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राजपथ पर योग के दौरान मोदी पर लगा तिरंगे के अपमान का आरोप, शिकायत दर्ज !

पुड्डुचेरी : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ मंगलवार को पुड्डुचेरी पुलिस स्टेशन में एक दलित एक्टिविस्ट ने शिकायत दर्ज कराई है। उन पर राष्‍ट्रीय झंडे के अपमान का आरोप लगाया गया है। अंतरराष्‍ट्रीय योग दिवस के मौके पर 21 जून (रविवार) को राजपथ पर योग करते हुए पीएम के गले में तीन रंगों वाली एक चुनरी थी। बताया जा रहा है कि शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि मोदी ने अपने गले में तिरंगा लपेटा था और उन्होंने राष्‍ट्रीय झंडे का अपमान किया है।

क्या है आपत्ति
आपत्ति दर्ज कराने वाले का दावा है कि मोदी ने योग करते हुए तिरंगा गले में लपेट रखा था। उससे कई बार अपना मुंह पोंछा था। वह जब योग कर रहे थे, तो जमीन पर कई बार तिरंगा छू भी गया था। कई बार उनके पैर से भी तिरंगा सटा था। इस तरह उन्‍होंने राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया।
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पुलिस का बयान
पुलिस ने कहा, ”दलित सेना के स्टेट जनरल सेक्रेटरी सुंदर ने मामला दर्ज कराया है। उनका कहना है कि उन्हें वाट्सऐप पर ऐसी तस्वीरें मिली हैं, जिनमें लग रहा है कि मोदी राष्ट्रीय ध्वज का अपमान कर रहे हैं। गले में अगर तिरंगा झुलाया जा रहा है और उससे योग करते हुए पसीना पोंछा जा रहा है तो यह ध्वज का अपमान है।” शिकायतकर्ता की मांग पर मोदी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

हाल ही में अमिताभ-अभिषेक के खिलाफ हुआ है मुकदमा
तिरंगे के अपमान से जुड़ी शिकायतों में राष्ट्रीय गौरव अपमान रोकथाम अधिनियम 1971 और फ्लैग कोड ऑफ इंडिया 2002 के तहत धाराएं लगती हैं। अमिताभ बच्चन और उनके बेटे अभिषेक बच्चन पर भी शरीर पर तिरंगा ओढ़ने के मामले में इन्हीं दो कानूनों के तहत गाजियाबाद कोर्ट में 18 जून को मुकदमा दायर किया गया है।

क्या कहते हैं नियम?
फ्लैग कोड ऑफ इंडिया 2002 के सेक्शन-4 में राष्ट्रध्वज के इस्तेमाल से जुड़े प्रावधान हैं। इसमें कहा गया है कि किसी भी स्थिति में यह सुनिश्चित होना चाहिए कि राष्ट्रध्वज जानबूझकर जमीन पर न गिराया जाए। शहीदों के अंतिम संस्कार के अलावा राष्ट्रध्वज को ओढ़ा या लपेटा भी नहीं जा सकता। वहीं, राष्ट्रीय गौरव अपमान रोकथाम अधिनियम 1971 की धारा 2 कहती है कि कमर के नीचे पहने वाले जाने वाले ड्रेस में भी राष्ट्रध्वज का इस्तेमाल नहीं हो सकता। राष्ट्रध्वज को जानबूझकर जमीन या पानी से छूने देना अपमान की श्रेणी में आएगा। कानून में पहली बार के अपराध के लिए सजा का प्रावधान स्पष्ट नहीं है। यह जरूर कहा गया है कि दूसरी बार दोषी पाए जाने पर अधिकतम एक साल की सजा हो सकती है।

उमा भारती को देना पड़ा था इस्तीफा
राष्ट्रध्वज के अपमान के एक मामले के चलते उमा भारती को 2004 में मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। उमा के खिलाफ हुबली में तिरंगा यात्रा के दौरान राष्ट्रध्वज का अपमान करने का मामला दर्ज हुआ था। एक मैगजीन में उनकी तिरंगे साथ तस्वीर छपी थी। हुबली की कोर्ट ने उनके नाम अरेस्ट वारंट जारी कर दिया था। हालांकि, अप्रैल 2015 में उन्हें हुबली के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने बरी कर दिया।

