रामनाथ कोविंद होंगे भारत के अगले राष्ट्रपति

रामनाथ कोविंद देश के 14वें राष्ट्रपति होंगे। एनडीए उम्मीदवार कोविंद ने विपक्ष की मीरा कुमार को बड़े अंतर से हराकर रायसीना हिल्स की रेस जीती। कोविंद को जहां 66.65 प्रतिशत वोट मिले वहीं मीरा का अभियान 34.35 प्रतिशत मतों पर ही रुक गया। सोमवार को हुए मतदान में रामनाथ कोविंद को कुल 7,02,044 वोट मिले, जबकि मीरा कुमार को 3,67,314 वोटों पर ही संतोष करना पड़ा। बता दें कि नए राष्ट्रपति का शपथग्रहण 25 जुलाई को होना है।

राष्ट्रपति निर्वाचित होने के बाद कोविंद ने कहा कि वे सर्वे भवन्तु सुखिन: की भावना से काम करेंगे और पद की मर्यादा को बनाए रखेंगे। अपने संक्षिप्त और भावुक संबोधन में उन्होंने कहा, “जिस पद का गौरव डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, सर्वपल्ली राधाकृष्णन, एपीजे अब्दुल कलाम और प्रणब मुखर्जी जैसे विद्वानों ने बढ़ाया उस पद पर रहना मेरे लिए गौरव की बात है और यह मुझे जिम्मेदारी का अहसास करा रहा है।”

अपने जीवन के बेहद खास मौके पर गरीबी में बिताए अपने बचपन को याद करते हुए आगे उन्होंने कहा, “आज दिल्ली में सुबह से बारिश हो रही है। बारिश का मौसम मुझे बचपन की याद दिलाता है। हमारा घर कच्चा था। मिट्टी की दीवारें थीं। बारिश के समय फूस की छत पानी को रोक नहीं पाती थी। हम सब भाई-बहन कमरे की दीवार से लग कर बारिश रुकने का इंतजार करते थे। आज पता नहीं कितने ही रामनाथ कोविंद बारिश में भींग रहे होंगे। खेत में काम कर रहे होंगे और शाम के भोजन के लिए प्रबंध कर रहे होंगे। मैं उन सभी से कहना चाहता हूं कि परौख गांव का यह रामनाथ कोविंद राष्ट्रपति भवन में उनका प्रतिनिधि बनकर जा रहा है।”

अपनी जीत की औपचारिक घोषणा के बाद कोविंद ने अपनी प्रतिद्वंद्वि मीरा कुमार को भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। वहीं मीरा ने भी उन्हें बधाई दी और कहा कि उनके ऊपर संविधान की रक्षा का दायित्व आया है। उधर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत देश भर के नेताओं ने कोविंद को बधाई और शुभकामनाएं दीं। ‘मधेपुरा अबतक’ की ओर से भी उन्हें हार्दिक बधाई और मंगलकामनाएं। एक बात और, बिहार का राज्यपाल रहते हुए उन्हें देश का प्रथम नागरिक बनने का अवसर मिला, इसलिए हम अपेक्षा करते हैं कि उनके मन और मस्तिष्क में बिहार के लिए खास जगह रहेगी और सम्पूर्ण देश के लिए अपना दायित्व निभाते हुए भी करोड़ों बिहारवासियों के ‘विशेष’ अपनत्व व अधिकाबोध का मान वे रख पाएंगे!

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप   

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मायवती का राज्यसभा से इस्तीफा: राजनीतिक स्टंट या मास्टरस्ट्रोक

विधानसभा चुनाव में मुंह के बल गिरने के बाद मायावती फिर से उठने और अपनी खोई जमीन पाने की कोशिश में बड़ी शिद्दत से लग गई हैं। कहने की जरूरत नहीं कि बसपा का आधार वोट दलित हैं और उनकी बड़ी आबादी को पार्टी से जोड़े रखना आसान नहीं। इसके लिए फिलहाल दो चीजें चाहिएं। पहली चीज है एक अदद मुद्दा जिसे वो भुना सकें और दूसरी चीज है पर्याप्त समय जो उस मुद्दे को भुनाने में लगा सकें। अपने एक ‘मास्टरस्ट्रोक’ से उन्होंने ये दोनों चीजें एक साथ पाने की कोशिश की है। सहारनपुर हिंसा पर सदन में न बोल पाने से ‘क्षुब्ध’ मायावती ने राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि मंगलवार को दिया उनका इस्तीफा अभी तक स्वीकार नहीं किया गया है।

