कला संस्कृति युवा विभाग द्वारा जिलास्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता का शुभारंभ

मधेपुरा के मनभावन कीर्ति नारायण मंडल क्रीड़़ा मैदान, जिसे खेल को समर्पित संत कुमार और अरुण कुमार द्वारा दुल्हन की तरह सजाया गया, में त्रिदिवसीय जिला स्तरीय विद्यालय खेलकूद प्रतियोगिता (2019-20) का शानदार शुभारंभ किया गया। जिला स्तरीय इस खेलकूद प्रतियोगिता का उद्घाटन सदर एसडीएम वृंदालाल, समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी, डीईओ उग्रेश प्रसाद मंडल, उपाध्यक्ष शारीरिक शिक्षा सच्चिदानंद झा, मंडल विश्वविद्यालय क्रीड़ा विभाग के सचिव डॉ.ए.फजल, उपसचिव डॉ.शिवशंकर मिश्र आदि ने संयुक्त रूप से मशाल जलाकर किया।

बता दें कि इस त्रिदिवसीय खेलकूद प्रतियोगिता में जहाँ बालक-बालिका (अंडर-14 से लेकर अंडर-19 तक) द्वारा खो-खो, वाॅलीबाल, कुश्ती, रग्बी जैसे खेल में जोर आजमाए जाएंगे संतअवध कीर्ति मैदान में, वहीं कराटे, ताइक्वांडो एवं बुशु प्रतियोगिता में भाग लेने जायेंगे बी.पी.मंडल इंडोर स्टेडियम में। इसके अलावे संत कुमार व अरुण कुमार द्वारा उद्घोषित कार्यक्रम के अनुसार बैडमिंटन, फुटबॉल, हैंडबॉल, कबड्डी एवं क्रिकेट आदि का आयोजन किया जाएगा।

Athletes at Kirti Narayan Mandal Krida Maidan, Madhepura.
Athletes at Kirti Narayan Mandal Krida Maidan, Madhepura.

यह भी बता दें कि वन महोत्सव के तहत सभी आगत अतिथियों द्वारा वृक्षारोपण भी किया गया एवं तत्पश्चात स्वागत गान, स्वागत भाषण एवं अंगवस्त्रम व मोमेंटो आदि प्रदान कर अतिथियों का भरपूर स्वागत किया गया…… उपस्थित खेल प्रेमियों डॉ.वंदना कुमारी, डॉ.किशोर कुमार, मानव कुमार सिंह, रूपेश कुमार, अनिल राज, कंचन कुमार कुंज, राजू-अमित-दिलीप आदि द्वारा।

इस अवसर पर जहाँ एसडीएम वृंदालाल ने खेल को प्रोत्साहन देने हेतु कीर्ति नारायण मंडल के नाम से स्टेडियम के लिए प्रयास करने का आश्वासन दिया वहीं जिला शिक्षा पदाधिकारी यूपी मंडल ने खेल के साथ पढ़ाई को भी आवश्यक बताया। साथ ही अतिथिगण एसएन झा, डॉ.ए.फजल, डॉ.एसके मिश्र आदि ने अपने संबोधन में प्रतिभागियों को खूब प्रोत्साहित किया।

अंत में मधेपुरा के अभिभावक माने जाने वाले समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने कीर्ति क्रीड़ा मैदान में उपस्थित अतिथियों एवं खिलाड़ियों को शुभाशीष देते हुए यही कहा-

न सा सभा यत्र न सन्ति वृद्धा,

न तो वृद्ध ये न वदन्ति धर्मम्।

यानि वह सभा नहीं है जहाँ वृद्ध पुरुष न हों और वे वृद्ध नहीं हैं जो धर्म की बात न बतावें……..। यहाँ उन्होंने यही कहा कि भारतीय रेल और भारतीय खेल विकास की गाड़ी के दो ऐसे पहिए हैं जो विकास को गति देने के साथ-साथ भारत की एकता एवं अखंडता को जहाँ बल प्रदान करता है, वहीं जातियों व संप्रदायों के बीच की दीवारों को कमजोर करने में सदा लगा रहता है। डॉ.मधेपुरी ने प्रतिभागियों से कहा कि खेल में कोई हारता नहीं है…… जीतता वही है जिसके अंतर्मन का संकल्प बलवान होता है।

चलते-चलते बता दें कि जहाँ एथलेटिक्स अंडर-14 बालक वर्ग के 600 मीटर में दार्जिलिंग पब्लिक स्कूल, डॉ.मधेपुरी मार्ग, वार्ड नं.-1, मधेपुरा के अवनीश कुमार ने प्रथम स्थान प्राप्त किया वहीं मध्य विद्यालय मिठाई के रितेश कुमार एवं मध्य विद्यालय महेशपुर के प्रशांत कुमार द्वितीय एवं तृतीय स्थान पर रहे……!

