‘बिहार से होगी अगली हरित क्रांति’: राष्ट्रपति

गुरुवार को बिहार में तीसरे कृषि रोडमैप 2017-2022 का शुभारंभ किया गया। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रोडमैप का शुभारंभ किया। इस मौके पर राष्ट्रपति ने कहा कि चंपारण शताब्दी वर्ष में कृषि रोडमैप का लोकार्पण बेहतर कदम है। इससे किसानों को फायदा होगा। इस दौरान सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि आज से नए युग की शुरुआत हो रही है। उन्होंने कहा कि जल्द ही देश की हर थाली में एक बिहारी व्यंजन पहुंचाना हमारा लक्ष्य है।

कृषि रोडमैप का शुभारंभ करने पटना पहुंचे राष्ट्रपति कोविंद का स्वागत और अभिनंदन करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि राज्यपाल रहते हुए राष्ट्रपति पद पर पहुंचने वाले पहले व्यक्ति हैं महामहिम और राष्ट्रपति बनने के बाद वे पहली बार बिहार आए हैं। इसलिए विशेष तौर पर आपका स्वागत है। बिहार का राज्यपाल रहते राष्ट्रपति बनना हमारे लिए गौरव की बात है।

उधर बिहार आकर राष्ट्रपति कोविंद खासे भावुक दिखे। उन्होंने कहा, मैं जन्म से तो नहीं लेकिन कर्म से बिहारी हूं। बिहारीपन ही मेरी पहचान है, जिस पर मुझे गर्व है। बिहार का राज्यपाल रहते हुए मुझे जो प्यार और स्नेह मिला वह जीवन भर के लिए यादगार क्षण बनकर दिल में रहेगा। राजभवन से लेकर राष्ट्रपति भवन का सफर मेरे जीवन के यादगार वर्ष रहेंगे।

कृषि के क्षेत्र में बिहार की संभावनाओं पर बात करते हुए राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि बिहार के किसान मेहनती हैं और बिहार में कृषि की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि जल प्रबंधन प्रणाली बेहतर तरीके से लागू हो जाए तो अगली हरित क्रांति बिहार से हो सकती है। कृषि रोड मैप में शामिल जैविक कॉरिडोर से बड़ा बदलाव आ सकता है। कृषि रोड मैप से बिहार की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और बिहार की छवि को और बेहतर करने में सुविधा मिलेगी।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तीसरे कृषि रोड मैप के संबंध में बताया कि इसके तहत पांच वर्ष में 12 विभागों के माध्यम से विभिन्न योजनाओं पर 1.54 लाख करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इस रोड मैप का लक्ष्य किसानों की आमदनी को बढ़ाना है। इसके लिए हर क्षेत्र में काम किया गया है। सिंचाई को बेहतर बनाने के लिए सिंचाई विभाग को अंदरुनी तौर पर दो हिस्सो में बांटा गया है। एक हिस्सा बाढ़ नियंत्रण का काम देखेगा और दूसरा हिस्सा सिंचाई परियोजनाओं को देखेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों के लिए सहकारी समिति बनायी जाएगी, जिसमें किसानों के आधारभूत संरचना का विकास किया जाएगा। कार्यक्रम को राज्यपाल सत्यपाल मलिक, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, कृषि मंत्री प्रेम कुमार आदि ने भी संबोधित किया।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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मधेपुरा में दो दिवसीय युवा उत्सव बना संकल्प दिवस

बिहार सरकार के कला, संस्कृति व युवा विभाग और जिला प्रशासन मधेपुरा के संयुक्त तत्वावधान में स्थानीय बी.एन.मंडल स्टेडियम में दो दिवसीय (7-8 नवंबर) युवा-उत्सव का उद्घाटन जिले के डायनेमिक डीएम मो.सोहैल, समाजसेवी साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी, निवर्तमान डीडीसी मिथिलेश कुमार, ADM अब्दुल रज्जाक, निवर्तमान एनडीसी मुकेश कुमार, डॉ.शान्ति यादव, जयकृष्ण यादव आदि ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया |

बता दें कि जिले के समस्त युवा खिलाड़ियों, शिक्षकों, अभिभावकों एवं पदाधिकारियों सहित उपस्थित दर्शकों को संबोधित करते हुए डीएम मो.सोहैल ने कहा कि इसे आप सरकारी महोत्सव नहीं  बल्कि इसे आप अपना उत्सव मानें और इस युवा उत्सव को युवा संकल्प उत्सव के रूप में मनायें, क्योंकि मधेपुरा जिले की 48% आबादी युवा हैं | उन्होंने स्कूली छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि आप युवाओं की बदौलत ही मधेपुरा जिला को नई ऊंचाई तक पहुंचाया जा सकता है |

Dr.Bhupendra Madhepuri conferring medals to the winning students at B.N. Mandal Stadium, Madhepura.
Dr.Bhupendra Madhepuri conferring medals to the winning students at B.N. Mandal Stadium, Madhepura.

