मधेपुरा जिला लोक शिक्षा समिति के बैनर तले जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (साक्षरता) के निदेशानुसार प्रखंड मुख्यालय से जिला मुख्यालय तक स्कूली बच्चों के साथ-साथ प्रेरक, स्वयं सेवक, तालीमी मरकज आदि ने प्रत्येक प्रखंड में प्रभात फेरी निकाली तथा प्रखंड प्रमुखों द्वारा साक्षरता झंडा फहराया गया | कहीं-कहीं तो स्वच्छता मिशन के बाबत स्कूली बच्चे-बच्चियों के बीच वाद-विवाद प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गई तथा पारितोषिक देकर प्रोत्साहित भी किया गया |
यह भी बता दें कि जिला मुख्यालय मधेपुरा में भी इस अवसर पर कई कार्यक्रम आयोजित किये गये | कार्यक्रम के प्रथम चरण में बी.एन. मंडल स्टेडियम से केशव कन्या उच्च विद्यालय तक गाजे-बाजे के साथ साक्षरता मार्च निकाला गया तथा निरक्षरता दूर करने के नारे लगाये गये |
Educationist Dr.Bhupendra Madhepuri addressing the highly educated gentlemen and Shakshartakarmi on the occasion of International Literacy Day (8th September) at Keshew Kanya High School, Madhepura.
राजकीयकृत केशव कन्या उच्च विद्यालय में आयोजित सेमिनार को संबोधित किया डीपीओ गिरीश कुमार, प्रो.सच्चिदानंद, डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी, प्रो.श्यामल किशोर यादव, प्रो.सचिंद्र आदि ने |
बता दें कि जहाँ आरम्भ से ही साक्षरता में लगे प्रो.सच्चिदानंद एवं प्रो.श्यामल किशोर ने जिला साक्षरता को लक्ष्य से काफी पीछे बताया वहीं जिला परिषद के उपाध्यक्ष रघुनंदन दास एवं डीपीओ गिरीश कुमार ने कहा कि समाज तभी समृद्ध होगा जब अशिक्षा से मुक्ति मिलेगी और समाज अपने अधिकार के लिए जागृत होगा |
समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने विस्तार से शिक्षा के अभाव में फैल रही सामाजिक भ्रांतियों एवं प्रतिदिन जन्म ले रहे नये-नये अंधविश्वासों को उकेरते हुए यही कहा कि हमें व्यक्तिगत, सामुदायिक एवं सामाजिक रुप से साक्षरता के महत्व को गहराई से समझना होगा |
डॉ.मधेपुरी ने आधुनिक बिहार के निर्माता एवं बिहार के प्रथम विधि मंत्री शिवनन्दन प्रसाद मंडल की पुस्तक “Free & Compulsory Primary Education” की चर्चा करते हुए कहा कि भारतीय संविधान के 96वाँ संशोधन में हमें इसी पुस्तक के कारण शिक्षा का मौलिक अधिकार प्राप्त हुआ जिसके Article -21 में यह अंकित किया गया कि हर प्रदेश के 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को “मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा” का प्रावधान होगा |
Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri conferring certificate & momento to the best performer Shakshartakarmi .
कार्यक्रम के संचालन और सांस्कृतिक परिचालन के माहिर मुरलीधर द्वारा बेहतर करने वाले साक्षरता कर्मियों को डॉ.मधेपुरी सहित अन्य अतिथियों द्वारा मोमेंटो एवं सर्टिफिकेट प्रदान कराया गया | अंत में धन्यवाद ज्ञापित किया ज्ञानेश्वर शर्मा ने और कार्यक्रम समाप्ति की घोषणा की गई |
बी.पी. मंडल इंजीनियरिंग कॉलेज मधेपुरा हो या शिवनन्दन प्रसाद मंडल इंटर स्तरीय उच्च विद्यालय या फिर बी.एन. मंडल विश्वविद्यालय के संबद्ध एवं अंगीभूत कॉलेज ही क्यों न हो- यहाँ तक कि सरकारी एवं गैर सरकारी विद्यालयों में भी रही शिक्षक दिवस की धूम | कहीं छात्र-छात्राओं द्वारा केक काटते तो कहीं भारतरत्न डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर माल्यार्पण, पुष्पांजलि एवं श्रद्धांजलि करते देखे गये………| कहीं निबंध लेखन प्रतियोगिता का आयोजन तो कहीं किया गया छात्र-छात्राओं के बीच चित्रकारी या भाषण !! कुल मिलाकर सम्पूर्ण जिले में धूमधाम से छात्र-शिक्षकों एवं अभिभावकों द्वारा “शिक्षक दिवस” मनाया गया |
बता दें कि स्थानीय एस.एन.पी.एम. इंटरस्तरीय उच्च विद्यालय में ‘शिक्षक दिवस’ के साथ-साथ प्रधानाचार्य डॉ.निरंजन कुमार की विदाई का कार्यक्रम भी हुआ | 12:00 बजे दिन से 7:00 बजे संध्या तक चले विभिन्न कार्यक्रमों में भारी संख्या में छात्र-छात्राओं, गणमान्यों एवं अभिभावकों की उपस्थिति रही | स्कूल के संगीत शिक्षकद्वय नारायण और रजनी के मधुर संगीत के साथ-साथ मिनिरल वाटर और कोल्ड ड्रिंक्स की दौर हमेशा दर्शकों को तरोताजा बनाये रखा |
On the occasion of Teacher’s Day, the Outgoing Principal Dr.Niranjan Kumar along with his wife Mrs.Nirmala Rani and Udhghatankarta Dr.Bhupendra Madhepuri at SNPM+2 School Madhepura.
