18 अप्रैल को घर में ही मनाया ‘विश्व धरोहर दिवस’ डॉ.मधेपुरी ने

सभी जानते हैं कि विश्व के समस्त देशों में मानव सभ्यता से जुड़े ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षण के प्रति जागरूकता लाने के लिए प्रतिवर्ष 18 अप्रैल को विश्व धरोहर दिवस मनाया जाता है। भारत के 37 स्थल विश्व धरोहर में शामिल किए गए हैं।

बता दें कि ताजमहल से लेकर अजंता की गुफाओं तक तथा लाल किला से लेकर कोणार्क मंदिर जैसी प्राचीन व ऐतिहासिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण जगह शामिल है। ताजमहल दुनिया के सात अजूबों में एक है जिसके निर्माण में 22 वर्ष लगे थे। वर्ष 1632 में निर्माण कार्य शुरू हुआ था जिस पर उन दिनों 3 करोड़ रुपए का खर्च हुए थे। प्रतिवर्ष ताजमहल को देखने के लिए 40 लाख लोग आते हैं जिसमें 30 फ़ीसदी लोग विदेशी होते हैं।

यह भी बता दें कि कोरोना वायरस के कारण फिलहाल ताजमहल बंद है और पर्यटकों के नहीं आने के कारण गरीबों व मजदूरों की रोजी-रोटी भी बंद हो गई है। कोरोना लाॅकडाउन के कारण घर में रहकर समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने वर्ल्ड हेरिटेज डे मनाने के क्रम में एकमात्र श्रोता अपनी धर्मपत्नी श्रीमती रेणु चौधरी से अब तक चार बार बंद किए जाने वाले ताजमहल की चर्चा करते हुए कहा-

पहली बार द्वितीय विश्व युद्ध (1939-45) के दरमियान बंद किया गया था। दूसरी बार भारत-पाकिस्तान युद्ध के दरमियान 1971 में बंद किया गया था। तीसरी बार आगरा में बाढ़ आने के दरमियान 1978 में स्थानीय प्रशासन द्वारा 7 दिनों तक बंद रखा गया था और चौथी बार 2020 में कोरोना के अंतरराष्ट्रीय कहर के दरमियान अनचाहे दिनों के लिए ताजमहल को फिर बंद कर दिया गया है।

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बिहार के कोरोना योद्धा डॉ.जे.पी.यादव की दिल्ली में सड़क दुर्घटना से मौत

बिहार के सुपौल जिला अंतर्गत त्रिवेणीगंज अनुमंडल स्थित भूड़ा गांव के निवासी एवं कोरोना-योद्धा डॉ.जे.पी.यादव दिल्ली में कोरोना मरीजों का इलाज करने में अहर्निश लगे रहते थे कि दिल्ली में ही अचानक एक सड़क दुर्घटना में चार रोज कबल उनकी मृत्यु हो गई। डॉ.जे.पी.यादव का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव भूड़ा में गुरुवार को किया गया।

बता दें कि 52 वर्षीय डॉ.जे.पी.यादव के पार्थिव शरीर के साथ दिल्ली के दर्जनों डॉक्टर अंतिम संस्कार में शामिल होने आए। रास्ते में उत्तर प्रदेश के अधिकारियों एवं कोरोना योद्धाओं द्वारा उनके पार्थिव शरीर पर फूल मालाएं चढ़ाकर श्रद्धांजलि दी गई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार डॉ.जय प्रकाश यादव दक्षिण एमसीडी में कोविड- 19 नोडल चिकित्सा पदाधिकारी थे। 1995 से वे दिल्ली को चिकित्सीय सेवा पूर्ण समर्पण के साथ दे रहे थे तथा वर्तमान में कोरोना वारियर्स के रूप में मरीजों का बेहतर इलाज कर रहे थे। उनकी कार जब स्टार्ट नहीं हुई तो बेटे की साईकिल से ही पॉलीक्लिनिक जाकर सीएमओ के रूप में डॉक्टरों एवं स्वास्थ्य कर्मियों को पीपीई (पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट) किट वितरण करने में लग गए। एक शाम को अपने फ्लैट ग्रेटर कैलाश-1 लौटते वक्त एक अज्ञात कार ने पीछे से टक्कर मार दी और उन्हें महरौली के पास अरविंदो रोड के पीटीसी चौक से उठाकर मैक्स हॉस्पिटल ले जाया गया परंतु लाख कोशिश के बावजूद बचाया नहीं जा सका।

Funeral of Dr.J.P.Yadav at his paternal village Bhura, Supaul.
The only son Kshitij near funeral of Dr.J.P.Yadav at his paternal village Bhura, Triveniganj (Supaul).