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स्वर शोभिता संगीत महाविद्यालय में समारोह पूर्वक मनाई गई 10वीं वर्षगांठ

स्वर शोभिता संगीत महाविद्यालय में मधेपुरा के अभिभावक व समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी, बीएनएमयू के डॉ.एचएलएस जौहरी, डॉ.एम आई रहमान, डॉ.फजल, डॉ.शंकर कुमार मिश्र, डॉ.अशोक कुमार व संगीत को ऊँचाई देने वाली प्रो.रीता कुमारी, प्रो.अरुण कुमार बच्चन, डॉ.रवि रंजन सहित निर्देशिका डॉ.हेमा कश्यप ने महाविद्यालय की दसवीं वर्षगांठ पर 18 अगस्त को आयोजित भव्य समारोह का श्रीगणेश संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इसके साथ ही स्वागत गान के अलावे अंगवस्त्रम, पुष्पगुच्छ  व मोमेंटो आदि से अतिथियों का भरपूर सत्कार किया गया।

Dr.Bhupendra Madhepuri addressing at Swar Sobhita Sangeet Mahavidyalaya.
Dr.Bhupendra Madhepuri addressing at Swar Sobhita Sangeet Mahavidyalaya.

बता दें कि इस स्वर शोभिता संगीत महाविद्यालय के कण-कण में कलात्मकता की खुशबू निकलने का एहसास अतिथियों द्वारा महसूस किया जाता रहा तभी तो डॉ.मधेपुरी ने संगीत व कला को ऊँचाई प्रदान करने वाली निर्देशिका डॉ.हेमा को आगे बढ़ते रहने का शुभ आशीष देते हुए विशाल प्रशाल में उपस्थित कला-प्रेमी बच्चों एवं उनके अभिभावकों व सुधी श्रोताओं से यही कहा-

साहित्य संगीत कला विहीन:, साक्षात पशु पुच्छ विश्रहीनः डॉ.मधेपुरी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि साहित्य यदि समाज का दर्पण है तो कला उसकी धड़कन है। संगीत ऐसी कला है जो मन की चिंता, शोक, खेद व व्यथा को हरण कर लेती है। जितने भी बड़े-बड़े वैज्ञानिक हुए हैं वे भी संगीत से जुड़े रहे हैं….. यहाँ तक कि मिसाइल मैन भारतरत्न डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम भी वाद्य वीणा बजाते थे और श्रीराम राग में गाते व गुनगुनाते थे।

Dr.Madhepuri & Principal Dr.Hema Kashyap amidst kids.
Dr.Madhepuri & Principal Dr.Hema Kashyap amidst kids.

यह भी बता दें कि डॉ.एचएलएस जौहरी की अध्यक्षता में आयोजित- चित्रकला, हस्तकला, भाषण, लेखन सहित नृत्य व मेहंदी आदि प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले प्रतिभागियों से डॉ.रहमान, डॉ.फजल, डॉ.अशोक, डॉ.शंकर सहित अन्य अतिथियों ने विस्तार पूर्वक प्रोत्साहित करते हुए यही कहा कि प्रतियोगिता से बच्चों की प्रतिभा में निखार आती है….. अपने अध्यक्षीय भाषण में डॉ.जौहरी ने कहा कि ऐसी प्रतियोगिताएं बराबर आयोजित होती रहनी चाहिए।

अंत में निदेशिका डॉ.हेमा कश्यप ने आगामी 1 सितंबर 2019 को समापन समारोह में पुरस्कार वितरण करने की सूचना देते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया। मंच संचालनकर्ता अरुण कुमार ने अध्यक्ष की सहमति से उद्घाटन कार्यक्रम समाप्ति की घोषणा की।

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कुसहा त्रासदी के 11वें वर्ष पूरा होने पर 150 गाँवों में किया जाएगा संवाद

वर्ष 2008 के 18 अगस्त को कुसहा में कोसी का बांध टूटा। जन जीवन तबाह हो गया। कितने गाँव और घर सहित गृहपति जल समाधि ले लिए। 11 वर्ष गुजर गये। कुसहा त्रासदी के जख्म आज तक भरे नहीं, बल्कि आज भी हरे हैं।

