जेडीयू से विदाई की कगार पर शरद यादव

नीतीश कुमार के महागठबंधन छोड़ने और एनडीए के साथ सरकार बनाने के फैसले के खिलाफ शरद यादव खुलकर सामने आ गए हैं। जेडीयू के पूर्व अध्यक्ष बिहार में महागठबंधन टूटने से नाखुश तो पहले से थे, लेकिन वक्त की नजाकत देख उन्होंने चुप्पी साध रखी थी। पर अब उनकी चुप्पी टूट चुकी है और ‘जो’ कुछ उनके भीतर चल रहा था, ‘वो’ बाहर आ गया है।

गौरतलब है कि शरद यादव इन दिनों तीन दिनों की बिहार यात्रा पर हैं। कल दौरे के पहले दिन पटना पहुंचने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने नीतीश कुमार पर बिहार की जनता को ‘धोखा’ देने का आरोप लगाया और कहा कि वे यह जानने आए हैं कि जनता की इस पर क्या राय है। साथ ही उन्होंने साफ तौर पर कहा कि वे अब भी महागठबंधन के साथ हैं। शरद यादव के इस रुख के बाद जेडीयू द्वारा उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई तयप्राय हो गई है।

बता दें कि अपनी तीन दिनों की यात्रा के दौरान शरद यादव बिहार के सात जिलों – वैशाली, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, मधुबनी, सुपौल, मधेपुरा और सहरसा – में दो दर्जन से ज्यादा जगहों पर जाकर जनता से ‘संवाद’ करेंगे। उनकी इस यात्रा को नीतीश कुमार व जेडीयू से उनके औपचारिक अलगाव के तौर पर देखा जा रहा है। कल हवाई अड्डे पर उनके स्वागत के लिए जुटे लोगों में ज्यादातर आरजेडी के थे और हद तो तब हो गई जब उनके जिन्दाबाद के साथ नीतीश मुर्दाबाद के नारे भी लगे। स्वाभाविक तौर पर जेडीयू ने उनके इस कार्यक्रम से अपने तमाम कार्यकर्ताओं को दूर रहने का कड़ा निर्देश दिया है।

इस बीच बिहार जेडीयू के अध्यक्ष व सांसद वशिष्ठ नारायण सिंह ने स्पष्ट कर दिया है कि शरद यादव की ये गतिविधियां जारी रहीं तो पार्टी निकट भविष्य में कोई भी निर्णय ले सकती है। बिहार जेडीयू ने उन पर और उनकी यात्रा में साथ दिख रहे रमई राम पर कार्रवाई की अनुशंसा भी कर दी है। इसका मतलब साफ है कि नीतीश कुमार किसी बड़े निर्णय पर पहुंच चुके हैं। इसकी झलक तभी देखने को मिल गई थी जब राष्ट्रीय महासचिव अरुण श्रीवास्तव को गुजरात के राज्यसभा चुनाव में नीतीश के निर्णय के खिलाफ जाकर पोलिंग एजेंट बहाल करने और वहां के एकमात्र जेडीयू विधायक का वोट कांग्रेस उम्मीदवार को जाने के कारण निलंबित कर दिया गया था। अरुण श्रीवास्तव शरद के कितने करीबी हैं, यह बात किसी से छिपी नहीं है।

गौर करने की बात की है कि हाल के दिनों में शरद यादव ने कई बार पार्टी लाईन से अलग स्टैंड लिया है। प्रथम दृष्टया किसी मुद्दे पर अलग राय होना गलत भी नहीं। लेकिन आश्चर्य तब होता है जब तेजस्वी के मुद्दे पर महागठबंधन छोड़ने में उन्हें जनता के साथ धोखा दिखता है लेकिन भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति को ताक पर रख देने में कोई आपत्ति नहीं है। लालू और उनके परिवार पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों पर उन्होंने चुप्पी साध रखी है। वो यह भी नहीं देख पा रहे कि पार्टी का एक भी विधायक उनके स्टैंड के साथ नहीं है।

एक बात और, 17 अगस्त को उन्होंने दिल्ली में विपक्षी दलों के सम्मेलन की योजना भी बना रखी है। अगर उन्हें विपक्षी दलों के समर्थन का इतना ही भरोसा है तो वे राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा क्यों नहीं दे देते? डेढ़ दर्जन पार्टियों में से कोई उन्हें चुनकर दुबारा भेज दे सकती है! पर शरद जानते हैं कि ऐसा होना कितना मुश्किल है। ऐसे में कहना गलत न होगा कि उन्होंने अपनी ‘विदाई की पटकथा’ स्वयं लिखी, ताकि पार्टी उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दे और उनकी राज्यसभा की सदस्यता बची रहे।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप  

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इतिहास का स्मरण हमें ताकत देता है !

