बीएनएमयू के वीसी डॉ.ए.के.राय ने वो किया जो किसी ने नहीं किया

बी.एन. मंडल विश्वविद्यालय के 23वें कुलपति डॉ.अवध किशोर राय द्वारा विश्वविद्यालय की रजत जयन्ती वर्ष पर…….. स्थापना काल से ही अपनी जवानी के 25 वसंतों को पतझड के हवाले करने वाले वैसे 85-86 कर्मचारियों के घर में खुशी की लहर पैदा कर दी जिसे पूर्व के कुलपतियों द्वारा नहीं किया जा सका | वर्तमान कुलपति डॉ.ए.के.राय ने जहाँ एक ओर ‘कारसेवक’ नाम से प्रसिद्धि प्राप्त इन अस्थाई कर्मियों की विधि संगत नियुक्ति कर मंडल विश्वविद्यालय के इतिहास में अपना नाम स्वर्णाक्षरों में दर्ज कराने की हिम्मत जुटाई वहीं दूसरी ओर 25 वर्षों से रिटायर्ड शिक्षकों व कर्मियों के पेंशन बकाये वेतनादि भुगतान के निमित्त 2 महीने कबल दिन-दिनभर पानी पी-पीकर एफओ, एफए आदि को बैठाकर सारी समस्याओं के निदान हेतु ‘पेंशन अदालत’ लगाते रहे और सभी दु:खी आत्माओं से शुभाशीर्वचन पाते रहे, शुभकामनाएं बटोरते रहे |

Educationist Dr.Bhupendra Madhepuri giving a Bouquet to the Hon'ble V.C. Dr.A.K.Ray for his courageous act in favour of so called "Karsewak" to get them sitted on the permanent post.....!
Educationist Dr.Bhupendra Madhepuri giving a Bouquet to the Hon’ble V.C. Dr.A.K.Ray for his courageous act in favour of so called “Karsewak” to get them sitted on the permanent post…..!

यह भी जानिए कि मंडल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ.अवध किशोर राय ने पूरी तन्मयता के साथ उच्च वर्गीय लिपिक, निम्नवर्गीय लिपिक, पुस्तकालय लिपिक, कैटलागर, कंप्यूटर ऑपरेटर सहित चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों के पदों पर 86 लोगों की नियुक्ति की अधिसूचना जारी करने की स्वीकृति दी | इसी के साथ स्थायीकरण हेतु धरना-प्रदर्शन, आंदोलन पर अब लगा विराम और दूर-दराज से आनेवाले छात्र-छात्राओं एवं अभिभावकों का अब होगा कल्याण……… कुलपति ने अपनी पहली प्राथमिकता को अमलीजामा पहनाने के बाद यही कहा-

पूरी पारदर्शिता के साथ विधि संगत ढंग से नियमानुसार चयन समिति ने अस्थाई कर्मचारियों की नियुक्ति की है | जो बच गये हैं सीट रिक्त होते ही उनकी बहाली भी कर ली जायेगी- जिसकी चर्चा संचिका में कर दी गई है |

यह भी बता दें कि जहाँ एक ओर नियुक्ति की आस में कई एक तो दुनिया से चले गये, कुछ रिटायर हो गए और इसके अलावा भी कई कर्मचारी हैं जिन्हें यह सौभाग्य नहीं प्राप्त हो सका….. वहीं दूसरी ओर इस स्थायीकरण की दौर में पिता-पुत्र और पति-पत्नी ने एक साथ ज्वाइन कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है | कुलसचिव कुमारेश प्रसाद सिंह द्वारा जारी अधिसूचना में जिन 86 कर्मियों की नियुक्ति की गयी है उनमें- दशरथ यादव व पुत्र शंभू यादव, मो.इरशाद व पिता मो.सईद तथा पति गौरीशंकर पोद्दार व पत्नी शांति देवी ने एक साथ चतुर्थवर्गीय कर्मचारी के रूप में योगदान कर विश्वविद्यालय के इतिहास में नया कीर्तिमान कायम किया है जिसकी वजह बने हैं सुलझे सोच के नेक इंसान कुलपति डॉ.ए.के.राय और इसकी जड़ में है- पूर्व में परीक्षा विभाग में कार्यरत कर्मचारी डॉ.राजेश्वर राय जिसकी कर्मठता से प्रभावित होकर तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक एवं विश्वविद्यालय के विभिन्न पदों पर कार्यरत रहे लोहिया-भूपेन्द्र-कर्पूरी के अनुयायी डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी जिन्होंने एक नहीं कई बार उनकी जयंती के अवसर पर विशेषरूप से राजेश्वर राय से यही कहते सुने गये-

