महिलाएं कुरीतियों को दूर करने एवं आगे बढ़ने में अव्वल !

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर जिले के अधिकाधिक प्रखंडों में विभिन्न शैक्षणिक एवं सामाजिक संगठनों द्वारा भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ रही महिलाओं को सम्मानित करने हेतु आयोजनों की झड़ी लगा दी गई |

यह भी बता दें कि सिंहेश्वर, शंकरपुर, बिहारीगंज, ग्वालपाड़ा, मधेपुरा आदि कई प्रखंडों में विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन किया गया | नन्हीं बच्चियों द्वारा झांकियां निकाली गई | ग्रामीण क्षेत्रों की जीविका दीदियाँ परिवर्तन की वाहक बनी- “जहां नारी की पूजा होती है, वहीं देवता बास करते हैं” |

इस अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर जहां मधेपुरा के हॉली क्रॉस स्कूल में आयोजित बालिका जागरूकता कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्राचार्या डॉ.वंदना कुमारी ने बालिकाओं को शिक्षित बनाने पर बल दिया और माया विद्या निकेतन की प्राचार्या चंद्रिका यादव द्वारा इस अवसर पर समाज में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को सम्मानित किया गया वहीं कोशी वूमेन डिग्निटी फोरम की अध्यक्षा डॉ.शांति यादव ने कहा कि नारी अब अबला नहीं रही, बल्कि वह हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही है |

ऐसी ही महिला विदुषियों की रचनात्मक भावनाओं के कारण अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जहाँ राज्य के माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा महिलाओं को राशन दुकानों में 35% आरक्षण का बड़ा तोहफा देकर सम्मानित किया गया वहीं महामहिम राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी द्वारा घर-परिवार एवं पिता मो.इस्माइल की इच्छा के विरुद्ध प्रथम महिला डीजल इंजन चालक यानि 45 वर्षीया मुमताज काजी को राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया |

बता दें कि इस अवसर पर मधेपुरा जिला परिषद सभागार में जिले के डायनेमिक डीएम मो.सोहैल की टीम के डीपीओ (साक्षरता) सुरेन्द्र प्रसाद, उत्पाद अधीक्षक शैलेश चौधरी, प्रारंभिक काल से ही साक्षरता से जुड़े प्रो.सच्चिदानंद यादव, डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी, मुरलीधर, जानेश्वर शर्मा, सुमित कुमार सोनू सहित जीविका की दीदीयों एवं जिप के उपाध्यक्ष रघुनंदन दास आदि की उपस्थिति में जिला परिषद अध्यक्षा श्रीमती मंजू देवी की अध्यक्षता में जिप सभागार में ‘नशामुक्ति’ पर संगोष्ठी आयोजित की गयी |

जहां जिप अध्यक्षा मंजू देवी ने अपने संबोधन में यही कहा कि शराब बंदी से खुशहाली आई है वहीं उपाध्यक्ष रघुनंदन दास ने कहा कि शराबबंदी से महिलाओं पर हो रहे अत्याचार में कमी आयी है और टी.पी. कॉलेज के पूर्व प्राचार्य व अर्थशास्त्री प्रो.सच्चिदानंद यादव ने अपने संबोधन में यही कहा कि शराब बंदी से आर्थिक सुधार का श्रीगणेश हुआ है तथा नशा बंदी लागू हो जाय तो आर्थिक सुधार को पंख लगने में देर नहीं लगेगी | समाज के विकास में महिलाएं बराबर की भागीदारी निभायेगी |

इसके अलाबे शिक्षा विभाग के डी.पी.ओ. सुरेन्द्र प्रसाद ने जहां समाज और राष्ट्र-निर्माण में महिलाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया वहीं उत्पाद अधीक्षक शैलेश चौधरी ने कहा कि आधी आबादी के पीछे रहने से समाज का कभी भी समग्र विकास नहीं हो सकता है |

आरंभ में मुरलीधर के कला जत्था की टीम द्वारा अतिथियों के लिए जहां स्वागतगान प्रस्तुत की गयी वहीं अंत में समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने विस्तार से महिलाओं के आत्मनिर्भर एवं सफल होने के बाबत- एवेरेस्ट पर एक ही वर्ष में दो बार भारतीय तिरंगा फहराने वाली विश्व की प्रथम महिला पद्मश्री संतोष यादव एवं नेत्रहीन दिव्यांग कंचन गावा आदि की कहानियाँ सुनाई ताकि आधी आबादी का घर-परिवार और समाज मजबूत हो सके | डॉ.मधेपुरी ने जीविका दीदीयों को अपने अतीत को याद करने की सीख देते हुए यही कहा कि पुरुष को जब भी ज्ञान, शक्ति और संपत्ति की जरूरत पड़ी तो वह सरस्वती, दुर्गा और लक्ष्मी के शरण में शीश झुकाते रहे | अंत में कला जत्था के कलाकारों द्वारा  प्रसाद वितरण के साथ धन्यवाद ज्ञापित किया गया |

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जब सारे जीत रहे हैं तो हार कौन रहा है ?

