कोसी के अतिचर्चित गीतकार ‘सुधाकर’ हुए सम्मानित !

कोसी अंचल के सुमधुर गीतों के संवेदनशील गायक ही नहीं बल्कि प्रेम और सौंदर्य, विरह और मिलन, आशा और निराशा के गीतों के साथ-साथ दर्द और पीड़ा के महानगायक सुबोध कुमार सुधाकर को कौशिकी क्षेत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन के सचिव डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी द्वारा सम्मान समारोह आयोजित कर अंगवस्त्रम, पाग व पुष्पगुच्छादि के अतिरिक्त “कौशिकी साहित्य रत्न” से भी सम्मानित किया गया | समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ ने की तथा उद्घाटन पूर्व सांसद व संस्थापक कुलपति डॉ.रमेन्द्र कुमार यादव रवि ने |

इस सम्मान समारोह में कोसी के तीनों जिले के मूर्धन्य साहित्यकारों की भावपूर्ण उपस्थिति देखी गयी | जहां सुपौल जिले के साहित्यकार ध्रुव नारायण सिंह ‘राई’, शंभु नाथ अरुणाभ, अलका वर्मा डॉ.विश्वनाथ सर्राफ दिखे वहीं सहरसा-मधेपुरा के डॉ.अरविंद श्रीवास्तव, डॉ.विश्वनाथ विवेका. डॉ.शांति यादव, डॉ.विनय कुमार चौधरी, डॉ.सिद्धेश्वर काश्यप सहित मंडल विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर हिन्दी के विभागाध्यक्ष डॉ.इंद्र नारायण यादव की गरिमामयी उपस्थिति अंत तक बनी रही | सबों ने सुकवि सुधाकर के गीतों की चतुर्वेणी की जी भर कर सराहना की |

आरंभ में सुकवि सुधाकर ने अपनी विभिन्न काव्य पुस्तकों- बीन के तार, खोल तरी पतवार, चल नदिया के पार आदि से दर्जनों प्रेम-सौंदर्य एवं दर्द-पीड़ा के गीतों का ‘एकल काव्य पाठ’ किया और जमकर तालियां बटोरी |

जहां एक ओर भू.ना.मंडल विश्वविद्यालय के विद्वान संस्थापक कुलपति डॉ.आर.के. यादव ‘रवि’ ने उनके गीतों की शास्त्रीय समीक्षा की और प्रेम को सर्वाधिक व्यापक बताया, वहीं दूसरी ओर उन्होंने माता और पुत्र के बीच प्रेम; पति-पत्नी के बीच ‘प्रेम’ के साथ-साथ धरती के कण-कण में ‘प्रेम’ की व्यापकता को विस्तार से प्रदर्शित किया |

यह भी बता दें कि जहां अध्यक्ष कवि शलभ ने कहा कि सुधाकर के गीतों में आह्लाद और अवसाद के सरस समन्वय हैं जो उनके कोमल व्यक्तित्व को प्रतिबिंबित करते हैं वहीं तिलकामांझी विश्वविद्यालय में प्रतिकुलपति रहे डॉ.के.के.मंडल, सुरेंद्र भारती, प्राचार्य श्यामल किशोर यादव एवं मिश्रीलाल आदि ने सुकवि सुबोध के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर भरपूर प्रकाश डालते हुए उनकी सृजनात्मक ऊर्जा की सराहना की |

समारोह में सुधी श्रोता के रूप में कविवर सुधाकर के सम्मान में अंत तक अपनी उपस्थिति बनाये रखनेवाले मान्य साहित्यानुरागियों सहित सियाराम यादव मयंक, प्राण मोहन यादव, रंगकर्मी विकास कुमार, पूर्व सैनिक दिलीप कुमार, संतोष कुमार सिन्हा, रघुनाथ यादव, डॉ.सुरेश कुमार भूषण सहित तुलसी पब्लिक स्कूल के निदेशक एवं कौशिकी के उप सचिव श्यामल कुमार सुमित्र की पूरी टीम को सम्मेलन के सचिव डॉ.मधेपुरी ने धन्यवाद ज्ञापित किया |

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‘बड़े’ और ‘छोटे’ भाई ने दिया ‘समझदारी’ का परिचय

कहा जा रहा था कि 5 जनवरी को प्रकाश-पर्व के दौरान पटना के गांधी मैदान में हुए कार्यक्रम, जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शिरकत की थी, में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित अन्य चुनिंदा हस्तियों के साथ मंच पर नहीं बिठाए जाने से लालू सख्त नाराज हैं और इसकी शिकायत वे नीतीश से करेंगे। पर लालू ने संयम और समझदारी का परिचय देते हुए न केवल इस मसले को तूल नहीं दिया बल्कि यह कह कर सबको उलटा चौंका दिया कि “हमें किसी चीज की शिकायत नहीं है। पूजा-पाठ जमीन पर बैठकर करते हैं… और वह गुरु का दरबार था।“