गिरो उठो फिर चलना सीखो |

हक की खातिर लड़ना सीखो ||

और श्रीराय ने बहाली को लेकर कोर्ट में लंबी लड़ाई लड़ी और कभी डिगे नहीं, बल्कि सदा यही गुनगुनाते देखे जाते रहे-

भय जिसे शूल चुभ जाने का, वह फूल भला कब पाता है |

जो ज्वार देख घबड़ाता है, वह इसी पार रह जाता हैं ||

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मिस वर्ल्ड का जवाब उससे भी सुन्दर !

1966 में रीता फारिया… भारत ही नहीं, सम्पूर्ण एशिया से बनने वाली पहली मिस वर्ल्ड… फिर 28 साल के इंतजार के बाद 1994 में ऐश्वर्या राय… इसके बाद अगले छह सालों में तीन मिस वर्ल्ड – 1997 में डायना हेडन, 1999 में युक्ता मुखी और 2000 में प्रियंका चोपड़ा… फिर 17 साल का इंतजार और अब मानुषी छिल्लर… मिस वर्ल्ड 2017… 118 देशों की सुन्दरियों में सर्वश्रेष्ठ..! भारत की बेटी ने एक बार फिर पूरी दुनिया में अपनी सुन्दरता – सिर्फ चेहरे की नहीं, सम्पूर्ण व्यक्तित्व की सुन्दरता – का लोहा मनवा लिया। चीन के सनाया में आयोजित की गई मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में हरियाणा के सोनीपत की रहने वाली मिस इंडिया मानुषी छिल्लर को मिस वर्ल्ड 2017 घोषित किया गया। इस प्रतियोगिता में दूसरे नंबर पर मिस मेक्सिको रहीं जबकि तीसरे नंबर पर मिस इंग्लैंड।

20 वर्षीया मानुषी की जीत की सबसे अहम बात यह रही कि वो ‘हेड टू हेड चैलेंज’ और ‘ब्यूटी विद पर्पस सेगमेंट’ दोनों में अव्वल रहीं। खास तौर पर अंतिम सवाल के जवाब से तो उन्होंने न केवल ज्यूरी बल्कि पूरी दुनिया का दिल जीत लिया। मानुषी से पूछा गया अंतिम सवाल था कि दुनिया में किस पेशे की सेलरी सबसे ज़्यादा होनी चाहिए और क्यों? मानुषी ने इसका बेहद खूबसूरत जवाब दिया। उन्होंने कहा, “मेरी मां मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा रही हैं। इसलिए मैं कह सकती हूं कि मां होने की जॉब सबसे बेहतरीन है। बात केवल पैसे की नहीं है, बल्कि प्यार और सम्मान के लिहाज से, कोई भी मां सबसे ज्यादा वेतन की हकदार होती है।”

67वीं मिस वर्ल्ड मानुषी के व्यक्तित्व के कई पहलू हैं। वो मेडिकल की स्टूडेंट हैं और कार्डिएक सर्जन बनना चाहती है। उन्हें पैराग्लाइडिंग, बंजी जंपिंग और स्कूबा डाइविंग जैसे स्पोर्ट्स पसंद हैं। इसके अलावा मानुषी ट्रेंड इंडियन क्लासिकल डांसर हैं और स्केचिंग और पेंटिंग भी बनाती हैं। यही नहीं, मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में जाने से पहले मानुषी समाजसेवा के कार्यों से भी जुड़ी रही हैं। उन्होंने महिलाओं के पीरियड के दौरान हाइजीन से संबंधित एक कैंपेन में करीब 5000 महिलाओं को जागरूक किया है।

मिस वर्ल्ड बनना मानुषी के बचपन का सपना था। अपनी मेहनत और लगन से उन्होंने अपना सपना पूरा कर लिया। अब भारत की इस बेटी को अपने सपनों को विस्तार देना है। मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में अपने प्रदर्शन से उन्होंने जैसी उम्मीद बंधाई है, उसे देख कोई भी लक्ष्य उनके लिए असंभव नहीं लगता। उज्जवल भविष्य के निमित्त उन्हें ‘मधेपुरा अबतक’ की ढेर सारी शुभकामनाएं!

