सावन में शिवमय रहेगी बाबा नगरी- डीएम मो.सोहैल

देवाधिदेव महादेव की नगरी सिंहेश्वर स्थान में लगभग 150 वर्षों से शिवरात्रि मेला लगता है | इस बार पहली बार एक महीने के श्रावणी मेले का श्रीगणेश किया है मधेपुरा के डायनेमिक डीएम मो.सोहेल ने |

बता दें कि इसी वर्ष 2017 के शिवरात्रि मेला उद्घाटनकर्ता के रूप में मो.सोहैल ने दर्शकों को संबोधित करने से पूर्व भोलेनाथ की जयकारा लगाते हुए यही कहा था- “इस बार से बाबा की नगरी में 1 महीने का श्रावणी मेला लगेगा और सिंहेश्वर में सीमांचल से लेकर मिथिलांचल तक के श्रद्धालुओं एवं नेपाल के शिवभक्तों का सैलाब उमड़ेगा- भक्तिमय माहौल होगा और शिवमय होगी बाबा की नगरी……!”

यह भी जानिए कि सावन की शुरुआत इस बार सोमवार से हो रही है | न जाने कितने वर्षों के बाद इस बार सावन में पांच सोमवारी हो रहा है | यूँ सावन में रविवार एवं सोमवार को अत्यधिक तादाद में भक्तों की भीड़ जलाभिषेक करने को उमडती है | आवागमन की सुदृढ़ व्यवस्था हो तो प्रतिदिन श्रद्धालुओं की संख्या डेढ़ लाख तक पहुंच सकती है |

यह भी बता दें कि उमडने वाली भीड़ को देखते हुए एसपी विकास कुमार ने 300 पुलिस कर्मियों एवं 50 पुलिस पदाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की है जिनके जिम्मे गर्भ गृह से लेकर शिवगंगा तक श्रद्धालुओं को कतारबद्ध करने और ट्रैफिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने का भार दिया गया है | रविवार-सोमवार को भारी वाहनों का बाजार क्षेत्र में आने-जाने पर रोक लगा दी गयी है | यहां तक कि ऑटो को भी बाजार क्षेत्र में प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई है | ट्रैफिक नियंत्रण के लिए बैरियर का इस्तेमाल किया जाना तय है जहां पुलिस बल के साथ दंडाधिकारी की प्रतिनियुक्ति की गई है |

अंत में यह भी जानिये कि चारों दिशा से बोल बम के जयकारे के साथ कांवरियों के जत्थों को गाजे-बाजे  सहित मस्ती में झूमते-गाते बाबा नगरी की ओर बढ़ते देखे जा रहे हैं | यह भी कि कांवरियों के ठहरने, आराम करने से लेकर तमाम भक्तों के लिए नींबू, गर्म पानी और भोजन के अलावे फल एवं फ्रूट-जूस के अतिरिक्त प्राथमिक उपचार की व्यवस्थाएं भी कई स्थानीय श्रद्धालुओं की संस्थाओं द्वारा की गई हैं | ये संस्थाएं एवं शिविर पूरे 1 माह तक चलेगा | चारों ओर चहल-पहल और उत्साह-उमंग के साथ शिव का जयघोष सुनाई देने लगा है |

हर तरफ जिला प्रशासन की पैनी नजर है | डीएम एवं एसपी ने ड्यूटी में कोताही बरतने वाले पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देश दिया है कि जो कोई निरीक्षण के दौरान ड्यूटी से गायब पायें जायेंगे उन्हें दंडित किया जायेगा |

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निर्भया के देश में ‘मॉम’

महज 4 साल की उम्र में कैमरे के सामने आने वाली श्रीदेवी अपने करियर के 50वें साल में ‘मॉम’ बनकर आई हैं। ‘इंग्लिश विंग्लिश’ के साथ उन्होंने अपनी दूसरी पारी धमाकेदार तरीके से शुरू की थी। अगर बलात्कार की पृष्ठभूमि में रची गई ‘मॉम’ की कहानी पर थोड़ी और मेहनत की गई होती तो इस फिल्म का धमाका उससे भी बड़ा हो सकता था। बल्कि यह क्लासिक का दर्जा पा सकती थी। बहरहाल, हिन्दी फिल्मों की पहली महिला सुपरस्टार की यह 300वीं फिल्म है और वो क्यों सुपरस्टार थीं (या हैं) यह जानने के लिए जरूर देखी जाने लायक है।

