दो शहीद के परिवारों की अद्भुत दास्तां

उड़ी के शहीद गया के सुनील कुमार विद्यार्थी की तीन बेटियों ने अपने पिता की तरह सैनिक धर्म निभाया। मानवीय संवेदना के मोर्चे पर उनका ये युद्ध उनके पिता के युद्ध से कम मुश्किल नहीं था। जरा सोचकर देखिए। फोन पर पिता के शहीद होने की ख़बर आ चुकी है। माँ बिलख रही है। घर क्या पूरे मुहल्ले में मातम छाया हुआ है। पर अपने पिता की ये तीन लाडलियां खुद को तैयार करती हैं। आँसू इनके भी नहीं रुक रहे। हिचकियां ले-लेकर रो रही हैं तीनों। छलकती आँखों से प्रश्नपत्र तक धुंधले दिखेंगे, पर इन्हें स्कूल जाना है। आज इनकी परीक्षा जो है। इन्हें अपने पिता से किया वादा जो निभाना है। इन्हें भी आर्मी ऑफिसर जो बनना है।

शहीद सुनील की तीनों बेटियां डीएवी पब्लिक स्कूल (मेडिकल यूनिट) में पढ़ती हैं। बड़ी बेटी आरती कक्षा आठ, दूसरी बेटी अंशु कक्षा छह और तीसरी अंशिका कक्षा दो में पढ़ती है। सुनील अपनी तीसरी बेटी का नामांकन कराने इसी साल जून में आए थे और स्कूल प्राचार्य से कहा था – दो बेटियां आपके स्कूल में पढ़ रही हैं, तीसरी का भी नामांकन कर लीजिए। आपकी छांव में तीनों बेटियां पढ़ेंगी। इन्हें आर्मी ऑफिसर्स बनना है। कल तीनों की परीक्षा थी और छोटी-सी उम्र में आर्मी का अनुशासन जैसे उनकी रगों में दौड़ रहा था। तभी तो उनकी हिचकियों से बेंच भले हिलती रही, वे अपने कर्तव्य-पथ से नहीं हिलीं। तीनों ने परीक्षा पूरी की और फिर घर आकर माँ से लिपटकर खूब रोईं। माँ, जिसे अपनी सुध भले ही ना हो उस वक्त लेकिन अपने पति का कहा निभाने के लिए बेटियों को स्कूल जाने को कहना नहीं भूली थी।

आँसू, श्रद्धा और प्रेरणा से लबालब कर देने वाली एक और कहानी है उड़ी के एक और शहीद कैमूर के राकेश कुमार की पत्नी किरण की। शहीद राकेश का शव आज सुबह दस बजे उनके पैतृक गांव लाया गया तो जैसे उनके अंतिम दर्शन को पूरा कैमूर उमड़ पड़ा। उनका शव गांव के मध्य विद्यालय परिसर में रखा गया। परिजनों के चीत्कार से पूरा वातावरण जैसे रो उठा। शहीद राकेश का पार्थिव शरीर लाने वाले साथी जवान भी अपने आँसू नहीं रोक पा रहे थे। पर उस शहीद की पत्नी के पहुँचते ही माहौल और गमगीन होने की बजाय वीरता और देशभक्ति से ओतप्रोत हो गया।

जी हाँ, उस वीरांगना ने अपने पति के अंतिम दर्शन किए। उनको सलामी दी। रोती-बिलखती सास से कहा – मम्मी आप रोएंगी तो हम भी कमजोर पड़ जाएंगे। फिर एक साल के बेटे हर्ष से कहा – बेटे, पापा पर फूल चढ़ाओ। इतना ही नहीं, शव के सिरहाने खड़ी किरण ने वहाँ मौजूद सैनिकों से बड़ी दृढ़ता के साथ कहा – आपलोग प्रधानमंत्री मोदी तक मेरा यह संदेश जरूर पहुँचा दें कि वे पाकिस्तान को ऐसा सबक सिखाएं कि दुनिया के नक्शे से उसका नामोनिशान मिट जाए। बहू की हिम्मत देख शहीद के माता-पिता भी शोक से बाहर निकल जवानों से अपने बेटे की मौत का बदला लेने और सरकार तक पाकिस्तान पर कार्रवाई करने का पैगाम पहुँचाने को कहा। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं होने पर वे आमरण अनशन पर बैठेंगे। अन्त में, गगनभेदी नारों के बीच शव को बक्सर रवाना किया गया, जहाँ एक साल के बेटे ने अपने पिता को मुखाग्नि दी।

