अमेरिका में दिख रहे नए और परिपक्व राहुल

चाहे राजनीतिक दलों के रणनीतिकार हों, डिप्लौमैट हों या पॉलिसी मेकर्स – अपनी अमेरिका यात्रा से राहुल गांधी ने सबका ध्यान खींचा है। कांग्रेस उपाध्यक्ष को हल्के में लेने वाले भी अब उन्हें गंभीरता से लेने को बाध्य दिखने लगे हैं। अपने ऊपर बने चुटकुलों में अक्सर ‘पप्पू’ कहे जाने वाले इस शख्स से देश की सत्ता पर निहायत मजबूती से काबिज भारतीय जनता पार्टी भी इधर परेशान दिख रही है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि जब आप अपनी कमियां भी बेबाकी से स्वीकार कर रहे हों तब सामने वाले के लिए कही गई बात को भी नज़रअंदाज करना मुश्किल होता है। भाजपा को ठीक यही बात परेशान कर रही है क्योंकि राहुल ने कांग्रेस की कमियों की बात करते हुए भाजपा की दुखती रगों पर भी ऊंगली रखी है, और खास बात यह कि बड़ी संजीदगी से रखी है।

अमेरिका के प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में छात्रों के साथ संवाद करते हुए राहुल ने कहा कि केन्द्र की सरकार नौकरियां पैदा नहीं कर पा रही हैं, लिहाजा धीरे-धीरे लोगों के बीच सरकार के खिलाफ गुस्सा पैदा हो रहा है। उन्होंने कहा कि हर दिन रोजगार बाजार में 30,000 नए युवा शामिल हो रहे हैं और इसके बावजूद सरकार प्रतिदिन केवल 500 नौकरियां पैदा कर रही है। वर्तमान सरकार की आलोचना करते हुए राहुल ने पूर्व की कांग्रेस सरकार को भी कटघरे में खड़ा किया और कहा, सच कहा जाए तो कांग्रेस पार्टी भी इस मोर्चे पर फेल रही थी, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी भी यहां फेल हो रहे हैं। यह एक ऐसी समस्या है जिसकी जड़ें गहरी हैं। इसके समाधान के लिए पहले हमें स्वीकार करना होगा कि यह एक समस्या है लेकिन इस समय कोई यह स्वीकार ही नहीं कर रहा।

राहुल के मुताबिक मोदी के उभार और ट्रंप के सत्ता में आने की वजह भारत और अमेरिका में रोजगार का प्रश्न होना है। उन्होंने कहा, हमारी बड़ी आबादी के पास कोई नौकरी नहीं है, वे अपना भविष्य नहीं देख सकते और इसलिए परेशान हैं। इन्हीं लोगों ने इस तरह के नेताओं का समर्थन किया। उन्होंने आगे कहा, मैं ट्रंप को नहीं जानता, मैं उस बारे में ज्यादा बात नहीं करुंगा। लेकिन, निश्चित ही हमारे प्रधानमंत्री रोजगार सृजन के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रहे हैं। ऐसे में वही लोग जो एक दिन में 30,000 नौकरियां पैदा नहीं कर पाने से हमसे नाराज थे, वे मोदी से भी नाराज होंगे।

मोदी सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ प्रोग्राम पर बात करते हुए राहुल गाधी ने कहा कि उनकी तमन्ना थी कि ऐसे प्रोग्राम को कांग्रेस अपने कार्यकाल में लॉन्च की होती। हालांकि राहुल इसमें थोड़े बदलाव के हिमायती हैं। उन्होंने कहा, मुझे मेक इन इंडिया का कॉन्सेप्ट पसंद है, लेकिन ये प्रोग्राम जिन लक्ष्यों को लेकर चलना चाहिए उसे लेकर नहीं चल रहा है। अगर कांग्रेस इस प्रोग्राम को लागू करती तो उनका फोकस कुछ अलग होता। बकौल राहुल, प्रधानमंत्री मोदी इस प्रोग्राम के तहत बड़े कारखाने और फैक्ट्रियों को टारगेट कर रहे हैं, जबकि हमारा फोकस मध्यम और छोटे उद्योगों पर होना चाहिए। ये वो क्षेत्र हैं, जहां से नौकरियां आने वाली हैं।

राहुल ने छात्रों से बात करते हुए स्वीकार किया कि मोदी उनसे ‘बहुत अच्छे’ वक्ता हैं और वे समझते हैं कि एक भीड़ में अलग-अलग लोगों के समूहों से कैसे संवाद स्थापित करना है। छात्रों से उनके संवाद की बड़ी बात यह रही कि उन्होंने छात्रों के किसी प्रश्न का ‘टालू’ और ‘चालू’ जवाब नहीं दिया। अपने दो सप्ताह के अमेरिका प्रवास पर वो जहां भी जा रहे हैं, इसी तरह खुलकर और बेबाकी से बात कर रहे हैं और उनकी तटस्थता लोगों को भा रही है। कुल मिलाकर यह कि आगे की लड़ाई के लिए राहुल अमेरिका से तैयार होकर लौट रहे हैं, ऐसी उम्मीद की जानी चाहिए।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप   

सम्बंधित खबरें


आज के स्पेलिंग बी. के बच्चे ही कल विश्वविद्यालय के विद्यार्थी बनेंगे………..!