यह भी बता दें कि कोरोना वारियर्स डॉ.जे.पी.यादव को सारा देश संवेदना के साथ मौन श्रद्धांजलि दे रहा है तथा एक प्राइवेट हॉस्पिटल में रेडियोलॉजिस्ट के रूप में कार्यरत उनकी धर्मपत्नी डॉ.रश्मि एवं पुत्र क्षितिज व पुत्री दीक्षा सहित समस्त परिजनों को इस व्यथा को सहन करने की शक्ति प्रदान कर रहा है। परंतु, कृषक पिता महेश्वरी यादव व माता अमलेश्वरी देवी की आंखों के आंसू रुकने-थमने का नाम ही नहीं ले रहा है और बहन मीना कुमारी होश में आते-आते बार-बार बेहोश हो जाती है। भाई सुभाष कुछ बोल भी नहीं पाता है। समस्त भूड़ा गांव ही शोक में डूबा है। यह कोरोना लाॅकडाउन तो महेश्वरी-अमलेश्वरी के संसार को प्रकाशित करने वाले सूरज को ही सदा के लिए लाॅकडाउन कर दिया है !

चलते-चलते यह भी बता दें कि कोरोना जैसे अंतरराष्ट्रीय आपदा की घड़ी में जब चतुर्दिक लाॅकडाउन विराजमान है तब भी नीतीश सरकार के वरिष्ठ ऊर्जा मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव के निर्देश पर बिहार की सीमा में प्रवेश करते ही गोपालगंज के डीएम एवं एसपी ने डॉ.जयप्रकाश यादव के पार्थिव शरीर को वीरगति प्राप्त एक नायक जैसा सम्मान दिया तथा फूलमाला अर्पित करते हुए कहा कि डॉ.जेपी ने कोरोना-जंग में लोगों की सेवा करते-करते अपनी शहादत दी है…। त्रिवेणीगंज सदर के एसडीएम बीके सिंह ने जहां डॉ.जेपी के गांव भूड़ा जाकर श्रद्धांजलि अर्पित की… वहीं अति संवेदनशील समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने त्रिवेणीगंज भूड़ा की मिट्टी को (जिसकी सेवा उनकी बेटी व दामाद डॉ.रश्मि भारती एवं डॉ.वरुण कुमार वर्षों से करते आ रहे हैं) को नमन करते हुए कहा कि कोरोना योद्धा डॉ.जेपी जैसे यशस्वी पुत्र का माता-पिता होना भी परम सौभाग्य की बात है।

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लालू पैरोल पर जल्द आएंगे बाहर

कोरोना संकट के बीच आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के लिए सुकून देने वाली खबर। ये खबर आ रही है कोरोना वायरस के बढ़ते खतरे की आहट सुन रहे झारखंड से। इस वैश्विक महामारी के बाद बदली परिस्थितियों में लालू प्रसाद यादव को राहत मिलनी तय हो गई है। चारा घोटाला मामले में सजा भुगत रहे आरजेडी सुप्रीमो पैरोल की सारी शर्तों को पूरा कर रहे हैं। ऐसे में उम्मीद है कि एक-दो दिन में उन्हें पैरोल पर रिहा कर दिया जाएगा। हेमंत सरकार ने भी इस ओर कदम बढ़ा दिए हैं। सरकार ने इस मामले पर विधि विभाग से मंतव्य मांगा था। विधि विभाग ने अपना मंतव्य राज्य सरकार को भेज दिया है।