इस अवसर पर बाल विवाह एवं दहेज से तौबा करने की अपील करते हुए डीएम ने युवाओं से जिले को खुले में शौच मुक्त बनाने हेतु सहयोग करने के लिए बार-बार ध्यान आकृष्ट किया | उन्होंने कहा कि हम सभी मिलकर आज तीन संकल्प लें तो स्थिति बदल जायेगी- यही कि बाल विवाह नहीं करेंगे, दहेज नहीं लेंगे और ग्रेजुएशन व नौकरी के बाद ही शादी करेंगे | जिलाधिकारी ने खेल को मानवीय जीवन का अभिन्न अंग बताते हुए यह भी कहा कि महोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन होना है | यहां के खिलाडी प्रतिभा संपन्न हैं जो जिले सहित प्रदेश और देश का नाम रोशन करने में लगे हैं |

कार्यक्रम के आरंभ में समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने अपने संक्षिप्त संबोधन में कहा कि जिले के खिलाड़ियों, रंगकर्मियों, संगीत एवं कला को समर्पित छात्र-कलाकारों में उत्साह है, उमंग है, क्षमता है और लगन है जिसकी बदौलत उनकी श्रेष्ठता पर गर्व कर यह मधेपुरा जिला दिन-प्रतिदिन आगे बढ़ता जा रहा है…….. विगत वर्ष नवाचार रंगमंडल का प्रदर्शन बिहार के 38 जिलों में दूसरे नंबर पर रहा | उन्होंने जहाँ डायनेमिक DM Md.Sohail  की टीम द्वारा कई अवसर पर जिले को राज्य में प्रथम आने की सराहना की वहीं इस युवा उत्सव के दौरान डीडीसी एवं एनडीसी के ट्रांसफर को इस आयोजन में हल्की उदासी का कारण भी बताया |

इस अवसर पर जहाँ निवर्तमान डीडीसी मिथिलेश कुमार ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया वहीं प्रभारी एडीएम अब्दुल रज्जाक ने चीन के खिलाडियों का उदाहरण देते हुए युवाओं को प्रेरित भी किया | जिला के एसपी विकास कुमार सहित उपनिर्वाचन पदाधिकारी महेश पासवान, डॉ.शांति यादव, जिला जद(यू) अध्यक्ष प्रो.बिजेन्द्र नारायण यादव, शौकत अली, जय कृष्ण यादव, ध्यानी यादव आदि अंत तक उपस्थित रहे | जिला कबड्डी संघ के सचिव अरुण कुमार ने मंच संचालन किया |

कार्यक्रम के अंत में विजयी खिलाड़ियों को डॉ.मधेपुरी एवं जिला अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी सह प्रभारी एनडीसी रजनीश कुमार राय ने मेडल पहनाकर उत्साहवर्धन किया |

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अब तांत्रिक के भरोसे आरजेडी !

आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव आए दिन चौंकाने वाले काम करते रहते हैं और कभी-कभी कुछ ज्यादा ही चौंका देते हैं। जिन दिनों वे सत्ता के शिखर पर थे, उन्होंने लालू-चालीसा रचने वाले को उच्च सदन भेज कर ‘दरबारी’ राजनीति का नया संस्करण शुरू किया था और आज जब बिहार की सबसे बड़ी पार्टी (विधायकों की संख्या के लिहाज से) के मुखिया होकर भी वे परेशान हैं, उन्होंने ‘तंत्र’ राजनीति शुरू करने की ठान ली है। जी हां, लालू ने लगातार पीछा कर रहीं पारिवारिक व राजनीतिक परेशानियों से लड़ने के लिए एक तांत्रिक बाबा को अपनी पार्टी का राष्ट्रीय प्रवक्ता बना दिया है।

आप सोच रहे होंगे कि आखिर ये बाबा कौन हैं और इनमें ऐसी क्या खूबी है कि लालू ने इन्हें प्रवक्ता जैसे महत्वपूर्ण पद से नवाज दिया है? तो बता दें कि शंकर चरण त्रिपाठी नाम के ये बाबा लखनऊ के रहने वाले हैं, पेशे से सेल्स टैक्स अधिकारी रहे हैं और तंत्र का भी ज्ञान रखते हैं। बताया जाता है कि पिछले काफी दिनों से लालू इनसे काफी प्रभावित रहे हैं और इन्हीं के कहने पर लालू ने रंगीन कुर्ता पहनना शुरू किया था। रंगीन कुर्ता पहनना शुरू करने के बाद लालू के दिन सचमुच फिरे और बिहार विधान सभा में उनकी पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी।