गौरतलब है कि इस कार्यक्रम में लालू अपने दोनों बेटों के साथ मंच के सामने बिछी दरी पर बैठे थे। राजनीतिक गलियारे में इस बात की जमकर चर्चा हुई। आरजेडी खेमे में तो इस पर खासा हो-हल्ला मचा। पार्टी के उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह ने यहाँ तक कहा कि ऐसा नहीं लग रहा था कि गुरु गोविन्द सिंह जी के 350वें प्रकाश-पर्व के लिए इंतजाम महागठबंधन की सरकार ने किए थे। बल्कि ऐसा लग रहा था कि सत्ता में शामिल किसी एक पार्टी ने ये इंतजाम किए हों। उन्होंने स्पष्ट कहा कि लालू को मंच पर जगह नहीं देना लोगों को पसंद नहीं आया है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और बिहार सरकार में शिक्षा मंत्री अशोक कुमार चौधरी ने भी इसको लेकर विरोध जताया था। पर इन सबके उलट लालू, यहाँ तक कि विरोधियों द्वारा ‘अपरिपक्व’ कहे जाने वाले उनके बेटों तेजप्रताप और तेजस्वी ने भी, कोई तल्ख बयान नहीं दिया। नीतीश के प्रति कोई भी ‘कड़वाहट’ उनकी ओर से तो नहीं ही दिखी, मीडिया को भी इस मुद्दे को हवा देने से उन्होंने रोका।

लालू ने इस पूरे मामले को जिस तरह हैंडल किया और प्रकाशोत्सव को लेकर बिहार सरकार के काम की सराहना की उसका असर नीतीश पर भी दिखा। सोमवार को पटना में लोकसंवाद कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि प्रकाशोत्सव के शानदार आयोजन की चारों ओर चर्चा है, पर कुछ लोग लालू प्रसाद जी के नीचे बैठने की बात उछाल रहे हैं। उनको यह भी पता नहीं कि गांधी मैदान के दरबार हॉल में धार्मिक कार्यक्रम का मूल आयोजनकर्ता कौन था। मूल आयोजनकर्ता गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी थी। सिख समाज में सब लोग जमीन पर ही बैठते हैं। जो लोग मंच पर थे, वे भी कुर्सी पर नहीं बैठे थे। राष्ट्रपति और प्रधानंमत्री के कार्यक्रम में मंच पर कौन बैठेगा, यह दिल्ली से ही तय होता है। बहरहाल, इतना कहने में कोई गुरेज नहीं होना चाहिए कि ‘बड़े’ और ‘छोटे’ भाई ने पूरे मामले में अत्यंत समझदारी का परिचय दिया, और ये काबिलेतारीफ है।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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मधेपुरा में अब इंग्लिश के साथ हिन्दी स्पेलिंग बी.चैंपियनशिप भी !

स्पेलिंग बी.चैंपियनशिप (Spelling Bee Championship) के बैनर तले आरंभ में केवल इंग्लिश में लेकिन अब (पूर्व में यहां के आरक्षी अधीक्षक रहे कुमार आशीष के विशेष आग्रह पर) हिन्दी में भी जिले के सभी स्कूलों के 1 से 10 वर्ग तक के 6 ग्रुपों- किडोस-1, किडोस-2, सब जूनियर (वर्ग 3 & 4), जूनियर (वर्ग 5 & 6), सीनियर (वर्ग 7 & 8) एवं सुपर सीनियर (वर्ग 9 & 10) के स्कूली बच्चों के बीच द्वितीय अंतर विद्यालय हिन्दी शब्द स्पर्धा दिसंबर माह में आयोजित किया गया था जिसमें 625 प्रतियोगी बच्चे शरीक हुए थे |

Dr.Madhepuri encouraging the kids in the final exam of Hindi Spelling Bee Championship 2016 at the campus of Samidha Groups , Madhepura
Dr.Madhepuri encouraging the kids in the final exam of Hindi Spelling Bee Championship 2016 at the campus of Samidha Groups , Madhepura.

बता दें कि आयोजन समिति के सचिव सावंत कुमार रवि, सोनी राज, अमित कुमार अंशु आदि ने दिनांक 8 जनवरी 2017 का स्थानीय समिधा ग्रुप ( Samidha Group ) के सभा भवन में 625 में से चयनित 60 प्रतियोगी बच्चे-बच्चियों की फाइनल लिखित व मौखिक परीक्षाएं ली | जांचोपरांत छहों ग्रुपों में से प्रत्येक ग्रुप के 10 में से 3- प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त किये गये 18 प्रतिभागियों को विशेष रुप से पुरस्कृत किये जायेंगे तथा शेष 42 प्रतिभागियों को इस “हिन्दी स्पेलिंग बी.चैंपियनशिप” में सम्मिलित होने के उपलक्ष में आयोजित समारोह में “Participation Certificate” प्रदान किये जायेंगे |

Dr.Bhupendra Narayan Madhepuri & Sawant Ravi amidst the Hindi Spelling Bee Kids at Samidha Groups Hall
Dr.Bhupendra Narayan Madhepuri & Sawant Ravi amidst the Hindi Spelling Bee Kids at Samidha Groups Hall.

