एल्सटॉम कंपनी ने लिया मधेपुरा के छह गाँवों को गोद

मधेपुरा विद्युत रेल इंजन कारखाना निर्माण में जुटा है फ्रांस की कंपनी एल्सटॉम | पहला रेल इंजन बनना चालू होने के साथ एल्सटॉम द्वारा आस-पास के 6 गाँवों- तुनियाही (उत्तरी-दक्षिणी), लक्ष्मीरामपुर (उत्तरी-दक्षिणी) एवं गणेश स्थान (वार्ड न० – 13 और 14) को गोद लिया गया है |

बता दें कि प्रोजेक्ट पदाधिकारी ऋषिकेष रंजन द्वारा मधेपुरा अबतक को यह जानकारी दी गई कि जहाँ इन गाँवों में नियमितरुप से 6 मोबाइल विकास केंद्रों में फिलहाल स्कूल नहीं जाने वाले 14 वर्ष से कम उम्र के 110 बच्चों को एल्सटॉम की ओर से NGO- प्रज्ञा’ द्वारा नियमित रूप से पढ़ाया जाता है वहीं डॉ.एम.के.झा के निर्देशन में पांच सदस्यों वाली मेडिकल टीम द्वारा गोद लिए गये गाँवों में नियमित रुप से जा-जाकर जरूरतमंद सभी मरीजों की मुफ्त जाँच की जाती है और मुफ्त दवा भी उपलब्ध कराई जाती है |

एल्सटॉम कंपनी के वरीय पदाधिकारी के.के.भार्गव ने भी बताया कि आने वाले दिनों में सामाजिक सरोकार के तहत कई और अन्य विकास के काम किए जायेंगे | तत्काल इन गाँवों के बेरोजगार युवाओं एवं महिलाओं को कंप्यूटर प्रशिक्षण दिया जा रहा है तथा सरकारी नौकरियों में निकलने वाली वैकेंसी के बारे में भी इन्हें जानकारी दी जा रही है | कंपनी इन्हें Job दिलाने की दिशा में हर संभव प्रयास करेगी |

इस अवसर पर मधेपुरा के शिक्षाविद-समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने मधेपुरा विद्युत रेल इंजन फैक्ट्री सहित एल्सटॉम कंपनी के पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों को दीपावली एवं छठ पूजा की शुभकामनाएं देते हुए यही कहा कि ‘एल्सटॉम’ एवं ‘प्रज्ञा’ द्वारा आस-पास के गोद लिए गये इन गाँवों से अशिक्षा और बेरोजगारी को दूर करने की जो मुहिम चलायी जा रही है वह निश्चिय ही ग्रासरूट पर किये जाने वाले कार्य हैं- जिनसे गाँवों का विकास होगा, क्योंकि अभी भी तो हमारा गाँव गरीब ही है | गाँधी-लोहिया-जयप्रकाश एवं भूपेन्द्र-भीम-कर्पूरी….. का भारत तो मूलरूप से गाँवों में ही बसता है |

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जी हां, चन्द्रमा पर है 50 किलोमीटर लंबी गुफा

पांच दशक होने को आए जब मनुष्य ने चन्द्रमा पर पहला कदम रखा था। वो दिन था 20 जुलाई 1969 जब अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के दो एस्ट्रोनॉट नील आर्मस्ट्रांग और बज एल्ड्रीन अंतरिक्ष विमान अपोलो 11 में सवार होकर चांद पर पहुंचे थे। तब से अब तक विज्ञान ने बेहिसाब तरक्की की है और नई-नई खोजों का सिलसिला अनवरत जारी है। खासकर चन्द्रमा को लेकर हमारी उत्सुकता प्रारंभ से ही कुछ अलग रही है। कहना गलत न होगा कि यह हमारी दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा है। न जाने कितनी ही कविताएं इस पर रची गई होंगी और कितनी ही कहानियां इससे जुड़ी हुई होंगी। अकारण नहीं कि दुनिया भर के वैज्ञानिकों ने इसके अलग-अलग पहलुओं पर तरह-तरह की जानकारियां इकट्ठी की हैं। आज हम चन्द्रमा के बारे में आपको एक ऐसी जानकारी से अवगत कराएंगे कि आप बस चौंक जाएंगे।