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“मीडिया: सत्ता और स्वायत्तता” पर विचार-गोष्ठी

रविवार, 21 जून 2015 को डी.आर.डी.ए., मधेपुरा के झल्लू बाबू सभागार में युवा पत्रकार विनय तरुण की स्मृति में “मीडिया : सत्ता और स्वायत्तता” विषय पर देश के विभिन्न राज्यों के मीडियाकर्मियों के संगठन ‘दस्तक’ की ओर से एकदिवसीय गोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। गोष्ठी के मुख्य वक्ता थे वरिष्ठ मीडिया विश्लेषक और सामाजिक कार्यकर्ता श्री अनिल चमड़िया। श्री चमड़िया ने विस्तार से मीडिया की स्वायत्तता और मीडिया के ऊपर सत्ता के विभिन्न रूपों के महीन अंकुशों पर प्रकाश डाला। उपस्थित प्रबुद्धजन एवं मीडियाकर्मी देर तक उन्हें सुनते रहे।

वरिष्ठ पत्रकार श्री अखलाख की अध्यक्षता में पटना की पत्रकार सायना सहित भागलपुर, राँची, मुजफ्फरपुर एवं अन्य शहरों से आए हुए मीडियाकर्मियों के साथ-साथ मधेपुरा के मीडियाकर्मियों ने विस्तार से अपने-अपने विचार व्यक्त किए। इनके अतिरिक्त बी.एन. मंडल विचार मंच के अध्यक्ष प्रो. श्यामल किशोर यादव, सचिव डॉ. आलोक कुमार एवं कौशिकी क्षेत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन के सचिव व वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. भूपेन्द्र मधेपुरी सहित गजलगो शंभूशरण भारतीय, सिंडिकेट सदस्य (बीएनएमयू) डॉ. जवाहर पासवान, मधेपुरा कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अशोक कुमार, हर्षवर्द्धन, आनन्द, राहुल आदि उपस्थित थे।

अध्यक्ष मंडल के सदस्य डॉ. मधेपुरी ने कहा कि विगत कुछ वर्षों में सूचना क्रांति एवं तकनीकी विस्तार के चलते मीडिया की व्यापकता में वृद्धि तो हुई है परन्तु भूमंडलीकरण के इस दौर में बाजारीकरण की प्रक्रिया भी उसी अनुपात में तेज हुई है। उन्होंने चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा कि मीडिया सामाजिक सरोकारों से दूर होता जा रहा है और इस उपभोक्तावादी युग में खबरों को भी उत्पाद बना दिया गया है। अन्त में डॉ. मधेपुरी ने विनय तरुण को स्मरण करते हुए उन्हें जन्म देनेवाले माता-पिता को नमन किया। श्रद्धांजलिस्वरूप उनकी एक गजल – कहाँ जन्मे सुनो हम नहीं जानते, कब मरेंगे कहाँ हम नहीं जानते  – सुनकर कितनी आँखें नम हो गईं इसे सायना ने रोकर बता दिया।

भोजनोपरान्त दूसरे सत्र में इस कार्यक्रम हेतु स्थल तथा इसके विस्तारीकरण सहित अन्य सुझावों पर विस्तार से चर्चा हुई। व्यवस्थापक के रूप में प्रभात खबर के ब्यूरो चीफ श्री रूपेश कुमार सभी के प्रशंसापात्र बने रहे। अध्यक्षीय भाषण के साथ अखलाख साहब ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कार्यक्रम की समाप्ति की घोषणा की।

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बिहार : योग और राजनीति का रोग

विश्व योग दिवस पर पटना के मोइनुल हक स्टेडियम में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की मौजूदगी में योग अभ्यास का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। 35 मिनट तक चले कार्यक्रम में पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नंदकिशोर यादव, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मंगल पांडेय और सीपी ठाकुर सहित अन्य भाजपा नेता भी स्टेडियम में मौजूद रहे। भाजपा सांसद और अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा योग समारोह से नदारद थे।