यह भी बता दें कि भारतरत्न डॉ.राधाकृष्णन के जन्मोत्सव पर आयोजित शिक्षक दिवस समारोह के अवसर पर जहाँ बी.पी.मंडल इंजीनियरिंग कॉलेज के प्राचार्य डॉ.मनोरंजन झा, डीईओ उग्रेश प्रसाद मंडल, एमएलटी कॉलेज सहरसा के प्राचार्य डॉ. के.पी. यादव, टीपी कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ.सुरेश प्रसाद यादव, डीपीओ माध्यमिक नारद प्रसाद द्विवेदी, डीपीओ सर्वशिक्षा गिरीश प्रसाद एवं राज्य कार्यकारिणी के सदस्य राजेंद्र प्रसाद यादव आदि ने विस्तार से समाज और देश के लिए कर्तव्यनिष्ठ शिक्षकों, लगनशील छात्र एवं जागरुक अभिभावकों के मजबूत इरादों पर बल दिया वहीं जिला माध्यमिक संघ के अध्यक्ष कृष्ण कुमार, पूर्व प्राचार्य वीरेंद्र प्रसाद यादव, शिक्षक आलोक कुमार, पूर्व प्रधानाध्यापक द्वय सत्येन्द्र कुमार, डॉ.सुरेश कुमार भूषण, एच.एम. यकिन्द्र कुमार मंडल, पूर्व प्राचार्य कमलेश्वरी प्रसाद बैजनाथपूरी, केशव कन्या की प्राचार्या विभा कुमारी, रासबिहारी उच्च विद्यालय की प्राचार्या रंजना झा सहित शिक्षक द्वय डॉ.संतोष कुमार व रमेश कुमार, डॉ.विजेंद्र कुमार, डॉ.नीलाकान्त, प्रो.बिजेंद्र नारायण यादव (जदयू अध्यक्ष), प्रधान जी आदि ने शिक्षक के लिए शिक्षा को ही महत्वपूर्ण बताते हुए अपने अनुभवों एवं उदाहरणों को शामिल करते हुए विस्तार से यही कहा कि बेहतरीन गुरु यानि अच्छा शिक्षक वही है जो जीवन पर्यंत विद्यार्थी बना रहता है, वे केवल किताबों से ही नहीं बल्कि अपने विद्यार्थियों से भी बहुत कुछ सीखता रहता है |
समारोह की अध्यक्षता एवं मंच संचालन करते हुए वर्तमान प्राचार्य मो.शकील अहमद ने समाजसेवी साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी को उद्घाटनकर्ता, मुख्यवक्ता एवं कर्ताधर्ता बताते हुए श्रोताओं को धैर्य से सुनने का अनुरोध किया और कहा कि डॉ.मधेपुरी सरीखे विज्ञानवेत्ता को साहित्यकार से बढ़कर इतिहासकार कहना ही बेहतर होगा……|
बता दूँ कि डॉ.मधेपुरी ने अपने संबोधन में यही कहा कि आज संपूर्ण देश में शिक्षकों को सम्मानित किया जा रहा है | राष्ट्रपति भवन में महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा बिहार के 8 शिक्षकों को, पटना के एस.के. मेमोरियल हॉल में सीएम, डिप्टी सीएम एवं शिक्षा मंत्री द्वारा बिहार के 14 शिक्षकों को और मधेपुरा के एस.एन.पी.एम. स्कूल में निवर्तमान प्राचार्य डॉ.निरंजन सहित उनकी अर्धांगिनी श्रीमती निर्मला रानी को हम सभी सम्मानित कर रहे हैं |