जी हां, सुनकर शायद अविश्वसनीय लगे लेकिन जापान के वैज्ञानिकों को चांद पर एक बहुत बड़ी गुफा का पता चला है। वैज्ञानिकों ने गुरुवार को बताया कि इस गुफा में चन्द्रमा पर जाने वाले एस्ट्रोनॉट रह सकते हैं। इससे वे खतरनाक विकिरण और तापमान में बदलाव से बच सकते हैं। जापान के एईएईएनई लूनर ऑर्बिटर से मिले आंकड़ों के अनुसार चांद पर मौजूद यह गुफा 3.5 अरब साल पहले भूगर्भ के अंदर हुई हलचल की वजह से बनी होगी। इस गुफा की लंबाई 50 किलोमीटर और चौड़ाई 100 मीटर है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह गुफा भूगर्भ से निकले लावे की वजह से तैयार हुई होगी। जापानी वैज्ञानिकों के ये आंकड़े और नतीजे अमेरिकी पत्रिका जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स में भी प्रकाशित हुए हैं।
जापानी वैज्ञानिक जुनिची हारुयामा ने गुरुवार को कहा, ‘हमें अभी तक ऐसी चीज के बारे में पता था और माना जाता था कि यह लावा ट्यूब हैं, लेकिन उनकी मौजूदगी की पुष्टि पहले नहीं हुई थी।’ जमीन के अंदर मौजूद यह गुफा चंद्रमा के मारियस हिल्स नामक जगह के पास है। बकौल हारुयामा इस गुफा में रह कर अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा प्रवास के दौरान विकिरण और तापमान में होने वाले तेज बदलावों के दुष्प्रभाव से बच सकते हैं।
चलते-चलते बता दें कि जापान ने इसी साल जून में साल 2030 तक चंद्रमा पर अंतरिक्ष मिशन भेजने की घोषणा की है। इधर भारत और चीन भी अपने-अपने अंतरिक्ष यात्री चन्द्रमा पर भेजने की तैयारी कर रहे हैं। चन्द्रमा पर इंसानी बस्ती बसाने की तैयारी जोरों पर है। अब वो दिन दूर नहीं जब चंदा मामा से हम सचमुच अपने मामा के जैसे मिल पाएंगे।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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‘कमजोर हिंदी के कारण नहीं बना प्रधानमंत्री’: प्रणव मुखर्जी

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का मानना है कि वे प्रधानमंत्री इसलिए नहीं बन सके क्योंकि वे हिन्दी में कमजोर थे। उन्होंने कहा कि मैं प्रधानमंत्री के तौर पर उपयुक्त नहीं था क्योंकि मैं हिंदी में कमजोर होने के चलते जनता के साथ संवाद नहीं कर सकता था। कोई भी व्यक्ति जनता से संवाद करने की भाषा में सक्षम न होने पर प्रधानमंत्री नहीं बन सकता, जब तक कि कोई अन्य राजनीतिक कारण न हों।

गौरतलब है कि पिछले दिनों ही पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि जब उनके नाम का ऐलान प्रधानमंत्री के तौर पर हुआ तो वे खुद हैरान थे क्योंकि प्रणब मुखर्जी उनसे अधिक योग्य व्यक्ति थे। हालांकि मुखर्जी कहते हैं कि ‘डॉक्टर साहिब (मनमोहन सिंह) हमेशा बहुत अच्छे विकल्प रहे। नि:संदेह वे बहुत अच्छे प्रधानमंत्री थे। मैंने तब भी कहा था और बाद में भी कि कांग्रेसियों में प्रधानमंत्री के तौर पर सबसे अच्छे विकल्प मनमोहन सिंह ही थे।

बता दें कि प्रणब दा ने ये बातें टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत के क्रम में कहीं। इस दौरान उन्होंने और भी कई मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखी। क्षेत्रीय दलों के एजेंडे के चलते राष्ट्रीय हित प्रभावित होने के विषय में उन्होंने कहा कि इस पर पर देश में गंभीर चर्चा किए जाने की जरूरत है। खासतौर पर गठबंधन सरकारों में प्रधानमंत्री अपने मन-मुताबिक फैसले लेने में सक्षम नहीं रहता है। यहां तक कि वह मंत्रियों और उनके विभागों का चुनाव भी अपने मुताबिक नहीं कर पाता है। उन्होंने बताया कि यूपीए के कार्यकाल में क्षेत्रीय दलों से निपटना चुनौती था। और आज जबकि भाजपा पूर्ण बहुमत से सत्ता में है, तब भी उसके लिए यह एक बड़ी चुनौती है। बकौल मुखर्जी क्षेत्रीय हितों के साथ राष्ट्रीय हितों का तालमेल मुश्किल हो जाता है।