मधेपुरा में विगत कई वर्षों से अंग्रेजी एवं हिन्दी में स्पेलिंग बी चैंपियनशिप प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता रहा है और जिले के सभी सरकारी व प्राइवेट स्कूली छात्र-छात्राओं सहित शिक्षकों एवं अभिभावकों का भरपूर सहयोग मिलता रहा है | आयोजन समिति को संरक्षक सह पूर्व परीक्षा नियंत्रक व प्रखर समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी सहित प्राचार्य द्वय डॉ.विश्वनाथ विवेका एवं डॉ.के.पी. यादव का संपूर्ण सहयोग मिलता रहा है |

बता दें कि गिरिजा कपिलदेव इंटर कॉलेज में आयोजित पुरस्कार सम्मान समारोह में सचिव सावंत कुमार रवि ने सर्वप्रथम प्रतियोगिता से संबंधित जानकारी देते हुए अतिथियों का स्वागत किया |

The Patron of Spelling Bee Championship Dr.Bhupendra Madhepuri along with Pro.VC Farookh Ali , DSW Dr.AK Mishra , PRO Dr.Sudhanshu Shekhar , Pr.Sanjeeta Yadav , Er.BK Munna and others conferring the Paramount Honour to Sana Yadav.
The Patron of Spelling Bee Championship Dr.Bhupendra Madhepuri along with Pro.VC Farookh Ali , DSW Dr.AK Mishra , PRO Dr.Sudhanshu Shekhar , Pr.Sangeeta Yadav , Er.BK Munna and others conferring the Paramount Honour to Sana Yadav.

इस अवसर पर भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ.फारुख अली ने अपने संबोधन में यही कहा कि बच्चे शिक्षा की बुनियाद हैं और मजबूत बुनियाद पर उच्च शिक्षा की भव्य इमारत खड़ी की जा सकती है | उन्होंने अपने अनुभवों को विस्तार से बताते हुए कहा कि बचपन अनमोल है, वह लौटकर आता नहीं………अतः बचपन का सदुपयोग करें……. सतत प्रयास करते रहें…….. तो सफलता मिलेगी ही मिलेगी |

संरक्षक एवं समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने कहा कि बच्चे ही नहीं शिक्षक भी डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम को अपना आदर्श बनाएं……. तभी शिक्षकों का सम्मान बढ़ेगा और शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलेगी | डॉ.मधेपुरी ने स्पेलिंग बी चैंपियनशिप के सफल छात्रों को जीवन में उत्तरोत्तर आगे बढ़ने के टिप्स देते हुए अंत में यही कहा- सूरज की तरह चमकने के लिए सूरज की तरह जलना पड़ता है……|

मौके पर मंडल विश्वविद्यालय के डीएसडब्ल्यू डॉ.अनिल कान्त मिश्र, पीआरओ डॉ.सुधांशु शेखर, प्रो.रीता कुमारी, ई.बलवंत कुमार मुन्ना, प्राचार्या संगीता यादव आदि सहित संरक्षक डॉ.मधेपुरी व प्रतिकुलपति डॉ.फारुख अली द्वारा मोमेंटो-सर्टिफिकेट देकर सफल प्रतिभागियों- खुशी गुप्ता, अन्नू प्रिया, हर्षराज, अनिषा, सिद्धांत, जिंदगी, अमृत, आस्था, अंजलि, आदित्य आदि सैकड़ों छात्र-छात्राओं एवं बेहतरीन शिक्षकों तथा मीडियाजनों को भी सम्मानित किया गया |

अंत में स्पेलिंग बी का सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार छात्रा सना यादव को देते हुए उद्घाटनकर्ता एवं संरक्षक द्वारा स्पेलिंग चैंपियन 2 प्रतिभागियों को उत्साहवर्धन स्वरुप नगद राशि भी दी गई | सोनी राज, अमित अंशु ने धन्यवाद ज्ञापित किया |

सम्बंधित खबरें


खलता है तस्लीमुद्दीन का इस तरह चला जाना

अपने कद्दावर व्यक्तित्व, निर्भीक अंदाज और बेबाक बयानों से बिहार, खासकर सीमांचल की राजनीति को लगभग पांच दशकों तक प्रभावित करने वाले मोहम्मद तस्लीमुद्दीन नहीं रहे। रविवार को चेन्नई के अपोलो अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। आरजेडी के वरिष्ठ नेता तस्लीमुद्दीन का विवादों से भले ही चोली-दामन का रिश्ता रहा हो, बिहार में अल्पसंख्यकों के वे बड़ा चेहरा थे, इसमें कोई दो राय नहीं। जब तक आम जनता में पैठ न हो तब तक छह बार विधायक और पांच बार सांसद होना मुमकिन नहीं। तस्लीमुद्दीन अभी भी अररिया से सांसद थे। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव, लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान समेत सभी दलों के नेताओं ने उनके निधन पर शोक जताया है।

