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मधेपुरा सहित 18 जिले सूखे की चपेट में

कमजोर मानसून के कारण बिहार के 18 जिलों में सूखे की आशंका बढ़ गयी है | मधेपुरा जिला में 55 फीसदी कम बारिश हुई है | यूँ अब तक सबसे कम बारिश सीतामढ़ी और मधुबनी जिले में रिकॉर्ड की गई है | पूरे बिहार में इस बार 32 फीसदी कम बारिश हुई है फिर भी किसानों द्वारा जहमत उठाकर 68 फीसदी खेतों में धान रोपनी कर लिया गया है |

मौसम विभाग का आकलन है कि आगे 20 अगस्त तक बिहार में मानसून कमजोर रहेगा | इस बीच स्थानीय नमी के कारण जहाँ-तहाँ हलकी-फुलकी बारिश होगी, अच्छी बारिश का कोई संकेत नहीं | सूखे ग्रस्त आशंका वाले 18 जिले हैं – सीतामढ़ी, मधुबनी, पूर्णिया, पूर्वी चम्पारण, सहरसा, शिवहर, अररिया, मुज्फ्फरपुर, सीवान, मधेपुरा, सुपौल, समस्तीपुर, दरभंगा, वैशाली, भोजपुर, पश्चिमी चम्पारण, किशनगंज और सारण |

आंकड़े बताते हैं कि इन 18 जिलों में 40 से 77 फीसदी तक क्रमशः कम बारिश हुई है | आज़ादी का जश्न मनाने के बाद ही बारिश की खुशियाँ मनाने की संभावनायें जताई जा रही है |

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बच्चों के भोजन पर लगे टैक्स का विरोध

भारतीय संसद एवं राज्य एसेम्बलियों के कैंटीनों में प्रतिनिधियों के खाद्य सामग्रियों के रेट हैं – चावल –2.00, दाल –1.50 प्रति प्लेट, चपाती – 1.00 प्रति पीस, चाय = 1.00 प्रति कप, रसगुल्ला – 1.00 प्रति पीस आदि-आदि | यह भी जानें कि उन प्रतिनिधियों की पगार है लगभग – 80,000 रू. प्रतिमाह, और वे भी बिना टैक्स के |

इन्हें देश का वह नर-नारी जो गांवों में 30 से 32 रू. प्रतिदिन पसीना बहा-बहाकर कमाता है वो गरीब नहीं लगता और यह भी जानें कि अब वे गरीब के बच्चों को शिक्षा से दूर करने की साजिश भी रचने लगे हैं |

मधेपुरा जिला के प्राइवेट स्कूल्स के हास्टलों में रहकर पढ़नेवाले गरीब किसान-मजदूर के बच्चों के भोजन पर 13.5% वैट (टैक्स) लगाने के सरकारी निर्णय का प्राइवेट स्कूल्स के संचालकों, निदेशकों एवं प्रचार्यों द्वारा जमकर विरोध किया जा रहा है |

इन शिक्षकों का कहना है कि शराब पर टैक्स लगाना और बढाना तो इसलिए भी अच्छा लगता है कि वह शरीर और आत्मा दोनों का नाश करती है | लेकिन, बच्चों के भोजन पर टैक्स (वैट) लगाना-शिक्षा को नाश करने की साजिश के अलावा और क्या कहा जा सकता है |

प्राइवेट स्कूल्स एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर सोसाइटी के जिलाध्यक्ष श्री किशोर कुमार की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में वक्ताओं ने बच्चों के भोजन पर ‘वैट’ लगाने को सरकार का दुर्भाग्यपूर्ण निर्णय कहा | वित्त मंत्री द्वारा दी गई टिपण्णी को आड़े हाथों लेते हुए माया विद्या निकेतन, शहीद चुल्हाय मार्ग की निदेशिका सह जिला सचिव चंद्रिका यादव सहित निक्कू नीरद, नवीन कुमार, बलराम सोनी, योगेन्द्र झा, विलास कुमार, नवीन कुमार, ओम प्रकाश यादव, वरुण कुमार, नफीउर रहमान, प्रदीप शर्मा, चन्दन सिंह, मुकेश झा, एम. के. मुन्ना आदि ने कड़ा विरोध जताया |