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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मधेपुरा की छवि बनने लगी है देश व दुनिया में बेहतर

जहाँ एक ओर मधेपुरा के बी.एन.मंडल विश्वविद्यालय में ‘हिन्दी-उर्दू एक विरासत’ पर कुलपति डॉ.ए.के. राय के नेतृत्व में राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया जा रहा हो एवं राज्य स्तर पर संचालित ‘कौशल विकास कार्यक्रम’ में बेहतर प्रदर्शन के लिए मधेपुरा के डायनेमिक डीएम मो.सोहैल (भा.प्र.से.) को सीएम नीतीश कुमार द्वारा सम्मानित किया जा रहा हो और मधेपुरा में भारत का सबसे बड़ा विदेशी निवेश वाला विद्युत रेल इंजन फैक्ट्री का निर्माण निर्धारित समय से छह माह पूर्व ही पूरा कर लिया गया हो……… तो बेशक, मधेपुरा की छवि देश में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में तेजी से बेहतर होती चली जा रही है और आगे भी होती चली जायेगी……|

जानिये कि फिलहाल मधेपुरा के ग्रीन फील्ड रेल इंजन फैक्ट्री में मात्र 70 पदाधिकारी एवं कर्मचारी कार्यरत हैं जिनके रहने के लिए कारखाना कैंपस में ही ‘ब्लॉक हॉस्टल भवन(वन)’ का उद्घाटन 1 दिन पूर्व किया गया है | कारखाने में इंजन निर्माण की गति बढ़ने के साथ ही कर्मचारी-पदाधिकारी की संख्या 500 तक पहुंच जायेगी | जहाँ तक स्थानीय लोगों के रोजगार का सवाल है तो जानिए कि कारखाना निर्माण के दौरान प्रतिदिन 1500 लोग यहाँ कार्यरत रहे हैं |

Block Hostel Building (One) ready for officers & other employees inside the campus of Green Field Electric Engine Factory Madhepura.
Block Hostel Building (One) ready for officers & other employees inside the campus of Green Field Electric Engine Factory Madhepura.

बता दें कि एल्सटॉम द्वारा अपने स्प्लायर को सप्लाई चेन बरक़रार रखने की दिशा में तेज कदम उठाने के लिए यह कहा जा रहा है कि सभी सप्लायर इसी कारखाने के आस-पास अपना-अपना कारखाना लगायें ताकि यहाँ के लोगों को और अधिक रोजगार मिलता रहे |

यह भी जानिये कि मधेपुरा का नाम इतनी तेजी से देश और दुनिया के रंगमंच पर इसलिए रोशन होने लगा है कि मधेपुरा और छपरा दोनों जगहों पर रेल कारखाना के लिए लगभग एक साथ एग्रीमेंट हुआ था | परंतु, जहाँ छपरा में रेल कारखाना आज तक आकार भी ग्रहण नहीं किया है वहीं मधेपुरा का रेल कारखाना जिला प्रशासन से सहयोग प्राप्त कर समय से 6 माह पूर्व ही तैयार हो गया तथा फरवरी 2018 के अंतिम सप्ताह में पहला इंजन बनकर तैयार होने जा रहा है- जिसे राष्ट्र को समर्पित करने के लिए ‘मेक इन इंडिया’ के स्वप्नदृष्टा पीएम नरेन्द्र मोदी के आगमन का इंतजार है |

Honourable Member of Railway Board Mr.Ghanshyam Singh and The Authority of Alstom Company Mr.B.Salhotra jointly inaugurating Block Hostel Building (One) along with DRM Mr.R.K.Jain, Senior DEN Mr.Sanjay Kumar , D.O.M. Mr.Parmodh Kumar D.S.T.E. Saurabh Kumar, T.E. Mr.Kunwar Jha, P.W.I. Mr.Sunil Kumar & others in the campus of Rail Engine Factory at Madhepura.
Honourable Member of Railway Board Mr.Ghanshyam Singh and The Authority of Alstom Company Mr.B.Salhotra jointly inaugurating Block Hostel Building (One) along with DRM Mr.R.K.Jain, Senior DEN Mr.Sanjay Kumar , D.O.M. Mr.Parmodh Kumar D.S.T.E. Saurabh Kumar, T.E. Mr.Kunwar Jha, P.W.I. Mr.Sunil Kumar & others in the campus of Rail Engine Factory at Madhepura.

