शिव की ज्योति से प्रकाशमय बनेगा सिंहेश्वर स्थान !

मान्यता है कि सृष्टि के प्रारंभ से ही फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी के दिन मध्यरात्रि को भगवान शंकर रुद्र रूप में अवतरित होकर तांडव करते हुए त्रिनेत्र की ज्वाला से ब्रह्मांड को समाप्त कर दिये थे जिसके चलते इसे महाशिवरात्रि अथवा ‘कालरात्रि’ भी कहा गया | प्रत्येक साल होने वाली 12 शिवरात्रियों में से महाशिवरात्रि को सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना जाता रहा है |

बता दें कि इसी दिन भगवान शिव और उनकी पत्नी जगतजननी माता पार्वती की पूजा उनके विवाहोत्सव के रूप में समस्त श्रद्धालुओं द्वारा श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनायी जाती है | मान्यता यह भी है कि जटा में गंगा, गला में नाग, कंठ में विष……. आदि अमंगल रूप वाले शिव अपने भक्तों का मंगल करते हैं | शिव की भक्ति करनेवाला प्रत्येक जन- पाता है सुख, समृद्धि और धन |

आगे 24 फरवरी को महाशिवरात्रि एवं नीतीश सरकार द्वारा उद्घोषित त्रिदिवसीय (25-27 फरवरी) सिंहेश्वर महोत्सव के आयोजन हेतु की गई समीक्षा बैठक की अध्यक्षता जिले के डायनेमिक डी.एम. मो.सोहैल ने शिव की नगरी सिंहेश्वर-स्थान के “बाबा भोलेनाथ प्रतिमा सिंह धर्मशाला” परिसर में की जिसमें सिंहेश्वर पंचायत के मुखिया, प्रखंड प्रमुख एवं समाजसेवी जदयू नेता सियाराम यादव, ट्रस्ट के सदस्य डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी, सरोज सिंह, कन्हैया कुमार, विश्वेन्द्र ना.ठाकुर, मुन्ना कुमार, व्यापार संघ के महासचिव अशोक भगत, डॉ.आनंद भगत, राजीव भगत, पंकज भगत, दीपक भगत, हरेंद्र प्र. मंडल सहित अन्य गण्यमान्य उपस्थित थे |

सिंहेश्वर मेला एवं महोत्सव पर विस्तृत रूप से चर्चा की- डीएम मो.सोहैल (भा.प्र.से.), एसपी विकास कुमार (भा.पु.से.) , डी.डी.सी. सह ट्रस्ट सचिव मिथिलेश कुमार, एस.डी.एम. संजय कुमार निराला, मंदिर न्यास समिति के सदस्य एवं जिला के स्थाई कला समिति के सदस्य डॉ.मधेपुरी, कलामंच के कार्यकारी अध्यक्ष पृथ्वीराज यदुवंशी,  बीडीयो अजीत कुमार, सीओ जेके सिंह, थानाध्यक्ष बी.डी. पंडित सहित उपस्थित अधिकारी एवं विभिन्न युवा संगठनों के कार्यकर्तागण आदि ने |

इस अवसर पर डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी द्वारा भरपूर रोशनी की व्यवस्था एवं मोबाइल शौचालय की बातें ज्योंही कही गई कि डीएम मो.सोहैल ने विद्युत विभाग के कनीय पदाधिकारी को तुरंत आदेश दिया कि विगतवर्ष की तरह 80 हजार रुपए का बल्ब पूरे परिक्षेत्र में समय से पूर्व लगा दें और साथ ही दो मोबाइल शौचालय की स्वीकृति भी दे दी |

स्थानीय जनप्रतिनिधियों मुखिया, प्रमुख सहित ट्रस्ट के मैनेजर उदय कान्त झा, मनोज कुमार झा कैशियर आदि को वाहन आवागमन एवं भक्तों की भीड़ को कंट्रोल करने हेतु बैरिकेटिंग करने एवं देखरेख करने की जिम्मेदारी दी गई | सीसीटीवी कैमरा, हर जगह रोशनी, कुछ विशिष्ट भक्तों के लिए टेंट लगाने सहित सभी आवश्यक छोटे-बड़े काम को बाँटते हुए डी.एम मो.सोहैल ने उपस्थित गणमान्यों से सुझाव मांग-मांग कर- सभी सुझावों का समुचित समाधान इस प्रकार किया कि उपस्थित सुधीजनों को ऐसा लगने लगा कि मधेपुरा डी.एम. मो.सोहैल हर किसी से आगे बढ़कर भारतरत्न डॉ.ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जैसे शिव भक्त हैं |

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मुख्यमंत्रीजी, शराब पीने पर ऐसी सजा तो चरित्रहीनता पर…?