मधेपुरा के पूर्व सांसद एवं दो बार राज्यसभा के सदस्य रहे डॉ. आरके यादव रवि ने उन्हें भावुक होकर याद किया और कहा कि तस्लीमुद्दीन के रूप में मैंने अपना एक प्रिय मित्र खो दिया। सीमांचल के इस लोकप्रिय व जूझारू चेहरे के यूं अचानक चले जाने से बिहार की राजनीति में एक शून्यता-सी आ गई है। डॉ. रवि ने 1981 से लेकर 1989 तक बिहार विधानसभा के सदस्य के रूप में और 1989 के बाद लोकसभा व राज्यसभा के सदस्य के रूप में तस्लीमुद्दीन के साथ बिताए पलों को याद करते हुए ‘मधेपुरा अबतक’ के माध्यम से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

बता दें कि तस्लीमुद्दीन सरकारी आश्वासन समिति के टूर पर चेन्नई गए थे, जहां उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें सांस लेने में तकलीफ और खांसी में खून आने की शिकायत थी। उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया और बचाने की हर संभव कोशिश की गई, पर उनकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई और रविवार दोपहर बाद उनका निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार मंगलवार को दो बजे दिन में अररिया के जोकीहाट में राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।

4 जनवरी 1943 को जन्मे तस्लीमुद्दीन छात्रजीवन में ही राजनीति में आ गए थे। 1969 में वे पहली बार जोकीहाट से कांग्रेस के विधायक बने। 1972 में उन्होंने यह सीट निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर और 1977 में जनता पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर जीती। 1980 और 1985 में वे अररिया से विधायक चुने गए। 1995 में फिर से वे जोकीहाट से विधायक बने। लेकिन इस बीच 1989 में वे जनता दल उम्मीदवार के तौर पर पूर्णिया से सांसद भी रहे। 1996 में वे किशनगंज से सांसद चुने गए और देवगौड़ा सरकार में गृह राज्यमंत्री रहे। 1998 में यहां से उन्होंने फिर जीत दर्ज की पर 1999 में शाहनवाज हुसैन के हाथों यह सीट उन्हें गंवानी पड़ी। लेकिन 2004 में उन्होंने एक बार फिर यह सीट जीत ली। इसके बाद 2014 में वे अररिया से सांसद चुने गए। गौरतलब है कि केन्द्र में मंत्री रहने के अलावा तस्लीमुद्दीन बिहार सरकार में भी कई विभागों के मंत्री रहे थे। अपने जीवन का अधिकांश सार्वजनिक जीवन को देने वाले और कभी हार न मानने वाले तस्लीमुद्दीन का जिन्दगी की जंग इस तरह हार कर चला जाना सचमुच खलता है।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

सम्बंधित खबरें


क्या आपने प्रधानमंत्री मोदी को जन्मदिन की शुभकामना दी ?

आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का 67वां जन्मदिन है। अगर आप उनके आलोचक हैं तब भी इतना तो जरूर मानेंगे कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के इस प्रधानमंत्री ने बहुत कम समय में अपनी वैश्विक पहचान बनाई है और उनकी लोकप्रियता देश और दल की सीमा को लांघ चुकी है। बात जहां तक भारतीय जनता पार्टी की है, तो उसके लिए ये दिन किसी उत्सव से कम नहीं। लेकिन प्रधानमंत्री किसी दल का नहीं, पूरे देश का होता है और लीक से अलग हटकर काम करने की धुन में लगे इस शख्स पर 125 करोड़ भारतवासियों की अपेक्षाओं का भार है, इसलिए उन्हें हम सबकी ओर से जन्मदिवस की शुभकामना तो जरूर मिलनी चाहिए।

बहरहाल, फेसबुक और ट्विटर पर उनके लिए बधाईयों का अंबार लगा है। देश-विदेश की तमाम बड़ी हस्तियां उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दे रही हैं। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ट्वीट कर उन्हें जन्मदिन की बधाई देते हुए उनके स्वस्थ जीवन और दीर्घ आयु की कामना की। केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि मां भारती की सेवा के लिए प्रभु आपको निरोग और दीर्घायु प्रदान करें। वहीं बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने उन्हें ‘नये भारत का विश्वकर्मा’ कहते हुए अपनी शुभकामनाएं दीं।

प्रधानमंत्री के जन्मदिन को भाजपा के नेतृत्व वाली सरकारें सेवा दिवस के तौर पर मना रही हैं और श्रमदान के साथ-साथ शौचालय निर्माण व स्वच्छता अभियान चलाए जा रहे हैं। बिहार में भी भाजपा कार्यकर्ता स्वच्छता अभियान चला रहे हैं। कार्यकर्ताओं के साथ सड़क पर झाड़ू लगाने उतरे अश्विनी कुमार चौबे , जिन्हें हाल ही में मोदी कैबिनेट में जगह मिली है, ने कहा कि महात्मा गांधी के बाद नरेन्द्र मोदी पहले ऐसे शख्स हैं जिन्होंने स्वच्छता के प्रति जन-जन को जागरुक करने का काम किया है।