एक पंक्ति में कहें तो ‘मॉम’ एक मां के अपनी बेटी के साथ हुए बलात्कार के खिलाफ कानून का दरवाजा खटखटाने और इंसाफ न मिलने पर खुद ही उसे इंसाफ दिलाने की कहानी है। इस कहानी का दिलचस्प पहलू यह है कि जिस बेटी के लिए वह मां जमीन-आसमान एक कर देती है, वह न केवल उसकी सगी बेटी नहीं है, बल्कि उसने उसे मां का दर्जा भी नहीं दिया है। इस तरह मॉम केवल बदले की कहानी न होकर एक मां के मां का दर्जा पाने की तड़प और जद्दोजहद की कहानी भी है। बावजूद इसके, इसमें चौंकाने जैसी कोई बात नहीं क्योंकि यह फिल्म इंटरवल के बाद जिस क्लाइमेक्स की ओर बढ़ती है, वह काफी आजमाया हुआ-सा है और उसमें कोई नयापन नहीं है। इसके अलावा एक और चीज ‘मॉम’ के असर को कम करती है और वो यह कि दर्शक इससे पहले ऐसे ही विषय पर बनी रवीना टंडन की ‘मातृ’ देख चुके हैं। हालांकि ‘मॉम’ में ‘मातृ’ से इमोशन की एक परत ज्यादा है क्योंकि इसमें दो संघर्ष समानान्तर रूप से चलते हैं।

जैसा कि पहले कहा जा चुका है, फिल्म की कहानी और बेहतर हो सकती थी, पर इसका स्क्रीनप्ले बेहद क्रिस्प है। फिल्म का कैनवास बड़ा है और ट्रीटमेंट भी रिच है। सिनेमाटोग्राफी कमाल की है। डायलॉग्स धारदार हैं और अदाकारी के तो कहने ही क्या। अभिनय में श्रीदेवी ने तो अपनी छाप छोड़ी ही है, नवाजुद्दीन सिद्दीकी, अक्षय खन्ना और सजल अली का काम भी याद रखने लायक है। नवाज ने जहां एक बार फिर अपने लुक, लहजे और रेंज से चौंकाया है, वहीं अक्षय को देख कर यह बात कचोटती है कि अभिनय की अच्छी संभावना के बावजूद वो बीच-बीच में गायब क्यों हो जाते हैं।

निर्देशन की बात करें तो रवि उदयावर का काम बेहतरीन है। कई साल तक ऐड एजेंसी और ग्राफिक डिजाइनिंग के बाद बतौर डायरेक्टर यह उनकी डेब्यू फिल्म है। फिल्म के म्यूजिक के साथ एआर रहमान का नाम जुड़ा होने के बावजूद कुछ कमी रह गई-सी लगती है। हालांकि बैकग्राउंड स्कोर झकझोर देने वाला है।

कुल मिलाकर ‘निर्भया’ के इस देश में ‘मॉम’ इसलिए भी देखी जानी चाहिए कि इसमें जहां आप ‘बलात्कारी’ मानसिकता और सिस्टम को करीब से देखते हैं, वहीं गुनहगारों को अपने अंजाम तक पहुंचता देख (वो भी नारी-शक्ति के हाथों) अपने भीतर सुकून भरा एक अहसास भी उतरता पाते हैं।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप         

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शिक्षकों को कौन देंगे राष्ट्रपति पुरस्कार- महामहिम श्री राम….. या श्रीमती मीरा….

संसार के कुछ देशों में शिक्षकों को विशेष सम्मान देने के लिए शिक्षक दिवस का आयोजन किया जाता है | कहीं छुट्टी रहती है तो कहीं कार्य करते हुए इसे मनाते हैं | भारत में विश्व गुरु डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन, जो उपराष्ट्रपति एवं राष्ट्रपति रह चुके हैं, के जन्मदिन 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रुप में मनाया जाता है |

इस बार राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2016 के तहत बिहार के 6 जिले से आठ समर्पित शिक्षक-शिक्षिकाओं का चयन किया गया है जिन्हें शिक्षक दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में नव चयनित महामहिम राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया जायेगा |