यह पूछे जाने पर कि क्या राष्ट्रपति भवन से निकलने के बाद वह कांग्रेस के लिए गाइड के तौर पर उपलब्ध होंगे, उन्होंने कहा राजनीति में दोबारा आने का कोई सवाल ही नहीं उठता। हालांकि वे सलाह के लिए उपलब्ध रहेंगे। उन्होंने पूर्व के राष्ट्रपतियों डॉ. राजेंद्र प्रसाद, शंकर दयाल शर्मा आदि का उदाहरण देते हुए कहा कि वे सभी कांग्रेस से आकर राष्ट्रपति बने थे, वे मुझसे बड़े कांग्रेसी थे, लेकिन राष्ट्रपति के पद से हटने के बाद वे दोबारा सक्रिय राजनीति में नहीं लौटे।

प्रणब मुखर्जी वर्तमान समय के उन गिने-चुने राजनतीतिज्ञों में एक हैं जिनका सम्मान दलगत सीमाओं से ऊपर है। अपने दीर्घ राजनीतिक जीवन में उन्होंने कई दौर देखे हैं और उन्हें अच्छी तरह पता है कि वर्तमान में कैसे भविष्य के बीज बोए जाते हैं और कैसे आदर्श के प्रतिमान गढ़े जाते हैं। उनकी तमाम बातों में उनके अनुभव का अक्श देखा जा सकता है। ऊपर कही बातें भी इसकी पुष्टि करती हैं।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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भाजपा है भारत की सबसे अमीर पार्टी

पैसे का महत्व हर युग में रहा है, लेकिन आज के समय में इसकी ताकत बेहिसाब बढ़ गई है। आज यह पैसा नीयत, नीति, नियम, नैतिकता, न्याय और यहां तक कि नियति तक को बदलने की सामर्थ्य रखती है। जब पैसे की इस ताकत से बड़े-से-बड़ा और छोटे-से-छोटा हर आदमी वाकिफ है, तो भला राजनीतिक पार्टियां इससे कैसे अछूती रहें। यह संयोग से कुछ अधिक है कि जब-जब चुनाव नजदीक आता है, तब-तब सभी पार्टियों की संपत्ति में इजाफा हो जाता है। क्यों होता है, यह किसी से छिपा नहीं।

दरअसल तमाम राजनीतिक पार्टियां चुनाव आने के लगभग साल भर पहले से पैसा इकट्ठा करना शुरू कर देती हैं। इनकम टैक्स विभाग चाहे जितने नियम बना लें, राजनीतिक पार्टियां अपनी आमदनी को उसमें फिट करने की ‘कला’ बखूबी जानती हैं। आज चुनाव प्रणाली के लिए पैसे की ये ताकत कितनी बड़ी चुनौती बन चुकी है, इस पर बात करना ही बेकार है। बात तो इस पर होनी चाहिए कि राजनीतिक पार्टियों की फंडिग पारदर्शी कैसे हो।

बहरहाल, यह समस्या इतनी गंभीर है कि इस पर राष्ट्रीय बहस होनी चाहिए। फिलहाल तो आप यह जानें कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की सबसे अमीर पार्टी कौन है और उसके पास कितनी सम्पत्ति है? आपको बता दें कि हाल के वर्षों में तेजी से अपनी राजनीतिक हैसियत बढ़ाकर देश की सत्ता पर काबिज होने वाली पार्टी भाजपा ने कांग्रेस से सबसे बड़ी और उसी के साथ सबसे अमीर होने का दर्जा छीन लिया है। यह तथ्य ‘रिसर्च असोसिएशन फॉर डेमोक्रटिक रिफॉर्म्स’ (एडीआर) और वेस्ट बंगाल इलेक्शन वॉच की तरफ से कोलकाता में सोमवार को ‘अनैलेसिस ऑफ असेट्स ऐंड लायबिलिटीज ऑफ नैशनल पार्टीज फाइनैंशल ईयर 2004-5 से 2015-16’ के नाम से जारी रिपोर्ट से सामने आई है।