पुरस्कार वितरण समारोह के उद्घाटनकर्ता होंगे एसपी विकास कुमार (भारतीय पुलिस सेवा) एवं मुख्य अतिथि होंगे समाजसेवी व संरक्षक डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी एवं अध्यक्षता करेंगे Bhupendra Narayan Mandal University (BNMU) के कुलानुशासक डॉ.विश्वनाथ विवेका | समय एवं तारीख की जानकारी कार्यालय कार्यकाल में दे दी जाय |

यह भी बता दें कि परीक्षा समाप्ति के बाद संस्थान के संरक्षक Dr.Madhepuri ने बच्चों के बीच आकर अपनी पुस्तक- “छोटा लक्ष्य एक अपराध है” (Small Aim is a Crime) के कुछ उद्धरणों से उपस्थित बच्चों को रू-ब-रू कराते हुए अंत में गाँधीयन मिसाइल मेन (Missile Man of India) Dr.APJ Abdul Kalam के पूरे नाम की जानकारी दी तथा विभिन्न नामों के बीच रिश्तों-संबंधों के बारे में रोचक ढंग से पूछताछ भी की तथा यह कहते हुए हौसला अफजाई भी किया- सफलता के लिए कठिन परिश्रम करना पड़ता है, ऊंचाई पाने के लिए पढ़ना पड़ता है तथा सूरज की तरह चमकने के लिए सूरज की तरह जलना पड़ता है |

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क्या मोदी के हाथों में होगी राष्ट्रपति चुनाव की कुंजी?

पाँच राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनाव से दो बातें साफ हो जाएंगी – पहली, नोटबंदी के बाद भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी के प्रति देश का रुख क्या है? और दूसरी, मोदी के हाथों में राष्ट्रपति चुनाव की कुंजी होगी या नहीं? पहली बात से आप चौंके नहीं होंगे, लेकिन दूसरी बात पर आप जरूर ठहर गए होंगे कि इन चुनावों से राष्ट्रपति चुनाव का आखिर क्या कनेक्शन है? यकीन मानिए, कनेक्शन है और ऐसा है कि इन राज्यों, खासकर यूपी और पंजाब, में भाजपा के नहीं जीतने पर मोदी अपने मन का राष्ट्रपति नहीं बना पाएंगे। चलिए, जानते हैं कैसे?

राष्ट्रपति चुनाव के वोटों का समीकरण देखें तो वर्तमान में एनडीए के पास करीब 4.52 लाख वोट हैं और अपने उम्मीदवार को जिताने के लिए उसे करीब एक लाख और वोटों की जरूरत है। अभी जिन पाँच राज्यों में चुनाव हो रहे हैं उनमें कुल 1, 03, 756 वोट दांव पर हैं। सबसे ज्यादा 83, 824 वोट यूपी के पास हैं और उसके बाद पंजाब की महत्वपूर्ण भूमिका है। जानकारों का मानना है कि भाजपा के यूपी और पंजाब में हारने की स्थिति में भी मोदी सरकार राष्ट्रपति चुनाव में अपना उम्मीदवार जिताने में कामयाब हो जाएगी। बस फर्क यह आएगा कि फिर उसे अपनी पसंद के उम्मीदवार की जगह सर्वस्वीकार्य उम्मीदवार की ओर जाना होगा। यानि ऐसा उम्मीदवार जो सभी दलों को मान्य हो।

राष्ट्रपति पद के अपने उम्मीदवार को जिताने के लिए जरूरी संख्याबल न होने की स्थिति में भाजपा को अन्य क्षेत्रीय दलों से बात करनी होगी। ऐसे में तृणमूल कांग्रेस, एआईएडीएमके, बीजेडी, तेलंगाना राष्ट्र समिति जैसी पार्टियों की भूमिका अहम हो जाएगी और भाजपा उनके रुख की ओर देखने के लिए बाध्य होगी। कहने की जरूरत नहीं कि इस स्थिति में एनडीए को अपने उम्मीदवार का चयन सोच-समझकर करना होगा, ताकि सबकी सहमति मिल सके।

गौरतलब है कि भारत में राष्ट्रपति पद का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत किया जाता है। इसमें लोकसभा-राज्यसभा के चुने हुए सांसद और सभी राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित विधायक हिस्सा होते हैं। विधायकों के वोट का मूल्य 1971 की आबादी के आधार पर एक निश्चित अनुपात में तय किया जाता है, और सभी राज्यों और दिल्ली-पुडुचेरी विधानसभाओं के कुल मतों के बराबर लोकसभा के 543 और राज्यसभा के 238 सदस्यों के वोटों का मूल्य होता है। फिलहाल एनडीए के पास करीब 4.52 लाख वोट हैं, जिनमें से अकेले भाजपा के पास करीब 3.68 लाख वोट हैं। वहीं, यूपीए के पास लगभग 2.30 वोट हैं, जिनमें से कांग्रेस के पास 1.50 लाख वोट हैं।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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मोदी-नीतीश हुए ‘नजदीक’ तो लालू हुए मंच से ‘दूर’!

