भाजपा ने क्यों किया चंपारण सत्याग्रह शताब्दी कार्यक्रम का बहिष्कार?

बिहार सरकार की तरफ से सोमवार को पटना में आयोजित चंपारण सत्याग्रह शताब्दी कार्यक्रम का भाजपा समेत एनडीए के तमाम घटक दलों ने बहिष्कार किया। भाजपा का आरोप है कि राज्य सरकार ने कार्यक्रम का ‘राजनीतिकरण’ किया। पार्टी इस बात से भी नाराज है कि कार्यक्रम में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को न्योता नहीं दिया गया, जबकि कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कार्यक्रम में शिरकत की। हालांकि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के साथ जिन लोगों को मंच साझा करना था उनमें भाजपा के वरिष्ठ नेता और केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह शामिल थे, लेकिन वे भी कार्यक्रम में नहीं पहुंचे और एक तरह से इसका ‘अघोषित बहिष्कार’ किया।

गौरतलब है कि चंपारण सत्याग्रह शताब्दी कार्यक्रम के तहत बिहार सरकार द्वारा आयोजित स्वतंत्रता सेनानी सम्मान समारोह में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, राज्यपाल रामनाथ कोविंद और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अतिरिक्त मंच पर जिन लोगों को जगह दी गई थी उनमें गृहमंत्री राजनाथ सिंह, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी, आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, पूर्व मुख्यमंत्री और हम के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतन राम मांझी, शिक्षा मंत्री व कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय, जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह, सीपीआई के राष्ट्रीय सचिव सत्येन्द्र नारायण सिंह एवं अखिल भारतीय स्वतंत्रता सेनानी एसोसिएशन के सचिव सत्यानंद याजी शामिल थे। इस सूची पर सख्त आपत्ति जताते हुए पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने ट्वीट किया कि ‘नीतीश, आप चारा घोटाले के दोषी लालू और नेशनल हेराल्ड केस में बेल पर चल रहे राहुल गांधी को बुलाकर फ्रीडम फाइटर्स का अपमान कर रहे या सम्मान?’ वहीं, भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मंगल पांडेय ने कहा कि गृहमंत्री राजनाथ सिंह इस कार्यक्रम के ‘राजनीतिकरण’ से आहत हैं। उनके इस बयान का आशय विशेषकर लालू को मंच पर जगह देने से था।

इस कार्यक्रम को लेकर एनडीए की अगुआ भाजपा का रुख सामने आने के बाद ही हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर), राष्ट्रीय लोक समता पार्टी और लोक जनशक्ति पार्टी ने इस कार्यक्रम से दूर रहने का फैसला किया, जैसा कि हम के नेता जीतन राम मांझी के बयान से भी स्पष्ट होता है, जिसमें उन्होंने कहा कि एनडीए में रहने के कारण उनका इस कार्यक्रम में जाना उचित नहीं होगा।

बहरहाल, जब एनडीए खेमे की ओर से इतनी उठापठक हो रही हो तो लालू कहां चुप रहने वाले थे, उन्होंने भी पलटवार करते हुए कहा कि वह बीजेपी को एक हाथ से गांधी और दूसरे हाथ से उनके हत्यारे नाथूराम गोडसे को माला पहनाने का ‘ड्रामा’ नहीं करने देंगे। वहीं, नीतीश ने कहा कि उन्होंने सभी राजनीतिक पार्टियों के पदाधिकारियों को बुलावा भेजा था, लेकिन जो नहीं पहुंच सके, उन्हें उनसे कोई शिकायत नहीं।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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चल पड़े कोटि पग उसी ओर…………

सौ साल पहले चम्पारण (बिहार) की धरती पर मोहनदास…… अकेले आये थे…….. लेकिन चम्पारण ने जब उस मोहन को ‘महात्मा’ बना दिया तो देशवासियों ने महात्मा को हृदय में समा लिया…… और फिर उसी महात्मा गांधी के सत्य-अहिंसा के सम्बल के साथ ‘आजादी’ की खातिर…… चल पड़े कोटि पग उसी ओर……..!

यह भी बता दें कि जहाँ उसी महात्मा के कारण समस्त भारत के स्वतंत्रता सेनानियों के साथ महामहिम राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने पटना के एस.के.मेमोरियल हॉल में आकर यह उद्घोष किया कि- “भारत के युवजनों ! भारतीय होने पर गर्व करें !” वहीं आजादी के बाद ऐसा आयोजन पहली बार करके बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक स्वर्णिम इतिहास रचकर सम्पूर्ण विश्व को यह संदेश दिया कि- “विविधता में एकता ही भारत की पहचान है |”

The Gandhi and Kasturba attired kids of different school ready to attend "Gandhi Yatra" starting from BN Mandal Stadium to Samaharnalaya Gandhi Park via BP Mandal Chowk , Bhupendra Chowk and Thana Chowk etc. under the leadership of DM Md.Sohail and SP Vikas Kumar and others.
The Gandhi and Kasturba attired kids of different school ready to attend “Gandhi Yatra” starting from BN Mandal Stadium to Samaharnalaya Gandhi Park via BP Mandal Chowk , Bhupendra Chowk and Thana Chowk etc. under the leadership of DM Md.Sohail and SP Vikas Kumar and others.

