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बीएनएमयू के राष्ट्रीय सेमिनार में इंग्लैंड-जापान के प्रतिभागियों ने भी शिरकत की

भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के सजे हुए ऑडिटोरियम में UGC एवं PG भौतिकी द्वारा संयुक्तरुप से आयोजित “Recent Innovations in Renewable Energy” विषय पर दो दिवसीय (5-6 जून) राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया | इस सेमिनार में बिहार के विभिन्न विश्वविद्यालयों के 140 सहित झारखंड से 8, नेपाल से 2 तथा जापान व इंग्लैंड से 1-1 यानी कुल 152 प्रतिभागियों ने भाग लिया |

उद्घाटन के तुरंत बाद बीएनएमयू के विद्वान कुलपति डॉ.अवध किशोर राय, प्रतिकुलपति डॉ.फारुख अली, आईआईटी दिल्ली से आये मुख्य अतिथि डॉ.गोपाल नन्द तिवारी, भौतिकी के लोकप्रिय यूनिवर्सिटी प्रोफेसर डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी, पूर्व कुलपति डॉ.अनंत कुमार, सीनेट सदस्य डॉ.नरेश कुमार, पीजी भौतिकी के अध्यक्ष प्रो.निखिल प्रसाद झा, डॉ.अरुण कुमार एवं ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ.विमल सागर सहित अन्य शिक्षाविदों ने बिहार सरकार के Science & Technology विभाग एवं PG Physics के संयुक्त तत्वावधान में छपे Souvenir का विमोचन किया |

Former University Professor of Physics & Special Guest Dr.Bhupendra Madhepuri giving certificate to Dr.Kumari Sadhana 'Suman' and so many other researches in the last session of "Renewable Energy " Seminar.
Former University Professor of Physics & Special Guest Dr.Bhupendra Madhepuri giving certificates to Dr.Kumari Sadhana ‘Suman’ and so many other researchers in the last session of “Renewable Energy ” Seminar.

बता दें कि कार्यक्रम विलम्ब से शुरू होने के साथ-साथ भीषण गर्मी होने के कारण उद्घाटन-सत्र में माननीय कुलपति सहित सभी विद्वान वक्ताओं ने संक्षेप में ही विश्व पर्यावरण दिवस को समेटते हुए अक्षय ऊर्जा के नवीनतम अनुसंधानों को रोचक बनाकर बेहतरीन समां बांध दी | कुलपति डॉ.राय ने तो भीषण गर्मी से परेशान हो रहे शोधार्थियों की दशा देखकर ऑडिटोरियम को शीघ्रातिशीघ्र एयर कंडिशन्ड कराने की घोषणा भी कर दी |

यह भी बता दें कि UGC के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय सेमिनार के समापन-सत्र में मुख्यवक्ता के रूप में IIT Delhi के डायरेक्टर रहे डॉ.जी.एन.तिवारी ने अक्षय ऊर्जा के क्षेत्रों में कई नवीनतम जानकारियों से प्रतिभागियों को लाभांवित किया वहीं प्रतिभागियों को सर्टिफिकेट देने के दरमियान विशिष्ट अतिथि डॉ.मधेपुरी ने कहा कि नीतीश सरकार की रीढ़ माने जाने वाले ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव से उन्होंने गुजारिश की है कि बिहार के किसानों को सोलर पंप सेट देने, बिहारवासियों को प्रदूषण मुक्त वातावरण में जीने एवं पवन ऊर्जा, सौर ऊर्जा, पर बिजली, सौर पार्कों के विकास आदि क्षेत्रों में Renewable Energy पर जमकर शोधात्मक कार्य करने के लिए “अक्षय ऊर्जा मंत्रालय” स्वतंत्र विभाग के रुप में स्थापित किया जाय |