बहरहाल, मायावती इस बात से नाराज थीं कि शून्यकाल के दौरान उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में दलितों पर हुए अत्याचार पर चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव पेश करने के बाद उन्हें बोलने के लिए सिर्फ तीन मिनट का समय दिया गया। उन्होंने इस पर कहा, “लानत है। अगर मैं कमजोर वर्ग की बात सदन में नहीं रख सकती तो मुझे सदन में रहने का अधिकार नहीं है।” इसके बाद शाम होते-होते उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। ये अलग बात है कि उनके विरोधी इसे उनका राजनीतिक ‘स्टंट’ बताते हैं और इस बात का हवाला देते हैं कि उनका कार्यकाल वैसे भी आठ महीने के बाद खत्म होने वाला था।

एक और अहम बात यह कि वर्तमान में बसपा के पास केवल 18 विधायक हैं, ऐसे में अगली बार उनका अपने बूते राज्यसभा में आना तक संभव नहीं। इसके लिए उन्हें बिहार की तरह उत्तर प्रदेश में महागबंधन-प्रयोग की आवश्यकता होगी। कहने की जरूरत नहीं कि मायावती अब अपने राजनीतिक अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही हैं, जो एसी कमरे में बैठकर कतई नहीं लड़ी जा सकती। राजनीति के जानकार मानते हैं कि जिस दिन भाजपा ने रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया था, उसी दिन साफ हो गया था कि मायावती जल्द ही जवाबी कदम उठाएंगी क्योंकि यह उनके वोटबैंक में सेंध लगाने की भाजपा की बड़ी कोशिश थी। बस मायावती को सही वक्त और माकूल मुद्दे की तलाश थी, जो शायद उन्हें मिल गया है।

वैसे मायावती के इस्तीफे को नैतिक समर्थन देने वाले भी कम नहीं। आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने तो तत्काल यहां तक कहा कि मायवती चाहेंगी तो हम बिहार से उन्हें दोबारा राज्यसभा भेजेंगे। उनके इस प्रस्ताव में भावी राजनीति के बीज आसानी से देखे जा सकते हैं।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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नीतीश से मिले तेजस्वी-तेजप्रताप

बिहार में चली आ रही राजनीतिक अनिश्चितता के बीच उस वक्त नए राजनीतिक संकेत मिले जब तेजस्वी और तेजप्रताप मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलने पहुंचे। उम्मीद की जा रही है कि इसके बाद जेडीयू-आरजेडी के बीच व्याप्त तनाव कम होगा और दोनों दलों के रुख में नरमी आएगी।

बता दें कि मंगलवार को कैबिनेट की बैठक थी जिसमें तेजस्वी के शामिल होने को लेकर कयास लगाए जा रहे थे। तेजस्वी पर सीबीआई के द्वारा किए गए एफआईआर के बाद यह पहला मौका था जब नीतीश और तेजस्वी को आमने-सामने होना था। अनुमान लगाया जा रहा था कि ऐसा होने पर दो दलों के रिश्तों के बीच जमती जा रही बर्फ पिघलेगी और ठीक ऐसा ही होता भी दिखा। बैठक में तेजस्वी अपने मंत्री भाई तेजप्रताप के साथ मौजूद रहे। उनके साथ आरजेडी कोटे के मंत्री चन्द्रशेखर, आलोक मेहता और विजय प्रकाश भी थे।

गौरतलब है कि तेजस्वी के सीबीआई के घेरे में आने के बाद से ही जेडीयू ने आरजेडी पर इस बात का दबाव बनाया हुआ है कि तेजस्वी खुद को पाक-साफ साबित करे या पद छोड़े। ऐसा न होने पर मुख्यमंत्री द्वारा उन्हें बर्खास्त किए जाने का विकल्प भी खुला बताया जा रहा था। दूसरी ओर आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने तेजस्वी के इस्तीफे से साफ इनकार कर दिया था। इसके बाद से ही राजनीति गरमा गई थी। यहां तक कि महागठबंधन सरकार के दिन भी गिने जाने लगे थे। इन सबके बीच महागठबंधन में शामिल तीसरी पार्टी कांग्रेस भी ऊहापोह में थी और दूसरी ओर भाजपा भावी समीकरणों में अपना हिसाब बिठाने में लगी हुई थी।