मधेपुरा में तो कई दिनों से बी.एन.मंडल स्टेडियम और भूपेन्द्र कलाभवन दोनों चम्पारण सत्याग्रह की उत्सवधर्मिता में डूबा हुआ है | स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान को अपना सौभाग्य मानने वाले डायनेमिक डीएम मो.सोहैल एवं एसपी विकास कुमार अपनी पूरी टीम सहित गणमान्यों, शिक्षाविदों एवं समाजसेवियों के सहयोग से पूरे जिले को गांधीमय बनाने में लगे हैं | कहीं डीएम, एसपी, एएसपी, एसडीएम, डीपीआरओ, डीईओ…….. सहित गणमान्यों के नेतृत्व में “गांधीयात्रा” निकाली जा रही है तो कहीं स्कूली बच्चों द्वारा गांधी-कस्तूरबा की झांकी निकाली जा रही है | कहीं सर्वधर्म प्रार्थना हो रही है तो कहीं जमीन पर बैठकर गांधी व्याख्यानमाला में शहर के शिक्षाविदों की भागीदारी हो रही है |

बता दें कि जहाँ कला भवन में प्रो. श्यामल किशोर यादव एवं डॉ.मधेपुरी के नेतृत्व में गाँधी व्याख्यान माला में उद्गार व्यक्त करने वाले शिक्षाविदों में होते हैं- प्राचार्य डॉ.एच.एल.एस. जौहरी , प्रो.प्रज्ञा प्रसाद, डॉ.अमोल राय, प्राचार्य डॉ.विश्वनाथ विवेका, प्राथमिक शिक्षक संघ के सचिव वीरेंद्र प्रसाद यादव, डॉ.विनय कुमार चौधरी एवं डॉ.आलोक कुमार वहीं पटना नहीं जा सकने वाले स्वतंत्रता सेनानियों एवं दिवंगत सेनानियों की धर्मपत्नियों को संवेदनशील डीएम मो.सोहैल के नेतृत्व में एसडीएम संजय कुमार निराला की टीम द्वारा माला पहनाकर अंगवस्त्रम व प्रतीक सहित सम्मान किया जाता है | जिला अतिथिगृह में उन्हें भोजनादि कराकर ससम्मान आवश्यकतानुसार सरकारी वाहन से गंतव्य तक पहुंचा दिया जाता है |

फिर बीएन मंडल स्टेडियम में “एक शाम बापू के नाम” सांस्कृतिक कार्यक्रम का उद्घाटन दीप प्रज्वलित कर डीएम मो.सोहैल, डी.डी.सी.मिथिलेश कुमार, एसडीएम संजय कुमार निराला, प्रो.रवि रंजन,  मो.शौकत अली, एनडीसी मुकेश कुमार आदि ने संयुक्त रुप से किया जिसमें नवाचार मंडल इप्टा जूनियर टीम , हॉली क्रॉस स्कूल, डी.पी.एस., माया विद्या निकेतन के बच्चे-बच्चियों सहित सभी स्थापित कलाकार शशि प्रभा, पुष्पलता, रौशन कुमार आदि ने उत्कृष्ट प्रदर्शनों से मधेपुरा को गाँधीमय बना दिया |

लेकिन गाँधी की तेज चाल भला इतनी जल्दी कैसे रुकेगी- मधेपुरा सदर प्रखंड में मंगलवार को निर्धारित कार्यक्रमानुसार प्रखंड उपप्रमुख जयकांत यादव की अध्यक्षता में शिक्षाविदों की टीम के सदस्यों प्रो.श्यामल किशोर यादव, डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी, डॉ.एच.एल.एस. जौहरी, डॉ.विश्वनाथ विवेका, प्रो.प्रज्ञा प्रसाद, डॉ.विनय कुमार चौधरी एवं डॉ.आलोक कुमार आदि ने विस्तार से विचार व्यक्त करते हुए प्रायः यही कहा कि धार्मिक टकराहट भ्रष्टाचार से उत्पन्न जितनी भी समस्याएं हैं इन तमाम समस्याओं का निदान गाँधी के विचारों में छुपा हुआ है | इसे विस्तार देते हुए डॉ.मधेपुरी ने गांधीवादी विचारधारा के पोषक क्रांतिवीर शिवनंदन प्रसाद मंडल की 126वीं जयंती की चर्चा के साथ श्रद्धांजलि स्वरुप 1934 के भूकंप में क्षत-विछत हुई मानवता की सुधि लेने आये महात्मा गांधी और शिवनंदन बाबू की मुलाकात की भी चर्चा की और कहा कि जाते समय बापू ने सेंट्रल रिलीफ टीम के सभी सदस्यों से इतना ही कहा-

“इसे तुम समाज में व्याप्त छुआछूत जैसे अंधविश्वास एवं पाप का ईश्वरीय दंड ही समझना |”                      

अंत में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रभारी बीडीओ अजीत कुमार, सीओ मिथिलेश कुमार के विमर्शोपरान्त कार्यक्रम पदाधिकारी प्रमोद प्रियदर्शी ने धन्यवाद ज्ञापित किया |

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दोनों प्रथम विधि मंत्री बने, एक से बढ़कर एक…………..!!

