अमिताभ और प्रियंका नहीं मोदी होंगे अतुल्य भारत अभियान का चेहरा

पर्यटन को बढ़ावा देने वाले अतुल्य भारत (इन्क्रेडिबल इंडिया) अभियान का चेहरा अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी होंगे। पर्यटन मंत्रालय ने अमिताभ बच्चन समेत बॉलीवुड के अन्य सितारों को अभियान का ब्रांड एंबेसडर बनाने का विचार छोड़ दिया है। गौरतलब है कि इस साल की शुरुआत में अभिनेता आमिर खान को हटाए जाने के बाद ब्रांड एंबेसडर के रूप में सदी के महानायक अमिताभ बच्चन और अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा को लाए जाने के कयास लगाए जा रहे थे।

पर्यटन मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार पिछले ढाई वर्षों के दौरान देश और विदेश में पर्यटन को लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने कई महत्वपूर्ण बातें कही हैं। उन्होंने देश के विभिन्न स्थानों की विशेषता और विविधता का वर्णन बड़े ही प्रभावशाली तरीके से किया है। पर्यटन मंत्रालय प्रधानमंत्री द्वारा अलग-अलग स्थानों और अवसरों पर कही गईं ऐसी तमाम बातों एवं वक्तव्यों के विडियो फुटेज को जुटाने में लगा हुआ है। इन्हीं फुटेजों का इस्तेमाल अतुल्य भारत अभियान में किया जाएगा।

भारत के पर्यटन मंत्री महेश शर्मा इससे पूर्व कह चुके हैं कि अतुल्य भारत अभियान को बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री सबसे उपयुक्त चेहरा हैं। जिन देशों का उन्होंने दौरा किया है, वहाँ से पर्यटकों के आगमन में उछाल देखा गया है। बकौल शर्मा पिछले दो वर्षों में प्रधानमंत्री के कई देशों के दौरे से भारत को लेकर धारणा में उल्लेखनीय बदलाव आया है। ऐसे में भारतीय पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उनसे बेहतर चेहरा और कौन हो सकता है!

पर्यटन मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लेकर जो राय रखी है उससे इनकार नहीं किया जा सकता। अपने सघन और प्रभावशाली विदेशी दौरों से मोदी सम्पूर्ण विश्व में भारत के ब्रांड एंबेसडर के तौर पर उभरे हैं। अपनी वक्रता और कुशल कूटनीति से भारतीय संस्कार और संभावनाओं का उन्होंने एक नया आयाम रच दिया है। विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए सचमुच अब बॉलीवुड के किसी चेहरे की आवश्यकता हमें नहीं है। देर से लिए गए इस दुरुस्त निर्णय के लिए पर्यटन मंत्रालय को बधाई!

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप  

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अमेरिका में अबकी बार ट्रंप सरकार

डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के अगले राष्ट्रपति होंगे। तमाम भविष्यवाणियों को गलत साबित करते हुए 70 वर्षीय ट्रंप ने मजबूत मानी जा रही 69 वर्षीया हिलेरी को मात दे दी और सारी दुनिया को हतप्रभ कर दिया। अभी से साल भर पीछे चल कर देखें। बहुत कम लोग मान रहे थे कि वो राष्ट्रपति पद की दौड़ में शामिल हो पाएंगे, लेकिन वो हुए। इसके बाद फिर से बहुत कम लोग मान रहे थे कि वो रिपब्लिकन नॉमिनेशन तक पहुँचेंगे, लेकिन वो पहुँचे। और उसके बाद एक बार फिर बहुत कम लोग मान रहे थे कि वो अंतिम मुकाबला जीत पाएंगे, लेकिन वो जीते। जीते ही नहीं, बहुत शान से जीते और इतिहास रच दिया। जी हाँ, राजनीति के लिए एक बाहरी व्यक्ति रहे डोनाल्ड जॉन ट्रंप ने महज 18 महीने के राजनीतिक करियर में हाल के अमेरिकी इतिहास का सबसे बड़ा उलटफेर कर दिया।

ट्रंप ने डेमोक्रेटिक उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन को केवल हराया ही नहीं, बल्कि बड़े अंतर से हराया। अमेरिका के 50 में से 29 राज्य ट्रंप की झोली में आ गिरे, जिनमें पेंसिल्वेनिया, ओहायो, फ्लोरिडा, टेक्सास और नॉर्थ केरोलिना जैसे निर्णायक राज्य शामिल हैं, जबकि हिलेरी को केवल 18 राज्यों में ही कामयाबी मिल पाई। देश की प्रथम महिला और विदेश मंत्री रहीं हिलेरी का अमेरिका की पहली महिला राष्ट्रपति बनने का सपना इस परिणाम के साथ ही टूट गया। अपनी अभूतपूर्व जीत के बाद सबके लिए अच्छा दिखने की कोशिश कर रहे ट्रंप ने हिलेरी की तारीफ की और कहा कि उन्होंने अच्छी टक्कर दी। साथ में वो यह कहना भी नहीं भूले कि “मेरी जीत उनकी है जो अमेरिका से प्यार करते हैं।”

