नीतीश ने खोजी सदियों पुरानी चीज

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बिहार के इतिहास व संस्कृति को किस कदर सहेजने में लगे हैं, इसकी बानगी उस समय देखने को मिली, जब उन्होंने समीक्षा यात्रा के दौरान एक स्तूप खोज निकाला। जी हां, ये ख़बर सोलह आने सच्ची है। विकास कार्यों की समीक्षा के दौरान नीतीश कुमार ने एक पालकालीन स्तूप खोज निकाला है।

वाकया कुछ यों है। अपनी समीक्षा यात्रा के दौरान बिहार के मुख्यमंत्री की नजर शेखपुरा जिले के अरीयरी ब्लॉक के डीहा फरपर गांव में एक टीले पर पड़ी। मुख्यमंत्री ने टीले में दिलचस्पी दिखाई। उस समय उनके साथ रहे एक अधिकारी के मुताबिक दरअसल नीतीश को टीले की बनावट को लेकर संदेह हुआ था। इसके बाद उन्होंने मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह से कहा कि वह इसे लेकर केपी सिंह जायसवाल रिसर्च इंस्टिट्यूट एंड बिहार हैरिटेज डिवेलपमेंट सोसायटी और दूसरे संस्थानों से बात कर इसकी जांच कराएं। उनके निर्देश पर केपी जायसवाल शोध संस्थान के निदेशक और बिहार विरासत विकास समिति के कार्यकारी निदेशक डॉ विजय कुमार चौधरी शेखपुरा जिले के अरियारी प्रखंड में डीह फरपार गांव पहुंचे। उन्होंने वहां उस टीले की प्रारंभिक खुदाई कराई। वहां से उन्हें पालकालीन सभ्यता की मूर्तियां मिलीं। इसमें विष्णु की एक मूर्ति और महात्मा बुद्ध की दो तरह की मूर्तियां मिली हैं। इनमें से एक परिनिर्वाण मुद्रा तो दूसरी भूमिस्पर्श मुद्रा में है।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर 24 घंटे के भीतर मौके पर पहुंची केपी जायसवाल शोध संस्थान एवं बिहार विरासत विकास समिति की संयुक्त टीम ने कई नमूने इकट्ठा किए। पुरातत्व विशेषज्ञ डॉ. अनंत आशुतोष वेदी के नेतृत्व में डीहा गांव के विभिन्न हिस्सों से पुरातात्विक महत्व के नमूने लिए गए। टीम पुरानी मूर्तियों के टुकड़े, बर्तन एवं मिट्टी के नमूने अपने साथ ले गई।

बता दें कि मुख्यमंत्री ने केपी जायसवाल शोध संस्थान को बिहार के सभी पुरातात्विक महत्व के स्थानों पर विस्तृत शोध का निर्देश दिया था। वर्ष 2007 से 2013 के बीच कराए गए शोध के बाद करीब छह हजार से अधिक स्थलों की सूची बनाई गई थी। तब डीहा को सिर्फ बुद्ध एवं विष्णु की पालकालीन मूर्तियों के लिए इसमें स्थान गया था, जिसे स्वयं मुख्यमंत्री ने अपनी जागरुकता व तत्परता से सच कर दिखाया। नए साल में बिहार के लिए यह खोज एक दुर्लभ उपहार है।

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डॉ. अमरदीप के अध्यक्ष बनने से मधेपुरा उत्साहित, बधाईयों का तांता

डॉ. अमरदीप को जेडीयू मीडिया प्रकोष्ठ का प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने पर मधेपुरा जिले के जेडीयू नेता व कार्यकर्ता खासे उत्साहित हैं। मधेपुरा के बेटे को जेडीयू के शीर्ष नेतृत्व द्वारा इतनी बड़ी जिम्मेदारी दिए जाने को यहां के लोग पूरे इलाके के लिए सम्मान की बात बताते हैं। गौरतलब है कि वर्तमान समय में मीडिया के बढ़ते महत्व को देखते हुए जेडीयू ने मीडिया प्रकोष्ठ का गठन किया और इसकी जिम्मेदारी मीडिया के सभी फॉर्मेट में दखल रखने वाले डॉ. अमरदीप को दी। बता दें कि पार्टी के आधुनिकीकरण में लगे डॉ. अमरदीप ने अभी हाल ही में 1, अणे मार्ग, पटना में सम्पन्न हुए जेडीयू के 21 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में बड़ी भूमिका निभाई थी। बिहार के सभी 38 जिलों व पार्टी के 27 प्रकोष्ठों के लगभग 25 हजार कार्यकर्ताओं के वे आकर्षण के केन्द्र रहे थे।