पांच राज्यों के चुनाव खत्म होने के बाद अब सरगर्मी है एग्जिट पोल की। सारे दल और उनके नेता-प्रवक्ता अपनी सरकार बनते देख और दिखा रहे हैं। हारने का तो कोई नाम ही नहीं ले रहा। अब जब सब जीत ही रहे हैं तो हार कौन रहा है? एक बड़ा प्रश्न है ये जिसका जवाब हमारी भोली जनता हर चुनाव में ढूंढ़ती है पर उनके हाथ कुछ नहीं आता। न जाने वो कब समझेगी कि जीते चाहे जो दल, हर बार हारती वही है।

बहरहाल, तमाम एग्जिट पोल का निचोड़ निकाल कर देखें तो भाजपा नि:संदेह फायदे में है। एक पंजाब को छोड़कर, जहां कांग्रेस और आप की टक्कर है और उसे मुंह की खानी पड़ रही है, बाकी राज्यों में वो सबसे बड़े दल के रूप में उभर रही है। पर जनाब, मणिपुर, गोवा और उत्तराखंड पर नज़र किसकी है, सांसे तो सबकी रोक रखी है उत्तर प्रदेश ने। एग्जिट पोल के बाद यहां की जो तस्वीर सामने आ रही है, उसके मुताबिक भाजपा पहले, सपा-कांग्रेस गठबंधन दूसरे और बसपा तीसरे स्थान पर है। न्यूज़ 24 और आजतक के मुताबिक भाजपा लगभग 300 सीटें जीतकर सरकार बनाने जा रही है, लेकिन शेष सारे चैनल भाजपा और सपा-कांग्रेस गठबंधन में कांटे की टक्कर बता रहे हैं और इस टक्कर में ये दोनों बहुमत के आंकड़े से दूर हैं। अगर ऐसा होता है तो फिर ‘बहनजी’ की चांदी है क्योंकि तब सरकार बनाने की कुंजी उनके हाथ में होगी।

इन तमाम कयासों के बीच कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का कहना है कि इस बार के एग्जिट पोल का हश्र बिहार जैसा होगा। बकौल राहुल उनका गठबंधन जीत रहा है। राहुल ने जहां एग्जिट पोल्स की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया, वहां सपा महासचिव रामगोपाल यादव ने तो इन्हें पूरी तरह फर्जी ही करार दे दिया। रामगोपाल ने कहा – ‘मेरे पास सूचना है कि चैनलों ने दबाव में आकर कुछ दिन पहले ऑरिजनल एग्जिट पोल्स को बदल दिया।’

वैसे इस बीच का एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है अखिलेश यादव द्वारा सेक्युलर एकता का पासा फेंकना। एग्जिट पोल में अपने गठबंधन को पिछड़ता देख उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक ताकतों को रोकने के लिए धर्मनिरपेक्ष ताकतों को एक साथ आना होगा। कहने की जरूरत नहीं कि उनका स्पष्ट इशारा मायावती की बहुजन समाज पार्टी की तरफ है। उधर बसपा का इस प्रस्ताव पर कहना है कि पार्टी पहले नतीजों का इंतजार करेगी। बाकी पार्टियों की तरह भले ही बसपा भी सारी पार्टियों के सफाये और अपनी सरकार बनने का दावा कर रही हो, लेकिन ‘आंखों ही आंखों में इशारे’ को वो भलीभांति समझ रही है।

बहरहाल, इंतजार की घड़ियां खत्म होने को हैं। सबके दावों की असलियत अगले 24 घंटों में सामने आ ही जानी है। समझदारी इसी में है कि हम नतीजों का इंतजार करें और प्रार्थना करें कि जीते चाहे जो भी, बस हमारी महान पर हर मोर्च पर बेबस जनता न हारे।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप 

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डरने और विनम्र होने में फर्क होता है, राबड़ीजी!

‘मेरे बेटे तेजप्रताप और तेजस्वी सुशील मोदी से डरने वाले हैं क्या?’ ये कहना है बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी सुप्रीमो लालू के दोनों ‘तेज’ राबड़ी देवी की मां का। दरअसल राबड़ी देवी बुधवार को विधान परिषद के मुख्य द्वार पर मीडिया से मुखातिब थीं और बिहार भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील मोदी की उस टिप्पणी पर बोल रही थीं जो उन्होंने मंगलवार को स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप यादव की सदन में अनुपस्थिति पर की थी। सुशील मोदी ने कहा था कि तेजप्रताप यादव को बांसुरी बजाने, घुड़सवारी करने और जलेबी छानने की फुर्सत है, लेकिन सदन में आने की नहीं।

गौरतलब है कि मोदी के इस बयान पर बिहार के राजनीति में तहलका मच गया है। उन्होंने लालू-राबड़ी के बड़े बेटे के कामकाज को लेकर सवाल उठाया था और विधानसभा में गैरहाजिर रहने के कारण उन्हें बर्खास्त करने की मांग की थी।

बहरहाल, मां ने तो जो कहना था कहा, जवाब देने में बेटा भी पीछे न रहा। तेजप्रताप ने सोशल मीडिया पर सुशील मोदी पर टिप्पणी करते हुए कहा कि सुशील मोदी जी लालू प्रसाद यादव के पीए रह चुके हैं और मैंने राजनीति लालू प्रसाद यादव से सीखी है। लिहाजा मुझे सुशील मोदी नसीहत न दें। पाठकों को बता दें कि छात्र राजनीति के दौरान सुशील मोदी लालू के साथ व पदेन उनके अधीन काम कर चुके हैं। लालू जिस समय अध्यक्ष (President) थे उस समय मोदी सचिव (Secretary) थे, जिसका तर्जुमा तेजप्रताप पीए (Private Assistant) कर रहे हैं।

खैर, तेजप्रताप यहीं नहीं रुके। आगे उन्होंने कहा कि जब सुशील मोदी जी जैसे लोग मुझे ट्रेनिंग की बात करते हैं तो उनकी योग्यता पर मुझे दया आती है…। इससे पहले भी तेजस्वी को मिले विवाह-प्रस्तावों के बाद मोदी द्वारा तेजप्रताप के विवाह के बारे में सवाल करने पर तेजप्रताप ने उन्हें न केवल अपने बेटे की चिन्ता करने की नसीहत दी थी, बल्कि यहां तक कह डाला था कि क्या उनका बेटा नपुंसक है?