एडीआर की इस रिपोर्ट के अनुसार पिछले 10 सालों में भाजपा की सम्पत्ति 627 प्रतिशत बढ़कर 122.93 करोड़ रुपये से 893 करोड़ रुपये हो गई है। यह आंकड़ा 2004-05 से 2015-16 के बीच का है। जबकि इसी समय में कांग्रेस की सम्पत्ति 167.35 करोड़ रुपये से बढ़कर 758.79 करोड़ रुपये हो गई, यानि इन 10 सालों में उसकी सम्पत्ति में 353.41 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

बता दें कि एडीआर ने इस रिपोर्ट में विश्लेषण के लिए कुल 7 पार्टियों द्वारा चुनाव आयोग और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में जमा किए ऑडिटेड अकाउंट का इस्तेमाल किया गया है। वे पार्टियां हैं: भारतीय जनता पार्टी, इंडियन नेशनल कांग्रेस, एनसीपी, बसपा, सीपीआई, सीपीएम और ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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धनतेरस: धन ही नहीं, स्वास्थ्य का भी पर्व

धनतेरस, एक अनोखा पर्व जो न केवल दीपावली आने की पूर्व सूचना देता है बल्कि समृद्दि के लिए स्वास्थ्य का महत्व भी रेखांकित करता है। आम धारणा के अनुसार धन का पर्व दीपावली है, जो सही नहीं है। दीपावली तो धन के साथ-साथ अन्य सिद्धियों का दिन भी है। धन का दिन तो असल में धनतेरस है। साथ ही यह दिन औषधि और स्वास्थ्य के स्वामी धन्वंतरि का भी दिन है, जो इस बात का संदेश देता है कि धन का भोग करने के लिए लक्ष्मी की कृपा जितनी जरूरी है, उतनी ही जरूरत उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की होती है। बता दें कि आर्युवेद, जिसकी रचना ब्रह्मा ने की थी, को प्रकाश में लाने का श्रेय भी धन्वंतरि को ही जाता है।

धनतेरस का पर्व हर वर्ष कार्तिक के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाता है। दीपावली की महानिशा से दो दिन पहले इसी खास दिन यक्ष-यक्षिणियों का जागरण होता है। यक्ष-यक्षिणी इस स्थूल जगत के उन सभी चमकीले तत्वों के नियंता कहे जाते हैं, जिन्हें दुनिया ‘दौलत’, ‘सम्पत्ति’, ‘वैभव’, ‘ऐश्वर्य’ जैसे नामों से जानती है। जानना दिलचस्प होगा कि कुबेर को यक्ष और लक्ष्मी को यक्षिणी का रूप माना जाता है। कुबेर और लक्ष्मी यक्ष-यक्षिणी के रूप में हमारे जीवन की उस ऊर्जा को नियंत्रित करते हैं, जिससे हमारी जीवन-शैली निर्धारित और नियंत्रित होती है।

‘धनतेरस’ में ‘धन’ शब्द को धन-संपत्ति और धन्वंतरि दोनों से ही जोड़कर देखा जाता है। भगवान धन्वंतरि को हिन्दू धर्म में देव वैद्य का पद हासिल है। कुछ ग्रंथों में इन्हें विष्णु का अवतार भी माना गया है। मान्यता है कि समुद्र-मंथन के दौरान धन्वंतरि चांदी के कलश और शंख के साथ प्रकट हुए थे। इसी कारण धनतेरस के दिन शंख और चांदी का कोई पात्र, बर्तन या सिक्का खरीदना शुभ माना जाता है। सामर्थ्य के अनुसार कुछ लोग चांदी की जगह सोना तो कुछ लोग पीतल या स्टील की चीज खरीदते हैं, लेकिन ये रस्म लोग निभाते जरूर हैं। दीपावली के लिए इसी दिन लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा और पूजन सामग्री खरीदना भी शुभ माना गया है।

तंत्र शास्त्र में इस दिन लक्ष्मी, गणपति, विष्णु और धन्वंतरि के साथ कुबेर की साधना की जाती है। धनतेरस की रात्रि में कुबेर यंत्र, कनकधारा यंत्र, श्री यंत्र तथा लक्ष्मी स्वरूप श्री दक्षिणावर्ती शंख के पूजन को अचूक माना गया है। इस दिन अपने मस्तिष्क को स्वर्ण समझकर ध्यानस्थ होने से धन अर्जित करने की आन्तरिक क्षमता सक्रिय होती है, जो सही मायने में समृद्धि का कारक बनती है।