जरा ध्यान से देखिए कैसा सजीव संयोग है- बाबा साहब भीमराव अंबेडकर और शिवनंदन प्रसाद मंडल के बीच | दोनों प्रखर विधिवेत्ता और दोनों उच्चकोटि के विद्वान | दोनों की 126वीं जयंती | एक की 14 अप्रैल को धूमधाम से मनी और दूसरे की आज (18 अप्रैल को) है |

यह भी जानिए कि दोनों क्रान्तिवीरों के जन्मदिन में मात्र 5 दिनों का अंतर, परंतु दोनों 5 साल के अंतराल में प्रथम विधि मंत्री बने- अंबेडकर भारत सरकार में प्रथम लॉ मिनिस्टर (1947 में) बने और शिवनंदन बिहार सरकार के प्रथम लॉ मिनिस्टर (1952 में) बने |

हां ! यह भी याद कर लीजिए कि बाबा साहब का जन्मदिन है- 14 अप्रैल, 1891 तो वही शिवनंदन बाबू का 18 अप्रैल, 1891………| है न 5 दिनों का अंतर !

चूँकि आज शिवनंदन बाबू का जन्मदिन है | उनके व्यक्तित्व व कृतित्व को जानने का दिन है | अतः उनकी 2-4 बातें आने वाली पीढ़ी के लिए- शिवनंदन प्रसाद मंडल प्रखर स्वतंत्रता सेनानी रहे | स्वतंत्रता संग्राम के दरमियान चार बार जेल गये | वर्षों इन्होंने जेल की यातनाएं सही | कहने को तो बहुत कुछ है बस एक वाकया सुन लीजिए-

वर्ष 1943, स्थान नेपाल का सघन जंगल- “बोकरो का टापू” जहाँ जयप्रकाश नारायण आजाद दस्ते के लगभग 500 आन्दोलनकारियों को ट्रेनिंग दे रहे होते हैं और डॉ.राम मनोहर लोहिया ट्रान्समीटर ऑपरेटर बनकर आंदोलनकारियों को आवश्यक संदेश भेजा करते………| संयोगवश कुछ विशेष बातों को लेकर शिवनंदन बाबू ट्रेनिंग समापन के दिन ही वहां पहुंचते हैं और उनकी ही अध्यक्षता में समापन समारोह का आयोजन होता है……… जिसमें लोहिया-जेपी की उपस्थिति में समापन भाषण के अंत में यह शपथ दिलाई जाती है-

“जब तक जीवित रहूंगा आर्यावर्त के कल्याण में लगा रहूंगा | भारत की  बेबस जनता, जो नाना प्रकार के कष्ट भोग रही है उसका उद्धार करूंगा…….. और आजादी के लिए यदि प्राण न्योछावर करने की जरूरत पड़ेगी तो पैर पीछे नहीं हटाऊंगा |”    

Dr.Jagannath Mishra (Ex. CM , Bihar And Ex. Central Minister ) in a cheerful mood having seen the book "Itihas Purush Sheonandan Prasad Mandal" written by Dr.Bhupendra Madhepuri and his Patna residence .
Dr.Jagannath Mishra (Ex. CM , Bihar And Ex. Central Minister ) in a cheerful mood having seen the book “Itihas Purush Sheonandan Prasad Mandal” written by Dr.Bhupendra Madhepuri at his Patna residence .

इन्ही पंक्तियों को भावी पीढ़ी के लिए बचाकर रखने हेतु- “इतिहास पुरुष शिवनंदन प्रसाद मंडल…….” की रचना डॉ.मधेपुरी ने की | विगत वर्षों में उन्हीं के नामवाले शिवनंदन प्रसाद मंडल उच्च माध्यमिक विद्यालय मधेपुरा के तत्कालीन प्राचार्या डॉ.शान्ति यादव द्वारा आयोजित मंडल जयंती के अवसर पर इस पुस्तक का लोकार्पण बीएनएमयू के संस्थापक कुलपति डॉ.रमेन्द्र कुमार यादव रवि एवं तत्कालीन वर्तमान कुलपति डॉ.अनंत कुमार द्वारा विश्व विद्यालय सिंडिकेट सदस्य विद्यानंद यादव, साहित्यकार हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ एवं लेखक डॉ.मधेपुरी की गरिमामयी उपस्थिति में की जा चुकी है |

यह भी जानिए कि आधुनिक बिहार के निर्माताओं में अव्वल स्थान हासिल करने वाले क्रांतिवीर शिवनंदन……. की जीवनी- “इतिहासपुरुष शिवनंदन प्रसाद मंडल…..” लिखी है डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने | पुराने स्नेहिल संबंध रखनेवाले बिहार के मुख्यमंत्री व पूर्व केंद्रीय मंत्री रह चुके डॉ.जगन्नाथ मिश्र को इस पुस्तक की एक प्रति जब डॉ.मधेपुरी ने हस्तगत कराई तो डॉ.मिश्र ने डॉ.मधेपुरी की इस कृति पर चन्द शब्दों में यही कहा-