डॉ.मधेपुरी ने बच्चों से यही कहा कि जहां भारत में शिक्षक दिवस महामहिम डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन (5 सितंबर) को मनाया जाता है वहीं अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक दिवस 5 अक्टूबर को | भिन्न-भिन्न देशों में भिन्न-भिन्न तिथियों को शिक्षक दिवस मनाये जाते हैं | कुछ देशों में अवकाश के दिन तो कुछ में कामकाज के दिन | रूस में अक्टूबर के प्रथम रविवार को तो अमेरिका में मई के प्रथम मंगलवार को | कई देश तो शिक्षक दिवस मनाने की इन तिथियों को बदल भी लेते हैं………|
गुरु की महिमा का बखान करते हुए देर तक डॉ.मधेपुरी ने डॉ.राजेन्द्र प्रसाद, डॉ.भीमराव अम्बेडकर, डॉ.जाकिर हुसैन, डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम आदि को उद्घृत करते हुए कहा कि जब डॉ.कलाम से उनकी पहली मुलाकात हुई थी तो महामहिम के पद पर आसीन मिसाइल मैन डॉ.कलाम उठ कर खड़े हो गये थे और बैठने हेतु अनुरोध करने पर उन्होंने डॉ.मधेपुरी से यही कहा था- “मैं…… आपके लिए खड़ा नहीं हूं…… बल्कि एक शिक्षक के सम्मान में खड़ा हुआ हूँ जो राष्ट्र निर्माता होता है……|”
अंत में निवर्तमान प्राचार्य डॉ.निरंजन कुमार ने डॉ.मधेपुरी के सामने जीवन के बचे हुए वर्षों को शिक्षक के रूप में बिताने का संकल्प दोहराया और आगे समाज के उन्नयन के लिए समस्त सकारात्मक सोच वाले योग-प्रणायाम को अमलीजामा पहनाने के लिए अपनी धर्मपत्नी श्रीमती निर्मला रानी के साथ मिलकर काम करने का संकल्प लिया |
कार्यक्रम के समापन का उद्घोष छात्रों, शिक्षकों एवं अभिभावकों के सम्मिलित सहभोज के बाद ही प्राचार्य सह अध्यक्ष मो.शकील अहमद द्वारा किया गया |
इस टाइटल को पढ़ने के बाद आप में से ज्यादा लोग यही सोचेंगे कि लक, किस्मत, नसीब ने नरेन्द्र मोदी को भारत का प्रधानमंत्री बनाया, साईकिल पर चढ़ कर चूरन बेचने वाले रामदेव को फ़र्स से अर्श तक पहुचाया और भारत का बिज़नस टायकुन बनाया | क्या सच में होता है किस्मत ? किस्मत या फिर लक इस दुनिया की सबसे रहस्यमयी शक्ति है | ऐसा क्यों होता है हम में से कुछ लोगों के साथ हमेशा अच्छी चीजें होती है और किसी-किसी के साथ हमेशा बुरी | तो किस्मत या लक या फिर नसीब कहलें- क्या यह सब एक ‘इत्तेफाक’ है | कोई अगर लगातार 10 बार लौटरी जीत जाये तो क्या हम इसे उसका लक कहेंगे या फिर ‘इत्तेफाक’ | अगर लक कहेंगे तो क्या सबकुछ पहले से तय है जिससे कोई बार-बार लौटरी जीत रहा है तो कोई चाय बेचते-बेचते प्रधानमंत्री बन जाता है | या फिर ये सब एक इत्तेफाक है ! क्या ये इत्तेफाक (Randomness) हमारे ब्रह्मांड पर राज करता है ??