डॉ. अमरदीप को अध्यक्ष बनाए जाने पर बिहार सरकार के अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री डॉ. रमेश ऋषिदेव, बिहारीगंज के विधायक निरंजन मेहता, जिला उपाध्यक्ष डॉ. रत्नदीप, महासचिव यादव उमेश, प्रो. मनोज भटनागर, मुरलीगंज प्रखंड जेडीयू अध्यक्ष मिथिलेश कुमार, उपाध्यक्ष राजीव कुमार, महासचिव अमित कुमार, जिला जेडीयू के व्यावसायिक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष अशोक चौधरी, दलित प्रकोष्ठ के अध्यक्ष नरेश पासवान, वरिष्ठ नेता गोवर्द्धन मेहता, महेन्द्र पटेल, महासचिव मो. अनवारुल हक, वार्ड सदस्य रेशमा परवीन, मो. सलाहउद्दीन आदि ने बधाई दी है। इन नेताओं ने कहा कि दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष व बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार, प्रदेश अध्यक्ष व राज्यसभा सदस्य श्री बशिष्ठ नारायण सिंह एवं राष्ट्रीय महासचिव व जेडीयू संसदीय दल के नेता श्री आरसीपी सिंह ने डॉ. अमरदीप के युवा कंधों पर महती जिम्मेदारी देकर ना केवल उऩकी प्रतिभा का सम्मान किया है, बल्कि हम सबका मान भी बढ़ाया है। बता दें कि डॉ. अमरदीप मधेपुरा के पूर्व सांसद व बीएनएमयू के संस्थापक कुलपति डॉ. रवि के छोटे पुत्र हैं।

‘मधेपुरा अबतक’ से बातचीत करते हुए डॉ. अमरदीप ने कहा कि मीडिया के सभी फॉर्मेट, चाहे वह इलेक्ट्रॉनिक मीडिया हो, प्रिंट मीडिया हो या सोशल मीडिया, जेडीयू को सभी दलों से आगे रखना है। उन्होंने बताया कि 21 जनवरी को माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के आह्वान पर दहेजप्रथा व बालविवाह के विरोध में आयोजित की जा रही मानव-श्रृंखला की सफलता के लिए उन्हें अभी से दिन-रात जुट जाना है। इसमें उनका प्रकोष्ठ बड़ी भूमिका निभाने को संकल्पित है।

बता दें कि इधर मधेपुरा में पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता अभी से उनके स्वागत की तैयारी में जुट गए हैं। जिला महासचिव प्रो. मनोज भटनागर ने बताया कि प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप के आगमन पर यहां उनका भव्य स्वागत किया जाएगा।

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मधेपुरा वासियों को नए साल में मिलेगा नवीन पुस्तकालय

मधेपुरा के डायनेमिक डीएम मो.सोहैल द्वारा जिला केन्द्रीय पुस्तकालय को पुनर्जीवित करने हेतु गठित संचालित समिति की लगातार तीन-चार बैठकें हो चुकी हैं | प्रथम बैठक कुछ महीने पूर्व ही डीएम मो.सोहैल की अध्यक्षता में हुई थी |