अंत में सेमिनार की सफलता के लिए ओर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ.विमल सागर द्वारा एंकर डॉ.फजल सहित डॉ.अशोक कुमार, डॉ.मोहित कुमार घोष, डॉ.प्रज्ञा प्रसाद, शोधकर्ता श्रुति कुमारी, ऑक्सफोर्ड की सपना सिन्हा, जापान की सृष्टि सिन्हा, काठमांडू के मनोज कुमार मिश्रा, डॉ.कुमारी साधना सुमन, मो.अब्दुल सत्तार, प्रवेश कुमार, सौरभ कुमार……… सहित जो सैकड़ों छात्र-छात्राएं व शोधकर्तागण अन्त तक मौजूद रहे, सबों को हृदय से धन्यवाद ज्ञापित किया गया |

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विश्व पर्यावरण दिवस पर मधेपुरा पौधरोपण के लिए सजग !

विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) के अवसर पर मधेपुरा में दिनभर पौधरोपण किया गया- विश्वविद्यालय से लेकर महाविद्यालयों में एवं छोटे-बड़े सभी तरह के विद्यालयों में |

जहाँ एक ओर भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ.ऐ.के.राय, प्रतिकुलपति डॉ.फारूख़ अली एवं बी.एन. मुस्टा के महासचिव व सीनेट सदस्य डॉ.नरेश कुमार सहित बड़ी संख्या में शिक्षक और छात्रों ने सम्मिलित रुप से शहीद चुल्हाय उद्यान , कीर्ति नारायण वाटिका आदि से लेकर विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस में इस अवसर पर पौधरोपण किया वहीं समाहरणालय परिसर में डीएम नवदीप शुक्ला एवं एसपी बाबूराम ने ग्लोबल वार्मिंग से बचाव एवं पर्यावरण की चर्चा करते हुए डीडीसी मुकेश कुमार, एडीएम मुर्शीद आलम, डीपीआरओ महेश पासवान आदि अधिकारीगण की मौजूदगी में पौधरोपण किया | इस अवसर पर डीएम ने कहा कि किसानों को वन विभाग की तरफ से पौधों के साथ कुछ निश्चित प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है |

बता दें कि विश्व पर्यावरण दिवस पर टीपी कॉलेज मधेपुरा, सीएम साइंस कॉलेज तथा पीएस कॉलेज से लेकर सुदूर  यूभीके कॉलेज करम्मा  के NSS कार्यकर्ताओं द्वारा जमकर पौधरोपण किया गया |

यह भी जानिए कि पर्यावरण प्रदूषण को मानव जीवन का खतरा मानने वाली सांस्कृतिक संस्था “सृजन दर्पण” के कार्यालय परिसर में पौधरोपण एवं विचारगोष्ठी का आयोजन किया गया | साथ ही चर्चा के दरमियान यह बात कही गयी कि पर्यावरण प्रदूषण का असर वातावरण में विष घोलता जा रहा है |

यह भी बता दें कि स्टेशन को हरा-भरा रखने के लिए मधेपुरा रेलवे स्टेशन परिसर में भी पदाधिकारियों द्वारा पौधरोपण किया गया | साथ ही जागरुक मुखियागणों ने अपने-अपने पंचायतों में भी पौधरोपण कर जनजीवन को अस्त-व्यस्त होने से बचाया है | पौध रोपण को जन जीवन के लिए महत्वपूर्ण मानने के कारण लोगों ने व्यक्तिगत रूप से अपने-अपने परिसर में भी एक-दो पौधे लगाया है तथा विश्व पर्यावरण दिवस को इस बार उत्सव के रूप में मनाया है |

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केपीएस से लेकर केन्द्र तक बेटियों ने उड़ान भरी…..!

केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) नई दिल्ली ने 10वीं बोर्ड परीक्षा के रिजल्ट घोषित कर दिए | जहाँ अखिल भारतीय रैंकिंग में चार में से तीन बेटियों- रिमझिम अग्रवाल (बिजनौर), नंदिनी गर्ग (शामली), श्री लक्ष्मी (कोच्चि) एवं एक बेटे प्रखर मित्तल (गुड़गांव) ने 500 में से 499 अंक हासिल कर देश में टॉप किया वहीं 498 अंक लाकर 7 परीक्षार्थी दूसरे स्थान पर रहे तथा 497 अंक लाकर 14 परीक्षार्थी तीसरे स्थान पर |

जानिए कि इस वर्ष लगभग 16 लाख 25 हज़ार परीक्षार्थियों के लिए देश व विदेश सहित लगभग साढ़े चार हजार परीक्षा केन्द्र बनाए गये, जिसमें 14 लाख के लगभग छात्र-छात्राएं उत्तीर्ण हुए | हाँ ! जहाँ तक पास होने की बात है- छात्राएं 88.67 फीसदी एवं छात्र 86.70 फीसदी उत्तीर्ण हुए |

यह भी बता दें कि तिरुवनंतपुरम जोन 99.6 फ़ीसदी रिजल्ट के साथ प्रथम, चेन्नई जोन 97.37% रिजल्ट के साथ द्वितीय तथा अजमेर जोन 91.86% रिजल्ट के साथ तृतीय स्थान पर रहा | आपको दिल्ली जोन के ‘Pass प्रतिशत’ जानने की जिज्ञासा अवश्य होती होगी | तो लीजिए देश की राजधानी दिल्ली जोन का Pass प्रतिशत रिजल्ट है- 78.62% जो पिछले साल की तुलना में ‘ना’ के बराबर बढ़त दर्ज करायी है |

यहाँ पटना जोन में बिहार-झारखंड आता है और जिसमें कुल 1,61,078 परीक्षार्थियों को सफलता मिली और 22,367 परीक्षार्थी फेल हुए, वहीं खगोल के रोहित राज एवं धनबाद की मैत्री शांडिल्य 99.2% अंक लाकर दोनों के  दोनों स्टेट बिहार और झारखंड में टॉपर हुए | पटना जोन में झारखंड से बेहतर रिजल्ट रहा बिहार का |

अब कोसी कमिश्नरी के तीनों जिलों मधेपुरा, सहरसा और सुपौल के बाबत जानने की जिज्ञासा आपके मन में उमड़-घुमड़ रही होगी…. तो जानिए कि जहाँ जिला मधेपुरा का टॉपर 97.2% अंक के साथ रहा शिवम, वहीं सहरसा का टॉपर 97.2% अंक के साथ रहा अंकित और सुपौल के टॉपर अभिषेक को प्राप्त हुआ 95.06% अंक जबकि मधेपुरा के किरण पब्लिक स्कूल की छात्रा शिवांगी 95.60% अंक लाने के बावजूद मधेपुरा जिले के सकेंड टॉपर ही रही | मधेपुरा जिले के जवाहर नवोदय विद्यालय (सुखासन) के छात्र शिवम को शिवांगी से 0.60% कम अंक प्राप्त करने पर ही स्कूल टाॅॅॅपर होने का अवसर मिल गया |

शिवांगी जैसी हर बेटी बने स्वाभिमान पिता का, उस बेटी की जय हो……. उस स्कूल की जय हो !

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कोसी में पहली बार चली इलेक्ट्रिक ट्रेन !

13 साल बाद कोसीवासियों का सपना तब पूरा हुआ जब 30 मई (बुधवार) के दिन पहली बार सहरसा-मानसी रेलखंड पर लोगों ने इलेक्ट्रिक ट्रेन को बड़ी रेल लाइन पर दौड़ती हुई देखा | जगह-जगह तो इलेक्ट्रिक इंजन लगी ट्रेन को देखने के लिए बच्चे ही नहीं नर-नारियों की भी भीड़ जुट गई | कोसी अंचल में खुशियों की बाढ़ आ गई | लोग यह बोलते हुए सुने गये कि खुशी का कारण है तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद द्वारा मधेपुरा को दिया गया विद्युत रेल इंजन फैक्ट्री और मधेपुरा के तत्कालीन डायनेमिक डीएम मो.सोहैल द्वारा निर्धारित समय से 6 माह पूर्व फैक्ट्री को विद्युत रेल इंजन निर्माण हेतु तैयार करने में जुनून के साथ कार्यों का निष्पादन करना |