एक बात और, ‘धनतेरस’ में ‘धन’ से जुड़े ‘तेरस’ शब्द को लेकर एक बड़ी महत्वपूर्ण मान्यता यह है कि इस दिन खरीदे गए धन, विशेषकर सोना या चांदी, में तेरह गुना वृद्धि हो जाती है। ईश्वर करे आपके धन में भी तेरह गुना की वृद्धि हो और हर धनतेरस को हो। ‘मधेपुरा अबतक’ की ओर से इस दिन की ढेर सारी शुभकामनाएं।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

 

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मधेपुरा में भारतरत्न डॉ.कलाम की 87वीं जयन्ती मनी

मधेपुरा के तुलसी पब्लिक स्कूल में गाँधीयन मिसाइल मैन कहलाने वाले भारतरत्न डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम की 87वीं जयन्ती समारोहपूर्वक मनाई गई | यह समारोह सर्वाधिक उत्साह, उमंग एवं सादगी के साथ शिक्षकों एवं छात्रों की उपस्थिति में मनाया गया |

सर्वप्रथम डॉ.कलाम की तस्वीर पर उद्घाटनकर्ता समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी, मुख्य अतिथि श्यामल कुमार सुमित्र सहित शिक्षकों एवं छात्र-छात्राओं ने पुष्पांजलि की | फिर डॉ.कलाम के जीवनवृत्त पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए डॉ.मधेपुरी ने संबोधन के अंत में बच्चों से यही कहा-

“जो कुछ करने का संकल्प लो उसे जुनून एवं आत्मविश्वास के साथ पूरा करो | आत्मविश्वास तुम्हारे जीवन में अद्भुत चमत्कार ला सकता है……… केवल उसे अपने मन-प्राणों में निरंतर उतारने की कोशिश में लगे रहो |”

Dr.Madhepuri with kids and teachers with full of Spirit during the Missileman Dr.APJ Abdul Kalam's 87th Happy Birthday celebration at Tulsi Public School Madhepura.
Dr.Madhepuri with kids and teachers with full of Spirit during the Missileman Dr.APJ Abdul Kalam’s 87th Happy Birthday celebration at Tulsi Public School Madhepura.

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रुप में तुलसी पब्लिक स्कूल के निदेशक श्यामल कुमार सुमित्र ने कहा कि डॉ.कलाम दुनिया के पहले ऐसे राष्ट्रपति थे जिन्होंने राष्ट्रपति भवन में हो रहे अपने शपथ-ग्रहण समारोह में देश के सौ स्कूली बच्चे-बच्चियों को आमंत्रित किया था |

बता दें कि समारोह की अध्यक्षता कर रहे प्राचार्य डॉ.हरिनंदन प्रसाद यादव ने अपने संबोधन में डॉ.कलाम के अनुशासन प्रियता की चर्चा करते हुए स्कूल में उपस्थिति एवं अनुशासन को लेकर सर्वश्रेष्ठ छात्र के रूप में वर्ग-2 के मनदीप कुमार एवं छात्रा समूह में वर्ग 5 की आस्था कुमारी के नाम की घोषणा की | इन दोनों को उद्घाटनकर्ता डॉ.मधेपुरी के हाथों मोंमेंटो देकर पुरस्कृत किया गया |

यह भी जानिए कि “डॉ.कलाम के व्यक्तित्व एवं कृतित्व” विषय पर भाषण प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया था | शिक्षक द्वय वरुण कुमार वर्मा एवं नरेश कुमार के संरक्षण में लगभग एक दर्जन छात्र-छात्राओं यथा आस्था प्रिया, लक्ष्मी, निधि, छवि, आर्यन, प्रियांशु, अभिनव, नीरज…….. आदि ने हिन्दी व अंग्रेजी में भाषण दिया और तालियाँ भी बटोरी | पुरस्कार स्वरूप मिठाइयाँ व चाकलेट्स  का वितरण किया गया | समारोह को सफल बनाने में विभीषण कुमार, मनीषा कुमारी, माधुरी यादव, आशुतोष कुमार, आदित्य आदि की भूमिका महत्वपूर्ण रही | अंत में वरुण कुमार वर्मा द्वारा धन्यवाद ज्ञापन और अध्यक्ष के निर्देशानुसार कार्यक्रम समाप्ति की घोषणा की गयी |