“…………….शिवनंदन बाबू पर लिखी गई इस पुस्तक में शोध और संवेदना का दुर्लभ संगम है | इस पुस्तक का पारायण करते हुए कभी मैं सुखद विस्मय से भर उठता तो कभी गौरव की अनुभूति आंखों से छलक पड़ती | सोचता हूं,  डॉ.मधेपुरी ने अगर यह पुस्तक नहीं लिखी होती तो बिहार की आने वाली पीढ़ी अपने इतिहास के इतने गौरवशाली अध्याय से कैसे अवगत हो पाती………………..”

अंत में डॉ.मिश्र ने इस पुस्तक के बारे में यहां तक लिख डाला है कि यह विचार का ऐसा पुंज है जो कितने भटके हुए को राह दिखायेगी……….|

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बापू के विचारों को गांवों तक पहुंचायेंगे मधेपुरी- डीएम

आज जहाँ पूरा देश चम्पारण सत्याग्रह के सौ साल पूरे होने पर उत्सव मना रहा है, वहीं हमारा बिहार उत्सवधर्मिता के आनंदातिरेक में डुबकियाँ लगा रहा है | आज देश भर के 2972 स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मानित करेंगे एस.के.मेमोरियल हॉल पटना में महामहिम राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी, गृहमंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार | जो स्वतंत्रता सेनानी नहीं आ पाएंगे उन्हें आज ही घर पर जाकर पदाधिकारीगण सम्मानित करेंगे |

एक ओर जहाँ जिले के डायनेमिक डीएम मो.सोहैल अपने समाहरणालय स्थित बापू की प्रतिमा के समीप एसपी विकास कुमार, डीडीसी मिथिलेश कुमार, एसडीएम संजय कुमार निराला, एएसपी राजेश कुमार, डीपीओआर मो.क्यूम अंसारी, नप के कार्यपालक मनोज कुमार पवन, श्रम अधीक्षक सुबोध कुमार, डॉ.गदाधर पाण्डेय, समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी सहित अन्य गण्यमान्यों व कर्मियों के साथ “स्वच्छता में ईश्वर के बास” की संकल्पना को साकार करने में लगे दिखाई दे रहे हैं वहीं दूसरी ओर बिहार सरकार के मुखिया नीतीश कुमार भारत को आजादी दिलाने वाले सभी जीवित स्वतंत्रता सेनानियों को पटना के एस.के. मेमोरियल हॉल में गमान्य एवं महामहिम की उपस्थिति में सम्मानित करने जा रहे हैं |

DM Md.Sohail departing AC Coach of Freedom Fighters in presence of DDC Mithilesh Kumar , Dr.Madhepuri , NDC Mukesh Kumar , Lab Superintendent Subodh Kumar , SDM Sanjay Kumar Nirala and others at Samaharnalaya Campus Madhepura.
DM Md.Sohail departing AC Coach of Freedom Fighters in presence of DDC Mithilesh Kumar , Dr.Bhupendra Madhepuri , NDC Mukesh Kumar , Lab Superintendent Subodh Kumar , SDM Sanjay Kumar Nirala and others at Samaharnalaya Campus Madhepura.

बता दें कि मधेपुरा समाहरणालय परिसर में रविवार को सवेरे जब जिले से जाने योग्य सेनानियों को उनके परिजनों के साथ एसी कोच में सारी सुविधाओं, डॉक्टरों सहित एक एम्बुलेंस देकर संवेदनशील जिलाधिकारी मो.सोहैल द्वारा हरी झंडी दिखाने से पूर्व कोच के ड्राइवर को यह कहा जा रहा था – “ये सभी देश के धरोहर हैं….. गाड़ी धीरे चलाना, रोड ब्रेकर पर आहिस्ता पार करना….. जहां रोकने बोले तुरंत रोक देना……. ऐसे भाव के साथ ले जाना जैसे तुम्हारे अपने दादा-दादी या चाचा-चाची ……हों” –  को सुनकर सभी संवेदनशील आत्माओं के धारकों की आंखें कुछ देर के लिए नम हो गईं | डीएम मो.सोहैल ने आगे यह भी कहा कि वापस आने पर सबों को जिला अतिथिगृह में ठहराने और भोजन कराने की समुचित व्यवस्था रहेगी…….  फिर  ससम्मान उन्हें अपने गंतव्य तक पहुंचा दिया जायेगा |

DM Md.Sohail (IAS) discussing with Educationist Dr.Bhupendra Madhepuri regarding arrangement of "Gandhiyan Vyakhyan Mala" in all the 13 blocks of the District Madhepura.
DM Md.Sohail (IAS) discussing with Educationist Dr.Bhupendra Madhepuri regarding arrangement of “Gandhiyan Vyakhyan Mala” in all the 13 blocks of the District Madhepura.