चलते-चलते बता दें कि पीएम नरेन्द्र मोदी द्वारा उद्घाटन करने हेतु मधेपुरा आगमन से पूर्व सारी तैयारियां पूरी करने के लिए पदाधिकारियों की एक टीम 2 दिन  कबल यहां पधार चुकी है जिनमें रेलवे (ट्रैक्शन) बोर्ड के सदस्य श्री घनश्याम सिंह और एल्सटॉम कंपनी के अधिकारी श्री भारत सल्होत्रा ने कारखाने के अंदर स्थापित ‘पावर ग्रिड’ एवं ‘हॉस्टल ब्लॉक भवन(वन)’ का उद्घाटन भी किया | दोनों अधिकारियों ने कार्य की प्रगति पर संतोष जताते हुए निम्नांकित महत्वपूर्ण बिंदुओं पर निर्देश भी दिये- पहला यह कि मानसी-सहरसा-मधेपुरा-पूर्णिया रेल लाइन विद्युतीकरण में तेजी लायें और दूसरा यही कि देश का सर्वश्रेष्ठ हाई स्पीड लोकोमोटिव इलेक्ट्रिक इंजन निर्धारित समय से पूर्व बना लेने का लक्ष्य तय करें- क्योंकि मधेपुरा का विद्युत रेल इंजन कारखाना भारत का सबसे बड़ा विदेशी निवेश है |

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बीएनएमयू में हिन्दी-उर्दू एक विरासत पर हुआ राष्ट्रीय सेमिनार

मधेपुरा के बी.एन. मंडल विश्वविद्यालय स्नातकोत्तर उर्दू विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार के ‘हिन्दी-उर्दू एक विरासत’ विषय का उद्घाटन करते हुए माननीय कुलपति डॉ.अवध किशोर राय ने कहा कि हमारी सभी भाषाएं साझी संस्कृति का वाहक है तथा भारत की साझी संस्कृति अत्यन्त प्राचीन और समृद्ध है | सभी भाषाएं सगी बहनें जैसी हैं और एक दूसरे की पूरक भी हैं | डॉ.राय ने अपने संबोधन में बड़ी ही पवित्र बातें कहीं, वह यह कि जैसे कई नदियाँ मिलकर गंगा को समृद्ध करती हैं, वैसे ही सभी भारतीय भाषाएं मिलकर हिन्दी को समृद्ध करती हैं | उन्हें एक-दूसरे से अलग नहीं किया जा सकता है | सभी मिलकर हिन्दी को पूर्ण बनाती है, सभी भाषाएं हमारी साझी विरासत है | किसी भी भाषा का किसी से कोई बैर नहीं है बल्कि हरेक के बीच सुमधुर समन्वय है |

Vice-Chancellor Dr.AK Ray inaugurating seminar along with other officers at B.N. Mandal Auditorium Madhepura.
Vice-Chancellor Dr.A.K. Ray inaugurating Seminar along with other officers at B.N. Mandal Auditorium Madhepura.

इस अवसर पर प्रतिकुलपति डॉ.फारुख अली ने कहा कि आजादी की लड़ाई में हिन्दी और उर्दू दोनों ने कंधे से कंधा मिलाकर काम किया | उन्होंने कहा कि हिन्दी और उर्दू जहाँ एक ओर भारत माता की दो खूबसूरत आंखें हैं वहीं दूसरी ओर सभी भाषाओं के चेहरे भले ही अलग-अलग हों लेकिन दिल एक है | मुख्य अतिथि मो.अली जौहर ने उर्दू को उपेक्षित बताते हुए सम्मान दिलाने की चर्चा की |

ज्ञातव्य हो कि वहीं बिहार सरकार उर्दू निदेशालय की ओर से जिले में उर्दू को बढ़ावा देने के लिए विविध प्रकार की प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है | सभी प्रारंभिक विद्यालयों का नाम हिन्दी एवं उर्दू में लिखने का आदेश सभी प्रधानों एवं पदाधिकारियों को दिया जा रहा है |

बता दें कि इस आयोजन की अध्यक्षता डॉ.फसीह उद्दीन अहमद ने की और कार्यक्रम का संचालन विश्वविद्यालय ऑडिटोरियम में डॉ.अबुल फजल द्वारा शानदार तरीके से संपन्न किया गया | भारी संख्या में छात्र-शिक्षक एवं बुद्धिजीवियों की उपस्थिति अन्त तक बनी रही |