मधेपुरा में जिला से लेकर प्रखंड स्तर तक ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के 75वें वर्षगांठ को उत्साहपूर्वक मनाया गया | सबेरे प्रभात फेरी निकाली गई जिसमें स्कूली बच्चों ने जमकर भाग लिया | दिन के 10:00 बजे से स्थानीय भूपेन्द्र कला भवन में चित्रकला प्रदर्शनी का वृहत आयोजन किया गया | अपराह्न 1:00 बजे से “भारत छोड़ो आंदोलन” पर स्कूली बच्चों द्वारा व्याख्यान एवं निबंध लेखन प्रतियोगिता आयोजित की गई | शाम में वहीं पर विभिन्न संगीत विद्यालयों एवं स्थानीय कलाकारों द्वारा देर रात तक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का एक-से-एक बेहतरीन प्रदर्शन किया जाता रहा | अंत में कार्यक्रमों में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को- डीडीसी मिथिलेश कुमार की अध्यक्षता में तैयार किये गये प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी,  एस.डी.एम.संजय कुमार निराला, बीडीओ  दिवाकर कुमार आदि द्वारा पुरस्कृत किया गया |

बता दें कि इस अवसर पर स्वच्छता अभियान के तहत जिला मुख्यालय, अनुमंडल मुख्यालय सहित प्रखंड मुख्यालय के कार्यालय परिसरों की जमकर सफाई की गई |

Educationist Dr.Bhupendra Madhepuri, SDM SANJAY KUMAR Nirala, DDC Mithilesh Kumar and Students Celebrating 75th anniversary of Quit India Movement at Bhupendra Kala Bhawan, Madhepura.
Educationist Dr.Bhupendra Madhepuri, SDM Sanjay Kumar Nirala, DDC Mithilesh Kumar and Students Celebrating 75th anniversary of Quit India Movement at Bhupendra Kala Bhawan, Madhepura.

यह भी बता दें कि मध्यान काल में अगस्त क्रांति दिवस (9 अगस्त) मनाने हेतु अनुमंडल कार्यालय परिसर में जिले के डायनेमिक डीएम मो.सोहैल का आगमन हुआ- जहां पर डीडीसी, एस.डी.एम. संजय कुमार निराला, एलआरडीसी रवि शंकर शर्मा, बीडीओ  दिवाकर कुमार सहित समाजसेवी-साहित्यकार भूपेन्द्र मधेपुरी ने इस अवसर पर आयोजित विचार गोष्ठी में डीएम मो.सोहैल का स्वागत किया |

आरम्भ में डीएम, डीडीसी, एसडीएम, एलआरडीसी, बीडीओ, सहित डॉ.मधेपुरी एवं गणमान्यों ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, भगत सिंह, चन्द्रशेखर आजाद, लाल बहादुर शास्त्री आदि के तस्वीरों पर माल्यार्पण व पुष्पांजलि किया |

School Kids celebrating ' Bharat Chhoro Aandolan' on 9th. August at Bhupendra Kala Bhawan,Madhepura.
School Kids celebrating ‘ Bharat Chhoro Aandolan’ on 9th. August at Bhupendra Kala Bhawan, Madhepura .

जहाँ गोष्ठी को संबोधित करते हुए डायनेमिक डीएम ने जीर्ण-शीर्ण ट्रेजरी भवन को सुन्दर संग्रहालय बनाने की बात कही वहीँ डीडीसी मिथिलेश कुमार ने एसडीएम संजय कुमार निराला से उसे जिला परिषद को ट्रांसफर करने की चर्चा भी की तथा स्वच्छता के बाबत संकल्प का पाठ भी किया और लोगों ने उसे दोहराया भी |

बीच में गोष्ठी को संबोधित करते हुए समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.मधेपुरी ने अपने संबोधन में 1942 की अगस्त क्रान्ति की चर्चा करते हुए यही कहा-

“जब 8 अगस्त, 1942 की रात को बम्बई में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सम्मेलन में ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ का प्रस्ताव पास करने के बाद ‘करो या मरो’ का नारा बुलंद किया गया, तब कुछ ही घंटे बाद नेताओं की धर-पकड़ शुरू हो गयी | वह व्यक्तिगत आंदोलन था | महात्मा गांधी ने उद्घोष किया था कि हर कोई स्वयं सेना भी है और सेनापति भी | तभी तो सरकारी आंकड़े के अनुसार 60 बार सेना को बुलाना पड़ा था ; 60000 आंदोलनकारी गिरफ्तार हुए थे और भारत में 940 लोग गोलियों के शिकार हुए थे…….. सच्चाई कई गुणा ज्यादा थी……… तत्कालीन वायसराय लिनलिथगो ने चर्चिल को लिखा भी था……. 1857 की क्रान्ति थी और यह 1942 की जनक्रांति है |”     