यह भी जानें कि संघ के प्रवक्ता मानव कुमार सिंह के अलावे अबु जफ़र, नंदिनी वर्णवाल, रतन कुमार, जे. के. वर्मा, मिलन कुमार, राजेश्वर साह, पवन कुमार अदि आचार्यों, प्राचार्यों ने डॉ. मधेपुरी मार्ग के बगल में एन०एच०-106 के सामने नव स्थापित किरण पब्लिक स्कूल में आयोजित बैठक में सरकार के इस निर्णय को तुगलकी फरमान बताया |

बैठक का संचालन ज्ञानदीप निकेतन के प्राचार्य चिरामणि यादव ने किया और धन्यवाद् ज्ञापित अमन प्रकाश ने |

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भीषण डकैती के बाद जाँच करने पटना से आई फोरेंसिक टीम

दिन दहाड़े डकैती के बाद सकते में हैं मधेपुरा के जयप्रकाश नगर के लोग | तीन बजे दिन में तीन युवक बहुत आराम से आता है शिक्षक राजेश सिंह के निवास का पता पूछता है | नब्बे वर्षीय मकान मालिक पूर्व विधायक जागेश्वर हजरा हाथ उठाकर उपरी मंजिल की ओर इशारा करते हैं | तीनों युवक आराम से सीढियां चढ़ते हुए शिक्षक राजेश के दरवाजे पर देता है दस्तक | घर में प्रवेश कर टी.वी. ऑन कर शिक्षक राजेश की पत्नी एवं बच्चे को पिस्टल दिखाकर हाथ-मुँह बाँध बंधक बना लेता है | और फिर लगभग दो घंटे तक पूरा घर खंघाल कर 25 लाख नगद और पाँच लाख के जेवर व अन्य सामग्रियां बैगों में भरता है | पसीना-पसीना हो जाने के कारण पानी से मुँह धोकर तीनों लुटेरे फ्रेश होते हैं |  फिर इत्मीनान से कन्धे पर रुपयों से भरा बैग लटकाकर तीनों वापस सीढियों के रास्ते बाहर निकल कर न जाने कहाँ चले जाते हैं जिसका अता-पता करने में मधेपुरा की पुलिस पसीना बहा रही है | फिर भी डकैतों का अबतक कोई ठोस सुराग नहीं मिल पाया है |

डकैती की इस घटना ने मधेपुरा शहर वासियों की नींद उड़ा दी है | मधेपुरा समाहरणालय से मात्र दो सौ गज की दूरी पर ऐसी घटना घटी, जहाँ घनी आबादी है, कहीं खाली जमीन नहीं है | बहरहाल प्रशासन की कोशिश जोरों पर है और जाँच के लिए पटना से आई फोरेंसिक टीम काम पर लग चुकी है | ऐसा माना जा रहा है की डकैत पकड़े जायेंगे |

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भीषण डकैती से थर्राया मधेपुरा

कोचिंग सेंटर के शिक्षक के घर नगद 25 लाख की दिन दहारे लूट ! लुटेरे बदमाशों ने शिक्षक राजेश कुमार सिंह उर्फ पप्पू सिंह के भाड़ेवाले घर में कल दिन के तीन बजे बाद घुस गये | शिक्षक पप्पू सिंह की पत्नी सरिता देवी को पिस्टल सटाकर हाथ बाँध दिया | माँ-बेटे को मुँह पर पट्टी लगा दी | टी.वी. ऑन कर रुपए बैग में भरने लगे और जब बैग रुपयों से भर गया तो बच्चे के स्कूल बैग में रुपए कसकर लुटेरे फरार हो गये |

सूचना की जानकारी मिलने पर मधेपुरा सदर डी.एस.पी. कैलाश प्रसाद एवं थानाद्यक्ष मनीष कुमार फ़ोर्स के साथ घटनास्थल पर पहुंचे | बता दें कि पीड़ित पप्पू सिंह पूर्व विधायक जागेश्वर हाजरा के घर किराये पर अपनी पत्नी और बच्चे के साथ रहते हैं | यूँ उनका पैतृक गाँव उदाकिसुनगंज अनुमंडल का मुरली चंदवा गाँव है |

Daylight Robbery at Madhepura

पुलिस द्वारा यह पूछे जाने पर कि आपने 25 लाख की राशि बैंक में क्यों नहीं जमा की, के जबाब में शिक्षक द्वारा यही कहा जाता है कि समयाभाव के कारण बैंक में जमा नहीं हो पाया | ऐसे जबाब को सुनकर लोग चर्चा करने लगे हैं कि क्या इतनी बड़ी राशि दो-चार दिनों की कमाई है, क्योंकि बैंक तो इतने दिनों तक बन्द नहीं रहता |