बता दें कि हमारे वर्तमान राष्ट्रपति महामहिम राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल इसी माह के 24 जुलाई को समाप्त हो रहा है | अब देखना है कि इस ब्रह्माण्ड में पुरुषों के प्रतीक श्री राम…. की मर्यादा की जीत होती है या फिर प्रकृति स्वरूपा श्रीमती मीरा……. के समर्पण व सेवा की | जो भी प्रथम नागरिक बनकर 25 जुलाई को उस रायसीना पहाड़ी के 400 एकड़ में फैले और 5 एकड़ भूमि पर निर्मित 345 कमरों वाले राष्ट्रपति भवन में प्रवेश करेंगे- उन्हीं के कर कमलों द्वारा इन कर्मयोगी शिक्षक-शिक्षिकाओं को राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया जायेगा |

अब जानिए कि जिन आठों बिहारी शिक्षकों को राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया जाना है उनमें तीन केवल पूर्णिया जिले से हैं | पुरस्कृत होने वाले शिक्षक हैं- (1)डॉ.सविता रंजन- सहायक शिक्षिका, प्लस टू ब्रजबिहारी स्मारक हाई स्कूल, पूर्णिया (2) डॉ.उत्तिमा केसरी, प्रभारी प्रधानाध्यापिका, मध्य विद्यालय, सदर प्रखंड मुख्यालय (पूर्व) पूर्णिया (3) श्री विजेन्द्र कुमार सिंह, प्रभारी प्रधानाध्यापक, आदर्श मध्य विद्यालय बरहरा कोठी, पूर्णिया (4) श्री नंदकिशोर सिंह, प्रधानाध्यापक, फिलिप हाई स्कूल, बरियारपुर, मुंगेर (5) श्री रामशंकर गिरि, प्रभारी प्रधानाध्यापक, राजकीय कृत विपिन मध्य विद्यालय, बेतिया (6) श्री हेमंत कुमार, सहायक शिक्षक, मध्य विद्यालय, मधुबनी (7) श्री ज्ञानवर्धन कंठ, प्राध्यापक, मध्य विद्यालय, डुमरा-सीतामढ़ी (8) श्री काशीनाथ त्रिपाठी, प्रभारी प्रधानाध्यापक, बलदेव अयोध्या अतिम प्रवेशिका +2 स्कूल, पूर्वी चंपारण |

अंत में बता दें कि इन आठों समर्पित शिक्षकों को शिक्षक दिवस के दिन राष्ट्रपति भवन में नवचयनित महामहिम के कर कमलों द्वारा पुरस्कार स्वरूप एक सिल्वर मेडल, ₹50,000 (पचास हजार) का चेक एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जायगा | इन आठों शिक्षक-शिक्षिकाओं के साथ-साथ राष्ट्रपति द्वारा पुरस्कृत होनेवाले सभी शिक्षकों को मधेपुरा अबतक की अग्रिम बधाई !

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लालू पर फिर सीबीआई का छापा, राबड़ी-तेजस्वी से घंटों पूछताछ

बेहद बुरे दौर से गुजर रहे हैं इन दिनों आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनका परिवार। बेनामी संपत्ति और रेलवे के होटल घोटाले मामले में उनकी और उनके परिवार की मुसीबतें लगातार बढ़ती जा रही हैं। सीबीआई ने शुक्रवार को उनसे जुड़े 12 ठिकानों पर छापे मारे और उनकी पत्नी व पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और उनके छोटे बेटे व बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव से घंटों सवाल किए। जबकि लालू चारा घोटाला मामले को लेकर अदालत में पेश होने के लिए रांची में हैं। इधर वायरल बुखार से पीड़ित मुख्यमंत्री नीतीश कुमार स्वास्थ्य कारणों से गुरुवार से ही राजगीर में हैं।

गौरतलब है कि सीबीआई ने भ्रष्टाचार के मामले में तलाशी के लिए शुक्रवार सुबह पटना के 10 सर्कुलर रोड स्थित राबड़ी के आवास पर छापा मारा। सूत्रों के मुताबिक 27 अधिकारियों की टीम ने राबड़ी और तेजस्वी से पूछताछ की। राबड़ी से 8 घंटे तक पूछताछ हुई। तेजस्वी से भी देर शाम तक पूछताछ होती रही। बताया जाता है कि तेजस्वी से पटना में बन रहे मॉल से संबंधित सवाल पूछे गए। ऐसा आरोप है कि लालू यादव ने रेल मंत्री रहते हुए बेनामी कंपनी के जरिए तीन एकड़ भूमि के रूप में रिश्वत लेने के बाद एक कंपनी को रेलवे के दो होटलों के रखरखाव का काम सौंपा। सीबीआई के एडिशनल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के मुताबिक 2004 से 2014 के बीच रची गई इस कथित साजिश के लिए लालू और अन्य आरोपियों के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट, 1988 के तहत केस दर्ज किया गया है।