अंत में डायनेमिक डीएम मो.सोहैल (IAS)  ने जोरदार शब्दों में उपस्थित जनों से यही कहा- “हम सब मिलकर संकल्प लें- भ्रष्टाचार मुक्त भारत का स्वच्छ भारत का, गरीबी मुक्त भारत का, जातिमुक्त भारत का, संप्रदायवाद मुक्त भारत का……… और नए भारत के निर्माण के अपने इन संकल्पों की सिद्धि के लिए हम सब मन, वचन और कर्म से सदा जुटे रहेंगे तब तक जब तक बिहार और हमारा राष्ट्र विकसित नहीं हो जाय |”

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मधेपुरा में ब्रह्माकुमारी रंजू दीदी ने सैनिकों की कलाई पर बाँधी राखी

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की मधेपुरा सहित विभिन्न केंद्रों पर अलौकिक रक्षाबंधन कार्यक्रम का आयोजन भाई-बहन के अटूट प्रेम, श्रद्धा एवं विश्वास के पर्व के रूप में किया गया । जबकि कलियुग के इस दौर में पत्थर बनते जा रहे अधिकांश इंसानों का ‘दिल’ अब रिश्तों के लिए धड़कना छोड़ता जा रहा है….।

फिर भी….. धरती पर आज भी भाई-बहन के बीच का अलौकिक रिश्ता जिन्दा है । तभी तो ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय मधेपुरा शाखा की लोकप्रिय ब्रह्माकुमारी राजयोगिनी रंजू दीदी  ने राष्ट्र की सुरक्षा में लगे सैनिक भाइयों या फिर समाज की रक्षा करने वाले समाजसेवियों को रक्षासूत्र (राखी) बांधने के बाद यही कहा-

‘भारत की संस्कृति व मानवीय मूल्यों को प्रत्यक्ष करनेवाला, अनेक आध्यात्मिक रहस्यों को प्रकाशित करने वाला एवं भाई-बहन के वैश्विक रिश्तों को याद दिलाने वाला परमात्मा का अमूल्य उपहार है- यह रक्षाबंधन….!’  

रंजू दीदी ने इस अवसर पर सैनिकों-समाजसेवियों को रक्षा सूत्र बांधने से पूर्व यही कहा कि सर्वप्रथम बहन भाई के मस्तिष्क पर तिलक लगाती है- जो शुद्ध, शीतल एवं सुगन्धित जीवन जीने की प्रेरणा देती है ।

Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri is being tied Rakhi by Rajyogini Ranju Didi & others at Prajapita Brahmakumari Vishwavidyalaya Branch at Madhepura .
Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri is being tied Rakhi by Rajyogini Ranju Didi & others at Prajapita Brahmakumari Vishwavidyalaya Branch at Madhepura .

आगे ब्रह्माकुमारी रंजू दीदी ने यह भी कहा कि भाई को मिठाई खिलाने के पीछे यह राज भरा है कि निरन्तर मन और सम्बन्धों का मिठास मिलता रहे….!

इस अवसर पर समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने कहा- इस बार का यह ‘रक्षाबंधन’ पावन सावन के पाँचवें सोमवार को पड़ने के कारण यह मास और यह दिन भी आशुतोष भगवान शिव को सर्वाधिक प्रिय है । साथ ही डॉ.मधेपुरी ने यह भी कहा कि देवाधिदेव महादेव शिव की प्रतिमा पर महामृत्युंजय मंत्र के साथ अर्पित किये गये ये रक्षासूत्र सैनिकों, समाजसेवियों एवं गणमान्यों की कलाइयों पर बांधती हुई ब्रह्माकुमारी रंजू दीदी अंतर्मन से सदैव यही गुनगुनाती रही-

मेरी राखी की डोर, कभी हो ना कमजोर !
भैया ! दे दो……  कलाई बहन आई  है !!