पंडित शंकर चरण त्रिपाठी लोगों की कुंडली देखते हैं उनकी समस्याओं का समाधान मिनट भर में बता देते हैं। समाधान में छोटे-मोटे टोटके होते हैं। मसलन, किसे-कब जल अर्पित करें? किस रंग से प्यार करें और किस रंग से दूर रहें? कब-किस पशु-पक्षी को भोजन करा दें? कैसे वास्तु दोष दूर कर लें? उदाहरण के तौर पर हाल ही में लालू के बड़े बेटे तेजप्रताप ने अपने सरकारी बंगले का दरवाजा पीछे की ओर कराया है।

बहरहाल, लालू के इस कदम पर जेडीयू के प्रदेश प्रवक्ता संजय सिंह ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आरजेडी सुप्रीमो राजनीति में भी अपने लिए   आरोपी साथी ढूंढ रहे हैं। जिस तरह उन्होंने आरोपों का लबादा ओढ़ कर अपनी राजनीति की उसी तरह अपनी पार्टी के लिए भी आरोपी और दोषी पदाधिकारी ढूंढ कर ला रहे हैं।  उन्होंने कहा कि लालू ने जिन शंकर चरण त्रिपाठी को अपनी पार्टी का राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया है, उन पर बलात्कार का  आरोप है। यह आरोप किसी ने नहीं, बल्कि उनकी अपनी बहू ने लगाया है। लालू प्रसाद प्रवक्ता बनाने से पहले अपने इस तांत्रिक साथी के बारे में विस्तार से जानकारी तो ले लेते।

बकौल सिंह इन बाबा के बड़े-बड़े कारनामे हैं। लखनऊ में इनकी बड़ी बहू ने इन पर बलात्कार का आरोप लगाया है। यही नहीं, इनके लड़के पर भी उनकी बहू ने प्रताडऩा का केस किया हुआ है। अब लालू प्रसाद ऐसे लोगों को अपनी पार्टी का सिरमौर बना रहे हैं जिनसे बहु-बेटियां डरेंगी। लालू प्रसाद अपने कुनबे में एक से बढ़ कर एक नवरत्न रखे हुए हैं। इन नवरत्नों में शहाबुद्दीन, राजबल्लभ यादव और न जाने कितने माफिया शामिल हैं। अब उस फेहरिस्त में शंकर चरण त्रिपाठी चार चांद लगाएंगे। वहीं, बिहार भजपा के नेता व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी का कहना है कि लालू तंत्र-मंत्र के सहारे सत्ता वापसी चाह रहे हैं लेकिन अब यह नामुमकिन है। उन्होंने कहा कि लालू त्रिपाठी को प्रवक्ता क्यों बल्कि राष्ट्रीय अध्यक्ष बना देते तो सही रहता।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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नियोजित शिक्षक समान वेतन के हकदार : हाई कोर्ट

बिहार के लगभग 4 लाख नियोजित शिक्षकों को 14 वर्षों के कठिन संघर्षों के दौरान न्याय दिलाने में लगे रहे- कोशी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के MLC डॉ.संजीव कुमार सिंह, बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष सह विधान पार्षद श्री केदारनाथ पांडे एवं महासचिव श्री शत्रुघ्न प्रसाद सिंह आदि……. जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट श्री अभय कुमार जी से ‘समान काम समान वेतन’ को लेकर नियोजित, वित्तरहित व अन्य कोटि के शिक्षकों के बारे में कई राउंड विचार-विमर्श करते रहे……. आते-जाते रहे….. तथा देखे जाते रहे |

बता दें कि एमएलसी डॉ.संजीव ने तो प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए यही कहा कि अंततः जायज मांगों की न्यायिक जीत हुई | उन्होंने कहा कि माननीय हाईकोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति जस्टिस आर.मेनन एवं जस्टिस डॉ.ए.के.उपाध्याय के खंडपीठ का फैसला- “समान कार्य के लिए समान वेतन के हकदार हैं ये नियोजित शिक्षक, ऐसा नहीं करना संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है |”