अगर आप सरकारी कर्मचारी हैं तो शराब को भूल जाइए – न केवल ड्यूटी पर बल्कि ड्यूटी के बाद भी और न केवल बिहार में बल्कि बिहार के बाहर भी। जी हाँ, अगर आप कभी भी और कहीं भी शराब या ड्रग्स के साथ देखे गए तो आप अपनी नौकरी से हाथ धो सकते हैं। ये नया फरमान बिहार सरकार का है, जिसे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हरी झंडी दे दी है।

गौरतलब है कि बुधवार को नीतीश कुमार ने बिहार सरकार के एंप्लायी कंडक्ट रूल्स, 1976 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए सरकारी कर्मचारियों के लिए कई निषेधात्मक प्रावधान जोड़े जाने को स्वीकृति दे दी है। सरकार ने राज्य में पहले से लागू शराबबंदी को और मजबूती देने के लिए यह कदम उठाते हुए सरकारी कर्मचारियों व न्यायिक अधिकारियों के शराब पीने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी है।

इस मौके पर पत्रकारों को संबोधित करते हुए कैबिनेट सचिव बृजेश महरोत्रा ने बताया कि मूल नियमों के मुताबिक ड्यूटी पर कोई सरकारी कर्मचारी नशा नहीं कर सकता था, लेकिन संशोधन के बाद अब वह कहीं भी मादक पदार्थों का सेवन नहीं कर सकता। नियम का उल्लंघन करने वाले पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी और सजा के तौर पर नौकरी तक जा सकती है। बिहार के सरकारी कर्मचारियों को न सिर्फ अपने राज्य में बल्कि अन्य राज्यों में भी नियम तोड़ते हुए पाए जाने पर सजा भुगतनी पर सकती है।

बहरहाल, इसमें कोई दो राय नहीं कि शराबबंदी के मामले में बिहार सरकार और इसके मुखिया ने जैसी प्रतिबद्धता दिखाई है उसकी देश और दुनिया भर में प्रशंसा हो रही है। लेकिन क्षमायाचना के साथ कहना चाहूंगा कि इस नए फरमान में ‘प्रतिबद्धता’ कम और ‘सनक’ ज्य़ादा दिख रही है। अभी ज्यादा दिन नहीं हुए जब दलविशेष से जुड़े कुछ लोग उत्तर प्रदेश और झारखंड में नशे में पाए गए थे। तो क्या उनके पद और अधिकार भी छीन लिए गए?

सच तो यह है कि केवल शराब से चरित्र और व्यक्तित्व का निर्धारण हरगिज नहीं हो सकता। डंडे के जोर पर तो और भी नहीं। आदतें न तो एक दिन में बनती हैं और न एक दिन में छूटती ही हैं। क्या सरकार और प्रशासन के लोग इस बात से अनभिज्ञ हैं कि सामर्थ्यवान लोगों के लिए शराब अभी भी सुलभ है? हाँ, ये जरूर है कि उन्हें कीमत पहले से अधिक चुकानी पड़ती है।

शराबबंदी अच्छी चीज है। सरकार उस पर जरूर कायम रहे। नैतिकता की बात वो करे, लेकिन व्यावहारिकता के साथ। इस तरह नहीं कि सामने वाला ‘प्रतिक्रिया’ कर बैठे। वैसे इस ‘प्रतिक्रिया’ को कुछ लोग ‘विद्रोह’ की संज्ञा भी देते हैं।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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कोसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से नामांकन किया डॉ.संजीव ने

भारत निर्वाचन आयोग के निदेश पर बिहार के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी अजय नायक ने बिहार विधान परिषद की 4 सीटों के चुनाव की अधिसूचना जारी कर दी | इन चारों सीटों पर 13 फरवरी से ही नामांकन की प्रक्रिया शुरु हो गई है | नामांकन की अंतिम तारीख 20 फरवरी है |

यह भी बता दें कि विधान परिषद के इन 4 सीटों में दो (गया और सारण) स्नातक निर्वाचन क्षेत्र हैं एवं दो (गया और कोसी) शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र घोषित है |

The Unbelievable festival like scene of "Namankan Samaroh" of Dr.Sanjeev Kumar Singh at Purnea Kala Bhawan , Purnea.
The Unbelievable festival like scene of “Namankan Samaroh” of Dr.Sanjeev Kumar Singh at Purnea Kala Bhawan , Purnea.

याद कर लें कि इन चारों सीटों के लिए 9 मार्च को मतदान होगा तथा मतदान की अवधि होगी प्रातः 8 बजे से संध्या 4 बजे तक |

यह भी याद कर लें कि इस चुनाव में वोटिंग के लिए ईवीएम मशीन नहीं रहेगी बल्कि रोमन लिपि में वरीयता क्रम (I, II, III……) में प्रथम वरीयता(I) उसी संजीव कुमार सिंह के नाम के सामने मतदान केंद्र पर रखे गये ‘पेन’ से ही अंकित कर मत-पत्र को पूर्व की भांति मोड़कर बक्से में डालेंगे या इच्छानुसार किसी भी प्रत्याशी को कोई अन्य वरीयता देकर डालेंगे |

कोसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का यह वही जाना-पहचाना हर दिल अजीज संजीव कुमार सिंह है, जो पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय पटना के राम रतन सिंह कॉलेज के अंग्रेजी विभाग के सहायक प्राध्यापक हैं, जो भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय एवम तिलकामांझी विश्वविद्यालय भागलपुर के सीनेट व सिंडीकेट के सदस्य के साथ-साथ बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर (भागलपुर) के प्रबंधन-मंडल के माननीय सदस्य भी हैं तथा कोसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के मतदाताओं के स्नेह-प्यार और आशीर्वाद से अभिभूत होकर तीसरी बार विधान परिषद की इस जगह के लिए उम्मीदवार के रुप में बुधवार को नामांकन पत्र दाखिल कर चुके हैं | यह वही उम्मीदवार हैं जिनका मकसद है- “शिक्षकों से जुड़ी समस्याओं का अहर्निश समाधान !”