बता दें कि अपने जन्मदिन पर अपने गृहराज्य पहुंच कर प्रधानमंत्री मोदी ने जहां अपनी मां का आशीर्वाद लिया, वहीं देश को एक बड़ा तोहफा भी दिया। आज उन्होंने नर्मदा नदी पर बना सरदार सरोवर बांध देश को समर्पित किया। यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा और भारत का सबसे बड़ा व ऊंचा बांध है, जिससे गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान को लाभ होगा। गौरतलब है कि 65 हजार करोड़ रुपये की लागत से बने इस बांध को बनने में 56 साल लगे हैं। 5 अप्रैल 1961 को तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने इसका शिलान्यास किया था।

चलते-चलते

हमें नहीं भूलना चाहिए कि आज ही के दिन मधेपुरा को अपनी सेवा और संस्कार से सींचने वाले डॉ. (मेजर) उपेन्द्र नारायण मंडल की 92वीं जयंती भी है। पेशे से चिकित्सक, व्यक्तित्व से मेजर, व्यवहार से समाजसेवी और संस्कार से संत ‘मेजर साहब’ को मधेपुरा अबतक का शत्-शत् नमन!!

और अंत में आप सभी को विश्वकर्मा पूजा की ढेरों शुभकामनाएं!!!

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप           

सम्बंधित खबरें


बगैर दृढ़ संकल्प के हिन्दी राष्ट्रभाषा नहीं बन पायेगी………!

मधेपुरा में 14 सितम्बर का दिन हिन्दी को समर्पित रहा | जहाँ एक ओर जिला मुख्यालय के समाहरणालय सभागार में डीएम मो.सोहैल (IAS) की अध्यक्षता में और बीएन मंडल विश्वविद्यालय के नये परिसर में कुलपति डॉ.अवध किशोर राय की अध्यक्षता में राष्ट्रीय हिन्दी दिवस मनाया गया वहीं दूसरी ओर भारतीय जन लेखक संघ के डॉ.मधेपुरी मार्ग स्थित केन्द्रीय कार्यालय में डॉ.अरुण कुमार साह की अध्यक्षता में हिन्दी दिवस के अवसर पर हिन्दी के उन्नयन के साथ-साथ पत्रकारिता जगत की गौरी लंकेश को श्रद्धांजलि भी अर्पित की गयी | इसके अलावे नेहरु युवा केन्द्र के साथ-साथ सदर बीआरसी में बीईओ जनार्दन प्रसाद निराला की अध्यक्षता में बच्चों ने भाषण प्रतियोगिता में भाग लेकर हिन्दी दिवस के महत्व पर जमकर प्रकाश डाला |

समाहरणालय सभागार में एसपी, सीएस, एडीएम एवं अन्य अधिकारियों, कर्मचारियों एवं गणमान्य जनसेवियों डॉ.भूपेंन्द्र मधेपुरी व प्रो.श्यामल किशोर यादव आदि को संबोधित करते हुए डीएम मो.सोहैल ने कहा-

“हिन्दी गंगा जैसी नदी है जिसमें हर नदी का जल समाहित है और गंगा हर नदी से जुड़ी भी है……. ठीक उसी प्रकार सभी भाषा में हिन्दी समाहित है…….. यदि हिन्दी नहीं होती तो भारत एक नहीं होता…..|”

इस अवसर पर एसपी विकास कुमार ने कहा कि पुलिस कार्यालयों में केस डायरी से लेकर न्यायालय से पत्राचार आदि सभी कार्यों में प्राय: हिन्दी के प्रयोग को प्राथमिकता दी जाती है | डॉ.गदाधर पाण्डेय सीएस एवं प्रो.श्यामल किशोर यादव ने भी हिन्दी के उन्नयन हेतु उद्गार व्यक्त किया |

इसी क्रम में समाजसेवी साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने विस्तार से कमाल पाशा तुर्क से लेकर डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम की चर्चाएं करते हुए कहा कि इन लोगों ने अपनी संकल्प शक्तियों का ऐसा मिसाल दुनिया को दिया जिस रास्ते पर यदि हम भारतवासी चलें तो हिन्दी को राजभाषा से राष्ट्रभाषा का गौरव पाने में अधिक देर नहीं लगेगी बशर्ते कि हम भारतीयों को अंग्रेजी के प्रति बढ़ रहे मोह को भंग करना होगा |

और अंत में डॉ.मधेपुरी ने समाजवादी मनीषी भूपेन्द्र नारायण मंडल द्वारा साठ के दशक में भारतीय संसद में हिन्दी के लिए जो कुछ कहा गया था उसे संदेश के रूप में सुनाया-

“…………. अध्यक्ष महोदय ! मैं हिन्दी के लिए पागल नहीं हूँ, परन्तु भारत में अंग्रेजी को बनाये रखने की कोशिश भारतीय जनक्रान्ति के साथ विश्वासघात है |”