Dead Body of Shaheed Rakesh Kaimur
Dead Body of Shaheed Rakesh Kaimur

 ‘मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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और अब पाकिस्तान ने दी एटमी हमले की धमकी

बेशर्मी की पराकाष्ठा देखिए, इधर उड़ी पर आतंकी हमले के बाद मिले सबूत चीख-चीख कर बोल रहे हैं कि इसमें पाकिस्तान की संलिप्तता थी और उधर उसके विदेश विभाग के प्रवक्ता इस हमले की निन्दा कर रहे हैं। हमले के बाद जारी बयान में पाकिस्तानी प्रवक्ता नफीस जकारिया ने कहा कि भारत ने हमले के तुरंत बाद इसके लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहरा दिया, जबकि इसकी कोई जांच भी नहीं की गई। हम इस दावे को खारिज करते हैं। साथ ही पाकिस्तान इस तरह को हमलों की निन्दा करता है।

खैर, ये पाकिस्तान का पुराना राग है, जो वो अपनी हर कायराना हरकत के बाद अलापता है। लेकिन दोमुंहेपन की हद ये है कि उसके प्रवक्ता जहाँ इन हमलों की ‘निन्दा’ कर रहे हैं, वहीं उसके विदेश मंत्री भारत पर एटमी हमले की धमकी दे रहे हैं। जी हाँ, पाकिस्तान के रक्षामंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक साक्षात्कार में कहा है कि भारत द्वारा हमला किए जाने की स्थिति में हम अपने रणनीतिक हथियार परमाणु बम के इस्तेमाल से भी नहीं चूकेंगे। गौरतलब है कि यह साक्षात्कार शनिवार रात को उड़ी हमले से ठीक पहले रिकार्ड किया गया था।

इस साक्षात्कार में पाकिस्तान के रक्षामंत्री से भारत के साथ तनावपूर्ण रिश्तों के मद्देनज़र निकट भविष्य में युद्ध की आशंका पर सवाल पूछा गया था जिस पर उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि तुरंत हमले की आशंका है। हालांकि, अल्लाह ने कुरान में कहा है कि अपने घोड़े हमेशा तैयार रखो। इसलिए हम हर समय बाहरी शक्तियों से अपनी आज़ादी के खतरे के प्रति हमेशा तैयार रहते हैं। इसके आगे उन्होंने जोड़ा कि दुनिया परमाणु ताकत में पाकिस्तान की ‘बादशाहत’ को स्वीकार करती है और साथ ही बड़ी निर्लज्जता से ये भी कह डाला कि हमारे पास ‘जरूरत से ज्यादा’ परमाणु हथियार हैं।

बहरहाल, उड़ी पर हुए घिनौने हमले की निन्दा दुनिया भर में हो रही है। अमेरिका, ब्रिटेन समेत तमाम देशों ने बड़े कड़े शब्दों में इस हमले की निन्दा की और भरोसा दिलाया कि आतंकवाद के खिलाफ जंग में वे हर कदम पर नई दिल्ली का साथ देंगे। परीक्षा की इस घड़ी में आपसी मतभेदों को भूल हमारे देश के तमाम राजनीतिक दल भी एकजुट हैं। सवा सौ करोड़ भारतीय बड़ी अपेक्षा से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर देख रहे हैं। सच यह है कि आतंक के खिलाफ जंग आखिरी दौर में है और अब बात ‘ट्वीट’ से नहीं पाकिस्तान को ‘दो टूक’ जवाब देने से बनेगी।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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उड़ी की शहादत में सबसे आगे थे बिहार के बेटे

