BNMU से कट कर अगले सत्र 2018-19 से चालू होगा पूर्णिया विश्वविद्यालय

जहाँ मधेपुरा का भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय स्थापना काल से वीसी, प्रोवीसी, रजिस्ट्रार सहित मात्र 8 स्वीकृत पदों के साथ 25 वर्षों तक पदहीनता का अभिशाप झेलता रहा वहीं इससे अलग होकर बन रहे नये पूर्णिया विश्वविद्यालय को नीतीश सरकार ने दिया 68 पदों का तोहफा |

बता दें कि नये बने पूर्णिया विश्वविद्यालय का शैक्षणिक सत्र 2018-19 से आरंभ हो जायेगा | महामहिम कुलाधिपति द्वारा 16 अगस्त 2016 को इसकी मंजूरी प्रदान कर दी गयी है तथा 21 नवंबर तक वीसी, प्रोवीसी पद के लिए आवेदन देने की तिथि भी निर्धारित कर दी गयी है | अभ्यर्थियों के साक्षात्कार के लिए सर्चकमिटी भी गठित कर दी गई है |

जानिये कि इतनी तेजी से पूर्णिया विश्वविद्यालय के लिए सारे कार्यों का निष्पादन बिहार के शिक्षा विभाग, माननीय मुख्यमंत्री एवं महामहिम राज्यपाल के राज भवन द्वारा किया जा रहा है, परंतु कुछ महीने पूर्व ही मधेपुरा के समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी द्वारा इस विश्वविद्यालय का नाम महान आंचलिक साहित्यकार, पद्मश्री फणीश्वर नाथ रेणु के नाम करने वाले ‘अनुरोध’ पर अबतक विचार नहीं किया जाना- राज्य के समस्त कलमजीवी साहित्यकारों के लिए दु:ख की बात है |

यह भी बता दे कि हिन्दी के आंचलिक कथाकार एवं प्रख्यात साहित्यकार ‘रेणु’ पूर्व में भी प्रासंगिक रहे हैं और आगे भी रहेंगे | तभी तो 51 वर्ष पूर्व उनकी कहानी पर “तीसरी कसम” फिल्म बनी थी और पुनः इतने दिनों बाद उनकी कहानी पर एक फिल्म बनकर तैयार है जो आगामी 17 नवंबर को रिलीज होने वाली है जिसका नाम है- “पंचलैट”| रेणुजी की यह कहानी भी गांव-गंवई, जात-पात तथा तत्कालीन सामाजिक वर्जनाओं को पूरी तरह प्रतिबिंबित एवं प्रतिध्वनित करता है | रेणु जी की यह कहानी आज भी हमारे समाज में विद्यमान है- अतः यह फिल्म हिंदी सिनेमा जगत में फिर से एक नये युग की शुरुआत होगी |

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यह केवल नीतीश का नहीं, 11 करोड़ बिहारियों का सम्मान

सोमवार को जम्मू के जोरावर सिंह ऑडिटोरियम में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में बिहार के मुख्यमंत्री व जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार को प्रथम ‘मुफ्ती अवार्ड फॉर प्रोबिटी इन पॉलिटिक्स एंड पब्लिक लाइफ’ से सम्मानित किया गया। उन्हें यह पुरस्कार जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व वाली जेएंडके पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (जेकेपीडीपी) की ओर से पार्टी के संस्थापक, पूर्व केंद्रीय मंत्री और दो बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे मुफ्ती मुहम्मद सईद की स्मृति में दिया गया। जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल एएन वोहरा के हाथों मिले इस पुरस्कार को नीतीश कुमार ने वहां की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, भारतीय मूल के ब्रिटिश अर्थशास्त्री व नेता लॉर्ड मेघनाद देसाई, बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी एवं जेडीयू नेता संजय झा समेत कई गणमान्य नागरिकों की मौजूदगी में ग्रहण किया।

जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने इस पुरस्कार की बाबत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लिखे अपने पत्र में कहा है कि “मैं पूरी ईमानदारी से यह बात कह रही हूं कि राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन की शुचिता के मामले में देश में आपसे बेहतर कोई नहीं जिसे इस सम्मान से नवाजा जाए।” उनकी यह टिप्पणी ना केवल नीतीश कुमार के लिए बल्कि 11 करोड़ बिहारियों के लिए सम्मान की बात है। इस टिप्पणी का महत्व तब और भी ज्यादा बढ़ जाता है जब ठीक इसी समय राज्य के एक बड़े नेता को भ्रष्टाचार के आरोप में जेल की सजा मिली हो और एक दलविशेष द्वारा उस सजा को ‘शहादत’ की तरह पेश करने की कोशिश की जा रही हो।

महबूबा मुफ्ती ने अपने पत्र में नीतीश कुमार के जम्मू-कश्मीर कनेक्शन की भी याद दिलाई। उन्होंने लिखा, मुझे याद है कि आपने रेल मंत्री के रूप में घाटी के लिए पहल की थी और बारामूला तथा अनंतनाग के लिए रेल लाइन का शिलान्यास किया था। ध्यान दिला दें कि केन्द्र में वीपी सिंह सरकार के दौरान मुफ्ती मोहम्मद सईद और नीतीश कुमार ने साथ काम किया था।

बहरहाल, बिहार में न्याय के साथ विकास के अपने संकल्प को शतप्रतिशत समर्पण और तन्मयता से जमीन पर उतारने में जुटे नीतीश कुमार ने गुड गवर्नेंस का एक नया मानक स्थापित किया है। इसके साथ ही बिहार में चलाए जा रहे शराबबंदी, दहेजबंदी, बालविवाहबंदी और कन्या-सुरक्षा जैसे समाज-सुधार अभियानों ने उनके व्यक्तित्व को ‘राजनीतिक संत’ जैसा आयाम दे दिया है। आज वो निर्विवाद रूप से राजनीतिक शुचिता के शिखर और उसके पर्याय हैं। इस सम्मान के लिए उनके चयन ने बिहार की छवि को एक नई ऊँचाई प्रदान की है।

नीतीश कुमार को यह सम्मान मिलना साबित करता है कि तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद बिहार में आज संभावना देखी जा रही है। गठबंधन सरकार की जटिल परिस्थितियों और विपक्ष के तौर पर ठीक ‘कंट्रास्ट’ से जूझते हुए भी नीतीश कुमार का राज्य के लिए एक के बाद उपलब्धियां हासिल करना और उसे संभावना के साथ ही सराहना के योग्य बनाना उनके कद को और बढ़ा देता है। कभी जातिवाद, अपराध और भ्रष्टाचार के अंधेरे में सफर करने वाला बिहार आज भोर की किरण देख रहा है। हाल के दिनों में शराबबंदी की सफलता ने राज्यवासियों में यह आत्मविश्वास भर दिया है कि नीतीश कुमार जैसा नेतृत्वकर्ता हो तो असंभव दिखना वाला लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है। अब जरूरत बात की है कि इस माहौल को गतिमान रखा जाए और ‘पॉजिटिव एप्रोच’ के साथ सरकार, समाज और मीडिया एक साथ कदम बढ़ाए।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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मधेपुरा-सहरसा-मानसी 63कि.मी. डबल रेल लाइन बनेगी

मधेपुरा-मानसी 63कि.मी. रेल विद्युतीकरण कार्य तेजी से पूरा किया जा रहा है | यह कार्य डबल रेल लाइन होने की बात को ध्यान में रखकर किया जा रहा है |

बता दें कि समस्तीपुर मंडल के वरिष्ठ मंडल विद्युत अभियंता श्री प्रवीण कुमार सक्सेना एवं सीनियर सेक्शन इंजीनियर श्री हरेन्द्र कुमार सिंह ने मधेपुरा अबतक को बताया कि मधेपुरा-मानसी भाया सहरसा रेल लाइन के दोहरीकरण का प्रस्ताव भारतीय रेलवे बोर्ड को भेज दिया गया है | इंजीनियर द्वय से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस रूट में हो रहे विद्युतीकरण कार्य एवं सहरसा स्टेशन पर प्लेटफार्म की संख्या बढ़ने के बाद ट्रेनों की संख्या में इजाफा होने की संभावना को देखकर रेल लाइन दोहरीकरण की दिशा में तेज कदम आगे बढ़ाया गया है | उन्होंने कहा कि सावन-भादो में बाढ़-बरसात की मार से अबरुद्ध आवागमन से जूझ रहे कोसी क्षेत्र की लाइफ लाइन का दोहरीकरण यदि हो गया तो क्षेत्र के लिए वरदान साबित होगा | तब ट्रेन लेट नहीं होगी | ट्रैफिक लोड भी घटेगा |