बता दें कि न तो कुसहा के दोषियों को सजा मिली और ना कोसी की समस्याओं का निराकरण के कोई ठोस उपाय ढूंढें गये। तब के राहत से लेकर अब तक के पुनर्वास का लाभ सभी पीड़ितों को नहीं मिल पाया है। जिसके लिए आज तक कोसी नवनिर्माण मंच के संचालक महेन्द्र यादव एड़ी चोटी एक कर रहे हैं…… वे 50% पीड़ितों को ही पुनर्वास का लाभ दिलाने में सफल हुए हैं। आज भी कितनी टूटी हुई सड़कें और टूटे हुए पुल निर्माण कार्य की बाट जोह रहे हैं।

इस अवसर पर मयंक सभागार में मुख्य अतिथि के रूप में मधेपुरा के भीष्म पितामह कहे जाने वाले समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने अपने संबोधन में मधेपुरा-सहरसा-सुपौल तीनों जिले से आए मंच के कार्यकर्ताओं से कहा कि कुसहा त्रासदी से पूर्णरूपेण निपटने के लिए आज की तारीख में मजबूत जन संगठन निर्माण करने के साथ-साथ जन आंदोलन खड़ा करना भी मौजूदा समय की मुकम्मल जरूरत है। आगे उन्होंने कहा कि यह कैसे होगा जबकि यहाँ के लोग वृक्ष के हरे पत्ते भी खाकर गुजारा करना पसंद करते रहेंगे ?

डॉ.मधेपुरी ने यह भी कहा कि सरकारी महकमे में एमएलए, एमपी-लोकसभा, राज्यसभा सबका पेंशन अलग-अलग भुगतान हो वह सही…… परंतु 35 वर्षों तक नौकरी करने वाले बिना पेंशन के ही रिटायर करें…… यह कैसा न्याय है ? उन्होंने कहा कि समान काम के लिए समान वेतन जैसे प्राकृतिक न्याय को सम्मान नहीं देना कितना बड़ा अन्याय है- पाप है। देश की जनता जिस मिठाई को बाजार में ₹10 में प्राप्त करे वही विधानसभा व लोकसभा के कैंटीन में आठ आने में रहनुमाओं को मिले……. यही हमारी न्याय व्यवस्था है। अंत में डॉ.मधेपुरी ने 2008 की आपबीती मर्मस्पर्शी घटनाएं सुनाते हुए विस्तार से वर्तमान सन्दर्भों को जोड़ा।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रखर वक्ता आकाश यदुवंशी, मुन्ना पासवान, माधव प्रसाद, दुनियादत्त सहित शंभू यादव, पिरबत पासवान, एसके सुमन, रमन कुमार, सतीश कुमार, संदीप कुमार आदि ने पुनर्वास की हकीकत बयां करते हुए पर्यावरण के सवालों और इस त्रासदी से जुड़े सवालों व बाढ़ के संभावित खतरों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए यही कहा कि महात्मा गांधी के जन्म के 150 वर्षों को यादगार बनाने हेतु कोसी क्षेत्र के 150 गाँव में इन सवालों पर अगले 2 अक्टूबर तक संवाद किया जाय। कार्यक्रम का संचालन राजू खान ने किया और धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कोसी नवनिर्माण मंच के संस्थापक महेंद्र यादव ने सूचना दी कि संध्या 6:00 बजे भूपेन्द्र चौक पर कुसहा त्रासदी में अकारण बह गये किसान-मजदूर व समस्त नर-नारियों को मोमबत्ती जलाकर श्रद्धांजलि देने हेतु आयोजन किया गया है। जिसमें सबने अपनी उपस्थिति दर्ज की। प्रेरणा के गीत और कृति का पर्यावरण-प्रेम में सबों को कुरेदा।

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बीमार जेटली का हाल जानने दिल्ली पहुँचे नीतीश

पूर्व केन्द्रीय मंत्री व भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली गंभीर रूप से बीमार हैं और 9 अगस्त से दिल्ली स्थित एम्स में उनका इलाज चल रहा है। खबरों के मुताबिक उनकी स्थिति लगातार चिन्ताजनक बनी हुई है। शनिवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उन्हें देखने दिल्ली पहुँचे और उनका हालचाल लेकर उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
नीतीश कुमार काफी देर तक एम्स में रुके। उन्होंने वहां डॉक्टरों से भी बात की। बताया जाता है कि शनिवार को जेटली जी को डॉक्टरों ने वेंटिलेटर से हटाकर ईसीएमओ (एक्सट्रा कॉर्पोरियल मेंब्रेन ऑक्सीजिनेशन) पर शिफ्ट कर दिया है। ईसीएमओ पर मरीज को तभी रखा जाता है जब दिल और फेफड़े ठीक से काम नहीं करते और वेंटीलेटर का भी फायदा नहीं होता। इससे मरीज के शरीर में ऑक्सीजन पहुँचाई जाती है।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का अरुण जेटली से बेहद आत्मीय संबंध रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के बाद अरुण जेटली भाजपा के उन गिनेचुने नेताओं में रहे हैं जिनसे नीतीश कुमार की काफी निकटता रही है।
चलते-चलते बता दें कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शनिवार को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक भोजपुर और बिहटा जाने वाले थे जहाँ उन्हें कई योजनाओं का शिलान्यास करना था। लेकिन अरुण जेटली की नाजुक हालत देख उन्होंने सारे कार्यक्रम रद्द कर दिए और दिल्ली जाने का फैसला ले लिया।