आज सुबह जम्मू-कश्मीर के उड़ी में सेना मुख्यालय पर हुए आतंकी हमले में सेना के 17 जवान शहीद हो गए। प्राप्त जानकारी के मुताबिक शहीद जवानों में 15 बिहार रेजिमेंट और 2 डोगरा रेजिमेंट के हैं। बिहार रेजिमेंट के शहीद 15 जवानों में से 6 बिहार के सपूत हैं। इन शहीदों को लेकर जहाँ बिहार सहित पूरे देश में गर्वमिश्रित शोक की लहर है, वहीं लोग इनके बारे में जानने को भी आतुर हो रहे हैं। इनके नामों की सूची अभी जारी नहीं की गई है। ‘पाकिस्तान-प्रायोजित’ इस घटना को चार आतंकियों ने अंजाम दिया था जिन्हें हमारे जांबाज जवानों ने मार गिराया।

इस घटना में मारे गए आतंकवादियों के पास से कई ऐसी चीजें मिली हैं जिन पर पाकिस्तान की मार्किंग है यानि वे चीजें पाकिस्तान में बनी हैं। सबूतों के आधार पर माना जा रहा है कि इन आतंकियों का संबंध ‘जैश-ए-मोहम्मद’ से है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस नाजुक मौके पर ट्वीट कर देश को भरोसा दिलाया है कि इस घिनौने हमले के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

बता दें कि पिछले 26 सालों में यह आर्मी बेस पर हुआ सबसे बड़ा हमला है। इस घटना से आहत देश के गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने आज स्पष्ट और कड़े शब्दों में कहा कि पाकिस्तान एक आतंकी देश है और उसकी पहचान करके उसे अलग-थलग कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि मैं बेहद निराश हूँ कि पाकिस्तान आतंकवाद और आतंकी संगठनों को लगातार मदद दे रहा है।

इस घटना के बाद जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी पाकिस्तान पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि इस तरह के वाकयों से राज्य में युद्ध जैसे हालात बनाने की कोशिश की जा रही है। वहाँ के उपमुख्यमंत्री निर्मल सिंह का भी कहना है कि हमारे इलाकों में तनाव पैदा करने के लिए अलगाववादी, आतंकी और पाकिस्तान मिलकर भारत के खिलाफ साजिश कर रहे हैं।

बहरहाल, इस हमले के बाद बिहार के सभी आर्मी कैंप की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि आतंकी हमले के खिलाफ केन्द्र सरकार कड़ी कार्रवाई करे, मैं आतंक के खिलाफ केन्द्र सरकार के समर्थन में खड़ा हूँ। वहीं, आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव आतंकियों के इस कायराना हमले के बाद केन्द्र सरकार से कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए प्रधानमंत्री मोदी के ‘56 इंच के सीने’ को ‘खोजते’ दिखे।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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मधेपुरा जिले में रोलप्ले एवं लोकनृत्य प्रतियोगिता आयोजित

स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग कार्यक्रम के तत्वावधान में 15 सितंबर को केशव कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय में जिला स्तरीय रोलप्ले एवं लोकनृत्य प्रतियोगिता का भव्य आयोजन डी.ई.ओ. बद्री नारायण मंडल की अध्यक्षता में किया गया  जिसमें उन्होंने कहा कि वर्तमान टॉपिक छात्रों की जीवन शैली से जुड़ी हुई है | श्री मंडल ने किशोरावस्था में हो रही चुनौतियों से निपटने की बातें कही |

जहां इस अवसर पर डी.पी.ओ.(माध्यमिक) सुरेन्द्र प्रसाद ने कहा कि विद्यालयों में दैनिक जीवन से जुड़े टॉपिक सहजता से छात्र-छात्राओं के बीच आ खड़े होते हैं वहीं जिला समन्यवक कृष्ण कुमार व अन्य गणमान्यों ने स्कूली गतिविधियों का विश्लेषण करते हुए कहा कि किशोरावस्था के आकर्षण व स्वस्थ संबंध तथा अन्य जोखिम भरे चुनौतियों के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के नशाखोरी के कुप्रभावों से संबंधित विषयों पर जिले के कई विद्यालयों की छात्राओं ने रोलप्ले नें भाग लिया जिसमें केशव कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय की छात्राएं अंजलि, पायल, कोमल, नेहा एवं स्नेहलता आदि की टीम ने प्रथम स्थान प्राप्त किया |