सहरसा से जनसेवा एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या – 15209) अमृतसर को जाने के लिए तैयार | इलेक्ट्रिक इंजन के साथ प्लेटफार्म नं.-2 पर लगी है जनसेवा | चालक अरुण कुमार सिंह व सहायक लोकोपायलट धीरेंद्र कुमार को पहले मिठाई खिलाकर और फिर फूल माला पहनाकर मुख्य नियंत्रक अशोक कुमार एवं मुख्य निरीक्षक एचसी मिश्रा द्वारा इलेक्ट्रिक ट्रेन परिचालन की पहली बार शुरुआत कराई गयी |

यह भी बता दें कि आदर्श नगर दिल्ली से सहरसा के लिए चली इलेक्ट्रिक इंजन वाली पुरबिया एक्सप्रेस (नं.- 15280) को छपरा-सहरसा तक लोको पायलट राजीव कुमार चौधरी एवं सहायक लोको पायलट मो.अबु सोहैल द्वारा लाया गया |

यह भी जान लें कि अब गरीब रथ, पुरबिया एक्सप्रेस और जनसेवा एक्सप्रेस के डीजल इंजन की जगह इलेक्ट्रिक इंजन से परिचालन होगा | प्राप्त जानकारी के अनुसार सहरसा लाबी के चालक राजीव कुमार चौधरी एवं चालक कुशाग्र कुमार द्वारा इलेक्ट्रिक इंजन परिचालन हेतु मुगलसराय से क्रमशः 78 एवं 48 दिनों का प्रशिक्षण लिया जा चुका है |

समस्तीपुर मंडल के डीएमई (पावर) श्री चंद्रशेखर प्रसाद ने कहा कि जल्द ही राज्यरानी, हाटेबाजारे, कोसी एवं जन साधारण एक्सप्रेस आदि से भी डीजल इंजन हटाकर इलेक्ट्रिक इंजन लगायी जायेगी | जरा सोचिए, अकेले जनसेवा को सहरसा से बरौनी तक परिचालन पर महीने में 30,000 लीटर डीजल जलता था | जब सभी ट्रेनें बिजली से परिचालित होंगी तो करोड़ों रुपये की बचत होगी और पर्यावरण प्रदूषण भी रुकेगा |

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समाजवादी सोचवाले महामानव हैं मनीषी भूपेन्द्र !

आज 29 मई है ! वर्ष 2018 और दिन मंगलवार ! प्रखर समाजवादी, संत राजनीतिज्ञ एवं सुलझे सोच के नेक इंसान भूपेन्द्र नारायण मंडल की 44वीं पुण्यतिथि !

समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी को इस समाजवादी सोच वाले महामानव के संग साया की तरह साथ रहने का अवसर खूब मिला | उस मनीषी के साथ डॉ.मधेपुरी बैलगाड़ी से रेलगाड़ी और सड़क से संसद तक निरंतर आते-जाते रहे….|

राज्यसभा सदस्य रहते हुए…. उनके निधन (29 मई 1975) के बाद देश जब ‘आपातकाल’ सरीखे उन्मत परिस्थितियों से गुजर रहा था तब जाकर डाॅ.मधेपुरी ने उस विकट परिस्थिति में उस मनीषी के नाम मधेपुरा में जनसहयोग से एक कॉलेज (भू.ना.मंडल वाणिज्य महाविद्यालय) का निर्माण कराया, जननायक कर्पूरी ठाकुर को मधेपुरा लाकर उस मनीषी की अंतिम इच्छा की पूर्ति की और तत्कालीन कॉलेज चौक (अब भूपेन्द्र चौक) पर जन सहयोग से उनकी प्रतिमा लगाई और 1991 में उनकी प्रतिमा के अनावरण के अवसर पर त्रिमूर्ति लालू-शरद-नीतीश से अनुनय-विनय कर उसी दिन जन आकांक्षा के अनुरूप उनके नाम (भू.ना.मंडल) विश्वविद्यालय की घोषणा भी कराई…..|