यह भी बता दें कि 28 फरवरी 2018 से पूर्व हर हाल में मधेपुरा-मानसी विद्युतीकरण कार्य पूरा कर लिया जायेगा | अब तक 80% फाउंडेशन और 60% पोल लगा बिजली तार जोड़ने का काम पूरा कर लिया गया है |

जानिए कि 12 वर्ष पहले 12 जून 2005 को मानसी से सहरसा बड़ी रेल लाइन से जुड़ा था | रेल ट्रैक दोहरीकरण से 50 लाख की आबादी को तुरंत फायदा होना शुरू हो जायेगा | दोहरीकरण के लिए लगभग एक दर्जन बड़ा पुल और आधा दर्जन छोटा पुल बनाना होगा |

इस इलाके को फिलहाल दो कर्मठ सांसद पप्पू यादव एवं रंजीत रंजन तो हैं जो मधेपुरा रेल इंजन फैक्ट्री की अहमियत की जोरदार चर्चा कर बजट सत्र में रेल दोहरीकरण के भेजे गये प्रस्ताव को मंजूरी दिला ही सकते हैं |

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तो क्या हेली होंगी अमेरिका की अगली राष्ट्रपति ?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्हाइट हाउस में पहले साल के कार्यकाल पर लिखी गई एक किताब इन दिनों खूब चर्चा में है। इसमें कई ऐसे दावे किए गए हैं दो ट्रंप और उनकी सरकार को असहज कर रहे हैं। इस किताब का नाम है ‘फायर एंड फ्यूरी: इनसाइड द ट्रंप व्हाइट हाउस’, जिसे माइकल वुल्फ ने लिखा है। वुल्फ का कहना है कि ट्रंप का व्हाइट हाउस में सफर खत्म हो सकता है। बकौल वुल्फ, ‘अचानक चारो तरफ लोग कह रहे हैं, ओ मॉय गॉड! यह आदमी सच में बेशर्म है। लोगों में यह अवधारणा बन रही है और ऐसा लग रहा है कि यह ट्रंप की कुर्सी लेकर रहेगी।’

उधर राष्ट्रपति ट्रंप इस किताब को ‘झूठ का पुलिंदा’ करार दे चुके हैं। उनके वकील ने इस किताब के प्रकाशन पर रोक लगाने की कोशिश की थी लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। किताब में लिखा गया है, ‘व्हाइट हाउस में पदासीन एक राष्ट्रपति को जो 2016 में अपनी जीत को लेकर आश्वस्त नहीं था और उसके सहयोगियों को उसकी योग्यता पर शक था।’

ट्रंप ने शुक्रवार को ट्विटर के जरिए किताब के लेखक पर निशाना साधा और उनके पूर्व सहयोगी स्टीव बेनन ने किताब के बारे में लिखा, ‘माइकल वोल्फ एक झूठा इंसान है जो अपनी किताब को बेचने के लिए झूठी कहानियां गढ़ रहा है। व्हाइट हाउस ने कहा है, ‘यह किताब झूठ से भरी है और इसमें उन लोगों के हवाले से भ्रामक तथ्य रखे गए हैं जिनकी व्हाइट हाउस तक कोई पहुंच नहीं है।

इस किताब और इसके लेखक की मानें तो भारतीय मूल की निकी हेली ट्रंप की उत्तराधिकारी बन सकती हैं। बता दें कि भारतीय मूल की हेली प्रमुख अमेरिकी शहर साउथ कैरोलिना की गवर्नर रह चुकी हैं। निकी के माता-पिता भारतीय सिख हैं, जो अमेरिका जाकर बस गए थे। वुल्फ के अनुसार, ‘ट्रंप के एक करीबी सहायक इस बात को लेकर चिंता जताते हैं कि हेली ट्रंप से कहीं ज्यादा महत्वाकांक्षी और स्मार्ट हैं।’ उधर ट्रंप के करीबी इस बात को लेकर चिंतित बताए जाते हैं कि जिस तरह से निकी हेली का प्रभाव बढ़ रहा है, आगे चलकर वह सचमुच राष्ट्रपति पद की प्रबल दावेदार बन सकती हैं। बहरहाल, यह तो आने वाला समय ही बताएगा कि वुल्फ के दावों में कितना दम है!