मौके पर लोकनृत्य प्रतियोगिता में मुरलीगंज के बी.एल. स्कूल की छात्रा डिंपल, नमिता, राखी, प्रिया कुमारी एवं खुशबू कुमारी आदि की टीम ने कन्या भ्रूण हत्या, पर्यावरण-रक्षा तथा किशोरावस्था की कौतूहल भरी चुनौतियों से लैस विषयों पर आकर्षक नृत्य की प्रस्तुति की और प्रथम स्थान प्राप्त किया |

यह भी बता दें कि द्वितीय स्थान पर योगेंद्र उच्च विद्यालय मुरहो तथा तृतीय स्थान पर प्रोजेक्ट कन्या उच्च विद्यालय सिंहेश्वर की छात्राओं की टीम रही |

मौके पर प्राचार्य नवल प्रसाद, यतीन्द्र कुमार मुन्ना, मो.हुसैन अहमद, कैलाश यादव, अमृता कुमारी आदि मौजूद थे | अंत में केशव कन्या की प्राचार्या विभा कुमारी ने धन्यवाद ज्ञापित किया |

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मधेपुरा जिले में आदिवासी भित्ति चित्र-कला होगी पुनर्जीवित

मिथिला एवं मधुबनी पेंटिंग की तरह आदिवासियों की भित्ति चित्रकला को कागज एवं कैनवास पर लाकर जनजातीय समाज को गरीबी एवं बेरोजगारी के संकट से उबारने के प्रयास में लगे हैं- जिले के डायनेमिक डी.एम.  मो.सोहैल और ग्वालपाड़ा प्रखंड की सीडीपीओ दर्शना कुमारी |

यह भी बता दें कि जिले के ग्वालपाड़ा प्रखंड में गुरुवार को नवज्योति सामाजिक केंद्र एवं आदिवासी कला केंद्र के सौजन्य से आदिवासी बालिकाओं के बीच बतौर वर्कशॉप एवं प्रतियोगिता का आयोजन किया गया | प्रतियोगिता के आरंभ में प्रखंड प्रमुख सरिता कुमारी, केंन्द्र द्वय की संयोजिकाएं सिस्टर लिली व अंकिता अमन एवं सीडीपीओ दर्शना कुमारी सहित कई गणमान्यों ने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि आदिवासी समाज के लोग फिलहाल जिस गरीबी और बेरोजगारी के संकट से संघर्ष कर रहे हैं उन्हें मधुबनी एवं मिथिला पेंटिंग प्रकाशस्तंभ बनकर रास्ता दिखाने का काम करता रहेगा |

फिलहाल इस प्रथम प्रयास में आयोजित प्रतियोगिता में लगभग 5 दर्जन प्रतिभागियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई | कार्यक्रम को कंचन ने संचालित किया | आगे सफल प्रतियोगियों को प्रशिक्षित करने हेतु एक जिलास्तरीय वर्कशॉप का आयोजन होगा | बहरहाल, एक त्रिसदस्यीय कमिटी का गठन किया गया है जिसके तीन सदस्य होंगे-संजय कुमार, सिस्टर लिली एवं सीडीपीओ दर्शना कुमारी |

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मधेपुरा समाहरणालय में हिन्दी दिवस की गूँज

समाहरणालय सभाकक्ष में मधेपुरा के डायनेमिक डी.एम. मो.सोहैल की अध्यक्षता में 14 सितंबर को अधिकारियों, साहित्यनुरागियों एवं कर्मचारियों की उपस्थिति में हिन्दी दिवस समारोह का आयोजन जिला प्रशासन द्वारा किया गया, जिसमें प्रेस प्रतिनिधियों की भी सहभागिता रही ।

