कोविन्द की उम्मीदवारी और दलों के समीकरण

देश के सर्वोच्च पद के लिए एनडीए का उम्मीदवार बनाए जाने के ठीक बाद बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिसे राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने मंजूर कर लिया है। कोविंद की जगह पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी बिहार के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार संभालेंगे। इस बीच कोविंद ने अपने नाम की घोषणा होते ही दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व एनडीए के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की और अपना आभार जताया। यही नहीं, कोविंद बिहार के लोगों को भी धन्यवाद देना नहीं भूले।

उधर राष्ट्रपति पद के लिए कोविंद के उम्मीदवार बनते ही विपक्ष के सारे समीकरण धरे के धरे रह गए। मोदी के इस मास्टर स्ट्रोक का जवाब फिलहाल किसी दल को नहीं सूझ रहा। कांग्रेस, शिवसेना और तृणमूल कांग्रेस ने अपनी ‘नाखुशी’ जरूर जाहिर की, लेकिन कोविंद के नाम का सीधा विरोध करना उनके लिए भी कठिन है। सच यह है कि शिवसेना, जिसने इस फैसले को ‘वोटबैंक’ की राजनीति करार दिया, वो भी उस ‘महादलित’ समुदाय का विरोधी कहलाना नहीं चाहेगी, जिससे कोविंद ताल्लुक रखते हैं।

वैसे जहां तक वोटबैंक की बात है, तो कोविंद से जिस पार्टी का वोटबैंक सबसे अधिक प्रभावित हो सकता है, वो है बहुजन समाज पार्टी। मायावती की तो पूरी राजनीति ही इस वोटबैंक पर टिकी है। अब बदले हालात में वो भाजपा को चाहे लाख कोस लें, लेकिन कोविंद का विरोध करने की भूल वो चाह कर भी नहीं कर सकतीं। उनका ऐसा करना अपना वोटबैंक दांव पर लगाने जैसा होगा।

इधर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चन्द्रशेखर राव सहित कई नेताओं ने भाजपा के इस फैसले का स्वागत किया। नीतीश कुमार ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि ये मेरे लिए गर्व की बात है कि बिहार के राज्यपाल राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार हैं। हालांकि, कोविंद को समर्थन देने की बाबत उन्होंने जरूर कहा कि इसका फैसला वो पार्टी की मीटिंग के बाद करेंगे, लेकिन ये तय माना जा रहा है कि नोटबंदी की तरह इस मामले में भी वे विपक्ष से अपनी राह अलग करेंगे।

राजनीति के जानकार बताते हैं कि नीतीश कोविंद को समर्थन देकर एक तीर से कई निशाने साधना चाहेंगे। सबसे पहले तो यह कि वे ऐसा कर कोविंद से अब तक अच्छे रहे रिश्ते को और ‘प्रगाढ़’ करना चाहेंगे। दूसरा, महागठबंधन से अलग भी उनके पास एक ‘विकल्प’ रहेगा और तीसरा, महादलितों के बीच इससे ‘पॉजिटिव’ मैसेज जाएगा। कुल मिलाकर ये कि राजनीति का निराला खेल देखिए, अभी हाल-हाल तक नीतीश राष्ट्रपति चुनाव के लिए विपक्षी एकता की पहल कर रहे थे, और अब संभवत: विपक्षी दलों में से कोविंद को समर्थन देने की पहल भी वही करें।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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सचमुच मोदी के पेट में था राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार का नाम

एनडीए की ओर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के संबंध में आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने अपने अंदाज में बड़ा दिलचस्प बयान दिया था कि उनके उम्मीदवार का नाम और कहीं नहीं, नरेन्द्र मोदी के पेट में है। आज एनडीए द्वारा देश के सर्वोच्च पद के लिए अपने उम्मीदवार का नाम घोषित करते ही लालू की बात बिल्कुल सही साबित हुई। लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, मोहन भागवत, सुषमा स्वराज, सुमित्रा महाजन, द्रौपदी मुर्मू जैसे कई नाम बस कयास बनकर हवा में तैरते रहे और आज घोषणा हुई रामनाथ कोविंद के नाम की। पेशे से वकील रहे कोविंद वर्तमान में बिहार के राज्यपाल हैं। साफ-सुथरी छवि वाले, शालीन और अनुभवी व्यक्ति हैं कोविंद। राज्यपाल बनने से पूर्व दो बार राज्यसभा के सदस्य भी रह चुके हैं, लेकिन उन्हें राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया जाएगा, ये स्वयं उनके लिए भी कल्पनातीत बात रही होगी। राजनीति के जानकार बताते हैं कि उन्हें राज्यपाल भी ‘अचानक’ ही बनाया गया था और अब राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार भी वे ‘अचानक’ ही बने हैं।

