नीतीश ने लालू को 70 गुलाब के साथ दी 70वें जन्मदिन की बधाई

70 वर्ष के हो गए आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव। एक के बाद एक नए आरोप, चारा घोटाला मामले में फिर पेशी का दौर, विवादों का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा… पर धूमधाम में कमी नहीं। एक दिन पहले से आवास और कार्यालय पर समर्थकों का जमावड़ा, तरह-तरह के फूलों की सजावट, बधाई वाले पोस्टर से पटे पटना के चौक-चौराहे और 70 पाउंड का केक… और क्या चाहिए। चाहे रिक्शा पर बैठकर जेल जाना हो या हाथी पर बैठकर बाहर आना – विपरीत परिस्थितियों में भी अपने लिए आकर्षण पैदा कर लेने में लालू बेजोड़ रहे हैं। आज तो खैर उनका जन्मदिन ही है – उनके परिवार, उनकी पार्टी के लिए बेहद खास दिन। और कई मायनों में वर्तमान सरकार और सम्पूर्ण बिहार के लिए भी।

रात 12 बजते ही मीसा की बेटी, तेजस्वी, राबड़ी और परिवार के बाकी सदस्यों ने सोते लालू को केक काटने के लिए जगाया। रविवार सुबह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 70 गुलाब का गलदस्ता लिए लालू को बधाई देने उनके आवास पहुंचे। कहा, लालूजी ने अपना जीवन जनता की सेवा में लगा दिया है। छात्र जीवन से अब तक इन्होंने जो योगदान दिया है, वह अहमियत रखता है। साथ में ये भी कि मैं और लालू मिलकर बिहार का विकास कर रहे हैं। उधर तेजस्वी ने सोशल मीडिया पर अपने पिता के जन्मदिन का फोटो शेयर किया और लिखा “शेरदिल, न्याय के लिए लड़ने वाले, समाजवाद के गुरु, गरीबों के मसीहा लालू प्रसाद यादव जी को जन्मदिन की मुबारकबाद। आप पर गर्व है डैड।”

लालू के जन्मदिन को और खास बनाने के लिए आज ही के दिन नीतीश-तेजस्वी ने बिहार को दो मेगा पुल उपहार में दिए। ये दो पुल हैं – पटना (दीघा) से सोनपुर (पहलेजा) को जोड़ने वाला जेपी पुल और आरा से छपरा को जोड़ने वाला वीर कुंवर सिंह पुल। इन दोनों पुलों के उद्घाटन के मौके पर मुख्यमंत्री-उपमुख्यमंत्री के अलावे लालू प्रसाद यादव भी मौजूद थे। गौरतलब है कि उपमुख्यमंत्री तेजस्वी ही पथ निर्माण विभाग के भी मंत्री हैं और इन दोनों पुलों के उद्घाटन के लिए पिता के जन्मदिन को चुनना निश्चित तौर पर अकारण नहीं था। भाजपा ने इस पर हो-हल्ला भी मचाया था।

बहरहाल, तमाम विरोधाभासों के बावजूद लालू बड़े नेता हैं, इसमें कोई दो राय नहीं। बिहार ही नहीं देश की राजनीति में भी जब-जब सामाजिक न्याय की बात होगी, उनके बिना पूरी नहीं होगी। राजनीति की अपनी अनूठी शैली और गंवई पुट लिए भाव-भंगिमा से उन्होंने लाखों लोगों पर जो छाप छोड़ी है, वो आसानी से मिटने वाली नहीं। ‘मधेपुरा अबतक’ की ओर से उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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तो अमित शाह के हिसाब से ‘चतुर बनिया’ थे राष्ट्रपिता!

भारत के संपूर्ण इतिहास के उन चंद नामों में महात्मा गांधी का नाम शुमार है जिनकी स्वीकार्यता और जिनके प्रति सम्मान दल, जाति और धर्म ही नहीं, देश और काल की सीमा से परे है। ऐसे महान व्यक्तित्व के लिए किसी भी रूप में अशोभनीय शब्द का प्रयोग निन्दायोग्य ही नहीं बल्कि अक्षम्य है। पर इन दिनों मोदी के ‘कांग्रेसमुक्त भारत’ के नारे के झंडाबरदार भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह पर हालिया चुनावी सफलताओं का नशा कुछ इस कदर चढ़ गया है कि वे मर्यादा की सारी सीमा लांघकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी तक के लिए अनादरसूचक शब्द का इस्तेमाल कर बैठे। जी हां, उन्होंने भरी सभा में उन्हें ‘चतुर बनिया’ की संज्ञा दी। अब चाहे वो इसके संदर्भ की लाख दुहाई दे लें, सार्वजनिक जीवन में रहने वाले और भारत ही नहीं, दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी का अध्यक्ष कहलाने वाले व्यक्ति से ऐसा कतई अपेक्षित नहीं।