बता दें कि नामांकन-पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि 20 फरवरी एवं नामांकन पत्र की जांच 21 फरवरी निर्धारित है | 23 फरवरी को नामांकन पत्र वापस लेने की अंतिम तिथि है | याद कर लें कि 9 मार्च को मतदान होगा-प्रातः 8 बजे से संध्या 4 बजे तक | ग्रामीण क्षेत्रों के शिक्षक मतदाता अपने प्रखंड कार्यालय में तथा नगर परिषद क्षेत्र के मतदाता अनुमंडल कार्यालय में मतदान करेंगे | मतगणना के लिए 15 मार्च निर्धारित है और उसी दिन चुनाव-परिणाम भी घोषित कर दिया जायगा |

Madhyamic Teachers, College Teachers, Principals & retired University Officers along with Ex-Vice Chancellor Dr.Indubala Singh of B.N.Mandal University Madhepura..........attending the Nomination Samaroh of Dr.Sanjeev Kumar Singh at Kala Bhawan, Purnea.
Madhyamic Teachers, College Teachers, Principals & retired University Officers along with Ex-Vice Chancellor Dr.Indubala Singh of B.N.Mandal University Madhepura……….attending the Nomination Samaroh of Dr.Sanjeev Kumar Singh at Kala Bhawan, Purnea.

और चलते-चलते यह कि इंटर की परीक्षा में शिक्षकों की व्यस्तता के बावजूद नामांकन का नजारा देखने लायक था | अद्वितीय ! अभूतपूर्व !! कमिश्नरी कार्यालय से लेकर पूर्णिया कला भवन तक जाम ही जाम ! कोसी, पूर्णिया, भागलपुर, मुंगेर कमिश्नरियों के कुल 14 जिलों के माध्यमिक शिक्षकों एवं संगठनों से जुड़े स्कूल कॉलेज एवं विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों के साथ-साथ विश्वविद्यालय के पूर्व अधिकारी व पदाधिकारी एवं शिक्षकों के हित में मुस्तैदी से काम करनेवाली पूर्णिया महिला कॉलेज की प्राचार्या व बीएन मंडल विश्वविद्यालय के कुलपति रह चुकी डॉ.इन्दुबाला सिंह सरीखों की ऐसी भीड़ कि इस बार भी संजीव कुमार सिंह शिक्षकों की समस्याओं के निराकरण की संजीवनी बनने के लिए बिहार विधान परिषद के सदस्य चुने जायेंगे ही जायेंगे- चारों तरफ से यही आवाज हमेशा गूंजती रही |

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अमेरिका-29, रूस-37, भारत-104 : अंतरिक्ष में छा गए हम

इसरो ने इतिहास रच दिया। आंध्र प्रदेश स्थित श्रीहरिकोटा स्पेस सेंटर से एक ही रॉकेट से अंतरिक्ष में 104 सैटेलाइट छोड़कर अमेरिका और रूस को कोसों पीछे छोड़ दिया इसरो ने। अभी तक एक साथ सबसे ज्यादा 37 सैटेलाइट छोड़ने का रिकॉर्ड रूस के नाम था। अमेरिका ने एक साथ 29 सैटेलाइट ही लॉन्च किया है और इस तरह वो तीसरे नंबर पर है।

बता दें कि पीएसएलवी-सी-37 कार्टोसैट-2 सीरीज सैटेलाइट मिशन को श्रीहरिकोटा से भारतीय समयानुसार सुबह 9 बजकर 28 मिनट पर प्रक्षेपित किया गया। पहले 714 किलोग्राम वजन वाले कॉर्टोसैट -2 सीरीज के सैटेलाइट को पृथ्वी पर निगरानी के लिए प्रक्षेपित किया गया। इसके बाद 103 नैनो सैटेलाइट को पृथ्वी से करीब 520 किलोमीटर दूर पोलर सन सिंक्रोनस ऑर्बिट में एक-एक कर प्रविष्ट कराया गया।  सभी सैटेलाइट 28 मिनट बाद 9 बजकर 56 मिनट पर ऑर्बिट में सफलतापूर्वक प्रक्षेपित हो गए।   गौरतलब है कि इन सभी सैटेलाइट को जिस पीएसएलवी-सी-37 रॉकेट से छोड़ा गया, उस रॉकेट का यह 39वां मिशन था।

मंगलयान की कामयाबी के बाद हमारी विश्वसनीयता और स्वीकार्यता किस कदर बढ़ गई है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसरो की कमर्शियल इकाई ‘अंतरिक्ष’ को लगातार विदेशी सैटेलाइट लॉन्च करने के ऑर्डर मिल रहे हैं। याद दिला दें कि इसरो ने पिछले साल भी जून में एक साथ 20 सैटेलाइट लॉन्च किया था। इन 20 सैटेलाइट समेत इससे पहले 50 विदेशी सैटेलाइट इसरो लॉन्च कर चुका था। इस बार भी जो नैनो सैटेलाइट छोड़े गए हैं उनमें से 101 विदेशी हैं। इसरो के मुताबिक जिन देशों ने अपने सैटेलाइट को इसरो की मदद से अंतरिक्ष में भेजा है उनमें इजरायल, कजाखिस्तान, यूएई के साथ नीदरलैंड, स्विट्जरलैंड और अमेरिका जैसे देश भी शामिल हैं।