बता दें कि समिति के कुशल संचालन हेतु समाजसेवी साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी, प्रो.श्यामल किशोर यादव, प्रो.प्रदीप कुमार झा सहित सचिव श्री संदीप शांडिल्य एवं अध्यक्ष जिला शिक्षा पदाधिकारी (पदेन) की टीम गठित की गई | गत 26 दिसम्बर को डीईओ उग्रेश प्रसाद मंडल की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई जिसमें समस्तीपुर पुस्तकालय प्रभारी सह मधेपुरा जिला पुस्तकालय वित्तीय प्रभारी योगेंद्र प्रसाद को भी बुलाया गया था ताकि वित्तीय जानकारी प्राप्त कर विद्युतीकरण, नए उपस्कर की खरीद एवं जीर्णोद्धार कर भवन का रंग-रोगन करने का निर्णय लिया जा सके, परंतु श्री प्रसाद ने तत्काल वित्तीय जानकारी उपलब्ध करवाने में असमर्थता जताई तथा 29 दिसंबर तक चेक बुक, पासबुक व अन्य कागजात समर्पित करने की बात कही | श्री प्रसाद आज पुस्तकालय के नाम वाला पासबुक दिये जिसमें 2लाख 60 हज़ार इंटरेस्ट की राशि जमा है | कभी 18 लाख रु जो आया था उसके खर्च का ब्योरा उन्होंने नहीं दिया | सचिव श्री शांडिल्य ने डीएम से जाँच कराने की अपील करने हेतु पुनः मिटिंग बुलाने वाले हैं |

तत्काल बिजली मीटर लगाने एवं इलेक्ट्रिफिकेशन का कार्य पूरा करने के लिए वरिष्ठ सदस्य डॉ.मधेपुरी सहित अन्य सभी सदस्यगण व्यक्तिगत सहयोग राशि 2500/- ( ढाई हज़ार )रु.  की दर से दे रहे हैं और उस कार्य को पूरा भी किया जा चुका है | मुरलीगंज नगर पंचायत के श्वेत कमल उर्फ़ बउवा बाबू भवन के रंग-रोगन कार्य पूरा करने का वचन शिक्षानुरागी सदस्य डॉ.मधेपुरी को दे चुके हैं | डॉ.मधेपुरी ने कहा कि मिसाइलमैन डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम हमेशा पढ़ने और ज्ञान हासिल करने को सबसे बड़ी ताकत मानते रहे | अंततक किताबों के प्रति उनका उत्साह बना रहा | डॉ.मधेपुरी ने  सचिव श्री संदीप सांडिल्य सहित पुस्तकालय  प्रभारी यादव विक्रम एवं सहयोगी शिक्षक श्री कुणाल कुमार के कार्यों की भरपूर सराहना की तथा उन्होंने  नये साल में नव वर्ष की मंगल कामनाओं के साथ मधेपुरा वासियों को जिला केंद्रीय पुस्तकालय का नवीन संस्करण देने का संकल्प दुहराया |

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तो क्या अन्ना को जेल से देना होगा धरना..?

सुप्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने कहा है कि अगर सरकार उन्हें राजधानी नई दिल्ली में धरना करने के लिए कोई जगह नहीं देती है, तो वह जेल से ही खुशी-खुशी धरना देंगे।

अन्ना ने कहा, ‘मैंने 23 मार्च को दिल्ली में धरना देने के लिए केंद्र सरकार से कोई जगह मुहैया कराने का आग्रह किया है। अभी तक मुझे सरकार की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। अगर सरकार मुझे इजाजत नहीं देती है तो मैं जेल से ही खुशी-खुशी धरना दूंगा।’ आगे उन्होंने कहा, ‘पहले कांग्रेस की सरकार ने 2011 में भी मुझे दिल्ली में प्रदर्शन करने की इजाजत नहीं दी थी और जेल में डाल दिया था। देखते हैं कि यह सरकार अब क्या करती है।’

पद्म विभूषण से सम्मानित अन्ना हजारे ने पहले और अब में अंतर रेखांकित करते हुए कहा, ‘पहले यूपीए सरकार मेरे पत्रों का संज्ञान लेती थी और तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह मेरे पत्रों का जवाब भी देते थे। लेकिन अब प्रधानमंत्री मोदी जी को मैं किसानों और स्थानीय मुद्दों को लेकर 30 पत्र लिख चुका हूं, लेकिन अभी तक एक का भी जवाब मुझे नहीं मिला है।’ क्या प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को इस विषय में तत्काल गंभीरता से विचार नहीं करना चाहिए ?

