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कुलाधिपति करेंगे कार्यशाला का उद्घाटन

सूबे बिहार के विश्वविद्यालयों में शोध कार्यों की गुणवत्ता के विकास को लेकर पटना के होटल लेमन ट्री में 29 मई 2019 को एक कार्यशाला का वृहत आयोजन किया गया है | शोध गुणवत्ता को लेकर आयोजित इस कार्यशाला के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता महामहिम राज्यपाल सह कुलाधिपति लालजी टंडन करेंगे |

बता दें कि इस अवसर पर ‘Key Notes’ देंगे स्पीकर भारतीय सामाजिक शिक्षा परिषद के अध्यक्ष डॉ.बी.बी.कुमार एवं यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमिशन के सेक्रेटरी रजनीश जैन | यूजीसी के वाइस चेयरमैन डॉ.बी.पटवर्धन एवं काउंसिल आफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च के हेड डॉ.ए.के.चक्रवर्ती दोनों उद्घाटन सत्र को संबोधित करेंगे |

यह भी बता दें कि मौके पर जहाँ गेस्ट आफ ऑनर होंगे- राजभवन के उच्च शिक्षा परामर्शी प्रो.आरसी सोबती एवं महामहिम के प्रधान सचिव विवेक कुमार सिंह वहीं भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ.अवध किशोर राय विश्वविद्यालय के 20 प्रतिभा संपन्न शिक्षकों की टीम के साथ कार्यशाला में शिरकत करेंगे | जहाँ शोध-गुणवत्ता के विकास हेतु आवश्यक नीति निर्धारण, आधारभूत संरचना एवं व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु विचार-विमर्श किया जाएगा |

उद्घाटन सत्र के समापन के कुछ देर बाद तकनीकी सत्र को संबोधित करेंगे- सीएसआईआर के डॉ.हरिओम यादव, विज्ञान व प्रौद्योगिकी मंत्रालय के परामर्शी डॉ.अखिलेश गुप्ता, अशोका ट्रस्ट फॉर रिसर्च इन इकोलॉजी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ.जे.कृष्णास्वामी, रिसर्च सेल के इंचार्ज डॉ.अखिलेश मिश्रा आदि अन्य वरिष्ठ वैज्ञानिक |

चलते-चलते यह भी बता दें कि बीएनएमयू के नामित 20 शिक्षकों में होंगे- स्नातकोत्तर रसायन के डॉ.ए.के.यादव एवं सीनेटर डॉ.नरेश कुमार, वनस्पति पीजी के डॉ.बीके दयाल एवं डॉ.अबुल फजल, पीजी जूलॉजी के डॉ.नरेंद्र श्रीवास्तव एवं डॉ.राजकुमार, मनोविज्ञान विभाग के डॉ.एम.आई.रहमान एवं डॉ.आनंद कुमार सिंह, दर्शनशास्त्र के धनंजय द्विवेदी एवं पीआरओ डॉ.सुधांशु शेखर सहित गृह विज्ञान की डॉ.प्रियंका, राजनीति विज्ञान के डॉ.आरके सिंह तथा वाणिज्य विभाग के डॉ.पी.एन.सिंह | इसके अलावा बीएसएस कॉलेज सुपौल से डॉ.संजीव, डॉ.नरेश….. MLT से डॉ.संयुक्ता- डॉ.संजीव आदि |

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बीएनएमयू में स्ट्रेस मैनेजमेंट व आपदा प्रबंधन की शुरुआत जल्द – कुलपति

बीएन मंडल विश्वविद्यालय मधेपुरा के कुलपति कार्यालय सभाकक्ष में कुलपति डॉ.अवध किशोर राय की अध्यक्षता में व्यवसायिक कार्यक्रम के बोर्ड ऑफ़ स्टडीज की बैठक मंगलवार को आयोजित की गई | इस बोर्ड ऑफ़ स्टडीज की बैठक में विचार मंथन के बाद यह निर्णय लिया गया कि बीएनएमयू में स्ट्रेस मैनेजमेंट और आपदा प्रबंधन में डिप्लोमा कोर्स की शुरुआत जल्द किया जाय |

बता दें कि स्ट्रेस मैनेजमेंट और आपदा प्रबंधन के सिलसिले में पाठ्यक्रम एवं नियमावली तैयार करने हेतु स्नातकोत्तर भूगोल एवं पीजी मनोविज्ञान विभाग के अध्यक्षों को निर्देश भी दिये गये | बैठक में यह भी तय किया गया कि यह स्ट्रेस मैनेजमेंट और आपदा प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स मात्र 1 वर्षीय पाठ्यक्रम होगा |

यह भी जानिए कि UGC (यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन) से प्राप्त दिशा-निर्देशों के अनुसार विभिन्न व्यावसायिक पाठ्यक्रमों एवं विषयों के निर्धारण व अनुमोदन से संबंधित विचार- विमर्श भी किया गया | बोर्ड ऑफ स्टडीज की बैठक द्वारा यह भी निर्णय लिया गया कि सहरसा के रमेश झा महिला कॉलेज में सीएनडी का  त्रिवर्षीय कोर्स चलाया जाएगा | साथ ही सहरसा के ही राजेन्द्र मिश्र कॉलेज में चल रहे हेल्थकेयर कोर्स के बेहतर संचालन के लिए तथा इसके  पाठ्यक्रम एवं नियमावली में सुधार के लिए एक सब-कमिटी का भी गठन किया जाएगा |