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लालू की सजा और करवट लेती बिहार की सियासत

आखिर आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को सजा मिल ही गई। आज रांची में सीबीआई की विशेष अदालत ने उन्हें चारा घोटाले के एक मामले में साढ़े तीन साल की सजा सुनाई। इसके अलावा कोर्ट ने उन पर पांच लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। अहम बात यह कि इस फैसले के बाद लालू समेत तमाम दोषियों को जमानत नहीं मिलेगी। इसके लिए उन्हें उच्च अदालत में जाना होगा।

बहरहाल, देवघर के सरकारी कोषागार से 1990-1994 के बीच अवैध तरीके से 89.27 लाख रुपये निकालने के मामले में आए इस बड़े फैसले को लालू समेत सभी 16 दोषियों ने रांची की बिरसा मुंडा जेल में विडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के जरिए एक साथ बैठकर सुना। गौरतलब है कि 24 दिसंबर 2017 को सीबीआई जज ने इस मामले में लालू प्रसाद यादव समेत 16 लोगों को दोषी करार दिया था। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा समेत छह आरोपियों को बरी कर दिया गया था। जो सजा आज सुनाई गई, उसका फैसला 3 जनवरी को ही आना था पर तारीख एक-एक दिन कर टलती जा रही थी।

इधर सजा का फैसला आने से पहले ही पटना में आरजेडी की ओर से बुलाई गई बैठक में विधायक समेत पार्टी के सभी पदाधिकारी मौजूद थे। बैठक में लालू यादव की चिट्ठी नेताओं में बांटी गई। पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने प्रेस वार्ता में बताया कि फैसला आने के बाद लालू यादव के जेल से लिखे खत को पार्टी के लोग जन-जन तक पहुंचाएंगे। तेजस्वी ने कहा कि हम फैसले के खिलाफ उच्च अदालत जाएंगे। वहीं लालू के बड़े बेटे व पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव ने कहा कि ‘हम पूरी तरह आश्वस्त हैं कि उन्हें (लालू यादव) बेल मिल जाएगी। हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।’

हालांकि फिलहाल जो केस की स्थिति है उस हिसाब से लालू प्रसाद यादव का तुरंत जेल से निकल पाना आसान नहीं है। अभी इस केस में सजा मिलने के अलावा चार और केस में कोर्ट का फैसला आना है। सूत्रों के अनुसार जनवरी महीने में ही उन सभी मामले में अगर लालू प्रसाद को सजा मिलती गई तो सबमें अलग-अलग सजा मिलेगी और सबमें अलग-अलग जमानत लेनी होगी।

कहने की जरूरत नहीं कि लालू की अनुपस्थिति में न केवल आरजेडी बल्कि पूरे बिहार की सियासत में कई परिवर्तन देखने को मिलेंगे। चाहे आरजेडी हो, चाहे उसके विरोध में खड़ी जेडीयू और भाजपा, या फिर उसकी सहयोगी पार्टी कांग्रेस, समीकरण तमाम दलों के बदलेंगे। इन सबके बीच सबसे महत्वपूर्ण यह देखना होगा कि जनता का रुख इस पर क्या होता है!

