है कि उसका समुचित इलाज उसकी संतु्ष्टि के अनुसार हो। पर ना जाने किस राजनीतिक दबाव की वजह से मुझे यहां हटाया जा रहा है।

गौरतलब है कि इससे पहले सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी आरजेडी सुप्रीमो से मिलने एम्स पहुंचे। इस मुलाकात की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। इस तस्वीर में लालू प्रसाद यादव हरे रंग के कुर्ते, उजले रंग के पायजामे और एक चप्पल में एक बड़े सोफासेट पर बैठे नजर आ रहे हैं, जबकि राहुल गांधी उनके सामने बैठे हुए हैं। इसे संयोग ही कहा जाएगा कि इस तस्वीर के सामने आने के बाद ही यह खबर आई कि एम्स प्रशासन ने उन्हें छुट्टी दे दी है।

बहरहाल, बता दें कि लालू प्रसाद यादव चारा घोटाला से जुड़े अलग-अलग मामलों में जेल की सजा काट रहे हैं। जेल में तबीयत खराब होने के बाद उऩ्हें पहले रिम्स में भर्ती कराया गया था और फिर उन्हें दिल्ली के एम्स में लाया गया था, जहां उन्हें स्वास्थ्य लाभ के साथ ही ‘राजनीतिक लाभ’ भी मिल रहा था। स्वाभाविक है कि अब इसमें होने वाली संभावित कमी उन्हें परेशान करेगी।

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नीतीश की मोदी से मांग, ‘भारत रत्न’ मिले लोहिया को

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मांग की है कि डॉ. राम मनोहर लोहिया को मरणोपरांत ‘भारत रत्न’ सम्मान से नवाजा जाए। प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में उन्होंने कहा है कि 12 अक्टूबर को डॉ. लोहिया की पुण्यतिथि है, इसी दिन उन्हें भारत का सर्वोच्च सम्मान ‘भारत रत्न’ दिया जाए। इसके साथ ही उन्होंने अनुरोध किया है कि गोवा हवाई अड्डे का नामकरण भी डॉ. राम मनोहर लोहिया के नाम पर किया जाए क्योंकि पुर्तगालियों से गोवा को आजाद कराने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने डॉ. राम मनोहर लोहिया के जीवन से जुड़े कई किस्सों का भी अपने पत्र में जिक्र किया है। उन्होंने लिखा है कि संसद में नेहरू की सरकार के खिलाफ पहला अविश्वास प्रस्ताव पेश करते हुए लोहिया ने पूरे विपक्ष को गैर-कांग्रेसवाद की धुरी पर इकट्ठा किया और उनकी कोशिशों की वजह से देश में पहली गैर कांग्रेसी सरकार बन सकी।

सत्याग्रह से स्वच्छाग्रह की मुहिम में लगे प्रधानमंत्री को उन्होंने खास तौर पर याद दिलाया कि ‘लोहिया ने गांवों में महिलाओं के लिए दरवाजा बंद शौचालयों के निर्माण की मांग को लेकर लगातार मुहिम चलाई और तत्कालीन सरकार पर दबाव भी बनाते रहे।’ नीतीश ने लिखा, डॉ. लोहिया नेहरू विरोधी थे और उनका कहना था कि यदि नेहरू सभी गांवों में महिलाओं के लिए शौचालय बनवा दें तो मैं उनका विरोध करना बंद कर दूंगा। लोहिया ने स्वच्छता और स्त्री स्वास्थ्य के लिए हमेशा प्रयास किया।

महिलाओं के लिए बिहार में आरक्षण समेत कई ऐतिहासिक कदम उठाने वाले मुख्यमंत्री ने महिलाओं के लिए ‘उज्जवला योजना’ लागू करने वाले प्रधानमंत्री को आगे लिखा कि किस तरह ग्रामीण क्षेत्रों की औरतों के लिए धुआंमुक्त चूल्हों की तकनीक को प्रत्येक रसोई में पहुँचाने की खातिर भी लोहिया की मजबूत आवाज संसद में और सड़कों पर लगातार गूंजती रही। पिछली सदी के मध्य में भारत की तत्कालीन सरकार और समाज को इन बिन्दुओं पर जागृत करना उनकी दूरदृष्टि का परिचायक है। इसके अलावा नीतीश कुमार ने भारत की आजादी की लड़ाई में लोहिया के योगदान और अमेरिका की रंगभेद नीति के खिलाफ उनके विचारों की चर्चा भी अपने पत्र में की।