बहरहाल, चलिए जानते हैं मामला क्या है। दरअसल अमित शाह शुक्रवार को छत्तीसगढ़ में एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस दौरान कांग्रेस की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा, “कांग्रेस किसी एक विचारधारा के आधार पर, किसी एक सिद्धांत के आधार पर बनी हुई पार्टी ही नहीं है… यह तो आज़ादी हासिल करने के लिए एक साधन (पर्पस व्हीकल) की तरह थी। और इसीलिए महात्मा गांधी ने… बहुत चतुर बनिया था… उन्होंने कहा था कि कांग्रेस को आज़ादी के बाद बिखेर देना चाहिए।” आगे उन्होंने कहा, “भले ही महात्मा गांधी कांग्रेस को न बिखेर पाए हों, लेकिन अब वह काम कांग्रेस के ही लोग कर रहे हैं।”

अमित शाह के इस बयान की कांग्रेस समेत सारी पार्टियों ने एक स्वर से निन्दा की है। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने शाह के बयान को देशद्राह की संज्ञा दी और कहा कि यह स्वतंत्रता सेनानियों, उनके बलिदान और महात्मा गांधी का अपमान है। उन्होंने अमित शाह को सत्ता का व्यापारी बताते हुए कहा कि वे देश की आज़ादी की लड़ाई को व्यापारिक मॉडल बता रहे हैं। सुरजेवाला ने कहा कि सच्चाई यह है कि आज़ादी से पहले गोरे अंग्रेज महासभा और संघ का इस्तेमाल देश के बंटवारे के लिए करते रहे और अब यही काम भाजपा के काले अंग्रेज मुट्ठी भर धन्नासेठों का स्पेशल पर्पस व्हीकल बनकर कर रहे हैं।

उधर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ट्वीट कर कहा, सार्वजनिक जीवन में रहने वाले व्यक्तियों को राष्ट्रनायकों का उल्लेख बेहद सम्मान और संवेदनशीलता के साथ करना चाहिए। जबकि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर सीधे कुछ न कहकर ट्वीट के माध्यम से बस गांधीजी का ही एक कथन साझा किया, जो यह है – “मैं जब भी निराश होता हूं, मैं याद करता हूं इतिहास में हमेशा सच और प्यार की जीत हुई है। अत्याचारी और हत्यारे हुए और कुछ वक्त के लिए वो अजय भी जान पड़े, लेकिन अंत में उनका खात्मा हो ही गया… ये बात हमेशा याद रखिए।”

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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मधेपुरा नगर परिषद की मुख्य पार्षद बनी श्रीमती सुधा कुमारी !

मधेपुरा नगर परिषद के नव निर्वाचित 26 पार्षदों का शपथ ग्रहण जहाँ राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार नगर परिषद के हॉल में एडीएम मो.मुर्शीद आलम ने निर्वाची पदाधिकारी के रूप में कराया वहीं मधेपुरा के एलआरडीसी रविशंकर शर्मा को मुरलीगंज नगर पंचायत के हॉल में 15 नव निर्वाचित पार्षदों को शपथ दिलाने के लिए आयोग ने निर्वाची पदाधिकारी नियुक्त किया |

बता दें कि आज 11:00 बजे दिन से मुख्य एवं उप-मुख्य पार्षद के चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी- एक साथ मधेपुरा नगर परिषद एवं मुरलीगंज नगर पंचायत में | दोनों जगह की सुरक्षा व्यवस्था पर डीएम मो.सोहैल की नजर टिकी रही |

आयोग द्वारा दोनों जगहों की चुनाव प्रक्रिया सही सलामत संपन्न कराने हेतु दो पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की गई | जहाँ नगर परिषद मधेपुरा के लिए सुपौल जिले के डिस्ट्रीक्ट ट्रांसपोर्ट ऑफिसर अरुण कुमार सिंह की नियुक्ति की गई थी वहीं मुरलीगंज नगर पंचायत के लिए त्रिवेणीगंज अनुमंडल के एलआरडीसी गोपाल कुमार की | साथ ही जहां दोनों पर्यवेक्षकों को आयोग ने यह हिदायत दी थी कि शपथ ग्रहण एवं निर्वाचन की प्रक्रिया में शामिल होने हेतु नवनिर्वाचित पार्षदों को दिन के 11:00 बजे से 12:00 बजे तक का ही समय दिया गया है- अस्तु उसके बाद किसी भी पार्षद को निर्वाचित प्रक्रिया में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जायेगी वहीं जिला प्रशासन द्वारा निर्देश जारी किया गया कि सभी निर्वाचित पार्षदों को निर्वाचन प्रमाण-पत्र और फोटो युक्त पहचान-पत्र साथ लाना अनिवार्य होगा और निरक्षर निर्वाचित पार्षद के अतिरिक्त किसी अन्य को अपने साथ सहायतार्थ एक व्यस्क को लाने की अनुमति नहीं दी जायेगी |

Swet Kamal aka Bauwa Jee - The Newly Elected Chairman of Nagar Panchayat , Murliganj , Madhepura .
Swet Kamal aka Bauwa Jee – The Newly Elected Chairman of Nagar Panchayat , Murliganj , Madhepura .