उधर छापेमारी की ख़बर के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राजगीर में राज्य के आला अधिकारियों की बैठक बुलाई, जिसमें मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह, गृह सचिव आमिर सुब्हानी और डीजीपी पीके ठाकुर शामिल हैं। एहतियातन पूरे बिहार के हाई अलर्ट कर दिया गया है। हंगामा करने वालों से सख्ती से निबटने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। भाजपा, आरजेडी, जेडीयू व कांग्रेस समेत सभी राजनीतिक दलों के प्रदेश कार्यालयों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

इन सारे घटनाक्रम के बीच लालू प्रसाद यादव ने कहा है कि वे किसी भी हाल में झुकने वाले नहीं हैं। उनका कहना है कि संबंधित मामले में उनके रेल मंत्री रहते हुए सब कुछ नियमों के तहत किया गया था। उन्होंने इन छापों को साजिश बताते हुए कहा कि हम मिट्टी में मिल जाएंगे लेकिन बीजेपी और मोदी सरकार को हटाकर ही दम लेंगे।

चलते-चलते बता दें कि राजनीति के गलियारों में सवाल उठने लगा है कि अब जबकि उपमुख्यमंत्री तेजस्वी के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कर लिया गया है, ऐसे में क्या मुख्यमंत्री उन्हें अपने कैबिनेट से हटाएंगे? सूत्रों के मुताबिक, सारे घटनाक्रम पर महागठबंधन के वरीय नेताओं से विमर्श कर नीतीश अगर जल्दी ही कोई बड़ा फैसला लें तो कोई आश्चर्य की बात नहीं।

 

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उपराष्ट्रपति चुनाव में नीतीश विपक्ष के साथ !

कांग्रेस की ओर से की हाल की बयानबाजी से नाराज नीतीश कुमार को मनाने में कांग्रेस जोर-शोर से जुट गई है। माना जा रहा है कि राष्ट्रपति चुनाव को लेकर कांग्रेस और जेडीयू के बीच गहराता विवाद राहुल गांधी के हस्तक्षेप के बाद समाप्त हुआ है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक राहुल ने अपनी पार्टी के नेताओं से बिहार के मुख्यमंत्री के खिलाफ नहीं बोलने का निर्देश दिया है। जेडीयू ने भी इस दिशा में सकारात्मक रुख अपनाते हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष के साथ होने के संकेत दिए हैं।

राहुल के हस्तक्षेप का असर सबसे पहले कांग्रेस महासचिव गुलाम नबी आजाद के यू-टर्न में दिखा। उन्होंने कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री और महागठबंधन के नेता नीतीश कुमार हमारे साथ हैं। हमारे बीच किसी तरह का मतभेद नहीं है। यही नहीं, उन्होंने यहां तक कहा कि नीतीश कुमार का कहना सही है कि हमने राष्ट्रपति चुनाव में अपना उम्मीदवार घोषित करने में देर की है। हमसे यह गलती हुई है। इसलिए हमने यह तय किया है कि उपराष्ट्रपति चुनाव के मुद्दे पर समय रहते फैसला लिया जाएगा।

गौरतलब है कि इससे पहले नीतीश ने अपनी पार्टी की राज्य कार्यकारिणी के सदस्यों को संबोधित करते हुए कांग्रेस से साफ शब्दों में कहा था कि वे किसी के पिछलग्गू नहीं हैं। वे सहयोगी हैं और सहयोगी की तरह रहेंगे। नीतीश कुमार की नाराजगी गुलाम नबी आजाद के उस बयान को लेकर थी जिसमें उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए को समर्थन दिए जाने पर कहा था कि नीतीश एक विचारधारा के नहीं, बल्कि कई विचारधारा के नेता हैं। इस पर नीतीश ने कांग्रेस पर हमलावर होते हुए कहा था कि सिद्धांत हम नहीं, आप बदलते रहते हैं। कांग्रेस ने आजादी के बाद सबसे पहले गांधी और बाद में नेहरू के सिद्धांतों को तिलांजलि दी। ऐसे में आजाद का इस कदर यू-टर्न लेना मायने रखता है। स्पष्ट है कि वे नीतीश की नाराजगी दूर करने की कोशिश में लगे हैं।