बहरहाल, इस प्रकरण पर टिप्पणी की भी जाए तो क्या। हमलोग तो गुजर ही रहे हैं ढहते संस्कारों और बिकते विचारों के दौर में। फिर भी यह कहना पड़ेगा कि पहले तो सुशील मोदी जैसे गंभीर नेता को कोई अगंभीर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए थी। वे स्वास्थ्य मंत्री की अनुपस्थिति की बात जरूर कहते लेकिन  जलेबी छानने तक नहीं पहुंचते। और दूसरी और बेहद जरूरी बात यह कि राज्य के मुख्यमंत्री समेत कई महत्पूवर्ण पदों पर रह चुके लालू और राबड़ी को अपने बेटे को ऐसे मामलों में शह देने की बजाय विनम्रता और मर्यादा की सीख देनी चाहिए। यह न केवल उनके पुत्र के हित में होगा बल्कि उस पूरी पीढ़ी के हित में होगा जो अभी राजनीति में उतर रही है और अब भी इसमें संस्कार और विचार ढूंढ़ने की आस लगा रही है। उसे तो ‘डरने’ और ‘विनम्र होने’ का फर्क पता हो।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप 

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मधेपुरा में खुला विद्या भारती फाउंडेशन स्कूल

पूर्वी वायपास में श्री शिव होण्डा शो-रुम के पास ‘सीता सदन’ परिसर में बच्चों के लिए विद्या भारती फाउंडेशन स्कूल का शुभारंभ किया गया | समाज में कबीर के विचारों को फैलाने वाले समाजसेवी दीनेश प्रसाद यादव की अध्यक्षता में सम्मिलित रूप से दीप प्रज्वलित किया- उद्घाटनकर्ता के रूप में बिहार सरकार के पूर्व विधि मंत्री व वर्तमान विधायक (आलमनगर) श्री नरेन्द्र नारायण यादव, मुख्य अतिथि व विशिष्ट अतिथि के रुप में शहर के जाने-माने शिक्षाविद व समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी, डॉ.ब्रहमदेव प्रसाद ( प्रख्यात चिकित्सक, पूर्णिया ), प्रो.जटाशंकर प्रसाद आदि ने |

बता दें कि संरक्षक व चेयरपर्सन डॉ.गणेश प्रसाद एवं निदेशिका श्रीमती साधना प्रसाद द्वारा बच्चों को उनकी नींव-निर्माण काल में अतुलनीय स्तर की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करनेवाला एक नवीन संकल्पनायुक्त विद्या भारती फाउंडेशन स्कूल की स्थापना की गई है | यह स्कूल तत्काल स्टैंडर्ड 1 से स्टैंडर्ड 5 तक का ही होगा और प्रत्येक वर्ग में मात्र 24 बच्चे-बच्चियों का नामांकन हो पायेगा | वर्ग 3 से लेकर 5 तक के बच्चों के लिए छात्रावास की सुविधा भी उपलब्ध है |

Dr.Bhupendra Madhepuri addressing students, guardians and teachers of different schools & colleges present in the inaugural function of Vidya Bharti Foundation School, Madhepura.
Dr.Bhupendra Madhepuri addressing students, guardians and teachers of different schools & colleges present in the inaugural function of Vidya Bharti Foundation School, Madhepura.

यह भी बता दें कि उपस्थित अतिथियों, शिक्षकों एवं शिक्षाविदों के बीच माननीय उद्घाटनकर्ता एवं विशिष्ट अतिथियों द्वारा स्कूली-व्यवस्था, शिक्षक-छात्र और अभिभावकों को संदर्भित करते हुए विस्तार से संबोधित किया गया | साथ ही प्रो.त्रिवेणी प्रसाद यादव, डॉ.मनोरंजन सिन्हा, महासचिव डॉ.अशोक कुमार, डॉ.आलोक कुमार, SBI के संतोष झा, डॉ.अरुण कुमार, वार्ड पार्षद ध्यानी यादव, प्रो.विनोद कुमार सिंह, हर्षवर्धन सिंह राठौड़, प्रो.अतुल कुमार मल्लिक एवं रतन अलीना कासमी आदि ने भी मौके पर उद्गार व्यक्त किया |

इस अवसर पर मुख्य रूप से डॉ.मधेपुरी ने यही कहा कि जब मधेपुरा 1845 में अनुमंडल बना था तो 50 वर्षों के बाद ही एक स्कूल की स्थापना हुई थी और आज यहां बच्चों के लिए 50 स्कूल्स पूर्व से चल रहे हैं | डॉ.मधेपुरी ने कहा कि यहाँ तब तक स्कूल खुलते रहना चाहिए जब तक महान स्वतंत्रता सेनानी, आधुनिक बिहार के निर्माता और बिहार के प्रथम विधि मंत्री शिवनंदन प्रसाद मंडल की संकल्पना पूरी होती न दिखे जिन्होंने कहा था- “No soul should remind uneducated on the earth”.