गौरतलब है कि किसी भी सजायाफ्ता को कुछ शर्तों के साथ पैरोल की सुविधा मिलती है। पैरोल एक्ट के अनुसार सजायाफ्ता व्यक्ति तभी जेल से बाहर निकल सकता है, जब उसने अपनी सजा का एक तिहाई समय जेल में बिताया हो या फिर वह एक साल से जेल में बंद हो। एक्ट के अनुसार सिर्फ उन्हीं व्यक्तियों को पैरोल मिलता है, जिनके घर में शादी हो या किसी का निधन हुआ हो। स्वास्थ्य की स्थिति ठीक नहीं रहने पर भी पैरोल मिलता है। इसके लिए राज्य सरकार एक बोर्ड का गठन करती है, जिसमें संबंधित व्यक्ति का आवेदन भेजा जाता है। उसके बाद कमेटी जेल में उसके व्यवहार, स्वास्थ्य की स्थिति और स्पष्ट कारण को देखते हुए ही पैरोल देने पर सहमति जताती है।

बता दें कि लालू प्रसाद यादव इन दिनों चारा घोटाले के दुमका और चाईबासा कोषागार से अवैध निकासी के मामले में सजायाफ्ता हैं। वे 23 दिसंबर 2017 से जेल में बंद हैं। जेल में उनके रहने की अवधि करीब 28 माह हो चुकी है, जो पैरोल की शर्तों को पूरा करता है। इसके अलावा उन्हें 15 से अधिक बीमारियां हैं, जिनका इलाज रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में चल रहा है। साथ ही, लालू उसी भवन में भर्ती हैं, जहां पर रिम्स प्रशासन ने कोरोना के संदिग्ध मरीजों के लिए आइशोलेशन वार्ड बनाया है। बहरहाल, यह भी देखना होगा कि पैरोल के बाद उन्हें लॉकडाउन में पटना भेजने की क्या व्यवस्था की जाती है।

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एक के बाद चार दीये जलाकर अंबेडकर जयंती को यादगार बनाएं- डॉ.मधेपुरी

14 अप्रैल 1891 के दिन भारत के संविधान निर्माता बाबा साहब भीमराव अंबेदकर का जन्म हुआ था। विश्व धरोहर के रूप में विख्यात बाबा साहब सबके लिए पूज्य हैं और अति सम्माननीय भी। समस्त भारत के अलावा अन्य देशों में भी जहां सभी समुदाय के लोगों द्वारा सर्वाधिक उत्साह एवं उमंग के साथ बाबा साहब की जयंती आज तक मनाई जाती रही है- इस बार वैसा कैसे होगा ? सबको पता है कि संसार के लगभग समस्त देशों में “कोरोना के कहर” से मुक्ति पाने के लिए लाॅकडाउन लगाया हुआ है।

Shikshavid Dr.Bhupendra Madhepuri.
Shikshavid Dr.Bhupendra Narayan Madhepuri.

इस पावन अवसर पर डॉ.भीमराव अंबेडकर साहब की 129वीं जयंती के दिन मधेपुरा के समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने हार्दिक शुभकामनाएं व्यक्त करते हुए सबों से यही अनुरोध किया-

राष्ट्र कल्याण एवं राष्ट्र के नवनिर्माण के लिए देशवासी लाॅकडाउन केे  नियमों का पालन करते हुए अपने-अपने घरों में “एक के बाद चार दीये” जलाकर 14 अप्रैल को सदा के लिए यादगार बनाएं तथा संकल्प के साथ “जयभीम” का उद्घोष करते हुए इस  “भीमवाणी” को आत्मसात करने में लग जाएं-

शिक्षा शेरनी का दूध है, जो पियेगा वो दहाड़़ेगा !