ट्रंप को 538 इलेक्टोरल वोटों में से 288 और हिलेरी को 215 वोट मिले। गौरतलब है कि राष्ट्रपति पद का चुनाव जीतने के लिए उम्मीदवार को 270 इलेक्टोरल वोटों की जरूरत पड़ती है। खास बात यह कि ट्रंप ने उन कुछ राज्यों में भी हिलेरी के मुकाबले बढ़त बनाई, जहाँ पहले डेमोक्रैट उम्मीदवार के जीतने की संभावना जताई जा रही थी। वॉल स्ट्रीट जनरल का कहना है कि पेंसिल्वेनिया में ट्रंप की जीत ने हिलेरी की जीत की संभावनाओं को पूरी तरह धूमिल कर दिया।

अपने बड़बोलेपन, मुस्लिम विरोधी बयान और यौन उत्पीड़न जैसे कई विवादों में घिरे होने के बावजूद ट्रंप की जीत सत्ता विरोधी लहर की ओर संकेत करती है। जिन राज्यों और काउंटियों में चार साल पहले मौजूदा राष्ट्रपति बराक ओबामा को वोट मिले थे वहाँ इस बार ट्रंप के पक्ष में वोट पड़ना साबित करता है कि लोग बदलाव चाहते थे। ट्रंप की इस जीत में अमेरिका के श्वेत लोगों, कामकाजी वर्ग और ग्रामीण आबादी का बड़ा योगदान माना जा रहा है।

ट्रंप की इस ऐतिहासिक जीत के बाद कहा जा रहा कि भारत-अमेरिका रिश्ते आने वाले दिनों में और भी प्रगाढ़ होंगे। पाकिस्तान और चीन जैसे ‘बिगड़ैल’ पड़ोसियों को ध्यान में रखते हुए ये प्रगाढ़ता जितनी भारत के लिए जरूरी है, उससे जरा भी कम जरूरी अमेरिका के लिए नहीं। कारण यह कि वैश्विक आतंकवाद और अमेरिका की अर्थनीति पर ट्रंप जिस बेबाकी से अब तक अपनी राय रखते आ रहे हैं, उससे स्पष्ट है कि पाकिस्तान और चीन को वे उनकी ‘सीमा’ में रखना चाहेंगे और इसके लिए उन्हें भारत से बेहतर और भरोसेमंद सहयोगी नहीं मिल सकता।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप  

 

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काले धन पर मोदी की चोट, 500 और 1000 के नोट आज से बंद

आज मध्य रात्रि से 500 और 1000 रुपये के नोट आधिकारिक तौर पर बंद हो जाएंगे। अगर आपके पास ईमानदारी से कमाए पैसे हैं तो आप उन्हें 30 दिसंबर तक बेहिचक बैंक या डाकघर में जमा करा सकते हैं लेकिन अगर आपने धन अनैतिक तरीके से कमाया है और वो 500 या 1000 रुपये के नोटों की शक्ल में है तो आज रात 12 बजे के बाद वो रद्दी में तब्दील हो जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज देर शाम स्वयं यह ऐतिहासिक घोषणा की। काले धन के काले इस्तेमाल पर रोक लगाने की खातिर ऐसा साहसिक निर्णय आज तक संसार के किसी देश ने नहीं लिया था। भारत में आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए नकली नोटों का इस्तेमाल जिस तरह बढ़ रहा था, उसे देखते हुए भी केन्द्र से एक बड़े निर्णय की अपेक्षा थी। लेकिन वो निर्णय इतना बड़ा और इतने बड़े पैमाने पर होगा, इसकी हवा प्रधानमंत्री ने अपने निकटतम लोगों को भी लगने नहीं दी थी।