चलते-चलते यह भी कि इस बैठक में वीसी डॉ.ए.के.राय के अलावे प्रो-वीसी डॉ.फारुक अली, डीएसडब्ल्यू डॉ.शिवमुनी यादव,सायंस डीन डॉ.अरुण कुमार मिस्र, कॉमर्स डीन डॉ.लंबोदर झा, डिप्टी रजिस्ट्रार (अकादमी) डॉ.एम.आई.रहमान सहित प्राचार्यगण डाॅ.अशोक कुमार, डॉ.माधवेंद्र झा एवं डॉ.अरुण कुमार खां आदि विचार-मंथन में भाग ले रहे थे |

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‘समान कार्य-समान वेतन’ पर कोसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी डॉ.संजीव कुमार सिंह की बेबाक स्वीकारोक्ति !

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा “समान कार्य – समान वेतन” पर दिनांक 10 मार्च 2019 को पारित न्यायनिर्णय के बाबत कोसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के शिक्षक प्रतिनिधि एमएलसी डॉ.संजीव कुमार सिंह ने मधेपुरा अबतक को दो दिन बाद यानि 13 मई 2019 को बेबाकी के साथ यही कहा- “शिक्षकों के सारे संगठनों की एकजुटता बनी रहे….. मैं शिक्षक संगठनों के द्वारा किये गये सभी संघर्षों की तरह इस संघर्ष में भी निष्ठापूर्वक साथ रहा हूँ…. और पूरी निष्ठा के साथ सदैव साथ रहूंगा….. शिक्षकों के हित के लिए सदा लड़ा हूँ और सदैव लडूंगा….. साथ दिया हूँ और सदा साथ दूंगा |”

सर्वोच्च न्यायालय के पारित न्यायनिर्णय के बाबत आप शिक्षकों के प्रिय प्रतिनिधि विधान पार्षद डॉ.संजीव कुमार सिंह द्वारा “जय शिक्षक, जय शिक्षक संघ” के प्रति अभिव्यक्त भावनाएं…. हू-ब-हू उन्हीं के शब्दों में-

“एक शिक्षक प्रतिनिधि के रूप में बेबाकी से स्वीकार करता हूँ कि ‘समान कार्य – समान वेतन’ के मामले में राज्य सरकार की बेरुखी के कारण ही विभिन्न शिक्षक संगठनों को अपेक्षित न्याय हेतु पटना उच्च न्यायालय जाना पड़ा | पुनः पटना उच्च न्यायालय द्वारा इसी मामले में सर्वोच्च न्यायालय के ही पूर्व पारित न्यायनिर्णय के आलोक में पूर्ण सकारात्मक फैसला सुनाया गया….. लेकिन राज्य सरकार द्वारा मुख्यरूप से अपने वित्तीय संसाधनों के अभाव एवं अन्य कतिपय कारणों का हवाला देते हुए शिक्षक हित के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने….. दूसरी तरफ विभिन्न शिक्षक संगठनों के नेतृत्व द्वारा इस चुनौती को स्वीकारने के पश्चात् बड़े-बड़े विद्वान एवं नामी-गिरामी अधिवक्ताओं से तथ्यात्मक सार्थक बहस कराने के उपरांत 10.05.2019 को पारित न्यायनिर्णय से स्वयं सर्वोच्च न्यायालय आज अपनी ही न्यायिक निष्पक्षता एवं विश्वसनीयता पर विरोधाभासी स्थिति में है |

सच तो यह है कि ‘न्याय के साथ विकास’ के क्रम में आज संपूर्ण शिक्षक वर्ग ही पीछे छूट गया है….. चाहे नियोजित शिक्षक हों, वित्तरहित शिक्षक संस्थानों के शिक्षक हों, अल्पसंख्यक विद्यालय के शिक्षक हों या फिर मदरसा-संस्कृत शिक्षक हों | ऐसी स्थिति में शिक्षकों को अपने शैक्षिक दायित्व पर कम और अपनी हकमारी की लड़ाई पर ज्यादा ध्यान देना स्वाभाविक है |

लगभग 10 वर्षों के अंतराल में तो राज्य के सभी प्रमुख राजनीतिक दल मिलित में ही रहे लेकिन सफलता आंशिक ही मिली | इस मुद्दे पर आज राजनीति जितनी भी हो लेकिन जब तक शिक्षकों के विभिन्न सांगठनिक समूहों की कोई मिलित एवं कारगर रणनीति नहीं बनेगी तबतक संघर्ष भी सार्थक नहीं हो सकता | अपने संवैधानिक एवं मौलिक अधिकारों को हासिल करने हेतु अंततः हमें तरीके भी लोकतांत्रिक ही अपनाने होंगे ताकि सरकार की राजनीतिक इच्छाशक्ति का झुकाव इस दिशा में हो |

इस आंदोलन में सभी कोटि के शिक्षकों द्वारा अपना हक प्राप्त करने की सामूहिक प्रतिबद्धता तथा उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण सभी संघ-संगठनों के साथ-साथ शिक्षकों की एकजुटता से ही सफलता संभव है | मैं भी इस संघर्ष में सदैव साथ रहा हूं और सदैव रहूंगा…… जय शिक्षक, जय शिक्षक संघ !!”