बहरहाल प्रणवगान और प्रार्थना से योग अभ्यास की शुरुआत हुई। इस दौरान शिथिलिकरण के अभ्यास में कटी चालन, घुटना संचालन, प्राणासन, वृक्षासन, पादहस्तासन, अर्द्धचक्रासन, त्रिकासन, भद्रासन, अर्द्धउष्ट्रासन, शशकासन, मकरासन, सेतु बंधासन, पवन मुक्तासन, शवासन, कपालभारती, अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, ध्यान और अंत में संकल्प पाठ और शांति पाठ के बाद योग समारोह समाप्त हो गया। इस दौरान सूर्य नमस्कार का अभ्यास नहीं कराया गया। ध्यातव्य है कि मुस्लिम समुदाय ने इसका विरोध किया था।

योग अभ्यास समाप्त होने के बाद अमित शाह ने कहा कि आज भारत विश्व रिकॉर्ड का हिस्सा बनने जा रहा है। भारतीय संस्कृति के धरोहर और इस विचार को अब पूरी दुनिया ने स्वीकारा है। यूएनओ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व योग दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा था, जिसे 175 देशों ने स्वीकार किया। संपूर्ण विश्व में 21 जून को योग दिवस मनाने का निर्णय लिया गया। अमित शाह ने कहा कि योगाचार्यों के मंथन के बाद इस दिन को विश्व दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया। आज का दिन सबसे लंबा होता है। सूरज से हमें आज के दिन सबसे अधिक ऊर्जा मिलती है, इसलिए इस दिन को विश्व योग दिवस के रूप में मनाने की सहमति बनी। भाजपा अध्यक्ष ने कहा व्यक्ति को जोड़ने वाला योग अब क्रिया को जोड़ेगा। हालांकि इस अवसर पर शाह ने योग क्रिया नहीं की। उपस्थित भीड़ ने उन्हें योग करने को कहा भी लेकिन उन्होंने योग नहीं किया।

इस अवसर पर स्टेडियम में करीब 15 हजार लोग मौजूद थे। इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं। पूरे स्टेडियम और आसपास कड़ी सुरक्षा व्यवस्था का इंतजाम किया गया था।

जहाँ एक ओर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने योग दिवस के आयोजन को प्रतिष्ठा का विषय बना लिया था और इसके लिए उन्होंने कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी वहीं दूसरी तरफ इस मुद्दे पर विपक्षी पार्टियों और नेताओं के बड़े दिलचस्प बयान सुनने को मिल रहे हैं। योग दिवस पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए जदयू अध्यक्ष शरद यादव ने कहा कि भाजपा शरीर का योग कर रही है, लेकिन वे राजनीत का योग कर रहे हैं। शरद यादव रविवार को पटना में लालू प्रसाद से बातचीत के बाद पत्रकारों से मुखातिब थे। योग दिवस पर हो रहे कार्यक्रमों पर उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि भाजपा नेताओं का शरीर योग करने लायक स्थिति में नहीं है।

योग को लेकर राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद ने अपने अंदाज में कहा कि फूली तोंद वाले योग का नाटक कर रहे हैं। उन्होंने आज 22 मिनट के दरम्यान एक के बाद एक सात ट्वीट किए। अपने ट्वीट में उन्होंने कहा कि मैं योग का विरोधी नहीं, पर लोगों को बेवकूफ बनाने के पाखंड का धुर विरोधी हूं। उन गरीबों और कामगार वर्गों को योग की जरुरत नहीं, जो मेहनत की रोटी खाते है। जो सुख प्राप्ति का जीवन जी रहा है, पूंजीपतियों को गरीबों का खून चुसवा रहा है, किसानों की जमीन निगल रहा है, वह योग करेगा और करवाएगा।

इससे पूर्व जदयू ने बिहार में विधान परिषद् चुनाव के मद्देनजर चुनाव आयोग से योग दिवस कार्यक्रम पर रोक की मांग की थी। पार्टी का तर्क था कि चुनाव के दौरान भाजपा अध्यक्ष समेत विभिन्न केन्द्रीय मंत्रियों का जमावड़ा आदर्श आचार संहिता का स्पष्ट उल्लंघन है।

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हाय रे गिरगिटिया मानसून..!