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बीपी मंडल व फणीश्वर नाथ रेणु को याद किया डॉ.मधेपुरी ने

जिन महापुरुषों ने देश व समाज के उन्नयन के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया है वही देश एक छोटे से कीटाणु कोरोना वायरस के कारण आज घर के अंदर बंद है। समस्त राजकीय समारोह पर ब्रेक लग गया है। चाह कर भी सोशल डिस्टेंसिंग  के कारण हम सम्मिलित रूप से समारोह नहीं कर सकते। अस्तु बीपी मंडल की पुण्यतिथि (13 अप्रैल) के दिन उन्हें एवं कथा सम्राट फणीश्वर नाथ रेणु (जिन दोनों महापुरुषों के नाम भारत सरकार ने डाक टिकट भी जारी किया है) को याद करते हुए समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने अपने मधेपुरा वार्ड नं- 20 स्थित निवास वृदावन में सोशल डिस्टेंस मेंटेन करते हुए समस्त संसार वासियों से यही कहा-

आज कोरोना के कहर के खिलाफ जंग में जूझ रहे भारत को ही नहीं बल्कि संसार के समस्त देशों को मदद करने की बारी है आपकी। मौत की आहटों को आप ध्यान से सुनिए और जो जहां हैं वहीं रहिए… जान है तो जहान है। आपके खुद की हिफाजत से ही आपका संसार महफूज रहेगा। आप सफाई से ज्यादा स्वच्छता पर ध्यान दीजिए। लगातार हाथों को साबुन से साफ कीजिए और हाथों से मुंह-नाक-आंख को नहीं छुईए। हर हाल में सोशल डिस्टेंस मेंटेन कीजिए। एयर कंडीशनर मशीन का इस्तेमाल नहीं कीजिए। मन को संकल्प और संयम से ओत-प्रोत करते रहिए।

Fanishwar Nath Renu.
Fanishwarnath Renu.

लॉकडाउन के दरमियान अपने रहनुमाओं को अवश्य स्मरण कीजिए तथा कोरोना वायरस से लड़ने एवं जीतने के सभी उपायों का डटकर अनुसरण करते रहिए- आज के दिन इन दोनों हस्तियों के प्रति हमारी यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को तीन महीने बिना शुल्क के गैस

केन्द्र सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए तीन महीने नि:शुल्क गैस रिफिल की घोषणा की है। आधिकारिक बयान के अनुसार, अब तक तेल कंपनियों के द्वारा इस मद में उज्ज्वला योजना के करीब 7.15 करोड़ लाभार्थियों के खाते में 5606 करोड़ हस्तांतरित किए गए हैं।
ध्यातव्य है कि यह योजना 01 अप्रैल से 30 जून तक के लिए प्रभावी है। इसके तहत कंपनियां लाभार्थी के खाते में उसके पैकेज के हिसाब से 14.2 किलो या 05 किलो के सिलेंडर की कीमत के बराबर का एडवांस जमा करा रही हैं। ग्राहक इस पैसे से सिलंडर रिफिल करा सकेंगे।
कोराना संकट को देखते हुए सभी कंपनियां हर लिहाज से कमर कस चुकी हैं। कंपनियां सुनिश्चित कर रही हैं कि डिलीवरी के लिए किसी ग्राहक को दो दिन से ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़े। लॉकडाउन के बाद से देश में हर दिन रोजाना करीब 60 लाख सिलेंडर रिफिल किए जा रहे हैं।
यह भी जानें कि आईओसीएल, बीपीसीएल और एचपीसीएल जैसी कंपनियां पहले ही डिलीवरी ब्वाय समेत सप्लाई चेन के विभिन्न चरणों में कार्यरत अपने कर्मचारियों के लिए 05 लाख की अनुग्रह राशि की घोषणा कर चुकी हैं। किसी भी कर्मचारी की कोरोना संक्रमण के कारण मृत्यु की स्थिति में यह राशि उनके परिजनों को दी जाएगी।

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महात्मा जोतीबा फुले की 193वीं जयन्ती अकेले मनाई डॉ.मधेपुरी ने

महात्मा जोतीबा फुले की 193वीं जयंती पर समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने शनिवार को मधेपुरा स्थित अपने वृंदावन निवास में कोरोना के कारण सोशल डिस्टेंसिंग के तहत श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए यही कहा-

मानवता के कल्याण के लिए हमें जितना भी कष्ट उठाना पड़े….. सभी कार्यों का परित्याग कर घर के अंदर ही रहना पड़े….. हम सभी वैसा ही करें। प्रशासन एवं चिकित्सकों द्वारा निर्धारित जो भी नियम बताए गए हैं उसका पालन करें। इसके अतिरिक्त हम जितना दान कर सकते हैं- देश के लिए… देश में रहने वाले गरीब मजदूर-किसान के लिए तथा पशु-पक्षी के लिए… उतना भर दान हर कोई अवश्य करें। पर सेवा और पर उपकार में हम सब प्रतिदिन लगे रहें।

Samajsevi-Shikshavid Prof.(Dr.)Bhupendra Narayan Madhepuri.
Samajsevi-Shikshavid Prof.(Dr.)Bhupendra Narayan Madhepuri.