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मधेपुरा में खोल गए मुख्यमंत्री संभावनाओं के द्वार

समीक्षा यात्रा के क्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बृहस्पतिवार को मधेपुरा पहुंचे। शीतलहर के बावजूद उनके लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। योजनाओं की समीक्षा के साथ ही उन्होंने जिले के लिए संभावनाओं के कई नए द्वार भी खोल दिए। सिंहेश्वर के मवेशी हाट में आयोजित सभा के दौरान उन्होंने मधेपुरा को 658 करोड़ रुपए की सौगात दी और जिले के लिए 1565 योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री के साथ मंच पर मौजूद लोगों में मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, मंत्री रमेश ऋषिदेव, पूर्व सांसद व बीएनएमयू के संस्थापक कुलपति डॉ. रमेन्द्र कुमार यादव रवि, विधायक व पूर्व मंत्री नरेन्द्र नारायण यादव, विधायक निरंजन मेहता, कमिश्नर टीएन बिंधेश्वरी, डीएम मोहम्मद सोहैल आदि प्रमुख हैं।

अपनी यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री ने सिंहेश्वर के गौरीपुर पंचायत के वार्ड नं. 9 एवं 10 में ‘सात निश्चय’ के तहत हुए कार्यों को देखा। सात निश्चय से गांव और शहर के फर्क को मिटाने के अपने सपने को जमीन पर उतरता देख वे खुश नजर आए। विकास कार्यों पर संतोष व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि 250 की आबादी वाले हर टोले और गली को मुख्य सड़क से जोड़ा जाएगा। पेयजल, बिजली, शौचालय आदि की सुविधाएं वहां उपलब्ध होंगी। यही नहीं, चार साल के अंदर ये सभी कार्य पूरे कर लिए जाएंगे।

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने युवाओं से कहा कि वे खूब पढ़ें और आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि पढ़ने में अब पैसा बाधक नहीं बनेगा। 12वीं के बाद राज्य सरकार सभी बच्चे को चार लाख तक का स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड उपलब्ध करा रही है। युवाओं के कौशल विकास पर पूरा फोकस किया जा रहा है। कौशल विकास मिशन के तहत कुशल युवा कार्यक्रम चलाकर युवाओं को कम्प्यूटर शिक्षा में जहां दक्ष बनाया जा रहा है, वहीं कम्यूनिकेशन स्किल और रहन-सहन को लेकर भी उनके व्यक्तित्व का विकास किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि विकास के साथ ही समाज-सुधार भी जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सामाजिक कुरीतियों को दूर करने के लिए आमलोगों के जागरुक होने की जरूरत है। उन्होंने उपस्थित जनसमूह का आह्वान करते हुए कहा कि 21 जनवरी को दहेजप्रथा व बालविवाह के विरुद्ध बनाई जाने वाली मानव-श्रृंखला में शामिल होकर उसे ऐतिहासिक बनाएं।

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पहले स्वयं को फिर समय को जीतें

विश्व विख्यात प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय माउंट आबू के बैनर तले स्थानीय राजयोग सेवा केंद्र जयपालपट्टी, मधेपुरा में नववर्ष के उपलब्ध में आयोजित स्नेही श्रद्धालुओं के “स्नेह मिलन समारोह” का उद्घाटन प्रखर शिक्षाविद व समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने किया और ब्रह्माकुमारी राजयोगिनी तपस्विनी रंजू दीदी ने अध्यक्षता की |

बता दें कि कार्यक्रम का श्री गणेश ॐ शांति गीत से किया गया | गीत समापन के साथ ही उपस्थित जनों ने दीदी के साथ विश्व शांति के लिए ध्यान किया एवं तत्पश्चात सम्मिलित रुप से दीप प्रज्वलित कर पूर्व प्रमुख विनय वर्धन उर्फ खोखा बाबू, विनोद कुमार, विजय वर्धन आदि द्वारा “तमसो माज्योतिर्गमय” का उद्घोष किया गया | सबों को टीका लगाकर अपने संक्षिप्त संबोधन में ब्रम्हा कुमारी रंजू दीदी ने यही कहा- बीते वर्ष में सभी प्रकार के नेकी-बदी किए गये कार्यों की विदाई करें तथा अपने अंतर्मन की स्वच्छता के लिए अपने अंदर में बच रही बुराई को भी विदा कर दें | उन्होंने नये वर्ष में बुरा काम नहीं करने का सबों को संकल्प दिलाया |

यह भी बता दें कि उद्घाटनकर्ता डॉ.मधेपुरी में पुराने और नये वर्ष के सन्धिकाल की विस्तृत चर्चा करते हुए एवं ‘समय’ के संबंध में चेतावनी देते हुए अपनी ही पंक्तियों को यूँ गुनगुनाया-

न आदि न अंत, न टूट कहीं ! न रुके न झुके, शाश्वत है गमय है !!