बहरहाल, इसरो की बेमिसाल कामयाबी से पूरा देश गौरवान्वित है। स्पेस तकनीक के मामले में यह लगातार नए कीर्तिमान बना रहा है। खास तौर पर कम कीमत पर लॉन्चिंग को लेकर इसने दुनिया भर की स्पेस एजेंसियों को पीछे छोड़ दिया है। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत तमाम बड़ी हस्तियों ने इसरो को उसकी उपलब्धि के लिए बधाई दी है। अमिताभ बच्चन के उद्गार थे – “भारतीय होने पर गर्व है।” जाहिर है आज हर भारतीय यही कहना चाहेगा।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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और शशिकला से छिन गई परोसी थाली

जयललिता के बाद पार्टी और सरकार की सर्वेसर्वा बनने जा रही शशिकला के आगे से ‘परोसी थाली’ छिन गई। आय से अधिक संपत्ति के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें दोषी करार दिया है। कोर्ट ने उन्हें चार वर्ष की सजा सुनाई है और साथ ही 10 करोड़ का जुर्माना भी लगाया है। माना जा रहा है कि कोर्ट के इस फैसले के बाद तमिलनाडु की सत्ता की कमान अब पन्नीरसेल्वम के हाथों में ही रहेगी। हालांकि शशिकला ने अभी हथियार नहीं डाले हैं। उन्होंने आनन-फानन में अपने समर्थकों के साथ मीटिंग की और पन्नीरस्वामी की पार्टी की प्राथमिक सदस्यता खत्म करने का ऐलान कर ई पलनिसामी को विधायक दल का नेता घोषित कर दिया। वो किसी भी कीमत पर पन्नीरसेल्वम के हाथों मे सत्ता जाने देना नहीं चाहतीं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सदन में कौन अपना बहुमत साबित करता है – ओ पन्नीरसेल्वम या ई पलनिसामी।

बहरहाल, सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में एआईएडीएमके की मौजूदा महसचिव वीके शशिकला को तुरंत सरेंडर करने को कहा है। इस फैसले के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि उनका मुख्यमंत्री बनने का सपना न केवल अभी के लिए बल्कि अगले 10 वर्षों के लिए टूट गया। गौरतलब है कि उन्हें चार वर्षों की सजा मिली है और नियमानुसार इस सजा के छह वर्ष बाद तक वो चुनाव नहीं लड़ सकतीं। इस तरह शशिकला का यह ‘वनवास’ कम-से-कम 10 वर्षों का है। कहने की जरूरत नहीं कि राजनीति में 10 वर्ष कितनी बड़ी अवधि होती है।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर पूरे देश की निगाह लगी थी। इसी फैसले से तय होना था कि तमिलनाडु की राजनीति का ऊँट किस करवट बैठेगा। माना जा रहा था कि राज्यपाल भी इस संभावित फैसले को ध्यान में रखकर ही शशिकला को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित नहीं कर रहे थे। अब जबकि देश की सबसे बड़ी अदालत ने फैसला सुना दिया है, तमिलनाडु का राजनीतिक तापमान बहुत तेजी से बढ़ेगा। एक ओर ई पलनिसामी अपनी रणनीति बनाएंगे, दूसरी ओर पन्नीरसेल्वम नई ऊर्जा के साथ अपनी दावेदारी पेश करेंगे। शशिकला की अनुपस्थिति में उनके समर्थक ई पलनिसामी के साथ खड़े होंगे या पन्नीरसेल्वम के, यह देखने की बात होगी।

चलते-चलते बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की बेंच के दो जजों ने अपने आदेश से पूर्व में दिए हाईकोर्ट के फैसले को निरस्त कर दिया है और ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। आय से अधिक संपत्ति के इस मामले में जयललिता को मुख्य आरोपी और शशिकला को सह आरोपी बनाया गया था। ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में दोनों को दोषी करार देते हुए सजा का ऐलान किया था और जयललिता को कैद के साथ 100 करोड़ जुर्माने की सजा सुनाई थी, जिसे हाईकोर्ट ने पूरी तरह पलट दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने अब हाईकोर्ट के फैसले को निरस्त करते हुए पुन: ट्रायल कोर्ट के फैसले को ही मान्य ठहराया है।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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क्या हम खिमजी प्रजापति नहीं बन सकते?

गुजरात के मेहसाना में रहने वाले खिमजी प्रजापति को रोटरी क्लब ऑफ इंडिया ‘लिट्रेसी हीरो अवार्ड’ से सम्मानित करेगी। आप सोच रहे होंगे कि ये कौन-सी बड़ी ख़बर है जो ‘मधेपुरा अबतक’ वाले परोस रहे हैं! जरा ठहरिए, आप खुद कहेंगे कि ये कितनी बड़ी ख़बर है जब मैं बोलूंगा कि खिमजी प्रजापति एक भिखारी हैं। जी हाँ, भिखारी। धन से गरीब पर मन से इतने अमीर कि आप और हम झेंप जाएं। क्या आप यकीन करेंगे कि 68 साल के प्रजापति लड़कियों को शिक्षा देने के लिए प्रेरित करने हेतु सोने के कुंडल देते हैं। उनकी इस अनोखी समाजसेवा के लिए रोटरी क्लब उन्हें पुरस्कृत कर रहा है। उन्हें 1 लाख रुपये की इनामी राशि के साथ-साथ परोपकार के कार्यों के लिए प्रशंसापत्र भी दिया जाएगा।