जहाँ देश के दक्षिणी भाग मुंबई में बारिश से जन-जीवन अस्त-व्यस्त है वहीं देश के उत्तरी किनारे के राज्य बिहार के कोशी प्रमंडल के जिलों खासकर मधेपुरा में किसान कमजोर मानसून को लेकर बेहद चिन्तित हैं। स्थिति यहाँ तक पहुँच गई है कि नदियां सिमटकर नाले का रूप ले चुकी हैं। नहरें या तो क्षतिग्रस्त हैं या उनमें बालू और गाद भरे हैं। नहरों की सफाई पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं इसके बावजूद वे इस लायक नहीं कि उनसे सामान्य सिंचाई की जा सके। ज्यादातर राजकीय नलकूप भी दयनीय स्थिति में हैं। ऐसे में इस इलाके के किसानों के पास फसल की सिंचाई के लिए प्रकृति पर निर्भर रहने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

आज 21 जून है पर बारिश की बूँदों की जगह आसमान से आग बरस रही है। मौसम विभाग के अनुसार बिहार में मानसून के दर्शन 24 तारीख से हो सकते हैं। इस बीच सरकार ने सभी जिलों के डी.एम. को सिंचाई की सुविधा मुहैया कराने का निर्देश दे दिया है। फलस्वरूप नहर, कुएँ, नलकूप आदि स्रोतों से पानी उपलब्ध कराने की कवायद शुरू कर दी गई है।

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प्रतिभाओं की भूमि है बिहार

विश्वस्तर पर प्रतिष्ठित आई.आई.टी. में प्रवेश के लिए जे.ई.ई. एडवांस परीक्षा में बिहार के लगभग एक हजार छात्र-छात्राओं ने सफलता हासिल की है। इनमें बिहार बोर्ड के छात्र-छात्राओं की संख्या लगभग पाँच सौ है। दूसरी ओर यू.पी. बोर्ड के सफल छात्रों की संख्या चार सौ के करीब ही ठहर गई है और केरल बोर्ड तो अन्तिम पायदान पर है। गौरतलब है कि यू.पी. बोर्ड के छात्रों की संख्या बिहार बोर्ड से बहुत अधिक है और केरल तो पूर्ण साक्षर राज्य है। इस लिहाज से बिहारी छात्रों की ये सफलता और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

बिहार की राजधानी पटना के आयुष रंजन एवं आकाश सिन्हा बिहार राज्य के ही टॉपर और सेकेंड टॉपर नहीं हैं बल्कि दोनों पूरे गुवाहाटी जोन के भी टॉपर और सेकेंड टॉपर हैं। सम्पूर्ण भारत के लगभग पन्द्रह हजार सफल छात्रों में इन्होंने क्रमशः 94वां और 101वां रैंक प्राप्त किया है।

बिहारी छात्रों की सफलता इस बात के लिए आश्वस्त करती है कि आर्यभट्ट से लेकर वशिष्ठ नारायण सिंह तक की जन्मभूमि बिहार प्रतिभाओं से ना तो कभी खाली हुई है और ना आगे कभी होगी।

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भारतीय राजनीति में भूकंप के झटके

भाजपा के वरिष्ठ नेता व भूतपूर्व उपप्रधानमंत्री श्री लालकृष्ण आडवाणी ने आपातकाल पर टिप्पणी क्या कर दी भारतीय राजनीति में ऐसा लग रहा है मानो भूकम्प के झटके आ रहे हों। आप के साथ-साथ जदयू और कांग्रेस की ओर से जो बयान इस बीच आए हैं वे भविष्य के लिए कई संकेत कर रहे हैं। बताना जरूरी होगा कि श्री आडवाणी ने आपातकाल को लेकर कहा कि इसे खारिज नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि जो ताकतें लोकतंत्र को कुचल सकती हैं वे मजबूत हुई हैं। उनके इस बयान पर अटकलें लगाई जा रही हैं कि यह प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी पर केन्दित है।