अंत में अध्यक्ष के निर्देशानुसार स्कूल प्रधान ने धन्यवाद ज्ञापित किया | मंच संचालन पृथ्वीराज यदुवंशी ने किया |

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बेंगलुरु में भारत की जीत की होली, ऑस्ट्रेलिया के जबड़े से छीनी जीत

बेंगलुरु टेस्ट के चौथे दिन गेंदबाजों के शानदार प्रदर्शन की बदौलत भारत ने ऑस्ट्रेलिया को 75 रनों से करारी शिकस्त दी। चार टेस्ट मैचों की सीरीज अब 1-1 से बराबर हो गई है। बता दें कि ऑस्ट्रेलिया को जीत के लिए 188 रनों की जरूरत थी और पूरी टीम 112 रनों पर ढेर हो गई। भारत की ओर से आर अश्विन ने विकेटों का छक्का लगाया, जबकि उमेश यादव ने 2 विकेट लिए।

भारत की दूसरी पारी को 274 रनों पर समेटने के बाद सीरीज में लगातार दूसरी जीत के लिए आश्वस्त लग रही ऑस्ट्रेलिया भारतीय गेंदबाजी के आगे एकदम असहाय दिखी। लगा ही नहीं कि ये वही टीम है जिसने अभी-अभी पहले टेस्ट में भारत के विजयरथ को इतने शानदार तरीके से रोका था। अपनी दूसरी पारी में ऑस्ट्रेलिया को कभी संभलने का मौका ही नहीं मिला। उसे एक के बाद एक लगातार झटके मिलते रहे। डेविड वॉर्नर (17) और मैट रेनशॉ (5) केवल 22 रन ही जोड़ पाए थे कि ईशांत शर्मा ने रिद्धिमान साहा के हाथों रेनशॉ को कैच आउट कर ऑस्ट्रेलिया का पहला विकेट गिराया। इसके बाद 42 के कुल स्कोर पर अश्विन ने वॉर्नर को एलबीडब्लू आउट किया।

वॉर्नर के आउट होने के बाद मेहमान टीम की पारी को आगे बढ़ाने उतरे कप्तान स्टीव स्मिथ (28) और शॉन मार्श (9) ने तीसरे विकेट के लिए 25 रन जोड़कर टीम को संभालने की कोशिश की, लेकिन उमेश यादव ने 15वें ओवर की अंतिम गेंद पर स्मिथ को एलबीडब्लू कर पवेलियन का रास्ता दिखा दिया। स्मिथ के बाद उमेश ने शॉन को टिकने नहीं दिया और 74 के कुल योग पर वे भी एलबीडब्लू हो गए।

इसके बाद का काम अश्विन ने पूरा किया। मिशेल मार्श (13) को उन्होंने सस्ते में निबटाया, मैथ्यू वेड (0) को खाता तक नहीं खोलने दिया और चाय के बाद मिशेल स्टार्क को बोल्ड कर चलता किया। अब तो बस औपचारिकता ही शेष थी। ऑस्ट्रेलिया की ढहती पारी फिर नहीं की नहीं संभली।

चलने से पहले भारत की दूसरी पारी में चेतेश्वर पुजारा (92), आजिंक्य रहाणे और लोकेश राहुल (51) की शानदार बल्लेबाजी की चर्चा न करें तो ज्यादती होगी। ये ही वे तीन कारीगर थे जिन्होंने जीत की जमीन तैयार की। और हां, ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी में रविन्द्र जडेजा ने अपनी लाजवाब गेंदबाजी से जिस तरह कहर बरपाया उसे आप कैसे भूल सकते हैं!

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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मुख्यमंत्री की लड़ाई में कूदें पर अपना कद न भूलें प्रधानमंत्रीजी!

बसपा सुप्रीमो मायावती ने उत्तर प्रदेश में हो रहे चुनाव के सातवें चरण का प्रचार खत्म होने से पहले भाजपा और मोदी-शाह की जोड़ी पर जमकर हमला बोला है। खासकर काशी में प्रधानमंत्री के रोड-शो पर उन्हें आड़े हाथों लेते हुए मायावती ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी अब अपनी पार्टी की तरफ से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद के अघोषित दावेदार बन गए हैं। बकौल मायावती प्रधानमंत्री ने इस हद तक प्रचार में उतर कर लोकतांत्रिक मर्यादाओं को तोड़ने का काम किया है।

बहरहाल, मायावती का दावा है कि बसपा को छठे चरण के चुनावों के बाद ही बहुमत मिल चुका है। उनकी मानें तो भाजपा और सपा-कांग्रेस गठबंधन में अब दूसरे-तीसरे स्थान की लड़ाई है। मायावती ने कहा कि भाजपा को पता था कि उनकी सरकार नहीं बनने जा रही है, इसलिए नोटबंदी का फैसला कर धन बटोरने में जुट गए। भाजपा को ही नहीं बल्कि सपा-कांग्रेस गठबंधन को भी पता चल चुका है कि वे चुनाव हार चुके हैं।