चलते-चलते यह भी बता दें कि इस फैसले के बाबत जब समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी से पूछा गया तो डॉ.मधेपुरी ने यही कहा कि इस फैसले के खिलाफ सभी शिक्षक-संगठनों को एकजुट होकर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका अवश्य दायर करनी चाहिए क्योंकि यह फैसला भारतीय संविधान की आत्मा की आवाज को अनसुनी करने जैसा है | डॉ.मधेपुरी ने विधायकों एवं सांसदों को ₹500 प्रतिमाह मोबाइल चार्ज की जगह ₹15,000 प्रतिमाह दिये जाने पर प्रश्न उठाते हुए यही कहा कि प्रतिनिधियों को ऐसे अनाप-सनाप रूपये भुगतान करने के लिए सरकारी खजाने में पैसे कहाँ से आते हैं…..?

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अब वृक्षमाता कहलाने लगी है कर्नाटक की 106 वर्षीया पद्मश्री सालूमरदा थिमक्का

कर्नाटक की 106 वर्षीया थिमक्का जब शादी के 25 वर्ष बाद भी संतानहीन होने के कारण अहर्निश दुखी रहने लगी और उसका मन अवसाद से भरने लगा तो थिमक्का अपने पति बिकाला चिक्य्या से छिपकर खुदखुशी करने की सोचने लगी | यह महसूसने की बात है कि नारी के लिए मातृत्व कितना महत्वपूर्ण होता है |

बता दें कि इस दरमियान थिमक्का को अपने ही अंतर्मन से निकली कुछ देववाणी सुनाई देने लगी….. “आखिर जीने का कुछ तो मकसद होना चाहिए” | और अंततः यह मकसद बन गई- “हरियाली यानि पर्यावरण सुरक्षा |” तत्कालीन 50 वर्षीया थिमक्का ने अपने मन में यह ठान लिया कि अब वह गांव की सड़कों के दोनों किनारे बरगद आदि के पेड़ लगायेगी जो पेड़ एक बड़े क्षेत्र में हरियाली का एहसास करायेगा |

यह भी बता दें कि थिमक्का संपूर्ण समर्पण के साथ उन पेड़ों को अपने हाथों 4 किलोमीटर के परिक्षेत्रों में लगाती रही और अहर्निश अबोध संतान की तरह उसकी सही परवरिश, स्वस्थ देखभाल एवं सुदृढ़ पालन-पोषण करती रही-

थिमक्का सदैव वृक्षों के साथ माँ-बेटे की तरह एक अटूट रिश्ता कायम करने में लगी रही | उन पेड़ों से वह सदैव बातें करती….. उन्हें छूती रहती और उनके पत्तों को चुमती भी रहती…. हफ्ते में चार बार से अधिक……. कई-कई किलोमीटर पैदल चलकर वह माँ थिमक्का दूर-दूर से अपने सिर पर पानी ढोकर लाती और पुत्रवत् उन पौधों की सिंचाई भी करती रहती |

यह भी जानिए कि थिमक्का द्वारा इन पेड़ों को ऐसी जमीन पर पंक्तिबंद्ध करके रोपे गये थे जिन जगहों पर बारिश बहुत कम हुआ करती है | थिमक्का द्वारा उठाये गये इस प्रेरणादायी कदमों के चलते उन्हें एक पर्यावरणविद्  के रूप में खूब ख्याति मिली और मिले ढेर सारे पुरस्कार भी | उस इलाके के सारे लोग थिमक्का को पर्यावरण का हीरो मानने लगे….. जिसके फलस्वरूप आस-पास के गाँवों में रहने वाले समस्त ग्रामीणों ने थिमक्का को “सालुमरदा” नामकरण करके सम्मानित भी किया …. यानि तब से लोग उन्हें  “सालुमारदा थिमक्का” कहने लगे | दरअसल कर्नाटक की भाषा ‘कन्नड़’ में ‘सालुमरदा’ का अर्थ होता है- ‘पेड़ों की पंक्ति’ |

और हाँ ! हाल ही में सालुमरदा थिमक्का को महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा राष्ट्रपति भवन में ‘पद्मश्री’ सम्मान से सम्मानित किए जाने के बाबत समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी से कुछ पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि जिस अद्भुत काम को एक अनपढ़ माँ के रूप में पद्मश्री सालुमरदा थिमक्का ने समाज को समर्पित किया है वह कोई आसान काम नहीं है | इस काम को बड़े-बड़े डिग्रीधारी भी नहीं कर सकते | पौधे उपलब्ध करना, गड्ढे खोदना, पौधे लगाना….. कई-कई किलोमीटर दूर से माथे पर पानी लाना तथा पौधों की निरंतर सिंचाई करना…… ये कोई आसान काम नहीं है। सृजन का यह काम आने वाली पीढ़ी के लिए एक प्रेरणादायी काम होगा |

आगे अंतरराष्ट्रीय मदर्स डे के अवसर पर डॉ.मधेपुरी ने यही कहा-

पद्मश्री सालुमरदा थिमक्का पेड़ों की ऐसी माँ है जो सभी माँओं से अलग है, सर्वोपरि है और वैसी माँ को दुनिया का पर्याय कहने में भी कोई अतिशयोक्ति नहीं ! ऐसी माँ के बिना इन पेड़ों के जीवन की कल्पना करना भी मुश्किल है | भगवान की बनाई गई अद्वितीय रचना है यह माँ थिमक्का जो मानव को ऐसी जिंदगी जीने का हौसला देती है जिसके ऋण को आनेवाली कई पीढ़ियां भी नहीं चुका सकेंगी….. वह अनपढ़ माँ पद्मश्री ही नहीं भारतरत्न सरीखे सर्वोच्च सम्मान का भी हकदार है…..!