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अब फेसबुक भी मांगेगा आधार

आधार को विभिन्न सरकारी सुविधाओं और पहचान पत्रों से लिंक करने को लेकर भले ही कानूनी लड़ाई जारी है और इसे निजता के अधिकार पर खतरा बताया जा रहा है, पर इन सब के बावजूद आधार सबसे विश्वसनीय आईडी प्रूफ बनने की ओर है। और तो और अब जल्द ही फेसबुक भी नया अकाउंट खोलने से पहले यूजर से आधार की मांग करेगा।

जी हां, फेसबुक एक ऐसा फीचर टेस्ट कर रहा है जिसमें नया अकाउंट खोलने के लिए आपको आधार कार्ड पर लिखा नाम बताना होगा। जब आप आधार कार्ड पर लिखा नाम डालेंगे तो लिखकर आएगा, ‘अगर आप अपना आधार वाला नाम डालेंगे तो आपके दोस्त आपको आसानी से खोज सकेंगे।’ फेसबुक ने बताया कि नया अकाउंट खोलने वाले सभी लोगों को ऐसा नोटिफिकेशन नहीं दिखेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फेसबुक का कहना है कि यह कुछ यूजर्स को ही दिखेगा। फेसबुक ने यह भी साफ किया है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह वैकल्पिक होगी।

भले ही आधार को लेकर हंगामा जारी हो लेकिन फेसबुक द्वारा आधार नाम पूछे जाने का कोई खास असर नहीं पड़ेगा क्योंकि आधार नंबर जाने बिना ‘निजता के अधिकार’ पर कोई खतरा नहीं है। वैसे बता दें कि आधार जानकारी मांगने वाली फेसबुक पहली कंपनी नहीं है। कुछ सप्ताह पहले ऑनलाइन रिटेलर अमेजन इंडिया ने भी कस्टमर्स से अपने आधार नंबर अपलोड करने को कहा था जिससे खोए हुए ऑर्डर को सही पते पर पहुंचाया जा सके।

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मधेपुरा के डॉ. अमरदीप बने जेडीयू मीडिया प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष

बिहार जेडीयू के अध्यक्ष श्री बशिष्ठ नारायण सिंह ने जेडीयू मीडिया प्रकोष्ठ का गठन करते हुए डॉ. अमरदीप को प्रदेश अध्यक्ष मनोनीत किया। आज राजधानी पटना स्थित पार्टी मुख्यालय में आयोजित समारोह में डॉ. अमरदीप को मनोनयन का पत्र सौंपा गया। उनके साथ ही श्री सुनील कुमार को प्रशिक्षण प्रकोष्ठ का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। इन दोनों प्रकोष्ठों के गठन को 2019 के लोकसभा व 2020 के विधानसभा चुनाव की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है।

दोनों नेताओं के मनोनयन पर पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) व संसदीय दल के नेता श्री आरसीपी सिंह, बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष सह विधानपार्षद प्रो. रामवचन राय, बिहार विधान परिषद में पार्टी के मुख्य सचेतक श्री संजय कुमार सिंह (गांधीजी), पार्टी के कोषाध्यक्ष सह विधानपार्षद डॉ. रणवीर नंदन, प्रदेश महासचिव सह मुख्यालय प्रभारी डॉ. नवीन कुमार आर्य एवं श्री अनिल कुमार ने बधाई देते हुए कहा कि नेताद्वय के मनोनयन से पार्टी को नई ऊर्जा और मजबूती मिलेगी।

‘मधेपुरा अबतक’ के पाठकों को बता दें कि मीडिया विशेषज्ञ डॉ. अमरदीप की मातृभूमि मधेपुरा है। वे मधेपुरा के पूर्व सांसद, राज्यसभा के पूर्व सदस्य, जेडीयू के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव व मधेपुरा स्थित भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति डॉ. रमेन्द्र कुमार यादव रवि के तीन बेटों में सबसे छोटे हैं। वहीं मधेपुरा के प्रसिद्द समाजसेवी व साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी उनके धर्मपिता हैं । दिल्ली विश्वविद्यालय के मेधावी छात्र रहे डॉ. अमरदीप मीडिया के क्षेत्र में बीस वर्षों से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। वे भारत सरकार समेत कई राज्य सरकारों, विभिन्न मंत्रालयों, बड़े कॉरपोरेट हाउसों एवं विभिन्न चैनलों को अपनी सेवा दे चुके हैं। धारावाहिक एवं वृत्तचित्र बनाने में महारत रखने के साथ ही उन्होंने विभिन्न विषयों पर एक दर्जन से ज्यादा महत्वपूर्ण किताबें भी लिखी हैं।