बसपा सुप्रीमो ने कहा कि भाजपा यूपी चुनाव को 2019 के लोकसभा चुनाव से जोड़कर देख रही थी। वो इसे लोकसभा का मुद्दा बनाकर पूरे देश में ले जाने का मंसूबा बांध रही थी, जो पूरा नहीं होने जा रहा। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को प्रधानमंत्री मोदी का चेला बताते हुए उन्होंने कहा कि गुरु-चेले ने मिलकर इस चुनाव को साम्प्रदायिक रंग देने की भी कोशिश की, जो सफल नहीं हो पाई।

अब जबकि ‘हमाम’ में बड़े-छोटे सारे दल और सारे बड़े-छोटे नेता नि:संकोच ‘नंगे’ हैं और सबकी भाषा, शैली और अभिव्यक्ति एक-सी हो चली है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन किस पर कितना ‘कीचड़’ उछाल रहा है। इसीलिए मायावती ने प्रतिद्वंद्वी दलों को लेकर जो दावे किए हैं या उन पर जो आरोप लगाए हैं उसको बहुत तवज्जो देने की जरूरत नहीं। लेकिन हां, प्रधानमंत्री मोदी (भाजपा के नेता मोदी नहीं) को लेकर उन्होंने जो कुछ कहा है उस पर गंभीर मंथन जरूर होना चाहिए।

देखा जाय तो नरेन्द्र मोदी यूपी चुनाव में ठीक उसी अंदाज में कूदे हैं जैसे बिहार चुनाव में कूदे थे। बिहार में उन्होंने वैसी ‘शालीनता’ और ‘संयम’ का परिचय नहीं दिया था, जो उन जैसे कद के प्रधानमंत्री से अपेक्षित था। बिहार में उन्होंने रैलियों की झड़ी लगा दी थी, यूपी में भी उन्होंने यही किया। वहां वे जिले-जिले तो पहुंचे ही, दो कदम आगे बढ़कर गली-कूचे तक जाने पर आमादा हो गए। राहुल, अखिलेश और मायावती से वे उन्हीं के तौर-तरीके और उन्हीं की कद-काठी में लड़ते दिखे जो सर्वथा अशोभनीय था। आज अगर मायावती उन्हें मुख्यमंत्री पद का अघोषित उम्मीदवार बताने पर उतर आई हैं तो इसके कारण वे स्वयं हैं। अगर अपने कद का भान आप स्वयं न रखें तो लोग आपके जूते में अपने पांव घुसेरेंगे और आप कुछ नहीं कर पाएंगे, प्रधानमंत्रीजी!

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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विधान पार्षद संजीव हैट्रिक की राह पर……!!

चुनाव की तिथि 9 मार्च आने में अभी 3 दिन बांकी है और कोसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से खड़े त्रिदेवों- डॉ.संजीव कुमार सिंह, प्रो.जगदीश चन्द्र और नीतेश कुमार- में से किसी एक को विधान पार्षद चुनने के बाबत अभी से ही शिक्षक मतदाताओं के बीच चुनावी सरगर्मी परमान चढ़ने लगी है । इस चुनाव में 14 जिले (यानी 65 विधानसभा अथवा 12 लोकसभा क्षेत्र) में फैले 157 मतदान केंद्रों पर कुल 14 हज़ार 40 शिक्षक मतदाताओं द्वारा 9 मार्च को प्रातः 8:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक अपने मताधिकार का प्रयोग किया जायेगा ।

यह भी बता दें कि स्कूल, कॉलेज एवं विश्वविद्यालय के सभी मतदातागण अपने वर्तमान विधान पार्षद सह प्रत्याशी डॉ.संजीव कुमार सिंह की जीत सुनिश्चित करने के लिए आपस में चर्चाएं शुरु कर दी हैं । तभी तो किसी महाविद्यालय के प्राचार्य को अपने यहाँ के मतदाता शिक्षकों से यह कहते हुए सुना जा रहा है कि वोट के दिन आधार कार्ड, वोटर आईकार्ड, पेन कार्ड आदि में से कोई ‘एक’ साथ में रख लेना है तो सामने खड़ा कोई मतदाता शिक्षक बोलता है- सर ! मेरे साथ तो ड्राइविंग लायसेंस हमेशा रहता है । लगे हाथ तीसरा मतदाता शिक्षक ऊंची आवाज में कह उठता है- सावधान ! मतदान कक्ष के भीतर अपनी कलम का प्रयोग कोई नहीं करेगा बल्कि चुनाव आयोग द्वारा वहाँ रखी गई ‘कलम’ से ही संजीव कुमार सिंह या अन्य नाम के आगे प्रथम वरीयता का मत [।] यूँ अंकित करना होगा ।

चारों ओर यह भी चर्चा है कि वर्तमान विधान पार्षद डॉ.संजीव कुमार सिंह को दो तिहाई से अधिक मतदाताओं ने जहाँ हैट्रिक लगाने के लिए खुलकर हामी भरी है वहीं जीत के फासले का नया रिकॉर्ड बनाकर मतदाताओं के मनोबल को ऊंचाई प्रदान करने हेतु संजीव ने पूरी ताकत झोंक दी है ।

लोकतांत्रिक क्षरण के इस हालिया दौर में भी प्रत्याशी संजीव कुमार सिंह को अपने शिक्षकों अथवा रिटायर्ड अध्यापकों-प्राध्यापकों के दुख-दर्द में पिता शारदा प्रसाद सिंह की तरह संजीवनी बनकर हर परिस्थिति में खड़ा देखकर डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने शारदा बाबू की तरह उसे भी आदि से अंत तक सहयोग देते रहने का निश्चय कर लिया है ।