गौरतलब है कि बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार और दिल्ली के मुख्यमंत्री श्री अरविन्द केजरीवाल ने श्री आडवाणी द्वारा आपातकाल पर की गई टिप्पणी का जोरदार समर्थन किया है। जिन्ना को धर्मनिरपेक्ष कहने वाली उनकी टिप्पणी के बाद ये एक और मौका है जब दिग्गज राजनेता श्री आडवाणी को लेकर भाजपा खुद को असहज पा रही है।

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मन के पार, चेतना के द्वार जाने की तैयारी का नाम है योग

21 जून को केवल मधेपुरा ही नहीं बल्कि दिल्ली स्थित रायसीना हिल सहित सम्पूर्ण भारत योगमय वातावरण से आच्छादित हो जाएगा। आजू-बाजू के जिले के भी सभी प्राथमिक, माध्यमिक तथा उच्च माध्यमिक विद्यालयों में शारीरिक शिक्षक योग सिखाएंगे। विगत कुछ वर्षों से योगगुरू स्वामी रामदेव द्वारा योग को विश्व में अनवरत प्रचारित-प्रसारित करते रहने एवं हाल ही में प्रधानमंत्री द्वारा संयुक्त राष्ट्रसंघ की महासभा में योग एवं भारतीय संस्कृति को बुलंदी के साथ रखने के फलस्वरूप 21 जून को घोषित अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस को धूम-धाम से मनाए जाने की तैयारी शुरू हो गई है।

इस अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस पर भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के निर्देशानुसार कॉलेजों में शिक्षकों, कर्मचारियों सहित छात्र-छात्राओं एवं एन.सी.सी. के जवानों को योग से होनेवाले लाभ की जानकारी दी जाएगी। भूपेन्द्र नारायण मंडल वि.वि., मधेपुरा के एन.एस.एस. समन्वयक डॉ. अब्दुल लतीफ ने कहा कि इस क्षेत्र में योग के बेहतर प्रदर्शन को देखते हुए भारत सरकार ने वि.वि. मुख्यालय में केन्द्रीय योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा रिसर्च सेंटर खोलने का फैसला किया है।

जहाँ एक ओर महाविद्यालयों में पूर्वाभ्यास कार्यक्रमों के लिए प्रो. नन्दकिशोर एवं महिला प्रभारी प्रो. रीता कुमारी ने मधेपुरावासियों का आह्वान करते हुए कहा कि योगाभ्यास के सभी कार्यक्रमों में भाग लेकर अपने जिला को एक जागरुक जिला के तौर पर पेश करें, वहीं दूसरी ओर देश के दूसरे हिस्सों में कुछ स्वार्थी तत्वों ने इसे धर्म से जोड़कर राजनीति करना शुरू कर दिया है। विरोध करनेवालों को यह जानकारी होनी चाहिए कि योग हिन्दू-मुस्लिम-सिक्ख-ईसाई देखकर फायदा या नुकसान नहीं पहुँचाता अपितु यह एक शारीरिक व मानसिक क्रिया है। योग से आन्तरिक शक्ति ही नहीं आत्मप्रकाश में भी वृद्धि होती है। योग से व्याधि और व्यवधान मिटते हैं। अन्तरात्मा को जाग्रत करना ही योग है। मन के पार, चेतना के द्वार जाने की तैयारी का नाम है योग, जो अन्दर की आँखें खोलता है।

विश्व के सभी जातियों, धर्मों व सम्प्रदायों के लोग यदि संकीर्णता से ऊपर उठकर योग को स्वास्थ्य से जोड़कर देखें तो सम्पूर्ण मानव-जाति का कल्याण होगा। हाल ही में अलीगढ़ मुस्लिम वि.वि. के कुलपति जमीरूद्दीन शाह ने कहा कि योग यहाँ की संस्कृति में समाया हुआ है। उन्होंने बिल्कुल सही कहा कि योग एक राष्ट्रीय खजाना है जिसे धार्मिक रंग देने की जगह शारीरिक एवं मानसिक व्यायाम की प्राचीन कला के रूप में स्वीकारना ही श्रेयस्कर है।