नई भूमिका में उनकी प्राथमिकताओं को लेकर ‘मधेपुरा अबतक’ द्वारा पूछे जाने पर डॉ. अमरदीप ने कहा कि मीडिया की अहमियत हमेशा से रही है लेकिन सोशल मीडिया ने इसके दायरे, विस्तार व गति को बेहिसाब बढ़ा दिया है। उनकी प्राथमिकता होगी कि सभी आधुनिक संचार माध्यमों पर जेडीयू की दमदार मौजूदगी हो। डॉ. अमरदीप ने कहा कि पार्टी, पॉलिटिक्स और लीडर, हर मायने में जेडीयू बाकी दलों से कोसों आगे है, अब बारी तकनीक की है।

बकौल डॉ. अमरदीप पार्टी के आधुनिकीकरण व मीडिया के हर फॉर्मेट पर काम करने के साथ ही उन्हें जमीनी स्तर पर कई कार्यों को अंजाम देना है। दहेजबंदी और बालविवाहबंदी के समर्थन में जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष व बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के आह्वान पर आगामी 21 जनवरी को बनने जा रही मानव-श्रृंखला की सफलता ऐसा ही एक कार्य है, जिस पर उन्हें तत्काल लगना है।

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ईद ही नहीं, अब क्रिसमस भी सलमान के नाम

सलमान खान ने साल 2017 के जाते-जाते अपनी फिल्म के जरिए अपनी ही कमाई के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। सलमान-कटरीना की फिल्म ‘टाइगर ज़िंदा है’ ने तीन दिन के अंदर ही 114 करोड़ रुपए की कमाई कर डाली है, जो उनकी किसी भी फिल्म से ज्यादा है। बता दें कि यह सलमान की 12वीं ऐसी फिल्म है, जिसकी कमाई भारत में 100 करोड़ के पार गई है। यह बाकी सभी ऐक्टर्स से ज्यादा है। इससे पहले सलमान की ‘बजरंगी भाईजान’ ने भारत में सबसे ज्यादा 320.34 करोड़ और ‘सुल्तान’ ने 300.45 करोड़ की कमाई की थी।
‘दबंग’ सलमान की फिल्म ‘टाइगर ज़िंदा है’ बॉक्स ऑफिस पर जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, उसे देख लगता है कि आने वाले दिनों में यह कमाई के कई रिकॉर्ड तोड़ेगी। वैसे भी पुराने साल के जाने और नए साल के आने का संधिकाल कुछ ऐसा होता है कि लोग इस समय को मौज-मस्ती के साथ बिताना चाहते हैं। जाहिर है कि सलमान को इसका बड़ा लाभ मिलेगा। गौरतलब है कि बड़ी आसानी से 100 करोड़ क्लब में पहुंच चुकी इस फिल्म ने शानदार ओपनिंग के साथ पहले ही दिन 34 करोड़ की कमाई की थी। यही नहीं, तीन दिनों में 114 करोड़ की कमाई कर सलमान की इस फिल्म ने ‘सुल्तान’ को भी पीछे छोड़ दिया है, जिसकी कमाई 3 दिनों में 105 करोड़ रुपए बताई जाती है।

बहरहाल, जिन हमारे जिन पाठकों ने पहले तीन दिन में यह फिल्म नहीं देखी है, उन्हें बता दें कि सलमान खान इस फिल्म में एक बार फिर अपने फैंस को एक्शन का डोज दे रहे हैं। एक्शन सीक्वेंस में कैटरीना कैफ ने भी उनका भरपूर साथ दिया है। फिल्म में दोनों आतंकियों के चंगुल से बंधक बनीं नर्सों को बचाते हुए नजर आ रहे हैं। फिल्म में ‘टाइगर’ सलमान जहां रॉ के एजेंट हैं वहीं जोया यानि कटरीना पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की एजेंट बनी हैं। दोनों नर्सों को बचाने के मिशन के दौरान एक-दूसरे को चाहने लगते हैं। कुल मिलाकर एक्शन और रोमांस समेत फिल्म में वो सभी मसाले डाले गए हैं जिसे देखने के लिए दर्शक सिनेमाघरों का रुख कर रहे हैं। एक पंक्ति में कहें तो सलमान को चाहने वालों के लिए यह फिल्म क्रिसमस पर सांता के उपहार से कम नहीं। ईद के समय बॉक्स ऑफिस पर राज करने वाले बॉलीवुड के इस खान ने अब क्रिसमस भी अपने नाम कर लिया है।