बहरहाल, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने आज रामनाथ कोविंद के नाम का ऐलान किया। इससे पहले राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार तय करने को लेकर राजधानी दिल्ली में भाजपा संसदीय बोर्ड की बैठक हुई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, पार्टी अध्यक्ष अमित शाह समेत सभी बड़े नेता इस बैठक में पहुंचे। मीटिंग में सांसदों और विधायकों को मौजूद रहने को कहा गया ताकि वे उम्मीदवार के नॉमिनेशन पेपर पर दस्तखत कर सकें। करीब 45 मिनट की मीटिंग के बाद शाह और मोदी ने अकेले में बैठक की। इसके बाद ही कोविंद के नाम का ऐलान कर दिया गया।

बता दें कि 1 अक्टूबर 1945 को कानपुर देहात में जन्मे कोविंद दलित समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कानपुर यूनिवर्सिटी से बीकॉम और एलएलबी की डिग्री हासिल की। दिल्ली हाईकोर्ट में वकील रहे कोविंद 1994 में यूपी से राज्यसभा के लिए चुने गए और लगातार दो बार यानि 2006 तक राज्यसभा के सदस्य रहे। वे कई संसदीय कमिटियों के चेयरमैन भी रहे। यह भी गौरतलब है कि कोविंद ऑल इंडिया कोली समाज और भाजपा दलित मोर्चा के अध्यक्ष रह चुके हैं।

कोविंद को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाकर मोदी ने एक तीर से कई निशाना साधने की कोशिश की है। सबसे पहले तो यह कि मोदी के आभामंडल को कोविंद से दूर-दूर तक कोई ‘चुनौती’ नहीं मिल सकती। दूसरा यह कि कोविंद के दलित समुदाय से होने के कारण उनका सीधा विरोध करने से पहले हर पार्टी को कई बार सोचना पड़ेगा, यानि कि उनकी जीत सुनिश्चित। और तीसरा यह कि 2019 के चुनाव में उत्तर प्रदेश में, जहां से सबसे ज्यादा सांसद चुने जाते हैं, इससे बड़ा लाभ मिलेगा, क्योंकि कानपुर से आने वाले कोविंद के राष्ट्रपति बनने से वहां की दलित नेता मायावती की राजनीतिक धार कमोबेश कुंद जरूर होगी, जिससे भाजपा फायदे में रहेगी।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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मदर्स डे का पूरक है फादर्स डे

पिता यानि हमारे सर्जक, हमारे निर्माता, हमारे ब्रह्मा… जिनकी ऊंगलियों के इशारे से हमारी दुनिया आकार लेती है, जिनके दिए संस्कार से हमारे विचार व्यवहार में ढलते हैं, जिनकी तपस्या से हम सम्पूर्ण मनुष्य बनते हैं… और दुनिया का क्रम चलता रहता है। जिस तरह मां के लिए कहा जाता है कि ईश्वर स्वयं हर जगह नहीं हो सकते, इसीलिए उन्होंने मां को बनाया, उसी तरह पिता के लिए कहना गलत न होगा कि मां के रूप में हर जगह होकर भी ईश्वर के लिए संसार चलाना संभव न था, इसीलिए उन्होंने अपनी पूर्णता के लिए अपनी ही असंख्य प्रतिकृतियां बनाईं और उन्हें पिता का नाम दे दिया। इन्हीं पिता को समर्पित दिन है – फादर्स डे। संतान के लिए पिता के अवदान के प्रति, उनके प्रेम, संघर्ष और त्याग के प्रति श्रद्धा से सिर झुकाने का दिन। दूसरे शब्दों में मदर्स डे का पूरक दिन।

फादर्स डे की मूल परिकल्पना अमेरिका की है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक फादर्स डे सर्वप्रथम 19 जून 1909 को मनाया गया था। वाशिंगटन के स्पोकेन शहर में सोनोरा डॉड ने अपने पिता की स्मृति में इस दिन की शुरुआत की थी। इसकी प्रेरणा उन्हें मदर्स डे से मिली थी।