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गुदरी के लाल सुजीत ने बढ़ाया मधेपुरा का गौरव

पिता कुली और माँ मजदूर… दोनों के दोनों अनपढ़… और बेटा देश की प्रतिष्ठित आईआईटी की परीक्षा में सफलता का परचम फहरा दे तो क्या कहेंगे आप..! जब लगन सच्ची हो तो आपको सफलता के पीछे नहीं चलना पड़ता… सफलता आपको ढूंढ़ कर आपके घर का दरवाजा खटखटा देती है। “मधेपुरा अबतक” अपार हर्ष के साथ आपको बताना चाहता है कि वो दरवाजा मधेपुरा के पुरैनी प्रखंड में रहनेवाले प्रमोद मेहता और मीरा देवी का है और गौरव से सर ऊँचा कर देनेवाली सफलता ने दस्तक दी है उनके बेटे सुजीत के लिए।

पैसे के घोर अभाव के बीच और मूलभूत सुविधाओं तक से वंचित रहने वाले परिवार के बेटे सुजीत ने आईआईटी की परीक्षा में देशभर में ओबीसी कैटेगरी में 1329वां रैंक लाकर ना केवल अपने माता-पिता और घर-परिवार बल्कि पूरे मधेपुरा को ऐसी खुशी दी है जिसे शब्दों में बयां करना नामुमकिन है। सुजीत के सपनों को पंख देने में गणितज्ञ आनंद के सुपर 30 का योगदान अविस्मरणीय है। सुजीत जैसी प्रतिभाओं को मुकाम तक पहुँचाने के कारण ही आज सुपर 30 की विश्वस्तरीय प्रतिष्ठा है।

बताते चलें कि सुजीत के पिता प्रमोद मेहता पुरैनी बाजार में ही कुली का काम करते हैं और माँ मीरा देवी गाँव के खेतों में मजदूरी करती है। दो भाई और दो बहनों में एक भाई और एक बहन से छोटा है सुजीत। बड़ा भाई अजीत कलकत्ता से बीटेक करने के बाद टीसीएस में इंजीनियर है। दो बहनों में बड़ी अंजली इन्टर कर चुकी है और छोटी ने इस बार मैट्रिक की परीक्षा दी है।

सुजीत ने पुरैनी प्रखंड के ही श्री वासुदेव उच्च विद्यालय से प्रथम श्रेणी में मैट्रिक करने के बाद सुपर 30की तैयारी शुरू कर दी थी। सुपर 30 में चयनित होने के बाद उसने अपने दूसरे प्रयास में 1329वां रैंक हासिल किया और अब उसकी इच्छा है आईआईटी, खड़गपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियर बनने की।

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फर्जी कारोबार से कब मुक्त होगा भारत..?

चाहे दिल्ली के पूर्व कानून मंत्री जितेन्द्र सिंह तोमर की फर्जी डिग्री का मामला हो या मधेपुरा के मंडल विश्वविद्यालय के अन्तर्गत डी.एस. कॉलेज, कटिहार के प्राचार्य डॉ. पवन कुमार झा की फर्जी पी-एच.डी. डिग्री का मामला। बात दूध में मिलावट की हो या फिर नकली दवाओं की। यहाँ तक कि कुछ मामले फर्जी आई.ए.एस. अफसरों के भी देखने को मिले हैं। देखा जाय तो इन सबके पीछे कारण बस एक है – वह ये कि आदमी जन्म से मृत्यु पर्यन्त षट्विकार यानी काम, क्रोध, लोभ, मोह, ईर्ष्या, द्वेष से ग्रसित रहता है। देखा जाय तो इन विकारों से संघर्ष के क्रम में वह इन पर जितनी अच्छी तरह विजय पाता है मनुष्यता की कसौटी पर वह उतना ही खरा उतरता जाता है और अगर इन विकारों से वह पूर्णत: मुक्त हो जाय तो देवत्व को प्राप्त कर ले। जो कि हो नहीं पाता। इन षट्विकारों से मुक्त होने के लिए विवेक, वैराग्य एवं निष्काम कर्मयोग की जरूरत होती है जो आज के भौतिक युग में दुर्लभ सी हो गई चीजें हैं।