इस प्रकार के ऐतिहासिक फैसला को सुनते ही गोपालगंज से किशनगंज तक और सासाराम से सुपौल तक के सभी जिलों के नियोजित शिक्षकों के बीच खुशी की ऐसी लहर दौड़ने लगी कि सभी एक दूसरे को अबीर-गुलाल लगाने लगे, मिठाइयाँ खिलाने लगे और पटाखे फोड़ने लगे | सूबे के सभी शिक्षक संगठनों द्वारा ‘न्याय की जीत हुई’ का उद्घोष करते हुए मुक्तकंठ से माननीय उच्च न्यायालय के प्रति बार-बार आभार प्रकट किया जाता रहा |

MLC Dr.Sanjeev Kumar Singh , Chairman of Bihar Madhyamik Shikshak Sangh cum Member of Bihar Vidhan Parishad , Shri Kedarnath Pandey & Mahasachiv Shri Shatrughan Prasad Singh with senior advocate Shri Abhay Kumar .
MLC Dr.Sanjeev Kumar Singh , Chairman of Bihar Madhyamik Shikshak Sangh cum Member of Bihar Vidhan Parishad , Shri Kedarnath Pandey & Mahasachiv Shri Shatrughan Prasad Singh with senior advocate Shri Abhay Kumar .

एम.एल.सी. डॉ.संजीव ने इस ऐतिहासिक फैसले को नियोजित शिक्षकों एवं इनके संघ-संगठनों के सतत संघर्ष का फल बताते हुए समस्त नियोजित शिक्षकों को हृदय से बधाई दिया है तथा सरकार के समक्ष अपनी भावनाओं का इजहार इस प्रकार किया है-

“यह न्यायादेश सिर्फ शिक्षकों के संदर्भ में ही नहीं बल्कि सरकार को इसे व्यापक शैक्षणिक संदर्भ में लेने की जरूरत है | सरकार द्वारा सहजतापूर्वक तत्काल इस फैसले को लागू किये जाने से नियोजित एवं स्थायी शिक्षकों का भेदभाव मिटेगा और वर्तमान शैक्षिक परिदृश्य बदलने के साथ-साथ सार्थक एवं सकारात्मक परिणाम नजर आयेगा”

पुनः MLC डॉ.संजीव ने कहा कि संबंधित फैसले का समुचित अध्ययन किये बिना माननीय शिक्षा मंत्री का यह वक्तव्य कि इस न्यायादेश के खिलाफ माननीय उच्चतम न्यायालय में अपील करेंगे, कहीं से भी राज्य के शिक्षा व्यवस्था के हित में नहीं होगा बल्कि यह शिक्षकों के नैसर्गिक न्याय के विरुद्ध ही होगा……. साथ ही यह न्यायालय की अवमानना का भी मामला बन सकता है |

Educationist Dr.Bhupendra Madhepuri.
Educationist Dr.Bhupendra Madhepuri.

इस बाबत जब समाजसेवी शिक्षाविद डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी को टिप्पणी करने को कहा गया तो डॉ.मधेपुरी ने यही कहा कि ऑनरेबल सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में ही तो माननीय हाईकोर्ट ने यह निर्णय दिया है |सूबे की सरकार को सुप्रीम कोर्ट जाने के बजाय हाई कोर्ट के फैसले को तत्काल लागू करना चाहिए | डॉ.मधेपुरी ने खेद प्रकट करते हुए यहाँ तक कह डाला कि नियोजित शिक्षकों को चार-पांच माह से वेतन नहीं मिलना बल्कि होली-दशहरा-दिवाली, छठ-ईद-मुहर्रम जैसे पर्वों पर भी इस तरह की सरकारी चुप्पी को क्या कहेंगे आप…….? सरकार डाल-डाल चलेगी तो शिक्षक संगठनों को पात-पात चलने को मजबूर होना होगा……..|

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रोबोट को इंसानों से अधिक अधिकार!

रोबोट… आधुनिक विज्ञान की उपज… इंसान की बनाई हुई एक चीज जो चाहे कितनी ही उन्नत तकनीक से क्यों न बनी हो, हमारी तरह सोच और महसूस नहीं सकती। हां, उसमें ‘समझदारी’ हम स्वयं से ज्यादा जरूर भर सकते हैं। पर क्या वो ‘समझदारी’ भी कृत्रिम नहीं होगी? क्या इस रोबोट को हम इंसानों वाली जगह दे सकते हैं? शायद ऐसा सोचना भी कुदरत की तौहीन होगी। लेकिन ‘विकास’ की सही परिभाषा से भटक चुकी हमारी सभ्यता अगर उसे इंसानों से भी ऊपर की जगह और अधिकार दे दे तो क्या कहेंगे आप?