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स्वतंत्रता दिवस के दिन 11 पौधे लगाकर पर्यावरण सुरक्षा का दिया संदेश डॉ.मधेपुरी ने

दैनिक भास्कर की पहल यानि “एक पेड़ एक जिंदगी” वाले अभियान से जुड़कर ‘श्रृंगी ऋषि सेवा मिशन’ के कार्यकर्ताओं ने अगले 1 महीने में जिले के विभिन्न भागों में 500 पौधे लगाने का संकल्प लिया है।

बता दें कि 15 अगस्त की शाम को सबैला के डीएल पब्लिक स्कूल में इस सर्वाधिक प्रशंसनीय कार्यक्रम का उद्घाटन बीएन मंडल विश्वविद्यालय में परीक्षा नियंत्रक, कुलानुशासक व कुलसचिव रह चुके डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने किया और उन्होंने 11 पौधे लगाकर पर्यावरण सुरक्षा का संदेश भी दिया तथा पर्यावरण को बचाने का संकल्प भी सभी शिक्षकों, छात्रों व अभिभावकों को दिलाया। इस अवसर पर डॉ.मधेपुरी ने कहा कि यह कार्यक्रम समाज में रह रहे पर्यावरण प्रेमियों के लिए अपनी जिम्मेदारी का अहसास करने जैसा है।

डॉ.मधेपुरी ने एक पेड़ की उपयोगिता गिनाते हुए बच्चों से कहा कि एक सामान्य पेड़ जहाँ प्रतिवर्ष 20 टन कार्बन डाइऑक्साइड को सोखता है वहीं वह पेड़ लगभग 20 किलो धूल को भी सोख लेता है। इसके अलावा वही पेड़ 80 किलो ग्राम पारा, लिथियम, लेड आदि जैसी जहरीली धातुओं के मिश्रण को सोखने की क्षमता रखता है। यहाँ तक कि वह शोर/ध्वनि को भी सोख लेता है। डॉ.मधेपुरी ने अभिभावकों से कहा कि घर के पास 10 पेड़ हो तो मानसिक तनाव व अवसाद तो घटती ही है….. बल्कि आसपास रहने वालों का जीवन लगभग 7 साल तक बढ़ जाता है।

डीएलपी स्कूल के डायरेक्टर एलएन यादव ने जहाँ पर्यावरण संरक्षण को अपनी दैनिक जिम्मेदारी के अभिन्न अंग बनाने की नसीहत दी वहीं श्रृंगी ऋषि सेवा मिशन के संस्थापक भास्कर कुमार निखिल ने अपने संक्षिप्त संबोधन में यही कहा कि भारतीय संस्कृति में पर्यावरण और प्रकृति को पूजनीय माना गया है। श्री भास्कर ने उपस्थित जनों से कहा कि आइए अपने-अपने जन्मदिन या परिवार-समाज के अन्य किसी भी शुभ अवसर पर पौधरोपण जरूर करें और देखभाल की जिम्मेदारी भी उठाएं।

मौके पर उप-प्राचार्य अखिलेश कुमार, व्यवस्थापक अनुज सिंह, शिक्षकगण रमण कुमार , अभिषेक कुमार, मालिक झा, रंजीत कुमार सहित सत्यम, शिवम, विदुर, दीनबंधु , तेजस्वी, आयुष, मुन्ना आदि उपस्थित थे।

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स्वतंत्र भारत में चौथी बार 15 अगस्त को ध्वजोत्तोलन और रक्षाबंधन एक साथ

वर्ष 1947 के 15 अगस्त यानी आजादी के बाद यह चौथी दफा है जब आजादी के जश्न के साथ-साथ संपूर्ण देश के युवाओं द्वारा रक्षाबंधन का त्योहार सर्वाधिक उमंग व उत्साह से मनाया गया है। दोनों त्योहार एक साथ मिलकर अभूतपूर्व एवं अद्वितीय रहा।