प्राचीन काल के शिक्षक समाज के सिरजनहार हुआ करते थे। वे मान-मूल्यों के रक्षक, रहवर और रखवाला की भूमिका में थे। वे सच्चे अर्थों में विद्यादानी हुआ करते, सपने में भी उन्हें धन लूटने की चाहत नहीं होती। परन्तु, वर्तमान में शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में से वैसी तमाम चीजें निकाल दी गई हैं जिनसे चरित्र-निर्माण होता, जो इन षट्विकारों पर नियन्त्रण रखने में मददगार होतीं। आज पाठ्यक्रमों से ऋषि-मुनियों, तपस्वियों, साधकों, समाजसेवी संतों सहित आजादी के दीवानों की जीवनियां बेरहमी से निकाल दी गई हैं। इनकी जगह शिक्षा को केवल और केवल व्यावसायिक और प्रतिस्पर्द्धी बनाने पर बल दिया जा रहा है। फल यह है कि समाज में सत्कर्मों को छोड़ आज सारे कर्म हो रहे हैं।

सच है कि ये फर्जी कारोबार कभी निर्मूल नहीं हो सकते परन्तु इन्हें नियन्त्रित और संतुलित करने के लिए हम सबको जगना होगा और अपनी-अपनी भूमिका में लगना होगा – सरकार को, समाज को और खासकर शिक्षकों को। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने देश के नाम संदेश में कभी कहा था – “भारत तभी भ्रष्टाचारमुक्त होगा जब माता-पिता एवं प्राईमरी स्कूल के शिक्षक – ये तीनों ह्रदय से इस काम में जुटे रहेंगे। ”

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जब सौ फीट की सड़क सिमटकर सात फीट की रह जाय..!

क्या गाँव क्या शहर सड़कों का अतिक्रमण अब सामान्य-सी बात हो गई है। लोग खुद तो ऐसा कर ही रहे हैं, बड़ी तकलीफ होती है जब वे अपने स्वार्थ में कई बार देवी-देवताओं को ढाल बना लेते हैं ताकि मन्दिर की आड़ में उनका कारोबार चलता रहे। यहाँ तक कि कई जगहों पर सौ फीट की सड़क सिमटकर सात फीट की रह गई है। चलिये बतायें कैसे..!

सबसे पहले तो हवाई चप्पल से लेकर रूई तक की दूकानवाले फुटपाथ छेककर दस फीट तक अपना सामान बिछा देते हैं। उनके आगे तिरपाल व प्लास्टिक आदि से बनाई गईं फल-सब्जी की दूकानें लगभग बीस फीट तक पहुँच जाती हैं। शाम होते-होते ठेलावाले दूकानदार अपनी-अपनी चीजों के साथ विराजमान हो जाते हैं। अब बारी होती है क्रेताओं की। वे जैसे-तैसे बाईक व गाड़ी खड़ी कर दूकानदारी करते हैं। बुजुर्गों और महिलाओं के लिए तो शाम में दो कदम चलना भी खतरे से खाली नहीं होता क्योंकि सड़क पर मवेशियों की हिस्सेदारी भी तो होती है और दूसरी ओर आज के युवक इन सिकुड़ती सड़कों पर भी धीमी रफ्तार में बाईक चलाना अपनी तौहीन समझते हैं। आश्चर्य तो ये होता है कि ये हाल मधेपुरा की मुख्य सड़कों का है और सड़क की ये कहानी प्रत्येक दिन दुहराई जाती है। फिर भी प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं दीखती..! क्या अब जाग जाने की जरूरत नहीं है..!

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