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‘जनादेश अपमान यात्रा’ पर निकले तेजस्वी

9 अगस्त से जनादेश अपमान यात्रा शुरू करने के लिए लालू के छोटे बेटे व पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव घर से निकल गए हैं। उनकी मां व पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने आज आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के समक्ष तिलक लगाकर उन्हें विदा किया। तेजस्वी के साथ उनके बड़े भाई व पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव भी गए हैं।

यात्रा पर निकलने से पहले नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मीडिया को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला बोला और कहा कि कल तक वे संघमुक्त भारत की बात करते थे और आज आरएसएस युक्त बिहार की बात कर रहे हैं। भाजपा नेता व मौजूदा उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के बारे में उन्होंने कहा कि उन पर कई मुकदमा है। ‘भाजपा भगाओ, देश बचाओ’ रैली में वे तर्क के साथ अपनी बात रखेंगे।

चम्पारण जाने के क्रम में जैसे-जैसे तेजस्वी का कारवां आगे बढ़ता गया, पार्टी समर्थकों ने हर जगह उनका स्वागत किया। यात्रा के हर पड़ाव पर तेजस्वी अपना अनुभव तस्वीरों के साथ ट्वीट करते रहे। अपने ट्वीट में उन्होंने जनता में आक्रोश होने की बात कही और नीतीश कुमार को चुनाव कराने की चुनौती दी।

बता दें कि तेजस्वी की इस यात्रा का उद्देश्य जनादेश के तथाकथित अपमान के बारे में जनता को बताना और आरजेडी की 27 अगस्त को प्रस्वावित रैली के लिए पटना बुलाना है। पर तेजस्वी से एक बात पूछे बिना नहीं रहा जाता कि आज इन सब बातों में वे जितनी ऊर्जा खर्च कर रहे हैं, उसका थोड़ा अंश उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों पर ‘बिन्दुवार स्पष्टीकरण’ देने में क्यों नहीं खर्च किया? अगर वो ऐसा करते तो महागठबंधन टूटने की नौबत न आती और वो खुद न सही लेकिन उनकी पार्टी सरकार में बनी रहती।

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पति-पत्नी ने शुरू किया था भाई-बहन का त्योहार

यह संसार रिश्तों से बना है और हर रिश्ते की अपनी अहमियत होती है, लेकिन भाई-बहन का रिश्ता अपने आप में अद्भुत है। यही एक रिश्ता है, जिसकी कोई एक परिभाषा गढ़ पाना मुश्किल है। सोच कर देखिए, अगर आपकी बहन आपसे बड़ी है तो उसमें मां की झलक पाएंगे आप, छोटी है तो बेटी लगेगी वह। दोस्त तो वो हर हाल में है ही। आप जो सुख-दुख कई बार माता-पिता से नहीं बांट पाते वो अपनी बहन से बांट लेते हैं। एक बहन ही है जो आपकी कमियों के लिए आपको डांटती नहीं और अपना ऐसा कोई सुख नहीं जो आपसे बांटती नहीं। रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के इसी अटूट प्यार की निशानी है, जिसे सदियों से मनाया जाता रहा है। भाई-बहन के विश्वास को बनाए रखने वाला यह त्योहार श्रावण मास में पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। लेकिन इसकी शुरुआत कब और क्यों हुई, इसके पीछे कई दिलचस्प कहानियां हैं। चलिए जानने की कोशिश करते हैं।

आपको जानकर हैरत होगी कि भाई-बहन के इस त्योहार की शुरुआत पति-पत्नी ने की थी। पुराणों के अनुसार एक बार दानवों ने देवताओं पर आक्रमण कर दिया। देवता दानवों से हारने लगे। देवराज इंद्र की पत्नी शुचि ने देवताओं की हो रही हार से घबरा कर उनकी विजय के लिए तप करना शुरू कर दिया। तप से उन्हें एक रक्षासूत्र प्राप्त हुआ, जिसे उन्होंने श्रावण मास में पूर्णिमा के दिन अपने पति इंद्र की कलाई पर बांध दिया। इस रक्षासूत्र से देवताओं की शक्ति बढ़ गई और उन्होंने दानवों पर जीत प्राप्त की। उसी दिन से यह परंपरा शुरू हुई कि आप जिसकी भी रक्षा व उन्नति की इच्छा रखते हैं, उसे रक्षासूत्र यानि राखी बांध सकते हैं, चाहे वह किसी भी रिश्ते में क्यों न हो।