आगे चलकर 1916 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति वुडरो विल्सन ने इस दिन को मनाने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी। धीरे-धीरे इस दिन को मनाने का चलन बढ़ता गया और 1924 में राष्ट्रपति कैल्विन कुलिज ने इसे राष्ट्रीय आयोजन घोषित किया। इसके उपरान्त 1966 में राष्ट्रपति लिंडन जॉनसन ने इसे जून के तीसरे रविवार को मनाने का फैसला किया और 1972 में राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने इस दिन को नियमित अवकाश के रूप में घोषित किया।

माता-पिता इस धरती के साक्षात ईश्वर हैं। उन्हें सम्मान हम चाहे जिस बहाने से दें वो गलत नहीं, लेकिन अगर सम्मान केवल दिनविशेष में सिमट कर रह जाए तो ये अनैतिकता की पराकाष्ठा होगी। पर आज हो कुछ ऐसा ही रहा है। समय बीतने के साथ मदर्स डे और फादर्स डे का व्यवसायीकरण होता गया। ग्रीटिंग कार्ड और उपहार तो हमें याद रहे लेकिन इन दिनों के सार, संदर्भ और संदेश को हम भुला बैठे। आज दुनिया के लगभग हर हिस्से में ये दिन मनाए जाते हैं और विरोधाभास देखिए कि दुनिया के हर हिस्से में ओल्ड एज होम भी बढ़ रहे हैं। आज हमारे पास अपने माता-पिता के लिए वक्त नहीं, लेकिन फेसबुक और व्हाट्स एप पर ये जताने में हम सबसे आगे होते हैं कि हम उन्हें कितना चाहते हैं, हमें उनकी कितनी फिक्र है और वो हमारे लिए क्या मायने रखते हैं। आईये, इस विरोधाभास को दूर करें। माता-पिता के लिए अपने सम्मान को केवल औपचारिकता न बन जानें दें।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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ग्रीष्मावकाश के बाद कुलपति करेंगे सभी कॉलेजों का निरीक्षण

बी.एन.मंडल विश्वविद्यालय के नये कुलपति प्रो. डॉ.अवध किशोर राय ने कहा कि गर्मी छुट्टी के बाद सभी कॉलेजों का जायजा लिया जायेगा | डॉ.राय ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आखिर बिहार में ही सत्र क्यों लेट होता है अन्य राज्यों में ऐसा नहीं होता है  |

बता दें कि कुलपति ने निरीक्षण के दौरान टीपी कॉलेज के बैचलर ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन (BCA) क्लास का भी जायजा लिया | इस दौरान कुलपति ने लैब को अत्याधुनिक तरीके से सुसज्जित करने की बातें कही |

यह भी जानिए कि कुलपति डॉ.ए.के. राय ने प्राचार्य डॉ.एच.एल.एस.जौहरी को इन बिंदुओं पर जल्द कार्य करने हेतु निर्देशित करते हुए यही कहा- (1) कॉलेज में बायोमेट्रिक मशीन शीघ्र लगवाएं (2) छात्रों को ऑनलाइन नामांकन की सुविधा मुहैया कराएं (3) कॉलेज में वाई-फाई की सेवा जल्द शुरू कराएं तथा (4) लाइब्रेरी का ऑटोमेशन कराएं |

साथ ही नये माहौल से सही जानकारियां हासिल कर कुलपति ने क्या खूब बयाँ किया- पिछड़ा इलाका होते हुए भी यहां के बच्चे प्रतिभावान हैं- आईआईटी और आईएएस भी करते हैं | प्रतिभाओं की कमी नहीं; बस उसे निखारने की जरूरत है- छात्रों द्वारा नियमित क्लास आने की और शिक्षकों द्वारा मनोयोग से अंतिम घंटी तक पढ़ाने की विस्तृत चर्चाएं उन्होंने की |

यह भी बता दें कि सीसीडीसी सह डीएसडब्ल्यू डॉ.अनिल कांत मिश्रा को साथ लेकर निरीक्षण के क्रम में कुलपति डॉ.राय द्वारा शिक्षण संस्थाओं के सूनेपन पर अफसोस जाहिर करते हुए यही कहा गया- कॉलेज के शिक्षकों का वेतन डीएम से कम नहीं होता है……… कमिश्नर रैंक का वेतन शिक्षकों को मिल रहा है……… जबकि जिले के विकास के लिए डीएम चौबीसों घंटे चौकन्ना रहते हैं, सजग रहते हैं और ऑन ड्यूटी रहते हैं; वहीं शिक्षकों का दायित्व सिर्फ छात्रों को पढ़ाना है…… उनके दायित्व-निर्वहन के प्रयास से ही शैक्षणिक विकास संभव है |