इन सारे घटनाक्रम के बीच विपक्ष ने उपराष्ट्रपति पद के लिए भी अपना उम्मीदवार उतारने की योजना बनाई है। आगामी 11 जुलाई को संसद भवन की लाइब्रेरी बिल्डिंग में एक बार फिर पूरे विपक्ष के जुटने के आसार हैं। इसमें जेडीयू के शामिल होने की बाबत पूछे जाने पर पार्टी के प्रधान महासचिव केसी त्यागी ने कहा कि विपक्षी दलों द्वारा उनकी पार्टी को आमंत्रित किया जाता है तो निश्चित तौर पर हम उसमें भाग लेंगे। सूत्रों के मुताबिक उस दिन कांग्रेस उपाध्यक्ष अलग से नीतीश कुमार से मुलाकात कर सकते हैं। कहने की जरूरत नहीं कि राहुल उपराष्ट्रपति चुनाव में नीतीश के साथ की सांकेतिक और व्यावहारिक जरूरत अच्छी तरह समझते हैं और इस पूरे प्रकरण में उन्होंने जो परिपक्वता दिखाई है, वो सचमुच काबिलेतारिफ है।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप 

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आरजेडी स्थापना दिवस में लालू ने बताया भाजपा को हराने का फार्मूला

बुधवार को राष्ट्रीय जनता दल ने धूमधाम से अपना 21वां स्थापना दिवस मनाया। पटना के वीरचंद पटेल पथ स्थित पार्टी कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने भाजपा पर जमकर हमला बोलते हुए उसे 2019 में हराने का ‘फार्मूला’ भी बताया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव, स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप यादव, वित्त मंत्री अब्दुल बारी सिद्दीकी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह, प्रदेश अध्यक्ष रामचन्द्र पूर्वे समेत पार्टी के अधिकांश मंत्री, सांसद और विधायक मौजूद रहे।

अपने संबोधन में लालू ने कहा कि देश में अघोषित आपातकाल जैसे हालात हैं। ऐसे में उन्होंने समान विचारधारा के लोगों को एक साथ आने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि “हर कोई अपनी विचारधारा के अनुरूप काम कर रहा है, चाहे वह मायावतीजी हों, अखिलेश हों, रॉबर्ट वाड्रा जी हों, प्रियंका गांधी जी हों, ममता दी हों या केजरीवाल हों, लालू यादव हों या उनका परिवार। बीजेपी हमें तोड़ना चाहती है, क्योंकि वह हमारी शक्ति के बारे में जानती है। और बीजेपी यह भी जानती है कि अगर सभी विपक्षी पार्टियां एक हो जाती हैं तो बीजेपी का 2019 में सरकार बनाने का सपना, सपना ही रह जाएगा।”

आरजेडी सुप्रीमो ने उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा के एक होने को 2019 में भाजपा का गेम ओवर करने का फार्मूला बताया। बकौल लालू, अगर यूपी में पूर्व सीएम अखिलेश यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती एक हो जाते हैं तो बीजेपी के अगला चुनाव जीतने का कोई चांस नहीं होगा।

राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद पर सवाल उठाते हुए लालू ने कहा कि वे दलित नहीं हैं। वे कोली जाति से आते हैं और गुजरात में कोली जाति ओबीसी है। दरअसल वहां चुनाव है इसलिए उन्हें उम्मीदवार बनाया गया है, ताकि गुजरात में 18 प्रतिशत कोलियों का मत हासिल किया जा सके। लालू ने कहा कि वे सिद्धांत से समझौता नहीं करते हैं। अगर कांग्रेस भी एनडीए उम्मीदवार का समर्थन करती, इसके बावजूद वो उन्हें समर्थन नहीं करते।

इस मौके पर तेजस्वी ने सुशील मोदी पर हमला बोलते हुए कहा कि कुछ लोग अखबार में बने रहने के लिए हम पर आरोप लगाते हैं। हमारी तीन पीढियां साजिश की शिकार हुई हैं। माता-पिता के बाद अब हमलोग और हमारी बहनों के बच्चे सीबीआई रेड देख रहे हैं। हम डरने वाले नहीं हैं। 27 अगस्त को पता चलेगा कि कौन बेईमान है। बता दें कि इसी दिन आरजेडी ने अपनी महत्वाकांक्षी ‘भाजपा भगाओ, देश बचाओ रैली’ आयोजित की है।