वैसे हमारे इतिहास, खासकर पौराणिक इतिहास में ऐसी कई कहानियां दर्ज हैं जो रक्षाबंधन या राखी के महत्व को दर्शाती हैं। इनमें एक कहानी महाभारत काल से भी जुड़ी है। इस कहानी के अनुसार श्रीकृष्ण ने शिशुपाल का वध अपने चक्र से किया था। शिशुपाल का सिर काटने के बाद जब चक्र वापस लौटा तब उसे पुन: धारण करने के क्रम में कृष्ण की उंगली थोड़ी कट गई। उंगली से रक्त बहता देख पांडवों की पत्नी द्रौपदी से रहा नहीं गया और उन्होंने तुरंत अपनी साड़ी का किनारा फाड़कर कृष्ण की उंगली में बांध दिया। इस पर भावुक होकर श्रीकृष्ण ने उन्हें वचन दिया कि वे आजीवन उनकी साड़ी की लाज रखेंगे। आगे चलकर दु:शासन ने जब द्रौपदी का चीरहरण करना चाहा तो उन्होंने पूरी तत्परता से अपना कहा पूरा किया।

रक्षाबंधन से जुड़ी एक दिलचस्प कहानी का ताल्लुक हमारे मध्यकालीन इतिहास से है। यह कहानी रानी कर्णावती और सम्राट हुमायूं से संबंधित है और उस दौर को दर्शाती है जब राजपूत शासकों और मुस्लिमों के बीच संघर्ष चल रहा था। रानी कर्णावती चित्तौड़ के राजा की विधवा थीं। राजा की अनुपस्थिति का फायदा उठाते हुए गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह ने उनके राज्य पर आक्रमण कर दिया। अपने राज्य व प्रजा की रक्षा की खातिर चिन्तित रानी ने हुमायूं से मदद मांगी। उन्होंने हुमायूं को एक राखी भेजी और उनसे रक्षा की प्रार्थना की। हुमायूं ने उस राखी की मर्यादा रखी और रानी को बहन का दर्जा देते हुए उनके राज्य को सुरक्षित कर अपना दायित्व पूरा किया।

रक्षाबंधन से जुड़ी बाकी कहानियां फिर कभी। फिलहाल हमें इजाजत दें और हमारी मंगलकामनाएं स्वीकार करें। शुभ रक्षाबंधन।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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भारत ने जीत ली लंका

भारत ने कोलंबो टेस्ट मैच में श्रीलंका को पारी और 53 रन से हराकर तीन टेस्ट मैचों की सीरीज अपने नाम कर ली, जबकि अभी सीरीज का एक टेस्ट खेला जाना बाकी है। भारत की इस जीत के नायक रहे रविन्द्र जडेजा और आर अश्विन। इन दोनों ने इस टेस्ट में अर्द्धशतक लगाने के साथ-साथ 7-7 विकेट भी झटके और भारत को टेस्ट सीरीज में लगातार आठवीं जीत दिलाई। गौरतलब है कि 2015 के बाद से टीम इंडिया को कोई भी टीम टेस्ट सीरीज में हरा नहीं पाई है।

बता दें कि भारत ने अपनी पहली पारी में 9 विकेट पर 622 रन बनाकर पारी घोषित कर दी थी। भारत की इस पारी में चेतेश्वर पुजारा ने शानदार 133 और अजिंक्य रहाणे ने 132 रन बनाए थे। इसके जवाब में श्रीलंका की पहली पारी महज 183 रनों पर सिमट गई थी। दूसरी पारी में भी श्रीलंकाई टीम 386 रनों से आगे नहीं बढ़ पाई। इस पारी में केवल दिमुथ करुणारत्ने (141 रन) और कुशल मेंडिस (110 रन) ही अपनी टीम के लिए संघर्ष कर पाए।

भारत के लिए पहली पारी में अश्विन ने 5 विकेट चटकाए थे, जबकि दूसरी पारी में यह कमाल जडेजा ने दिखाया। जडेजा ने इस टेस्ट में अपने 150 विकेट भी पूरे कर लिए। बड़ी बात यह कि इस उपलब्धि के साथ वे सबसे तेजी से 150 विकेट लेने वाले दाएं हाथ के गेंदबाज बन गए हैं। उन्होंने मात्र 32 टेस्टों में यह मुकाम हासिल किया। दूसरी ओर अश्विन के लिए भी यह टेस्ट उपलब्धियों भरा रहा। इस टेस्ट के बाद वे सबसे तेजी से 2000 से अधिक रन और 250 से अधिक विकेट हासिल करने वाले टेस्ट खिलाड़ी बन गए हैं। उन्होंने यह उपलब्धि 51 टेस्ट मैचों में हासिल की।

क्रिकेट के तीनों फॉरमेट में भारत की हाल की जीतों की एक बड़ी बात यह भी रही है कि इन जीतों से टीम में एक के बाद एक कई मैच विनर खिलाड़ी सामने आए। इसी टेस्ट की बात करें तो पुजारा, रहाणे, अश्विन, जडेजा, के एल राहुल सब के सब विजेता की तरह खेले। कोहली तो टीम की रीढ़ हैं ही। सीरीज का तीसरा और आखिरी टेस्ट पल्लीकेले में खेला जाएगा। एक पर एक जांबाजों से सजी विराट कोहली की टीम निश्चित तौर पर अपना विजय अभियान जारी रखना चाहेगी।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