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सत्तर वर्षों में मात्र 3 महिलाएं निर्दलीय चुनाव लड़कर लोकसभा पहुंच पाई

अब तक लोकसभा चुनाव में हजार से अधिक महिलाएं निर्दलीय चुनाव लड़ी है। परन्तु, केवल तीन महिलाएं 4 बार निर्दलीय चुनाव जीत पाई हैं…. जिसमें मेनका गांधी ही 2 बार निर्दलीय जीत कर लोकसभा पहुंची है।

बता दें कि मेनका गांधी ‘पीलीभीत’ संसदीय क्षेत्र से लगातार दो बार (यानि वर्ष 1998 एवं 1999 में) निर्दलीय महिला उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़कर लोकसभा पहुंची। पहली बार वर्ष 1998 में मेनका ने बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी अनीश खान को 2 लाख मतों से पराजित कर निर्दलीय के रूप में अपनी जीत दर्ज कराई और लोकसभा में प्रवेश की….. और दूसरी बार 1999 में ही अपने विरोधी को पुनः निर्दलीय लड़कर ही 2 लाख 39 हज़ार वोटों पराजित कर लोकसभा सदस्य बनी। फिलहाल 2004 से वह  भाजपा से चुनाव जीत कर लोकसभा पहुंच रही है। और हाँ ! यह भी जान लीजिए कि 2004 से अबतक कुल 528 महिलाएं निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लोकसभा चुनाव लड़ चुकी है परन्तु एक भी जीत नहीं पाई। जबकि विगत 3 चुनावों में (2004, 2009 & 2014) में अलग-अलग दलों से महिला सांसदों की संख्या कुल 165 रही है।

यह भी बता दें कि देश के पहले लोकसभा चुनाव में यानि 1952 में दो महिलाएं निर्दलीय जीत कर लोकसभा सदस्य बनी जिसमें एक थी… टिहरी राजपरिवार की राजमाता कमलेन्दुमती शाह,  जिन्होंने कांग्रेस के कृष्ण सिंह को 13982 वोटों से पराजित किया था।

और दूसरी महिला थी…. कुमारी एनी मस्कारीन जो देश के पहले चुनाव में त्रावणकोर- कोचीन राज्य के ‘त्रिवेंद्रम’ लोकसभा क्षेत्र से निर्दलीय खड़ी होकर सोशलिस्ट पार्टी के प्रत्याशी सह मुख्यमंत्री टी.के.नारायण पिल्ले को 68117 वोटों से हराकर 1952 में ही लोकसभा सदस्य के रूप में चुनी गई थी।

चलते-चलते यह भी बता दें कि विगत 20 वर्षों से कोई भी महिला निर्दलीय चुनाव लड़ कर लोकसभा में प्रवेश नहीं कर पाई है जबकि 2014 में 204 महिलाएं निर्दलीय चुनाव लड़़ी परन्तु कोई भी अपनी जमानत तक नहीं बचा पाई।

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हर्षोल्लास पूर्वक मना 38वाँ मधेपुरा जिला स्थापना वर्षगांठ समारोह

जिलेभर में 9 मई को सुबह से देर शाम तक धूमधाम से प्रखंड से लेकर जिला मुख्यालय तक मनाया गया 38वाँ जिला स्थापना वर्षगाँठ | जहाँ एक ओर स्कूली बच्चे-बच्चियों द्वारा स्कूली ड्रम दल के साथ प्रभात फेरी निकाला गया वहीं दूसरी ओर बीएनएमयू गेट से बीएन मंडल स्टेडियम तक युवाओं द्वारा विकास दौड़ का आयोजन किया गया | इतना ही नहीं, बी.पी.मंडल इंडोर स्टेडियम में जहाँ एक ओर हॉल में शतरंज खिलाड़ियों के बीच प्रतियोगिता आयोजित की गई वहीं दूसरी ओर बड़े हॉल में बालिका कबड्डी खेल का आयोजन जिलासचिव अरुण कुमार की देखरेख में आयोजित किया गया |

बता दें कि इस बालिका कबड्डी का उद्घाटन डीडीसी विनोद कुमार सिंह द्वारा एडीएम उपेन्द्र कुमार, समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी, जिला नजारत उपसमाहर्ता रजनीश कुमार राय आदि की उपस्थिति में नारियल फोड़ कर किया गया | मौके पर उपविकास आयुक्त एवं एडीएम उपेन्द्र कुमार ने जिले में विकास की बुनियाद की चर्चा करते हुए कहा कि जिले के सभी क्षेत्रों में बालक-बालिकाएं एकजुट होकर विकास में अपनी भागीदारी दें |