यह भी जानिए कि प्रत्येक 19 वर्षों के बाद ही यह सुखद संयोग आता है। आजाद भारत में अब तक 4 बार यह अवसर आया है।

यह भी बता दें कि वर्ष 1905 में बंगाल के पृथक्करण के खिलाफ रवीन्द्र नाथ टैगोर से लेकर…. रास बिहारी लाल मंडल आदि ने “राखी महोत्सव” शुरू किया था। उन दिनों रक्षाबंधन केवल भाई-बहन का त्योहार नहीं रह गया था बल्कि एकीकरण के लिए हिन्दू और मुस्लिम एक दूसरे को राखी बांध रहे थे… तब यह रक्षाबंधन का पर्व केवल एक दिन का नहीं बल्कि दोनों समुदायों के बीच महीना भर चलता रहा था…. तभी तो 1911 में विवश होकर अंग्रेजों को बंगाल का विलय करना पड़ा।

और इस बार गुरुवार को श्रावण पूर्णिमा के साथ-साथ रक्षाबंधन और जश्न-ए-आजादी का पर्व एक साथ हो गया- जहाँ एक देश, एक झंडा, एक विधान, एक संविधान… चारो तरफ एकीकरण ही एकीकरण…  चतुर्दिक शांति और सद्भाव का वातावरण ! कश्मीर से कन्याकुमारी और राजस्थान से बंगाल की खाड़ी तक इस बार का 73वां स्वतंत्रता दिवस नए किस्म से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मनाया जा रहा है- पहाड़ से लेकर पोखर तक… सरहद से लेकर समंदर तक…. जहाँ भी देखिए… जिधर भी देखिए… चारों ओर तिरंगा ही तिरंगा।

यह भी कि एक ओर सियाचिन की बर्फीली ऊँचाई से भी ऊपर आसमान के सीने पर लहराता हुआ दिखता है तिरंगा….  वहीं दूसरी ओर देश की शान बनकर फहरता है तिरंगा। कहीं देशवासियों का अरमान बना रहा तिरंगा…. और कहीं 360 फीट के पोल पर फहरता रहा तिरंगा…… तो कहीं लहराता रहा 60 फीट चौड़ा और 90 फीट लंबा रेशमी तिरंगा…. । दिल्ली के लाल किले से लेकर कश्मीर के लाल चौक तक पी वेंकैया द्वारा डिजाइन किया गया वही तिरंगा इस बार शान से लहराया।

चलते-चलते यह भी कि इस बार के 73वें स्वतंत्रता दिवस समारोह पर मधेपुरा जिले के युवाओं ने खूब लहराया तिरंगा। एक ओर जहाँ बीएन मंडल स्टेडियम में जिलाधिकारी नवदीप शुक्ला ने और बीएन मंडल विश्वविद्यालय में कुलपति डॉ अवध किशोर राय ने तिरंगे को सलामी दी वहीं दूसरी ओर बीएन मंडल चौक पर एवं डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम पार्क में राष्ट्रीय ध्वज को समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने सलामी दी तथा याद किया उन वीर सपूतों को जिनकी शहादत के कारण आज हम आजाद हैं। संपूर्ण राष्ट्र बापू सहित उनके सेनानियों को नमन करता रहा…. उनके ‘अमर रहे’ के नारे लगाता रहा….. और ‘भारत माता की जय’ करता रहा….. !!

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15 अगस्त को सूबे की सरकार ने लिया संकल्प : दो लाख कुओं के होंगे कायाकल्प

जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत राज्य में 2 लाख कुओं के जीर्णोद्धार कार्य को राज्य सरकार ने अपने कार्य सूची में शामिल किया है। मुख्य सचिव दीपक कुमार ने बताया कि सूबे में ढ़ाई लाख कुओं की पहचान की गई है जिसमें लगभग 2 लाख सार्वजनिक उपयोग में आने वाले कुएं  हैं, शेष करीब 50 हजार कुएं निजी उपयोग वाले हैं।

बता दें कि इन 2 लाख कुओं के कायाकल्प को लेकर मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों को दिशा-निर्देश भी जारी कर दिया है। राज्य सरकार को प्राप्त सूची पीएचईडी को दे दी गई है। सार्वजनिक उपयोग वाले कुओं को चिन्हित कर उनका कायाकल्प पीएचईडी करेगा जिसकी शुरुआत भी पीएचईडी द्वारा कर दी गई है। कुओं को जाली से ढका भी जा रहा है।