बता दें कि रोटरी क्लब ने इस पुरस्कार के लिए खिमजी प्रजापति के अलावा तीन अन्य लोगों और एक संस्थान को भी चुना है। जिन चार लोगों को इस सम्मान के लिए चुना गया है, वे सभी जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता हैं। अकेले प्रजापति हैं जिनके पास कोई संपत्ति नहीं है। उन्हें तो बस देकर खुशी मिलती है। वे कहते हैं कि मैं जब किसी जरूरतमंद को कुछ दे पाता हूं, तब ज्यादा खुश और संतुष्ट महसूस करता हूं।

फरवरी 2016 में प्रजापति का नाम तब सुर्खियों में आया था जब मेहसाना के मागपारा गांव स्थित आंगनबाड़ी स्कूल में पढ़ने वाली 10 लड़कियों को उन्होंने सोने के कुंडल दिए थे। इसके लिए उन्होंने इलाके में स्थित एक जैन मंदिर के बाहर भीख मांगकर पैसे जमा किए थे। समाज के लिए कुछ करने का उनका जुनून यहां रुक नहीं जाता। लड़कियों को स्कूल यूनिफॉर्म देने से लेकर उनका कन्यादान करने तक कई काम करते हैं वे, और बड़ी बात ये कि बिना किसी शोर, बिना किसी प्रचार के। उनकी एकमात्र इच्छा और अपने जीवन से एकमात्र उम्मीद यही है कि बच्चे पढ़ें, युवा पीढ़ी सशक्त बने और सब खुश रहें। कोई जरूरतमंद मिले तो खुले हाथों से वे मदद कर सकें।

खुद को मिल रहे पुरस्कार से उत्साहित खिमजी प्रजापति कहते हैं कि मैं ज़िन्दगी में कभी मेहसाना से बाहर नहीं गया। मैं एक साथ बहुत खुश भी हूं और घबराया हुआ भी। जिस ईश्वर ने मुझे औरों की मदद करने का हौसला दिया, वह मेरी मदद आगे भी करता रहेगा। गौरतलब है कि रोटरी क्लब ऑफ इंडिया का पुरस्कार ग्रहण करने के लिए उन्हें 3 मार्च को चेन्नई जाना है। हवाई जहाज से आने-जाने से लेकर होटल में उनके ठहरने व अन्य सुविधाओं का ध्यान क्लब की ओर से रखा जाएगा।

बहरहाल, खिमजी प्रजापति अपनी अद्भुत समाजसेवा के लिए अपने आसपास के इलाके में पहले से मशहूर थे। आज उनकी कीर्ति की खुशबू बाहर फैलने लगी है और हम-आप उनके बारे में पढ़ और लिख रहे हैं। यहां तक तो ठीक है, लेकिन एक बात मन-मस्तिष्क को लगातार कुरेद रही है और वो ये कि क्या हम खिमजी प्रजापति नहीं बन सकते? क्या आपके पास जवाब है इस सवाल का?

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

 

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प्रभात खबर का सकारात्मक सोच – वृक्षारोपण !

प्रभात खबर के ब्यूरो चीफ रुपेश कुमार रूपक की पूरी टीम द्वारा अपने अखबार का 6वाँ वार्षिकोत्सव इस वर्ष वृक्षारोपण करके मनाया गया | भला क्यों नहीं, वृक्ष खुद धूप में रहकर सबको छाया देता है | समता, सरसता और सद्भाव का संदेश भी देता है | ग्रीन बिहार का सपना पूरा करता है | औषधीय आवश्यकताओं की पूर्ति करने के साथ-साथ पर्यावरण को समृद्ध भी करता है |

इस नायाब कार्यक्रम में जिले के डायनेमिक डी.एम. मो.सोहैल, एसपी विकास कुमार, जिला परिषद अध्यक्षा मंजू देवी, सिविल सर्जन डॉ.गदाधर पांडे, समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी, नगर परिषद अध्यक्ष डॉ.विशाल कुमार बबलू, रेड क्रॉस के सचिव डॉ.अरुण कुमार मंडल, एस.बी.आई. के शाखा प्रबंधक संजय कुमार करण, एएसपी राजेश कुमार, अंचलाधिकारी मिथिलेश कुमार सहित सीएमओ एवं अन्य गणमान्य शामिल हुए |

Zilla Parishad Adhyaksha Manju Devi along with CS Dr. G Pande Mukhya Parshad Dr.Vishal Kumar Babloo, Prabhari Rupesh , Dr.A.K.Mandal & Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri & others engaged in Planting Samaroh organised by Prabhat Khabar.
Zilla Parishad Adhyaksha Manju Devi along with CS Dr. G Pande Mukhya Parshad Dr.Vishal Kumar Babloo, Prabhari Rupesh , Dr.A.K.Mandal & Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri & others engaged in Planting Samaroh organised by Prabhat Khabar.