 

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वैंकेया नायडू होंगे देश के नए उपराष्ट्रपति

भाजपा के वरिष्ठ नेता और एनडीए उम्मीदवार वैंकेया नायडू भारत के नए उपराष्ट्रपति होंगे। उपराष्ट्रपति पद के लिए शनिवार को हुए चुनाव में उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पोते और 18 विपक्षी दलों के संयुक्त उम्मीदवार गोपाल कृष्ण गांधी को 272 वोटों से हराया। उन्हें कुल 516 वोट मिले, जबकि गोपाल कृष्ण गांधी 244 वोट ही हासिल कर पाए। इसके साथ ही देश के तीनों बड़े संवैधानिक पदों – राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री – पर भाजपा काबिज हो गई। महज 37 साल पहले 1980 में अस्तित्व में आने वाली भाजपा के लिए ये सचमुच बड़ी उपलब्धि है।

बता दें कि उपराष्ट्रपति चुनाव में कुल 785 सांसदों को वोट डालना था, लेकिन अलग-अलग कारणों से 14 सांसदों ने मताधिकार का इस्तेमाल नहीं किया और 771 सांसदों ने ही वोट डाला। वोटिंग सुबह 10 बजे शुरू हुई और शाम 5 बजे तक चली। वोटों की गिनती शाम 6 बजे शुरू हुई और 7 बजते-बजते घोषणा हो गई कि देश के दूसरे सर्वोच्च पद पर पहुंचने वाले 13वें शख्स वैंकेया नायडू हैं।

घोषणा के साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत तमाम बड़े नेताओं ने वैंकेया को बधाई दी। पराजित उम्मीदवार गोपाल कृष्ण गांधी ने भी विजयी उम्मीदवार को शुभकामनाएं दीं और अपने प्रदर्शन पर ‘संतोष’ जताते हुए सभी वोट देने वालों को धन्यवाद दिया। गौरतलब है कि वैंकेया नायडू उपराष्ट्रपति बनने वाले आरएसएस पृष्ठभूमि के दूसरे नेता हैं। इससे पहले भाजपा के भैरों सिंह शेखावत 2002 में इस पद के लिए चुने गए थे।

नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति वैंकेया नायडू ने परिणाम घोषित होने के बाद कहा कि मैं कृतार्थ हूं। मैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और सभी पार्टी नेताओं का समर्थन देने के लिए आभारी हूं। उन्होंने आगे कहा कि मैं उपराष्ट्रपति संस्था का उपयोग राष्ट्रपति के हाथ मजबूत बनाने के लिए करूंगा और ऊपरी सदन की मर्यादा को कायम रखूंगा। साधारण किसान पृष्ठभूमि से आने वाले वैंकेया नायडू ने यह भी कहा कि मैंने इसकी कल्पना नहीं की थी कि मैं यहां पहुंच सकूंगा।

चलते-चलते बता दें कि 68 वर्षीय वैंकेया के पास संसद में 25 वर्षों का अनुभव है, जबकि उनका पूरा राजनीतिक अनुभव लगभग 45 वर्षों का है। ‘मधेपुरा अबतक’ की ओर से उन्हें हार्दिक मंगलकामनाएं!

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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मधेपुरा में ‘जड़ी-बूटी दिवस’ समारोह का उद्घाटन किया डॉ.मधेपुरी ने

आज 4 अगस्त है और ‘जड़ी-बूटी दिवस’ है | सुखद संयोग भी कि आयुर्वेद के महान ऋषि आचार्यश्री बालकृष्ण का जन्मदिन भी | वर्तमान समय में स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण धरती पर ईश्वरीय वरदान हैं और रोगियों के लिए भगवान हैं तथा ऋषियों में महान हैं |

बता दें कि आचार्य बालकृष्ण के जन्मदिवस पर देश भर में पतंजलि से जुड़े लाखों-करोड़ों भाई-बहन जड़ी-बूटी व छोटे-बड़े पौधों के औषधीय गुणों की चर्चा करके तथा उन्हें अपने घर-आंगन में लगा-लगाकर श्रद्धेय आचार्य जी को कोटि-कोटि शुभकामनाएं दे रहे हैं |