यह भी बता दें कि पूरी निर्वाचन प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई गयी, आस-पास की दुकानें बन्द रखी गई और विजयी मुख्य-पार्षद एवं उप-मुख्य पार्षद को जुलूस निकालने की अनुमति नहीं दी गई- हाँ! खुशी का इजहार तो हर कोई कर ही सकता है |

इसबार के चुनाव में जल्द ही परिणाम घोषित कर दिया गया | वार्ड नंबर- 16 की वार्ड पार्षद श्रीमती सुधा कुमारी को अध्यक्ष पद के लिए 17 मत प्राप्त हुए और प्रतिद्वंदी वार्ड नंबर- 6 की श्रीमती निर्मला देवी को मात्र 9 मत | उपाध्यक्ष पद पर वार्ड नंबर- 24 के वार्ड पार्षद अशोक कुमार यादव यदुवंशी को 16 मत मिले |

यह भी बता दें कि मुरलीगंज वार्ड न.- 3 के पार्षद श्वेतकमल उर्फ बौआ जी 15 में से 8 वोट पाकर अध्यक्ष बने और वार्ड न.- 13 के जगदीश साह उपाध्यक्ष बने | अब मधेपुरा और मुरलीगंज की जनता आशा लगाये बैठी है कि नये अध्यक्ष-उपाध्यक्ष आनेवाली बरसात में नाले की सफाई कर जल निकासी में किस हद तक सफल होते हैं यह तो समय ही बताएगा |

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मध्य प्रदेश में किसानों से मिलने जा रहे राहुल गांधी गिरफ्तार

पहले अपनी मांगों को लेकर आवाज़ उठा रहे असहाय किसानों पर गोलीबारी, फिर उन किसानों से मिलने जा रहे कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह, पूर्व केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ, एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार, जेडीयू के वरिष्ठ नेता शरद यादव समेत अन्य नेताओं को रोका जाना और फिर राहुल गांधी की गिरफ्तारी – क्या ये स्वस्थ लोकतंत्र की तस्वीर है? नहीं न? लेकिन हैरानी की बात यह कि मध्य प्रदेश में ये सब कुछ हो रहा है। हैरत तब और बढ़ जाती है जब ‘सबका साथ सबका विकास’ की बात याद आती है। ये वो नारा है जो भाजपा ने दिया और जिस नारे पर देश ने यकीन किया। सवाल उठता है, क्या इसी दिन के लिए? राजनीतिक तौर पर भी देखें, तो केन्द्र और राज्य में एक ही पार्टी की सरकार है और इस नाते किसी ‘अवरोध’ का भी प्रश्न नहीं उठता, फिर भी किसानों का इस तरह मुद्दा बन जाना समझ से परे है।

बहरहाल, मध्य प्रदेश के मंदसौर में किसानों से मिलने जा रहे कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को गुरुवार दोपहर पुलिस ने हिरासत में ले लिया। राहुल के साथ ही दिग्विजय सिंह, कमलनाथ, शरद पवार और शरद यादव भी थे, लेकिन इन सभी को मध्य प्रदेश बॉर्डर पर ही रोक लिया गया। इस तरह रोके जाने पर राहुल पुलिस और प्रशासन को चकमा देते हुए बाइक से मंदसौर जाने के लिए निकल पड़े, लेकिन उन्हें नीमच में रोक दिया गया। उस वक्त राहुल के साथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव और काग्रेस के युवा नेता सचिन पायलट भी थे। बाद में राहुल को खोर स्थित विक्रम सीमेंट के गेस्ट हाउस ले जाया गया। पुलिस ने इस जगह को तात्कालिक जेल बना दिया है।

हिरासत में लिए जाने के बाद राहुल गांधी ने कहा, “मैं सिर्फ किसानों से, जो हिन्दुस्तान के नागरिक हैं, उनसे मिलना चाहता हूं। मोदीजी किसान को सिर्फ गोली दे सकते हैं। उन्हें देश के सबसे बड़े आदमी का कर्ज माफ किया है, लेकिन किसानों का कर्ज माफ नहीं कर सकते।”