इस तरह प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में नीतीश कुमार ने राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर डॉ. लोहिया के द्वारा किए कई महत्वपूर्ण कार्यों की याद दिलाते हुए उनके विज़न और अतीत के साथ-साथ वर्तमान में भी उनकी प्रांसगिकता को बड़ी मजबूती से रेखांकित किया। उनकी मांग पर केन्द्र की मोदी सरकार चाहे जब फैसला करे, लेकिन कहना गलत ना होगा कि इस बहाने देश भर में लोहिया पर एक सार्थक बहस और चर्चा तो छिड़ ही गई है। लोहिया जैसे युगपुरुष के विचार पार्टी ही नहीं, राज्य व देश की सीमाओं से भी परे हैं और समाजवाद के इस पुरोधा हेतु ‘भारत रत्न’ की मांग करने के लिए नीतीश कुमार नि:संदेह साधुवाद के पात्र हैं। यहां स्मरणीय है कि इससे पहले नीतीश कुमार बिहार के भूतपूर्व मुख्यमंत्री व देश के समाजवादी नेताओं में अत्यन्त महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले जननायक कर्पूरी ठाकुर को भी ‘भारत रत्न’ देने की मांग का समर्थन कर चुके हैं।
‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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मधेपुरा स्मार्ट सिटी बनने की राह पर……!

मधेपुरा स्मार्ट सिटी बनने की राह पर तेजी से कदम बढ़ा चुका है | यूनिवर्सिटी, मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज,  रेल इंजन फैक्ट्री के साथ-साथ दर्जनों विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं क्लास वन होटलों से भरा पूरा है मधेपुरा | प्रतिभावान विद्यार्थियों एवं खिलाड़ियों से गौरवान्वित होता रहा है मधेपुरा | प्रायः सभी क्षेत्रों में नाम रोशन करता रहा है |

इसी मधेपुरा के डायनेमिक डीएम मो.सोहैल को बेहतर कार्य क्षमता प्रदर्शित करने हेतु तीन-तीन बार सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा सम्मानित भी किया गया है | निर्माण कार्यों के मॉनिटरिंग को लेकर डीएम हमेशा चौकन्ना रहा करते हैं | बिहार दिवस से लेकर जिला स्थापना दिवस के बीच जितने दिवस हों सबों को उत्सव के रूप में मनाता है मधेपुरा |

लेकिन जिला बनने से पहले मधेपुरा कठघरे का शहर हुआ करता था | बस एक मेन रोड अरुणा होटल यानी वर्तमान अरुणा ट्रेडिंग (सुभाष चौक) के पास वाले रोड पर ही बस स्टैंड हुआ करता था | आज की तारीख में बीपी मंडल चौक के पास जिला परिषद का बड़ा बस स्टैंड भी लंबी दूरी की एयर कंडीशन्ड बसों व वाहनों की बढ़ती संख्या के सामने छोटा पड़ गया है |

बता दें कि अब रेल फैक्ट्री से लेकर बी.एन.मंडल विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस तक लगभग 15 किलोमीटर के अंदर फैल चुका है मधेपुरा | मेन रोड के अलाबे पूर्वी एवं पश्चिमी दोनों बाईपास सड़कें सैकड़ों भिन्न-भिन्न प्रकार की एजेंसियों व दुकानों से सज गई हैं | दो नेशनल हाईवे के मिलन स्थल पर यहाँ के स्थानीय महापुरुषों के नाम वाले चौक हैं- बी.एन.मंडल चौक एवं बी.पी.मंडल चौक |