गिरती हुई शिक्षा व्यवस्था पर बार-बार अफसोस जाहिर करते हुए कुलपति डॉ.ए.के. राय द्वारा यह कहा जाना कि शिक्षक हर हाल में 5 घंटे समय कॉलेज में दें , कॉलेज में उपस्थित रहें……. इतना हैंडसम सैलरी ले रहे हैं तो क्या कॉलेज में उपस्थित रहना भी शिक्षकों का कर्तव्य नहीं है | उन्होंने कहा कि शिक्षा को पटरी पर लाना और सत्र को नियमित करना सबकी जिम्मेदारी है |

टी.पी.कॉलेज के विभागाध्यक्षों की बैठक में इन तमाम बातों की चर्चा एवं दिशा- निर्देश देते हुए कुलपति ने उपस्थित विभागाध्यक्षों सहित डॉ.कपिल देव प्रसाद, डॉ.एमके अरिमर्दन, डॉ.उदय कृष्ण, डॉ.शिवनंदन कुमार, डॉ.दिनेश यादव, डॉ.आर.पी.राजेश एवं अन्य कॉलेज कर्मियों की उपस्थिति में प्रधानाचार्य डॉ.एच.एल.एस. जौहरी से कहा कि नैक की मान्यता से ही मिलेगी कॉलेज को पहचान……..|

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क्या मोदी के लिए ओबामा जैसी गर्मजोशी दिखाएंगे ट्रंप ?

अपनी विदेश यात्राओं के लिए खास तौर पर चर्चा रहने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक बार फिर अमेरिका जा रहे हैं। पर ये यात्रा उनकी पिछली यात्राओं की तरह ‘चकाचौंध’ वाली नहीं होगी। इस बार वे साल 2014 के बहुचर्चित मैडिसन स्कवॉयर कार्यक्रम की तरह भारतीय मूल के लोगों से हाई-प्रोफाइल मुलाकात नहीं करेंगे। बल्कि 25 और 26 जून को राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात के दौरान भारतीय समुदाय के एक छोटे से तबके के साथ बातचीत में हिस्सा लेंगे। बताया जा रहा है कि ऐसा ‘समय की कमी’ और ‘अनुकूल वातावरण न होने’ के कारण किया जा रहा है। वैसे प्राप्त जानकारी के मुताबिक इससे पहले ह्यूस्टन में एक सामुदायिक इवेंट की योजना बनाई गई थी जिसके लिए भारतीय समुदाय के लोग खासे उत्साहित थे। लेकिन वर्तमान राजनीतिक माहौल को देखते हुए इसे टाल दिया गया।

डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद प्रधानमंत्री मोदी का ये पहला अमेरिकी दौरा है। हालांकि इससे पहले दोनों नेताओं के बीच करीब तीन बार फोन पर बातचीत हो चुकी है। विदेश मंत्रालय ने 25 जून को शुरू होने वाली प्रधानमंत्री की इस अमेरिकी यात्रा के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री मोदी 26 जून को राष्ट्रपति ट्रंप के साथ आधिकारिक बातचीत करेंगे। उनकी चर्चा पारस्परिक हित के मुद्दों पर गहरे द्विपक्षीय संबंधों और भारत-अमेरिका के बीच बहुआयामी रणनीतिक भागीदारी को मजबूत बनाने के लिए नई दिशा प्रदान करेगी।

ट्रंप और मोदी की मुलाकात के दौरान जिन मुद्दों पर बातचीत संभावित है उनमें एच-1बी वीजा का मुद्दा भी शामिल है। इस संबंध में भारत अपनी चिन्ता जता सकता है। गौरतलब है कि इस वीजा का इस्तेमाल भारतीय आईटी कंपनियां करती हैं और ट्रंप ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान इस वीजा प्रोग्राम के ‘दुरुपयोग’ को बड़ा मुद्दा बनाया था। इसके अलावा जलवायु परिवर्तन समझौता भी चर्चा के लिए एक बड़ा मुद्दा है।

बहरहाल, ओबामा शासन के दौरान मोदी और ओबामा की रिकॉर्ड आठ बार मुलाकात हुई थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वाशिंगटन का तीन बार दौरा किया था, जबकि साल 2015 में तत्कालीन राष्ट्रपति ओबामा भारत आए थे। अब जबकि दोनों देशों के संदर्भ व हालात में खासा बदलाव आ चुका है, ये देखना दिलचस्प होगा कि ट्रंप मोदी के लिए कितनी गर्मजोशी और आत्मीयता दिखाते हैं। कहना गलत न होगा कि मोदी के इस अमेरिकी दौरे पर उनके समर्थकों और विरोधियों की नज़र एक साथ टिकी होगी।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