हिन्दी दिवस समारोह का उद्घाटन करते हुए अध्यक्ष सह जिला पदाधिकारी मो.सोहैल ने कहा कि अब प्रशासनिक अधिसूचनाएं, आदेश-निर्देश, सेवा नियमावली सहित समस्त प्रगति-प्रतिवेदन आदि मुस्तैदी के साथ हिन्दी में लिखी जायेगी । जिलाधिकारी ने हिन्दी के संबर्धन के बाबत विस्तार से उद्गार व्यक्त करते हुए अंत में यही कहा कि सभी न्यायालयों में निष्पादन किये जानेवाले वादों के निर्णय को अच्छी हिन्दी में निर्गत करनेवाले कर्मियों का नाम राजभाषा विभाग की ओर से दिये जाने वाले पुरस्कार हेतु अनुशंसा की जायगी । उन्होंने हिन्दी दिवस के अवसर पर हिन्दी के उन्नयन हेतु महत्वपूर्ण विचारणीय सतरह बिंदुओं की टंकित प्रतियां भी वितरित कराई ।

इस अवसर पर प्रो.श्यामल किशोर यादव, प्रो.प्रदीप झा, पत्रकार तर्बसु, चंदन कुमार, शंकर कुमार आदि ने भी हिन्दी के महत्व एवं उसकी उपयोगिता पर विचार व्यक्त किये ।

यह भी बता दें कि समाजसेवी साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने अपने संबोधन में तुर्की रिपब्लिक के संस्थापक कमाल अतातुर्क के संकल्प को याद करते हुए समाजवादी चिंतक भूपेन्द्र नारायण मंडल द्वारा कभी भारतीय संसद में हिन्दी के उन्नयन हेतु माननीय अध्यक्ष से कही गई बातों को उद्घृत किया- अध्यक्ष महोदय ! हिन्दी के लिए मैं पागल नहीं हूं, परंतु भारत में अंग्रेजी को बनाये रखने की कोशिश भारतीय गणतंत्र के साथ विश्वासघात है ।                        

मौके पर डॉ.मधेपुरी ने यह भी कहा कि 70 वर्षों से हिन्दी तेजी से आगे बढ़ने के बजाय कदम ताल करती रही है । यदि कमाल अतातुर्क की तरह होता हमारे संकल्पों में जान तो हम भी जीत लिए होते आसमान……..! अंत में डी.पी.ओ.राखी कुमारी ने धन्यवाद ज्ञापित कर निदेशानुसार समारोह के समापन की घोषणा की ।

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मधेपुरा ईदगाह में आम व खास ने मिलकर बकरीद की नमाज अदा की 

कुर्बानी के पर्व बकरीद पर जिले के विभिन्न ईदगाहों में आम व खास द्वारा मिलकर नमाज अदा की गयी और फिर सभी धर्म के लोगों ने मुस्लिम भाईयों से गले मिलकर दुनिया को प्रेम और भाईचारे का संदेश दिया |

यहां यह भी बता दें कि मधेपुरा के डायनेमिक डी.एम. मो.सोहैल ने ईदगाह की सामूहिक नमाज में आम बनकर शामिल हुए | नमाज अदा करने के बाद बिहार सरकार के मंत्री प्रो.चंन्द्रशेखर एवं मधेपुरा के जनप्रिय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पु यादव व अन्य गणमान्यों ने ईदगाह पहुंचकर जिलाधिकारी मो.सोहैल व अन्य सभी मुस्लिम भाइयों से गले मिलकर बकरीद की बधाई दी | सांसद पप्पु यादव व मंत्री प्रो.चंन्द्रशेखर ने कहा कि समाज में प्रेम, भाईचारे और सौहार्द कायम रखने के लिए सभी वर्ग के लोगों को मिलजुल कर समाज के उन्नयन में सहभागी बनना होगा- तभी समाज मजबूत होगा और देश सबल बनेगा |