 

सम्बंधित खबरें


बिहार था हिन्दी को आधिकारिक भाषा चुनने वाला पहला राज्य

हिन्दी हमारी राष्ट्रभाषा है, हिन्दी हमारी राजभाषा है, हिन्दी में हिन्दुस्तान की आत्मा बसती है, हिन्दी ही पहचान है हमारी और फिर भी विडंबना देखिए कि कुछ संस्थाओं द्वारा रस्मअदायगी करने और कुछ सरकारी आयोजनों के अलावा हिन्दी दिवस पर उतनी भी चहल-पहल और रौनक नहीं जितनी ‘वेलेंटाइन डे’ तक पर देखने को मिल जाती है। आखिर हम जा कहां रहे हैं? क्या पश्चिम से आयातित तौर-तरीकों में अपनी शान समझने वाले हम भारतवासी (माफ कीजिए, ‘इंडियन’) बहुत तेजी से सांस्कृतिक गुलामी की तरफ नहीं बढ़ रहे? और क्या ये गुलामी सदियों की उस गुलामी से अधिक भयावह नहीं जिससे हम 15 अगस्त 1947 को मुक्त हुए थे?

जरा सोचकर देखिए, आज 14 सितंबर यानि हिन्दी दिवस है, क्या आप बता सकते हैं कि आज हम हिन्दी दिवस क्यों मनाते हैं? और अगर आप जानते हैं तो क्या विश्वास के साथ यह कह पाने की स्थिति में हैं कि आपने अपने बच्चों को भी इस दिन और इसके महत्व से अवगत कराया है? अगर पहले सवाल का जवाब आप ‘हां’ में दे भी दें तो दूसरे सवाल का जवाब (जैसा कि स्कूलों के सर्वे से पता चलता है) सौ में सत्तर फीसदी लोगों का ‘ना’ में होगा।

बहरहाल, 14 सितंबर के ही दिन 1949 में हिन्दी को राजभाषा का दर्जा मिला था। संविधान के अनुच्छेद 343 में यह प्रावधान किया गया है कि देवनागरी लिपि के साथ हिन्दी भारत की राजभाषा होगी। हिन्दी को लेकर एक गौरवशाली तथ्य बिहार से जुड़ा है। जी हां, बिहारवासियों को इस बात का गर्व होना चाहिए कि 1881 में बिहार ही वो पहला राज्य था, जिसने हिन्दी को आधिकारिक भाषा के रूप में चुना था।

आज की पीढ़ी को ये जरूर जानना चाहिए कि ‘हिन्दी’ शब्द फारसी शब्द ‘हिन्द’ से बना है, जिसका अर्थ ‘सिंधु नदी की भूमि’ है। 11वीं सदी में जब तुर्कों ने पंजाब और गंगा के मैदानों पर हमला किया, तब हिन्द शब्द का इस्तेमाल यहां रहने वाले लोगों के लिए किया गया था। हमें यह भी पता होना चाहिए कि दुनिया भर में 64 करोड़ लोगों की मातृभाषा हिन्दी है। 2015 के आंकड़ो के मुताबिक हिन्दी दुनिया में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा बन चुकी है। यही नहीं, एक चौंकाने वाला तथ्य यह भी है कि जहां 70 प्रतिशत चीनी ही मंदारिन बोलते हैं, वहां भारत के 77 प्रतिशत लोग हिन्दी बोलते हैं।

इंटरनेट की दीवाने युवाओं को यह जानकर खुशी होगी कि दुनिया में हर पांच में से एक व्यक्ति हिन्दी में इंटरनेट का उपयोग करता है। यही नहीं, हिन्दी भारत की उन सात भाषाओं में एक है, जिसका इस्तेमाल वेब एड्रेस बनाने में भी किया जाता है। हिन्दी की एक और खूबी जिससे आपको वाकिफ होना चाहिए, वो यह कि सीखने के लिहाज से यह विश्व की अन्य भाषाओं की तुलना में अधिक आसान है। इसमें शब्दों का वही उच्चारण होता है, जो लिखा जाता है।

चलते-चलते यह भी जानें कि विश्व हिन्दी दिवस 10 जनवरी को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत महाराष्ट्र के नागपुर से 1975 में हुई थी और 2006 में इस दिन को आधिकारिक दर्जा के साथ वैश्विक पहचान मिली।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप  

 

 

सम्बंधित खबरें


सुनिए, चोट खाए शरद ने क्या कहा ?