 

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और नीतीश ने किसानों का दिल जीत लिया

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राजधानी पटना के गांधी मैदान स्थित ज्ञान भवन के अशोक कन्वेंशन सेंटर में किसान समागम का उद्घाटन किया। इस समागम का आयोजन कृषि विभाग ने राज्य के लिए तीसरा कृषि रोड मैप 2017-2022 तैयार करने के लिए किया था। बता दें कि पहला कृषि रोड मैप 2008-2012 और दूसरा कृषि रोड मैप 2012-2017 के लिए तैयार किया गया था।

शुक्रवार से शुरू हुए इस किसान समागम में राज्य के सभी जिलों से आए कृषि से संबंधित 534, पशुपालन से 75, मत्स्य से 25, वन व पर्यावरण से 25, सहकारिता से 25 एवं गन्ना से 15 किसानों द्वारा दिए गए सुझावों पर तीसरा कृषि रोड मैप तैयार किया जाएगा। रोड मैप तैयार कर लिए जाने के बाद बिहार में बीज हब की स्थापना की जाएगी ताकि किसानों को बीजों की समस्या से निजात मिल सके और राज्य में अबाध गति से कृषि का विकास हो।

किसान समागम का खास आकर्षण रहा दोपहर में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का करीब 1400 किसानों के साथ जमीन पर बैठकर खाना। नीतीश ने कृषि विभाग को इसकी व्यवस्था करने का विशेष निर्देश दिया था। राज्य भर से आए किसानों पर इसका सकारात्मक असर भी तुरत देखने को मिला। नीतीश के इस कदम से उत्साहित जमुई के एक किसान ने कहा कि एक तरफ सरकारें किसानों पर गोलियां चलवा रही हैं और दूसरी ओर नीतीश किसानों के बीच बैठकर भोजन कर रहे हैं।

इस कार्यक्रम में जुटे किसानों ने खुलकर अपनी बातें कहीं और मुख्यमंत्री उन्हें डूब कर सुनते रहे। अच्छी बात यह कि उन्होंने कृषि योजनाओं की खूबियों और खामियों दोनों को समभाव से सुना। किसानों ने जहां खूबियों को रेखांकित किया, वहीं कमियों की ओर भी इशारा किया। माहौल एकदम दोस्ताना था। यहां तक कि मुख्यमंत्री ने किसानों के साथ हंसी-ठिठोली भी की। मुख्यमंत्री के साथ इस कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव, मंत्री जय कुमार सिंह, आलोक मेहता और अवधेश सिंह तथा तमाम आला अधिकारी मौजूद रहे।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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बिहार मॉडल अपना कर चीन से आगे बढ़ेगा भारत : नीतीश

कई सौगातों के साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज सुपौल में हैं। यहां कोसी क्लब स्थित सभा स्थल से उन्होंने रिमोट द्वारा 44 योजनाओं का उद्घाटन एवं 88 नई योजनाओं का शिलान्यास किया। इसके उपरान्त विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बिहार का विकास मॉडल पूरे देश में अपनाया जाना चाहिए। बिहार मॉडल अपनाने से देश चीन से भी आगे बढ़ेगा।

शराबबंदी की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हम समाज बदलने के संकल्प के साथ काम करते हैं। शराबबंदी पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा और साथ ही शराबबंदी के बाद ऐसा ही सशक्त अभियान चलाकर समाज से बालविवाह और दहेजप्रथा को भी खत्म किया जाएगा।

कार्यक्रम में मौजूद बिहार सरकार के मंत्री जय कुमार सिंह ने सही ही कहा कि मुख्यमंत्री अभी सोशल रिफॉर्मर की भूमिका में हैं। वहीं, मंत्री अब्दुल गफूर ने कहा कि मुख्यमंत्री के विजन पर तेजी से काम हो रहा है और राज्य में विकास की कई योजनाएं चल रही हैं। कार्यक्रम में उपस्थित बिहार सरकार के ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री ने आज जिन योजनाओं का उद्घाटन किया है वे मील का पत्थर साबित होंगी। जबकि जलसंसाधन मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने कहा कि बाढ़ के पूर्वानुमान का मुख्य कार्यालय कौशिकी भवन में बनाया जाएगा। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ने आज ही वीरपुर में 54 करोड़ की लागत से नवनिर्मित कौशिकी भवन का उद्घाटन किया है।