बहरहाल, इस पृष्ठभूमि में कैबिनेट की बैठक कितनी अहम थी, कहने की जरूरत नहीं। खास बात यह कि कैबिनेट में केवल रूटीन मुद्दों पर चर्चा हुई। इस दौरान तेजस्वी-प्रकरण उठा ही नहीं। दोनों दलों की ओर से नरमी के संकेत तब और ज्यादा स्पष्ट हुए जब बैठक के बाद तेजस्वी अपने भाई तेजप्रताप के साथ मुख्यमंत्री के चैंबर में पहुंचे और लंबे समय तक वहां रहे। हालांकि इस दौरान उनके बीच क्या बातें हुईं यह नहीं पता, लेकिन दो दलों के बीच संवादहीनता खत्म होना न केवल उनके लिए बल्कि बिहार की राजनीति खासकर महागठबंधन के लिए सुखद संकेत है।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

 

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सीएम ने मधेपुरा डीएम को उनकी अनूठी पहल के लिए किया सम्मानित

बिहार और बिहार की सीमा के पार के लोगों द्वारा विकास पुरुष से सम्मानित मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना के ज्ञान भवन में आयोजित विश्व युवा कौशल दिवस कार्यक्रम के अवसर पर कौशल विकास कार्यक्रम में बेहतर प्रदर्शन करनेवाले सात जिलाधिकारियों एवं कुशल युवा कार्यक्रम के 10 सर्वोत्तम प्रशिक्षण केंद्रों को सम्मानित किया | मौके पर प्रशिक्षण में अव्वल रहे छात्र-छात्राओं को भी पुरस्कृत किया गया |

जहां मधेपुरा के डायनेमिक डीएम मो.सोहैल ने कुशल युवा प्रशिक्षित छात्रों के लिए नये रोजगार के विकल्प के तौर पर जीएसटी ऑपरेटर्स बनाने की राह तैयार की है वहीं नीतीश सरकार ने इस स्कीम को मॉडल के रूप में पूरे सूबे में लागू करने का निर्णय भी ले लिया है |

बता दें कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विश्व कौशल विकास दिवस पर बिहार के 38 में से जिन सात जिले के जिलाधिकारियों को सम्मानित किया, वे जिले हैं- मधेपुरा, सहरसा, कटिहार, बेगूसराय, लखीसराय, बक्सर और मधुबनी तथा सम्मानित होने वाले डीएम क्रमशः- मो.सोहैल, विनोद सिंह गुंजियाल, मिथिलेश मिश्रा, मो.नौशाद यूसुफ, सुनील कुमार, रमन कुमार एवं शीर्षत कपिल अशोक |

हाँ ! इसके अतिरिक्त इस कार्यक्रम की देख-रेख करनेवाली कंपनी एम.के.सी.एल. के सीईओ विवेक सावंत, दीघा घाट ITI के उप-प्राचार्य के रूप में राहुल कुमार तथा घोघरडीहा के सर्वोत्तम प्राचार्य के रूप में अतुल रंजन को भी विकास पुरुष नीतीश कुमार के हाथों सम्मानित होने का अवसर प्राप्त हुआ |

यह भी जानिए की जन निजी सहभागिता के तहत चलाये जा रहे विभिन्न औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में सर्वश्रेष्ठ मुंगेर संस्थान को मुख्यमंत्री द्वारा एक लाख का पुरस्कार दिया गया | साथ ही विज्ञान भवन में जो प्रदर्शनी लगाई गई उसे भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने सहयोगी मंत्रियों राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह (योजना विकास मंत्री), मंजू वर्मा (समाज कल्याण मंत्री), महेश्वर हजारी (नगर विकास मंत्री) एवं विजय प्रकाश (श्रम संसाधन मंत्री) आदि के साथ घूम-घूमकर देखा और सराहना करते हुए अपना-अपना विचार व्यक्त किया |

इसी क्रम में श्रम संसाधन सचिव दीपक कुमार ने भावोद्गार व्यक्त करते हुए यही कहा कि मात्र 7 महीने में  सूबे में कौशल विकास केंद्रों की संख्या 48 से बढ़कर 1136 हो गई है और नामांकित प्रशिक्षणार्थियों की संख्या 1978 से बढ़कर एक लाख तेरह हज़ार हो गई है | अब तक मात्र 40 प्रखंड ऐसे बचे हैं जहां कौशल विकास केंद्र अपना दस्तक नहीं दे पाया है |