जब हमारी जिंदगी में सारी परिस्थितियां अनुकूल होती है तो हम इसे अपना गुड-लक मानते हैं और जब परिस्थितियां बुरी होती है तो हम उसे अपना बैड-लक मानते हैं | पर आखिर ऐसा क्यों होता है हमारे साथ ? क्या कोई रहस्यमयी चीज़ है जो हमारी परिस्थितियों को नियंत्रित करती है ? तो आइये जानते हैं कि विज्ञान क्या कहता है- वो शक्ति जो हमारी गुड-लक और बैड-लक परिस्थितियों को तय करती है वो हमारी शरीर की एक अवस्था है जिसका जवाब Physics में है, जी हाँ Quantum Physics में | अगर हम Quantum Physics की बात मानें तो हम एक विशुद्ध शक्ति पुंज हैं | हम में भी ठीक उसी प्रकार कम्पन होता है जैसा की किसी भी Charged Particle में | बस सिर्फ हमें बाहर से हमारा शरीर नजर आता है | हम सबों ने अपने भीतर की उस उर्जा को कभी न कभी जरुर महसूस किया है |
तो आज हम आपको बतायेंगे कि एक चाय बेचने वाला प्रधानमंत्री कैसे बन गया- Quantum Physics के वैज्ञानिकों ने फ्रीक्वेंसी मापक यंत्र द्वारा ये साबित कर दिया है कि एक साधारण स्वस्थ मनुष्य का शरीर 60-72 मेगाहर्ज़ पर कम्पन करता है | और गड़बड़ी तब हो जाती है जब आपके शरीर का कम्पन 60 मेगाहर्ज़ से नीचे हो जाये | इस अवस्था में आप किसी काम के नहीं होते हैं | चारों ओर असंतोष व्याप्त होने लगता है, आपके साथ हमेशा बुरा होता है, आपकी किस्मत आपको छोड़ के जा चुकी होती है, आपसे कोई प्यार नहीं करता है, आप नशे के गिरफ्त में आ चुके होते हैं, जिंदगी बोझ बन जाती है और आप बन जाते हो धरती के बोझ ! तभी तो हमारे क्रन्तिकारी मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने बिहार में शराब बंदी करवाई जिससे की बिहार की जनता Low Frequency Zone में न जा सके…… और एक अच्छी जिंदगी बना सके |
बहरहाल अब हम बात करते हैं जब हमारे शरीर की फ्रीक्वेंसी 72 मेगाहर्ज़ से ऊपर यानि 75-80-82 हो तो हम एक खुशहाल जिंदगी की तरफ़ बढ़ रहे होते हैं, हमारा जीवन स्वस्थ होता है, लोग हमसे प्यार करते हैं, हमें एक कामयाब आदमी की पहचान मिलती है या कुल मिलाकर कहें हम एक बहुत ही कामयाब जिंदगी जी रहे होते है और अगर ये फ्रीक्वेंसी 90 मेगाहर्ज़ के पार चले जाये तो हम बहुत ही किस्मत वाले हो जाते हैं, हमारे सारे सपने सच होने लगते हैं, हमारा प्रभाव दिन-ब-दिन बढ़ने लगता है | ठीक यही बात हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के साथ घटित हुई है उन्होंने अपने आप को Low Frequency Zone से High Frequency Zone में स्थापित किया और चाय बेचते-बेचते भारत के प्रधानमंत्री बन गये | वहीँ साईकिल पर चूरन बेचने वाला रामदेव- बिज़नस टायकुन चार्टर्ड प्लेन पर चढ़ने वाले बाबा रामदेव बन गये |
महान वैज्ञानिक निकोला टेस्ला ने कहा था- “If you want to understand this Universe then think in terms of Energy, Vibration and Frequency”
तो एक बात साबित हो ही गई कि किस्मत उनकी चमकती है, लक उनका साथ देता है,नसीब उनका बनता है, मुकद्दर का सिकंदर वो होता है जिनकी फ्रीक्वेंसी हाई होती है |
चीन के शियामेन में हुए ब्रिक्स देशों के सम्मेलन में आतंकवाद के खिलाफ भारत के अभियान को बड़ी सफलता मिली। ब्रिक्स देशों ने अपने घोषणापत्र में इस बार लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) और जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) जैसे पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठनों का नाम शामिल किया और इनसे तथा इनके जैसे तमाम आतंकवादी संगठनों से निपटने के लिए व्यापक दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया। इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ब्राजील के राष्ट्रपति मिशेल टेमर और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति जैकब जुमा ने शिरकत की।