तेज धार बख्शे न किसी को ! सुनो बंधुओ, वही समय है !!

डॉ.मधेपुरी ने जहाँ समय को विजय कहा वहीं इसे पराजय भी बताया | समय को मित्र कहा तो उसे शत्रु भी कह सुनाया | उन्होंने कहा- “बच्चो ! जीवन-सरिता में सुख-शांति व सद्भाव का सुन्दर कमल खिलाना चाहते हो तो समय के पल-पल को सकारात्मक कर्मों से बांधो | भूल करनेवालों को समय कभी नहीं बख्शेगा |”

मौके पर ओमशांति संस्थान के उन्नयन में लगे पूर्व प्रमुख विनय वर्धन उर्फ खोखा यादव, सिल्लीगुड़ी से पधारी कुसुम मातेश्वरी, ओम प्रकाश यादव, विजय वर्धन, संजय वर्धन, बैजनाथ यादव एवं अयोध्या बाबू सहित अन्य गणमान्यों ने अपने संबोधन के दरमियान सार रूप में यही कहा कि हीरा-मोती देकर भी कोई बीता हुआ समय वापस नहीं ला सकता !

अंत में नव वर्ष पर आयोजित स्नेह-मिलन-समागम का समापन स्नेहिल सहभोज के साथ संपन्न हुआ |

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मोदी लोकसभा में, सचिन राज्यसभा में अव्वल !

सोशल मीडिया साइट फेसबुक ने बुधवार को एक जनवरी, 2017 से 31 दिसंबर, 2017 की अवधि में भारत में सरकारी निकाय, मंत्रालयों और राजनीतिक दलों के शीर्ष फेसबुक पेज के बारे में रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट के मुताबिक फेसबुक पर साल 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा सदस्य के रूप में और दिग्गज क्रिकेट खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर राज्यसभा सदस्य के रूप में सर्वाधिक चर्चित रहे। ये अलग बात है कि संसद में सचिन की मौजूदगी लगभग नगण्य रही।

बहरहाल, इस रिपोर्ट में फेसबुक ने भारत की संसद के अधीन शीर्ष स्तरीय सरकारी निकायों, केंद्रीय सरकार, राज्य सरकार और संघ शासित प्रदेशों और राजनीतिक दलों के पेज को अलग-अलग बांटा है। बकौल फेसबुक राज्य सरकार और संघ शासित प्रदेशों में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सबसे अधिक चर्चित रहे, जबकि इसमें दूसरे स्थान पर राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे रहीं। राजनीतिक पार्टियों की बात करें तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) फेसबुक पर सबसे अधिक लोकप्रिय पार्टी बनकर उभरी। जबकि कांग्रेस इस सूची में तीसरे स्थान पर रही। दूसरा स्थान आम आदमी पार्टी ने हासिल किया।

चलते-चलते बता दें कि फेसबुक पर ‘माई गवर्नमेंट इंडिया’ सरकारी पहल के रूप में सबसे अधिक चर्चा में रहा, वहीं सैन्य बलों में भारतीय सेना के बारे में अधिक चर्चा की गई। शीर्ष निकायों की बात की जाए, तो पीएमओ इंडिया फेसबुक पर सबसे अधिक लोकप्रिय रहा। इसके बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और विदेश मंत्रालय का नंबर रहा।

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गाँधी के गाँवों में सशक्त ग्रामीण ही बदलाव ला सकता है

मधेपुरा जिला मुख्यालय के प्राथमिक विद्यालय नौलखिया वार्ड न:-1 में नागेश्वर प्रसाद की धर्मपत्नी प्रथमवती देवी की दूसरी पुण्य तिथि पर भारतीय जन लेखक संघ द्वारा “कर्मकांड और धर्मांधता” विषय पर जिला स्तरीय परिसंवाद एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया | सम्मेलन का उद्घाटन समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने फीते को कैंची से काटकर नहीं बल्कि अपने हाथ से खोलकर किया | इस दौरान डॉ.मधेपुरी ने “कैंची और सूई” के महत्व पर अपनी लम्बी काव्यकृति प्रस्तुत करते हुए विस्तार से कैंची को बांटने का प्रतीक एवं सूई को जोड़ने का प्रतीक बताया |