जहाँ जिले के उदाकिसुनगंज अनुमंडल के ग्वालपाड़ा, आलमनगर, चौसा प्रखंड के  रहटा, नयानगर, मंजौरा, बुधमा आदि सभी मुस्लिम बहुल इलाकों में भाईचारे के साथ शांतिपूर्ण तरीके से बकरीद मनाया गया वहीं सदर मधेपुरा अनुमंडल के गम्हरिया, कुमारखंड, सिंहेश्वर प्रखंड के रहटा, टिकुलिया, भतनी, रौता, लक्ष्मीपुर आदि के साथ-साथ झिटकिया, रूपौली, भवानीपुर आदि पंचायतों एवं मधेपुरा प्रखंड के मलिया, मुरहो आदि के मुस्लिम भाइयों ने भी शांति और सौहार्द के साथ कुर्बानी का पर्व ईद-उल-अजहा यानी बकरीद मनाया | फिर कब्रिस्तानों में जा-जाकर अपने-अपने पूर्वजों को याद किया | उनके लिए अल्लाहताला से शांति की दुआएं मांगी | प्रायः हर जगह मेले भी लगे | बच्चों ने आइसक्रीम से लेकर बैलून आदि खिलौने की खरीद की, मस्ती  की और जमकर लुत्फ उठाया | इस अवसर पर मुस्लिम भाइयों द्वारा अल्लाह के नाम अपने प्रिय बकरे की कुर्बानी देकर पैगम्बर इब्राहिमी का अल्लाह के प्रति समर्पण को याद किया जाता है और विभिन्न समुदाय के लोगों को दावत पर बुलाया भी जाता है |

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एक पैर से दुनिया जीतने वाले के लिए कोई जश्न नहीं?

रियो ओलंपिक में साक्षी के कांस्य और सिंधु के रजत पर आप जरूर खुशी से झूम गए होंगे। झूमना भी चाहिए। इन दोनों बेटियों की सफलता पर पूरा देश जश्न मना रहा था। मनाना भी चाहिए। पर क्या हमने रियो में ही स्वर्ण जीतने वाले मरियप्पन थंगावेलू के लिए भी वैसा ही जश्न मनाया? नहीं ना? बता सकते हैं क्यों? क्या इसलिए कि हमारे देश के किसी भी टीवी चैनल ने पैरालंपिक का सीधा प्रसारण नहीं दिखाया? या फिर इसलिए कि पैरालंपिक का आयोजन केवल विकलांग खिलाड़ियों के लिए होता है? अगर ऐसा है तो हमें जरूर जानना चाहिए कि ‘पैरालंपिक’ का ‘ओलंपिक’ से केवल शाब्दिक साम्य ही नहीं है, बल्कि भव्यता और व्यापकता की दृष्टि से भी ये उससे कमतर नहीं। इसे शारीरिक रूप से नि:शक्त खिलाड़ियों का ओलंपिक कहें तो गलत नहीं होगा। आप इसके ‘कैनवास’ का अंदाजा इस बात से लगायें कि इस साल के रियो पैरालंपिक में 176 देशों ने भाग लिया था।

जहाँ तक पैरालंपिक की शुरुआत की बात है, तो आपको बता दें कि 1960 में रोम ओलंपिक खेलों के खत्म होने के एक हफ्ते के बाद अंतर्राष्ट्रीय पैरालंपिक खेलों का आयोजन पहली बार किया गया था। लेकिन 1968 में मेक्सिको ने ओलंपिक के बाद पैरालंपिक खेलों का आयोजन करने से इनकार कर दिया था। आगे चलकर 2001 में इसे नियमित कर दिया गया। अब ओलंपिक की मेजबानी करने वाले देश को पैरालंपिक खेलों के लिए भी दावेदारी करनी पड़ती है। हालांकि ये स्पष्ट कर दें कि ओलंपिक और पैरालंपिक का आयोजन बिल्कुल अलग-अलग संस्थाओं के हाथ में है। इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी और इंटरनेशनल पैरालंपिक कमेटी दोनों अपना स्वतंत्र अस्तित्व रखती हैं।

बहरहाल, अनगिनत मुश्किलों और चुनौतियों को पीछे छोड़ते हुए भारत के मरियप्पन थंगावेलू ने रियो पैरालंपिक 2016 में भारत को पुरुषों की टी-42 हाई जंप में गोल्ड मेडल दिलाया। 21 वर्षीय मरियप्पन ने 1.89 मीटर की छलांग लगाकर भारत को ये ऐतिहासिक सफलता दिलाई। भारत के ही वरुण सिंह भाटी ने 1.86 मीटर की छलांग लगाकर इस इवेंट का कांस्य अपने नाम किया। बता दें कि टी-42 वर्ग में वैसे पैरा एथलीट आते हैं जिनके हाथ या पैर के साइज या मांसपेशियों में अन्तर होता है।