अंत में यह कि राज्य सरकार द्वारा डीएम को सम्मानित किये जाने पर शहरवासियों ने खुशी जतायी है | समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी एवं शिक्षाविद प्रो.श्यामल किशोर यादव ने विभिन्न क्षेत्रों में जिले के विकास के लिए डीएम मो.सोहैल के कार्यों की सराहना की और शुभकामनाएं दी |

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आईफा अवार्ड 2017: किसको क्या मिला ?

बॉलीवुड के चर्चित आईफा अवार्ड में इस साल ‘उड़ता पंजाब’ और ‘ऐ दिल है मुश्किल’ की धूम रही। फिल्म ‘उड़ता पंजाब’ के लिए जहां शाहिद कपूर ने बेस्ट एक्टर, आलिया भट्ट ने बेस्ट एक्ट्रेस और दिलजीत दोसांझ ने बेस्ट डेब्यू मेल का अवार्ड जीता, वहीं ‘ऐ दिल है मुश्किल’ को बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर (प्रीतम), बेस्ट लिरिक्स (‘चन्ना मेरेया’ गाने के लिए अमिताभ भट्टाचार्य) और बेस्ट प्लेबैक सिंगर – मेल (‘बुलेया’ गाने के लिए अमित मिश्रा) का अवार्ड मिला। बेस्ट फिल्म का पुरस्कार ‘नीरजा’ को और बेस्ट डायरेक्टर का पुरस्कार अनिरुद्ध राय चौधरी (‘पिंक’) को मिला।

अपने चलुबुले अभिनय से बॉलीवुड में जगह बनाने वाले वरुण धवन को फिल्म ‘ढिशुम’ के लिए बेस्ट एक्टर इन कॉमिक रोल का अवार्ड मिला। वहीं फिल्म ‘नीरजा’ के लिए जिम सरभ ने बेस्ट परफॉरमेंस इन नेगेटिव रोल का पुरस्कार जीता। ‘पिंक’ में अपनी शानदार अदाकारी से दर्शकों का दिल जीतने वाली तापसी पन्नू को इस फिल्म के लिए ‘वुमेन ऑफ द इयर’ के खिताब से नवाजा गया, तो एक के बाद एक सफल फिल्में दे रहीं आलिया भट्ट ने ‘मिंत्रा स्टाइल आइकॉन’ का खिताब अपने नाम किया।

फिल्म ‘एमएस धोनी’ के लिए दिशा पाटनी को बेस्ट डेब्यू फीमेल का अवार्ड दिया गया। वहीं अनुपम खेर ने इसी फिल्म के लिए बेस्ट एक्टर इन सपोर्टिंग रोल का पुरस्कार जीता। बेस्ट एक्ट्रेस इन सपोर्टिंग रोल का पुरस्कार ‘नीरजा’ के लिए शबाना आजमी को मिला। वहीं संगीतकार एआर रहमान को बॉलीवुड में 25 सालों के योगदान के लिए विशेष पुरस्कार से सम्मानित किया गया। फिल्म ‘कपूर एंड संस’ के लिए देवित्रे ढिल्लन और शकुन बत्रा को बेस्ट स्टोरी का पुरस्कार मिला। कनिका कपूर (‘उड़ता पंजाब’) और तुलसी कुमार (‘एयरलिफ्ट’) ने संयुक्त रूप से बेस्ट प्लेबैक सिंगर – फीमेल का पुरस्कार जीता।

अवार्ड समारोह के दौरान सलमान खान, कैटरीना कैफ, शाहिद कपूर, वरुण धवन, आलिया भट्ट, सुशांत सिंह राजपूत आदि ने शानदार प्रस्तुतियां दीं। हां, ‘दंगल’, ‘सुल्तान’, ‘रुस्तम’ और ‘काबिल’ जैसी फिल्मों का नाम पुरस्कार की किसी भी कैटेगरी में न होना जरूर अखर गया। क्या कोई पुरस्कार समारोह ‘राजनीति’ से रहित नहीं हो सकता?