यह भी जानिये कि सेमिनार के दूसरे दिन विश्वविद्यालय के पी.जी. उर्दू विभाग एवं बिहार उर्दू अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में तकनीकी सत्र के दरमियान अध्यक्षता करते हुए डॉ.एहसान ने जहाँ कहा कि उर्दू का भविष्य उज्जवल है, वहीं जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ली के डॉ.सैफुल्लाह सैफी ने कहा कि उर्दू सद्भावना की भाषा है |
सेमिनार में डॉ.प्रज्ञा प्रसाद, डॉ.अबुल फजल, सहनवाज आलम, मो.अशरफ, साहिल कौशर डॉ.के.सुल्ताना आदि ने अपने-अपने विचार व्यक्त किये |

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नहीं रहे कुंवर नारायण

हिन्दी साहित्य को कई कालजयी कृतियां देने वाले अप्रतिम कवि कुंवर नारायण का निधन हो गया। वे 90 वर्ष के थे। मूलरूप से फैजाबाद के रहने वाले कुंवर पिछले 51 साल से साहित्यरत थे। बुधवार को दिल्ली के सीआर पार्क में उन्होंने अंतिम सांसें लीं। यहां वे अपनी पत्नी और बेटे के साथ रहते थे और पिछले कई महीनों से अस्वस्थ चल रहे थे।
साहित्य, सिनेमा और संगीत में लगभग समान दखल रखने वाले कुंवर नारायण की मूल प्रतिष्ठा कवि की थी। अज्ञेय द्वारा संपादित ‘तीसरा सप्तक’ के कवियों में शामिल रहे  कुंवर ने ‘चक्रव्यूह’, ‘परिवेशः हम तुम,  ‘इन दिनों’, ‘कोई दूसरा नहीं’,  ‘आत्मजयी’, ‘वाजश्रवा के बहाने’ और ‘कुमारजीव’ जैसी अविस्मरणीय रचनाओं के रूप में हिंदी के साहित्य और समाज को एक बड़ी विरासत सौंपी है।
कुंवर नारायण को उनकी साहित्य-साधना के लिए देश के लगभग सभी महत्वपूर्ण सम्मान मिले। 1995  में उन्हें कविता संग्रह ‘कोई दूसरा नहीं’ के लिए साहित्य अकादमी सम्मान मिला तो 2005  में उऩ्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार से नवाजा गया। 2009 में उन्हें ‘पद्मभूषण’ से विभूषित किया गया। इसके अलावा कुमार आशान सम्मान,  प्रेमचंद पुरस्कार और व्यास सम्मान भी उन्हें मिले। इन सबके अलावे उन्हें कई अंतरराष्ट्रीय सम्मान भी मिले थे।

कुंवर नारायण लखनऊ विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में परास्नातक थे। पढ़ाई के तुरंत बाद उन्होंने पुश्तैनी ऑटोमोबाइल बिजनेस में काम करना शुरू कर दिया था। पर आगे चलकर आचार्य कृपलानी,  आचार्य नरेंद्र देव और सत्यजीत रे से प्रभावित होकर साहित्य में उनकी गहरी रुचि हो गई।
कुंवर नारायण की रचनाशीलता के कई आयाम रहे। उन्होंने कई पौराणिक आख्यानों को आधुनिक और समकालीन अर्थों और संदर्भों के साथ पुनर्परिभाषित किया। इस संदर्भ में ‘आत्मजयी’,  ‘वाजश्रवा के बहाने’ जैसी रचनाओं का नाम बड़े आदर के साथ लिया जाता है। एक तरह की ‘उजली’ मनुष्यता कुंवर की कविता का मुख्य स्वर रही। आधुनिक समय के तनावों-दबावों के बीच यह कविता बड़ी सहजता से प्रेम और सहिष्णुता का पाठ रचती है। अपने कृतित्व एवं व्यक्तित्व के लिए कुंवर नारायण हमेशा याद किए जाएंगे। आधुनिक हिन्दी कविता के इस महाकवि को हमारा शत् शत् नमन।

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कोसी की बेटी कोमल चली…… कलाम की राह

कुछ करने का संकल्प और अंतर्मन में आत्मविश्वास- ये दोनों जीवन में अद्भुत चमत्कार ला सकता है | जैसा कि भारती-मंडन की ज्ञान भूमि महिषी की बेटी कोमल ने एक बार फिर खुद को प्रमाणित कर दिखा दिया | भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में बतौर वैज्ञानिक बनकर कोमल ने डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के ‘समृद्ध विचार’ को पंख लगाने में अद्भुत सफलता पाई है-

भारत के कई कोटि युवजनों को कभी छोटा या

असहाय महसूस नहीं करना चाहिए | हम सब अपने

भीतर दैवीय शक्ति लेकर जन्मे हैं | हम सबके

भीतर ईश्वर का तेज छिपा है | हमारी कोशिश

हो इस तेजपुंज को पंख देते रहने की, जिससे यह

चारों ओर अच्छाइयों का प्रकाश फैला सके…!