इस अवसर पर स्थानीय रासबिहारी उच्च विद्यालय मधेपुरा के परिसर में पतंजलि योग समिति के जिलाध्यक्ष प्रो.नन्दकिशोर एवं महिला पतंजलि प्रभारी प्रो.रीता कुमारी सहित अन्य सभी संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित जड़ी-बूटी दिवस का उद्घाटन समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने किया |

कार्यक्रम का श्रीगणेश संयुक्त रुप से दीप प्रज्वलित करते हुए उद्घाटनकर्ता समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी, मुख्य अतिथि प्रो.शंभूशरण भारतीय, जिलाध्यक्ष प्रो.नन्दकिशोर, महिला प्रभारी प्रो.रीता कुमारी, प्रधान डाक अध्यक्ष राजेश कुमार, दीपक कुमार, अनुमंडल प्रभारी पी.यदुवंशी, महासचिव डॉ.एन.के.निराला, पशुपति चौरासिया व अन्य ने किया |

सर्वप्रथम डॉ.मधेपुरी ने अपने उद्घाटन भाषण देते हुए यही कहा कि यदि संसार के 200 से अधिक देश जो विश्व योग दिवस के सहयोगी रहे हैं- वहाँ के सभी नर-नारी एक आँख से स्वामी रामदेव के योग और दूसरी आँख से आचार्य बालकृष्ण द्वारा बताए गये पेड़-पौधों के दिव्य औषधीय गुणों को देखने लगे तो संसार की सारी समस्याओं का समाधान संभव होने लगेगा | डॉ.मधेपुरी ने कहा कि मन की विकृतियों से उत्पन्न रोग का इलाज योग से होगा और आयुर्वेद की जीवन दायिनी जड़ी-बुटियों से शारीरिक रोगों का इलाज होगा |

अपने संबोधन में मुख्य अतिथि प्रो.शंभूशरण भारतीय ने कहा कि आचार्य बालकृष्ण से कई अवसर पर उनकी मुलाकात हुई है और उनकी कठोर साधना एवं संघर्ष द्वारा प्राप्त औषधीय ज्ञान का लाभ भी मिला है | प्रो.भारतीय भिन्न-भिन्न औषधीय पौधों की विस्तृत चर्चा से उपस्थित योग बंधुओं एवं योग दीदियों को देर तक बांधे रखा और तालियाँ भी बटोरता रहा |

अंत में डॉ.नंदकिशोर एवं डॉ.एन.के.निराला ने उद्घाटनकर्ता डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी एवं मुख्य अतिथि प्रो.शंभू शरण भारतीय को अंगवस्त्रम आदि के साथ सम्मानित किया | औषधीय पौधों के वितरण के साथ डॉ.निराला ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कार्यक्रम समाप्ति की घोषणा की |

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तो तेजस्वी को मिल गया शरद का ‘आशीर्वाद’!

राजनीति सचमुच अनिश्चितता का खेल है। इतना अनिश्चित कि यहां प्रतिबद्धता का पता पलक झपकते बदल जाता है और आप हक्के-बक्के रहने के अलावा कुछ नहीं कर पाते। कौन जानता था कि महज 20 महीनों में ऐसी परिस्थिति आएगी कि नीतीश को महागठबंधन छोड़ना पड़ेगा और विधानसभा में उनके साथ बैठना होगा जिनके खिलाफ उन्होंने वोट मांगा था। और कौन जानता था कि तब नीतीश के निर्णय की ‘अध्यक्षता’ कर रहे शरद यादव आज उन्हीं के खिलाफ शुरू हो रही तेजस्वी की यात्रा में शामिल होने की तैयारी कर रहे होंगे।

जी हां, सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक शरद यादव 8 अगस्त को पटना आएंगे और इस बात के पूरे आसार हैं कि वे नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की 9 अगस्त से मोतिहारी से माधोपुर तक होने वाली यात्रा में उनका साथ देंगे। ख़बर है कि वे इस दौरान बिहार में भाजपाविरोधी दलों के साथ मिलकर आगे की रणनीति तय करेंगे। बताया जाता है कि नीतीश से नाराज चल रहे शरद की आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव से बातचीत अन्तिम रूप ले चुकी है और तेजस्वी उनसे लगातार संपर्क बना कर चल रहे हैं।

बताया जा रहा है कि शरद यादव ‘तकनीकी’ कारणों से आरजेडी की सदस्यता ग्रहण नहीं करेंगे, लेकिन भाजपाविरोधी लड़ाई में लालू के साथ खड़े नज़र आएंगे। आरजेडी ज्वाइन करने पर उनकी राज्यसभा की सदस्यता खतरे में पड़ सकती है। हां, जेडीयू अगर उन्हें असंबद्ध घोषित कर दे तो उनकी यह ‘बाधा’ दूर हो जाएगी, जैसे आरजेडी द्वारा असंबद्ध मधेपुरा के सांसद पप्पू यादव की सदस्यता बची हुई है।