गाँधी के इस गाँव में माताओं-बच्चों व बड़े-बूढ़ों की भीड़ को संबोधित करते हुए डॉ.मधेपुरी ने अपने उद्घाटन भाषण में विस्तार से ‘कर्मकांड व धर्मांधता’ की व्याख्या की और कहा कि अंधविश्वास मिटाये बिना समाज का कल्याण संभव नहीं | उन्होंने कहा कि इस रूढ़िवादी परंपराओं को ढोने के चलते आर्थिक रुप से कमजोर लोग एक बड़े कर्ज में डूब जाते हैं | बच्चों को समुचित शिक्षा नहीं दे पाते हैं | विवश होकर उन्हें अपनी जमीन जायदाद तक बेचनी पड़ती है |

डॉ.मधेपुरी ने ग्रामीणों को बताया कि हिन्दू धर्म शास्त्र में मुक्ति के जो उपाय बताये गये हैं उन्हें ही कर्मकांड कहा जाता है तथा इसकी रूढ़िवादिता को ही कहा जाता है- धर्मांधता ! श्राद्धकर्म की विविधता का निरूपण करते हुए उन्होंने कहा कि राजा से लेकर गरीब लोगों के लिए भी विष्णुपुराण में पितरों के श्राद्ध करने की चर्चा है जिसमें गरीबों के लिए भी व्यवस्था की गई है | वे हथेली पर तिल के कुछ दाने रखें और जल के साथ सूर्य देव को अर्पित करें या वह भी नहीं हो तो सपरिवार गाय को चारा काटकर खिला दें तथा हाथ जोड़कर अपने पितर से कहें- यही मेरी ओर से किया गया श्राद्ध है इसे मेरी श्रद्धायुक्त प्रार्थना के साथ स्वीकार करें (विष्णुपुराण पृष्ठ संख्या- 248-49)

डॉ.मधेपुरी ने उपस्थित जनसमूह से यह भी कहा कि आडंबर में लोगों को हैसियत से अधिक धन का व्यय करना उसकी मजबूरी बन जाती है | समाज में बदलाव लाने के लिए हमें संकल्पित और संगठित होकर कर्मकांड को त्यागना पड़ेगा | बिना कर्मकांड को त्यागे समाज तरक्की के रास्ते पर आगे नहीं बढ़ेगा | आप गाँठ बांध लें कि यहाँ जूता-छाता-कम्बल…… आदि दान करने से वहाँ पितर को कभी नहीं मिलता है |

अंत में जब डॉ.मधेपुरी ने नौलखियावासी नर-नारियों से कहा कि परिवार व समाज को आगे बढ़ाने के लिए ब्राह्मणवादी ढोंग यानि अंधविश्वास को खत्म करना ही होगा तो सबों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ डॉ.मधेपुरी को पुनः आने का निमंत्रण भी दे डाला | इसी दौरान उद्घाटनकर्ता डॉ.मधेपुरी ने प्रथमवती देवी मेमोरियल ट्रस्ट की ओर से भीषण ठंड को लेकर विकलांग और विधवा को कंबल भेंट किया |

इस कार्यक्रम में मुख्यवक्ता के रूप में राष्ट्रीय महासचिव महेन्द्र नारायण पंकज, राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर, ई.हरिश्चन्द्र मंडल, डॉ.सुरेश प्रसाद यादव, डॉ.इन्द्र ना.यादव व कामेश्वर राय, पंकज कुमार, सुभाष चन्द्र प्रभाकर, गणेश मानव आदि ने सभा को संबोधित करते हुए इस बात पर जोर देते रहे कि मृत्यु भोज जैसी कुरीति का सामूहिक बहिष्कार जरूरी है क्योंकि यह एक सामाजिक कोढ़ है……….!