इस अवसर पर डॉ.मधेपुरी ने पत्रकार बंधुओं से जिला स्थापना (9 मई 1981) के उद्घाटन कार्यक्रमों का आंखों देखा हाल बताते हुए यही कहा कि जिला का उद्घाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ.जगन्नाथ मिश्र के कर कमलों द्वारा रासबिहारी विद्यालय के ऐतिहासिक मैदान में किया गया था | अध्यक्षता कर रहे थे पूर्व मुख्यमंत्री बी.पी.मंडल एवं मुख्य अतिथि थे कुलपति डॉ.के.के.मंडल | आयोजन के संयोजक थे प्राचार्य डॉ.महावीर प्रसाद यादव एवं सहसंयोजक तत्कालीन नगरपालिका उपाध्यक्ष प्रो.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी | सीएम डॉ.मिश्र ने युवा डीएम एसपी सेठ एवं एसपी अभयानंद के बीच खड़े होकर मधेपुरा वासियों से यही कहा कि आपका भरपूर सहयोग मिलेगा तो ये दोनों आपको बेहतर प्रशासन व सुरक्षा प्रदान करेंगे |

बकौल डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी…… जिला कार्यालय सर्वप्रथम ‘जीवन सदन’ की दो कोठरियों में ही लगभग एक साल चला था और जीवन सदन के बगल के एक भाड़े के घर में एसपी कार्यालय वर्षो चला | बाद में डीएम कार्यालय सदर अनुमंडल कार्यालय परिसर में स्थानांतरित हुआ | उन दिनों डीएम निवास हुआ करता वर्तमान बीएनएमयू के कुलपति कार्यालय में जो उन दिनों कोसी प्रोजेक्ट का इंस्पेक्शन बंगलो था और एसपी निवास हुआ करता वर्तमान डाक बंगला परिसर, शहीद चुल्हाय मार्ग पर | वर्ष 1989 से अबतक वर्तमान समाहरणालय परिसर में जिले के दोनों आलाधिकारी डीएम व एसपी का कार्यालय क्रियाशील है….. जिसे प्रतिवर्ष स्थापना दिवस पर रंग-रोगन कर रंग-बिरंगी रोशनीयुक्त झालरों से सजाया जाता है….. प्रखंड कार्यालयों से लेकर एसडीएम व अन्य कार्यालयों को भी |

यह भी जानिए कि स्टेडियम में बच्चे व बुजुर्गों के लिए विभिन्न खेलों का भी आयोजन किया गया था | 5:00 बजे से 10:00 बजे रात तक स्थानीय किरण पब्लिक, हॉली क्रॉस, साउथ प्वाइंट, वाका ग्रुप, रंगकर्मी विकास के सृजन दर्पण की टीम सहित प्रो.रीता कुमारी, शशि प्रभा जयसवाल, शिवाली, तनुजा, कीर्ति एवं रोशन-रंजन जैसे मंजे हुए कलाकारों तथा बाहर से आये भागलपुर के नामदार कलाकारों की स्वर लहरियों ने दर्शकों को देर रात तक बांधे रखा व खूब सबों ने तालियाँ बटोरी |

चलते-चलते यह भी कि कबड्डी में जहां हाली क्रॉस व मलिया मध्य विद्यालय की बालिका विजेता बनी वहीं शतरंज में सुदर्शन-विशाल-सोनल व चंदा-रक्षा-जयश्री | विकास दौड़ में रंजीत-सूरज-जयकृष्ण अव्वल आये और पुरस्कृत किये गये | जहाँ विकास दौड़ को हरी-झंडी दिखाकर रवाना किया प्रोवीसी डॉ.फारूक अली व डीडीसी विनोद कुमार सिंह वहीं प्रभातफेरी को हरी झंडी दिखाकर विदा किया डीडीसी , एडीएम आदि |

पूरे कार्यक्रमों में लाइफ लाईन बनकर संचालित करते रहने वाले स्काउट एंड गाइड के आयुक्त जयकृष्ण यादव, खेल गुरु संत कुमार, कबड्डी सचिव अरुण कुमार, शशिप्रभा जायसवाल, डॉ.रंजन एवं एनडीसी रजनीश कुमार राय की पूरी टीम को दर्शकों की ओर से साधुवाद दिया गया |

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इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी ने भारतीय लोगों के लिए काफी काम किया है- डीएम नवदीप शुक्ला

विश्व रेडक्रॉस दिवस (8 मई – बुधवार को) भूपेन्द्र स्मृति कलाभवन मधेपुरा में डॉ.शांति यादव की अध्यक्षता में आयोजित किया गया | आयोजन का श्रीगणेश उद्घाटनकर्ता डीएम नवदीप शुक्ला (IAS), मुख्य अतिथि एसपी संजय कुमार (IPS) एवं विशिष्ट अतिथि सीएस डॉ.शैलेंद्र कुमार, एसडीएम वृंदा लाल, संस्था के पूर्व सचिव व अध्यक्ष डॉ.अरुण कुमार मंडल, उपाध्यक्ष प्रो.श्यामल कुमार यादव सहित समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी व अध्यक्षा एवं सचिव रमेन्द्र कुमार रमण आदि द्वारा संयुक्त रुप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया |

बता दें कि प्रखर गीतकार रौशन कुमार ने जहाँ बेहतरीन गीत की प्रस्तुति से अतिथियों का स्वागत किया वहीं डॉ.शांति यादव द्वारा, बुके एवं बैज आदि से अतिथियों को सम्मानित किये जाने के बाद, विषय प्रवेश करते हुए अपने संबोधन में यही कहा गया कि जीन हेनरी ड्यूनेंट का जन्म 8 मई 1828 को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में हुआ और….. मानवता की सेवा हेतु रेड क्रॉस की स्थापना के क्षेत्र में उनके अप्रतिम योगदान के लिए उन्हें 1901 में शांति के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया….. और तब से उनके जन्मदिवस पर “विश्व रेडक्रॉस दिवस” मनाया जाने लगा है | उन्होंने युवाओं से रेड क्रॉस से जुड़ने की अपील की |

इस अवसर पर जहाँ डीएम नवदीप शुक्ला ने कहा कि यह रेड क्रॉस सोसायटी संपूर्ण विश्व में बिना किसी भेदभाव के पीड़ित मानवता की सेवा करती आ रही है वहीं एसपी संजय कुमार ने कहा कि विभिन्न प्रकार की आपदाओं के दौरान यह रेड क्रॉस सोसायटी अपना सेवा धर्म निभाकर एक मिशाल कायम करता रहा है, जो एक मजबूत अंतरराष्ट्रीय संगठन है |

Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri addressing at World Red Cross Day Function.
Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri addressing The World Red Cross Day at Bhupendra Memorial Kala Bhawan, Madhepura.

यह भी बता दें कि समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने अपने विस्तृत संबोधन की शुरुआत यह कहते हुए किया-

Selfless service to humanity is the best service & worship to God.

 

उन्होंने कहा कि आप में से वैसे सभी व्यक्ति जो संवेदनशील हैं वे अपने आप में एक रेड क्रॉस सोसायटी हैं | आपके अंदर सेवा भाव हो…. सेवा करने की प्रखर इच्चा शक्ति हो…. तो आप एक-न-एक दिन इस रेड क्रॉस सोसायटी सरीखे विश्वस्तरीय सामाजिक सेवा संगठन का हिस्सा अवश्य बनेंगे तथा मधेपुरा रेड क्रॉस को ताकतवर बनाने में सहयोग भी करते रहेंगे |

समारोह में सचिव रमेन्द्र कुमार रमण द्वारा रिपोर्ट पेश करते हुए संस्थान की गतिविधियों के साथ-साथ उसके मिशन के विविध पहलुओं पर भी प्रकाश डाला गया | साथ ही जहाँ रेड क्रॉस के पूर्व चेयरमैन व प्रसिद्ध शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ.अरुण कुमार मंडल को लाइफ टाइम अचीवमेंट सम्मान प्रदान किया गया वहीं कोसी अंचल में स्वास्थ्य-आयाम को ऊंचाई देने वाले चंद युवा चिकित्सकों डॉ.असीम प्रकाश, डॉ.नीरज निशांत, डॉ.इम्तियाज अख्तर एवं डॉ.राजकिशोर सिंह को सिविल सर्जन एवं एसडीएम वृंदा लाल आदि द्वारा सम्मानित किया गया |

चलते-चलते यह भी बता दें कि इस अवसर पर विभिन्न आपदाओं के दौरान उल्लेखनीय कार्य करने वाले वालंटियर संजीव कुमार, पूजा कुमारी , श्रीकांत कुमार व मनीष कुमार सहित रेड क्रॉस सोसायटी के राज्य प्रतिनिधि चंद्रभूषण राय को भी सोसायटी द्वारा सम्मानित किया गया | मौके पर डॉ.शशि, डॉ.संजय कुमार, डॉ.प्रणव प्रकाश, जय प्रकाश राम, संदीप शांडिल्य, अंगद यादव सहित सोसायटी के कार्यकारिणी सदस्या अर्चना कुमारी एवं कार्यक्रम संचालक जिला स्काउट एंड गाइड के जिला आयुक्त जयकृष्ण यादव आदि अंत तक मौजूद रहे | धन्यवाद ज्ञापन रेड क्रॉस के उपाध्यक्ष प्रो.श्यामल किशोर यादव ने किया तथा अध्यक्ष की सहमति से कार्यक्रम समाप्ति की घोषणा भी की |

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शिक्षा सारी समस्याओं के समाधान का सामर्थ्य रखती है- डॉ.मधेपुरी

शिक्षा, सदाचार तथा सुन्दर एवं नशा मुक्त व्यवहार का ही असर है कि “विश्व नशा उन्मूलन और कल्याण मिशन, मधेपुरा” के संस्थापक व अध्यक्ष बाबा गंगादास को भारत सहित विदेशों के विभिन्न साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक संगठनों द्वारा भी प्रशंसित व सम्मानित किया जाता रहा है | गत वर्ष भी उन्हें सिक्किम मणिपाल विश्वविद्यालय के छात्रों को संबोधित करने हेतु आमंत्रित किया गया और सम्मानित भी किया गया | बाबा गंगादास अपने जीवन के 70वें वसंत पार करने जा रहे हैं |