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‘तुम मुझे यूं भुला ना पाओगे’… मानो खुद के लिए गा गए रफी

ओ दुनिया के रखवाले (‘बैजू बावरा’), बहारों फूल बरसाओ (‘सूरज’), खोया खोया चांद (‘काला बाजार’), मैं जिन्दगी का साथ (‘हम दोनों’), लिखे जो खत तुझे (‘कन्यादान’), ये रेशमी जुल्फें (‘दो रास्ते’), क्या हुआ तेरा वादा (‘हम किसी से कम नहीं’), ऐसे सैकड़ों गीत हैं जिन्हें आप एक बार सुन लें तो ताउम्र नहीं भूल सकते। इन गीतों को अपनी जादुई आवाज से अमर कर देने वाले मोहम्मद रफी आज अगर जीवित होते तो 93 साल के होते। जी हां, आवाज की दुनिया के इस बेताज बादशाह का आज 93वां जन्मदिन है।

मोहम्मद रफी का जन्म 24 दिसंबर 1924 को बंटवारे से पहले के भारत में अमृतसर के पास कोटला सुल्तान सिंह में हुआ था। छह भाईयों में सबसे छोटे रफी को गाने की प्रेरणा एक फकीर से मिली। दरअसल उनके मोहल्ले से एक फकीर गाना गाते हुए गुजरता था। गाना था, ‘पागाह वालियों नाम जपो, मौला नाम जपो’। तब फकीर की आवाज सुन रफी उनके पीछे-पीछे चलने लगते थे। कौन जानता था कि आगे चलकर उसी रफी की आवाज के पीछे पीढ़ियां-दर-पीढ़ियां चलेंगी। खैर, समय बीता। कुछ दिनों बाद रफी पिता के साथ लाहौर चले आए, जहां उनके पिता ने नाई की दुकान खोल ली। पर जगह बदलने पर भी गाने के प्रति रफी का समर्पण कम नहीं हुआ। होता भी कैसे, अभी तो उन्हें सिनेमाई गीतों का नया इतिहास लिखने बंबई (अब मुंबई) जाना था। बहरहाल, लाहौर में उन्होंने संगीत की शिक्षा उस्ताद अब्दुल वाहिद खान से ली और साथ ही गुलाम अली खान से भारतीय शास्त्रीय संगीत भी सीखा।

मोहम्मद रफी को बंबई तक पहुंचाने में उनके बड़े भाई के दोस्त अब्दुल हमीद का बड़ा हाथ बताया जाता है। उन्होंने ही रफी की काबिलियत को पहचाना और उनके परिवार को समझाया कि उन्हें बंबई जाने दे। फिल्मों के लिए रफी का पहला गाना ‘सोनिये नी हिरीये नी’ था, जो उन्होंने श्याम सुंदर के संगीत निर्देशन में पार्श्वगायिका जीनत बेगम के साथ एक पंजाबी फिल्म के लिए गाया था। हिन्दी में उनका पहला गाना था ‘हिन्दुस्तान के हम हैं’। साल था 1944, फिल्म थी ‘पहले आप’ और संगीतकार थे नौशाद। आगे नौशाद के ही संगीत निर्देशन में आई फिल्म ‘दुलारी’ (1949) में गाए अपने गीत ‘सुहानी रात ढल चुकी’ से वे सफलता की ऊंचाईयों पर पहुंच गए और इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