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के किसान कर्जमाफी, न्यूनतम समर्थन मूल्य, जमीन के बदले मुआवजे और दूध के मूल्य को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। मंगलवार को मंदसौर में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे किसानों पर पुलिस ने फायरिंग की थी, जिसमें पांच किसानों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद वहां किसानों का आंदोलन उग्र हो गया और प्रदर्शनकारियों ने सरकारी और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया। गरीबों और किसानों के मुद्दे को लेकर मोदी सरकार को घेरने की कोशिश में लगे विपक्ष को इस घटना के बाद एक बड़ा मुद्दा मिल गया है। उधर इन सारे घटनाक्रम पर प्रधानमंत्री मोदी की ओर से एक ट्वीट के अलावे वैसी कोई क्रिया-प्रतिक्रिया देखने को नहीं मिली, जो उनसे पूरे देश को अपेक्षित है। वैसे किसान आंदोलन से निपटने में प्रशासन की ओर से रही खामी के मद्देनज़र मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंदसौर समेत तीन जिलों के जिलाधिकारियों का तबादला जरूर कर दिया है।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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रमजान में खुल जाते हैं जन्नत के सारे दरवाजे !

रमजान का महीना इस्लाम धर्माबलम्बियों के लिए मुबारक माना जाता रहा है | केवल इसीलिए कि इसी महीने में अल्लाह ने इंसानी रहनुमाई के वास्ते ‘कुरआन-ए-मजिद’ को नाजिल किया था जिसमें रोजा रखना हर मुसलमान पर फर्ज करार दिया गया |

इस पर्व में क्या गरीब, क्या अमीर सभी पाक-साफ हो मस्जिद में जाकर इबादत करते हैं | जुमा के दिन मस्जिद में सर्वाधिक भीड़ होती है जिसमें बच्चों की संख्या सर्वाधिक होती है | यूं तो नन्हें रोजेदार से लेकर बड़े रोजेदारों द्वारा सभी मस्जिदों में बड़े ही धूमधाम से जुमे की नमाज अदा की गयी है जिसके बारे में जिले के हर कोने से समाचार आ रहा है |

बता दें कि बढ़ती गर्मी के बीच रोजा रखना रोजेदारों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं और खासकर नन्हें रोजेदारों के लिए तो और मुश्किलें पैदा हो जाती हैं | भला क्यों नहीं, रोजे का समय लगभग 15 घंटे का जो हो रहा है | यूँ जून 21 को सबसे बड़ा दिन होने की वजह से रोजेदारों को लंबा रोजा रखना पड़ेगा |

यह भी बता दें कि इस पाक रमजान में रोजे के साथ-साथ तरावीह की नमाज का खास महत्व होता है जो रात के 8:30 बजे लगभग में शुरू हो जाती है | इस पूरे महीने में रोजेदार इबादत में डूब जाते हैं | मान्यता है कि जहां इस रमजान के पाक महीने में अल्लाह पाक हर नेकी का सवाब 70 गुना बढाकर देता है वहीं अकीदतमंदों द्वारा एक दूसरे की मदद करते हुए नमाज की जगह देकर सामाजिक सौहार्द का परिचय दिया जाता है | जुमे की नमाज को बहुत महत्वपूर्ण नमाज माना जाता है | रमजान में जुमे का महत्व बढ़ता चला जाता है |

चलते-चलते यह भी बता दें कि मदीने से आये अजूबा खजूर और भिन्न-भिन्न प्रकार के सेवइयों से बाजार सजने लगा है | बाजार में खरीदारों की भीड़ दिखने लगी है | रोजेदारों की सुविधा का ख्याल रखते हुए हर चीज समय से उपलब्ध करायी जा रही है | ड्रायफ्रूट्स के पैकेट की बिक्री भी बढ़ी है |

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हरियाणा की टॉपर बनी, मधेपुरा की बेटी खुशी प्राणसुखका !

आज भी जहाँ बेटी के जन्म लेने पर प्राय: परिवार में उल्लासपूर्ण चहल-पहल एवं ठाठ-बाट के साथ छठी नहीं मनाई जाती है वहीं मधेपुरा के कपड़ा-व्यवसायी-दम्पत्ति आनंद एवं रीता प्राणसुखका की सुपुत्री एवं मधेपुरा की बेटी खुशी प्राणसुखका के CBSE 10th बोर्ड की परीक्षा में हरियाणा प्रदेश की टॉपर बनने की खबर सुनकर धर्मपरायण व मानस मर्मज्ञ दादाश्री योगेन्द्र प्रसाद प्राणसुखका (अध्यक्ष, मधेपुरा जिला व्यापार संघ) द्वारा मिठाइयाँ तो बाँटी ही जा रही है, साथ ही सभी सदस्यों एवं परिजनों द्वारा चारो ओर खुशियाँ भी लुटाई जा रही हैं | ऐसे परिवार हैं जहाँ बेटी के जन्म पर आज भी बहुत सी चीजें लुटाई जाती है ; दान दी जाती है |

Madhepura (Bihar) Ki Beti Khushi Pranshukhka became the topper in CBSE 10th Board Exam- 2017 from the State of Haryana .
Madhepura (Bihar) Ki Beti Khushi Pranshukhka became the topper in CBSE 10th Board Exam- 2017 from the State of Haryana .