बहरहाल, गौरतलब है कि पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव नीतीश के विरोध व लगे हाथ ‘भाजपा भगाओ, देश बचाओ’ रैली की तैयारी के सिलसिले में 8 अगस्त को पटना से मोतिहारी रवाना हो रहे हैं, जहां से 9 अगस्त को उनकी यात्रा विधिवत शुरू होगी। इसके लिए आरजेडी ने भारत छोड़ो आन्दोलन की 75वीं वर्षगांठ को चुना है। इस दिन भाजपाविरोधी अन्य दलों के प्रमुख नेता भी मौजूद रहेंगे।

 

 

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कला एवं कलाकार कभी नहीं मरता !

मधेपुरा के शहीद चुल्हाय मार्ग पर अवस्थित बी.पी.मंडल नगर भवन में नवाचार रंगमंडल के बैनर तले आयोजित मूक अभिनय, नवाचार का काव्यकोश एवं गुल्ली डंडा नामक नाटक का मंचन कर लोगों को सामाजिक सद्भाव का संदेश दिया गया |

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रख्यात गांधीवादी विचारक, भागलपुर विश्वविद्यालय में ‘गांधीयन विचार’ पाठ्यक्रम के संस्थापक एवं कुलपति रह चुके पूर्व सांसद डॉ.रामजी सिंह, बी.एन.मंडल विश्वविद्यालय में विकास पदाधिकारी- परीक्षा नियंत्रक व अन्य कई पदों पर सेवारत रहनेवाले समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी, गिरिजा कपिलदेव की प्राचार्या संगीता यादव, प्रधानाचार्य डॉ.बीएन विवेका, डॉ.जवाहर पासवान आदि ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया |

मौके पर उद्घाटनकर्ता डॉ.रामजी सिंह ने कहा कि भारतीय कला और संस्कृति को अक्षुण्ण बनाये रखने की जिम्मेवारी युवाओं की है | डॉ.सिंह ने जहां कहा कि कलाकार खुद के लिए नहीं बल्कि समाज के लिए जीता है वहीं डॉ.मधेपुरी ने गांधीयन विचारों को जीने वाले उद्घाटनकर्ता की भरपूर सराहना करते हुए यही कहा कि कला और कलाकार कभी मरता नहीं |

बता दें कि सर्वप्रथम मूक अभिनय में कार्तिक कुमार, सुमन कुमार, प्रीति कुमारी, अक्षत शर्मा, गरिमा उर्विशा एवं बमबम कुमार ने बिना कुछ बोले अपनी बातें स्पष्ट रुप से दर्शकों के समक्ष रखने में कामयाब होकर तालियां बटोरते रहे | जहां नाटक गुल्ली डंडा के माध्यम से कलाकारों को ग्रामीण इलाकों में पैसे की लालच में अपने परिवार के सदस्यों के साथ किये जाने वाले अत्याचारों पर करारा चोट किया वहीं नवाचार काव्यकोश के माध्यम से कलाकारों ने स्वरचित एवं प्रख्यात कवियों की रचनाओं को भी प्रशंसनीय भाव-भंगिमा के माध्यम से प्रस्तुति देकर खूब तालियाँ बटोरी |

कार्यक्रम के बीच-बीच में लीजा मान्या, अंजली कुमारी एवं प्रीति कुमारी ने रिकॉर्डिंग डांस कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया | नाटक का निर्देशन अंशु आनंद एवं मिथुन कुमार गुप्ता ने किया |

कार्यक्रम को सफल बनाने में मौजूद कलाकार रहे- सुमित साना, अमित कुमार, अमित अंशु, प्रिया कुमारी, प्रियंका कुमारी, अंजली कुमारी, गरिमा………..सहित दिलीप कुमार, बमबम, सुमन, कार्तिक, अक्षत, लीजा, आदित्य, सज्जन, आशीष, सोनल, चन्दा, नवीन, शिवाली, रौशन, दिलखुश आदि | कला प्रेमियों में अंत तक उपस्थित रहकर कलाकारों को प्रोत्साहित करते रहे- शंभू शरण भारतीय, राकेश कुमार डब्लू, डॉ.अरुण कुमार, सुकेश राणा, डॉ.सुधांशु शेखर, पी.यदुवंशी, ई.बलवंत कुमार यादव, रुपेश कुमार, प्रदीप झा आदि | समारोह का सफल संचालन प्रो.संजय परमार ने किया |

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