 

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मधेपुरा जिले के जवाहर नवोदय विद्यालय को भी होगा अपना स्टेडियम 

मधेपुरा जिले में कुल 13 प्रखंड है | डायनेमिक डीएम मो.सोहैल द्वारा मधेपुरा अबतक को दी गई जानकारी के अनुसार “मुख्यमंत्री खेल विकास योजना” के अंतर्गत जिले के सभी 13 प्रखंडों के लिए स्टेडियम का प्रस्ताव कला, संस्कृति एवं युवा विभाग को भेजा गया था | परंतु, राज्य सरकार की ओर से ग्रामीण क्षेत्र के खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रथम चरण में जिले के 5 प्रखंडों- मधेपुरा, कुमारखंड, शंकरपुर, बिहारीगंज और आलमनगर में स्टेडियम निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गई है | शेष 7 प्रखंडों में स्टेडियम निर्माण का कार्य अगले चरण में किया जायेगा |

डीएम मो.सोहैल ने बताया कि पुरैनी प्रखंड में दो स्टेडियम पहला वासुदेब उच्च विद्यालय नया टोला एवं दूसरा मध्य विद्यालय पुरैनी में निर्माण की स्वीकृति इसी योजना के अंतर्गत पूर्व में ही दी जा चुकी है जिसके निर्माण कार्य का श्रीगणेश भी किया जा चुका है | इलाके के खिलाड़ी बहुत खुश हैं |

बता दें कि मुख्यमंत्री खेल विकास योजना के तहत वर्ष 2017-18 में राज्य स्तर पर कुल 24 स्टेडियम की स्वीकृति विभाग द्वारा दी गयी जिसमें मधेपुरा जिला को पांच स्टेडियम हेतु कुल 3 करोड़ 41 लाख 38 हज़ार500 रुपये की राशि स्वीकृत की गयी है | शेष 7 प्रखंडों में भी स्टेडियम निर्माण हेतु स्वीकृति की कार्यवाई तेजी से चल रही है |

यह भी जानिए कि जहाँ बिहारीगंज प्रखंड के राजकीय बुनियादी विद्यालय तुलसिया में बनने वाले फुटबॉल स्टेडियम के लिए 54 लाख 74 हज़ार 700 रुपये स्वीकृत किये गये हैं वहीं मधेपुरा, कुमारखंड, शंकरपुर और आलमनगर में बनने वाले 300 मीटर के प्रत्येक ट्रैकयुक्त स्टेडियम के लिए 68 लाख 27 हज़ार सात सौ रुपए स्वीकृत किए गये हैं | ये स्टेडियम बनेंगे- मधेपुरा के शिवनंदन प्रसाद मंडल उच्च विद्यालय में, कुमारखंड के देवनारायण उच्च विद्यालय, रानी पट्टी में, शंकरपुर के कारी अनंत उच्च विद्यालय में और आलमनगर के हाई स्कूल खापुड में |

जिले के खेल-प्रेमियों ने ग्रामीण इलाकों में खेल की गतिविधियों को बढ़ावा देने हेतु स्टेडियम निर्माण के लिए जिला प्रशासन के मुखिया डीएम मो.सोहैल को कोटि-कोटि साधुवाद दिया है |

चलते-चलते यह भी जान लें कि जिले के जवाहर नवोदय विद्यालय के छात्र-छात्राओं को खेलकूद हेतु मैदान व स्टेडियम की जरूरत तो है, परंतु उसे खाली जमीन ही नहीं है | सुनने में आया है कि बच्चे-बच्चियां खेलने के लिए बस में चढ़कर दूर कहीं किसी स्कूल के मैदान में यदाकदा जाया करते हैं | बता दें कि प्रखर स्वतंत्रता सेनानी एवं गांधी-विनोबा के पथानुगामी एवं सहयोगी कमलेश्वरी प्रसाद मंडल, जिनके द्वारा दान दी गई जमीन पर नवोदय विद्यालय हैं, के पौत्र एवं पूर्व मुखिया, सुखासन के श्री जनार्दन प्रसाद यादव सहित संवेदनशील ग्रामीणों ने समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी से नवोदय के बगल में ही 3 बीघे जमीन देने की पेशकश की है | जिला प्रशासन एवं समाज सेवियों ने चाह लिया तो जवाहर नवोदय विद्यालय के छात्र-छात्राओं को जल्द ही अपना स्टेडियम सहित खेल मैदान भी होगा |

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राहुल नहीं, नीतीश संभालेंगे यूपीए की कमान !