जी हां, चौंकिए नहीं। ऊपर केवल संभावना नहीं व्यक्त की गई है। बल्कि यह अभी-अभी घटित एक कड़वी सच्चाई है। इसी हफ्ते सऊदी अरब में एक महिला रोबोट को नागरिकता दी गई है। यही नहीं, इस रोबोट को उतने अधिकार दिए गए हैं, जितने खाड़ी देशों में किसी सामान्य महिला को भी नहीं मिले हैं। सोफिया नाम की यह रोबोट अपने चेहरे के हावभाव बदल सकती है और लोगों से बातचीत भी कर सकती है।

विशेष अधिकार से नवाजी गई इस महिला रोबोट को इस हफ्ते रियाद में हुई इकोनॉमिक फोरम में पहली बार पेश किया गया। इस दौरान पैनल के साथ बातचीत करते हुए सोफिया ने कहा, इस अद्भुत मौके पर मैं बेहद सम्मान और गौरवान्वित महसूस कर रही हूं। यह एक ऐतिहासिक मौका है जब किसी रोबोट को नागरिक के तौर पर पहचान मिली है। कार्यक्रम में सोफिया ने पोडियम से वहां मौजूद लोगों को संबोधित किया और कार्यक्रम के मॉडरेटर और पत्रकार एंड्रयू रॉस सोरकिन के सवालों के जवाब भी दिए।

बहरहाल, सोशल मीडिया पर सोफिया की ख़बर आते ही डिबेट का दौर शुरू हो गया है। लोग इस बात की आलोचना कर रहे हैं कि इस रोबोट को सऊदी अरब की महिलाओं और वहां काम करने वाले विदेशी नागरिकों से ज्यादा अधिकार दे दिए गए हैं।

बहरहाल, सऊदी की मिनिस्ट्री ऑफ कल्चर एंड इन्फोर्मेशन ने रोबोट के समर्थन में ट्वीट कर बताया कि हैनसन रोबोटिक्स द्वारा बनाई यह रचना फ्यूचर इन्वेस्टमेंट इनीशिएटिव समिट में प्रस्तुत होगी।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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बाबा विशुराउत मेले को राजकीय दर्जा मिलने पर जश्न का माहौल

मधेपुरा के डायनेमिक डीएम मो.सोहैल (भा.प्र.से.) ने सर्वाधिक प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मधेपुरा अबतक को बताया कि जिले के चौसा प्रखंड मुख्यालय से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित बाबा विशुराउत मंदिर में प्रतिवर्ष 13 अप्रैल से लगनेवाले तीन दिवसीय मेला को राज्य सरकार द्वारा राजकीय दर्जा दिया जाने वाला पत्र प्राप्त हो गया है | उन्होंने इसे बड़ी उपलब्धि करार देते हुए कहा कि नीतीश सरकार के माननीय मंत्री राम नारायण मंडल, राजस्व व भूमि सुधार विभाग के विशेष सचिव प्रवीण कुमार झा द्वारा हस्ताक्षरित अधिसूचना ज्ञापांक- 898(8)-01 नवंबर, 2017 के तहत इस मेले को राजकीय मेला अधिसूचित करते हुए बिहार राज्य मेला प्राधिकार के प्रबंधन में दे दिया गया है |

बता दें कि मधेपुरा जिला अंतर्गत चौसा प्रखंड के पचरासी बथान में गोपालक लोक देवता के रूप में बाबा विशुराउत की पूजा-अर्चना नियम व निष्ठा के साथ शुरू दुग्धाभिषेक द्वारा की जाती रही है | पचरासी बथान स्थित उनकी समाधि पर प्रत्येक सोमवार और शुक्रवार को विशेष श्रृंगार पूजा होती है | साथ ही बाबा विशुराउत की समाधि पर इतनी मात्रा में श्रद्धालुओं द्वारा दूध चढ़ाया जाता है कि आस-पास में दूध की नदी बहने लगती है | यूँ तो विशु बाबा की महिमा अपरंपार है और विशेषता यह है कि चाहे जितनी भी दूरी से श्रद्धालुगण कच्चा दूध लेकर आते हैं- वह दूध ना तो फटता है और ना खराब होता है |

Devotees offering Raw Milk at Baba Vishuraut Temple.
Devotees offering Raw Milk at Baba Vishuraut Temple.