बता दे कि यह वही डॉ.मधेपुरी हैं जो बीएन मंडल विश्वविद्यालय में विकास पदाधिकारी, परीक्षा नियंत्रक, कुलानुशासक आदि अन्य कई महत्वपूर्ण पदों पर वर्षों कार्यरत रहकर सातो जिला मधेपुरा, सहरसा, सुपौल, पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज, अररिया के कॉलेज शिक्षकों के बीच अपनी निष्ठा एवं सत्कर्मों की बदौलत उनके दिलों में जगह बना ली और संजीव की जीत के लिए विगत दो चुनावों में विनम्र आह्वान किया तो शिक्षक मतदाता बन्धुओं ने जीत भी दर्ज कराई ।

वर्तमान चुनाव प्रचार के दरमियान जब प्रत्याशी के रूप में संजीव कुमार सिंह मधेपुरा आए और डॉ.मधेपुरी के ‘वृन्दावन’ निवास पर पधारे तो बातें करते हुए मधेपुरी ने संजीव से यही कहा- “महागठबंधन में रहकर भी शिक्षकों के हित में अनुकूल निर्णय लागू कराने की दिशा में हमेशा अपनी बातें निर्भीकतापूर्वक रखें तथा अपने पिताश्री की तरह हमेशा बौद्धिक सजगता प्रदर्शित करते रहें । तभी तो  “समान कार्य-समान वेतन” के लिए किए जा रहे संघर्ष को सुप्रीम कोर्ट भी सार्थक संघर्ष कबूल किया है ।”                       

अंत में डॉ.मधेपुरी ने चलते-चलते हैट्रिक बनाने हेतु शुभाशीष देते हुए उन्हें यही जीवन-संदेश दिया- “संसार के प्रत्येक व्यक्ति पर माता,पिता एवं गुरु-ऋण के अतिरिक्त समाज का ऋण भी होता है । जो व्यक्ति राष्ट्रपथ पर कठोर कर्मयोगी बनकर कर लोकऋण चुकाता रहेगा वही विजेता बनेगा और वैसे ही व्यक्ति के जीवन में सदा फूल खिलते रहेंगे ।” विदा होते वक्त डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने भावुक होकर डॉ.संजीव कुमार सिंह के माथे पर हाथ रखते हुए बस इतना ही कहा-  कर्मयोगी पिता के यश और कीर्ति की ऊंचाइयों को  उर्ध्वगामी बनाये रखना……….!!

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सिंहेश्वर में त्रिदिवसीय श्री राम कथा का भव्य आयोजन

ऋष्य श्रृंग की पावन धरती पर एक ओर स्थानीय राम जानकी हनुमान ठाकुरबाड़ी में द्विदिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार में डायनेमिक डी.एम. मो.सोहैल द्वारा विद्वानों, शिक्षाविदों एवं कुलपतियों के बीच धर्म एवं दर्शन के बाबत यह कहा जाता है कि- किसी भी संप्रदाय के लोग क्यों न हो, उसके अंदर बैठी जीवात्मा हमेशा उसे सही सलाह देती है, सत्य से रू-ब-रू कराती है…… सत्य के रास्ते पर चलने के लिए आवाज देती है….. आत्मा की उसी “आवाज” को अनुसरण करना धर्म है……. तथा उसकी विस्तृत व्याख्या ‘दर्शन’ है |

वहीं दूसरी ओर महाशिवरात्रि के अवसर पर मवेशी हाट में त्रिदिवसीय सिंहेश्वर महोत्सव के भव्य समापन के साथ ही उसी स्थल पर त्रिदिवसीय (3-5 मार्च) संगीतमय श्रीराम कथा का भव्य आयोजन किया जा रहा है | सिंहेश्वर की गतिविधियों में सदा सहयोग करते रहने वाले हरिप्रसाद टेकरीवाल, विजय कुमार सिंह, मदन मोहन सिंह, जय प्रकाश यादव, महानंद झा, मनोज सिंह, यदुनंदन यादव, अमन सिंह, मुखिया जी पप्पुजी आदि द्वारा दीप प्रज्वलित कर आचार्य श्री सुदर्शन जी महाराज के संगीतमय श्रीराम कथा का विधिवत उद्घाटन किया गया |

बता दें कि रसमय एवं संगीतमय भक्तिकथा में आचार्यश्री सुदर्शन ने श्रीराम के मर्यादित चरित्र को वर्णन करते हुए भारत के गौरवोज्जवल अतीत की विस्तार से चर्चा की और कहा कि यदि राम जैसा बेटा चाहते हो तो पति-पत्नी को दशरथ और कौशल्या जैसा बनना होगा |

अपने संबोधन में आचार्यश्री ने कहा कि भक्ति के लिए धन-संपत्ति की कोई जरूरत नहीं होती है | भक्ति तो भाव से होती है | उसी भक्ति में अथाह शक्ति होती है | उन्होंने श्रद्धालुओं को सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की सलाह दी तथा अपनी दृष्टि और सोच बदलने की बात कही |

अंत तक आचार्यश्री सुदर्शन जी महाराज ने श्रद्धावनत श्रोताओं से यही कहा कि परिवार में आपसी प्रेम एवं भाईचारा बढ़ाने के लिए मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्शों को आत्मसात करना ही होगा | बीच-बीच में ‘आचार्यश्री’ ने राम भक्तों को श्रीराम पर आधारित भक्ति संगीत में डुबोने का काम किया |