पटना में आयोजित प्रकाश-पर्व अपनी अनूठे आतिथ्य और अभूतपूर्व भव्यता के साथ दो और कारणों से चर्चा में है – पहला, मोदी-नीतीश की जुगलबंदी से निकले नए सुर और दूसरा, लालू को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, राज्यपाल रामनाथ कोविंद, पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद और मेजबान नीतीश कुमार के साथ मंच पर जगह नहीं मिलना, जबकि लालू अपने दोनों बेटों के साथ मंच के सामने ही विराजमान थे। बात अगर केवल मोदी और नीतीश द्वारा एक-दूसरे की तारीफ करने तक ही सीमित रहती तो थोड़ी देर के लिए कुछ और भी सोचा-समझा जा सकता था। लेकिन एक तरफ वे दोनों एक-दूसरे की प्रशंसा के पुल बांध रहे थे और दूसरी तरफ राज्य के मुख्यमंत्री और केन्द्र में रेलमंत्री रह चुके और वर्तमान में सत्तारूढ़ महागठबंधन के सबसे बड़े दल के सर्वेसर्वा लालू प्रसाद यादव अपने दोनों ‘लाल’ के साथ अपनी ‘असह्य अनदेखी’ से अपमान का दंश झेल रहे थे। जाहिर है, बात करने वाले बात करेंगे ही।

प्रश्न उठता है, ऐसा क्यों हुआ? क्या लालू की शख्सियत इतनी आसानी से नज़रअंदाज कर दी जाने वाली है, और वो भी बिहार में? कायदे से मंच पर उनकी जगह तो बननी ही चाहिए थी, पदानुसार उनके उपमुख्यमंत्री बेटे तेजस्वी को भी वहाँ होना चाहिए था। पर बाप-बेटे दोनों नदारद। मंच से भी और मोदी और नीतीश के संबोधन से भी। हालांकि प्रशासन के लोग ये तर्क दे रहे हैं कि केन्द्र के मंत्रियों को मंच पर जगह मिलनी चाहिए, ये पीएमओ की ओर से कहा गया था। चलिए ये मान लेते हैं। तो क्या ये भी मान लिया जाय कि लालू और तेजस्वी को मंच पर जगह न मिले, इसका भी निर्देश ‘ऊपर’ से ही था? क्या मेजबान नीतीश अपने विवेक का प्रयोग कर कम-से-कम लालू को मंच पर नहीं बुला सकते थे, जबकि मंच पर पर्याप्त जगह थी?

अभी ज्यादा दिन नहीं बीते हैं जब मोदी और नीतीश एक-दूसरे को फूटी आँख देखना पसंद नहीं करते थे। 17 साल तक एनडीए के साथ सत्ता का सुख भोग चुके नीतीश ने मोदी को प्रधानंमत्री पद का उम्मीदवार घोषित किए जाने के साथ गठबंधन रिश्ते तोड़ डाले थे। बिहार के चुनाव में एक-दूसरे पर निशाना साधने में दोनों ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी। मोदी ने नीतीश पर अपने सामने से ‘थाली’ खींच लेने का आरोप लगाया तो नीतीश ने ‘डीएनए’ को मुद्दा बनाकर बकायदा हस्ताक्षर अभियान चलाया था। ऐसे में दोनों के बीच रिश्तों में आई ‘गर्माहट’ से अटकलबाजियों का बाज़ार गर्म होना स्वाभाविक है।

गौरतलब है कि आरजेडी और जेडीयू में भले ही गठबंधन हो, लेकिन दागी आरजेडी विधायक राजवल्लभ से लेकर सांसद शहाबुद्दीन तक के मामलों पर दोनों दलों का टकराव सामने आ चुका है। जमानत पर कुछ दिन के लिए बाहर निकले शहाबुद्दीन ने नीतीश को अपना नेता मानने से ही इनकार कर दिया था। वरिष्ठ आरजेडी नेता रघुवंश प्रसाद सिंह खुलेआम कई बार नीतीश पर निशाना साध चुके हैं। नोटबंदी पर विपक्ष के एकजुट होने के प्रस्ताव पर जेडीयू के अलग होने पर भी आरजेडी सुप्रीमो लालू ने परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए इसे ‘इगो’ की समस्या कहा था।