सूबे में हरित आवरण करने हेतु मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 17% का लक्ष्य रखा है। इस अभियान के तहत प्रमुख कार्यों में सबसे प्रमुख है- पौधे तैयार करने की क्षमता बढ़ाना। इस हेतु कुछ नई पौधशालाएं खोली जाएंगी। वन विभाग की खाली जमीन पर भी पौध तैयार करने का काम शुरू किया जाएगा। फिलवक्त सभी सरकारी नर्सरीयों की क्षमता प्रतिवर्ष 1 करोड़ 60 लाख पौधे तैयार करने की है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि जिस रफ्तार से आबादी का विस्तार हो रहा है, उसके अनुपात में हरियाली कम है। सूबे की सरकार ने इस अनुपात को छूने के लिए हर साल 4 करोड़ पौधे तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। तत्काल बिहार में 180 सरकारी पौधशालाएं हैं। फिलहाल 1 करोड़ 60 लाख की क्षमता है जिसे 4 करोड़ करने की तैयारी की जानी है।

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सेनानियों एवं शहीदों को जीवंत रखने में लगे हैं डॉ.मधेपुरी

सेनानियों एवं शहीदों को जीवंत रखने में वर्षों से लगे हैं समाजसेवी डॉ.मधेपुरी। प्रखर स्वतंत्रता सेनानी भूपेन्द्र नारायण मंडल को जीवित करने के लिए उन्होंने 1975 ई. में भूपेन्द्र नारायण मंडल वाणिज्य महाविद्यालय की स्थापना की और वर्तमान भूपेन्द्र चौक (कॉलेज चौक) पर जन सहयोग से उनकी प्रतिमा लगाई। तत्कालीन मुख्यमंत्री के हाथों प्रतिमा का अनावरण कराया। दिनांक 4 फरवरी 1991 को प्रतिमा अनावरण के बाद भूपेन्द्र नारायण मंडल के नाम विश्वविद्यालय की घोषणा को लेकर संयोजक डॉ.मधेपुरी की मांग को उसी दिन एक महती जनसभा में मुख्यमंत्री लालू प्रसाद ने स्वीकृति दे दी।

भूपेन्द्र बाबू से पूर्व के स्वतंत्रता सेनानी  बाबू रास बिहारी लाल मंडल एवं क्रांतिवीर शिवनंदन प्रसाद मंडल को जीवंत बनाए रखने हेतु डॉ.मधेपुरी ने अपने छात्र जीवन में ही मन बना लिया था कि आगे आने वाले दिनों में उनकी प्रतिमाएं उनके नाम वाले विद्यालय में अवश्य लगेेंगी क्योंकि डॉ.मधेपुरी दोनों स्कूल के छात्र रहे हैं। अक्षर का क्षय नहीं होता इसलिए डॉ.मधेपुरी ने इन तीनों मनीषियों की जीवनी भी लिखी, जो भटक रहे समाज को राह दिखाने का काम करेगी। इन तीनों स्वतंत्रता सेनानियों पर लिखी गई पुस्तकें हैं- 1. रास बिहारी लाल मंडल : पराधीन भारत में स्वाधीन सोच 2. इतिहास पुरुष शिवनंदन प्रसाद मंडल 3. बूंद बूंद सचः एक सागर का (भूपेद्र बाबू की जीवनी)

जहाँ तक शहीदों को जीवंत रखने की बात आती है उसे बड़ी सहजता से पूरा किया है डॉ.मधेपुरी ने… वर्ष 1943 में मात्र 23 वर्ष की उम्र में शहीद हुए चुल्हाय यादव के नाम पर डाक बंगला रोड का नाम जिला परिषद व नगर परिषद के सहयोग से डॉ.मधेपुरी ने “शहीद चुल्हाय मार्ग” नामित कराया और हाल में उसी रोड के पश्चिमी बाईपास चौक को ‘शहीद चुल्हाय चौक’ नाम दिया है।

इसी जिले के किशुनगंज अनुमंडल के शहीद बाजा साह एवं जिले के अन्य शहीदों- शहीद चुल्हाय यादव, शहीद सदानंद, शहीद प्रमोद कुमार (फुलकाहा), शहीद प्रमोद कुमार (चामगढ़), शहीद शंकर रजक आदि को जीवंत रखने के लिए डॉ.मधेपुरी ने स्थानीय गांधी चिल्ड्रन पार्क के अंदर तत्कालीन डीएम मो.सोहैल (IAS) के कार्यकाल में उनके ही द्वारा शहीद पार्क का उद्घाटन कराया तथा एक अनाम पार्क को भी डॉ.मधेपुरी ने जिला प्रशासन व नगर परिषद के सहयोग से ‘डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम पार्क’ नाम घोषित कराया।