शियामेन घोषणापत्र में कहा गया कि “हम क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति पर और तालिबान, इस्लामिक स्टेट (आईएस), अलकायदा और इससे संबद्ध संगठन ईस्टर्न तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट, इस्लामिक मूवमेंट ऑफ उज्बेकिस्तान, हक्कानी नेटवर्क, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, टीटीपी और हिज्बुल-तहरीर द्वारा की गई हिंसा पर चिंता व्यक्त करते हैं।” घोषणापत्र के इस अंश का महत्व इस बात से समझा जा सकता है कि भारत ने अजहर को अंतर्राष्ट्रीय आतंकी घोषित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र का रुख किया था लेकिन चीन ने बार-बार इस प्रस्ताव की राह में रोड़ा अटकाया। गोवा में बीते साल हुए आठवें ब्रिक्स सम्मेलन में भी चीन ने घोषणापत्र में पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी संगठनों को शामिल करने का विरोध किया था। पर इस बार उसकी नहीं चली। इससे भारत की धाक और धमक दोनों बढ़ी है।
गौरतलब है कि शियामेन घोषणापत्र में ब्रिक्स देशों सहित दुनियाभर में हुए सभी आतंकवादी हमलों की निंदा की गई है। घोषणापत्र में कहा गया, “आतंकवाद की सभी रूपों में निंदा की जाती है। आतंकवाद के किसी भी कृत्य का कोई औचित्य नहीं है।” पाकिस्तान का नाम लिए बगैर घोषणापत्र में कहा गया , “हम इस मत की पुष्टि करते हैं कि जो कोई भी आतंकी कृत्य करता है या उसका समर्थन करता है या इसमें मददगार होता है, उसे इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।” घोषणापत्र में आतकंवाद को रोकने और इससे निपटने के लिए देशों की प्राथमिक भूमिका और जिम्मेदारी को रेखांकित करते हुए जोर दिया गया कि देशों की संप्रभुता और उनके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करने का सम्मान करते हुए आतंक के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने की जरूरत है।
ब्रिक्स देशों ने अपने घोषणापत्र में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से व्यापक अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद रोधी गठबंधन की स्थापना करने और इस संदर्भ में संयुक्त राष्ट्र की समन्वयक की भूमिका के लिए समर्थन जताने का आह्वान किया। उन्होंने अपने घोषणापत्र में कहा, “हम जोर देकर कहते हैं कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार होनी चाहिए। इसमें संयुक्त राष्ट्र का घोषणापत्र, अंतर्राष्ट्रीय शरणार्थी और मानवीय कानून, मानवाधिकार और मौलिक स्वतंत्रता भी शामिल हैं।”
जेडीयू से अलग राह पर निकल चुके पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव और अली अनवर की राज्यसभा सदस्यता खत्म कराने की कवायद पार्टी ने शुरू कर दी। राज्यसभा में जेडीयू के नेता आरसीपी सिंह और पार्टी के राष्ट्रीय सचिव संजय झा ने उपराष्ट्रपति वैंकेया नायडू से भेंटकर उन्हें जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष व बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पत्र सौंपा। पत्र में शरद और अनवर की राज्यसभा सदस्यता खत्म करने की बात कही गई है।
गौरतलब है कि ये दोनों नेता पार्टी लाईन से अलग जाकर 27 अगस्त को पटना में आयोजित आरजेडी की भाजपा भगाओ देश बचाओ रैली में शामिल हुए थे। इनके रैली की ‘लक्ष्मण रेखा’ पार करते ही जेडीयू ने स्पष्ट कर दिया था कि अब इन दोनों नेताओं की राज्यसभा सदस्यता खत्म कराने के लिए जल्द ही जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव संजय झा का कहना है कि शरद यादव और अली अनवर ने पार्टी के निर्देश का उल्लंघन कर आरजेडी के साथ मंच साझा किया। यह संविधान के दसवें अनुच्छेद के तहत स्वत: दल त्याग का मामला है। पूर्व में ऐसे मामलों में सदस्यता खत्म होने के दृष्टांत हैं। आगे उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के मसले पर आरजेडी से गठबंधन तोड़ने का निर्णय जेडीयू विधानमंडल दल की बैठक में और एनडीए में शामिल होने का फैसला पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी और राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में लिया गया था। यह कोई व्यक्तिगत निर्णय नहीं। शरद यादव जब पार्टी के निर्णय के खिलाफ हैं तो यह साफ है कि वह पार्टी में नहीं रहना चाहते। वह अकेले पार्टी नहीं हो सकते।