राजनीति के जानकार मानते हैं कि नीतीश का ताजा रुख लालू पर राजनीतिक दवाब कायम करने की कवायद हो सकती है। नीतीश लालू को मैसेज देना चाहते हैं कि उनके सामने विकल्प खुले हुए हैं। उधर भाजपा को लगता है कि उसे स्वाभाविक तौर पर एक अतिरिक्त सहयोगी मिल जाय तो हर्ज ही क्या है? राज्यसभा में केन्द्र के सत्ताधारी गठबंधन का कम संख्याबल भी भाजपा को जेडीयू से नजदीकी बढ़ाने को प्रेरित करता है। कई अहम बिल वहाँ पास होने हैं। ऐसे में अगर आने वाले समय में मोदी और नीतीश का एक-दूसरे के लिए उपजा ‘प्रेम’ और प्रगाढ़ हो जाय तो कोई आश्चर्य की बात नहीं।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

 

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मधेपुरा में त्रिदिवसीय भारत लोक रंग महोत्सव आयोजित

भारत सरकार के कला-संस्कृति विभाग के पूर्व क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र कोलकाता द्वारा मधेपुरा में त्रिदिवसीय “भारत लोकरंग महोत्सव” का आयोजन शहीद चुल्हाय मार्ग स्थित बी.पी. मंडल टाउन हॉल में 4-6 जनवरी 2017 तक महेन्द्र कुमार एवं सुभाष चंद्र की पूरी टीम के सहयोग से किया गया |

यह भी बता दें कि जहाँ पटना में गुरु गोविंद सिंह के 350वें प्रकाश-पर्व पर पीएम नरेंद्र मोदी ने दिल खोलकर सीएम नीतीश कुमार की सराहना की वहीं मधेपुरा में एसपी विकास कुमार, डी.डी.सी मिथिलेश कुमार एवं समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी सहित श्यामल किशोर यादव, वार्ड पार्षद श्वेत कमल उर्फ़ बउवाजी ने दीप प्रज्वलित कर आयोजन का शुभारंभ किया तथा उड़ीसा, महाराष्ट्र एवं असम-बिहार आदि से आये संस्कृति प्रेमी पुरुष व महिला कलाकारों के प्रदर्शन की जमकर तारीफ की |

Artists from Rajasthan performing in Bharat Lok Rang Mahotasav at BP Mandal Nagar Bhavan, Madhepura
Artists from Rajasthan performing in Bharat Lok Rang Mahotasav at BP Mandal Nagar Bhavan, Madhepura

इस अवसर पर जहाँ डी.डी.सी. मिथिलेश कुमार एवं आरक्षी अधीक्षक विकास कुमार ने भारतीय कला एवं संस्कृति को ऊंचाई देने एवं अक्षुण्ण रखने के लिए लोकरंग महोत्सव की आवश्यकता पर बल दिया वहीँ समाजसेवी डॉ.मधेपुरी ने स्थानीय कलाकारों को प्रोत्साहित करने पर बल दिया |

Marathi Artis Performing Lavani Dance in Bharat Lok Rang Mahotasav at BP Mandal Town Hall, Shahid Chulhaye Marg , Madhepura.
Marathi Artis Performing Lavani Dance in Bharat Lok Rang Mahotasav at BP Mandal Town Hall, Shahid Chulhaye Marg , Madhepura.

जहाँ पहले दिन उड़ीसा के डॉ.बी.साहू ने मुगल तमाशा पर विस्तार से प्रकाश डाला वहीं दूसरे दिन महाराष्ट्र से मंचीय महारत प्राप्त देवानंद ने अपनी सजी-सजायी हुई टीम के साथ नृत्य की धड़कन से श्रोताओं में कंपन पैदा करने में सौ फीसदी कामयाबी हासिल की | पुरानी लोक गाथा पर आधारित ‘तमाशा’ की बेहतरीन एवं रंगीन प्रस्तुति कर खूब बाहवाही लूटी |

अंतिम दिन भी कला संस्कृति को समर्पित महेन्द्र कुमार एवं सुभाष चंद्र आदि ने असाम-बिहार के अंतर्राष्ट्रीय कला-संस्कृति से एक दूसरे को आपस में जोड़ते हुए कहा कि लघुनाटक, नृत्य, गीत-संगीत सहित विलुप्त हो रहे कला-संस्कृति को पुनर्जीवित एवं पुर्नर्स्थापिक करने में पूर्व क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र एवं उसके निदेशक डॉ.ओम प्रकाश भारती समर्पित होकर इस दिशा में काम कर रहे हैं |

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मोदी भी हुए मुरीद, प्रकाश-पर्व पर मेजबानी की मिसाल बना बिहार