अपने तीन दशक के करियर में मोहम्मद रफी ने अनगिनत हिट गाने दिए। कम लोग जानते हैं कि लगभग 700 फिल्मों में 26,000 से ज्यादा गीत गाने वाले रफी ने विभिन्न भारतीय भाषाओं में गाना गाने के अलावा अंग्रेजी और अन्य यूरोपीय भाषाओं में भी गाने गाए थे। रोमांटिक और इमोशनल गानों के साथ ही कव्वाली, सूफी और भक्ति गीतों में भी उनकी कोई सानी नहीं थी। रफी जिस स्केल पर आराम से गाते थे, उस पर आज के कई गायकों को चीखना पड़ेगा। अपनी लाजवाब गायकी के लिए उन्होंने छह बार फिल्मफेयर पुरस्कार जीता और 1965 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से नवाजा। सच तो यह है कि गीतों की ही नहीं, आवाज की परिभाषा भी रफी के बिना पूरी नहीं होगी। 31 जुलाई 1980 को हमें छोड़कर चले जाने वाले रफी ने 1970 में आई फिल्म ‘पगला कहीं का’ में ‘तुम मुझे यूं भुला ना पाओगे’ गीत जैसे खुद के लिए गाया था। उन्हें भुलाना सचमुच नामुमकिन है। उन्हें हमारा नमन।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप   

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जेडीयू ने मनाया कार्यकर्ताओं का ‘शुकराना’ समारोह

जेडीयू ने एक बार फिर साबित किया कि वो पार्टी, पॉलिटिक्स और लीडर, हर चीज में अलग है। 1, अणे मार्ग में लगातार 21 दिनों तक चले अत्यंत सफल प्रशिक्षण कार्यक्रम के बाद पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) व राज्यसभा में जेडीयू संसदीय दल के नेता श्री आरसीपी सिंह ने कार्यकर्ताओं के लिए ‘शुकराना’ समारोह आयोजित किया। श्री सिंह ने दिन-रात मेहनत कर लगातार 21 दिनों तक चले ‘महायज्ञ’ को सफल बनाने वाले पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों, प्रशिक्षकों, प्रवक्ताओं और जिला व राज्य स्तर के नेताओं को शॉल देकर सम्मानित किया और सबके लिए खिचड़ी भोज का आयोजन किया। इस मौके पर प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लोग भी सादर आमंत्रित थे।

प्रेस-कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए श्री आरसीपी सिंह ने कहा कि सिर्फ बिहार ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण देश के इतिहास में किसी राजनीतिक दल द्वारा लगातार 21 दिनों का प्रशिक्षण अपने आप में अनोखी बात है। प्रशिक्षण का उद्देश्य कार्यकर्ताओं को पार्टी की विचारधारा से अवगत कराने के साथ-साथ सरकार द्वारा चलाए जा रहे सात निश्चय जैसे कार्यक्रम व लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम जैसे कानून से लाभ उठाने को प्रेरित करना, शराबबंदी, दहेजबंदी, बालविवाहबंदी जैसे सामाजिक सुधार अभियान को घर-घर तक पहुंचाना, संगठन व चुनाव-प्रबंधन को चुस्त-दुरुस्त करना और कार्यकर्ताओं को आज की नई तकनीक व सोशल मीडिया के प्रति जागरुक करना था। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस और परिवारवाद का विरोध हमारी पार्टी की खासियत है, जिस पर हमें हर हाल में कायम रहना है।

श्री आरसीपी सिंह ने इस मौके पर पार्टी को नए संचार माध्यमों से जोड़ने में लगे मीडिया विशेषज्ञ डॉ. अमरदीप की लिखी किताब ‘जेडीयू की नई करवट: एक नज़र में’ का विमोचन भी किया। उन्होंने कहा कि डॉ. अमरदीप ने यह किताब 21 दिनों के प्रशिक्षण कार्यक्रम के पहले दिन से लिखनी शुरू की और कार्यक्रम खत्म होने के ठीक अगले दिन इसका पुस्तक के रूप में आ जाना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। किताब के नाम के अनुरूप इससे पता चलता है कि पार्टी किस तरह नई करवट ले रही है। उन्होंने कहा कि यह किताब 21 दिनों के प्रशिक्षण का निचोड़ है। इसे राज्य भर में जिला व प्रखंड स्तर पर भेजने की व्यवस्था की जाएगी ताकि पार्टी से जुड़े तमाम लोग नई चुनौतियों के लिए तैयार हो सकें।