बता दें कि मंडन-भारती की ज्ञानभूमि महिषी से लेकर सुबे बिहार के गौरव में चार चांद लगाने वाली कोमल इसरो केंद्रीयकृत भर्ती बोर्ड द्वारा आयोजित वैज्ञानिक CS अभियंता की वार्षिक परीक्षा में हाल ही में शामिल हुई | सम्मिलित होने वाले लगभग 50 हजार परीक्षार्थियों को कठिन जांच परीक्षण की दौर से गुजरना पड़ा | 13वें नंबर पर अंतिम रुप से मुहर लगवा ली |

यह भी जानिये कि बतौर वैज्ञानिक इसरो में कोमल को इलेक्ट्रॉनिक एंड कम्युनिकेशन सेक्शन मिला है जहाँ बनने वाले सेटेलाइट एंड रॉकेट के निर्माण में कोमल भी कलाम की तरह ही अपना योगदान देती रहेगी | कोमल निरंतर एक से बढ़कर एक परिणाम लाती रहेगी और माताश्री पूनम को पूनम की चाँद बनकर तथा पिताश्री मनोरंजन को नई-नई उपलब्धियों के साथ भरपूर मनोरंजन करती रहेगी | तभी तो दिल्ली आईआईटी से एमटेक कर रही कोमल कहती है कि ISRO राष्ट्रसेवा करने का बहुत बड़ा जरिया है | इससे जुड़ना ही अपने आप में गौरव की बात है |

जहाँ एक ओर देवघर में सरकारी कार्यालयों में कार्यरत कोमल के माता-पिता अपनी बेटी की सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए इसे बाबा वैद्नाथ बासुकीनाथ का आशीर्वाद एवं कोमल के गहरे अध्ययन व लगन का फल मानते हैं वहीं सहरसा आर.झा महिला कॉलेज की डॉ.रेणु सिंह, आर.एम.कॉलेज के समाजशास्त्री डॉ.विनय कुमार चौधरी, सुपौल के बुद्धिजीवी विश्वकर्मा जी एवं मधेपुरा के डॉ.कलाम कहे जानेवाले डॉ.मधेपुरी ने कोमल की इस कामयाबी को राष्ट्रीय स्तर पर कोसी कमिश्नरी को पहचान दिलाने की संज्ञा दी है |

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नीतीश की दो टूक, राजद पार्टी नहीं, लालू की निजी संपत्ति

सोमवार को पटना में लोकसंवाद कार्यक्रम में भाग लेने के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद यादव के लगातार दसवीं बार राष्ट्रीय जनता दल अध्यक्ष चुने जाने पर कहा कि राजद पार्टी नहीं, बल्कि उनकी (लालू की) निजी संपत्ति है।  उन्होंने आगे कहा, “राजद में पिछले साल ही चुनाव हुआ था और इस बार भी हो रहा है। वहां किस तरह का संविधान है, ये उनका अंदरूनी मामला है। उन्हें मालूम है कि किस तरह मीडिया में जगह बनाई जाती है। वे आजकल मीडिया के ‘पोस्टर ब्वाय’ बने हुए हैं।”

लालू व उनकी पार्टी के संबंध में पूछे जाने पर नीतीश ने बड़ी बेबाकी से कहा, “उनको विकास से कोई लेना-देना नहीं है। हमलोगों का स्वाभाव नहीं है कि आरोप-प्रत्यारोप में शामिल हों। अगर विकास के मुद्दे पर ‘डिबेट’ करेंगे तो उसमें हम भाग लेंगे।” पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव के संबंध में उन्होंने कहा, “वे तो अभी बच्चे हैं, उनका क्या जवाब दें।”

आरक्षण के मुद्दे पर नीतीश ने बड़े स्पष्ट तौर पर कहा कि इस संबंध में उनका नजरिया स्पष्ट है। उन्होंने कहा कि वे पाटीदार के ही नहीं, जाट और मराठा आरक्षण के भी पक्षधर हैं। साथ ही उन्होंने कहा कहा कि आज आरक्षण के लिए ऐसे समुदायों को भी क्यों मांग करनी पड़ रही है, यह भी देखना चाहिए।