बता दें कि उपरोक्त कार्यक्रम की अध्यक्षता राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने की, जबकि मुख्य अतिथि थे बिजेन्द्र प्रसाद यादव। वहीं विशिष्ट अतिथि थे बिहार विधान परिषद के कार्यकारी सभापति मो. हारुन एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री डॉ. अब्दुल गफूर। कार्यक्रम में आमंत्रित अन्य महत्वपूर्ण लोगों में सुपौल की सांसद रंजीत रंजन, छातापुर के विधायक नीरज कुमार सिंह, पिपरा के विधायक यदुवंश कुमार यादव, निर्मली के विधायक अनिरुद्ध प्रसाद यादव, त्रिवेणीगंज की विधायक वीणा भारती तथा सदस्य विधान परिषद नूतन सिंह, संजीव कुमार सिंह एवं डॉ. एनके यादव सहित कई गणमान्य जनप्रतिनिधि शामिल हैं। इनमें से अधिकांश की उपस्थिति कार्यक्रम में देखी गई। विभिन्न महकमों के तमाम वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी तो थी ही।

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राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान होगा 17 जुलाई को !

भारतीय गणतंत्र के राष्ट्रपति-चुनाव हेतु चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम जैदी ने निर्वाचन कार्यक्रमों का एलान करते हुए आज 14 जून को नोटिफिकेशन जारी कर दिया है |

बता दें कि नोटिफिकेशन में नसीम जैदी ने घोषणा की कि नामांकन की अंतिम तारीख 28 जून होगी और स्क्रूटनी 29 जून को | नाम वापसी की अंतिम तिथि 01 जुलाई तय की गयी है | जुलाई महीने के 17 तारीख को पूरे देश के 32 मतदान केंद्रों पर 4120 विधायकों एवं 776 सांसदों द्वारा वोट डाले जायेंगे तथा मतों की गिनती 20 जुलाई को राजधानी दिल्ली में होगी | विजयी घोषित प्रत्याशी को उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति द्वारा पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई जायेगी- 25 जुलाई को क्योंकि महामहिम राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल 24 जुलाई को समाप्त हो रहा है |

यह भी बता दें कि मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम जैदी ने उद्घोषणा की कि राजनीतिक दल अपने विधायकों एवं सांसदों को राष्ट्रपति चुनाव के बाबत व्हिप जारी नहीं कर सकता है | मतदान 29 राज्यों के विधानसभाओं, दो केंद्र शासित राज्यों (पांडिचेरी और दिल्ली) एवं एक संसद भवन यानि कुल 32 मतदान केंद्रों पर होगा- जहाँ सीक्रेट बैलेट एवं चुनाव के लिए खास निर्वाचक पेन का इस्तेमाल किया जायेगा अन्यथा वैसे वोट को अवैध माना जायेगा |

माननीय विधायकगण एवं लोकसभा-राज्यसभा के सांसदगण याद कर लेंगे कि आयोग द्वारा 17 जुलाई को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक ही वोट डालने का समय निर्धारित किया गया है | साथ ही यह भी कि कोई भी विधायक जरूरत पड़ने पर संसद भवन के मतदान केंद्र पर या संसद सदस्य किसी भी राज्य के विधानसभा परिसर स्थित मतदान केंद्र पर अपना वोट डाल सकेंगे बशर्ते उन्हें चुनाव आयोग को 10 दिन पहले इस बाबत सूचित करना होगा |

ध्यातव्य है कि राष्ट्रपति पद के लिए खड़े होने वाले प्रत्येक प्रत्याशी को 50 प्रस्तावको एवं 50 अनुमोदकों के हस्ताक्षर युक्त नामांकन पत्र जमा करने होंगे | कोई भी प्रस्तावक या अनुमोदक किसी एक ही उम्मीदवार के नामांकन पत्र पर हस्ताक्षर कर सकेगा |

मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम जैदी ने एलान किया है कि किसी को भी अपना बैलेट पेपर दिखाकर वोट डालने का अधिकार नहीं होगा | ऐसा करने पर वोट रद्द भी हो सकता है |

फिलहाल राष्ट्रपति चुनाव के बाबत नोटिफिकेशन जारी होने के बाद सियासी सरगर्मी बढ़ गई है | जहाँ एक ओर भाकपा-माले महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने राष्ट्रपति प्रत्याशी के लिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पौत्र गोपालकृष्ण गांधी के नाम का प्रस्ताव किया है वहीं दूसरी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि सर्वानुमति के लिए पहले केंद्र सरकार पहल करे- विपक्ष की तरफ से उम्मीदवार की बात तब आयेगी जब सत्ता पक्ष सर्वानुमति नहीं बना पाता है |