शहर में इस घटना की चर्चा आम हो गयी है | एक ओर लोग शिक्षक के स्तर की चर्चा कर रहे हैं तो दूसरी ओर पुलिस की वर्दी से दूर होते जा रहे स्वभाव की | जहाँ पूर्व डी.जी.पी. अभयानन्द थानेदारों को निदेश देते थे कि जनमानस को थाने में सम्मान के साथ बैठायें वहीँ जनता द्वारा किये गये एफ.आई.आर. की प्राप्ति के लिए कई डिबिया तेल जलाना पड़ जाता है | बेचारी जनता क्या करे – सभी अपनी जगह से दूर खड़े दिखते हैं |

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कभी नहीं मरेगी कोसी की उड़नपरी गीतांजलि

जन्म लेने के बाद जिसने चलना सीखा ही नहीं बल्कि हमेशा दौड़ती ही रही उसी उड़नपरी का नाम है – गीतांजलि | प्रतिदिन दस किलोमीटर दौड़ना, दो मंजिले घर की सीढियों पर ननस्टॉप सेंचुरी मारना और फिर आगे पटना के गोलघर की सीढ़ियों पर दौड़ते हुए चढ़ते-उतरते चौका-छक्का जिसके लिए आम बात हो वह भला क्यों नहीं जीतेगी – राज्यस्तरीय सौ गोल्ड मेडल और राष्ट्रीय स्तर पर दर्जनों गोल्ड एवं सिल्वर मेडल |

दुनिया को अल्पायु में ही अलविदा कहने वाली उस उड़नपरी, कोसी की बेटी, गीतांजलि को यहाँ के जजवाती धावक-धाविकाएँ मरने नहीं देंगे | सौ से ऊपर धावक एवं पचास से ऊपर धाविकाएँ क्रमशः दस किलोमीटर और तीन किलोमीटर की दौड़ पूरी कर गीतांजलि को श्रद्धांजलि दी और स्वयं वे गीतांजलि फाउंडेशन की ओर से पुरस्कृत भी हुए |

Madhepura DM. L.P.Chauhan paying homage to Geetanjali.
Madhepura DM. L.P.Chauhan paying homage to Geetanjali.

कार्यक्रम का आरम्भ गीतांजलि की तस्वीर पर जिला पदाधिकारी एल.पी.चौहान, जिला परिषद अद्यक्षा मंजू देवी, समाजसेवी डॉ. भूपेन्द्र मधेपुरी सहित अन्य गणमान्य द्वारा पुष्पांजलि अर्पण से किया गया | आगे धावकों को हरी झंडी दिखाकर “गीतांजलि रोड रेस” का श्री गणेश और गणमान्य लोगों द्वारा उद्गार व्यक्त किया गया |

सर्वप्रथम डॉ.मधेपुरी ने गीतांजलि का स्मरण करते हुए नोबेल पुरस्कार प्राप्त रवीन्द्रनाथ टैगोर की गीतांजलि की प्रथम पंक्ति से लोगों को रू-ब-रू कराते हुए यही कहा – हे देव ! बहा दो अहंकार, मेरे ही आँसू जल में !! यही संकल्प हम सभी आज के दिन लें | उन्होंने यह भी कहा कि गीतांजलि जिस मधेपुरा की धूल भरी सड़कों पर दौड़कर ऊंचाई पायी है वह मधेपुरा उसके नक़्शे कदम पर चलकर न जाने कितनी गीतांजलि पैदा करेंगी जो राष्ट्रीय स्तर की धाविकाएँ बनकर उसी की गीत सदा गाती रहेंगी |

अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार निराला, अंचलाधिकारी उदय कृष्ण यादव, हिन्दुस्तान ब्यूरो चीफ अमिताभ, जागरण ब्यूरो चीफ धर्मेन्द्र भारद्वाज, प्राचार्य अशोक कुमार, पूर्व कुलसचिव डॉ.गणेश कुमार एवं जिला परिषद की अद्यक्षा मंजू देवी, प्राचार्या चन्द्रिका यादव, डॉ. अरुण कुमार, परमेश्वरी प्र.यादव, आई.एम.ए.अद्यक्ष डॉ.मिथिलेश कुमार, डॉ.आर.के.पप्पू, डॉ.पी.के.मधुकर, डॉ.अमित कुमार, ललन कुमार अद्री सहित परिवार के लोग अरविन्द कुमार, सुशील कुमार, पृथ्वीराज यदुवंशी एवं खेल से जुड़े संतकुमार, अनिल कुमार राज आदि ने अपने संस्मरण व उद्गार व्यक्त किये तथा गीतांजलि के बहाने नारी सशक्तिकरण की दिशा में कुछ करने का संकल्प दुहराया |

कार्यक्रम के आखिरी दौर में समस्त पुरुष-महिला प्रतिभागियों को “रनिंग शूज़ एवं जर्सी” पुरस्कार स्वरुप दिए गये | मंच संचालन हर्षवर्धन सिंह राठौर एवं डॉ. अलोक कुमार ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन संजीव ने किया |

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पी.जी. शिक्षक भी हड़ताल पर जाने को विवश  !

भू.ना.मंडल वि.वि. के पी.जी. शिक्षकों की कलम बन्द एक दिवसीय हड़ताल दिनांक 7-अगस्त (शुक्रवार) को होगी | मंडल वि.वि. के दर्ज़नों स्नातकोत्तर विभागों के तमाम शिक्षकों ने अखिल भारतीय वि.वि. एवं महाविद्यालय शिक्षक संघ के बैनर तले आयोजित बैठक में ए.आई.फुक्टा के आह्वान पर सात अगस्त को कलम बन्द हड़ताल पर जाने का सर्वसम्मत निर्णय लिया है |

यद्यपि शिक्षक को समाज का सृजनहार ही नहीं बल्कि रक्षक और रखवाला भी कहा जाता है, फिर भी शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने एवं उनकी समस्याओं के निदान पर नजर रखने की चेष्टा न तो केन्द्र सरकार कर रही है और न राज्यसरकार |

Dr. Naresh Kumar , Mahasachiv Vishwavidyalaya Sangh and Senate Member BNMU
Dr. Naresh Kumar , Mahasachiv Vishwavidyalaya Sangh and Senate Member BNMU

फिलहाल यह एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल सातवें वेतन पुनरीक्षण आयोग के गठन एवं शिक्षकों की अन्य समस्याओं के प्रति केन्द्र सरकार के मानव संसाधन विभाग की उदासीन रवैये के खिलाफ मनोविज्ञान विभाग के डॉ.कैलाश प्रसाद यादव की अद्यक्षता में की गयी जिसमें सभी विषयों के पी.जी. शिक्षकों के वि.वि. संघ के महासचिव एवं सीनेट सदस्य डॉ. नरेश कुमार के पुरजोर समर्थन को सभी शिक्षक बन्धु महसूसते रहे |

बैठक में वि.वि. के सभी विभागों के शिक्षकों की उपस्थिति बनी रही जिसमें मुख्यरूप से मौजूद रहे- रसायन विभाग के डॉ.कौशलेन्द्र कुमार, वाणिज्य के डॉ.ओमप्रकाश चौधरी, वनस्पति के डॉ. बलराम सिंह, हिन्दी के डॉ.सिद्देश्वर काश्यप एवं दर्शनशास्त्र के डॉ.अनिल कुमार आदि |

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बी.एन.मंडल वि.वि. बी.सी.ए. फर्स्ट सेमेस्टर की परीक्षा की तिथि में परिवर्तन

 भू.ना.मंडल वि.वि. के परीक्षा नियंत्रक डॉ.नवीन कुमार ने मधेपुरा अबतक को बताया कि 7 अगस्त को पी.जी.शिक्षकों के एक दिवसीय कलम बन्द हड़ताल पर जाने के निर्णय के अनुरूप बी.सी.ए. प्रथम सेमेस्टर की 7-अगस्त को होने वाली परीक्षा अब 14-अगस्त को होगी | याद रहे कि परीक्षा केन्द्र एवं परीक्षा आरम्भ का समय पूर्ववत ही रखा गया है |

ज्ञातव्य हो कि द्वितीय सेमेस्टर की बी.सी.ए. परीक्षा कार्यक्रम में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है | परीक्षा नियंत्रक डॉ.कुमार ने कहा कि द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षा का कार्यक्रम पूर्ववत ही रहेगा |

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पर्दे में रहने दो . . . . ! पर्दा ना उठाओ . . . . !!