बिहार की राजनीति में चल रही महाभारत के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से अहम मुलाकात हुई। बताया जाता है कि इस बातचीत में तय हुआ कि नीतीश कुमार को संयुक्त विपक्ष में अहम जिम्मेदारी दी जाएगी और बिहार में महागठबंधन की सरकार चलती रहेगी। यही नहीं, तेजस्वी प्रसाद यादव उपमुख्यमंत्री पद से इस्तीफा भी दे देंगे। हालांकि फिलहाल कांग्रेस या जेडीयू के किसी पदाधिकारी ने अभी इस बात की पुष्टि नहीं की है।

गौरतलब है कि बिहार में चल रही राजनीतिक अनिश्चितता के मद्देनज़र सोनिया गांधी ने अपनी ओर से पहल करते हुए जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार और आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव से बात की। कथित रूप से उन्होंने तेजस्वी के मामले में बीच का रास्ता निकालने के लिए दोनों दलों के प्रमुख को राजी कर लिया है। इसके साथ ही आगे की रणनीति पर भी बात हुई बताई जाती है।

सोनिया की इस पहल के बाद बिहार के राजनीतिक हलके में इस चर्चा ने जोर पकड़ लिया है कि अब राहुल गांधी कांग्रेस के अध्यक्ष नहीं बनेंगे। अगर बनेंगे भी तो वे प्रधानमंत्री पद के लिए दावेदारी नहीं करेंगे। ऐसा होने पर स्पष्ट है कि यूपीए 2019 का चुनाव नीतीश की अगुआई में लड़ेगा। देखा जाय तो बिहार समेत पूरे देश के लिए ये बड़ी ख़बर है।

चलते-चलते बता दें कि वर्तमान समय के प्रसिद्ध इतिहासकार व लेखक रामचंद्र गुहा ने बीते मंगलवार को एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि कांग्रेस को बचाना है, तो इसका नेतृत्व नीतीश कुमार को सौंप दें। हालांकि ये बात उन्होंने एक ‘आदर्श कल्पना’ के तौर पर कही थी, लेकिन अपने क्षेत्र के दिग्गज और राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित किसी आदमी का इतनी बड़ी बात कहना मायने रखता है। यूपीए की साख बढ़ाना और प्रकारान्तर से मोदी-शाह की दिन-ब-दिन बढ़ती ताकत को रोकना उनके मुताबिक नीतीश की अगुआई में ही संभव है। अब राजनीतिक हलके में जिस तरह की चर्चा चल रही है, उससे गुहा की ‘कल्पना’ सच होती दिख रही है।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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भारत के टॉप 10 ब्रांड में जियो और एसबीआई के साथ पतंजलि

योगगुरु बाबा रामदेव का ब्रांड पतंजलि भारत के टॉप 10 प्रभावशाली ब्रांड में शामिल हो गया है। ग्लोबल रिसर्च फर्म इप्सोस (IPSOS) ने भारतीय बाज़ार में 100 से अधिक ब्रांड का मूल्यांकन करने के बाद टॉप 20 ब्रांड की रैंकिंग जारी की है, जिसमें मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस जियो और पब्लिक सैक्टर के सबसे बड़े बैंक एसबीआई के साथ पतंजलि ने भी जगह बनाई है। सूची में सर्च इंजन गूगल पहले, माइक्रोसॉफ्ट दूसरे और सोशल नेटवर्किंग कंपनी फेसबुक तीसरे स्थान पर रही।

टॉप 10 ब्रांड में ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट और उसकी प्रतिस्पर्द्धी कंपनी अमेजॉन भी शामिल हैं। हालांकि फ्लिपकार्ट इस बार तीन पायदान गिरकर 10वें स्थान पर पहुंच गई है, जबकि अमेजॉन इंडिया ने अपने रैंक में सुधार करते हुए छठे स्थान पर कब्जा जमाया।