यह भी जानिए कि जिले के डायनेमिक डीएम मो.सोहैल ने लगे हाथ शिक्षाविद समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी से कहा कि गांधी व्याख्यानमाला के लिए कुछ विद्वान लोगों की टीम बनाएं और स्थानीय कला भवन में 17 अप्रैल को एवं निर्धारित कार्यक्रमानुसार सभी प्रखंडों में भिन्न-भिन्न तिथियों और अलग-अलग महीनों में वहां के बीडीओ, सीओ, प्रमुख व मुखियागणों के सहयोग से गांव के लोगों तक बापू के विचारों को फैलाव दें | डीएम मो.सोहैल ने डॉ.मधेपुरी से यह भी कहा कि आने-जाने व अन्य आवश्यक व्यवस्था जिला प्रशासन द्वारा की जायेगी |

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योगीजी, सबसे पहले इस बच्चे की शर्ट का ताला खोलें

स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे किसी से डरें या न डरें लेकिन अपने शिक्षकों की डांट का डर उनमें हमेशा बना रहता है। इसी डांट से बचने के लिए सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला एक बच्चा अपनी शर्ट का बटन टूट जाने पर उसकी जगह ताला लगाकर स्कूल पहुंच गया। ताला इसलिए कि उसके पास न तो दूसरी शर्ट थी और न ही वर्षों से पहनी जा रही अपनी एकमात्र शर्ट में लगाने को बटन। उसी शर्ट के एक और बटन की जगह उसने तार बांध कर काम चलाया, पर दूसरे बटन के लिए उस मासूम को शायद तार भी नहीं मिला और उसे ताले का सहारा लेना पड़ा।

बहरहाल, इंटरनेट पर शर्ट में ताला लगाए जिस बच्चे की तस्वीर वायरल हो रही है, वो बच्चा यूपी का है, उस यूपी का जिसका पिछले पांच साल से अखिलेश यादव ‘विकास’ कर रहे थे और अब जिसके ‘विकास के रोडमैप’ का डंका योगी आदित्यनाथ पीट रहे हैं। शत्रुहन निषाद नाम का ये बच्चा बांदा जिले के मोगरिया गांव स्थित एक माध्यमिक स्कूल में कक्षा छह का छात्र है। इसके पास एक ही स्कूल ड्रेस है जो उसे कई साल पहले स्कूल से मिली थी। अब ये ड्रेस घिसकर फटने लगी है और इसके बटन भी निकलने लगे हैं।

शर्ट में ताले के पीछे की कहानी कुछ यूं है कि निर्धन परिवार से ताल्लुक रखने वाले शत्रुहन को स्कूल जाना था लेकिन उसने देखा कि शर्ट का बटन टूटा है। घर में बटन लगाने को था नहीं और छुट्टी वो करना नहीं चाहता था। मास्टरजी की डांट का डर था सो अलग। शत्रुहन आखिर करता भी क्या? उसने बटन की जगह ताला लगा लिया। उसे लगा कि यह बटन की जगह काम करेगा और मास्टरजी उसे डांटेंगे या पीटेंगे नहीं। शर्ट में एक और जगह बटन नहीं था, वहां उसने बड़े जतन से तार बांध दिया। इसके आगे जब वह इस हालत में स्कूल पहुंचा तो उसके शिक्षक ने उसकी तस्वीर ले ली। अब वही तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।

जरा सोचिए, यूपी समेत तमाम राज्यों में स्कूलों और बच्चों के लिए कितनी सारी योजनाएं चला करती हैं। इन योजनाओं में पैसा पानी की तरह बहाया जाता है। पर असल में उन जरूरतमंदों तक सरकार द्वारा घोषित सुविधाओं का प्रचार तो पहुंच जाता है, पर सुविधाएं शायद ही पहुंचती हैं। अगर नहीं, तो शत्रुहन की फटी शर्ट पर ताला लगा होने के बावजूद असलियत यूं झांक नहीं रही होती।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप  

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क्या है ‘मदर ऑफ ऑल बम्स’?

कुख्यात अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी संगठन आईएसआईएस के खिलाफ अमेरिका ने अब तक के सबसे बड़े हथियार का इस्तेमाल किया है। जी हां, अमेरिका ने बीते गुरुवार को अफगानिस्तान के नंगरहार प्रोविंस में अचिन जिले की गुफाओं में (जो कि पाकिस्तान बॉर्डर के पास है) छिपे बैठे आईएसआईएस आतंकियों के खिलाफ सबसे बड़े गैर परमाणु बम जीबीयू-43 का इस्तेमाल किया, जिसमें 90 से ज्यादा आतंकी मारे गए। खास बात यह कि अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने इस बम को ‘मदर ऑफ ऑल बम्स’ बताया। आपने भी अखबारों व चैनलों में इस बम के बारे में पढ़ा-सुना होगा और किसी बम के लिए ‘मदर’ संज्ञा के प्रयोग से चौंके भी होंगे। लेकिन क्या आप बता सकते हैं कि आखिर जीबीयू-43 नाम का ये बम क्यों ‘मदर ऑफ ऑल बम्स है’? चलिए, जानने की कोशिश करते हैं।