अब जबकि चुनाव आयोग ने साफ कर दिया कि नीतीश कुमार के नेतृत्व वाला दल ही असली जेडीयू है और उनकी राज्यसभा सदस्यता जाने में औपचारिकता भर शेष है, फिर भी शरद यादव यह मानने को तैयार नहीं कि पार्टी के भीतर की लड़ाई वे हार चुके हैं। हां, उन्होंने इतना जरूर कहा कि हम पहाड़ से लड़ रहे हैं तो यह सोच कर ही लड़ रहे हैं कि चोट लगेगी ही।

दरअसल, जेडीयू के पूर्व अध्यक्ष पार्टी और राज्यसभा की सदस्यता पर मंडराते संकट पर अपना पक्ष रख रहे थे। कल चुनाव आयोग द्वारा पार्टी पर शरद गुट के दावे पर संज्ञान नहीं लेने और राज्यसभा का नोटिस मिलने के बाद अपना पक्ष रखते हुए उन्होंने कहा कि इन पहलुओं को उनके वकील देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे देश की साझी विरासत पर आधारित संविधान की लड़ाई बचाने की बड़ी लड़ाई के लिए निकल पड़े हैं। बकौल शरद राज्यसभा की सदस्यता बचाना छोटी बात है, उनकी लड़ाई साझी विरासत बचाने की है। सिद्धांत के लिए वे पहले भी संसद की सदस्यता से दो बार इस्तीफा दे चुके हैं।

भविष्य की रणनीति के बारे में शरद ने कहा कि 17 सितंबर को पार्टी कार्यकारिणी और 8 अक्टूबर को राष्ट्रीय परिषद की बैठक के बाद जेडीयू बड़े रूप में सामने आएगी। हालांकि कैसे आएगी, इस पर फिलहाल वे कुछ बताने की स्थिति में नहीं। आगे नीतीश पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि हमारे मुख्यमंत्री मित्र ने खुद राजद प्रमुख लालू प्रसाद से जब महागठबंधन बनाने की पहल की थी, तब भी वह भ्रष्टाचार के आरोपों से बाहर नहीं थे। जबकि महागठबंधन की सरकार बनने के बाद अचानक शुचिता के नाम पर गठजोड़ तोड़ दिया। यह बिहार के 11 करोड़ मतदाताओं के साथ धोखा है। हमने सिद्धांत के आधार पर ही इसका विरोध किया।

समाजवाद के इस पुराने नेता ने आगे की लड़ाई साझी विरासत के मंच से लड़ने की बात कही। वे लड़ेंगे भी, क्योंकि वे शुरू से धूल झाड़कर फिर से खड़े होने वालों में रहे हैं। लेकिन क्या तमाम आरोपों और मुकदमों से घिरे लालू और उनके परिवार की ‘बैसाखी’ से उनके ‘सिद्धांत’ को कोई गुरेज नहीं है? क्या वे प्रकारान्तर से यह कहना चाहते हैं कि लालू पुत्रों का ‘मॉल’ और मीसा का ‘फॉर्म हाउस’ गरीबों को ‘सामाजिक न्याय’ दिलाने के लिए है? या फिर यह मान लिया जाए कि भारतीय राजनीति में अब भ्रष्टाचार कोई मुद्दा ही नहीं?

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

सम्बंधित खबरें


जेडीयू पर शरद का दावा खारिज, अब राज्यसभा की बारी

चुनाव आयोग ने जेडीयू विवाद पर अपना निर्णय दे दिया। आयोग ने बिना किसी द्वंद्व के बड़े स्पष्ट शब्दों में पार्टी और उसके सिंबल पर शरद यादव की दावेदारी को खारिज कर दिया। इसके साथ ही ‘असली-नकली’ की जबरदस्ती लड़ी जा रही लड़ाई खत्म हुई और पार्टी विधिवत नीतीश कुमार की हो गई। हालांकि, शरद खेमे के अली अनवर ने आयोग के फैसले पर असंतोष जताते हुए कानूनी राय लेने और जरूरत पड़ने पर कोर्ट जाने की बात कही, लेकिन वे इस बात से अच्छी तरह वाकिफ होंगे की आगे की लड़ाई कितनी मुश्किल हो गई है।

गौरतलब है कि शरद खेमे ने बीते 25 अगस्त को पार्टी सिंबल पर अपना अधिकार जताया था, लेकिन शरद यादव अपने दावे के पक्ष में अपेक्षित कागजात जमा करने में विफल रहे। जबकि दूसरी ओर शुक्रवार को सांसद आरसीपी सिंह के नेतृत्व में चुनाव आयोग से मिलने गया जेडीयू का प्रतिनिधिमंडल सांसदों, विधायकों और 145 राष्ट्रीय परिषद सदस्यों के समर्थन की सूची से लैस था। ऐसे में आयोग को एक आसान फैसला लेना था, जो उसने ले लिया।

चुनाव आयोग ने स्पष्ट तौर पर कहा कि शरद खेमे के दावे के साथ पर्याप्त समर्थन का दस्तावेज नहीं है। ऐसे में इस आवेदन पर कोई विचार ही नहीं किया जा सकता है। जबकि दूसरी ओर नीतीश खेमे के पास पर्याप्त से भी अधिक समर्थन है। हालांकि शरद यादव के पास फिर से आवेदन देने का अधिकार है, लेकिन यह जानते हुए कि जरूरी समर्थन और उसके लिए हस्ताक्षर जुटाना लगभग नामुमकिन है, शायद वो अपनी और किरकिरी न कराना चाहें।