बता दें कि अपरिहार्य कारणवश आज मधेपुरा से बाहर होने के कारण डॉ.मधेपुरी मधेपुरा के भूपेन्द्र चौक पर निर्मित मनीषी भूपेन्द्र की प्रतिमा पर पुष्पांजलि नहीं कर सकेंगे | इसलिए उन्होंने राजधानी पटना में ही उनके तैल-चित्र पर पुष्पांजलि करते हुए श्रद्धा के चन्द शब्दों के माध्यम से ‘श्रद्धांजलि’ अर्पित की है |

मनीषी भूपेन्द्र !
समाजवादी चिन्तक !!
समाजवादियों के प्रेरणा स्रोत !!!

तुम आये यहाँ-
माटी का पूत बनकर
वंचितो-अछूतों का दूत बनकर

तुम आये यहाँ-
विकट परिस्थितियों में
उन्मत झंझावातों में
आंधी और तूफानों में
परंतु,
बिना रूके, बिना झुके, अविचलित रहकर
बेकशों के संसार को सजाते रहे जीवन भर
सखा और सहयोगी रहकर

बोलो, तुम कहाँ नहीं रहे-
बुद्ध, नानक व कबीर के विचारों-व्यवहारों से लेकर
मार्क्स, गांधी और सोशलिज्म के संस्कारों तक

तुझे क्या कहकर पुकारूँ मैं-
इस धरती का सपूत !
कोई फरिश्ता…… या फिर कोई अग्रदूत !!

चलो, तुझे मसीहा ही मान लेता हूँ
और तुम्हारे श्री चरणों में करता हूँ समर्पित
अपनी चार पंक्तियाँ
‘श्रद्धांजलि’ स्वरुप-

धन आदमी की नींद को हर पल हराम करता,
जो बाँटता दिल खोल उसे युग सलाम करता !
मरने के बाद मसीहा बनता वही मधेपुरी
जो जिंदगी में अपना सबकुछ नीलाम करता !!

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धूप पर भी भारी पड़ा रोजेदारों का जज्बा

रमजान के महीने में रोजा रखना प्रत्येक मुसलमान का फर्ज करार दिया गया है , चाहे गर्मी, जाड़ा या बरसात का मौसम ही क्यों ना हो ! क्या गरीब, क्या अमीर बल्कि बच्चों से लेकर बूढ़े तक सभी ईद के चांद को देखने की आस में रमजान के पाक महीने को 10-10 दिनों के तीन आसरो में अपने-अपने ध्यान को बांट लेते हैं । पहले 10 दिनों तक रहमत व बरकत के लिए, दूसरे 10 दिनों तक मगफिरत के लिए और आखरी 10 दिनों तक जहन्नुम से छुटकारा पाने के लिए समर्पित रहते हैं ।
यह  भी  जानिये कि रोजा एक ऐसी   इबादत है कि अल्लाह  खुुुद उसके  बदले रोजेदारों को बहुत कुछ देता है । रमजान के महीने में  पाक  दिल से मांगी गई दुआएं भी अल्लाह द्वारा कबूल की जाती है ।
दूसरे जुमे की नमाज में इस शुक्रवार को मधेपुरा सहित जिले के  सिंहेश्वर, मुरलीगंज, कुमारखंड, बिहारीगंज …… आदि अन्य सभी मस्जिदों में काफी भीड़ उमड़ी । दोपहर के वक्त धूप इतनी कड़ी थी कि थोड़ी देर बाहर खड़ा रहना भी मुश्किल हो रहा था फिर भी बच्चे नमाजियों का जज्बा कम होते नहीं दिखा । कड़ी धूप में रोजेदार पसीने से तरबतर होने के बावजूद भी अपने रब की रजा के लिए इबादत करते रहे और अकीदत के साथ जुमे की नमाज भी अदा करते रहे ।
यह भी जानिये कि मस्जिदों में खुतबा पढ़ा रहे इमाम ने रमजान की फजीलत के बारे में भी बताया तथा रमजान के रोजे और इबादतों के शबाब का भी जिक्र किया । अपनी तकरीर में इमाम द्वारा यह भी बताया गया की रमजान मेंं रोजा , नमाज और कुरआन शरीफ की तिलावत से जो उदासीन रहता है वह खुदा की रहमतों से मरहूम रह जाता है । अंत में इमाम द्वारा हर किसी के लिए दुआ मांगी जाती है कि अल्लाहताला इस पाक रमजान के महीने में ज्यादा से ज्यादा  नेकियाँ कमाने की तौफीक अता फरमाएं ।

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विरह-वेदना युक्त ‘आहत मन के दोहे’ का लोकार्पण !