बता दें कि मधेपुरा के श्रीकृष्ण गोशाला को अध्यक्ष जी के दादाश्री रामेश्वर प्राणसुखका, सागरमल प्राणसुखका एवं जीवन सर्राफ आदि जैसे दानवीरों ने लगभग तीन सौ बीघे जमीन दान में दी थी | आज मधेपुरा के इस धर्मपरायण- दानवीर प्राणसुखका परिवार के साथ सम्पूर्ण मधेपुरा अपनी इस बेटी खुशी प्राणसुखका की उपलब्धि पर गौरवान्वित हो रहा है…………!

Haryana CBSE 10th Board - 2017 Topper Khushi alongwith her Parents Mr.Anand & Reeta Pranshukhka at Delhi Airport .
Haryana CBSE 10th Board – 2017 Topper Khushi alongwith her Parents Mr.Anand & Reeta Pranshukhka at Delhi Airport .

यह भी बता दें कि CBSE 10th बोर्ड की परीक्षा में 98.5% अंक प्राप्त कर हरियाणा प्रदेश की टॉपर बननेवाली बिहार की बेटी ‘खुशी’ वहीं के हिसार जिले के “विद्या देवी जींदल स्कूल” से अपनी पढ़ाई पूरी कर CBSE की 10th बोर्ड की परीक्षा में शामिल हुई थी |

मधेपुरा अबतक द्वारा खुशी प्राणसुखका से यह पूछे जाने पर कि अपनी इस उपलब्धि का श्रेय आप किन्हें देना चाहती हैं- के जवाब में खुशी ने यही कहा कि माता-पिता एवं गुरुओं द्वारा दिये गये ज्ञान के अतिरिक्त मधेपुरा के सभी बुद्धिजीवी दादाओं के आशीर्वचनों का ही फल है- यह गौरवोज्ज्वल उपलब्धि !

अंत में खुशी ने मधेपुरा अबतक से यही कहा कि इसी प्रकार श्रेष्ठजनों के आशीर्वचनों को ऊँचाई तक ले जाने वाले रास्ते का सम्बल बनाकर कड़ी मिहनत करती रहूंगी और मधेपुरा की बेटी बनकर बिहार का भी नाम देश और दुनिया में चमकाती रहूँगी………!

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कवयित्री अलका वर्मा को मिला कौशिकी साहित्य रत्न !

कौशिकी क्षेत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन संस्थान के अंबिका सभागार में कोसी की चर्चित कवयित्री (सम्प्रति प्राचार्या रामकृष्ण भुवनेश्वरी आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय त्रिवेणीगंज, सुपौल) श्रीमती अलका वर्मा के एकल काव्य पाठ का आयोजन 4 जून, 2017 (रविवार) को समारोहपूर्वक किया गया- जिसकी अध्यक्षता कोसी के वरिष्ठ साहित्यकार-इतिहासकार हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ ने की |

जहाँ मधेपुरा के सांसद रह चुके व मंडल विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति एवं कोसी के चर्चित साहित्यकार सह सम्मेलन के संरक्षक डॉ.रमेंद्र कुमार यादव रवि ने कवयित्री अलका वर्मा को अंग-वस्त्रम व प्रशस्ति पत्र प्रदानकर “कौशिकी साहित्य रत्न” से सम्मानित किया, वहीं इससे पूर्व सम्मेलन के यशस्वी सचिव डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी द्वारा कवयित्री श्रीमती वर्मा की संपूर्ण काव्य-यात्रा को संक्षेप में प्रस्तुत करते हुए इस प्रकार उद्घोषणा की गयी-

विभिन्न प्रकार की सामाजिक, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक संस्थाओं से संबद्ध एवं क्रियाशील रहनेवाली, महिला सशक्तिकरण हेतु गृह जिला सुपौल द्वारा सम्मानित होनेवाली तथा “मुझे मेरे नाम से पुकारो” काव्य संग्रह के अलावे ‘कही अनकही’ एवं “गुलमोहर” कथा-संग्रह द्वय में जीवन के खट्टे-मीठे अनुभवों को करीने से उकेरनेवाली और साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर छपते रहनेवाली श्रीमती अलका वर्मा को इस संस्थान के संरक्षक डॉ.रवि द्वारा सारस्वत सम्मान यानि “कौशिकी साहित्यरत्न” से सम्मानित किया जायेगा |