बता दें कि विश्व साक्षरता दिवस के अवसर पर उत्तरी बिहार के ॠष्य श्रृंग की धरती सिंहेश्वर स्थान के प्रसिद्ध राम जानकी ठाकुरबाड़ी में विश्व नशा उन्मूलन अभियान एवं वरिष्ठ नागरिक सेवा संगठन व व्यापार संघ के संयुक्त बैनर तले बाबा गंगादास की 70 वीं जयंती मनाई गई | सर्वप्रथम आदर्श आवासीय कन्वेंट सिंहेश्वर की बालिकाओं द्वारा स्वागत गान प्रस्तुत किया गया | फिर प्राचार्य डॉ.शिवनारायण यादव, समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी, विश्व नशा उन्मूलन मिशन के उपाध्यक्ष सुखदेव दास, अध्यक्ष भरत चंद्र भगत व समाजसेवी अशोक भगत व अन्य ने संयुक्त रुप से दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया |

जहाँ मंच संचालक दुर्गानंद विश्वास के अनुरोध पर सर्वप्रथम उद्घाटनकर्ता डॉ.शिवनारायण यादव ने कहा कि बाबा गंगादास ने नशा मुक्ति मिशन के लिए उल्लेखनीय कार्य किया है | विशेष रूप से इन्हें 70वें जन्मोत्सव की बधाई देता हूँ वहीं मुख्य अतिथि के रूप में सिंहेश्वर मंदिर न्यास समिति के सदस्य डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने विश्व साक्षरता दिवस के अवसर पर यही कहा-

“शिक्षा के अभाव में सब कुछ अधूरा है…. शिक्षा मानव जीवन के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण है….. शिक्षा सारी समस्याओं के समाधान का सामर्थ रखती है।”

यह भी कि जहाँ महंथ सुखदेव दास व अशोक भगत आदि ने उनके दीर्घायु हेतु कामना की, वहीं डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने पाग-शाल एवं स्वलिखित क्रांतिकारी पुस्तकादि के साथ भावना के अतिरेक में डूब-डूबकर श्रद्धा युक्त सम्मान देने और तालियाँ बटोरने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी…… डॉ.मधेपुरी ने संपूर्ण माहौल को ही संवेदना से सिक्त कर दिया |

अंत में मलिक परिवार की महिलाओं के बीच आयोजकों द्वारा बाबा गंगा दास के 70 वें जन्मोत्सव पर नशा परित्याग करने का संदेश देते हुए दूध का पैकेट आदि वितरण किया गया | मंच संचालक दुर्गानंद विश्वास ने धन्यवाद ज्ञापन के साथ अध्यक्ष भरत चंद्र भगत के निर्देशानुसार कार्यक्रम समाप्ति की घोषणा की |

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पाश्चात्य संस्कृति हमारी नई पीढ़ी पर हो रही है हावी- डॉ.मधेपुरी

सृजन दर्पण मधेपुरा की एक साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था है | सर्जन दर्पण अपना तीसरा स्थापना दिवस समारोह का आयोजन अपने प्रधान कार्यालय कृष्णापुरी, मधेपुरा (वार्ड न.- 4) के परिसर में किया |

इस अवसर पर समारोह का उद्घाटन बीएनएमयू के प्रति कुलपति डॉ.फारूक अली, मुख्य अतिथि समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी एवं विशिष्ट अतिथि शिक्षाप्रेमी प्राचार्य डॉ.अशोक कुमार व योगाचार्य असंग स्वरूप सहित संस्थापक अध्यक्ष डॉ.ओम प्रकाश ओम व सचिव विकास कुमार रंगकर्मी की टीम द्वारा संयुक्त रुप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया | स्वागतगान सृजन दर्पण की गायिका पुष्पा कुमारी ने प्रस्तुत किया वहीं मंच संचालन उद्घोषिका मुन्नी कुमारी ने किया |

बता दें कि “भारतीय संस्कृति के परिप्रेक्ष्य में नई पीढ़ी” विषय पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए उद्घाटनकर्ता डॉ.फारुख अली ने कहा कि संस्कृति जीवन को सरल और सुगम बनाती है | उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति अपनी शांति प्रियता के कारण विश्व के सर्वाधिक देशों को अपनी ओर आकर्षित करती रही है |

इस अवसर पर मधेपुरा के डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम कहे जाने वाले समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने अपने संबोधन में कहा कि नई पीढ़ी को अपने अतीत के प्रति सम्मान घटता जा रहा है, भारतीय युवा वर्ग भारतीयता से दूर होता जा रहा है तथा पाश्चात्य संस्कृति नई पीढ़ी पर हावी होती जा रही है | डॉ.मधेपुरी ने अपनी मंगलकारी सांस्कृतिक परंपराओं पर प्रकाश डालते हुए अपनी कविता “कैंची और सूई” सुनाकर नई पीढ़ी को संदेश दिया कि वे ताजिंदगी सूई की संस्कृति को अपने जीवन मूल्यों में शामिल कर लें | कैंची की संस्कृति तो समाज के लिए सदैव अमंगलकारी होती है, विघटनकारी होती है |

यह भी जानिए कि शिक्षा के प्रति समर्पित मधेपुरा कॉलेज के संस्थापक प्राचार्य डॉ.अशोक कुमार ने जहाँ यह कहा कि समय व परिस्थिति बदलने पर हमारे आचार-विचार का बदलना स्वाभाविक है फिर भी हमें अपनी मंगलकारी सांस्कृतिक परंपरा “बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय” को कभी नहीं छोड़नी चाहिए वहीं योगाचार्य असंग स्वरूप ने कहा कि भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण देन है हमारी संयमित जीवन शैली जो विविधताओं में भी एकता कायम करती आ रही है |