कोसी कमिश्नरी मुख्यालय की धरती पर अखिल भारतीय साहित्य परिषद के अध्यक्ष डॉ.जी.पी.शर्मा की अध्यक्षता में इन्हीं के द्वारा रचित विरह-वेदना से भरे “आहत मन के दोहे” के विमोचनकर्ता वरिष्ठ साहित्यकार व इतिहासकार हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ ने विरह को प्रेम की जाग्रत गति बताया और कहा कि डॉ.शर्मा के अन्तसतल की गहराई में ‘एकाबरी’ के लिए जो विरह पल रहा है वह जीवन का शाश्वत एवं सजीव प्रेम बनकर संसार को सुरभिमय बनाता रहेगा | उन्होंने विश्व वान्ग्मय में ‘विरह-काव्य’ को सबसे प्राचीन विधा बताया |

बता दें कि इस अवसर पर मुख्य अतिथि समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने विश्व की प्राचीनतम ग्रंथ ‘ऋग्वेद’ में वर्णित पुरुरवा एवं उर्वशी की विरह-वेदना के वर्णन को अद्भुत, अद्वितीय एवं अतुलनीय बताते हुए कहा कि विरह-वर्णन को शब्दों के माध्यम से अभिव्यक्त करना कठिन होता है बल्कि उसे केवल महसूसा जा सकता है |

यह भी जानिए कि लोकार्पण समारोह में उपस्थित नामचीन साहित्यकारों उमेशचन्द्र आचार्य, सियाराम यादव मयंक, श्यामानंद लाल दास ‘सहर्ष’, मुर्तजा नरियारवी आदि ने भी अपनी कविताओं और गजलों की प्रस्तुति के साथ कार्यक्रम को विस्तार देते हुए चर्चित बना दिया | अंत में अध्यक्ष डॉ.शर्मा ने अवरुद्ध कंठ से चंद शब्दों में आगंतुकों के प्रति आभार प्रकट करते हुए कार्यक्रम समाप्ति की घोषणा कर दी |

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‘साक्ष्य’ में मधेपुरा के पाँच कलमकारों के आलेख प्रकाशित

बिहार विधान परिषद द्वारा प्रकाशित ‘साक्ष्य’ पत्रिका में इसी वर्ष मार्च 2018 में लोहिया स्मरण से संबंधित लगभग साढे तीन दर्जन आलेख को जगह दी गई है । इस ताजा “लोहिया स्मरण अंक” में प्रधान संरक्षक मो.हारुण रशीद से लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राम मनोहर लोहिया के आलेख से लेकर भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी तक की लेखनी को समाहित किया गया है ।

बता दें कि आज की तारीख में मधेपुरा के भीष्म पितामह कहे जाने वाले विज्ञानवेत्ता डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी जब भी डॉ.लोहिया पर कुछ लिखने हेतु कलम उठाते हैं तो उन्हें अपनी लघुता का अहसास होने लगता है जबकि वह लोहिया के सानिध्य में तब से रहे हैं जब लोहिया अपनी पत्रिका ‘जन’ का प्रधान संपादक हुआ करते और मधेपुरी रासबिहारी उच्च विद्यालय का छात्र । यह बात 1960 की है जब (डॉ.) मधेपुरी ‘जन’ में भी कुछ-कुछ लिखा करते थे जिसके चलते वे मनीषी भूपेंद्र नारायण मंडल के निकटतम होते चले गये ।

यह भी जानिये कि 1964 ई. में उसी रासबिहारी विद्यालय के ऐतिहासिक मैदान में डॉ.लोहिया क्या कहते हैं- ” हे मधेपुरा वासियों ! मैं बार-बार मधेपुरा क्यों आता हूँ  ?क्योंकि, इस समाजवादी धरती ने भूपेंद्र नारायण मंडल जैसे निडर और बहादुर सपूत को पैदा किया है जो बेझिझक एवं निडर होकर भारतीय संसद में महत्वपूर्ण सवाल उठाते रहे हैं और आगे भी उठाते रहेंगे………!”