जहां एक ओर कवयित्री सह प्राचार्या श्रीमती अलका वर्मा द्वारा अपने एकल काव्यपाठ में दर्जनों कविताओं के पाठोपरांत श्रोताओं द्वारा खूब तालियां बटोरी गयी वहीं अपने समीक्षात्मक आशीर्वचन में वरिष्ठ साहित्यकार श्री शलभ और संस्थापक कुलपति डॉ.रवि ने विचार व्यक्त करते हुए यही कहा कि इनकी कविताएं अतुकांत होते हुए भी सरल है, सहज है और अंतरात्मा से निःसृत एवं गीत्यात्मक माधुर्य से  उतप्लावित है जो जीवन के यथार्थ से हमें साक्षात्कार कराती है | साहित्यकार द्वय ने नारी सशक्तिकरण में श्रीमती वर्मा के योगदान को रेखांकित करते हुए जमकर सराहना की |

मंडल विश्वविद्यालय के पूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष एवं डि.लिट. प्राप्त समीक्षक डॉ.विनय कुमार चौधरी ने कवयित्री श्रीमती वर्मा के काव्य संग्रह ‘मुझे मेरे नाम से पुकारो’ की विस्तृत समीक्षा की और दर्शकों का ध्यान आकृष्ट किया |

भागलपुर विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति  रहे डॉ.के.के.मंडल, क्षणदा के संपादक सुबोध कुमार सुधाकर, मंडल विश्वविद्यालय के कुलसचिव रहे प्रो.शचीन्द्र, पूर्व प्राचार्य प्रो.श्यामल किशोर यादव आदि ने कवियत्री के कार्य की प्रशंसा करते हुए इनके उज्जवल भविष्य की कामनाऍ की |

दूसरे सत्र में स्थानीय कवि व साहित्यकारों प्रेम जी, सत्य जी एवं विनोद जी को स्मरण करते हुए आयोजित काव्य-गोष्ठी का संचालन डॉ.विनय कुमार चौधरी एवं डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने संयुक्तरुप से किया |

जिन कवियों ने अपनी-अपनी कविताओं का पाठ किया, वे हैं- प्रेम और विरह के गीतकार सुबोध कुमार सुधाकर, प्रधानाचार्य  डॉ.विश्वनाथ विवेका, डॉ.विश्वनाथ सर्राफ, शंभू नाथ अरुणाभ, सुरेन्द्र भारती, उल्लास मुखर्जी, राजू भैया, डॉ.अरुण कुमार (फर्जी कवि), डॉ.विनय कुमार चौधरी एवं डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी | आयोजन में प्रमुख रुप से उपस्थित रहे- रघुनाथ प्रसाद यादव, अनिकेत श्रीवास्तव, प्राण मोहन यादव, डॉ.हरिनंदन यादव, श्यामल कुमार सुमित्र, डॉ.अरविन्द श्रीवास्तव आदि |

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इन्होंने लगाए एक करोड़ पेड़, आपने ?

5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जा रहा है। इस दिन कई जगहों पर सरकारी आयोजन होंगे, कुछ पौधे लगाकर रस्म अदायगी होगी, भाषण दिए जाएंगे और हो जाएगी कर्तव्य की इतिश्री। बाकी दिनों तो बस पत्र-पत्रिकाओं में लेख ही लिखे जाएंगे। जहां तक व्यक्तिगत प्रयत्नों की बात है तो अपने घर-परिवार में या आसपास आपको कुछ ऐसे लोग जरूर दिखते होंगे (और हो सकता है आप स्वयं भी उन्हीं व्यक्तियों में शामिल हों) जिन्हें पेड़ों से प्रेम हों और जो नियमित तौर पर पेड़ लगाते हों। पेड़ों के साथ थोड़ा समय भी बिताते हों। पर्यावरण के प्रति जागरुक ऐसे किसी व्यक्ति से आप क्या अपेक्षा कर सकते हैं, यही न कि अपने जीवन में उन्होंने सौ, दो सौ या कुछ हजार पेड़ लगा दिए होंगे। लेकिन अगर आपको कहा जाए कि आपके देश में कोई ऐसा भी है, जिसने अपने 71 साल के जीवन में पूरे एक करोड़ पेड़ लगाए हैं और यह क्रम अब भी जारी है, तो क्या प्रतिक्रिया होगी आपकी? आप शायद इस बात पर यकीन भी न करें, पर ये है सच, सौ फीसदी सच।

जी हां, तेलंगाना के खमाम जिले के रेड्डीपल्ली में रहने वाले 71 वर्षीय दरीपल्ली रमैया वो शख्स हैं जिन्होंने कुछ सौ या हजार नहीं, एक करोड़ पेड़ लगाए हैं। पहले इन्हें लोग पागल कहते थे जैसे बिहार के दशरथ मांझी को कहते थे। पर आज दशरथ मांझी ‘माउंटेनमैन’ कहलाते हैं और रमैया ‘ट्रीमैन’ के नाम से सम्मान पाते हैं। लोगों को इनके काम की अहमियत तब पता चली जब आज ग्लोबल वार्मिंग पर देश-दुनिया में मंथन हो रहा है। इनके अद्भुत कार्य को देखते हुए भारत सरकार ने इन्हें पद्मश्री अवार्ड से नवाजा है, तो एकेडमी ऑफ यूनिवर्सल ग्लोबल पीस ने डॉक्टरेट की उपाधि दी है।