यह भी ध्यान देंगे कि हमारे आस-पास कोई भूखा नहीं सोये… यही आज की तारीख में जोतीबा फुले के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी तथा कोरोना वायरस को परास्त करने का सच्चा मार्ग भी।

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कोरोना संकट में बिहार के लिए सुकून भरा संकेत

क्या बिहार, क्या भारत, सम्पूर्ण संसार कोरोना वायरस की चपेट में है। लेकिन कोरोना संकट के इस दौर में भी बिहार के लिए एक सुकून भरा संकेत है और वह यह कि यहां एक भी मरीज न तो आईसीयू में भर्ती हुआ है और न ही किसी को लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखने की नौबत आई है। बस पॉजिटिव मरीज को अलग वार्ड में रखकर इलाज किया जा रहा है। कोविड-19 इलाज के लिए समर्पित एनएमसीएच, पटना में सिर्फ दो पॉजिटिव मरीजों को ही इमरजेंसी वार्ड में रखा गया है।
बिहार में कोरोना पॉजिटिव मरीजों के आईसीयू में भर्ती न होने या वेंटिलेटर पर नहीं जाने को लेकर भारत सरकार के ट्रॉपिकल डिजीज संस्थान, आरएमआरआई के निदेशक डॉ. प्रदीप दास का मानना है कि इसके दो कारण हो सकते हैं। पहला, भारत और खासकर बिहार के लोगों में कोरोना-19 के वायरस का जो घातक प्रभाव है, उसका असर नहीं होने का यह कारण हो सकता है कि यहां के लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अमेरिकी और यूरोपियन लोगों से अधिक हो। उनके अनुसार, इसका दूसरा कारण यह भी हो सकता है कि बिहार के लोगों को बचपन से ही विभिन्न तरह के वायरस से जूझना पड़ता है।
वहीं, दूसरी ओर एनएमसीएच के प्रभारी अधीक्षक डॉ. निर्मल कुमार सिन्हा का मानना है कि बिहार पुराने समय से मलेरिया संक्रमित जोन में रहा है। कोविड-19 के इलाज में अगर कोई दवा कुछ असर कर रही है, तो वह मलेरिया की है। इसी कारण अमेरिका भारत से मलेरिया की दवा मंगा रहा है। चूंकि अमेरिका और यूरोपियन देशों में मलेरिया का कभी असर ही नहीं रहा है, ऐसे में कोविड-19 वायरस का वहीं पर गंभीर अटैक हो रहा है। बिहार में मलेरिया के कारण हो सकता है कि यहां के लोगों में उस वायरस के खिलाफ इम्यूनिटी विकसित हो गई हो। हालांकि दोनों चिकित्सकों ने यह माना कि यह एक शोध का विषय है।

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लॉकडाउन में 10 अप्रैल को कैसे ढूंढ निकाला डॉ.मधेपुरी ने…?

कोरोना  के कहर के कारण देश में जो लाॅकडाउन लगाया गया है उससे भले ही देश की अर्थव्यवस्था बिगड़ने लगी है, लोग कृषि एवं उद्योग के कार्यों से खुद को दूर रखने हेतु विवश होने लगे हैं और अकारण ही मौत को गले भी लगाने लगे हैं, परंतु अब तो कोरोना लोक डाउन के कुछ फायदे भी बताए जाने लगे हैं।