उधर आयोग के इस फैसले के बाद जेडीयू महासचिव संजय झा ने कहा कि अब आयोग के फैसले की यह प्रति राज्यसभा में दी जाएगी ताकि इस आलोक में शरद यादव और अली अनवर की राज्यसभा सदस्यता को लेकर भी आसानी से फैसला लिया जा सके। बता दें कि पार्टी लाईन से अलग चल रहे शरद यादव की राज्यसभा सदस्यता समाप्त करने के लिए भी जेडीयू ने राज्यसभा के सभापति से आग्रह किया है और इसके बाद राज्यसभा सचिवालय ने नोटिस भेजकर शरद से स्पष्टीकरण भी मांगा है। हालांकि चुनाव आयोग के फैसले के बाद अब राज्यसभा के सभापति को निर्णय लेने में कोई दुविधा होगी, इसका कोई आधार नहीं दिखता।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप  

सम्बंधित खबरें


क्या सभी डीएम के लिए ऐसा ही होता है- रविवार ?

मधेपुरा के डायनेमिक डीएम मो.सोहैल (IAS) जहाँ एक ओर स्वतंत्रता सेनानियों एवं उनके परिजनों के लिए सर्वाधिक संवेदनशील रहे हैं और हाल ही में कई प्रखंडों के बाढ़ पीड़ितों के लिए 24 घंटे में कोलकाता से प्लेन द्वारा प्लास्टिक व त्रिपाल आदि मंगाकर टेंट के अंदर ही माताओं एवं बहनों के लिए चुड़ी-सिन्दुर से लेकर टी.वी. तक की व्यवस्था करने में रात-रात भर जगे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जिले को अपना घर और जिलेवासियों को पारिवारिक सदस्य माननेवाले डीएम मो.सोहैल द्वारा यदि अकारण सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वालों के लिए नारियल की तरह कठोर बनकर जिले के अन्दर शांतिपूर्ण ढंग से चल रही सामाजिक सौहार्द की गाड़ी को बेपटरी होने से बचाने में 2-4 निर्दोष फूलों की पंखुड़ियाँ झड़ भी गई हों तो उसे अभिभावकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों एवं बुद्धिजीवियों व व्यापारी भाइयों द्वारा उसी तरह स्वीकारना लाजमी होगा-

जैसे नदी में स्नान करने के बाद किसी वृक्ष से सटकर सोये हुए व्यक्ति की पीठ पर चढ़ रही पंक्तिबद्ध चीटियों की अगली चीटीं गर्दन के पास पहुँचकर, ऊपर जाने का सुगम रास्ता नहीं मिलने पर, अकारण काट लेती है और वह व्यक्ति जगते ही तुरंत पीठ पर उल्टे हाथ चलाकर दर्जनों निर्दोष चीटियों को मौत के घाट उतार देता है………..| सोचिये तो सही ! काटने वाली चींटी तो बच जाती है, सुरक्षित रहकर घने बालों में छिप जाती है…….. सभी निर्दोष चीटियाँ ही मारी चली जाती हैं |

ऐसे ही संकट कालीन स्थिति में कुछ दिन कबल बिहारीगंज और फिलहाल मुरलीगंज में सामाजिक सौहार्द कायम रखने के लिए डीएम मो.सोहैल एवं एसपी बिकास कुमार की पूरी टीम द्वारा उठाये गये कदम को सराहनीय कहकर सबों को स्वीकारना चाहिए……..| भला क्यों नहीं, सामाजिक शांति एवं सौहार्द को बिगाड़नेवाले दिशाहीन विस्फोट को रोकने में डीएम मो.सोहैल ने अपनी टीम को दिन-रात सोने नहीं दिया…….. सभी जूझते रहे…..  वरना जानवरों के……. जगह आज लोगों की………  होती |

बाप-बेटे और गदहे की कहानी तो हम सभी जानते ही हैं | किसी भी स्थिति में लोगों ने उनके कृत्यों को सही नहीं कहा……. और सही होता क्या है ? यह भी कोई नहीं बताया……… !

सही में डीएम मो.सोहैल है क्या चीज……….. यह तो जानने की कोशिश करें हम ! आना-जाना तो हर किसी का लगा ही रहता है……..!

सोचिए ! मुरलीगंज की स्थिति ज्यों ही ठीक होती नजर आई कि 10 सितम्बर (रविवार) को ही दिनभर केन्द्रीय विद्यालय, मोटर व्हीकल ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट, जवाहर नवोदय विद्यालय हेतु स्टेडियम और जिले के किसानों के लिए कोल्ड स्टोरेज के वास्ते जमीन की तलाश में डीसीएलआर रविशंकर शर्मा, अंचलाधिकारी नवीन भूषण एवं शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों के साथ केशव कन्या उच्च विद्यालय और कन्या मध्य विद्यालय की चक्कर लगाते रहे डीएम मो.सोहैल | उन्होंने तय किया कि अस्थायी रुप से केन्द्रीय विद्यालय का शुभारंभ केशव कन्या उच्च विद्यालय में तथा स्थायीरूप से कन्या मध्य विद्यालय परिसर की भूमि को चयनित किया गया |