रमैया को पेड़-पौधों के प्रति ये लगाव अचानक नहीं हुआ। पर्यावरण प्रदूषण के चलते जब उनका मन विचलित होने लगा तब उन्होंने अपने इस अनोखे अभियान की शुरुआत की। वे जेब में बीज और साईकिल पर पौधे रखकर जिले भर में घूमते और जहां भी खाली जमीन दिखती वहां पौधे लगा देते। आपको आश्चर्य होगा कि इन्होंने अपनी तीन एकड़ जमीन इसलिए बेच दी थी कि वे उन पैसों से बीज और पौधे खरीद सकें। पेड़ों के प्रति उनका प्रेम केवल उन्हें लगाने तक सीमित नहीं, बल्कि उनका बच्चों की तरह ख्याल भी रखते हैं। अगर कोई पेड़ सूख जाए तो इन्हें उतना ही कष्ट होता है जितने एक पिता को अपने बच्चे को परेशान देखकर होता है।

रमैया केवल पेड़-पौधे लगाने का जुनून ही नहीं रखते बल्कि वे वृक्षों का चलता-फिरता विश्वकोष भी हैं। वे पौधों की विभिन्न प्रजातियों, उनके उपयोग और लाभ आदि के विषय में विस्तृत जानकारी रखते हैं। उनके पास राज्य में पाए जाने वाले 600 से ज्यादा वृक्षों के बीजों का अनूठा संग्रह भी है।

हमेशा टीन की टोपी पहने, लोगों को हरियाली और पर्यावरण के प्रति जागरुक करते प्रकृति के इस कर्मठ पुत्र को हमारा नमन। और हां, क्या हम अपने भीतर रमैया का थोड़ा अंश भी नहीं पाल सकते?

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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मोदीजी, फिर टीवी पर आईए! नोटबंदी का स्याह सच भी बताईए !

दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था का तमगा हमने खो दिया। वित्तीय वर्ष 2016-17 की चौथी तिमाही में भारत की जीडीपी दर गिरकर 6.1 प्रतिशत पर आ गई, जबकि इस दौरान चीन की आर्थिक विकास दर 6.9 प्रतिशत रही। चारो तिमाही को मिलाकर यानि पूरे वित्तीय वर्ष की बात करें तो लगभग 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। पिछले साल जीडीपी दर 8 प्रतिशत थी, जबकि इस साल यह 7.1 प्रतिशत रही। जानकारों के मुताबिक अर्थव्यवस्था में इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण पिछले साल के अंत में मोदी सरकार द्वारा की गई नोटबंदी रही है।

हालांकि केन्द्रीय सांख्यिकी विभाग विकास दर में आई कमी के लिए केवल नोटबंदी को जिम्मेदार नहीं मानता। उसका कहना है कि गिरावट की कई वजहें हैं जिनमें से एक नोटबंदी भी है। वित्तमंत्री अरुण जेटली भी कह रहे हैं कि विकास की रफ्तार में आई गिरावट के लिए नोटबंदी नहीं, पूरे विश्व में जारी आर्थिक मंदी और यूपीए सरकार जिम्मेदार है। रही बात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तो वे स्पेन जाकर भारत को निवेश के लिए पहले से अधिक मजबूत बता रहे हैं। जाहिर है, कोई सच मानने को तैयार नहीं। पर नोटबंदी का स्याह सच यह है कि अगर जीडीपी की गणना में छोटे व्यवसायों और असंगठित क्षेत्रों के आंकड़े शामिल कर दिए जाएं, जिन पर नोटबंदी की सबसे ज्यादा मार पड़ी और जिन्हें हमारे देश की जीडीपी की गणना में शामिल नहीं किया जाता, तो स्थिति बद से बदतर होती दिखेगी।

देश को यह जानना चाहिए कि नोटबंदी के बाद एक कृषि को छोड़ सारे क्षेत्रों में – चाहे वो विनिर्माण हो, मैन्यूफैक्चरिंग हो या सेवा क्षेत्र – भारी गिरावट आई। कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, इस्पात, सीमेंट और बिजली जैसे बुनियादी उद्योगों की वृद्धि दर एकदम से चरमरा गई।

नोटबंदी के बाद पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि इससे जीडीपी में दो प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन के मुताबिक नोटबंदी एक भूल थी। इसके बुरे परिणामों की आशंका जताते हुए उन्होंने कहा था कि इतने बड़े निर्णय के पीछे उन्हें कोई कारण नहीं दिखता। वर्ल्ड बैंक के पूर्व अर्थशास्त्री एवं वाजपेयी सरकार में मंत्री रहे अरुण शौरी ने तो इसे पिछले 70 वर्षों में आर्थिक नीति की सबसे बड़ी भूल करार दिया था। क्या ये तमाम आशंकाएं आज सच होती नहीं नहीं दिख रहीं?