जाहिर है, इस सबसे बड़े बम की ऊपर दी हुई तस्वीर आपने देख ही ली होगी, इसीलिए शुरुआत करते हैं इसके वजन से। तो जनाब दिल थाम कर सुनें। इस भीमकाय बम का वजन है 21600 पाउंड यानि 9797 किलो। यह जीपीएस आधारित गैर परमाणु बम है, जिसे अफगानिस्तान में लॉकहीड एमसी-130 एयरक्राफ्ट से गिराया गया। इस बम को अमेरिकी सेना के लिए अल्बर्ट वीमोर्ट ने विकसित किया था।

बता दें कि इस बम का पहला टेस्ट आज से 14 साल पहले 2003 में किया गया था। याद दिला दें कि यह साल इराक युद्ध का था। इसालिए टेस्ट के बाद इस बम को इसी युद्ध के दौरान बना भी लिया गया, लेकिन इसका इस्तेमाल नहीं किया गया। अमेरिकी वायुसेना के अनुसार पिछली बार जब ‘मदर ऑफ ऑल बम्स’ का टेस्ट किया गया था तब 20 मील यानि करीब 32 किलोमीटर दूर से भी एक बड़े मशरूम के आकार का धुआं उठते देखा गया था।

कुल मिलाकर यह कि अपने आकार, वजन और मारक क्षमता के कारण ही जीबीयू-43 ‘मदर ऑफ ऑल बम्स है’। पर बताया जाता है कि अमेरिकी के चिर प्रतिद्वंद्वी रूस ने अमेरिका के इस बम का जवाब देने के लिए ‘फादर ऑफ ऑल बम्स’ विकसित किया है, जो तथाकथित रूप से ‘मदर ऑफ ऑल बम्स’ से चार गुणा ज्यादा शक्तिशाली है।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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मधेपुरा में पहली बार मनी बी.पी.मंडल की पुण्यतिथि

सामाजिक न्याय के पुरोधा बी.पी.मंडल की जयन्ती स्थानीय बुद्धिजीवियों एवं समाजसेवियों द्वारा शुरू से ही मनाई जा रही है | कालान्तर में जहाँ केंद्र सरकार द्वारा उनके नाम पर डाक टिकट जारी किया गया वहीं बिहार सरकार द्वारा राजकीय जयन्ती घोषित की गयी |

तभी से जिला प्रशासन द्वारा प्रत्येक वर्ष 25 अगस्त को उनके पैतृक गांव ‘मुरहो‘ में उनके समाधि-स्थल के पास उनकी राजकीय जयन्ती जिलाधिकारी की अध्यक्षता में उत्सवी माहौल में मनाई जाने लगी है | इस समारोह में राष्ट्रीय स्तर के नेता वी.पी.सिंह, शरद यादव, रामविलास पासवान……. आदि से लेकर राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव सहित प्रतिवर्ष एक मंत्री आते ही रहे हैं | अब केवल शेष रह गया हैं- उन्हें ‘भारत रत्न’ से सम्मानित करना जिसके लिए मधेपुरा के समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी व अन्य बराबर आवाज उठाते रहते हैं |

Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri paying venerable respect to the statue of Social Reformer B.P.Mandal at BP Mandal Chowk Near Samaharnalaya Madhepura.
Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri paying venerable respect to the statue of Social Reformer B.P.Mandal at BP Mandal Chowk Near Samaharnalaya Madhepura.

उसी मंडल मसीहा को उनकी पुण्यतिथि (13 अप्रैल) पर पहली बार याद किया है मधेपुरा के डायनेमिक डीएम मो.सोहैल ने | डीएम के नेतृत्व में जहाँ प्रशासन की ओर से एसपी विकास कुमार, डी.डी.सी. मिथिलेश कुमार, एडीएम मो.मुर्शीद अहमद, डीपीआरओ मो.क्यूम अंसारी, श्रम अधीक्षक सुबोध कुमार, अंचलाधिकारी मिथिलेश कुमार, एनडीसी मुकेश कुमार आदि की उपस्थिति रही वहीं दूसरी ओर बुद्धिजीवियों एवं समाजसेवियों की ओर से डॉ.अरुण कुमार मंडल, पूर्व विधायक मणिन्द्र कुमार मंडल उर्फ ओमबाबू, डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी , प्रो.श्यामल किशोर यादव, मो.शौकत अली एवं अन्य की उपस्थिति प्रातः 10:00 बजे से पूर्व से ही बी.पी.मंडल चौक पर देखी गई |

बता दें कि डीएम मो.सोहैल (भा.प्र.से.) की मंडल चौक पर आने से पूर्व उपस्थित जनों से डी.एम. से हुई बातों की चर्चा करते हुए समाजसेवी डॉ.मधेपुरी ने कहा कि यदि सबों का सहयोग उन्हें (डी.एम को)  मिले तो वे मंडल समाधि-स्थल को भव्य संग्रहालय के अतिरिक्त अन्य उत्कृष्ट पुरातात्विक सामग्रियों से सजाकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर की ऊंचाई प्रदान कर सकते हैं |