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अमेरिका और भारत दोनों के इतिहास में अहम है 4 जुलाई

4 जुलाई कहने को एक तारीख है, लेकिन इतिहास के पन्नों में इस दिन की अहमियत किस कदर है, यह जानकर चौंक जाएंगे आप। जी हां, यही वो दिन है जिसके बाद अमेरिका और भारत दोनों देशों की किस्मत बदल गई। दरअसल, ये दिन दोनों ही देशों की आज़ादी से जुड़ा है।

पहले बात अमेरिका की। वर्तमान पीढ़ी के लिए शायद सोचना भी कठिन हो, लेकिन सच है कि आज दुनिया का सबसे ताकतवर देश कहलाने वाला अमेरिका भी कभी गुलाम था और 1776 में 4 जुलाई को ही आजाद हुआ और जॉर्ज वाशिंगटन देश के पहले राष्ट्रपति बने। इस तरह अमेरिका को आज़ाद हुए पूरे 241 साल हो चुके हैं। बता दें कि अमेरिका के विश्वप्रसिद्ध स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी, जिसे 1876 में उसे फ्रांस ने तोहफे के रूप में दी थी, पर अमेरिका की स्वतंत्रता की तिथि 4 जुलाई 1776 ही अंकित है।

अब बात भारत की। जैसा कि सब जानते हैं, भारतीय स्वतंत्रता के इतिहास में 15 अगस्त और 26 जुलाई मील के पत्थर हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसी तरह 4 जुलाई का दिन भी भारत की स्वतंत्रता के लिए बेहद खास है। दरअसल 1947 में इसी दिन ब्रिटिश पार्लियामेंट के सामने भारत की स्वतंत्रता से संबंधित बिल का प्रस्ताव रखा गया था। और इसी बिल के तहत देश का भारत ओर पाकिस्तान के रूप में बंटवारा हुआ था।

4 जुलाई की बात चल ही रही है तो यह हमें यह भी जानना चाहिए कि 1963 में आज ही के दिन पिंगली वेंकैय्या, जिन्हें भारत का राष्ट्रध्वज बनाने का श्रेय दिया जाता है, का निधन हुआ था। और चलते-चलते यह भी जानें कि आज ही के दिन स्वामी विवेकानंद की भी पुण्यतिथि है। अध्यात्म की दुनिया को अपनी अप्रतिम आभा से जगमग कर देने वाले युवाओं के इस सबसे बड़े ‘आईकॉन’ ने 1902 में आज ही के दिन अंतिम सांस ली थी।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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10वीं-12वीं के छात्रों के लिए किताब लिख रहे मोदी सर

फेसबुक और ट्विटर पर अपनी जबरदस्त सक्रियता और रेडियो पर ‘मन की बात’ जैसे कार्यक्रम से युवाओं की दिनचर्या में उतर चुके प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अब उनसे एकदम अनोखे तरीके से संवाद करते दिखेंगे। जी हां, प्रधानमंत्री मोदी बहुत जल्द अपने युवा मित्रों से किताब के माध्यम से मुखातिब होंगे। खास बात यह कि पेंग्विन इंडिया से छपने जा रही यह किताब पूरी तरह इंटरएक्टिव होगी और इसे पढ़ने वाले युवा सीधे प्रधानमंत्री से संवाद कायम कर सकेंगे। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि प्रधानमंत्री से जुड़ने का स्वरूप कैसा होगा।

10वीं और 12वीं के छात्रों को विशेष रूप से ध्यान में रखकर लिखी जा रही इस किताब में प्रधानमंत्री परीक्षा के तनाव को दूर करने, चित्त शांत रखने और परीक्षा के बाद किए जाने वाले कामों के बारे में बताएंगे। इसमें छात्रों से जुड़े कई आयामों पर प्रकाश डाला जाएगा जो विशेष तौर पर 10वीं और 12वीं की परीक्षा के संदर्भ में अहम होगा। कुल मिलाकर इस किताब का सार यह होगा कि अंक के ऊपर ज्ञान को क्यों महत्व दिया जाय और भविष्य में अपनी जिम्मेदारियों के वहन कैसे किया जाय।