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और राहुल ने ली मोदी की सही वक्त पर सही चुटकी

वैसे तो कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी प्रारंभ से प्रधानमंत्री मोदी नरेन्द्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी को लेकर आक्रामक रुख अपनाते रहे हैं, लेकिन ज्यादातर मौकों पर उनकी ‘टाइमिंग’ और ‘पंच’ सटीक नहीं रहे। पर इधर कुछ दिनों से उन्होंने जैसी परिपक्वता दिखाई है, वह वाकई काबिले तारीफ है। कहना गलत न होगा कि उन्होंने अब मौके पर चौका लगाना सीख लिया है। अब ताजा उदाहरण ही लीजिए। राहुल ने प्रधानमंत्री मोदी पर चुटकी भरे अंदाज में हमला बोला है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पाकिस्तान के समर्थन में किए गए ट्वीट पर मोदी की चुटकी ली है। चलिए जानते हैं कि मामला क्या है?

दरअसल, पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा एक अमेरिकी परिवार को हक्कानी नेटवर्क के चंगुल से छुड़ाने के बाद ट्रंप ने इस बाबत पाकिस्तान की तारीफ करते हुए ट्वीट किया था। ट्रंप के इस ट्वीट –  Starting to develop a much better relationship with Pakistan and its leaders. I want to thank them for their cooperation on many fronts. – के जवाब में राहुल ने ट्वीट करते हुए लिखा – जल्दी कीजिए मोदीजी, लगता है राष्ट्रपति ट्रंप को एक और झप्पी की जरूरत है (Modiji quick; Modiji, quick; looks like President Trump needs another hug)।

बता दें कि अमेरिका काफी समय से पाकिस्तान को आतंक का समर्थन करने के लिए फटकार लगाता रहा है। अमेरिका और पाकिस्तान के बीच बढ़ते मतभेद को भारत की कूटनीतिक जीत के तौर पर भी देखा जा रहा था। इसी साल जून में पीएम मोदी और ट्रंप की मुलाकात हुई थी, जिसमें उन्होंने भारत को अपना ‘सच्चा साथी’ बताया था। खबरें है कि अब भारत के अधिकारी इस बात का इंतजार कर रहे हैं पाक को लेकर अमेरिका की अगली प्रतिक्रिया क्या होगी? बहरहाल, राहुल ने सही समय पर सही निशाना तो साध लिया ही है।

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“बिहार पर सरस्वती की कृपा है, लक्ष्मी की भी होगी”: मोदी

कभी ‘पूरब का ऑक्सफोर्ड’ कही जाने वाली पटना यूनिवर्सिटी के 100 साल पूरे होने पर बिहार की राजधानी एक यादगार समारोह की साक्षी बनी, जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, राज्यपाल सत्यपाल मलिक, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान, रविशंकर प्रसाद, उपेन्द्र कुशवाहा और अश्विनी चौबे एवं कुलपति रासबिहारी सिंह समेत कई महत्वपूर्ण हस्तियों और वर्तमान व पूर्व शिक्षकों व छात्रों ने शिरकत की।

इस मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री मोदी से पटना यूनिवर्सिटी को केन्द्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा देने की मांग की। इस पर प्रधानमंत्री ने कहा कि पटना यूनिवर्सिटी को एक कदम और आगे ले जाना चाहूंगा। विश्व की टॉप 500 यूनिवर्सिटी में भारत की एक भी यूनिवर्सिटी नहीं है, इसलिए 20 यूनिवर्सिटी (10 सरकारी और 10 प्राइवेट) को 10 हजार करोड़ रुपये देने की योजना है। इसका फैसला प्रदर्शन के आधार पर होगा। उनका इशारा इस यूनिवर्सिटी को इसका पुराना गौरव वापस दिलाते हुए इसे उस प्रतियोगिता के लायक बनाने की ओर था।