यह भी जानिए कि शहर के पश्चिमी बाईपास रोड (भिरखी) स्थित निर्माणाधीन बस स्टैंड का निर्माण कार्य पूरा करने के लिए डीएम मो.सोहैल ने निर्माण कार्य के बाबत लंबित राशि 25 लाख़ का भुगतान भी कर दिया है और 1 महीने का समय दिया है जिसमें 10 प्लेटफार्म बनाये जायेंगे | दसों निर्धारित प्लेटफार्म पर ही संबंधित क्षेत्र के लिए जाने-आने वाली बसें खड़ी रहेंगी ताकि यात्रियों को इधर-उधर भटकना नहीं पड़े | सारे कार्यों को अब स्मार्ट तरीके से मधेपुरा के डायनेमिक डीएम मो.सोहैल द्वारा अंजाम दिया जा रहा है तो निश्चय ही मधेपुरा कोसी अंचल का पहला स्मार्ट सिटी बनेगा ही बनेगा…….| भला जो मधेपुरा रास बिहारी लाल मंडल, शिवनंदन प्रसाद मंडल, जेबी कृपलानी, भूपेंद्र नारायण मंडल, बीपी मंडल, मो.कुदरतउल्लाह, यदुनाथ झा, ईश्वरी प्रसाद सिंह….. जैसे स्मार्ट सोच वालों की धरती रही हो उसे स्मार्टसिटी बनने से भला कौन रोक पायेगा |

1978 में सर्वप्रथम गठित मधेपुरा नगरपालिका के प्रथम उपाध्यक्ष रहे समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने कहा कि भले ही मधेपुरा आज तक स्मार्ट सिटी न बन पाया हो परंतु यहाँ के लोग आरंभ से ही स्मार्ट सोच के रहे हैं |

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बिहार के अतुल प्रकाश को यूपीएससी में चौथा स्थान

संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने 2017 में सिविल सर्विसेज की लिखित परीक्षा और 2018 में इंटरव्यू के आधार पर अंतिम परिणाम घोषित कर दिया है। सफल उम्मीदवारों की सूची में हैदराबाद के अनुदीप दुरिशेट्टी को प्रथम स्थान मिला है। वहीं, दूसरे नंबर पर अनु कुमारी और तीसरे पर सचिन गुप्ता हैं। बिहार के अतुल प्रकाश ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में चौथा स्थान प्राप्त किया है। जबकि पांचवां स्थान पवन कौशिक को मिला है।

गौरतलब है कि प्रथम पांच में स्थान बनाने वाले अतुल प्रकाश आइआइटियन हैं और मूलत: बिहार के आरा के रहने वाले हैं। उनके पिता एके राय रेलवे इंजीनियरिंग सेवा के अधिकारी हैं और वर्तमान में हाजीपुर जोन में मुख्य अभियंता के पद पर कार्यरत हैं।

यूपीएससी के टॉपर दुरिशेट्टी अनुदीप गूगल में काम कर चुके हैं। वे साल 2011 में बिट्स पिलानी से ग्रैजुएट हैं। उन्होंने 2013 में भी यूपीएससी की परीक्षा में सफलता हासिल की थी। उस साल उन्हें 790वां स्थान मिला था और वर्तमान में वे भारतीय राजस्व सेवा के अंतर्गत असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ इनकम टैक्स के रूप में पदस्थापित हैं।

बता दें कि इस साल कुल 990 अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया है। इनमें सामान्य श्रेणी के 476, ओबीसी के 275, अनुसूचित जाति के 165 तथा अनुसूचित जनजाति के 74 अभ्यर्थी शामिल हैं। जबकि रिजर्व सूची में कुल 132 अभ्यर्थी हैं। चलते-चलते यह भी बता दें कि इस साल आइएएस के 180, आइएफएस के 42, आइपीएस के लिए 150, सेंट्रल सर्विस ग्रुप ‘ए’ के लिए 565 तथा ग्रुप ‘बी’ के लिए 121 पदों पर नियुक्ति होनी है।