दूसरे सत्र में सामाजिक कुरीतियों पर चोट करने वाली कविताओं का पाठ किया सुकवि उल्लास मुखर्जी, डॉ.अरुण कुमार, प्रमोद कुमार, राकेश द्विजराज, योगेंद्र प्रसाद आदि ने | सम्मेलन की अध्यक्षता डॉ.इन्द्र नारायण यादव ने तथा संचालन किये गजेंद्र कुमार और मिथिलेश कुमार ने | सम्मेलन की सफलता के लिए अनीता जी, रमण जी आदि सहित सबों को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए श्री रमेश यादव ने अध्यक्ष के निदेशानुसार कार्यक्रम की समाप्ति की घोषणा की | अंत में  सुकवि सुरेंद्र स्निग्ध के आकस्मिक निधन पर 1 मिनट का मौन रखकर शोक जताया गया |

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नव वर्ष में कोसी के तीनों जिले वाई-फाई से होंगे लैस

जहाँ एक ओर सभी अपने सगे-संबंधियों व परिजनों को बीते वर्ष के 31 दिसंबर के 12:00 बजे रात के बाद से ही ‘नव वर्ष मंगलमय हो’ की शुभकामनाएँ प्रेषित करने में लगे हैं वही BSNL के वरिष्ठ उपमंडल अभियंता श्री डी.सी.दास कोसी के तीनों जिले मधेपुरा-सहरसा-सुपौल के मुख्यालयों की दर्जनों जगहों पर वाई-फाई लगाने में जुट गये हैं | श्री दास ने मधेपुरा अबतक को बताया कि 31 दिसम्बर 2018 तक तीनों जिला मुख्यालयों में वाई-फाई हॉट स्पॉट लगाने का काम पूरा कर लिया जाएगा | उन्होंने कहा कि 00 मीटर के रेडियस में इन तीनों जिले वासियों को वाई-फाई की सेवा मिलेगी जिस सुविधा के लिए आरंभ में कोई शुल्क नहीं लगेगा | श्री दास ने यह भी कहा कि वाई-फाई हॉट स्पॉट BSNL के टावड़ो पर लगेगा और जहाँ टावर नहीं होगा वहाँ जगह की व्यवस्था की जायेगी |

बता दें कि वाई-फाई रेडियो तरंगों की मदद से नेटवर्क और इंटरनेट तक पहुंचने की एक युक्ति है जिसके इर्द-गिर्द मौजूद मोबाइल फोनों को वायरलेस इंटरनेट उपलब्ध कराने का काम करता है | जानिए कि इसकी गति सामान्य सेवा प्रदाताओं की ओर से दी जाने वाली गति से काफी तेज होती है | यह तकनीक आजकल के नए स्मार्टफोन, लैपटॉप और कंप्यूटर में आसानी से पाई जाती है | एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर तक जानकारी भेजने के लिए वाई-फाई I.E.E.E 802.11 मानक का प्रयोग करता है |

जानकारी के लिए जहाँ मधेपुरा जिला मुख्यालय के बी.पी.मंडल चौक, कर्पूरी चौक, स्टेशन चौक, पूर्णिया गोला चौक, मस्जिद चौक, भूपेन्द्र चौक आदि सहित अन्य जगहों पर वाई-फाई हॉट स्पॉट लगाये जायेंगे वहीं सहरसा के डी.बी.रोड, डीएम-एसपी ऑफिस, कोर्ट परिसर, सर्किट हाउस, कायस्थ टोला, पॉलिटेक्निक, शंकर चौक, दहलान चौक, महावीर चौक, तिवारी टोला, प्रोफेसर कॉलोनी आदि जगहों पर और सुपौल जिला मुख्यालय के राजेंद्र नगर, चकला निर्मली, कलेक्ट्रेट, नगर परिषद, स्टेशन रोड सहित अन्य जगहों पर वाई-फाई हॉट स्पॉट लगाये जायेंगे |

चलते-चलते यह भी बता दें कि सहरसा जिला टेलीकाम मैनेजर श्री बी.के.सिंह ने बताया कि सहरसा, मधेपुरा व सुपौल मुख्यालय की जगहों की सूची तैयार कर पटना स्वीकृति हेतु भेज दी गई है |

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