यह भी जानिये कि वृक्षारोपण का स्थान-सिविल सर्जन कार्यालय के सामने का मैदान- जहाँ छाया की ही नहीं बल्कि सर्वाधिक शुद्ध ऑक्सीजन की जरूरत भी रहती है | मैदान के किनारे-किनारे दर्जनों ‘महोगनी’ के वृक्षों का सुरक्षात्मक उपायों के साथ रोपण किया गया |

जहाँ मो.सोहैल (भा.प्र.से.) ने औषधीय पेड़ ‘अर्जुन’ लगाने की चर्चा करते हुए मोहगनी के पौधे को मिट्टी में, नमी की उपलब्धता प्राप्त होने तक, नीचे ले जाकर रोपने की सलाह दी, वहीं पौधे पर हाथ से मिट्टी डालते हुए कहा कि अंत में सबों को इसी मिट्टी के अंदर चला जाना है | कार्य व्यवस्था के कारण एसपी विकास कुमार (भा.पु.से.) ने संक्षेप में बस यही कहा कि एक वृक्ष को लगाने में केवल दो सौ रूपये लगते हैं परंतु उसके पोषण में सावधानी के साथ-साथ दो हज़ार रूपये तक व्यय करने पड़ते हैं |

On the occasion of Plantation Samaroh organised by Prabhat Khabar DM Md.Sohail, Zila Parishad Adhyaksha Manju Devi, CS Dr.Gadadhar Pandey, Educationist Dr.Bhupendra Madhepuri, ASP Rajesh Kumar & Mukhya Parshad Dr.Vishal Kumar Babloo & others flying balloons in the sky at Madhepura Civil Hospital.
On the occasion of Plantation Samaroh organised by Prabhat Khabar DM Md.Sohail, Zila Parishad Adhyaksha Manju Devi, CS Dr.Gadadhar Pandey, Educationist Dr.Bhupendra Madhepuri, ASP Rajesh Kumar & Mukhya Parshad Dr.Vishal Kumar Babloo & others flying balloons in the sky at Madhepura Civil Hospital.

यह भी जानिये कि सिविल सर्जन डॉ.गदाधर पांडेय, एएसपी राजेश कुमार, जीप अध्यक्ष मंजू देवी सहित उपस्थित गणमान्यों ने डी.एम मो.सोहैल के सुर-में-सुर मिलाते हुए प्रभात खबर के 6वें स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर यही कहते सुना गया कि प्रभात खबर जन समस्याओं को उजागर कर समाज के विकास में अग्रणी भूमिका निभाते हुए दबे-कुचलों की आवाज बन गयी है |

दूसरे चरण में डी.एम. मो.सोहैल एवं उपस्थित गणमान्यों द्वारा सम्मिलित रुप से शांति कपोत की जगह बैलून-गुच्छ उड़ाते देखकर समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी के अंतरमन में यह विचार उठने लगा कि यदि सभी लोग वृक्ष और बैलून की तरह सदा ऊपर की ओर बढ़ता रहा तो समाज शनै:-शनै: कुरीतियों से मुक्त होकर एक-न-एक दिन शक्ति संपन्न अवश्य बनेगा | भला क्यों नहीं, वृक्ष और मनुष्य का गहरा संबंध तो आदिकाल से ही रहा है | भोजन, वस्त्र और आवास जैसी आवश्यक आवश्यकताओं का समाधान मनुष्य के लिए इन वृक्षों ने ही तो किया है | तभी तो वृक्षारोपण को जीवनोपयोगी कार्यक्रम में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है |

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क्या पहले चरण से शुरू हो जाएगी अखिलेश-राहुल की ‘होली’?

यूपी के चुनावी समर के लिए पहला चरण बहुत खास है। अगर कहें कि इस चरण में बाजी मारने वाली पार्टी या गठबंधन के हाथ में देश के सबसे बड़े राज्य की सत्ता की चाबी होगी तो गलत न होगा। इस चरण में यह तय हो जाएगा कि भाजपा अपने 2014 के लोकसभा चुनावों के प्रदर्शन को दुहराती है या सपा-कांग्रेस गठबंधन को निर्णायक बढ़त मिल जाती है? वैसे त्रिकोण बना रहीं मायावती को भी हम नज़रअंदाज नहीं कर सकते, जो अपने परंपरागत वोटों के साथ-साथ इस चुनाव में मुस्लिम वोटरों की पहली पसंद बनकर रेस में आगे निकलने का दावा कर रही हैं।

गौरतलब है कि पहले चरण में जिन 73 सीटों पर मतदान हो रहा है, 2012 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उनमें से मात्र 11 सीटें जीती थी, पर 2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने सबको चौंकाते हुए 68 सीटों पर बढ़त बनाई थी। 2012 में भाजपा को जहाँ 16.2 प्रतिशत मत मिले थे, वहीं 2014 में उसका वोट प्रतिशत बढ़कर 50.4 हो गया। इस आलोक में अगर हम अबकी हो रहे चुनाव का विश्लेषण करें तो कहा जा सकता है कि अगर पार्टी इस चुनाव में 15 से 20 प्रतिशत वोट गंवा देती है, तब भी उसकी झोली में 30 से 35 प्रतिशत वोट आएंगे, जो 2012 में उसे मिले वोटों से लगभग दोगुना होंगे।

इसमें कोई दो राय नहीं कि इस बार भाजपा कुछ ऐसा ही मानकर चल भी रही थी लेकिन आज अगर पार्टी अपने प्रदर्शन को लेकर आश्वस्त नहीं हो पा रही तो उसकी वजह है अखिलेश और राहुल का एक साथ आ जाना। हालांकि सपा के लिए यह इलाका राज्य के बाकी हिस्सों के मुकाबले कमजोर रहा है। 2012 में जब उसे बहुमत मिला था तब भी इस इलाके की 73 में से 24 सीटें ही उसके हिस्से में आई थीं और उसका वोट प्रतिशत बसपा से 5.5 प्रतिशत कम था। पर इस बार सपा के साथ कांग्रेस का वोट बैंक जुड़ जाने के कारण भाजपा और बसपा को अपना-अपना खेल बिगड़ने का डर सता रहा है। बता दें कि कांग्रेस ने 2012 और 2014 का चुनाव अजित सिंह की आरएलडी के साथ लड़ा था, पर इस बार सपा के साथ होने से जाहिर है कि उसकी ‘प्रासंगिकता’ बढ़ गई है।