बहरहाल, इस बड़ी ख़बर से जुड़ी पाँच बड़ी बातों पर निगाह डालना बेहद जरूरी है। पहली बात, 11 नवंबर की रात 12 बजे तक पेट्रोल पंप, सीएनजी स्टेशन, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, हवाई अड्डे, अस्पताल और दवा की दूकान पर 500 और 1000 रुपये के नोट स्वीकार किए जाएंगे। दूसरी बात, 9 नवंबर को सारे बैंक और एटीएम बंद रहेंगे। कुछ एटीएम 10 नवंबर को भी बंद रहेंगे। तीसरी बात, समुचित व्यवस्था होने तक जरूरी खर्चों के लिए शुरू में कुछ दिनों तक 2000 और उसके बाद 4000 तक के नोट आप बैंकों से बदल सकते हैं। चौथी बात, 10 नवंबर से 30 दिसंबर तक आप अपने पास रखे 500 और 1000 रुपये के नोट बैंक या डाकघर में जमा करा सकते हैं। और पाँचवीं बात, कल के बाद 500 के नए नोट तो आप देखेंगे, लेकिन 1000 के नोट अब इतिहास की चीज हो जाएंगे। इनकी जगह सरकार ने 2000 के नोट जारी करने का निर्णय लिया है।

याद रखें, आप इतिहास को बनते हुए रख रहे हैं। सरकार के इस बड़े निर्णय के बाद आपकी दिनचर्या से लेकर देश की अर्थव्यवस्था तक कई परिवर्तन आपको देखने को मिलेंगे, लेकिन आपकी धनराशि हर हाल में आपकी ही रहेगी। आपको चिन्ता करने की कोई जरूरत नहीं है। शर्त बस इतनी कि आपने वो धनराशि घोषित स्रोतों से और ईमानदारी से कमाई हो।

हमारे देश में भ्रष्टाचार और कालाधन जैसी बीमारियों ने जड़ जमा लिया था। देश से गरीबी हटाने की राह में सबसे बड़ी बाधा यही थी। इसकी वजह से आतंकी भी आसानी से भारत में पैर जमा लेते थे। हवाला के जरिए हथियारों की खरीद कोई छिपी हुई बात नहीं। चुनावों में काले धन के इस्तेमाल से भला कौन वाकिफ नहीं! देश आखिर पनपता तो कैसे?

करोड़ों भारतवासी जिनकी रगों में अब भी ईमानदारी दौड़ा करती है, बड़ी शिद्दत से भ्रष्टाचार, काले धन और आतंक के खिलाफ निर्णायक लड़ाई की प्रतीक्षा कर रहे थे। मोदी सरकार के इस शक्तिशाली और अभूतपूर्व कदम के बाद उनकी उम्मीदों को कितने पंख लग गए, उन्हें नंगी आंखों से शायद हम देख भी ना पाएं। प्रधानमंत्री को इस निर्णायक निर्णय के लिए बारंबार बधाई और साधुवाद!

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप  

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छठ महापर्व से विश्व को मिलता है मानवता का संदेश

विगत वर्ष की ही तो बात है- मधेपुरा लोकसभा चुनाव के दरमियान इलेक्शन कमीशन द्वारा पर्वतारोही-पर्यावरणविद-पद्मश्री संतोष यादव को मतदाता जागरूकता के निमित्त आइकॉन बनाया गया था और उसी क्रम में सात्विक जीवन शैली को आत्मसात करने वाली एवं एक ही वर्ष के दरमियान दो बार एवरेस्ट की चोटी पर भारतीय तिरंगा फहराकर विश्व रिकॉर्ड बनाने वाली संतोष यादव मधेपुरा आई थी |

यह भी बता दें कि हरियाणा की बेटी संतोष यादव बहरहाल समता,समानता और सामाजिकता के प्रतीक छठ जैसे महापर्व को मनाने अपने ससुराल मुंगेर के गुलजार पोखर में आई हैं | इस अवसर पर उन्होंने मीडिया से मुखातिब होकर यही कहा कि बिहार में हर जाति और धर्म के लोग मानवीय संवेदनाओं से भरपूर हैं | पद्मश्री संतोष यादव ने आत्मविश्वास के साथ पुनः कहा कि हिन्दू-मुस्लिम समुदाय की महिलाओं द्वारा बिना किसी भेद-भाव के एक साथ मिल-बैठकर भगवान भास्कर को अर्ध्य अर्पित करने वाली इसी धरती से पूरे विश्व को मानवता का संदेश मिलता रहेगा, क्योंकि मानवता से बड़ा कोई धर्म और जाति भी तो इस भू-मंडल पर नहीं है |

Padma Shree Santosh Yadav moving towards Mongher Ganga Ghat along with other devotee Chhathbraties from her Father-in-law's House at Guljar Pokhar, Mongher .
Padma Shree Santosh Yadav moving towards Mongher Ganga Ghat along with other devotee Chhathbraties from her Father-in-law’s House at Guljar Pokhar, Mongher .