समाप्ति पर आयोजक मंडली के सदस्य द्वय विजय कुमार व विपिन कुमार ने भक्तों को यह बताया कि शेष 2 दिनों यानी शनिवार व रविवार को आचार्यश्री अपराहन 3:00 बजे से संध्या 6:00 बजे तक प्रवचन देंगे |

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मधेपुरा कॉलेज ने रचा इतिहास, हासिल की नैक की मान्यता

कोसी जैसे पिछड़े इलाके में होने और सीमित संसाधनों के बावजूद मधेपुरा कॉलेज, मधेपुरा ने अपनी अदम्य इच्छाशक्ति से उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं, और अब जिला मुख्यालय स्थित यह पहला कॉलेज बन गया है जिसने नैक (NAAC – National Assessment & Accreditation Council) से ग्रेड हासिल किया हो। गौरतलब है कि 22 फरवरी को नैक की ओर से जारी की गई सूची में बिहार के नौ संस्थानों को ग्रेडिंग दी गई है, जिनमें मधेपुरा कॉलेज भी एक है। मधेपुरा कॉलेज को नैक ने पहले प्रयत्न में ही बी ग्रेड दिया है, जो कि अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। कॉलेज के संस्थापक प्राचार्य डॉ. अशोक कुमार इसे मधेपुरा कॉलेज के इतिहास और विकास में मील का पत्थर बताते हैं। कहने की जरूरत नहीं कि इसके साथ ही कॉलेज उच्च शिक्षा के राष्ट्रीय मानचित्र से जुड़ गया है।

मधेपुरा कॉलेज की इस सफलता के क्या मायने हैं, इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि जिन नौ संस्थानों को नैक की इस विशिष्ट सूची में जगह मिली है उसमें भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय से केवल दो महाविद्यालय हैं। पहला, बी ग्रेड हासिल करने वाला मधेपुरा कॉलेज, मधेपुरा और दूसरा अररिया कॉलेज, अररिया जिसे सी ग्रेड मिला है। बहरहाल, इन दो कॉलेजों के अतिरिक्त जिन अन्य सात कॉलेजों को नैक की ग्रेडिंग मिली है, वे हैं – सुखदेव महतो जनता महाविद्यालय (मधुबनी), खेमचंद ताराचंद कॉलेज (पूर्वी चंपारण), श्रीनारायण सिंह कॉलेज (मोतिहारी), महिला शिल्प कला भवन कॉलेज (मुजफ्फरपुर), ललित नारायण तिरहुत महाविद्यालय (मुजफ्फरपुर), डॉ. एलकेवीडी कॉलेज (समस्तीपुर) एवं कुंवर सिंह कॉलेज (दरभंगा)। नैक से मान्यता मिलने के साथ ही ये सभी कॉलेज 13वीं पंचवर्षीय योजना में फंड सहित केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा प्रदत्त कई सुविधाओं के हकदार हो गए हैं।

मधेपुरा कॉलेज की इस अभूतपूर्व उपलब्धि पर ‘मधेपुरा अबतक’ ने मधेपुरा के वरिष्ठ शिक्षाविदों से बात की। भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति, मधेपुरा के पूर्व सांसद एवं राज्यसभा में दो बार बिहार का प्रतिनिधित्व कर चुके डॉ. रमेन्द्र कुमार यादव रवि ने कहा कि मधेपुरा कॉलेज ने अपनी इस उपलब्धि से न केवल मधेपुरा बल्कि सम्पूर्ण कोसी के क्षेत्र में उच्च शिक्षा का अद्भुत प्रतिमान गढ़ दिया है। इस विश्वविद्यालय का संस्थापक कुलपति होने के नाते यह मेरे लिए विशेष गौरव का विषय है। यह महाविद्यालय इस इलाके में नई शिक्षा-क्रांति का अगुआ बने, ऐसी मेरी शुभकामना है।

प्रख्यात शिक्षाविद्-साहित्यकार एवं भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के पूर्व परीक्षा-नियंत्रक डॉ. भूपेन्द्र मधेपुरी ने ‘मधेपुरा अबतक’ से बात करते हुए बताया कि मैंने इस ‘पूत’ के पांव ‘पालने’ में ही देख लिए थे। उन्होंने कहा कि मैं इस महाविद्यालय के कई महत्वपूर्ण पलों का साक्षी रहा हूं। इस महाविद्यालय द्वारा आयोजित राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय सेमिनारों में शिरकत करते हुए मैंने एक बार नहीं कई बार कहा है कि एक दिन यह महाविद्यालय विश्वविद्यालय का स्वरूप लेगा। नैक से मान्यता हासिल करना वास्तव में उसी दिशा की ओर बढ़ा कदम है।

गौरतलब है कि नैक से मान्यता प्राप्त करने के लिए संस्थापक प्राचार्य डॉ. अशोक कुमार के नेतृत्व में कॉलेज के शिक्षकों व शिक्षकेतर कर्मचारियों ने दिन-रात एक कर कॉलेज के हर विभाग को नैक के मापदंडों के अनुरूप अपडेट किया था। विगत 6 और 7 फरवरी को कॉलेज के दो दिवसीय दौरे और निरीक्षण के लिए आई नैक की पीयर टीम कॉलेज के तमाम प्रयासों से संतुष्ट दिखी थी। अब जबकि इस कॉलेज को नैक की विधिवत मान्यता मिल गई है, कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अशोक कुमार का कहना है, “अब हमारी नैतिक और व्यावहारिक जिम्मेदारी बढ़ गई है। अब कॉलेज को न केवल नैक के ए व ए प्लस ग्रेड के लिए कार्य करना है, बल्कि भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के विकास में भी अपनी भूमिका निभानी है।”