मरियप्पन को हाई जंप का गोल्ड मेडल ऐसे ही नहीं मिल गया। उसके पीछे की वजह है कड़ा संघर्ष। मरियप्पन का जन्म तमिलनाडु के सालेम से 50 किलोमीटर दूर पेरिवादमगट्टी गांव में हुआ था। उनकी माँ गांव में ही सब्जियां बेचकर गुजारा करतीं। पर घोर अभाव के बाद भी नियति को शायद मरियप्पन की और परीक्षा लेनी थी। जब वे पाँच साल के थे तब स्कूल जाते वक्त उनके पैर पर बस चढ़ गई। चोट इतनी गंभीर थी कि उनका दायां पैर पूरी तरह से खराब हो गया।

एक पैर खराब होने पर भी मरियप्पन की स्कूल के दिनों में खेलकूद में काफी रुचि थी और वे खासकर वॉलीबॉल खेला करते। इसी दौरान स्कूल के कोच की नज़र उन पर पड़ी। उन्होंने मरियप्पन को वॉलीबॉल छोड़ हाईजंप ज्वाइन करने की सलाह दी और ट्रेंड किया। जब मरियप्पन 14 साल के हुए तब उन्होंने पहली बार एक स्पोर्ट्स इवेंट में हिस्सा लिया और दूसरे नंबर पर रहे। महत्वपूर्ण बात ये कि इस प्रतियोगिता में उन्होंने नॉर्मल एथलीट्स को कम्पीट किया था।

मरियप्पन को नेशनल लेवल पर सफलता दिलाने का श्रेय कोच सत्यनारायण को जाता है। 18 साल की उम्र में वे ही मरियप्पन को नेशनल पैरा-एथेलेटिक्स चैम्पियनशिप में लेकर आए और इसके बाद की कहानी इतिहास है। आपको बता दें कि 1 नवंबर 2015 को मरियप्पन दुनिया के नंबर वन पैरा हाई जंपर बने और रियो पैरालंपिक में गोल्ड जीतने से पहले भी वे आईपीसी ट्यूनीशिया ग्रैंड प्रिक्स में 1.78 मीटर की स्वर्णिम छलांग लगा चुके हैं।

चलते-चलते:

पैरालंपिक के इतिहास में ये भारत का तीसरा गोल्ड मेडल है। मरियप्पन से पहले मुरलीकांत पेटकर (स्विमिंग) 1972 में और देवेन्द्र झाझरिया (जैवलिन थ्रो) 2004 में भारत के लिए स्वर्ण जीत चुके हैं।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

 

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अब टिफिन के बाद भी हाजिरी होगी छात्रों की

कभी तो चीन, जापान और जर्मनी जैसे देशों के विद्यार्थी बिहार के विक्रमशिला और नालंदा विश्वविद्यालय में पढ़ने के लिए आते थे | वे सारे विदेशी भिन्न-भिन्न विद्याएं सीख-सीख कर अपने-अपने घर जाते थे  | वो भी एक समय था जब भारत की विद्याएं दुनिया भर में फैलती रही….. तब जब पांचवी शताब्दी में कदाचित आर्यभट्ट जैसे गणितज्ञ नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति हुआ करते थे | बिहार में जन्मे उसी आर्यभट्ट के लिए विश्वविख्यात वैज्ञानिक आइंस्टाइन ने कहा है- “मैं आर्यभट्ट के सामने सिर झुकाता हूँ जिन्होंने विश्व को गणित का ज्ञान दिया अन्यथा आज तक जितने भी आविष्कार दुनिया में हुए हैं उनमें से आधा भी संभव नहीं हो पाता |”                        

परन्तु सोचिए तो सही, आज हमारी शिक्षा व्यवस्था को क्या हो गया है ? कौन सा रोग पकड़ लिया है ? लड़के नामांकन कराते हैं और स्कूल नहीं जाते हैं | अभिभावकों को ही नहीं बल्कि शिक्षकों को भी छात्रोपस्थिति के लिए नए-नए उपाय ढूंढने को विवश होने पड़ते हैं |