कभी गरीबों का शिमला व दार्जिलिंग कहलानेवाला मधेपुरा अब यदाकदा राजस्थानी गर्मी का भी अहसास करा देता है | इस दौर से मधेपुरा का मौसम ही नहीं गुजर रहा बल्कि यहाँ की राजनीतिक गतिविधियों में भी स्पष्ट परिवर्तन व बदलाव नजर आने लगा है | जब मधेपुरा की विरासत रासबिहारी-शिवनंदन-भूपेन्द्र . . . की “होत” हुआ करती तबके दिनों में सभी समाजसेवियों की सही-सही पहचान होती | उन्हें भरपूर सामाजिक इज्जत व सम्मान दिया जाता | तब की राजनीतिक गतिविधियों में आज की तरह गर्मी नहीं हुआ करती | सारा वातावरण ठंडा-ठंडा, कूल-कूल हुआ करता | तब के नेतृत्व वैसों को ढूंढ-तलाशकर उम्मीदवार बनाते जो कार्यकर्ता कहीं दूर-दराज के गाँवों-कस्बों में, किसी अल्पसंख्यकों के टोले-टप्परों में या चटाई पर बैठकर किसी दलित बस्ती में – सामाजिक कुरीतियों से लड़ने हेतु योजना बना रहे होते, शिक्षा का अलख जगा रहे होते तथा लोगों को हक़ की खातिर लड़ने की ट्रेनिंग दे रहे होते |

परन्तु, आज मधेपुरा के मौसम के साथ-साथ राजनीतिक मौसम में भी काफी बदलाव आ गया है | चारों ओर गर्मी है और है गरमाहट | विधायकों का चुनाव सामने है | आचार संहिता झाँकने लगी है | कहीं मंत्री नरेन्द्र यादव तो कहीं प्रभारी भूपेन्द्र यादव का आगमन होने लगा है | उनके इर्द-गीर्द बैठनेवालों से सभी पैसेवाले रिश्ते जोड़ने लगे हैं | जिसने गाँव कभी देखा नहीं, जिन्हें किसानों की माली हालत का पता नहीं, फ़सल का ज्ञान नहीं, समस्याओं की जानकारी नहीं. . . . . वे सभी नया-नया कुर्ता-पायजामा सिलाने लगे हैं | इतना ही नहीं महीने दो महीने पहले कहीं और थे लेकिन आज कहीं और दिखने लगे हैं | तुर्रा तो यह है कि चलते-चलते रुक गये और बगल वाले के दरवाजे खटखटाने लगे हैं . . . . क्योंकि वहाँ एक पुराना गाना बज रहा होता है – मेरा घर खुला है, खुला ही रहेगा, तुम्हारे लिए . . . . . !

और जो बापू के गांवों के लोगों की सेवा में लगा है उन्हें वहीँ रहने दो . . . . वहीँ सो जाने दो और गाँधी के गाँवों में ही दफ़न हो जाने दो . . . . और आगे बहुत कुछ ….. लेकिन उन्हें … पर्दे में रहने दो . . . . पर्दा ना उठाओ !!

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मधेपुरा जिले का बेशकीमती मीणा अदृश्य हो गया !

मधेपुरा के जिला पदाधिकारी गोपाल मीणा के स्थानान्तरण से जहाँ एक ओर आम लोगों की जुबान से अनायास यह आवाज निकली कि क्या हो पायेंगी अब मधेपुरा जिला में कदाचार मुक्त परीक्षाएँ एवं प्रतिभाओं का समुचित सम्मान ! वहीं दूसरी उनके स्थानान्तरण के समाचार को सुनते ही किसानों को जैसे सांप सूंघ गया | उनके जाने के बाद धान बिक्री आदि की राशि जो किसानों के बैंक खाते में सीधे जमा होती रही उसका क्या होगा ? क्या फिरसे बिचौलियों की चांदी कटने लगेगी ?

विदाई समारोह में उपस्थित भीड़ को संबोधित करते समय सभी वक्ताओं ने अपनी-अपनी भावनाओं को नियंत्रित करने में किसी तरह सफलता तो पा ली परन्तु डी.डी.सी. मिथिलेश कुमार एवं विजय झा इतने भावुक हो गये कि मुंह से आवाज तक नहीं निकल पाई, लेकिन नयनों से अश्रुकण अवश्य टपक पड़े |

Farewell Party of DM Gopal Meena .
Farewell Party of DM Gopal Meena .

अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार निराला, एन.डी.सी. प्रदीप कुमार झा, अंचलाधिकारी उदय कृष्ण यादव तथा अल्फाजों के ज़ादुगर पंचायत पदाधिकारी मो.खुर्शीद आलम सहित अन्य पदाधिकारियों ने मीणा साहब के निर्देशन में किये गये कार्यों से प्राप्त अनुभवों का बखूबी इजहार किया | समाजसेवियों की ओर से डॉ.मधेपुरी ने कहा कि चन्द रोज कवल डॉ. कलाम दुनिया को छोड़कर चले गये और आज मधेपुरा को छोड़कर गोपाल जा रहा है | डॉ मधेपुरी ने अपनी पंक्तियाँ यूँ कही :- “ दुनिया रंगमंच है अपनी, सभी भूमिका निभा रहे हैं | कोई आकर हँसा गये जी, कोई जाकर रुला रहें हैं || ”

डॉ.मधेपुरी ने यह भी कहा कि यदि हमारी चाहत में ताकत होगी तो सारा कायनात हमें मदद करने में इस तरह जुट जायेगा कि जल्द ही हमारे हर दिल अज़ीज़ मीणा साहब कोसी-कमिश्नर बनकर हमारे बीच आ जायेंगे और आपके साथ काम करेंगे, आपको नेतृत्व प्रदान करेंगे तथा कुशल मार्गदर्शन भी देंगे |

मौके पर उपस्थित आरक्षी अधीक्षक आशीष भारती द्वारा उनके स्थानान्तरण से जिन वर्गों में ख़ुशी हुई, उसे रेखांकित किया गया |

निवर्तमान जिला पदाधिकारी गोपाल मीणा ने अपने संबोधन में कहा कि अच्छी तरह काम करने के लिए अच्छे फिटनेस की जरुरत होती है जो आप समय निकाल कर करते रहेंगे | साथ ही पारदर्शिता के साथ कार्यों के निष्पादन में, गरीबों एवं छात्रों की प्रतिभा को सम्मान देने में तथा औरों के लिए जीने में “आनंद” महसूसते रहेंगे |

अंत में सबों ने फूल मालाओं से उस बेशकीमती मीणा को इस कदर ढँक दिया मानो वे अदृश्य ही हो गये | उस लम्हे को शायर खुर्शीद साहब ने अल्फाजों के जरिये भावनाओं की बारिश से नहला दिया और अन्त में उन्होंने धन्यवाद देते हुए सभा की भी विदाई कर दी |

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बिहार के प्रशासनिक और पुलिस महकमे में बड़ा फेरबदल

चुनाव से पूर्व बिहार सरकार ने 48 आइएएस और 44 आइपीएस अधिकारियों को स्थानांतरित कर राज्य के प्रशासनिक और पुलिस महकमे में बड़ा फेरबदल किया है। लक्ष्मी प्रसाद चौहान मधेपुरा के नए डीएम होंगे। वे गोपाल मीणा की जगह लेंगे। मीणा को कम्फेड के प्रबंध निदेशक की जिम्मेदारी दी गई है। इन तबादलों के बाद बलिया के एसडीपीओ कुमार आशीष मधेपुरा के एसपी बनाए गए हैं।

स्थानांतरित आइएएस और आइपीएस अधिकारियों की पूरी सूची इस प्रकार है :

स्थानांतरित आइएएस अधिकारी

नाम – स्थानांतरण से पहले – स्थानांतरण के बाद

रामेश्वर सिंह – महानिदेशक, सेंटर फॉर गुड गवर्नेंस – विभागीय जांच आयुक्त, सामान्य प्रशासन

आनंद किशोर – कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति – प्रमंडल आयुक्त, पटना

कृष्ण मोहन – डीएम, गोपालगंज – संयुक्त सचिव, सहकारिता विभाग

कु. विनोद नारायण सिंह – डीएम, शिवहर – निदेशक, माध्यमिक शिक्षा

जीतेंद्र श्रीवास्तव – डीएम, पूर्वी चंपारण – कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति

लक्ष्मी प्रसाद चौहान – डीएम, सुपौल – डीएम, मधेपुरा

ललन जी – डीएम, नवादा – डीएम, कटिहार

प्रभाकर झा – डीएम, कैमूर – संयुक्त सचिव, स्वास्थ्य विभाग

नवीन चंद्र झा – डीएम, औरंगाबाद – राज्य परिवहन आयुक्त, पटना

कुंवर जंग बहादुर – डीएम, अरवल – उत्पाद आयुक्त सह डीजी निबंधन

प्रकाश कुमार – डीएम, कटिहार – संयुक्त सचिव, खाद्य व उपभोक्ता संरक्षण

शशिभूषण कुमार – डीएम, सहरसा – निदेशक, आइसीडीसीएस

राजेश कुमार – डीएम, पूर्णिया – सचिव, राजस्व पर्षद

प्रतिमा एसके वर्मा – डीएम, सीतामढ़ी – डीएम, पटना

पंकज कुमार पाल – डीएम, भोजपुर – डीएम, पूर्णिया

अनुपम कुमार – डीएम, मुजफ्फरपुर – डीएम, पूर्वी चंपारण

वीरेंद्र प्रसाद यादव – डीएम, भागलपुर – डीएम, भोजपुर

अभय कुमार सिंह – डीएम, पटना – अपर सचिव, सामान्य प्रशासन

आदेश तितरमारे – प्रबंध निदेशक, कम्फेड – डीएम, भागलपुर

धर्मेंद्र सिंह – कृषि निदेशक – डीएम, मुजफ्फरपुर

नरेंद्र कुमार सिंह – डीएम, अररिया – संयुक्त सचिव, नगर विकास एवं आवास

शशिकांत तिवारी – डीएम, जमुई – संयुक्त सचिव, पीएचइडी

विनोद सिंह गुंजियाल – डीएम, वैशाली – डीएम, सहरसा

मनोज कुमार – संयुक्त सचिव, स्वास्थ्य विभाग – डीएम, नवादा

गोपाल मीणा – डीएम, मधेपुरा – एमडी, कम्फेड

संजय कुमार सिंह – डीएम, सिवान – परियोजना निदेशक, बिहार शिक्षा परियोजना

राजेश्वर प्रसाद सिंह – संयुक्त सचिव, ग्रामीण कार्य – डीएम, कैमूर

उदय कुमार सिंह – संयुक्त सचिव, पीएचइडी – डीएम, लखीसराय

बैदयनाथ यादव – निदेशक, सामाजिक सुरक्षा – डीएम, सुपौल

प्रणव कुमार – डीएम, शेखपुरा – डीएम, समस्तीपुर

बी कार्तिकेय धनजी – डीएम, नालंदा – कृषि निदेशक

मनोज कुमार सिंह – डीएम, लखीसराय – डीएम, जहानाबाद

साकेत कुमार – डीएम, बांका – डीएम, सीतामढ़ी

एम रामचंद्रुडु – डीएम, समस्तीपुर – निदेशक, प्रा. शिक्षा

रचना पाटिल – डीडीसी, नालंदा – डीएम, वैशाली

चंद्रशेखर सिंह – डीडीसी, भागलपुर – डीएम, शेखपुरा

राजकुमार – डीडीसी, मधुबनी – डीएम, शिवहर

कंवल तनुज – डीडीसी, मुजफ्फरपुर – डीएम, औरंगाबाद

कौशल किशोर – डीडीसी, बेगूसराय – डीएम, जमुई

आलोक रंजन घोष – संयुक्त सचिव, मत्स्य व पशु संसाधन – डीएम, अरवल

राहुल कुमार – परियोजना निदेशक, राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी – डीएम, गोपालगंज