उधर शरद यादव ने अपनी राज्यसभा सदस्यता खत्म करने को लेकर जेडीयू की कोशिशों का विरोध किया है। और तो और, उन्होंने तो नीतीश कुमार के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने रहने को ही चुनौती दे दी है। उनका कहना है कि नीतीश ने खुद ही भाजपा के साथ सरकार बनाकर पार्टी के चुनाव घोषणापत्र और बुनियादी सिद्धांतों को त्यागकर स्वेच्छा से पार्टी की सदस्यता छोड़ दी है।
यह भी बता दें कि शरद यादव ने चुनाव आयोग के आदेश 1968 के पैरा 15 के तहत आयोग से कहा है कि पार्टी का बहुमत उनके साथ है इसलिए पार्टी का चुनाव चिह्न उन्हें दे दिया जाए। हालांकि वे अपने बहुमत को न तो दिखा पा रहे हैं, न ही समझा पा रहे हैं। बहरहाल, जेडीयू को लेकर इस ‘रस्साकसी’ का परिणाम भले ही नीतीश के पक्ष में तयप्राय है, पर ये है बड़ा दिलचस्प, इसमें कोई दो राय नहीं।
मधेपुरा जिले के 10 प्रखंडों में प्रलयंकारी बाढ़ से हुई है भारी तबाही | हर मुसीबत में सरकार बाढ़ पीड़ितों की सहायता के साथ है | जन प्रतिनिधि प्रभारी मंत्री व ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, एससी-एसटी मंत्री डॉ.रमेश ऋषिदेव एवं पूर्व मंत्री नरेंद्र नारायण यादव आदि सहयोग में लगे हैं | जिला के राजनीतिक पार्टियों के अध्यक्षों एवं ब्लाक प्रमुखों द्वारा डीएम मो.सोहैल एवं एसपी विकास कुमार की टीम द्वारा किये गये बाढ़ व राहत कार्यों की समीक्षा बैठक में संतोष व्यक्त किया गया | भला क्यों न करें संतोष व्यक्त- जो डीएम कलकत्ते से प्लेन द्वारा त्रिपाल और प्लास्टिक मंगवाकर दूसरे दिन से ही खाने की सामग्रियों के साथ-साथ शिविरों में महिलाओं को चुड़ी-सिंदूर आदि भी उपलब्ध करा दिया हो, बच्चों और बड़ों के बीच TV मुहैया करा दिया हो और रात-रात भर खुद चैन से सोता नहीं हो………..|
जहाँ जिले के 89 पंचायत के 237 गांवों में लगभग 40 लाख लोग, लगभग 40 हजार पशुधन और जल क्रीड़ा पर प्रतिबंध के बावजूद 30 लोगों की मौत गई हो उस जिले के डायनेमिक डीएम मो.सोहैल सरीखे संवेदनशील जिलाधिकारी को बेचैन रहना वाजिब है | आज की तारीख में भी जहां आलमनगर-चौसा में कुल 9 सामुदायिक रसोई चालू है वही जन स्वास्थ्य और पशु स्वास्थ्य हेतु सम्बंधित विभाग भी कार्यरत है |
जहाँ एससी-एसटी मंत्री डॉ.(प्रो.)रमेश ऋषिदेव ने कहा कि प्रत्येक बाढ़ पीड़ित को सूचीबद्ध कर उन्हें उचित सहयोग प्रदान किया जाय वहीं पूर्व मंत्री व विधायक नरेंद्र नारायण यादव ने प्रभारी मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव का ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि क्षतिग्रस्त नहर व बांध सहित क्षतिग्रस्त ट्रांसफार्मर को भी दुरुस्त करने के साथ-साथ मधेपुरा-उदाकिशुनगंज रोड को अविलम्ब हाथ लगाया जाय |
इस अवसर पर बिहार सरकार की रीढ़ माने जाने वाले ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में रविवार को डीआरडीए परिसर वाले झल्लू बाबू सभागार में जिला प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे राहत बचाव कार्यों की समीक्षा बैठक में यही कहा कि बारिश के कारण आई बाढ़ से इस वर्ष दो हज़ार करोड़ से ज्यादा की सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई है, जबकि एनएच का आकलन किया जाना अभी बाकी है | उन्होंने कहा कि नॉर्वे और नीदरलैंड सरीखे देशों से नई तकनीक लेकर सड़क निर्माण किया जायेगा | ऊर्जा मंत्री ने अंत में यह भी कहा कि बाढ़ का स्थाई समाधान तो मुश्किल है क्योंकि अमेरिका और चीन जैसे विकसित देशों में भी बाढ़ आती ही रहती है |
प्रभारी मंत्री ने निर्देश देते हुए डीएम से यही कहा कि किसानों को खेत में खड़ाकर फसल की स्थिति के साथ फोटोग्राफी अवश्य करावें | राहत वितरण कार्य में भी पूरी पारदर्शिता हो | गलत लोगों को यदि बाढ़ राहत एवं सहायता राशि दी गयी तो संबंधित पदाधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई करें |