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मधेपुरा में रेलवे हाई लेवल प्लेटफार्म निर्माण हेतु 5 करोड़ आवंटित

रेलवे बोर्ड ने 4 करोड़ 80 लाख की राशि आवंटित कर दौरम मधेपुरा स्टेशन पर दो हाई लेवल प्लेटफॉर्म बनाने की स्वीकृति दे दी है | शीघ्रातिशीघ्र टेंडर की प्रक्रिया पूरी कर कार्यारंभ किया जायेगा | ये दोनों प्लेटफार्म 700-700 मीटर लंबाई के बनाये जायेंगे तथा प्लेटफार्म निर्माण इसी साल पूरा कर लिया जायेगा | मापी की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और प्राक्कलन तैयार किया जा रहा है | जल्द ही टेंडर की प्रक्रिया पूरी की जाएगी | ये बातें सीनियर डीईएन थ्री श्री संजय कुमार ने मधेपुरा अबतक से कही |

बता दें की प्लेटफार्म की लंबाई बढ़ने से अब ट्रेन की सभी 24 बोगियाँ प्लेटफार्म के अंदर ही खड़ी होंगी| साथ ही प्लेटफार्म की सतह को भी ऊंचा कर बोगी के दरवाजे (गेट) के लेवल में किया जाएगा | तब सीनियर सीटीजन्स की सारी परेशानियां दूर हो जायेंगी | आम यात्रियों को भी ट्रेन में चढ़ने उतरने की परेशानियों से मुक्ति मिल जायेगी |

यह भी जानिये कि वर्तमान में दौरम मधेपुरा स्टेशन के प्लेटफार्म की लंबाई मात्र 510 मीटर है और शेड भी इतना छोटा कि आती-जाती गाड़ियों की 3-4 बोगी को छोड़ सभी बोगी शेड से बाहर ही खड़ी होती हैं | और तो और अधिकांश बोगियों के सामने खड़े यात्रियों का गेट के हैण्डल तक भी हाथ नहीं पहुंच पाता है | ऐसे में बुजुर्ग एवं महिला यात्रियों की तो बात दूर बल्कि सामान्य यात्रियों को भी बोगी में चढ़ने-उतरने में गिरकर जख्मी होने का खतरा बना रहता है |

रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग को बुजुर्ग लोग अग्रिम बधाई दे रहे हैं | विभाग शीघ्रातिशीघ्र निर्माण कार्यों को अंजाम देने का काम करें ताकि उन्हें बोगी में चढ़ने-उतारने के लिए अगले वर्ष से गेट पर कुर्सी नहीं लगानी पड़े |

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जी हाँ, ‘निर्भया’ ने पहुँचाया आसाराम को अंजाम तक !

लाखों लोगों की आस्था से खिलवाड़ करने वाले आसाराम बापू को बुधवार को उम्रकैद की सजा मिली। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसका श्रेय देश भर को झकझोर देने वाली दिल्ली गैंगरेप की शिकार ‘निर्भया’ को जाता है? जी हाँ, यह निर्भया केस के बाद हुए कानूनी बदलाव का ही नतीजा है कि आसाराम को जिन्दगी भर के लिए जेल में रहने की सजा सुनाई गई है। गौरतलब है कि निर्भया केस के बाद रेप लॉ में बदलाव करके उसके बेहद सख्त बना दिया गया था। यह बदलाव 2 अप्रैल 2013 से लागू हुए। आसाराम के खिलाफ मामला अगस्त 2013 में दर्ज हुआ और यही कारण है कि उसे नए कानून के तहत सजा मिली।

आसाराम को रेप की जिन धाराओं में जीवन भर जेल की सजा हुई है, वे तमाम धाराएं और कानून निर्भया केस के बाद जोड़े गए थे। इसके तहत गैंगरेप में 20 साल से लेकर उम्रकैद यानि मौत होने तक जेल में रखने का प्रावधान किया गया था। वहीं, ऐसा शख्स रेप करता है, जिस पर पीड़िता भरोसा करती थी तो ऐसे मामले में 10 साल से लेकर ताउम्र जेल का नियम बनाया गया। इन दोनों ही धाराओं में आसाराम को सजा दी गई है।