महेंद्र कुमार – नगर आयुक्त, दरभंगा – डीएम, सिवान

हिमांशु वर्मा – नगर आयुक्त, मुजफ्फरपुर – डीएम, अररिया

त्यागराजन एसएम – नगर आयुक्त, बिहारशरीफ – डीएम, नालंदा

निलेश रामचंद्र – नगर आयुक्त, गया – डीएम, बांका।

स्थानांतरित आइपीएस अधिकारी
नाम – स्थानांतरण से पहले – स्थानांतरण के बाद

अजिताभ कुमार – आईजी, बीएमपी – आईजी, सुरक्षा का अतिरिक्त प्रभार
प्रदीप कुमार श्रीवास्तव – पदस्थापना की प्रतीक्षा में – डीआईजी, मुजफ्फरपुर
उपेंद्र कुमार सिन्हा – डीआईजी, बीएमपी – डीआईजी, भागलपुर
शालीन – डीआईजी, पटना – डीआईजी, बीएमपी का अतिरिक्त प्रभार
मो. मंसूर अहमद – समादेष्टा, बीएमपी-11 – आईजी (प्रशिक्षण) के सहायक
चंद्रिका प्रसाद – सहायक निदेशक, पुलिस अकादमी – आईजी, बीएमपी के सहायक
विनोद कुमार – रेल एसपी, मुजफ्फरपुर – एसपी, सहरसा
राजेश कुमार – एसपी, मधुबनी – समादेष्टा, बीएमपी-5
अनिल कुमार सिंह – एसपी, गोपालगंज – एसपी, खगड़िया
विनय कुमार – समादेष्टा, बीएमपी10 – एसपी, पश्चिम चंपारण
नीरज कुमार – एसपी, शेखपुरा – समादेष्टा, बीएमपी-9
अख्तर हुसैन – आईजी, कल्याण के सहायक – एसपी, मधुबनी
क्षत्रनील सिंह – एसपी, कटिहार – समादेष्टा, बीएमपी-10
आनंद कुमार सिंह – समादेष्टा, बीएमपी-16 – एसपी, बगहा
पंकज कुमार सिन्हा – एसपी, सहरसा – एसपी, नवगछिया
शेखर कुमार – एसपी, नवगछिया – समादेष्टा, होमगार्ड
सुनील कुमार – आईजी रेल के सहायक – एसपी, निगरानी ब्यूरो
विजय कुमार वर्मा – एसपी, अररिया – पुलिस महानिरीक्षक निरीक्षण के सहायक
सुनील कुमार नायक – एसपी, कैमूर – एसपी, एसटीएफ
कुमार एकले – एसपी, एसटीएफ – एसपी, सुपौल
शिवकुमार झा – एसपी, शिवहर – एसपी, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो
सिद्धार्थ मोहन जैन – एसपी, नालंदा – एसपी, कटिहार
पंकज राज – एसपी, सुपौल – समादेष्टा, बीएमपी-1
शिवदीप लांडे – एसपी, रोहतास – एसपी, एसटीएफ
राजेश त्रिपाठी – आईजी, बीएमपी के सहायक – आईजी, कल्याण के सहायक
मो. शफीउल हक – एसपी, बगहा – समादेष्टा, बीएमपी-11
किम – बीएमपी, होमगार्ड – पुलिस अधीक्षक, आर्थिक अपराध इकाई
विकास वर्मन – एसपी, सीवान – समादेष्टा, बीएमपी-3
नताशा गुड़िया – समादेष्टा, बीएमपी-5 – एसपी, गोपालगंज
एमएस ढिल्लों – एसपी, अरवल – एसपी, रोहतास
हरप्रीत कौर – एसपी, कमजोर वर्ग – एसपी, कैमूर
सौरभ कुमार साह – एसपी, बेतिया – एसपी, सिवान
सुधीर कुमार पोरिका – सिटी एसपी, पटना पूर्वी – एसपी, अररिया
धूरत सायली सबला राम – एसपी, खगड़िया – सिटी एसपी, पटना पूर्वी
राजेंद्र कुमार भील – सिटी एसपी, मुजफ्फरपुर – एसपी, शेखपुरा
आशीष भारती – एसपी, मधेपुरा – एसपी, निगरानी ब्यूरो
कुमार आशीष – एसडीपीओ, बलिया – एसपी, मधेपुरा
रविरंजन कुमार – एसडीपीओ, सदर खगड़िया – सिटी एसपी, गया
अवकाश कुमार – एसडीपीओ, महाराजगंज – सिटी एसपी, भागलपुर
आनंद कुमार – एसडीपीओ, समस्तीपुर – सिटी एसपी, मुजफ्फरपुर
दिलीप कुमार मिश्रा – एसपी, निगरानी ब्यूरो – एसपी, अरवल
अश्विनी कुमार – एसपी, निगरानी ब्यूरो – एसपी, शिवहर
विवेकानंद – एएसपी, नगर पटना – एसपी, नालंदा।

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