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कैबिनेट का तीसरा विस्तार किया। इस विस्तार में कुल 13 मंत्रियों ने शपथ ली, जिनमें 9 नए हैं, जबकि 4 मंत्रियों को कैबिनेट मंत्री के रूप में प्रमोशन दिया गया। इस विस्तार में बिहार को आरके सिंह (ऊर्जा और नवीन तथा नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय में स्वतंत्र प्रभार के राज्य मंत्री) और अश्विनी कुमार चौबे (स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री) के रूप में दो नए मंत्री मिले। लेकिन देखा जाय तो इस विस्तार में बिहार की किरकिरी भी कम नहीं हुई। पहली किरकिरी तो यह कि बिहार के सारण से सांसद राजीव प्रताप रूढ़ी इकलौते ऐसे मंत्री रहे जिनके लिए कहा जा रहा है कि उनका प्रदर्शन संतोषजनक न होने के कारण उन्हें कैबिनेट से बाहर का रास्ता दिखाया गया। वैसे तर्क उन्हें संगठन में लाए जाने का दिया जा रहा है। और दूसरी किरकिरी यह कि मीडिया में तमाम चर्चा के बावजूद जेडीयू को इस विस्तार में शामिल नहीं किया गया।
बहरहाल, अब उन चार मंत्रियों पर एक नजर जिन्हें प्रमोशन मिला। ये चार मंत्री हैं – निर्मला सीतारमण, धर्मेन्द्र प्रधान, पीयूष गोयल और मुख्तार अब्बास नकवी। सबसे अहम बात यह कि निर्मला सीतारमण को रक्षा मंत्रालय का भार सौंपा गया। मोदी ने एक बार फिर साबित किया कि जो उनके भरोसे पर खरा उतर रहा हो, उसको लेकर वो चौंकाने वाला फैसला कर सकते हैं। जेएनयू की छात्रा रहीं सीतारमण ने वाणिज्य मंत्री के तौर पर उन्हें प्रभावित किया और परिणाम सामने है। गौरतलब है कि महिलाओं में निर्मला से पहले केवल इंदिरा गांधी ने रक्षा मंत्रालय संभाला है और वो भी तब, जब वो प्रधानमंत्री थीं। निर्मला के बाद मोदी ने पीयूष गोयल और धर्मेन्द्र प्रधान पर भरोसा जताया है। गोयल को रेल मंत्रालय सौंपा गया, जबकि कोयला मंत्रालय उनके पास पूर्ववत रहेगा ही। वहीं प्रधान को कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय का जिम्मा दिया गया है और इसके साथ पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय भी उन्हीं के पास रहेगा। बचे नकवी, अब वो अल्पसंख्यक मामलों के कैबिनेट मंत्री होंगे।
इस विस्तार की एक खास बात यह भी रही कि प्रधानमंत्री ने अपने मंत्रिमंडल में जिन नौ नए मंत्रियों को शामिल किया है, उनमें चार पूर्व नौकरशाह हैं। ये हैं – पूर्व गृह सचिव आरके सिंह, पूर्व मुंबई पुलिस कमिश्नर सतपाल सिंह, सेवानिवृत्त डिप्लोमैट हरदीप सिंह पुरी और सेवानिवृत्त आईएएस केजे अल्फोंस। इनमें से पुरी और अल्फोंस तो सांसद भी नहीं हैं। यहां तक कि अल्फोंस का रुझान वामपंथी राजनीति की तरफ रहा है। दूसरी ओर आरके सिंह इस बार के बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा पर अपराधियों से पैसे लेकर उन्हें टिकट बेचने का आरोप लगा चुके हैं। तो क्या मान लिया जाय कि भाजपा के पास योग्य और अनुभवी सांसदों की इतनी कमी है कि वो समझौता करने और यहां तक कि आयातित करने तक को तैयार हैं? वैसे ‘आयातित’ करने की बात चली ही तो बता दें कि रेल मंत्री के रूप में इस्तीफे की पेशकश करने वाले सुरेश प्रभु अब वाणिज्य मंत्रालय देखेंगे।
कुछ अपनी कमजोरी, कुछ क्षेत्रीय दलों का उभार, कुछ परिस्थितियों का दोष और बाकी अच्छे दिन का नारा देकर बहुत अच्छे दौर से गुजर रही भाजपा की बेजोड़ रणनीति – कुल मिलाकर कांग्रेस पस्तहाल है। केन्द्र में उसकी स्थिति सबको पता है। वहां तो मोदीयुग चल ही रहा है। हां, बिहार में महागठबंधन बनने के बाद जब उसे 27 सीटें मिलीं, तब जरूर लगा था कि मुरझाती कांग्रेस में फिर हरियाली आ जाएगी। थोड़ी आई भी। पर नीतीश ने महागठबंधन क्या छोड़ा, कांग्रेस की वो हरियाली अब जाने को है। जी हां, सूत्रों की मानें तो कांग्रेस के 27 विधायकों में से 14 विधायकों ने अलग औपचारिक समूह बना लिया है और कहा जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में वे जेडीयू में शामिल हो जाएंगे। इस समूह को बस इंतजार है पार्टी के चार और विधायकों के अपने गुट में आने का, ताकि टूट के लिए जरूरी दो तिहाई आंकड़े का इंतजाम हो जाए और पार्टी से अलग होकर भी उनकी सदस्यता बची रहे।