यही कि लाॅकडाउन के चलते रेल एवं रोड पर गाड़ियों के नहीं चलने एवं फैक्ट्रियों के बंद होने से दिल्ली, मुंबई, कोलकाता व चेन्नई जैसे शहरों का प्रदूषण तेजी से घटने लगा है तथा गंगा-यमुना जैसी नदियों का पानी भी साफ होने लगा है। तभी तो दूरदर्शन के सभी चैनलों द्वारा अहर्निश उद्घोषणा होने लगी है-

देश रिचार्ज हो रहा है…. यहाँ का कोना-कोना खड़ा है और इंतजार कर रहा है…. आप घर में रहें, सुरक्षित रहें।

Samajsevi-Sahityakar Dr.Bhupendra Madhepuri. (File Photo)
Samajsevi-Sahityakar Dr.Bhupendra Madhepuri. (File Photo)

बता दें कि घर में रहने पर लोग जो नहीं सोच पाते थे वो भी सोचने लगे हैं। समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने अपने लोकप्रिय  होम्योपैथ चिकित्सक मित्र डॉ.शमशाद (मरहूम) को याद करते करते यह भी ढूंढ निकालते हैं कि आज 10 अप्रैल है, जो विश्व होम्योपैथ दिवस भी है। डॉ.मधेपुरी ने अपने मित्र डॉ.शमशाद के साथ-साथ  होम्योपैथी के जन्मदाता जर्मन निवासी एवं एमडी डिग्री प्राप्त एलोपैथिक चिकित्सक सैमुअल हैनीमैन को भी याद कर आज अपने निवास पर अपनी धर्मपत्नी श्रीमती रेणु चौधरी के साथ विश्व  होम्योपैथ दिवस मनाया। इस दिवस को इस दंपत्ति ने  होम्योपैथ दवा  आर्सेनिक एल्बम की दो-दो बूंदें लेकर मनाया।

चलते-चलते यह भी बता दें कि घर में रहकर अपनी कर्मभूमि में निरंतर अपने श्रम का खाद डालने में लगे रहते हैं डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी। यूँ तो पूर्व में डॉ.मधेपुरी ने इस ऐतिहासिक भूमि को गढ़ने वाले स्वतंत्रता सेनानी व समाज सुधारक रास बिहारी लाल मंडल, गांधीवादी शिवनंदन प्रसाद मंडल एवं समाजवादी भूपेन्द्र नारायण मंडल की जीवनियाँ सर्वप्रथम  लिखी और समादृत भी हुए। इस लाॅकडाउन में वे खुद को रिचार्ज कर सामाजिक न्याय के प्रणेता बीपी मंडल की अमूल्य जीवनी आरंभ कर दी है।

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एक इंच वाला दुनिया का सबसे छोटा लैपटॉप

अमेरिकी आईटी इंजीनियर पॉल क्लिंगर ने दुनिया का सबसे छोटा लैपटॉप बनाया है जिसका स्क्रीन मात्र 1 इंच की है। पॉल क्लिंगर ने इसे मात्र 7 दिनों में ही तैयार किया है जिसकी कीमत माात्र $85 यानी लगभग 6 हजार रूपया है। उपयोगकर्ता इस लैपटॉप पर गेम भी खेल सकते हैं। जिसका डिस्प्ले .96 सेंटीमीटर का है।

बता दे की आईटी इंजीनियर पॉल क्लिंगर के अनुसार इस लैपटॉप का नाम उन्होंने ‘थिंक टिनी’ रखा है। यह लैपटॉप आईबीएम के थिंकपैड का छोटा रूप है। थिंक टिनी जैसे सबसे छोटे लैपटॉप में थिंक पैैड की तरह कीपैड के बीच में लाल रंग का ट्रैक प्वाइंट स्टाइल कर्सर कंट्रोलर भी लगाया गया है। इस मिनी लैपटॉप में 300 एमएएच की बैटरी लगाई जाती है जिस बैटरी को चार्ज भी किया जा सकता है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि इस मिनी लैपटॉप में एक 14- पिन एटी टिनी 1614 माइक्रोकंट्रोलर (20 मेगा हर्ज) है जो एक छोटे 128×64 पिक्सेल ओएलईडी डिस्प्ले से जुड़ा है और इसमें 7 लाइनों वाला बोर्ड भी है।

 

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