हाल-फिलहाल डॉ.मधेपुरी ने सहरसा में 29 अगस्त 1942 को शहीद हुए 6 शहीदों में एक भोला ठाकुर की सौ वर्षीया धर्मपत्नी श्रीमती बेचनी देवी से मिलने प्राचार्य डॉ.विनय कुमार चौधरी के साथ चैनपुर गाँव गए। डॉ.मधेपुरी ने अपनी ‘आजादी’ शीर्षक वाली पूरी कविता का पाठ कर सबों की आँखें नम कर दी। कुछ देर बाद आशीष प्राप्त किया और जितना बन पड़ा उनकी परेशानियों को बाँटे और आज तक उस शहीद माता की सेवा में प्रति माह एक सम्मानजनक राशि भेज रहे हैं डॉ.मधेपुरी……

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बिहार कैबिनेट ने लगाई 19 एजेंडों पर मुहर

नीतीश सरकार ने नई बालू खनन नीति को मंजूरी दे दी है। नई नीति के प्रभावी होने पर किसी एक व्यक्ति को अधिकतम दो घाट या फिर 200 हेक्टेयर तक बालू निकासी का ठेका दिया जा सकेगा। मंगलवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस फैसले के साथ ही कुल 19 एजेंडे मंजूर किए गए। इनमें सिपाही बहाली में खिलाड़ी के लिए एक प्रतिशत पद आरक्षित करने का फैसला भी शामिल है।

गौरतलब है कि नदियों में सही प्रकार से बालू खनन हो इसके लिए सर्वोच्च न्यायालय, राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण एवं पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने कुछ दिशा निर्देश दिए थे। जिन्हें प्रभावी बनाने के लिए बिहार सरकार ने बालू खनन नीति 2019 को मंजूरी दी है। पूर्व से चली आ रही व्यवस्था में एक व्यक्ति को कई घाट की बंदोबस्ती दे दी जाती थी। इन घाटों से संबंधित व्यक्ति कितने बालू की निकासी करेगा इसके कोई नियम नहीं थे। नई नीति के प्रभावी होने पर एक बंदोबस्तधारी को अधिकतम दो घाट या फिर दो सौ हेक्टेयर तक बालू निकासी का ठेका दिया जा सकेगा। यही नहीं, पूर्व में प्रावधान था कि जिला को एक इकाई मानकर नदी घाटों की बंदोबस्ती होती थी। नई नीति में प्रत्येक नदी को एक इकाई मान कर उनकी बंदोबस्ती होगी।

कैबिनेट के एक अन्य महत्वपूर्ण फैसले के तहत सिपाही बहाली में खिलाडिय़ों के लिए एक प्रतिशत पद आरक्षित कर दिए गए हैं। अब राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाडिय़ों को उनकी खेल प्रतिभा के आधार पर सिपाही की बहाली में मौका दिया जाएगा। बता दें कि प्रदेश में करीब दस हजार सिपाहियों की बहाली होनी है। सरकार के इस फैसले से बड़ी संख्या में खिलाडिय़ों को सिपाही बनने का मौका प्राप्त होगा। मंत्रिमंडल ने बिहार पुलिस चालक संवर्ग नियमावली 2019 के प्रारूप को भी मंजूरी दी है।

अन्य फैसलों की बात करें तो मंत्रिमंडल ने खान एवं भू-तत्व विभाग के एक प्रस्ताव पर विभाग में अलग-अलग श्रेणी के कुल 179 पद सृजन की मंजूरी दी है। नए सृजित पदों में अपर निदेशक का एक, उपनिदेशक के तीन, सहायक निदेशक के चार, खनिज विकास पदाधिकारी के 21, निरीक्षक के 66, सर्वेक्षक के तीन, प्रारूपक के दो, उच्च वर्गीय लिपिक के 23 और निम्नवर्गीय लिपिक के 56 पद शामिल हैं। एक अन्य फैसले के तहत मनेर के आर्सेनिक प्रभावित गांवों को पाइप से जलापूर्ति योजना के लिए 108 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। पूर्व में इसके लिए 75.54 करोड़ रुपये की योजना मंजूर किए गए थे, जिसमें अब संशोधन कर दिया गया है।

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तुलसी का रामराज्य गांधी के लोकतंत्र का ही परिमार्जित रूप है- डॉ.रवि