यह भी जानिए कि बाबा विशु के नाम से चौसा में एक महाविद्यालय की स्थापना स्थानीय श्रद्धालुओं द्वारा की गई है तथा कोसी नदी पर विशाल सेतु भी बना है | आलमनगर विधानसभा क्षेत्र के श्रमशील जनता एवं वर्तमान विधायक सह राजस्व भूमि सुधार सहित कई विभागों के मंत्री रह चुके नरेन्द्र नारायण यादव के आसपास आज जश्न का माहौल है क्योंकि यहाँ के लोग वर्षो से बाबा विशुराउत मेला को राजकीय दर्जा देने की मांग कर रहे थे | आज बिहार सरकार द्वारा एक ओर जहाँ विशुराउत मेला को और वहीं दूसरी ओर आस्था का महापर्व छठ पूजा के दौरान आयोजित होने वाले ‘देव मेला’ को भी राजकीय दर्जा दिये जाने पर संपूर्ण बिहार में ही हर्ष व्याप्त है |

Md.Sohail (IAS), Madhepura
Md.Sohail (IAS), Madhepura .

चलते-चलते यह भी बता दें कि बाबा विशुराउत की समाधि पर बिहार के अनेक विधायक, मंत्री, सांसद एवं कई मुख्यमंत्री व राष्ट्रीय स्तर के नेतागण का आना-जाना लगा ही रहता है जिन्हें आज बेहद खुशी होती होगी | साथ ही आकाश से निरखते हुए शुभाशीष अर्पित कर रहे होंगे यहाँ के प्रथम विधायक तनुक लाल मंडल, विद्याकर कवि एवं वीरेंद्र प्रसाद सिंह आदि भी………| इलाके के पशुपालकों में उत्साह व उमंग को देखकर स्थानीय बुद्धिजीवियों- सूर्यकुमार पटवे, डॉ.अंबिका प्रसाद गुप्ता, रघुनंदन यादव, मुर्शीद आलम, बैजनाथ साह, निवास चन्द, मुन्ना यादव, जीवन शर्मा, सुबोध सिंह……… आदि ने इस मेला को राजकीय मेला घोषित किये जाने पर ईश्वर से यही कहा कि अब मेला के साथ इस इलाके में भी विकास का नया आयाम खुलेगा |

मधेपुरा अबतक द्वारा जब सिंहेश्वर टेंपल ट्रस्ट के सदस्य सुप्रसिद्ध समाजसेवी-शिक्षाविद डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी से टिप्पणी करने को कहा गया तो डॉ.मधेपुरी ने कहा कि बिहार में सोनपुर के बाद एक महीने तक चलने वाला सिंहेश्वर मेला को जल्द ही राजकीय दर्जा मिलेगा क्योंकि इसे नीतीश सरकार द्वारा “महोत्सव” की स्वीकृति तो दे ही दी गई है…… अब डीएम मो.सोहैल द्वारा राजकीय दर्जा देने हेतु लिखे गए पत्रादि के प्रयास को शीघ्रातिशीघ्र सफलता मिलेगी ही मिलेगी……. तब सिंहेश्वर के श्रद्धालु जमकर जश्न मनायेंगे |

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सामा-चकेवा भाई-बहन के अतिरिक्त पक्षियों से भी जुड़ा त्योहार है

छठ पर्व संपन्न होने के साथ ही मिथिला-कोसी का यह लोकपर्व सामा-चकेवा शुरू हो जाता है | मिथिलांचल में यह पर्व उत्सव के रूप में मनाया जाता है | 8 दिनों का यह त्योहार भाई-बहन के बीच के अटूट प्रेम को दर्शाता है जिसका वर्णन पुराणों में भी मिलता है | सामा-चकेवा से जुड़ी लोकगीत- “चुगला करे चुगली बिलैया करे म्याऊं……….. गाम के अधिकारी हमर बड़का भैया हो……. कई दिनों तक घर-आंगन में गूंजते रहते हैं | ज्ञातव्य हो कि मिथिलांचल में मवेशियों का त्योहार तो मनाया ही जाता है, पक्षियों के लिए भी त्योहार है जिसे ‘सामा-चकेवा’ के नाम से जाना जाता है |

बता दें कि लोक कथाओं के अनुसार ‘सामा’ कृष्ण की पुत्री थी | कुछ चुगलों द्वारा आरोप लगाने के कारण मथुरा के राजा भगवान कृष्ण ने क्रोधित होकर उसे मनुष्य से पक्षी बन जाने की सजा सुना दी | परंतु अपने भाई सांभ की भक्ति के कारण, ‘चकेवा’ के त्याग के साथ-साथ अटूट एवं निश्छल प्रेम होने के कारण ‘सामा’ पुनः पक्षी से मनुष्य के रूप में आ जाती है | तब से सामा-चकेवा पर्व मनाने वाली लड़कियां कार्तिक पूर्णिमा की रात में चुगला के मुंह में आग लगाकर जलाती है और विसर्जित करती है | ग्रामीण इलाके में आज भी यह पर्व उत्साह पूर्वक मनाया जाता है | महापर्व छठ की समाप्ति के साथ ही बहनें अपने भाइयों की सलामती के लिए कार्तिक पूर्णिमा तक प्रत्येक दिन इस खेल का आयोजन करती हैं |

Sama Chakeva celebration in Mithila.
Sama Chakeva celebration in Mithila.