यह भी जानिए कि डीएम मो.सोहैल ने समाहरणालय के समीप वाले बी.पी. मंडल चौक स्थित उनकी आदमकद प्रतिमा पर श्रद्धांजलि स्वरुप सर्वप्रथम माल्यार्पण किया और तत्पश्चात उपस्थित सभी पदाधिकारियों एवं समाजसेवियों द्वारा सामाजिक न्याय के उस पुरोधा बी.पी.मंडल को श्रद्धा पूर्वक पुष्पांजलि अर्पित की गई |

इसी के साथ मीडिया कर्मियों की उपस्थिति में कार्यक्रमों की समाप्ति की घोषणा की गई |

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अब मोदी ने लालू को 21वीं सदी का सबसे बड़ा जमींदार बताया

भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने लालू प्रसाद यादव पर फिर बड़ा हमला करते हुए कहा कि वे 21वीं सदी के सबसे बड़े जमींदार हैं। बकौल मोदी उनकी एक जगह नहीं, कई जगहों पर जमीन है। फर्जी कंपनी बनाकर वे जमीन हड़पने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राजद सुप्रीमो की तीस कंपनियां हैं, जिनका रजिस्ट्रेशन मात्र तीन पतों पर है। ये कंपनियां काले धन को सफेद करती हैं।

गौरतलब है कि मोदी लालू और उनके परिवार पर एक के बाद एक घोटाले का आरोप लगा रहे हैं। पहले उन्होंने मिट्टी घोटाले का आरोप लगाया, फिर जमीन घोटाले की बात कही। उसके बाद कहा कि लालू ने बिहटा में शराब फैक्ट्री खुलवाकर करोड़ों की संपत्ति बनाई। सिर्फ 55 हजार निवेश कर करोड़ों की जमीन के मालिक बन गए वगैरह-वगैरह।

प्रश्न उठता है कि लालू पर लगातार हमलावर मोदी को दस्तावेजी सबूत आखिर मिल कहां से रहे हैं? कुछ लोगों का मानना है कि इसके पीछे बीएसएससी घोटाले में आईएएस सुधीर कुमार की गिरफ्तारी के से उपजी आईएएस लॉबी की नाराजगी है। जेडीयू से भाजपा में आए ज्ञानेन्द्र सिंह ज्ञानू का भी कहना है कि कुछ अधिकारी मोदी के मददगार बने हुए हैं। स्वयं सुशील कुमार मोदी भी दावा कर रहे हैं कि बिहार सरकार में शामिल लोग ही उनकी मदद कर रहे हैं।

बहरहाल, इन सारे घटनाक्रम के मद्देनज़र अब कई लोग दबी जुबान से लालू-नीतीश के संबंधों में आई खटास को इन सबकी वजह बता रहे हैं। कहने की कोई जरूरत नहीं कि अगर इस कयास में थोड़ी भी सच्चाई है तो इसका अर्थ यह है कि महागठबंधन सरकार संकट में है।

उधर राजद सुप्रीमो ने अपनी पार्टी के सारे प्रवक्ताओं को बुलाकर कहा कि इन आरोपों से हतोत्साहित होने की जरूरत नहीं है। बकौल लालू तेजस्वी और तेजप्रताप की बढ़ती लोकप्रियता से घबराकर सुशील मोदी अनर्गल और असंगत आरोप लगा रहे हैं। लालू ने यह भी कहा कि इन आरोपों में कोई दम नहीं है। ये सब उनकी और उनके परिवार की छवि खराब करने की साजिश है। यही नहीं, कहा तो यहां तक जा रहा है कि लालू ने अपने सारे प्रवक्ताओं को स्वयं ट्रेनिंग भी दी कि मीडिया में इन आरोपों का किस तरह मंहतोड़ जवाब दिया जाय।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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नीतीश ने की दहेज लेने वालों की शादियों में न जाने की अपील

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लोगों से दहेज लेने वालों की शादी में शिरकत नहीं करने की अपील की है। उन्होंने दो टूक कहा कि ऐसी शादियों में मत जाइए। बाल विवाह जैसी कुप्रथा को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत है। बता दें कि नीतीश मंगलवार को मुजफ्फरपुर के लंगट सिंह कॉलेज परिसर में चंपारण सत्याग्रह स्मृति वर्ष, 2017 को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि राज्य में पूर्ण शराबबंदी, फिर नशाबंदी और अब दहेजबंदी लागू कराना है। चंपारण सत्याग्रह के सौवें वर्ष में बापू को यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