मधेपुरा के कौशिकी क्षेत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अंबिका सभागार में गोस्वामी तुलसीदास की भव्य जयंती सम्मेलन के संरक्षक डॉ.रामेन्द्र कुमार यादव रवि, अध्यक्ष हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ, सचिव डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी, उप सचिव श्यामल कुमार सुमित्र सहित शहर के जाने-माने साहित्यानुरागियों की उपस्थिति में श्रद्धापूर्वक मनाई गई | इस अवसर पर स्थानीय उच्च विद्यालयों के छात्र-छात्राओं के बीच “रामचरितमानस में धार्मिक सद्भाव” विषय पर भाषण प्रतियोगिता का एवं “रामचरितमानस में राम राज्य और गांधी दर्शन” पर व्याख्यान का आयोजन भी किया गया |

आशीर्वचन देते हुए पूर्व सांसद व संस्थापक कुलपति डॉ.आर.के.यादव रवि ने कहा कि वर्तमान समय में रामराज्य का प्रयोग सर्वोत्कृष्ट शासन के प्रतीक के रूप में किया जाता है | उन्होंने कहा कि रामराज्य लोकतंत्र का परिमार्जित रूप है तथा मेरी चाहत भी है कि भारतीय लोकतंत्र तुलसी के रामराज्य का अनुगामी बना रहे | वहीं अध्यक्ष हरिशंकर श्रीवास्तव ने कहा कि वैश्विक स्तर पर रामराज्य की स्थापना महात्मा गांधी की चाह थी….. गांधी ने जहाँ आजादी के बाद ग्राम स्वराज के रूप में रामराज्य की कल्पना की वहीं तुलसी ने मानस में रामराज्य पर पर्याप्त प्रकाश डाला है |

Sanrakshak Dr.Ravi, Adhyaksh Shalabh Jee, Sachiv Dr.Madhepuri and others with winner participants.
Sanrakshak Dr.Ravi, Adhyaksh Shalabh Jee, Sachiv Dr.Madhepuri and others with winner participants.

सम्मेलन के सचिव डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने बच्चों से यही कहा कि तुलसी के रामराज में ना तो कोई दरिद्र होगा और ना ही दीन-दुखी | डॉ.मधेपुरी ने कहा कि संपूर्ण विश्व में इस महान लक्ष्य की प्राप्ति के लिए मानव-संघर्ष तीव्र से तीव्रतर होता जा रहा है | उन्होंने यह भी कहा कि तुलसी का रामचरितमानस भौतिक विज्ञान (फिजिक्स) के सिद्धांतों को समाहित कर समाज की सेवा में लगा है |

आरंभ में मुख्यवक्ता के रूप में विद्वान प्राध्यापक डॉ.सिद्धेश्वर कश्यप ने तुलसी के रामराज्य और गाँधी दर्शन पर विस्तार से अपनी बातों को रखते हुए यही कहा कि जिस समय भारत की भूमि आक्रमणकारियों एवं विदेशी शासकों के दमन से त्रस्त थी उस समय तुलसीदास ने भारतीय संस्कृति की रक्षा करते हुए साहित्य को राजनीति के आगे जलनेवाली मशाल कहा |

अंत में पूर्व प्रति कुलपति डॉ.के.के.मंडल ने कहा कि इन दिनों भारतवर्ष में भावनात्मक एकता की कमी महसूस की जा रही है जिसके कारण तुलसी की रामचरितमानस में गाँधी के रामराज्य की प्रासंगिकता बनी हुई है |

चलते-चलते यह भी कि स्थानीय उच्च विद्यालयों के छात्रों के बीच “रामचरितमानस में धार्मिक सद्भाव” पर आयोजित भाषण प्रतियोगिता में पहला पुरस्कार टी.पी. कॉलेजिएट के रितिक कुमार रोशन, दूसरा केशव कन्या की सरस्वती कुमारी, तीसरा रासबिहारी उच्च विद्यालय के गौतम कुमार एवं सांत्वना पुरस्कार तुलसी पब्लिक स्कूल की आस्था प्रिया को दिया गया | मौके पर प्राचार्य डॉ.सुरेश कुमार भूषण, डॉ.विभा कुमारी, उर्वशी कुमारी, दशरथ प्रसाद सिंह, रघुनाथ यादव, शिवजी साह, डॉ.आलोक कुमार, उल्लास मुखर्जी, डॉ.अर्जुन कुमार, राकेश कुमार द्विजराज, गोपाल मुखिया, तुलसी पब्लिक के प्राचार्य डॉ.हरिनंदन यादव एवं निदेशक श्यामल कुमार सुमित्र आदि मौजूद थे |

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