यह भी बता दें कि भाई-बहन के बीच का प्रेम व त्याग लोकगीतों के माध्यम से भैयादूज से शुरु होकर कार्तिक पूर्णिमा की देर रात तक में संपन्न होता है | पूर्णिमा की रात को महिलाएं सहेलियों की टोली बनाकर सामा से सजे डाले को कंधे या सिर पर ले-लेकर गीत गाते हुए सामा खेलती है | चकेवा व चुगला सहित मिट्टी की बनाई गई विभिन्न पक्षियों की मूर्तियों को डाले में सजाकर निकट के तालाब में या जोते हुए खेतों में विसर्जित कर आती हैं |

जानकारों के अनुसार सामा-चकेवा के बाद कोसी-मिथिलांचल में आते हैं प्रवासी पक्षीगण- जिन्हें यहाँ के लोग अधंगा….. लालसर…… सुर्खाब…… नकटा….. हसुआ आदि नामों से जानते हैं | मिथिलांचल में मेहमानों की तरह इन पंक्षियों का स्वागत होना चाहिए, परंतु ऐसा होता नहीं………| लोगों द्वारा लगातार इनके शिकार होने के चलते इन पक्षियों की तादाद में सर्वाधिक कमी आती जा रही है |

चलते-चलते बता दें कि जहाँ पहले महिलाएं अपने हाथों से मिट्टी के सामा-चकेवा एवं विभिन्न पक्षियों की मूर्तियां बनाती थी और विभिन्न रंगों से सजाती थी वहीं अब बाजार में बिक रहे रंग-बिरंगे मिट्टी से बनी हुई रेडीमेड ‘सामा-चकेवा’ आदि खरीद लाती हैं | संयुक्त परिवार की जगह एकल परिवार की मानसिकता में सर्वाधिक वृद्धि होने के कारण आये दिनों लोग इस पर्व से दूर होते जा रहे हैं |

फिर भी मिथिलांचल की कुछ बेटियाँ आज कार्तिक पूर्णिमा के दिन सामा खेलने अपने ससुरालों से मायके अवश्य आयेंगी और नम आँखों से भावपूर्ण समदाउन गीतों के बीच अपने-अपने भाइयों को खुद से ठेकुआ, मुढ़ी, भुसवा……  खिलायेंगी……. परंपरा जीवित रहेगी, तभी ‘प्रेम’ अमर रहेगा !

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जिन्ना की बेटी दीना का निधन

पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना का मानना था कि पाकिस्तान बनने के बाद सारे मुसलमान भारत छोड़ देंगे। पर उनका यह विश्वास उस वक्त खोखला साबित हुआ जब स्वयं उनकी बेटी ने भारत छोड़ने से इनकार कर दिया। हम यहां बात कर रहे हैं जिन्ना की इकलौती संतान दीना वाडिया की, जिनका गुरुवार को न्यूयॉर्क में निधन हो गया। वह 98 वर्ष की थीं। दीना के परिवार में बेटे नुस्ली वाडिया, डायना वाडिया और पोते नेस और जहांगीर वाडिया हैं। मुंबई में वाडिया ग्रुप के प्रवक्ता की ओर से जारी बयान में दीना वाडिया के देहांत की पुष्टि की गई है।

चेहरे से हू-ब-हू अपने पिता की तरह दिखने वाली दीना का जन्म अविभाजित भारत में 14-15 अगस्त की रात को 1919 में हुआ था। इतिहासकार स्टैनेली वॉल्पर्ट के मुताबिक, ‘दुनिया में उनका आगमन नाटकीय ढंग से हुआ था। जिन्ना और उनकी मां रति जिन्ना जब लंदन में एक थियेटर में फिल्म देख रहे थे, तब उनका जन्म हुआ था।’
गौरतलब है कि दीना वाडिया ने पारसी कारोबारी नेस वाडिया से शादी की थी और भारत विभाजन के पश्चात भारत में ही रहने का फैसला लिया था। जिन्ना इस बात से सख्त नाराज थे। जिन्ना के सहायक रहे मोहम्मद अली करीम छागला की एक किताब के मुताबिक जिन्ना ने जब अपनी बेटी से पूछा था कि भारत में हजारों मुसलमान हैं लेकिन तुम्हें एक नहीं मिला। इस पर दीना ने जवाब दिया था कि इस देश में हजारों मुस्लिम लड़कियां थीं लेकिन आपको शादी करने के लिए मेरी मां ही मिली। गौरतलब है कि दीना की मां रति भी पारसी समुदाय से आती थीं।