इस मौके पर प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले के कई प्रधानमंत्री मेरे लिए अच्छा काम छोड़ गए। ऐसा ही अच्छा काम करने का मौका उन्हें आज मिला। पटना यूनिवर्सिटी ने देश को कई नामचीन चेहरे दिए। अगर आप पीढ़ियों के बारे में बताते हैं तो इंसान को बोइए। मैं मां सरस्वती और लक्ष्मी दोनों को साथ-साथ चला रहा हूं। बिहार के पास सरस्वती की कृपा है। बिहार पर लक्ष्मी की कृपा भी हो सकती है। इसमें केन्द्र पूरी तरह प्रदेश सरकार का सहयोग करेगा। हमें बिहार को 2022 तक समृद्ध राज्य बनाना है। गौरतलब है कि मोदी पटना विश्वविद्यालय आने वाले देश के पहले प्रधानमंत्री हैं।

पटना विश्वविद्यालय के शताब्दी दिवस कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री के आग्रह पर प्रधानमंत्री नवनिर्मित पटना म्यूजियम पहुंचे, जहां उन्होंने म्यूजियम में रखी एक-एक चीज को बड़े चाव से देखा और सबके बारे में जानकारी ली। स्वयं मुख्यमंत्री ‘गाइड’ की भूमिका में रहे। इसके बाद वे मोकामा पहुंचे और बिहार को करीब चार हजार करोड़ रुपये की सौगात दी। यहां उन्होंने राष्ट्रीय हाईवे से जुड़े 3031 करोड़ रुपये के चार प्रोजेक्ट और 738.04 करोड़ रुपये के तीन प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया।

मोकामा में अपने संबोधन के प्रारंभ में स्थानीय भाषा में लोगों का अभिवादन कर प्रधानमंत्री ने सबका दिल जीत लिया। यही नहीं, उन्होंने यहां के पौराणिक-ऐतिहासिक गौरव की चर्चा भी की और राष्ट्रकवि दिनकर को याद करते हुए उनकी कविता का भी पाठ किया। और हां, मोदी ने पटना यूनिवर्सिटी के कार्यक्रम में इस विश्वविद्यालय व बिहार की तो मोकामा में नीतीश कुमार की दिल खोलकर तारीफ की।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप  

 

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मधेपुरा के लोहियावादियों ने मनाई डॉ.लोहिया की 51वीं पुण्यतिथि

मधेपुरा के शिवनन्दन प्रसाद मंडल विधि महाविद्यालय के सभागार में विश्व के महान समाजवादी चिंतक डॉ.राम मनोहर लोहिया की 51वीं पुण्यतिथि जद(यू) के बैनर तले काफी उत्साह व उमंग के साथ मनाई गई | यह आयोजन देर शाम तक जद(यू) जिलाध्यक्ष प्रो.बिजेन्द्र नारायण यादव एवं जिला महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्षा श्रीमती मीना देवी की अध्यक्षता में संयुक्तरुप से गतिमान रहा |

बता दें कि जिले के सभी प्रखंडों से आई महिला सेल के सचिव व अध्यक्ष, विधि महाविद्यालय के कर्मियों सहित प्राचार्य प्रो.सत्यजीत यादव एवं जिले भर से आये लोहियावादियों ने डॉ.लोहिया के विशाल सिद्धांतवादी व्यक्तित्व की जमकर चर्चाएं की और हृदय से श्रद्धांजलि भी अर्पित की |

यह भी जानिए कि इस पुण्यतिथि समारोह के आरंभ में उद्घाटनकर्ता के रूप में पूर्व विधि मंत्री सह वर्तमान जनप्रिय विधायक नरेन्द्र नारायण यादव (आलमनगर), मुख्यवक्ता के रूप में समाजसेवी-शिक्षाविद डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी एवं जिला संगठन प्रभारी अमर कुमार चौधरी उर्फ़ भगवान चौधरी, नेत्री गुड्डी देवी, जिप सदस्या बुलबुल सिंह आदि सहित उपस्थित समस्त नर-नारियों द्वारा डॉ.लोहिया के तैल चित्र पर माल्यार्पण किया गया तथा पुष्पांजलि अर्पित की गई | साथ ही उपस्थित जनों को नीतीश सरकार के “बाल विवाह एवं दहेज” के विरुद्ध शपथ-ग्रहण भी कराया गया |