कार्यक्रम में उपस्थित विशिष्ट लोगों में विधानपार्षद प्रो. रामवचन राय, पार्टी के मुख्य प्रवक्ता व विधानपार्षद श्री संजय सिंह, प्रवक्ता व विधानपार्षद श्री नीरज कुमार, विधानपार्षद श्री संजय कुमार सिंह (गांधीजी), विधानपार्षद श्री ललन सर्राफ, प्रशिक्षण के संयोजक रहे प्रबंधन विशेषज्ञ श्री सुनील कुमार, मीडिया विशेषज्ञ डॉ. अमरदीप, विधायक श्री सुनील चौधरी, विधायक श्री अशोक सिंह, विधायक श्री बशिष्ठ सिंह, पूर्व विधायक श्री कृष्णकुमार मंटू, मुख्यालय प्रभारी व महासचिव डॉ. नवीन कुमार आर्य एवं श्री अनिल कुमार, महासचिव व प्रवक्ता श्री प्रगति मेहता, प्रवक्ता डॉ. सुहेली मेहता, प्रवक्ता डॉ. भारती मेहता, प्रवक्ता श्री निखिल मंडल, प्रवक्ता श्री अरविन्द निषाद, अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष मोहम्मद सलाम, चिकित्सा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ. एलबी सिंह, महिला जेडीयू की अध्यक्ष श्रीमती कंचन गुप्ता, महादलित प्रकोष्ठ के अध्यक्ष श्री हुलेस मांझी, श्री रंजीत प्रभाकर, सुश्री अंजुम आरा, श्री अंजनी सिंह एवं श्री नंदकिशोर कुशवाहा प्रमुख हैं।

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और भारत ने धो दिया श्रीलंका को

कप्तान रोहित शर्मा की धमाकेदार शतकीय पारी एवं चहल और यादव की जबरदस्त गेंदबाजी की बदौलत भारत ने शुक्रवार को इंदौर में खेले गए दूसरे टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच में श्रीलंका को 88 रनों से धो दिया और तीन मैचों की सीरीज में 2-0 से अजेय बढ़त हासिल कर ली।

रोहित ने अपनी पावर हिटिंग और कलात्मकता का शानदार प्रदर्शन करते हुए 43 गेंदों पर 12 चौकों और दस छक्कों की मदद से 118 रन बनाए। उन्होंने केवल 35 गेंदों पर अपना शतक पूरा करके दक्षिण अफ्रीका के डेविड मिलर के विश्व रिकॉर्ड की बराबरी की। रोहित ने केएल राहुल (49 गेंदों पर 89 रन) के साथ पहले विकेट के लिए 165 रन की रिकॉर्ड साझेदारी की। राहुल ने अपनी पारी में पांच चौके और आठ छक्के लगाए और महेंद्र सिंह धोनी (28) के साथ दूसरे विकेट के लिये 78 रन जोड़े।

इससे भारत पांच विकेट पर 260 रन बनाने में सफल रहा जो उसका इस प्रारूप में सर्वोच्च स्कोर है। श्रीलंका की टीम इसके जवाब में 17.2 ओवर में 172 रन ही बना पायी। कुसल परेरा की 37 गेंदों पर चार चौकों और सात छक्कों की मदद से खेली गई 77 रन की पारी और उपुल थरंगा (29 गेंदों पर 47) के साथ उनकी दूसरे विकेट के लिए 109 रन की साझेदारी से श्रीलंका का स्कोर एक समय दो विकेट पर 145 रन था लेकिन युजवेंद्र चहल (52 रन देकर चार विकेट) और कुलदीप यादव (52 रन देकर तीन विकेट) ने इसके बाद 19 रन के अंदर सात विकेट निकालकर मैच को एकतरफा बना दिया।

गौरतलब है कि इस जीत के साथ भारत टी-20 रैंकिंग में दूसरे स्थान पर पहुंच गया। बता दें कि भारत ने कटक में खेला गया पहला मैच 93 रन से जीता था। सीरीज का तीसरा और अंतिम मैच 24 दिसंबर को मुंबई में होगा।

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