इससे पहले, गैंग रेप के मामले में अधिकतम उम्रकैद का ही प्रावधान था। साथ ही सरकार को 14 साल जेल काटने के बाद सजा में छूट देने का भी अधिकार था। लेकिन जिन दो धाराओं में आसाराम को उम्रकैद दी गई है, उसमें उम्रकैद का मतलब स्वाभाविक तरीके से मृत्यु होने तक जेल से है और ऐसे मामले में सरकार सजा में छूट भी नहीं दे सकती। इस तरह हम कह सकते हैं कि ये ‘निर्भया’ ही है, जिसने आसाराम को उसके अंजाम तक पहुँचाया।

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फिर बिगड़े चौबे के बोल

बिहार भाजपा के वरिष्ठ नेता व केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री अश्विनी चौबे ने एक बार फिर विवादित बयान दिया है। इस बार कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर हमला बोलने के क्रम में चौबे ने कुछ ऐसी टिप्पणी कर दी जो किसी भी तरह शोभनीय नहीं। उन्होंने कहा है कि 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद राहुल को श्मशान पहुंचाने के लिए चार लोग भी नहीं मिलेंगे।

वाराणसी के बाबतपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत में अश्विनी चौबे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शेर हैं और राहुल गांधी सवा शेर बनने की कोशिश न करें। उन्‍होंने सवाल किया कि कांग्रेस अध्‍यक्ष लोकसभा में क्‍यों गूंगे रहते हैं? उनके बयानों में कोई तथ्‍य रहता है क्‍या? दरअसल चौबे प्रधानमंत्री मोदी को राहुल गांधी के 15 मिनट भाषण वाली चुनौती के संबंध में अपनी प्रतिक्रिया दे रहे थे। गौरतलब है कि पिछले दिनों राफेल व नीरव मोदी मामले के संदर्भ में राहुल ने कहा था कि उन्‍हें संसद में भाषण देने के लिए सिर्फ 15 मिनट मिल जाएं तो प्रधानमंत्री मोदी उनके सामने खड़े नहीं हो पाएंगे।

बहरहाल, अश्विनी चौबे की इस टिप्पणी पर हंगामा मच गया है। वाराणसी में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय मंत्री का पुतला फूंक अपना विरोध जताया है। देश के अन्य हिस्सों में भी कांग्रेस कार्यकर्ता इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे हैं। पर चौबे इन प्रतिक्रियाओं से परेशान हो रहे होंगे, ऐसा लगता नहीं। और परेशान हों भी क्यों, ऐसे ही बयानों से वे चर्चा में बने रहते हैं और ‘प्रसाद’ मिल जाता है वो अलग।

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साढ़े तीन अरब साल पहले सूख गईं मंगल की झीलें

कहना गलत ना होगा कि मंगल ग्रह दूसरे ग्रह पर जीवन की संभावनाएं तलाश रहे दुनिया भर के खगोलविदों के कौतूहल का केन्द्र बना हुआ है। हम और आप भी इस कौतूहल से बचे हुए नहीं हैं और ज्यों-ज्यों इसके बारे में जानकारियां हासिल होती जा रही हैं, कौतूहल भी उसी अनुपात में बढ़ता जा रहा है। आप जानते ही होंगे कि इस ग्रह को लेकर सर्वाधिक उत्सुकता इस बात की रही है कि वहां पानी की मौजूदगी है या नहीं? इस बाबत हुए गहन शोधों से यह स्पष्ट हो चुका है कि मंगल ग्रह का पर्यावरण कभी तरल पानी के अनुकूल था। पर यक्ष प्रश्न जो बच गया थो वो यह कि क्या वो पानी अब भी मौजूद है? और अगर वो वर्तमान में मौजूद नहीं तो अतीत में उसकी मौजूदगी वहां कब तक थी?