वैसे मायावती की पार्टी बसपा का पश्चिमी यूपी में खासा असर रहा है। पार्टी इस इलाके में राज्य के बाकी हिस्सों से ज्यादा मजबूत रही है। 2012 में उसे इन 73 सीटों पर सबसे ज्यादा वोट भी मिले थे। हालांकि सीटें उसे सपा के लगभग बराबर ही मिली थीं, पर बड़ी बात यह थी कि लगभग सारी सीटों पर बसपा मुख्य मुकाबले में थी। इसके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के कारण पार्टी तीसरे नंबर पर चली गई थी। लेकिन इस बार के चुनाव में सांप्रदायिक तनाव काफी हद तक कम हो चुका है और ऐसे में मायावती को अपने दलित-मुस्लिम गठजोड़ के चल निकलने की उम्मीद थी। पर सपा और कांग्रेस ने एक साथ आकर मुस्लिमों को पहले से अधिक मजबूत विकल्प दे दिया है। जाहिर है कि इन परिस्थितियों में मायावती चैन से नहीं बैठ पा रहीं।

कुल मिलाकर यह कि पहले चरण के नतीजे जो भी हों, इस चरण को छूकर जो ‘हवा’ निकलेगी वो सत्ता के गलियारे की दिशा बता देगी, इसमें कोई दो राय नहीं।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप  

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लगातार चौथे टेस्ट सीरीज में दोहरे शतक का ‘विराट’ कारनामा

दिन-ब-दिन और विराट होते जा रहे भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली ने शुक्रवार को इतिहास रच दिया। उन्होंने बांग्लादेश के खिलाफ हैदराबाद में खेले जा रहे टेस्ट मैच के दूसरे दिन दोहरा शतक जड़कर वो कारनामा कर दिखाया जो क्रिकेट इतिहास में अब तक कोई नहीं कर पाया था। जी हाँ, कोहली अब दुनिया के अकेले ऐसे बल्लेबाज हैं जिसने लगातार चार टेस्ट सीरीज में दोहरे शतक बनाए हों। अपनी इस ऐतिहासिक पारी में कोहली ने 204 रन ठोके और और उनकी इस पारी की बदौलत भारत ने मात्र छह विकेट पर 687 रनों का पहाड़ खड़ा कर दिया। गौरतलब है कि टेस्ट क्रिकेट में भारत का यह पांचवां सर्वोच्च स्कोर है और इस स्कोर के साथ भारतीय टीम लगातार तीन पारियों में 600 से ज्यादा रन बनाने वाली दुनिया की इकलौती टीम बन गई है।

फिलहाल बात विराट कोहली के डबल सेंचुरी के अद्भुत ‘चौके’ की। शुक्रवार को बांगलादेश के खिलाफ खेले जा रहे एकमात्र टेस्ट के दूसरे दिन कोहली ने अपने ओवरनाइट स्कोर 111 से आगे खेलना शुरू किया और लंच के बाद अपना चौथा शतक पूरा किया। इस दौरान क्रिकेट के इस 28 वर्षीय ‘करिश्मे’ ने कई रिकॉर्ड अपने नाम किए। 204 रनों के साथ ही कोहली होम सीजन में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज भी बन गए। ऐसा करते हुए उन्होंने वीरेन्द्र सहवाग का रिकॉर्ड तोड़ा।

बहरहाल, कोहली का यह दोहरा शतक क्या मायने रखता है इसका अंदाजा हम इसी से लगा सकते हैं कि अपनी इस उपलब्धि के साथ उन्होंने सर डॉन ब्रैडमैन और राहुल द्रविड़ का रिकॉर्ड तोड़ दिया जिन्होंने लगातार तीन टेस्ट सीरीज में तीन दोहरे शतक लगाए थे।

याद दिला दें कि कोहली ने अपना पहला दोहरा शतक वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले टेस्ट में बनाया था। इस मैच में उन्होंने 200 रन बनाए थे। इसके बाद न्यूजीलैंड के खिलाफ इंदौर में उन्होंने 211 रन बनाए। उनका तीसरा दोहरा शतक (235 रन) इंग्लैंड के खिलाफ था और अब बांग्लादेश के खिलाफ 204 रनों की ये यादगार पारी।

टेस्ट क्रिकेट में चार दोहरे शतक के साथ कोहली ने सुनील गावस्कर की चार डबल सेंचुरी की बराबरी भी कर ली। वैसे भारत की ओर से सचिन और सहवाग ने सर्वाधिक 6-6 दोहरे शतक बनाए हैं, जबकि अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा 12 दोहरे शतक डॉन ब्रैडमैन के नाम हैं। पर महज 28 साल के कोहली के रनों का जैसा तूफानी सिलसिला चल रहा है, कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी अगर ये धाकड़ बल्लेबाज सर डॉन ब्रैडमैन के दोहरे शतकों का रिकॉर्ड भी तोड़ दे।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप 

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बहुत जल्द राष्ट्रीय फलक पर होगा मधेपुरा कॉलेज