इप्सोस की इस सूची में शीर्ष पर जगह बनाने की क्या अहमियत है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ऐपल, स्नैपडील, कैडबरी, अमूल और डिटॉल जैसे दिग्गज ब्रांड टॉप 10 में अपनी जगह नहीं बना सके। हालांकि ये टॉप 20 में जरूर शामिल हैं। गौरतलब है कि रैंकिंग जारी करने से पहले इप्सोस सारे ब्रांड को क्वालिटी, अनुभव और वैल्यू के पैमाने पर जांचने के साथ ही बाज़ार पर उनके प्रभाव का भी बारीकी से आकलन करती है।

बहरहाल, देश के टॉप 10 ब्रांड में शामिल होने के बाद बाबा रामदेव अब कुछ नया करने जा रहे हैं। जी हां, एफएमसीजी सेक्टर में पतंजलि की स्वर्णिम सफलता के बाद उन्होंने चालीस हजार करोड़ रुपये वाले प्राइवेट सिक्योरिटी मार्केट में भी दस्तक दे दी है। गुरुवार को उन्होंने हरिद्वार में पराक्रम सुरक्षा प्राइवेट लिमिटेड नाम से प्राइवेट सिक्योरिटी फर्म की शुरुआत की। ‘पराक्रम सुरक्षा, आपकी रक्षा’ के नारे के साथ आई इस कंपनी का 2017 के आखिर तक देशभर में शाखाएं खोलने का लक्ष्य है।

चलते-चलते बता दें कि पतंजलि की स्थापना बाबा रामदेव ने साल 2006 में की थी। महज 11 साल में इसके ग्रोथ के जादुई सफर का अंदाजा आप पिछले वित्त वर्ष में हासिल किए गए इसके राजस्व से लगा सकते हैं, जो 10,561 करोड़ रुपये का था।

 

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इस राजनीतिक मेलोड्रामा का अंत क्या है ?

बिहार की राजनीति का मेलोड्रामा अपने चरम पर है। सिर पर नीतीश कैबिनेट से बर्खास्तगी की तलवार झेल रहे उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के सुरक्षाकर्मियों ने बुधवार को सचिवालय के बाहर पत्रकारों से बदसलूकी और मारपीट की। दरअसल तेजस्वी कैबिनेट की बैठक के बाद बाहर आ रहे थे और बाहर सवालों की बौछार लिए पत्रकारों की भीड़ जमा थी। पत्रकारों ने ज्योंहि तेजस्वी से सवाल पूछने की कोशिश की, उनके सुरक्षाकर्मियों ने तथाकथित रूप से उन पर हमला कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक तेजस्वी के गार्डों ने पत्रकारों को दौड़ाया और उनसे हाथापाई की। सचिवालय के बाहर बहुत देर तक हंगामा होता रहा और अफरा-तफरी मची रही।

गौरतलब है कि आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के परिवार पर भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण इन दिनों जांच एजेंसियों का शिकंजा कसता जा रहा है। इसके बाद से ही बिहार में महागठबंधन सरकार के भविष्य को लेकर कयासों का दौर चल रहा है। उपमुख्यमंत्री तेजस्वी पर सीबीआई द्वारा केस दर्ज किए जाने के बाद उन्हें कैबिनेट से बाहर का रास्ता दिखाए जाने की संभावना है। मंगलवार को अपनी पार्टी की बैठक के बाद नीतीश ने गेंद लालू के पाले में डालते हुए कहा था कि ये उनका और उनकी पार्टी का मामला है, इसीलिए इस पर वो स्वयं निर्णय लें। इस पर आरजेडी ने बिना देर किए टका सा जवाब दिया और कहा कि तेजस्वी किसी सूरत में इस्तीफा नहीं देंगे।

ऐसे में नीतीश की छवि और उनके ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए इस बात की संभावना जताई जा रही है कि लालू द्वारा इस समस्या का ‘समाधान’ नहीं निकाले जाने पर वो कोई कड़ा कदम उठा सकते हैं। उन्होंने अपनी पार्टी की अहम बैठक में स्पष्ट संकेत किया था कि भ्रष्टाचार के मामले में वो अपनी जीरो टॉलरेंस की नीति से कोई समझौता नहीं करेंगे। उन्होंने कहा था कि जिन पर आरोप लग रहे हैं उन्हें तथ्यों के साथ जनता के बीच जाना चाहिए। साथ में उन्होंने यह भी जोड़ा कि उनकी पार्टी के नेताओं पर जब भ्रष्टाचार के आरोप लगे तो उन्होंने मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया।