इस उत्सुकता को शांत करने के लिए मंगल ग्रह पर फैले नदियों के अवशेषों का अध्ययन किया गया जिससे इस बात की पुष्टि हुई है कि वहां करीब साढ़े तीन अरब साल पहले भारी मात्रा में पानी मौजूद था और फिर कालांतर में वहां की सभी झीलें सूख गईं। जी हाँ, अमेरिकी वैज्ञानिकों ने यह दावा लाल ग्रह की सतह पर मौजूद लंबी दरारों का अध्ययन करने के बाद किया है। इन दरारों की खोज अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के क्यूरियोसिटी रोवर ने 2017 की शुरुआत में की थी।

बता दें कि कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में प्राचीन काल में पृथ्वी के पड़ोसी ग्रह के मौसम से जुड़ी जानकारियों पर से भी पर्दा उठाया है। वैज्ञानिक नैथनील स्टीन का कहना है कि किसी भी प्राकृतिक जलस्त्रोत की तलछट के हवा के संपर्क में आने से सूखी दरारों का निर्माण होता है। ये दरारें झीलों के किनारे की जगह उनके केंद्र के नजदीक स्थित हैं। इससे स्पष्ट है कि समय के साथ इन झीलों के स्तर में उतार-चढ़ाव भी होता था। जियोलॉजी जर्नल में छपे इस शोध के अनुसार पृथ्वी की तरह मंगल के झरने भी एक ही तरह के चक्र का पालन करते थे। इस अध्ययन से लाल ग्रह पर मौजूद झील की प्रणालियों के विषय में जानकारियां सामने आएंगी।

बहरहाल, इस अध्ययन को क्यूरियोसिटी रोवर के मिशन का दूसरा अध्याय कहा जा रहा है। अभी बहुत सी रोमांचक जानकारियों से पर्दा उठना बाकी है। तब तक हम और आप स्वतंत्र हैं अपनी रुचि और कल्पनाओं का लोक वहां बसाने के लिए।

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तीसरी बार सीएम के हाथों पुरस्कृत हुए डीएम मो.सोहैल

सबों को पता है कि सूबे बिहार में कुल 38 जिले हैं जिनमें से मधेपुरा के डायनेमिक डीएम मो.सोहैल (भाप्रसे) सहित कुल 9 जिले के जिलाधिकारी और डीडीसी को उनके बेहतर कार्यों के लिए भारतीय सिविल सेवा दिवस (21 अप्रैल, शनिवार) के दिन राजधानी पटना में सम्मानित किया गया- सूबे के सीएम नीतीश कुमार द्वारा | वही सीएम जो देश-विदेश में विकास पुरुष के रूप में ख्याति अर्जित कर चुके हैं |

बता दें कि सिविल सेवा दिवस के अवसर पर राजधानी पटना में सामान्य प्रशासन विभाग के बिहार प्रशासनिक सुधार मिशन सोसायटी द्वारा “संवाद” नामक कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसके मुख्य अतिथि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कर्मठ हाथों से सूबे के नौ चुनिंदे जिलाधिकारी एवं डीडीसी को सम्मानित किया गया |

यह भी जानिए कि वे चुनिंदे डीएम एवं डीडीसी निम्न जिले के हैं जिन्हें प्रधान सचिव आमिर सुबहानी (IAS) द्वारा पत्र भेजकर आमंत्रित किया गया था | वे जिले हैं- मधेपुरा, किशनगंज, शेखपुरा, नालंदा, समस्तीपुर, पटना, जहानाबाद, रोहतास और दरभंगा |

यह भी बता दें कि बिहार लोक सेवाओं का अधिकार अधिनियम, बिहार लोक शिकायत अधिकार अधिनियम एवं सात निश्चय योजनाओं के कार्यान्वयन में सर्वश्रेष्ठ उपलब्धियाँ हासिल करने वाले चुनिंदा इन नौ जिलों के डीएम, डीडीसी को CM Nitish Kumar ने सम्मानित करके सूबे में कार्यरत समस्त सिविल सेवाओं के अधिकारियों के बीच उनकी पहचान को ऊंचाई देने का काम किया है |