और नरेन्द्र मोदी भी मुरीद हो गए बिहार और नीतीश कुमार के। गुरु गोविंद सिंह के 350वें प्रकाश-पर्व पर आज पटना आए प्रधानमंत्री ने दिल खोलकर इस अवसर पर की गई भव्य व्यवस्था और भावपूर्ण आतिथ्य की सराहना की। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मुक्त कंठ से तारीफ की उनके शराबबंदी अभियान को लेकर और कहा कि देश और दुनिया के लिए मिसाल बनेगा बिहार। इससे पहले नीतीश कुमार ने भी शराबबंदी को लेकर गुजरात और इस संदर्भ में वहाँ के मुख्यमंत्री के तौर पर मोदी के योगदान की तारीफ की थी। अब परस्पर की गई ये ‘तारीफ’ कितनी ‘दूर’ तक जाती है, ये तो आने वाला वक्त बताएगा, फिलहाल बात प्रकाश-पर्व की।

देखा जाय तो बिहार के लिए इससे सुंदर नहीं हो सकता था नए साल का आगाज। एक ओर राजधानी पटना में सिक्खों के दसवें गुरु, गुरु गोविंद सिंह की 350वीं जयंती पर प्रकाशोत्सव का आयोजन तो दूसरी ओर बुद्ध की नगरी गया में 34वीं कालचक्र पूजा का अनुष्ठान… पटना में देश-विदेश से आए सिख तो गया में बौद्ध श्रद्धालुओं का सैलाब… यानि अंतर्राष्ट्रीय महत्व के दो विशाल आयोजनों का मेजबान बनना था बिहार को। देश-दुनिया की निगाहें टिकी थीं बिहार पर और बिहार ने इतिहास रच दिया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में क्या शानदार इंतजाम किया हमारे शासन और प्रशासन ने!

पिछले साल सितंबर में प्रकाशोत्सव की कड़ी में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सिख कॉनक्लेव ने ही यह संकेत दे दिया था कि बिहार एक नया इतिहास लिखने की राह पर है। इसे महसूस कर ही पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने उस समय कहा था कि बिहार जैसा तो पंजाब भी नहीं कर सका। तब और आज प्रकाशोत्सव पर आई विभिन्न क्षेत्र की प्रमुख हस्तियों, श्रद्धालुओं, सेवादारों, जत्थेदारों के सुर एक हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और पंजाब कांग्रस के अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर सिंह, पंजाब के उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल, केन्द्रीय मंत्री एसएस अहलुवालिया से लेकर पंजाब सहित देश और दुनिया के अलग-अलग कोने से आए अनगिनत श्रद्धालु तक – सब के सब चकित हैं बिहार की व्यवस्था और आतिथ्य देखकर।

पटना स्थित हरमंदिर साहब गुरुद्वारा हो, वहीं स्थित बाललीला साहब हो, भव्य दरबार हॉल हो, गांधी मैदान, पटना बाईपास और पटना सिटी स्थित कंगन घाट पर टेंट सिटी का निर्माण हो, इन स्थलों पर अनवरत चलने वाले लाखों लोगों का लंगर हो, मंगल तालाब का लेजर शो हो, गांधी मैदान से गुरुद्वारे तक लगभग नौ किलोमीटर तक चला नगर-कीर्तन हो, गुरु गोविंद सिंह के चित्रों की प्रदर्शनी हो, हरमंदिर साहब और गांधी मैदान सहित श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल, भारतीय नृत्य कला मंदिर, रविन्द्र भवन आदि के सांस्कृतिक आयोजन हों, शहर के चप्पे-चप्पे की सफाई, सजावट और सुरक्षा हो, स्वागत-द्वार, होर्डिंग व बैनर से पटे चौक-चौराहे हों या फिर कदम-कदम पर बने हेल्प डेस्क – हर चीज अद्भुत, अभूतपूर्व और अविस्मरणीय। मुख्य आयोजन-स्थल पटना के गांधी मैदान में तो जैसे पूरा का पूरा शहर ही बसा दिया गया – हर सुविधा से लैस।

बीते कुछ वर्षों में असहिष्णुता देश में बड़ा सियासी व सामाजिक मुद्दा बनकर सामने आया है। इन्हीं कारणों से बड़े धार्मिक आयोजन भी संवेदनशील बनते गए हैं। ऐसे में इतने बड़े उत्सव का इतना सफल आयोजन कर बिहार ने न केवल देश बल्कि दुनिया भर में मिसाल कायम की है। उम्मीद है कि एक बार  फिर बिहार की धरती से सर्व धर्म समभाव का संदेश दुनिया भर में जाएगा।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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यूपी समेत पाँच राज्यों में चुनाव की रणभेरी, परिणाम 11 मार्च को