बहरहाल, इस सारी रस्साकशी में एक बात मन को मथे जा रही है कि क्या आज की राजनीति में नैतिकता, मर्यादा और शुचिता जैसे शब्दों का कोई अर्थ नहीं रह गया है? क्या इन शब्दों में सुविधानुसार अपना अर्थ भरा जा सकता है? अगर नहीं, तो लालू सकारात्मक दिशा में क्यों नहीं सोच पा रहे? अगर उनके कहे मुताबिक वे और उनका परिवार निर्दोष हैं तो फिर सांच को आंच क्या? सच जो भी है, जहां भी है, आज नहीं तो कल सामने आना ही है।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप  

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झारखंड के सरकारी पाठ्यक्रम में शामिल की गई डॉ.मधेपुरी की पुस्तक……

झारखंड सरकार ने मधेपुरा के लेखक डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी की पुस्तक “छोटा लक्ष्य एक अपराध है” के सर्वाधिक अंश को सरकारी स्कूलों के लिए तैयार किये गये छठी कक्षा की हिन्दी किताब में डॉ.कलाम से संबंधित आलेख “प्रेरणा के बीज” के लिए चयनित किया है | इस कृत्य से डॉ.मधेपुरी सहित मधेपुरा और बिहार के समस्त साहित्कार समुदाय भी गौरवान्वित हुए हैं |

बता दें कि मधेपुरा के समाजसेवी-साहित्यकार एवं भौतिकी के विद्वान डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने तत्कालीन महामहिम राष्ट्रपति भारतरत्न डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के संग बिताये गये सर्वाधिक प्रेरक क्षणों की उपलब्धियों को राष्ट्र निर्माण करनेवाले नौनिहालों के निमित्त “छोटा लक्ष्य एक अपराध है” पुस्तक में पिरोने का काम किया तो सरकारी स्तर पर सबसे पहले झारखंड सरकार ने इस पुस्तक के सर्वाधिक अंशो को छठी कक्षा के बच्चों के लिए पाठ्यक्रम में डालकर पढ़ाना भी शुरू कर दिया | जानिये कि डॉ.मधेपुरी द्वारा इस प्रेरक पुस्तक सहित आधे दर्जन पुस्तकों की रचना हिन्दी में की गई है |

यह भी जानिये कि भारत के विभिन्न क्षेत्रों के बच्चों द्वारा चाचा कलाम से पूछे गये सवाल और भारतरत्न डॉ.कलाम द्वारा दिये गये जवाब का सारगर्भित संकलन है- यह पुस्तक “छोटा लक्ष्य एक अपराध है” | इस पुस्तक के अब तक सात संस्करण प्रकाशित हो चुके हैं |

बता दें कि लगभग एक दशक से भारत के सभी राज्यों के बड़े-बड़े स्टेशनों पर अवस्थित ए.एच.व्हीलर की दुकानों में यह पुस्तक निरंतर बिकती रही है और देती रही है डॉ.मधेपुरी को शोहरत के साथ-साथ उच्च कोटि की साहित्यिक पहचान भी | क्योंकि, प्रभात खबर अखबार को डॉ.मधेपुरी ने बताया कि इस पुस्तक के माध्यम से वे देश के विभिन्न हिस्सों के बुद्धिजीवियों एवं साहित्यकारों से वर्षों से जुड़े हैं जो प्रतिवर्ष उनके जन्मदिन पर बधाई देना प्रायः नहीं भूलते !

यूँ तो इस पुस्तक में एक से एक उमदा प्रश्न पूछे गये हैं और डॉ.कलाम द्वारा दिया गया जवाब भी हृदय को छू लेने वाला है | कोई एक प्रश्न, यह कि- आपको जिंदगी में सबसे अधिक दुख किस बात की है ? के जवाब में डॉ.कलाम ने यही कहा कि- जिस समय मुझे भारतरत्न जैसे सर्वोच्च सम्मान महामहिम राष्ट्रपति डॉ.के.आर.नारायणन द्वारा दिया जा रहा था उस समय मेरे माता, पिता और गुरुओं में से कोई नहीं थे…….| दूसरा एक प्रश्न- यह कि यदि ईश्वर आपको एक वरदान देना चाहें तो आप क्या मांगेंगे- का जवाब उन्होंने दिया- हे ईश्वर ! भारत को विकसित राष्ट्र बना दो……..!

साभार – प्रभात खबर

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