Dynamic DM Md.Sohail (IAS) discussing with Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri regarding land for Navoday Stadium , Vivah Bhawan , Yoga Bhawan & Cold Storage for farmers in presence of L.R.D.C. Ravi Shankar Sharma and others at Ram Janki Thakurbari Campus Sukhasan , Madhepura.
Dynamic DM Md.Sohail (IAS) discussing with Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri regarding land for Navoday Stadium , Vivah Bhawan , Yoga Bhawan & Cold Storage for the farmers in presence of L.R.D.C. Ravi Shankar Sharma and others at Ram Janki Thakurbadi Campus Sukhasan , Madhepura.

मधेपुरा के बाद उमस भरी गर्मी में काफिले के साथ निकल पड़े डीएम मो.सोहैल और पहुंच गये जवाहर नवोदय विद्यालय सुखासन जहाँ के राम जानकी ठाकुरबाड़ी में, पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, उन्हें मिल गये समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी | प्रखर स्वतंत्रता सेनानी एवं नवोदय विद्यालय के भूमि दाता कमलेश्वरी प्रसाद मंडल के पौत्र पूर्व मुखिया जनार्दन प्रसाद यादव, उपेन्द्र प्रसाद यादव व अन्य गणमान्य भी मौजूद थे | डीएम ने विवाह भवन, योग भवन, नवोदय छात्रों के लिए स्टेडियम…….. आदि निर्माण हेतु जमीन की चर्चा करने के दरमियान बताया कि मोटर व्हीकल ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट हेतु गम्हरिया प्रखंड में जमीन मिली है |

डॉ.मधेपुरी ने कहा कि- “डायनेमिक डीएम मो.सोहैल ने ‘आराम हराम है’ के तर्ज पर भीषण उमस भरी गर्मी की परवाह किये बगैर 10:00 बजे पूर्वाहन से 3:00 बजे अपराहन तक पूरी टीम के साथ मधेपुरा, सिंघेश्वर और गम्हरिया की चक्कर लगाते रहे प्रखंड बार……….. क्या सभी डी.एम. के लिए आपके डीएम जैसा ही होता है- रविवार !!”

सम्बंधित खबरें


संतों की बड़ी पहल, 14 फर्जी बाबाओं की सूची जारी

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम की काली दुनिया के सामने आने और साध्वी से दुष्कर्म के मामले में सजा मिलने के बाद हिन्दू धर्मगुरुओं के चरित्र पर उठ रहे सवालों के बीच अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने एक बड़ी पहल की है। अखाड़ा परिषद ने आज इलाहाबाद में आयोजित विशेष बैठक में 14 फर्जी बाबाओं की सूची जारी की। इनमें गुरमीत राम रहीम के साथ ही आसाराम बापू उर्फ आशुमल शिरमानी, निर्मल बाबा उर्फ निर्मलजीत सिंह, राधे मां उर्फ सुखविंदर कौर, ओमबाबा उर्फ विवेकानंद झा आदि के नाम शामिल हैं।

अखाड़ा परिषद ने इन बाबाओं का देशव्यापी बहिष्कार करने की अपील की है। इन बाबाओं के अलावा इस सूची में सच्चिदानंद गिरि उर्फ सचिन दत्ता, इच्छाधारी भीमानंद उर्फ शिवमूर्ति द्विवेदी, स्वामी असीमानंद, ऊँ नम: शिवाय बाबा, नारायण सांई, रामपाल, कुश मुनि, बृहस्पति गिरि और मलखान गिरि के नाम शामिल हैं।

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरि ने कहा कि इन तथाकथित बाबाओं की वजह से सनातन धर्म को बहुत नुकसान हुआ है। अब इस सूची को केन्द्र सरकार, सभी राज्य सरकारों, चारों पीठों के शंकराचार्यों और 13 अखाड़ों के पीठाधीश्वरों को भेजा जाएगा और इनके बहिष्कार की मांग की जाएगी। अखाड़ा परिषद की कोशिश होगी कि इन बाबाओं को कुंभ, अर्द्धकुंभ और दूसरे धार्मिक समागमों में प्रवेश ना मिले। इसके अलावा परिषद ने ‘संत’ की उपाधि देने के लिए एक प्रक्रिया तय करने का फैसला किया है ताकि गुरमीत राम रहीम जैसे पाखंडी इसका गलत इस्तेमाल ना कर सके।

बता दें कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद 13 अखाड़ों की संयुक्त संस्था है जिसमें निर्मोही अखाड़ा भी शामिल है, जो अयोध्या में राम जन्मभूमि आंदोलन का चेहरा है। यह भी बता दें कि विश्व हिन्दू परिषद अखाड़ा परिषद के साथ मिलकर काम करता है। आज की महत्वपूर्ण बैठक में सभी 13 अखाड़ों से 2-2 संत यानि कुल 26 संत शामिल थे।

सम्बंधित खबरें