चुनाव आयोग ने पाँच राज्यों में विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा कर दी है। उत्तर प्रदेश में 11 फरवरी से 4 मार्च के बीच कुल सात चरणों में चुनाव होंगे। पंजाब और गोवा में चुनाव की तारीख 4 फरवरी और उत्तराखंड में 15 फरवरी निश्चित की गई है, जबकि मणिपुर में दो चरणों में 4 और 8 मार्च को चुनाव होंगे। सभी राज्यों में मतों की गिनती 11 मार्च को होगी।

सबसे पहले बात राजनीतिक रूप से सर्वाधिक महत्वपूर्ण उत्तर प्रदेश की। उत्तर प्रदेश की 403 सीटों के लिए सात चरणों में चुनाव होंगे। 11 फरवरी को पश्चिमी यूपी के 15 जिलों की 73 सीटों पर मतदान होगा। दूसरे दौर में 15 फरवरी को उत्तराखंड से लगे जिलों की 67 सीटों पर चुनाव होंगे। तीसरे दौर में 12 जिलों की 69 सीटों पर 19 फरवरी को मतदान होगा। पुन: चौथे दौर में 12 जिलों की 35 सीटों पर चुनाव होंगे। पाँचवें चरण में 11 जिलों की 52 सीटों पर 27 फरवरी को चुनाव होंगे। छठे चरण में 7 जिलों की 49 सीटों पर 4 मार्च को मतदान होगा। सातवें और अंतिम चरण में पूर्वांचल के 7 जिलों की 40 सीटों पर 8 मार्च को चुनाव होंगे। वर्तमान में यूपी की 403 सीटों में 224 सपा, 80 बसपा, 47 भाजपा, 28 कांग्रेस, 14 निर्दलीय और 14 सीटें अन्य छोटे दलों के पास हैं।

पंजाब में 4 फरवरी को चुनाव होंगे। वहाँ कुल 117 सीटें हैं। वर्तमान में इनमें से 54 सीटें शिरोमणि अकाली दल, 12 भाजपा, 26 कांग्रेस और 6 निर्दलीय के पास हैं। गोवा की 40 सीटों के लिए भी 4 फरवरी को ही चुनाव होने हैं। वर्तमान में इन 40 सीटों में 21 भाजपा, 9 कांग्रेस, 5 निर्दलीय, 3 महाराष्ट्र गोमांतक पार्टी और 2 गोवा विकास पार्टी के पास हैं।

उत्तराखंड में 15 फरवरी को चुनाव होने हैं। वहाँ कुल 70 सीटें हैं। वर्तमान में इनमें 32 कांग्रेस, 31 भाजपा, 3 बसपा, 3 निर्दलीय और 1 सीट उत्तराखंड क्रांति दल के पास है। उधर मणिपुर की 60 विधानसभा सीटों में से 38 पर 4 मार्च को और शेष 2 सीटों पर 8 मार्च को चुनाव होंगे।

दिल्ली स्थित निर्वाचन आयोग में चुनाव कार्यक्रम का ऐलान करते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त नसीम जैदी ने कहा कि इन चुनावों में पहली बार ईवीएम पर उम्मीदवारों के नामों के साथ उनकी तस्वीरें भी लगी होंगी। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में उम्मीदवारों के खर्च की सीमा 28 लाख रखी गई है, जबकि मणिपुर और गोवा में यह सीमा 20 लाख की होगी। कहने की जरूरत नहीं कि चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही पाँचों राज्यों में आचार संहिता लागू हो गई है। अब केन्द्र या राज्य सरकार इन राज्यों के लिए किसी स्कीम आदि की घोषणा नहीं कर सकती।

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देश की तरक्की के लिए युवा आगे बढ़ें- डॉ. मधेपुरी

भाग-दौड़ भरी जिंदगी के गुजरे वर्षों में साहुगढ़ गांव के एक सेवानिवृत सैनिक दिलीप यादव देश की सेवा करते-करते अब सामाजिक सेवा भी नायाब तरीके से कर लिया करते हैं | विगत 3 वर्षों से जयपालपट्टी चौक पर राधाकृष्ण स्वीट्स कॉर्नर चलाने वाले सैनिक दिलीप यादव अपने आस-पास से दुकान पर आनेवाले युवाओं पर नजर रखते हैं | उनमें देश प्रेम एवं सामाजिक सद्भाव की भावनाओं को परखते हैं | आचरण, विचार एवं व्यवहार में स्वयं को सर्वश्रेष्ठ साबित करनेवाले एक युवा को प्रतिवर्ष समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी द्वारा सम्मानित करवाते हैं |

इस वर्ष भी जब लोग एक-दूसरे को नये वर्ष की शुभकामनाएं प्रेषित कर रहे होते हैं तभी सेवानिवृत्त सैनिक दिलीप यादव की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए समाजसेवी शिक्षाविद डॉ.मधेपुरी के कर कमलों द्वारा, सैनिक श्री यादव के मापदंडों पर खड़ा उतरनेवाले, युवाश्री कक्कू कुमार को पुरस्कृत किया जा रहा होता है |