इस मौके पर मुख्यमंत्री ने 2019 में महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर देश में पूर्ण शराबबंदी लागू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसके लिए अभी से तैयारी करें, तभी 2019 तक यह संभव हो पाएगा। नीतीश प्रधानमंत्री को याद कराना नहीं भूले कि वे उस राज्य से आते हैं, जहां राज्य के स्थापना काल से शराबबंदी लागू है। लगे हाथ उन्होंने प्रधानमंत्री से यह आग्रह भी किया कि कुछ राज्य शराबबंदी पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद स्टेट हाइवे को डिनोटिफाइ कर परिवर्तित करने में जुट गए हैं। इस पर तत्काल रोक लगाई जानी चाहिए। केंद्र सरकार हस्तक्षेप करे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ऐसे तिकड़म लगाने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने बिहार में पूर्ण शराबबंदी के बाद सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में आई कमी की चर्चा भी की और शराबबंदी के बाद राज्य को हुए लाभ व उपलब्धियां गिनाईं। इशारों ही इशारों में उन्होंने विपक्ष की जमकर खबर ली और कहा – ‘पूर्ण शराबबंदी कानून को तालिबानी कानून बताने वालों की अब बोलती बंद हो गई है’। नीतीश ने स्वामी विवेकानंद को उद्धृत करते हुए कहा कि किसी भी बड़े और सार्थक प्रयास का पहले मजाक उड़ाया जाता है, फिर विरोध होता है और धीरे-धीरे लोग साथ आ जाते हैं। अब हमारा मकसद गांधी के संदेशों और विचारों को घर-घर तक पहुंचाना है। अगर दस प्रतिशत युवाओं तक यह संदेश हम पहुंचाने में सफल रहे तो यह प्रयास सार्थक साबित होगा।

बकौल नीतीश नई पीढ़ी को गांधी के विचारों से जोडऩा ही अब उनका मकसद है। उम्मीद की जानी चाहिए कि शराबबंदी के बाद वे जिस तरह दहेजबंदी के विरुद्ध कमर कस कर लग चुके हैं, इसके सुखद परिणाम से भी हम बहुत जल्द रू-ब-रू हो सकेंगे।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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और इस तरह राम के भाई थे हनुमान

चलिए, हनुमान जयंती के पावन अवसर पर एक अद्भुत कथा से अवगत कराएं आपको। ये कथा न केवल भगवान राम और उनके सर्वप्रिय भक्त हनुमान से जुड़ी है, बल्कि मधेपुरा के समीप स्थित प्रसिद्ध सिंहेश्वर स्थान से भी जुड़ी है।

पूरी दुनिया राम और हनुमान के बीच भगवान और भक्त का रिश्ता जानती है, है भी। सच तो यह है कि भक्ति में हनुमान की कोई सानी ही नहीं। यह भी सच है कि मर्यादापुरुषोत्तम राम अपने इस भक्त को भाई से कम नहीं मानते थे। उन्होंने अपने मुख से कहा है – तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई। अर्थात् हे हनुमान तुम मुझे मेरे भाई भरत जैसे ही प्रिय हो। चाहे वाल्मीकि रामायण हो, चाहे तुलसीदासरचित रामचरितमानस या रामायण के अन्य सैकड़ों संस्करण, राम और हनुमान के बीच का यह स्नेह सर्वत्र वर्णनातीत है। न तो उसे शब्दों में बांधा जा सकता है और न ही वो किसी संबंधविशेष के दायरे में समा सकता है। फिर भी ये जानना खासा दिलचस्प होगा कि राम और हनुमान केवल भावना से नहीं, रिश्ते से भी भाई थे। भले ही इनकी मुलाकात सुग्रीव के सौजन्य से पहली बार ऋष्यमूक पर्वत पर हुई हो, पर सच यह है कि विधाता ने इनका रिश्ता जन्म के पहले ही जोड़ दिया था। चलिए जानते हैं कैसे।

जैसा कि हम सभी जानते हैं, राजा दशरथ ने पुत्रप्राप्ति की कामना से ऋष्य़ श्रृंग, जिनका आश्रम मधेपुरा के समीप स्थित सिंहेश्वर में था, को बुलाकर पुत्रेष्ठि यज्ञ करवाया था। इस यज्ञ के पूर्ण होने पर अग्निदेव एक पात्र में खीर लेकर प्रकट हुए, जो राजा दशरथ की तीनों रानियों को खाना था। राजा दशरथ ने यह खीर अभी तीनों रानियों को दिया ही था कि एक पक्षी अचानक आया और खीर का पात्र लेकर उड़ चला। तीनों रानियों के खा लेने के बाद भी खीर के कुछ दाने उस पात्र में रह गए थे। संयोगवश पक्षी के मुंह से खीर का वह पात्र छूट गया और हनुमानजी की माता अंजनी की गोद में जा गिरा जो उस समय स्वयं पुत्र की कामना से तपस्या कर रही थीं। माता अंजनी ने उस खीर को भगवान शिव का प्रसाद समझकर खा लिया और उस खीर के प्रताप से दशरथ की तीनों रानियों की तरह वो भी गर्भवती हो गईं।

समय आने पर दशरथ के घर राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघन का जन्म हुआ, तो दूसरी ओर माता अंजनी ने हनुमान को जन्म दिया। इस तरह भगवान राम और उनके अप्रतिम भक्त हनुमान के बीच एक अनजाना रिश्ता जुड़ा था, जो भाई-भाई का था। इस बात की सत्यता इससे भी प्रमाणित होती है कि राम और हनुमान के जन्मदिवस में मात्र छह दिनों का अंतर है।

सौजन्य: मंटो बाबू

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