फिर भी स्थिति में सुधार होते नहीं देखकर मधेपुरा के डायनेमिक डी.एम. मो.सोहैल को जिले के +2 और हाई स्कूलों के प्रधानों के साथ, शिक्षाविदों एवं समाजसेवियों के साथ झल्लूबाबू सभागार में बैठक बुलाकर हर तरह की समस्याओं की जानकारी लेने के बाद कुछ कठोर निर्णय लेने पड़ते हैं- सात दिनों तक स्कूल नहीं आनेवाले छात्रों का नाम काट दिया जायेगा | अबसेंट रहनेवाले छात्रों से प्रतिदिन दो रुपये अनुपस्थिति दंड वसूल किया जायेगा | इतना ही नहीं, टिफिन के बाद भी छात्रों की हाजिरी ली जायेगी और गैरहाजिर हुए छात्रों से 4 रुपये दंड शुल्क वसूले जायेंगे |

यह भी बता दें कि जिलाधिकारी मो.सोहैल ने धैर्यपूर्वक विद्यालय प्रधानों की सारी समस्याओं को सुना और अपने कनीय पदाधिकारियों को तत्क्षण निदेश देकर समाधान भी करते चले गये | डी.एम. मो.सोहैल  द्वारा रासबिहारी विद्यालय की एच.एम. रंजना कुमारी, विद्या मंदिर कलासन के एच.एम. मो.हुसैन अहमद, केशव कन्या की विभा कुमारी तथा रानीपट्टी के एच.एम.दिनेश यादव आदि की समस्याओं के अविलम्ब निदान हेतु डी.ई.ओ. बद्री नारायण मंडल को आवश्यक निदेश भी दिये गये | डी.एम. मो.सोहैल ने स्कूल प्रबंधन समिति से स्कूल की देख-रेख मुस्तैदी से करने का अनुरोध भी किया और कहा कि रूटीन के अनुसार विद्यालय में पढ़ाई हो…….|

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2018 में होगा बी.पी.मंडल सेतु का पुनर्जन्म

कोसी की लाईफ लाईन डूमरी पुल (बी.पी.मंडल सेतु) बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री व मंडल कमीशन के अध्यक्ष बी.पी.मंडल के नाम पर है जिसका 8 पाया और 9 स्पेन विगत 30 अगस्त 2010 को ही क्षतिग्रस्त हो गया था | पानी निर्बाध बहता रहे इस कारण सिर्फ 2 पाये और 3 स्पेन से ही पुल निर्माण किया जा रहा है |

मधेपुरा अबतक द्वारा एस.पी.सिंगला कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर के.के.रंजन से प्राप्त जानकारियां आपके लिए इस प्रकार है- सर्वप्रथम 23 फरवरी, 2016 से ही क्षतिग्रस्त इस सेतु का जीर्णोद्धार कार्य शुरु किया गया था | 4 महीने लग गए क्षतिग्रस्त 8 पाये और 9 स्पेन को हटाने में | आगे 50 करोड़ की राशि से कार्य पूरा कर लिया जायेगा |

यह भी बता दें कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जन्मदिन 2 अक्टूबर के बाद जैसे ही बरसात खत्म होगा कि किसी दिन कार्य शुरु कर दिया जायगा तथा दिसंबर 2017 तक उसे पूरा भी कर लिया जायगा |

यहां यह भी बता देना मौजूं होगा कि बी.पी.मंडल का जन्म शताब्दी समारोह वर्ष 2018 में है | फिलहाल खगड़िया सहित कोसी वासियों की जो 50 लाख की आबादी आवागमन की मार झेल रही है- उनके लिए पुनर्जन्म ग्रहण किया हुआ यह बी.पी.मंडल सेतु नये साल 2018 का बहुत बड़ा गिफ्ट होगा- जिस पर जनवरी 2018 से लोगों का आवागमन तथा गाड़ियों का परिचालन पुनः शुरू हो जायेगा |

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