बहरहाल, बाद के दिनों में दीना अमेरिका में ही बस गई थीं। जहां तक पाकिस्तान से उनके ताल्लुक का प्रश्न है, अपने पिता की मौत के बाद वह पाकिस्तान गई थीं। इसके बाद 2004 में मुशर्रफ के दौर में उन्होंने पाक का दौरा किया था।

 

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नेहरा ने क्रिकेट को कहा अलविदा

बुधवार को दिल्ली के फिरोजशाह कोटला में खेला गया टी-20 मैच न्यूजीलैंड पर भारत की धमाकेदार जीत के साथ ही शानदार तेज गेंदबाज आशीष नेहरा के क्रिकेट को अलविदा कहने के कारण भी याद किया जाएगा। 38 वर्षीय नेहरा ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि न्यूजीलैंड के खिलाफ खिलाफ खेला जाने वाला यह मैच उनका आखिरी मैच होगा। नेहरा ने कहा था, “मेरे लिये यह अहम है कि ड्रेसिंग रुम में लोग मेरे बारे में क्या सोचते हैं। सभी कह रहे हैं कि मैं एक-डेढ़ साल और खेल सकता था। मेरा हमेशा यह मानना रहा है कि ऐसे समय में संन्यास लेना चाहिए जब लोग ‘क्यों नहीं’ से ज्यादा यह कहें कि ‘क्यों’। मैं शिखर पर रहते हुए संन्यास लेना चाहता था।”

बहरहाल, अपने क्रिकेट करियर का समापन करने वाले इस तेज गेंदबाज को भारतीय टीम ने ट्रॉफी से नवाजा और उनके योगदान की सरहाना की। भारतीय टीम के पूर्व कप्तान कपिल देव ने भी अनुभवी तेज गेंदबाज आशीष नेहरा को उनके आखिरी अंतर्राष्ट्रीय मैच से पहले शुभकामनाएं दीं और कहा, “हर खिलाड़ी के लिए पहला और आखिरी मैच खास होता है। कई वर्षों तक भारतीय क्रिकेट में अपनी सेवाएं देने के बाद नेहरा अपने घर में विदाई के हकदार हैं।” नेहरा को खेल का महान दूत बताते हुए कपिल ने कहा, ‘आपने देश की सेवा काफी अच्छे से की।’

बता दें कि नेहरा की विदाई के मौके पर फिरोजशाह कोटला में साइट स्क्रीन के ऊपर ‘फेयरवेल आशीष नेहरा’ नाम का संदेश लिखा गया। यही नहीं, उनकी विदाई को यादगार बनाने के लिए फिरोजशाह कोटला स्टेडियम के एक छोर का नाम नेहरा के नाम पर रखा गया है। गौरतलब है कि नेहरा ने अपने 18 साल के लंबे करियर की शुरुआत फरवरी 1999 में कोलंबो में श्रीलंका के खिलाफ मोहम्मद अजहरुद्दीन की कप्तानी में की थी।

नेहरा का करियर चोटों से काफी प्रभावित रहा, लेकिन वह भारत के बेहतरीन गेंदबाजों में से एक रहे हैं, इसमें कोई दो राय नहीं। अपने अंतर्राष्ट्रीय करियर में उन्होंने कुल 117 टेस्ट, 120 वनडे और 26 टी-20 मैच खेले। टेस्ट में उनके नाम कुल 44, वनडे में 157 और टी-20 में 34 विकेट हैं। उन्हें डरबन में 2003 विश्व कप में इंग्लैंड के खिलाफ 23 रन देकर छह विकेट लेने के लिए खास तौर पर याद किया जाता है। उन्होंने यह शानदार प्रदर्शन बीमार होने के बावजूद किया था। इस विश्व कप में जवागल श्रीनाथ, जहीर खान और नेहरा की तिकड़ी ने भारतीय टीम की सफलता में अहम रोल निभाया था। नेहरा 2011 में धोनी की कप्तानी में विश्व कप जीतने वाली टीम के भी सदस्य थे और सेमीफाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ उन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन किया था।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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