प्राचार्य डॉ. अशोक कुमार ने कॉलेज की इस उपलब्धि के लिए कुलपति डॉ. बिनोद कुमार, कुलसचिव डॉ. केपी सिंह, सीसीडीसी डॉ. अनिलकांत मिश्रा, नोडल अधिकारी डॉ. अशोक कुमार सिंह एवं प्रॉक्टर डॉ. बीएन विवेका सहित विश्वविद्यालय के तमाम वरीय अधिकारियों के योगदान का उल्लेख करते हुए उनका आभार जताया है। साथ ही नैक के दौरे के दौरान कॉलेज की स्टीयरिंग कमिटी के कॉर्डिनेटर श्री पंकज कुमार, उपप्राचार्य डॉ. भगवान कुमार मिश्रा, दिन-रात कॉलेज की मॉनिटरिंग में लगीं गृहविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. पूनम यादव, प्रो. मनोज भटनागर, प्रो. सच्चिदानन्द सचिव, परीक्षा नियंत्रक डॉ. मुश्ताक मोहम्मद, डॉ. अमरदीप, डॉ. सोनी सहाय, डॉ. सुनील कुमार सिंह, प्रो. मणिभूषण वर्मा, प्रो. अभय कुमार, प्रो. चन्देश्वरी यादव, प्रो. ब्रह्मदेव यादव, प्रो. जयनारायण साह, प्रो. निखिलेश कुमार, बीएड प्रभारी विज्ञानानंद सिंह, आईक्यूएसी के डॉ. संजय कुमार, एनसीसी के लेफ्टिनेंट गौतम कुमार, कार्यक्रम पदाधिकारी विवेकानंद कुमार, संगीत विभाग की प्राध्यापिका भारती, एनएसएस के प्रो. बिजेन्द्र मेहता, आरती झा, प्रो. अरविंद कुमार तथा बीसीए कॉर्डिनेटर संदीप शांडिल्य समेत सभी वरिष्ठ शिक्षकों, शिक्षकेतर कर्मचारियों, पूर्ववर्ती छात्रों एवं तमाम अभिवावकों की सराहना की है।

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नोटबंदी के बाद भी भारत सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था

जी हां, नोटबंदी के बाद भी भारत सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। केन्द्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) द्वारा 28 फरवरी को जारी तीसरी तिमाही और पूरे वर्ष के अग्रिम अनुमान की मानें तो नोटबंदी की वजह से आर्थिक गतिविधियों के बुरी तरह प्रभावित होने की आशंकाएं दरकिनार हो गई हैं। सीएसओ के अनुसार चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 7 प्रतिशत रही है, जबकि पूरे वर्ष की वृद्धि का दूसरा अग्रिम अनुमान भी 7.1 प्रतिशत पर पूर्ववत रहा है। बता दें कि इससे पहले जनवरी में नोटबंदी के प्रभाव को शामिल किए बिना जारी पहले अग्रिम अनुमान में भी पूरे वर्ष की वृद्धि का यही आंकड़ा जारी किया गया था।

नोटबंदी के बाद आए जीडीपी के इन आंकड़ों से उत्साहित प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसे विरोधियों के दुष्प्रचार का करारा जवाब बताया है। यूपी की एक चुनावी रैली में उन्होंने कहा कि नोटबंदी के बाद विपक्ष के लोगों ने आर्थिक विकास चौपट होने, उद्योग-धंधे बंद होने और देश के पूरी तरह पिछड़ने का दुष्प्रचार किया था। नोबेल विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का नाम लिए बगैर उन्होंने कहा कि हार्वर्ड और ऑक्सफोर्ड के बड़े-बड़े विद्वानों ने नोटबंदी के कारण जीडीपी में दो से चार प्रतिशत गिरावट का दावा किया था लेकिन जीडीपी के ताजा आंकड़ों ने साबित कर दिया है कि ‘हार्वर्ड’ और ‘हार्ड’ वर्क में कितना फर्क है। उन्होंने कहा कि देश के ईमानदार लोगों, किसानों और नौजवानों ने जीडीपी में सुधार के जरिए ‘हार्वर्ड’ और ‘हार्ड वर्क’ वालों की सोच के बीच फर्क जाहिर कर दिया है।

कांग्रेस द्वारा इन आंकड़ों को भ्रामक और संदेहास्पद बताए जाने पर प्रधानमंत्री ने कहा कि वे कह रहे हैं कि आंकड़े कहां से आए। मैं कहता हूं कि जो आंकड़े आपकी सरकार में जहां से आते थे, इस बार भी वहीं से आए हैं। देश के ईमानदार लोगों, किसानों और नौजवानों मैं सिर झुकाकर नमन करना चाहता हूं जिन्होंने देश की विकास-यात्रा को कोई आंच नहीं आने दी। उधर वित्तमंत्री अरुण जेटली का कहना है कि अंदाजे से बोलना एक बात है और वास्तविकता दूसरी। मैं पहले भी कह रहा था कि एक्साइज, वैट और कर संग्रह के आंकड़े बता रहे हैं कि अर्थव्यवस्था पर नोटबंदी का बुरा असर नहीं पड़ा है।

 ‘मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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