बता दें कि इस किताब को लिखने का विचार प्रधानमंत्री का अपना है। दरअसल इस साल परीक्षाओं के दौरान उनका रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ पूरी तरह छात्रों पर केन्द्रित था। इस कार्यक्रम को मिली अपार सफलता और उसके बाद छात्रों ने जिस तरह सीधे उन्हें पत्र लिखे, वही इस विषय पर किताब लिखने की प्रेरणा और कारण बना। माना जा रहा है कि किताब इसी साल बाज़ार में आ जाएगी। चलते-चलते बता दें कि अभी तक भारत के किसी प्रधानमंत्री ने पद पर रहते हुए बच्चों के लिए किताब नहीं लिखी है। निश्चित तौर पर प्रधानमंत्री मोदी इसके लिए साधुवाद के पात्र हैं।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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नीतीश ने कहा, मुझको लेकर कयास लगाना बंद करें

बिहार के मुख्यमंत्री व जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने कहा कि मेरे लिए कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। कुछ लोग कहते हैं कि लालू के दबाव में काम कर रहे हैं तो कुछ कहते हैं कि भाजपा के साथ चले जाएंगे। लेकिन ये सब बकवास है। रविवार को राजधानी स्थित जेडीयू कार्यालय में आयोजित प्रदेश कार्यकारिणी की महत्वपूर्ण बैठक में नीतीश ने कहा कि मैं बिहार में ही राजनीति करुंगा। बिहार के विकास के लिए काम करुंगा।

कार्यकारिणी की बैठक में राष्ट्रपति व उपराष्ट्रपति चुनाव, महागठबंधन व सरकार से संबंधित तमाम महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। राष्ट्रपति चुनाव में जेडीयू द्वारा रामनाथ कोविंद को समर्थन की घोषणा के बाद जिस तरह लालू और कांग्रेस से नीतीश की बढ़ती ‘तल्खी’ और एनडीए से ‘मधुर’ होते संबंध की ख़बरें आ रही थीं, उस पर विराम लगाते हुए नीतीश ने कार्यकर्ताओं से संगठन की मजबूती के लिए काम करने को कहा। कार्यकर्ताओं से उन्होंने कहा कि संगठन ही आपकी पहचान है। संगठन की मजबूती की बदौलत ही आज भाजपा देश की सत्ता पर काबिज है।

कार्यकर्ताओं से संगठन को मजबूत करने का आह्वान करते हुए नीतीश ने कहा कि आपलोगों की सबसे पहली प्राथमिकता यह है कि संगठन का अधिक से अधिक विस्तार किया जाए और लोगों को इससे जोड़ा जाए। बैठक में पिछले वर्ष 5 जून को आरंभ हुए सदस्यता अभियान की समीक्षा भी की गई। बता दें कि पार्टी ने 50 लाख प्राथमिक एवं 2 लाख सक्रिय सदस्य बनाने का लक्ष्य रखा है।

इस बैठक में दहेज प्रथा और बाल विवाह के खिलाफ शुरू हुई सरकार की मुहिम में जेडीयू के भागीदार बनने की रणनीति भी बनी। बिहार के राजनीतिक समीकरण के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील इस बैठक में पार्टी प्रमुख के अलावे प्रदेश अध्यक्ष बशिष्ठ नारायण सिंह, आरसीपी सिंह, राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, श्याम रजक, मौलाना गुलाम रसूल बलियावी आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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डॉक्टर्स डे से बिहार का रिश्ता

आपके प्यारे मधेपुरा अबतक की आज दूसरी सालगिरह है। आज से भारत का जीएसटी युग शुरू हुआ। और आज ही है नेशनल डॉक्टर्स डे। आज की पीढ़ी शायद न जानती हो कि यह दिन जिस महान शख्सित की याद में मनाया जाता है वो बिहार के थे। जी हां, बिहार के उस सपूत का नाम है डॉ. विधानचंद्र राय। महान फिजिशियन भारतरत्न डॉ. राय का जन्म पटना के खचांची रोड में हुआ था। डॉ. राय पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री भी थे और उन्हें आधुनिक पश्चिम बंगाल का आर्किटेक्ट कहा जाता है। हमारी मिट्टी के इस लाल को हमारा नमन। धरती के भगवान कहे जाने वाले तमाम चिकित्सकों को हमारा अभिवादन। और हमारी दूसरी सालगिरह पर आप सबको हमारा प्रणाम।

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