और केंद्र की सत्ता संभाल रही भाजपा सरकार द्वारा एक त्रि-सदस्यीय समिति गठित कर दी गई है जो अन्य दलों से बातचीत कर उम्मीदवार के नाम पर आम सहमति बनाने की हर संभव कोशिश करेगी | समिति में गृहमंत्री राजनाथ सिंह, वित्त एवं रक्षा मंत्री अरुण जेटली एवं शहरी विकास मंत्री एम वेंकैया नायडू सरीखे वरिष्ठ एवं अनुभवी नेता शामिल हैं |

यूँ तो इस बाबत सोनिया गांधी, नीतीश कुमार एवं लालू प्रसाद में बातें भी हुई हैं | विपक्षी दलों की बैठकें  भी बुलाई गई है | नीतीश द्वारा वर्तमान राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को ही विपक्ष की ओर से दोबारा प्रत्याशी बनाने की मंशा भी व्यक्त की जा चुकी है | अटकलों के बाजार में पक्ष-विपक्ष के बीच आम सहमति को लेकर बिहार फ्रंटफुट पर खड़ा दिख रहा है | तभी तो जदयू के राष्ट्रीय नेता शरद यादव को भाजपा की ओर से धर्मनिरपेक्ष छवि के प्रत्याशी दिये जाने पर किसी तरह की आपत्ति नहीं होगी- ऐसा माना जा रहा है |

बहरहाल इन तीनों नामों- प्रणब मुखर्जी, गोपाल कृष्ण गांधी और शरद यादव की चर्चाएं अटकलों के बाजार में तेजी पर है जबकि नामांकन के लिए अभी 14 दिन शेष हैं तथा सत्ता पक्ष की त्रि-सदस्यीय समिति की कोशिश अभी बाकी है……….. देखिए आगे-आगे होता है क्या ?

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जी हां, बिहार में ‘आईआईटीयन वाला गांव’ भी है !

एक तरफ जहां बिहार 12वीं में 65 प्रतिशत छात्रों के फेल होने से शर्मसार हो रहा है और साथ ही लगातार दूसरे साल रिजल्ट घोटाले का दंश झेल रहा है, वहीं ऐसे उदाहरण भी यहां मौजूद हैं जो सीने को चौड़ा और सिर को ऊंचा कर देते हैं और ये विश्वास दिलाते हैं कि क्षणविशेष में चाहे अंधेरा कितना ही घना क्यों न हो जाय, उजाले की कमी यहां न रही है और न रहेगी। चलिए आपको लिए चलते हैं गया के मानपुर प्रखंड के पटवा टोली गांव में जहां से इस साल एक नहीं, दो नहीं पूरे 20 छात्रों ने आईआईटी की परीक्षा में कामयाबी पाई है। आपको सुखद आश्चर्य होगा कि 10 हजार की आबादी वाले इस गांव से पिछले 25 सालों में 300 से ज्यादा इंजीनियर निकल चुके हैं और देश-दुनिया में बिहार का नाम रोशन कर रहे हैं। आज इस गांव को लोग बड़े फक्र से ‘आईआईटीयन वाला गांव’ कहते हैं।

पटवा टोली की ये उपलब्धि तब और बड़ी दिखेगी आपको जब आप जानेंगे कि इस गांव में ज्यादातर आबादी बुनकरों की है। इन बुनकरों की जेब में पैसे चाहे हों या न हों लेकिन उनके पास जो चीज आपको निश्चित तौर पर दिख जाएगी, वो है उनके दिल में अपने बच्चों को इंजीनियर बनाने की ललक और इसके लिए दिन-रात मेहनत करने का जज्बा।

बुनकरों के इस गांव के सुनहले सफर की शुरुआत 1992 में हुई थी, जब इस गांव के जितेन्द्र प्रसाद ने सबसे पहले आईआईटी की परीक्षा पास की। ये वो वक्त था जब पटवा टोली और आसपास के गांव आर्थिक मंदी से जूझ रहे थे और पुश्तैनी पेशे में संभावना न देख यहां के बुनकर अपने बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान देने लगे थे। जितेन्द्र प्रसाद की सफलता से उनमें उम्मीद और विश्वास की ऐसी लौ जगी कि अब हर साल यह गांव अपने होनहारों के कारण चर्चा में रहता है।

एक और अहम बात यह कि आज जबकि सिवाय अपनी सफलता और सुख के लोग अपने परिवार के अन्य सदस्यों तक का ख्याल आमतौर पर नहीं रखते, ऐसे में यहां के पूर्व इंजीनियरिंग छात्रों ने मिलकर ‘नवप्रयास’ नाम की एक संस्था बनाई है जो आईआईटी की परीक्षा देने वाले छात्रों को पढ़ाई में मदद करती है। कहना गलत न होगा कि बुद्ध की इस ज्ञानभूमि में उनका अंश आज भी मौजूद है। धर्म और आध्यात्म की दुनिया के उस इंजीनियर के खोजे ‘मध्यममार्ग’ पर चलकर आज की पीढ़ी अगर इंजीनियरिंग का झंडा फहरा रही है, तो आश्चर्य क्या है!