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को भी भारत का अंग बताते हुए नीतीश ने कहा कि जम्मू और कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। वहीं, गुजरात विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा को गुजरात में कोई खतरा नहीं है।

यह पूछे जाने पर कि क्या देश में एक साथ सभी प्रकार के चुनाव होने चाहिए, उन्होंने कहा, “मैं इससे सहमत हूं। वर्ष 1967 तक तो चुनाव एक साथ ही हो रहे थे। 1967 के बाद ‘मिडटर्म पोल’ से यह स्थिति बदली है। पांच वर्ष के लिए एक साथ चुनाव हो, तो यह बहुत अच्छा रहेगा। इससे पूरे समय काम करने का मौका मिलेगा।” उन्होंने हालांकि यह भी कहा कि इसके लिए संविधान में कुछ बदलाव करने होंगे और इस मुद्दे पर विमर्श की भी आवश्यकता है। यह तुरंत संभव नहीं है, इसमें वक्त लगेगा।

नीतीश ने एक बार फिर बाल विवाह और दहेज प्रथा विरोध की चर्चा करते हुए कहा कि इसके साथ ही शराबबंदी के लिए भी काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि इससे राज्य में माहौल बदला है। उन्होंने लोगों से समाजहित में कार्य करने की अपील भी की।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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लंदन में क्यों खरीदना चाहती हैं ममता टैगोर का घर ?

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लंदन के उस घर को खरीदना चाहती हैं जहां विश्वकवि रवीन्द्रनाथ टैगोर ने कुछ समय के लिए समय बिताया था। वह इसे भारतीय साहित्य को वैश्विक पहचान दिलाने वाले टैगोर के संग्रहालय-सह-स्मारक का रूप देना चाहती हैं। टैगोर 1912 में कुछ महीनों के लिए उत्तरी लंदन के हैम्पस्टेड हीथ स्थित हीथ विलाज में रहे थे, जहां उन्होंने अपने कविता संग्रह ‘गीतांजलि’ का अनुवाद किया था। इस घर पर अभी भी नीले रंग की एक पट्टिका लगी हुई है, जिस पर लिखा है कि यहां भारतीय कवि रवीन्द्रनाथ टैगोर रहे थे।

गौरतलब है कि ममता बनर्जी इन दिनों ब्रिटेन के दौरे पर हैं। इस दौरान शनिवार को उन्होंने लंदन में कार्यवाहक भारतीय उच्चायुक्त दिनेश पटनायक से एक घंटे तक मुलाकात की और टैगोर से जुड़ी इस धरोहर को अपनी सरकार की ओर से खरीदने की इच्छा जताई। ममता चाहती हैं कि ऐतिहासिक महत्व वाले इस घर को टैगोर के संग्रहालय-सह-स्मारक में तब्दील कर उन्हें एक यादगार श्रद्धांजलि दी जाए। इस घर की कीमत कुछ साल पहले 2.7 मिलियन पाउंड यानि लगभग 23 करोड़ रुपए थी। बता दें कि 2015 में ममता जब लंदन गई थीं तब भी उन्होंने इस पर चर्चा की थी। अब एक बार फिर ममता ने नई उम्मीद के साथ इस मुद्दे को उठाया है।

बता दें कि टैगोर 1912 में ब्रिटेन पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने लंदन में अपनी कई कविताओं का अनुवाद किया था। उस दौर में उनके साथियों में कई ब्रिटिश कलाकार और कवि शामिल थे। इनमें डब्ल्यू बी येट्स भी शामिल थे जिन्होंने ‘गीतांजलि’ का परिचय लिखा था। यह 103 अनुवादों का संग्रह था जिसने टैगोर को 1913 में साहित्य के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार दिलाया था। टैगोर की स्मृति को सुरक्षित और संरक्षित रखने के निमित्त अपने इस प्रयास के लिए ममता बनर्जी नि:संदेह बधाई की पात्र हैं।

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मधेपुरा आदिकला गूंज उठी सात समन्दर पार

फ्रांस की राजधानी पेरिस में सात दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय आदिकला पेंटिंग संगोष्ठी का आयोजन होने जा रहा है | UNESCO से सम्बद्ध वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ जेरभास आर्ट क्लब द्वारा पेरिस में आयोजित दुनिया के 70 देशों के गिने-चुने कलाकार एवं कला विशेषज्ञों का जमघट होगा- 3 दिसम्बर से 9 दिसम्बर 2017 तक |