चलते-चलते एक बात और, केन्द्र सरकार ने नोटबंदी के बाद जितना कालाधन मिलने की बात कही, क्या उससे कई गुणा अधिक नुकसान जीडीपी में गिरावट से देश को नहीं हुआ? इसमें नए नोटों को छापने का खर्च मिला दें तो सोचिए नुकसान का आंकड़ा कहां तक जाएगा! और हां, नोटबंदी के कारण जो जानें गईं क्या वो कभी लौट के आएंगी? मोदीजी, आपसे करबद्ध प्रार्थना है कि एक बार फिर टीवी पर आईए और अपने ‘भाईयों एवं बहनों’ को नोटबंदी का स्याह सच भी बताईए!

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

 

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सम्पूर्ण क्रांति दिवस बनाम लालू का जन्मदिन

बिहार के दो अत्यंत महत्वपूर्ण पुल आरा-छपरा और दीघा-सोनपुर का लोकार्पण आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के जन्मदिन 11 जून को होने जा रहा है। गौरतलब है कि संबंधित विभाग (पथ-निर्माण) के मंत्री लालू के छोटे पुत्र व सरकार में उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव हैं और इसी कारण बिहार भाजपा इसका पुरजोर विरोध करने की योजना बना रही है। पार्टी का तर्क है कि क्या ये तेजस्वी की पारिवारिक संपत्ति है जिसे वो ‘पापा’ को ‘गिफ्ट’ करने पर तुले हुए हैं।

इस बाबत भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बिहार की जनता को यह बताना चाहिए कि क्या तेजस्वी ने अपने पिता को पुल ‘गिफ्ट’ करने का ऐलान उनकी सहमति से किया है। यही नहीं, लगे हाथ उन्होंने सरकार को एक बड़ी सलाह भी दे डाली कि इन दोनों पुलों का लोकार्पण लोकनायक जयप्रकाश नारायण के सम्पूर्ण क्रांति दिवस यानि 5 जून को किया जाय।

मोदी ने तंज कसते हुए आगे कहा कि विभिन्न घोटालों व विवादों से घिरे किसी शख्स के जन्मदिन पर पुलों का लोकार्पण कर सरकार बिहार की जनता को जलील न करे। तेजस्वी को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने कहा कि अगर गिफ्ट ही करना है तो वो पटना में बन रहे बिहार के सबसे बड़े मॉल, दिल्ली की सैकड़ों करोड़ की जमीन और अपनी एक हजार करोड़ से अधिक की बेनामी सम्पत्ति गिफ्ट करें।

बहरहाल, इन दिनों मोदी हाथ धोकर लालू और उनके परिवार के पीछे पड़े हैं। उनके आरोपों का सोता जैसे सूखने का नाम ही नहीं ले रहा। आजकल ऐसा कोई मौका नहीं छूटता जब वे लालू और उनके बेटों के खिलाफ और लालू के पुत्र व प्रवक्ता मोदी के खिलाफ आग न उगलते हों। लिहाजा यहां आरोप-प्रत्यारोप ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं। हां, उनकी यह बात सोचने को जरूर बाध्य करती है कि ये लोकार्पण लालू के जन्मदिन से छह दिन पहले सम्पूर्ण क्रांति दिवस पर क्यों नहीं? हां, सम्पूर्ण क्रांति, पिछले तीन दशकों में बिहार की राजनीति की धुरी रहे लालू और नीतीश समेत मौजूदा दौर के कई बड़े हस्ताक्षर जिसकी उपज हैं। क्या समय बीतने पर प्राथमिकता के साथ-साथ प्रतीक भी बदल जाते हैं, और उनके मूल्य घट-बढ़ जाते हैं, सिक्कों की तरह?

जहां तक बात लालू प्रसाद यादव की है, तो बिहार की राजनीति से उनको खारिज करना संभव नहीं। पिछड़े तबकों के उभार में उनकी बड़ी भूमिका रही है, इससे भी इनकार नहीं किया जा सकता। तो क्या इसका अर्थ यह है कि उन्हें जेपी पर तरजीह दी जाए? अगर तेजस्वी ने ‘पितृप्रेम’ में ऐसा प्रस्ताव रखा भी और लालू इस सम्मान के लिए अनुपयुक्त न भी हों, तो क्या लालू का फर्ज नहीं था कि वे अपने बेटे को अधिक उपयुक्त निर्णय लेने के लिए मदद और मार्गदर्शन देते?

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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