गौरतलब है कि पार्टी में टूट की आशंका के मद्देनज़र कांग्रेस आलाकमान ने बिहार कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चौधरी और कांग्रेस विधायक दल के नेता सदानंद सिंह को गुरुवार को दिल्ली बुलाया था। बताया जाता है कि इन दोनों नेताओं ने पार्टी में पक रही बगावती खिचड़ी से खुद को अनजान बताया, जिस पर नाराजगी जाहिर करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उन्हें हर हाल में यह टूट रोकने को कहा।
बिहार कांग्रेस के भीतर चल रहा असंतोष अब भले ही सतह पर आ गया हो, इसकी शुरुआत उसी दिन हो गई थी जब पार्टी के 27 विधायकों व छह विधानपार्षदों में से केवल चार को ही सत्ता का सुख मिला। महागठबंधन सरकार में दो एमएलसी अशोक चौधरी एवं मदन मोहन झा और दो एमएलए अब्दुल जलील मस्तान एवं अवधेश कुमार को जगह मिली, जबकि बाकी लोग ‘उपेक्षा’ और ‘प्रतीक्षा’ के बीच भटकते रहे। कुछ लोगों को आस थी कि उन्हें बोर्ड और निगम में तो जगह मिल ही जाएगी, लेकिन जेडीयू के एनडीए से जुड़ जाने के बाद उनकी वो उम्मीद भी जाती रही।
वैसे यह कहना भी गलत होगा कि ये विधायक केवल पद की लालसा में परेशान हैं। इनकी परेशानी की एक बड़ी वजह लालू प्रसाद यादव हैं। नीतीश की अनुपस्थिति में अब लालू कांग्रेस के लिए एकमात्र विकल्प हैं और यह बात उन विधायकों को आशंकित कर रही है, जिन्हें अपनी जीत के लिए अगड़ों के वोट की सख्त जरूरत है। जब तक नीतीश साथ थे उनकी ‘छवि’ अगड़ों के लालू विरोध को ‘बैलेंस’ कर देती थी, लेकिन अब वो सहारा भी जाता रहा। ऐसे में ये विधायक करें तो क्या करें।
बहरहाल, कांग्रेस नेता अभी यह कहने में जुटे हैं कि पार्टी में टूट की कोई आशंका नहीं, लेकिन राजनीति के गलियारे में यह चर्चा आम है कि इसमें अब केवल औपचारिकता ही शेष है। हालांकि पार्टी में टूट की आशंका के मद्देनज़र कांग्रेस ने ‘डैमेज कंट्रोल’ 11 अगस्त को ही शुरू कर दिया था, जब ज्योतिरादित्य सिंधिया विधायकों की नाराजगी दूर करने पटना पहुंचे थे। पर अब ‘डैमेज’ ‘कंट्रोल’ से बाहर जा चुका है। बात जहां तक नीतीश कुमार की है, कांग्रेस के टूटने पर पर उनके ‘बेस’ और मनोबल दोनों में इजाफा होगा, इसमें कोई दो राय नहीं।
बुरे दौर से गुजर रहे लालू प्रसाद यादव के लिए 27 अगस्त की ‘भाजपा भगाओ देश बचाओ’ रैली तपती दोपहर में छांव की तरह राहत लेकर आई। लेकिन ये क्या, अब वो छांव भी उनसे छिन जाएगी? जी हां, बात कुछ ऐसी ही है। बेनामी सम्पत्ति को लेकर पूछताछ के बाद आयकर विभाग ने इस रैली के खर्चे को लेकर हिसाब मांगा है। गौरतलब है कि दो दिन पूर्व ही आयकर विभाग ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव से भी बेनामी सम्पत्ति के मामले में घंटों पूछताछ की थी।
सूत्रों के अनुसार आयकर विभाग ने पार्टी से गांधी मैदान की बुकिंग से लेकर लोगों को दूसरे जिलों से लाने और उनके ‘मनोरंजन’ पर हुए खर्च तक का ब्योरा मांगा है। बाहर से आने वाले नेताओं के लिए पार्टी की तरफ से ठहरने, खाने आदि की जो व्यवस्था की गई थी उसका भी हिसाब मांगा गया है। जैसा कि स्वाभाविक था, आयकर विभाग की नोटिस के बाद आरजेडी नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के वरिष्ठ नेता व महागठबंधन सरकार में वित्त मंत्री रहे अब्दुल बारी सिद्दीकी ने कहा कि आयकर विभाग द्वारा जो भी प्रश्न पूछे गए हैं, पार्टी उसका जवाब देगी। साथ में यह कहना भी नहीं भूले कि जितना परेशान किया जाएगा, उतना हम मजबूत होंगे।
वहीं आरजेडी प्रवक्ता मनोज झा ने कहा कि पहले भी कई बार भाजपा और उसके सहयोगी दलों की रैलियां हुई हैं, लेकिन आयकर विभाग कभी हरकत में नहीं आया। केन्द्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री की कई जगहों पर रैलियां हुईं, लेकिन आयकर विभाग ने न तो नोटिस जारी किया और न ही खर्च का हिसाब मांगा।
बहरहाल, आरजेडी की इस रैली के आयोजन में हो सकता है पैसे ज्यादा खर्च हुए हों, ये भी हो सकता है कि उन पैसों के स्रोत भी स्पष्ट न हों, पर ये जानते हुए भी कि कोई भी दल इससे अछूता नहीं, आयकर विभाग की ये नई कार्रवाई राजनीतिक तौर पर लालू के लिए नुकसान का सौदा नहीं लगता। उनके समर्थक इससे एकजुट ही होंगे।