बता दें कि आदि कला जगत के इस अंतर्राष्ट्रीय महाकुंभ में यूनेस्को अचैआ क्लब के प्रेसिडेंट पी.मिल्ट ने संसार के 70 देशों के लगभग 500 कलामर्मज्ञों को शिरकत करने के लिए आमंत्रित किया है | पेरिस में आयोजित होनेवाले इस इंटरनेशनल पेंटिंग सिंपोजियम में शामिल होने के लिए मधेपुरा आदिकला के संस्थापक एवं इस मिट्टी के लाल संजय कुमार को भी आमंत्रित किया गया है | यह मधेपुरा जिले वासियों के लिए सर्वाधिक गर्व की बात है |

Exhibition of Bhitti Chitrakala at B.N. Mandal Kala Bhawan, Madhepura.
Exhibition of Bhitti Chitrakala at B.N. Mandal Kala Bhawan, Madhepura.

यह भी बता दें कि यह वही संजय कुमार है जो रेखा टूडू, सुनीता मरांडी, सुचिता हंसदा, सुनीता बास्की, सुखयमुनि  सोरेन, अनीता मुर्मू एवं सुनिता हंसदा जैसे ढेर कलाकारों की चेतना को जगाने में वर्षो से आदि भित्ति चित्रकला को समर्पित दिखता रहा है | तभी तो संजय के गुरु रह चुके समाजसेवी शिक्षाविद् डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने कभी आशीर्वचन देते हुए यही कहा था- आज मेरा शिष्य संजय जिस तरह सूरज जैसे जल रहा है वही कल निश्चय ही सूरज की तरह चमकेगा………! और इतने ही दिनों में गुरु का आशीर्वचन रंग दिखाने लगा |

इन दिनों भले ही राष्ट्रीय कला मंचों पर मधेपुरा आदिकला को समुचित सम्मान नहीं मिला हो लेकिन विश्वपटल पर अपनी पहचान बनाने में मधेपुरा जिला को बड़ी कामयाबी तो मिली है | अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आमंत्रण मिलने से यह साफ जाहिर हो जाता है कि सात समंदर पार मधेपुरा आदिकला की धमक पहुंच चुकी है | आदिकला केन्द्र के संस्थापक संजय कुमार ने जहाँ एक ओर इसे आदिकला, इससे जुड़े कलाकारों एवं सोशल साइट्स की भूमिका सहित डीएम मो.सोहैल (भा.प्र.से.) की टीम के सहयोग का सम्मान बताया है, वहीं दूसरी और आदिवासी समाज द्वारा सदियों से प्रचलित भित्ति चित्रकला को सहेजने की मुहिम का नतीजा माना है |

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2020 में तेजस्वी होंगे आरजेडी के सीएम उम्मीदवार

आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने 2020 में पार्टी की तरफ से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के नाम पर लगाए जा रहे तमाम कयासों पर विराम लगा दिया है। उन्होंने अभी ही घोषणा कर दी कि 2020 में होने वाले विधानसभा चुनाव में उनके छोटे बेटे और पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ही पार्टी की तरफ से सीएम पद के उम्मीदवार होंगे।

शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में लालू ने कहा, ‘2020 के विधानसभा चुनाव में पार्टी तेजस्वी यादव के नेतृत्व में चुनाव लड़ेगी। तेजस्वी पार्टी के सीएम उम्मीदवार होंगे।’ इस दौरान लालू प्रसाद यादव ने तेजस्वी यादव के काम की जमकर सराहना की।

गौरतलब है कि लालू का यह बयान तब सामने आया है जब पूर्व वित्त मंत्री अब्दुल बारी सिद्दीकी और पार्टी के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह ने हाल ही में कहा था कि अगले विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी की तरफ से अभी कोई भी सीएम उम्मीदवार तय नहीं है।

दरअसल बीते बुधवार आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र पूर्वे ने सीएम उम्मीदवार के तौर पर तेजस्वी के नाम का प्रस्ताव रखा था, जिस पर सिद्दीकी और रघुवंश ने स्पष्ट कुछ बोलने से बचते हुए इस प्रस्ताव पर लगभग ‘असहमति’ जताई थी। गौरतलब है कि तेजस्वी फिलहाल बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा रहे हैं।

बहरहाल, देखा जाय तो लालू द्वारा पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री पद के लिए तेजस्वी की उम्मीदवारी की घोषणा में कुछ भी अप्रत्याशित नहीं है। हां, टाइमिंग जरूर चौंकाने वाला है।

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