चलते-चलते

इस साल जेईई एडवांस्ड की परीक्षा में यहां के जिन 20 छात्रों ने सफलता का परचम लहराया है, वे हैं – सन्नी कुमार, केदार नाथ, विनित कुमार, रंजन कुमार, कृष्णा कुमार, डॉली राज, गौतम राज, रंजीत कुमार, अभय कुमार, राहुल कुमार, रौशन कुमार, चेतन कुमार, अंकित कुमार, अमर कुमार, बबलू कुमार, गोपी कुमार, अमन कुमार, सरस्वती कुमारी, परमानंद कुमार और रंजीत कुमार। ‘मधेपुरा अबतक’ की ओर से इन सबको हार्दिक बधाई! और साथ में सलाम पटवा टोली की मिट्टी को!!

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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अब मधेपुरा तक दौड़ेगी बिजली से चलनेवाली ट्रेन !

मधेपुरा के ग्रीन फील्ड रेल इंजन फैक्ट्री से 28 करोड़ रु. लागत  की 12 हजार एच.पी. वाला विद्युत रेल इंजन बनकर जबतक निकलेगा तब तक में मधेपुरा से मानसी भाया सहरसा रेल विद्युतीकरण कार्य भी पूरा कर लिया जायेगा- और उसी दिन से दौड़ने लगेंगी मानसी से मधेपुरा तक बिजली से चलनेवाली अनेक रेलगाड़ियाँ |

बता दें कि समय सीमा के अंदर सारे कार्यों को पूरा किये जाने के लिए समस्तीपुर रेल मंडल के सीनियर डीएसटीई अभिषेक कुमार अपने  पावर ग्रिड अधिकारियों के साथ निरीक्षोपरान्त कार्य को तेजी से पूरा करने के लिए एक्शन प्लान तैयार करने में लग गये | फलस्वरूप इस रूट के सभी स्टेशनों और खण्डों का ज्वांइट सर्वे कार्य तेजी से पूरा करने का निदेश जारी कर दिया गया |

यह भी जानिए कि सीनियर डीएसटीई अभिषेक कुमार ने मधेपुरा अबतक से कहा कि मानसी यार्ड का विद्युतीकरण कार्य वर्षों पूर्व से ही क्रियाशील है | केवल मानसी-सहरसा-मधेपुरा विद्युतीकरण जोड़ने का कार्य तेजी से शुरू किया जायेगा | उन्होंने यह भी कहा कि ट्रैक लिंकिंग के बाद सिग्नलिंग का कार्य शुरु कर दिया जायेगा जबकि सिग्नल विभाग ने सारी तैयारियाँ पूरी कर ली है |

अंत में सीनियर डीएसटीई अभिषेक कुमार ने मधेपुरा अबतक से यह भी कहा कि इसी वित्तीय वर्ष में सहरसा स्टेशन वाईफाई से जोड़ दिया जायेगा | उन्होंने यह भी कहा कि वाईफाई लगाने के लिए रेल टेल से समझौता भी हो चुका है |

निरीक्षण के दौरान सीनियर डीएसटीई अभिषेक कुमार के साथ विवेक सौरभ (डीएसटीई), शशिभूषण ( वरिष्ठ प्रबंधक- एस एंड टी),  आलोक श्रीवास्तव (एडवाइजर डिजाइन, के.पी.टी.एल.),  नसीम ईकबाल (डीजीपीएम) और सीनियर टेलीकॉम इंस्पेक्टर अमित कुमार ‘सुमन’ मौजूद थे | तभी तो सहरसा के रिले रूम के मॉडिफिकेशन का कार्य भी शीघ्रातिशीघ्र शुरू कर दिया जायेगा तथा 12 महीने लगते-लगते मानसी-सहरसा-मधेपुरा रेल रूट पर कोसी अंचल के लोग बिजली से चलने वाली ट्रेनों की सवारी करने लगेंगे |

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