यह भी बता दें कि साक्ष्य में मधेपुरा के जिन पाँच कलमकारों की रचना को शामिल किया गया है उन में सर्वश्रेष्ठ व वरिष्ठ साहित्यकार एवं इतिहासकार श्री हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ हैं जिन्हें छात्र जीवन में डॉ.लोहिया और अच्युत पटवर्धन के साथ बैलगाड़ी से मधेपुरा से नेपाल बकरो के टापू तक जाने का अवसर मिला था….I

यह भी बता दें कि जहाँ शिक्षा और सामाजिक न्याय की लोहिया-दृष्टि के मर्मज्ञ एवं ख्याति प्राप्त विज्ञान वेत्ता डॉ.अवध किशोर राय (कुलपति बी.एन.एम.यू.) के शीलसंपन्न आलेख को साक्ष्य में सम्मानपूर्वक जगह दी गई वहीं डॉ.लोहिया को ताजिंदगी मार्गदर्शक के रुप में जीने वाले विधायक रह चुके राधाकांत यादव के लगभग डेढ़ दर्जन पृष्ठों वाले भीमकाय आलेख को भी साक्ष्य में शामिल किया गया है I  इसके अलावे डॉ.मधेपुरी सहित समकालीन कवि डॉ.अरविंद श्रीवास्तव को भी साक्ष्य में प्रमुखता से स्थान दिया गया है I

चलते-चलते यह भी जानिए कि कोशी क्षेत्र में डॉ.लोहिया के प्रति समर्पित क्रांतिवीरों की कमी नहीं रही, जिनमें प्रमुख रहे हैं- शिवनंदन प्रसाद मंडल, भूपेन्द्र नारायण मंडल, कार्तिक प्रसाद सिंह, चुल्हाय यादव, कमलेश्वरी प्रसाद मंडल, राम बहादुर सिंह, चित्र नारायण शर्मा, महताप लाल यादव, कुदरत उल्लाह, बैधनाथधर मजुमदार, गुणानंद झा, छेदी झा  द्विजवर, बुलाकी सुनार, ईश्वरी सिंह, भगवान चन्द्र विनोद आदि I

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एक शादी ऐसी भी…….!

आयुष्मती किरण कुमारी के संग चिरंजीव सचिन कुमार सादा की शादी हुई विगत सप्ताह | मधेपुरा जिले के सिगिऔन गांव की बेटी किरण (सुपुत्री-पानो देवी व युगेश्वर ऋषिदेव) के साथ सुपौल जिले के कटैया गांव के बेटे सचिन कुमार सादा (सुपुत्र-दुलारी देवी व सूर्यनारायण सादा) का पाणिग्रहण आजू-बाजू के गांवों के सभी जाति-बिरादरी के नर-नारियों, बच्चे एवं बूढ़ों की उपस्थिति में सिगिऔन के रुकमा देवी ठाकुरबाडी मंदिर में संपन्न हुआ |

बता दें कि मंदिर के संस्थापक व पूर्व प्राचार्य सह कुलानुशासक (बी.एन.एम.यू.) डॉ.शिवनारायण यादव सरीखे इस शादी के सूत्रधार की देख-रेख में स्वागत संबंधी छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखा गया । दो साधारण ऋषिदेव कुल की शादी इतनी संपन्नता के साथ होते देख समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने उपस्थित समाज को संदेश देने के क्रम में उस विशाल भीड़ को माईक के सहारे संबोधित करते हुए कहा-