तृतीय स्थापना दिवस समारोह की अध्यक्षता करते हुए डॉ.ओम प्रकाश ओम ने 2 वर्षों के कालावधि में सृजन दर्पण के सचिव विकास कुमार के नेतृत्व में रंगकर्मी सत्यम-सौरभ-सागर-सुशील सहित राखी-प्रियंका-तनु प्रिया…. आदि के द्वारा जिले भर में पर्यावरण संरक्षण एवं राजकीय योजनाओं पर आधारित सामाजिक कुरीतियों को दूर करने संबंधी नुक्कड़ नाटक…. नृत्य नाटिका…. आदि पर विस्तार से चर्चा करते हुए यही कहा कि किसी भी देश की सभ्यता और संस्कृति वहां के भौगोलिक परिवेश से बनती है इसलिए बाह्य संस्कृति को अपनाने से पूर्व विचार-मंथन अवश्य करना चाहिए |

चलते-चलते बता दें कि रंगकर्मी राहुल-निखिल-गौरव, विकास सिंह- ब्रह्म प्रकाश- अमलेश-श्रवन व शिवानी आदि ने समारोह की सफलता में अपना बहुमूल्य योगदान दिया | अंत में धन्यवाद ज्ञापन सचिव सह रंगकर्मी-निदेशक विकास कुमार ने किया |

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कानून बनने के बावजूद मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी नसीब नहीं- डॉ.मधेपुरी

1 मई यानि अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर प्रायः हर मजदूर अपने करीबियों को फोन से या व्हाट्सएप पर मैसेज भेजकर यही कहता है- हैप्पी लेबर डे ! उस दिन छुट्टी होती है….. सारे कार्यालय बंद रहते हैं….. परंतु, मजदूरों की छुट्टी कहाँ होती…. उन्हें तो काम पर जाना ही पड़ता है….. वरना बच्चे क्या खायेंगे ?

बता दें कि सरकार ने तो न्यूनतम मजदूरी का कानून बना दिया है…… परन्तु, दिल्ली-एनसीआर से लेकर…. धार्मिक स्थल सिंहेश्वर स्थान मंदिर न्यास समिति द्वारा भी दैनिक सफाई मजदूरों को निर्धारित न्यूनतम मजदूरी तक नहीं दी जाती है जिसके लिए समिति के सदस्य डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी द्वारा बिहार सरकार के लेबर कमिश्नर श्री गोपाल मीणा (आईएएस) के कार्यालय से न्यूनतम मजदूरी चार्ट भी लाकर दिया जा चुका है।

Dr.Bhupendra Madhepuri, popularly known as Bhishma Pitamah of Madhepura giving honour to daily wages Labour Pappu Kumar on International Labour Day at his residence Vrindavan, Madhepura.
Dr.Bhupendra Madhepuri, popularly known as Bhishma Pitamah of Madhepura giving honour to daily wages Labour Pappu Kumar on International Labour Day at his residence Vrindavan, Madhepura.

यह भी बता दें कि इस मजदूर दिवस पर कुमारखंड प्रखंड के एक वसुधा केंद्र पर कई मजदूरों के पेंशन खाते खोलकर उन्हें पेंशन कार्ड भी दिया गया। उस केंद्र के संचालक रोहित कुमार रुपेश की अध्यक्षता में आयोजित उक्त कार्यक्रम में चितरंजन सिंह सरपंच ने इस योजना का शुभारंभ किया। साथ ही संचालक श्री रुपेश ने असंगठित क्षेत्र के ठेला चालक, रिक्शा चालक तथा घर-मकान बनाने वाले मजदूर आदि के लिए केंद्र सरकार द्वारा शुरू किये गये प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन पेंशन योजना के बारे में विस्तार से लोगों को बताया।

यह भी जानिए कि जहाँ स्थानीय पार्वती सायंस कॉलेज परिसर में छात्र राजद संगठन के सदस्यों सहित डॉ.अरविंद यादव, ईशा असलम, सानू यादव…. आदि ने मजदूरों को चादर देकर सम्मानित किया वहीं दूसरी ओर जिला मजदूर व राजमिस्त्री समन्वयक संघ के सदस्यों ने अध्यक्ष सीताराम पंडित की अध्यक्षता में मजदूर दिवस मनाते हुए मजदूरों को जुल्म व अत्याचार से बचने के लिए एकजुट रहने का मंत्र दिया।

चलते-चलते यह भी बता दें कि मधेपुरा के भीष्म-पिता कहे जाने वाले डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस पर इतना ही कहा कि मजदूर हमारे देश को प्रगति के मार्ग पर गतिशील रखने के लिए अहर्निश प्रयत्नशील रहता है। डॉ.मधेपुरी ने कहा कि जैसे मजदूर के बिना देश आगे नहीं बढ़ सकता वैसे ही सैनिकों के बिना देश सुरक्षित नहीं रह सकता। अंततः मजदूरों व सैनिकों की दशा एवं दिशा बदलने के लिए रहवरों को एकजुट होकर सोचना होगा। डॉ.मधेपुरी ने आज के दिन एक बिजली मिस्त्री पप्पू कुमार को अंगवस्त्रम एवं नगद राशि देकर इस अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस का हृदय से सम्मान किया।

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