मधेपुरा  स्थित मधेपुरा कॉलेज जिला मुख्यालय का पहला ऐसा कॉलेज है जहाँ नैक (NAAC – National Assessment & Accreditation Council) की एक्सपर्ट टीम ने दौरा किया। नैक की पीयर टीम का दो दिवसीय दौरा मंगलवार 7 फरवरी को पूरा हुआ। नैक से मान्यता मिलने के साथ मधेपुरा कॉलेज उच्च शिक्षा के राष्ट्रीय मानचित्र से जुड़ जाएगा। कॉलेज के संस्थापक प्राचार्य डॉ. अशोक कुमार इसे कॉलेज परिवार द्वारा वर्षों से की जा रही मेहनत का फल बताते हैं।

गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति डॉ. सुनील गुप्ता नैक की पीयर टीम के चेयरमैन और रांची वीमेंस कॉलेज (ऑटोनमस) की प्राचार्या डॉ. मंजु सिन्हा सदस्य के तौर पर मधेपुरा आए थे। इन्होंने नैक के सभी मापदंडों पर मधेपुरा कॉलेज का बारीकी से निरीक्षण किया और संतुष्ट दिखे। उम्मीद की जानी चाहिए कि पीयर टीम का यह दौरा न केवल कॉलेज बल्कि बीएन मंडल विश्वविद्यालय और इस पूरे इलाके के शैक्षणिक इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा।

MCM Founder Principal Dr. Ashok Kumar with NAAC Peer Team during their Visit to Madhepura College, Madhepura
MCM Founder Principal Dr. Ashok Kumar with NAAC Peer Team during their Visit to Madhepura College, Madhepura

बहरहाल, नैक से मान्यता प्राप्त करने के लिए प्राचार्य डॉ. अशोक कुमार के नेतृत्व में कॉलेज के शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारी वर्षों से तैयारी में जुटे थे। नैक के मापदंडों से अनुरूप कॉलेज के हर विभाग को अपडेट किया गया है। कॉलेज के प्राचार्य इन प्रयासों में कुलपति डॉ. बिनोद कुमार, कुलसचिव डॉ. केपी सिंह, सीसीडीसी डॉ. अनिलकांत मिश्रा, नोडल अधिकारी डॉ. अशोक कुमार सिंह एवं प्रॉक्टर डॉ. बीएन विवेका सहित विश्वविद्यालय के तमाम वरीय अधिकारियों के योगदान की चर्चा करना नहीं भूलते।

बता दें कि नैक की पीयर टीम ने दौरे के प्रथम दिन कॉलेज का अकादमिक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने आईक्यूएसी, आईसीटी, लाइब्रेरी, लैब, सभा भवन, परीक्षा भवन, कम्प्यूटर सेल सहित सभी विभागों का दौरा किया, विभागवार पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन देखा, बारी-बारी से सभी शिक्षकों, वर्तमान व पूर्ववर्ती छात्रों तथा अभिवावकों से मिले और शाम में कॉलेज के छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम में हिस्सा लिया। वहीं दूसरे दिन प्रशासनिक निरीक्षण का कार्यक्रम था। इस दौरान पीयर टीम ने एनसीसी, एनएसस, महिला सेल, स्पोर्ट्स सेल, अकाउंट्स सहित कॉलेज की सभी कमिटियों के कामकाज और जरूरी कागजातों को देखा और प्राचार्य सहित कॉलेज के वरीय अधिकारियों से विभिन्न पहलुओं पर गहन चर्चा की। पीयर टीम के सदस्य शिक्षकेतर कर्मचारियों से भी मिले और तमाम भवनों के साथ-साथ छात्रावास, कैंटीन, साइकिल शेड, बॉटोनिकल गार्डेन, वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, कम्पोस्ट पिट आदि का  जायजा भी लिया। एग्जिट मीटिंग सत्र में पीयर टीम ने कॉलेज के प्रयासों की सराहना की, कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए और रिपोर्ट की एक प्रति प्राचार्य डॉ. अशोक कुमार को सौंपी।

नैक के इस दौरे के लिए प्रो. पंकज कुमार कॉलेज की स्टीयरिंग कमिटी के कॉर्डिनेटर थे और गृहविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. पूनम यादव तमाम गतिविधियों की मॉनिटरिंग कर रही थीं। इस दौरान उपप्राचार्य डॉ. भगवान कुमार मिश्रा, परीक्षा नियंत्रक डॉ. मुश्ताक मोहम्मद, प्रो. मनोज भटनागर, प्रो. सच्चिदानंद सचिव, डॉ. सोनी सहाय, डॉ. सुनील कुमार सिंह, प्रो. मणिभूषण वर्मा, डॉ. अमरदीप, प्रो. अभय कुमार, प्रो. चन्देश्वरी यादव, प्रो. ब्रह्मदेव यादव, प्रो. जयनारायण साह, प्रो. निखिलेश कुमार, आईक्यूएसी के डॉ. संजय कुमार, एनसीसी के लेफ्टिनेंट गौतम कुमार, कार्यक्रम पदाधिकारी विवेकानंद कुमार, संगीत विभाग की प्राध्यापिका भारती, एनएसएस के प्रो. बिजेन्द्र मेहता, आरती झा, प्रो. अरविंद कुमार, बीएड प्रभारी विज्ञानानंद सिंह, बीसीए कॉर्डिनेटर संदीप शांडिल्य आदि की खासी व्यस्तता देखी गई।

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