इस अवसर पर जहाँ उद्घाटनकर्ता नरेन्द्र नारायण यादव ने देर तक उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि डॉ.लोहिया राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी काले-गोरे के बीच की खाई को पाटने के लिए संघर्ष करते रहे वहीं मुख्य वक्ता डॉ.मधेपुरी ने विस्तार से लोहिया के समाजवाद की बारीकियों को मनीषी भूपेन्द्र नारायण मंडल को संदर्भित करते हुए विभिन्न उदाहरणों के साथ सबों को मंत्रमुग्ध कर देर तक बाँधे रखा | जहां संगठन प्रभारी भगवान चौधरी ने डॉ.लोहिया को स्पष्टवादिता, निर्भीकता एवं सीधे-सपाट तर्कपूर्ण विचारों का पुंज कहा वहीं व्यवसायिक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष अशोक चौधरी एवं दलित  प्रकोष्ठ के अध्यक्ष नरेश पासवान ने बखूबी मंच संचालन किया और अंत में अल्पाहार के साथ धन्यवाद ज्ञापन करते हुए डॉ.नीलाकान्त ने समारोह के समाप्त होने की उद्घोषणा की |

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अपने नाम को दें मंगल का मुकाम

इंसानी इच्छा और महत्वाकांक्षा का सचमुच कोई अंत नहीं। इंसान सशरीर भले ही हर जगह न जा पाए, लेकिन उसके मन को कहीं जाने से कोई कैसे रोक सकता है? हममें से हर कोई हर उस जगह पर अपनी या अपने नाम की मौजूदगी चाहता है जहां उसकी कल्पनाशक्ति सुकून पाती हो। यहां तक कि स्कूल-कॉलेज के बेंचो पर, ट्रेन के डिब्बों पर, ऐतिहासिक ईमारतों पर, पुराने पेड़ों पर और यहां तक कि पहाड़ों तक पर हममें से कई अपना नाम किसी नुकीली चीज से खुरचकर या घिसकर लिखने की कोशिश करते हैं। जीवन के एक-एक पल को जीने की ख्वाहिश कुछ ऐसी होती है कि समुद्र के किनारे बैठकर उस रेत तक पर हम अपना लिखते हैं जिसको अगले ही पल लहरों से मिल जाना होता है। जरा सोचिए, हमारी ख्वाहिशों की इस सूची में अगर मंगल ग्रह भी शामिल हो जाए तो क्या हो?

जी हां, चौंकिए नहीं। अगर आप मंगल ग्रह पर अपना नाम भेजने की ख्वाहिश रखते हैं तो आपके पास एक शानदार मौका है। यह जिम्मा अंतरिक्ष की दुनिया में अपनी पहचान और धाक रखने वाले नासा ने लिया है। दरअसल, नासा अगले साल लाल ग्रह पर पर इनसाइट लैंडर स्पेसक्राफ्ट को लॉन्च करने जा रहा है। यह स्पेसक्राफ्ट कुछ ऐसी चीजों का पता लगाने के लिए भेजा जा रहा है, जिनसे हम अब तक अनजान हैं। आप चाहें तो इसी स्पेसक्राफ्ट के जरिए अपने नाम को मंगल तक पहुंचा सकते हैं। इसके लिए बस आपको रजिस्ट्रेशन कराना होगा।

वैसे यह कोई पहली बार नहीं है जब नासा की ओर से मंगल पर नाम भेजने का मौका उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे पूर्व साल 2015 में भी ऐसा हो चुका है। तब स्पेस एजेंसी ने एक सिलिकन चिप पर अपना नाम लिखने के लिए दुनिया भर से लोगों को आमंत्रित किया था। इन सभी नामों को इनसाइट मार्स लैंडर स्पेसक्राफ्ट के साथ जोडा जाएगा।

आपको जानकर हैरत होगी कि 8,27,000 लाख लोग पहले ही अपना नाम लिखने की अर्जी दे चुके हैं। नासा अब दूसरी माइक्रोचिप जोड़ने जा रहा है, जिसके जरिए अपने नाम मंगल पर भेजने का एक और मौका हर आम और खास को दिया जा रहा है।

बता दें कि नासा की तरफ से इनसाइट लैंडर को अगले साल मई में लॉन्च किया जाएगा। इसी के साथ एक सिलिकॉन चिप पर हजारों लोगों के नाम लिखकर भेजे जाएंगे। पहली चिप भर चुकी है, जबकि दूसरी चिप के लिए नासा ने नाम लिखने के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू कर दिए गए हैं। अगर आप भी अपने नाम को मंगल का मुकाम देना चाहते हैं, तो 1 नवंबर से पहले आप भी इसमें रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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