कोसी अंचल के समाजवादी चिंतक द्वय मनीषी भूपेन्द्र नारायण मंडल एवं अंबिका दादा प्रायः मेरे समक्ष इस बात की चर्चा किया करते कि दलितों में खासकर ऋषिदेव (यानि मुशहर) अबतक जग क्यों नहीं रहा है, आगे बढ़ क्यों नहीं रहा है और पढ़ क्यों नहीं रहा है ? आज ये दोनों जन इस नजारे को ऊपर से देखकर शिवनारायण बाबू को शुभाशीष देते होंगे |

यह जानिए कि उपस्थित नर-नारियों एवं शिव परिवार के सदस्यों की खुशियों को देख-देख कर अभिभूत हुए डॉ.मधेपुरी ने डॉ.अरुण कुमार, डॉ.सुरेश प्रसाद यादव एवं मो.मिराज सहित उपस्थित जनसमूह के समक्ष यह खुलासा किया कि मैंने भी इस शादी में सहयोग करने की चर्चा की थी, परंतु बिना किसी से आर्थिक सहयोग स्वीकार किए डॉ.शिवनारायण ने अपनी पुत्री की शादी की तरह किरण की शादी में जो कुछ किया वह ग्रामीणों द्वारा स्मरण किया जाता रहेगा |

बता दें कि यह किरण डॉ.शिवनारायण यादव की धर्मपत्नी सत्यभामा देवी की सेवा सर्वाधिक मनोयोग से करती रही | जब सत्यभामा देवी कैंसर से पीड़ित हुई तो सिगिऔन से मधेपुरा, सहरसा-पटना और मुंबई तक किरण सेवारत रही | अंतिम सांस लेते समय सत्यभामा ने अपने पति डॉ.शिवनारायण बाबू से यही कहा कि जिस तरह अपनी बेटियों की शादी हुई थी उसी तरह किरण की भी शादी होगी तो मेरी आत्मा को शांति मिलेगी……….!

जानिए कि धर्मपत्नी सत्यभामा की बातों को निभाने और अंततः सच साबित करने में लगे डॉ.शिवनारायण यादव और मामाश्री डॉ.मधेपुरी भी उन्हें हर कदम पर सहयोग करने के लिए आश्वस्त करते रहे और उपस्थित वर-वधु के पक्ष के ऋषिदेवों को बारंबार यही कहते रहे- आप जगिए, आगे बढ़िए और बच्चों को पढ़ाइए व पढ़ने दीजिए….!

 

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मदर्स डे: कुछ अनुभूतियां

मां से छोटा
और ताकतवर
शब्द कोई और हो… तो बताना..!

गम को छिपाकर
वो कहां रखती है
गर तुम्हें मालूम हो… तो दिखाना..!

मौत के रास्ते हैं बहुत
ये मैंने, तुमने, सबने जाना
पर बात जब सृजन की हो
मां की कोख में ही होता है आना..!

मां अनपढ़ हो तब भी
गणित में बड़ी दिलदार होती है
दो रोटी मांग कर देखो
वो हरदम चार देती है..!

साल में एक दिन
मदर्स डे आता है
सब कहते हैं आज
मां का दिन है
कोई तो बतलाए
दिन कौन-सा मां के बिन है..!

ईश्वर ने सृष्टि को रचकर
उसे करीने से सजाया
पर हर बच्चे को पालने में
स्वयं को सक्षम नहीं पाया
तब हारकर उसने मां को बनाया..!

मां वो है
जो बच्चों के पथ में फूल बिछा
स्वयं कांटों पर चल लेती है
मां वो है
जो बच्चों के आज की खातिर
अपना सारा कल देती है..!

सोचो किस कदर वही मां
खून के आंसू रोती होगी
जब घर के बंटवारे में
छाती के टुकड़े ढोती होगी..!

धरा-आसमां बंट जाए सब
मां कब-कहां बंटती है
गोद इतनी विशाल उसकी
पूरी कायनात उसमें अंटती है..!

[डॉ. मधेपुरी की कविता]

 

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