यह भी जानिए कि जिले के विकास को समर्पित डीएम मो.सोहैल यहां की सभी योजनाओं की प्रगति का जायजा प्रतिदिन लेते हैं | सरकारी योजनाएँ, चाहे सूबे की सरकार की हो या केंद्रीय सरकार की- डीएम अपने व्यक्तिगत कार्यों को भले ही भूल जाय, परंतु छोटी-बड़ी सभी सरकारी योजनाओं की निगरानी मिनट-टू-मिनट करना नहीं भूलते | वे जांच की क्रॉस चेकिंग भी विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से करा ही लेते हैं |

मधेपुरा के मशहूर समाजसेवी साहित्यकार और भारतरत्न डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के करीबी रहे डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने कहा कि यदि भारत के कुल 712 जिलों के जिलाधिकारियों में से आधे जिलाधिकारी भी अगर डायनेमिक डीएम मो.सोहैल की तरह ही जिले के विकास के लिए समर्पित हो जायें तो अभी भी गांधीयन मिसाइलमैन डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम द्वारा 2020 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का जो सपना देखा गया था वो पूरा हो सकता है !

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12 साल से कम उम्र के मासूमों से रेप पर अब मौत की सजा

मासूम बच्चियों के साथ हुई लगातार हो रही बलात्कार की घटनाओं की पृष्ठभूमि में शनिवार, 21 अप्रैल को केन्द्र की मोदी सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया। इस फैसले के तहत केन्द्र सरकार नाबालिग बच्चों से बलात्कार करने वालों को फांसी की सजा देने के लिए अध्यादेश लाएगी। फिलहाल सरकार ने इस अध्यादेश को लाने के फैसले पर मुहर लगाई है। आगे वह इसके जरिए कानून बनाएगी, जिसमें 12 साल से कम उम्र के मासूमों से रेप करने वाले दोषियों को फांसी की सजा सुनाई जाएगी। केन्द्र सरकार इसके लिए ‘द प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेस एक्ट’ (पॉक्सो एक्ट) में संशोधन करेगी।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नई दिल्ली स्थित आवास पर इस संबंध में शनिवार दोपहर करीब ढाई घंटे बैठक हुई थी, जिसमें केन्द्रीय मंत्री और पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। काफी विचार-विमर्श के बाद इस मसले पर सरकार ने अध्यादेश लाने का फैसला किया है।

गौरतलब है कि हाल ही में गैंगरेप की दो जघन्य घटनाओं – पहली उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में और दूसरी जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में – से संपूर्ण देश आक्रोशित है। ऐसा ही आक्रोश दिसंबर 2012 में हुए निर्भया कांड के बाद पनपा था। तब ऐसी घटनाओं के लिए बने कानून में परिवर्तन भी किया गया था, लेकिन वह पर्याप्त साबित नहीं हुआ। ध्यातव्य है कि पॉक्सो एक्ट में फिलहाल रेप-गैंगरेप सरीखे जघन्य अपराधों के लिए अधिकतम सजा उम्रकैद है। न्यूनतम सजा के रूप में फिलहाल दोषियों को सात साल की जेल की सजा सुनाई जाती है।

बहरहाल, देर से ही सही सरकार ने स्वागत योग्य निर्णय लिया है। हालांकि यहां स्पष्ट करना जरूरी है कि यह अध्यादेश जिस दिन आएगा, उसी दिन से प्रभावी माना जाएगा। इसका अर्थ यह है कि अध्यादेश से पहले के केसों पर यह लागू नहीं होगा। ऐसे में स्पष्ट है कि सरकार नाबालिगों के रेप-गैंगरेप के मामले को लेकर जो कानून आगे लाएगी, वह जम्मू-कश्मीर के कठुआ, उत्तर प्रदेश के उन्नाव, गुजरात के सूरत और मध्य प्रदेश के इंदौर में हुई घटनाओं पर लागू नहीं हो सकेगा।

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