इस अवसर पर शिक्षाविद प्रो.श्यामल किशोर यादव, डॉ.अरुण कुमार एवं वार्ड पार्षद ध्यानी यादव आदि की उपस्थिति में डॉ.मधेपुरी ने कहा कि एक सैनिक द्वारा देश सेवा के बाद इस तरह समाजसेवा करते रहना निश्चय ही अनुकरणीय ही नहीं बल्कि सर्वाधिक प्रशंसनीय कार्य है | इस तरह के कार्यक्रम का आयोजन करना शहर के लिए अच्छी बात है | उन्होंने कहा कि अपसंस्कृतिवाद की चपेट में आकर युवावर्ग भटकाव की स्थिति में आ गया है- जिससे समाज कमजोर होता जा रहा है | अंत में डॉ.मधेपुरी ने कहा कि देश की तरक्की के लिए युवा वर्ग को आगे आना होगा |

यह भी कि प्रो.श्यामल किशोर यादव, डॉ.अरुण कुमार एवं लोकप्रिय वार्ड पार्षद ध्यानी यादव ने अपने संबोधनों में यही कहा कि उपयोगी होने के बावजूद मोबाइल एवं कंप्यूटर के गलत इस्तेमाल से युवावर्ग द्वारा देश की तरक्की के लिए मिलनेवाली शक्ति कमजोर पड़ रही है | सबों ने बेहतर कल के लिए इस तरह के कार्यक्रमों की सराहना की | मौके पर प्रो.हरेकृष्ण यादव, पारो यादव, आनंद अग्रवाल, सीताराम यादव, शंभू यादव, ललन यादव, गजेंद्र-अभिषेक-श्रवण, सिंटू, विक्की आदि की उपस्थिति में वार्ड नंबर 18 के एक युवा कुणाल राज को भी विशेषरूप से सम्मानित किया गया |

                        (साभार दैनिक जागरण)

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मेहनतकशों की पीड़ा को महसूसता रहा दुष्यन्त !

किसान संसद के अध्यक्ष आद्यानंद यादव एवं सचिव शंभू शरण भारतीय द्वारा गजलकार दुष्यंत कुमार की पुण्यतिथि समारोह डी.आर.डी.ए. के झल्लू बाबू सभागार में आयोजित किया गया जिसका शुभारंभ तो किया डीडीसी मिथिलेश कुमार ने परंतु मुख्य अतिथि के रुप में डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी, रुपेश रूपक, शम्भू नाथ अरुणाभ, ध्रुव नारायण सिंह राई, डॉ.विश्वनाथ सर्राफ, अभिनंदन मंडल, सियाराम मयंक, ई.हरिश्चंद्र मंडल सहित सभी कवियों की कविताओं एवं गज़लों में दलितों शोषितों और मेहनतकश किसानों की आहत भावनाओं की स्पष्ट झलक अंत तक देखने को मिलती रही |

मौके पर जिला आदिवासी कला केंद्र के संस्थापक संजय कुमार सहित भित्ति चित्रकला को कागज एवं कैनवास पर करीने से अंकित करने की मुहिम में जुटे रेखा टुडू, अनीता मुर्मू, चांदमुनी मुर्मू, सुनिता हांसदा, सूरजमुनी सोरेन, खुशबू बास्की, सुनीता मरांडी, सुनीता हसदा एवं सुनीता बास्की की पेंटिंग की सराहना की गयी तथा डीडीसी मिथलेश कुमार द्वारा अंगवस्त्रम एवं नगद राशि भेंटकर उन्हें सम्मानित किया गया |

यह भी बता दें कि एस.सी.ई.आर.टी. के- कला समेकित अधिगम शिक्षण प्रणाली में जिला प्रतिनिधि सुजीत कुमार सिंह, औषधीय किसान रामदेव रमण सहित आनंद कुमार, उमेश कुमार, भारती कुमारी, डॉ.सुरेश भूषण, मधुमाला भारतीय, श्वेता शरण भारतीय, दीपशिखा भारतीय, गोलू कुमार, वशिष्ठ कुमार, सोनू कुमार सुमन सहित दर्जनों दर्शकों की उपस्थिति में जहां अभिनंदन मंडल और डॉ.विश्वनाथ सर्राफ के गीत-गजल तालियां बटोरती रहीं वहीं सचिव शंभू शरण भारतीय एवं उनके गुरु डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी की गजलें सुधी श्रोताओं को गम्भीर चिंतन की गहराई में उतारती रही ।

काफी देर तक चले इस कार्यक्रम की अध्यक्षता जहां किसान संसद के अध्यक्ष आद्यानंद ने की, वहीं संचालन सचिव शंभू शरण भारतीय तथा धन्यवाद ज्ञापन रामदेव रमण ने किया |

 

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