जहां एक ओर सिंहेश्वर प्रखंड के जझहट सबैला के पंचायत समिति के सदस्य मोहम्मद इश्तियाक आलम द्वारा लगभग तीन दर्जन हिन्दू छठ व्रतियों के बीच श्रद्धावनत होकर केला, नारियल, टाब, नींबू और सेब-संतरादि दिये जाने पर आंतरिक खुशी का एहसास किया गया वहीं दूसरी ओर कटिहार के दिग्घी नया टोला में पिछले ढाई दशक से नियम-निष्ठा के साथ रेहाना भी तो करती आ रही है छठ- केवल इसीलिए कि उसकी शादी में अड़चन आ जाने के कारण उसकी मां ने छठ पर्व करने का संकल्प लिया था | शादी हो जाने पर पहले तो उसकी मां और अब रेहाना आम हिन्दू युवतियों की तरह हर विधि-विधान के साथ श्रद्धापूर्वक पानी में खड़ी होकर सूप उठाती है,रिश्तेदार अर्घ्य भी देते हैं और घर में छठ व्रत के गीत गाए जाते हैं | और तो और मधेपुरा नगर परिषद से सटे नयानगर की हसीना और सकीना की मन्नतें पूरी होने पर महापर्व छठ का व्रत आस्था के साथ करने लगी हैं | आस्था के आगे मजहब की सारी दीवारें भी टूटती जा रही हैं |

यह भी जानिए कि वर्मा यानी वर्तमान म्यांमार के लगभग तीन दर्जन शरणार्थी अब यहां की संस्कृति में पूरी तरह ढल चुके हैं और पिछले 40 साल से छठ महापर्व करते आ रहे हैं | अन्य पर्व-त्योहारों की तुलना में छठ महापर्व के प्रति लोगों की आस्था गहरी होती देखी जा रही है |

यही कारण है कि मुंबई जैसे महानगर में वर्षो से रहने वाले गीतकार राजशेखर भले ही होली-दिवाली वहीं मना लेते हैं परन्तु गांव ‘भेलवा’ की मिट्टी व पारंपरिक रिवाजों से लगाव रहने के कारण वे छठ सरीखे महापर्व में घर आना नहीं भूलते | राजशेखर के चुनावी चर्चित गीत-“बिहार में बहार हो नीतीशे कुमार हो………” की तरह ही अनेक छठ गीत-“गोबर से, मिट्टी से……” शारदा सिन्हा के गीतों के संग अब सुनते रहेंगे आप |

छठ इसलिए भी महापर्व है कि गंदगी जैसे महान अभिशाप को मिटाने के लिए न तो एक कदम स्वच्छता की ओर……कहने की जरूरत पड़ती है और न लोहिया स्वच्छता अभियान आयोजित करने की | बिहार की राजधानी पटना तो वर्षों से स्वच्छता का रिकॉर्ड बना रही है | क्या घर, क्या सड़क……. क्या घाट या पोखर चतुर्दिक स्वछता ही स्वच्छता ! इस अवसर पर कुछ श्रद्धालुओं द्वारा भगवान भास्कर की पूजा प्रतिमा स्थापित कर की जाने लगी है | दर्शनार्थियों की भीड़ को भव्य मेला में तब्दील किया जाने लगा है| वही मेला जिससे सामाजिक सौहार्द को बल मिलता है तथा समरसता कायम होती है |

सर्वमान्य मान्यता है कि अंग प्रदेश की धरती होकर बहने वाली चम्पा नदी के तट पर महाभारत काल के महान योद्धा कर्ण ने ही सबसे पहले छठ पर्व की शुरुआत की थी और चम्पानगर (वर्तमान नाथनगर) के ऊँचे टिल्हे से भगवान भास्कर को अर्ध्य देने का श्रीगणेश किया था | और आज यह छठ महापर्व सामाजिक चेतना को सामूहिकता की ओर ले जाने वाला त्योहार बन गया है |

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अभी तुममें बहुत क्रिकेट बाकी है धोनी !

खेलप्रेमियों के मन को इन दिनों एक बड़ा सवाल मथ रहा है कि भारतीय क्रिकेट को नई ऊँचाईयां देने वाले महेन्द्र सिंह धोनी क्या वर्ल्ड कप 2019 तक टीम का हिस्सा होंगे? हालांकि धोनी के करीबी सूत्रों का कहना है कि फिलहाल उनका वनडे क्रिकेट से संन्यास का कोई इरादा नहीं है। वैसे धोनी ने कहा जरूर था कि वह 2016 के अंत तक अपने फॉर्म और फिटनेस पर विचार करेंगे, लेकिन न्यूजीलैंड के खिलाफ धमाकेदार तरीके से वनडे सीरीज जीतने के बाद अब उनकी नज़र 2017 में होने वाली चैम्पियंस ट्रॉफी पर टिक गई है। जाहिर है, अब धोनी अपने वनडे करियर पर उसके बाद ही कोई निर्णय लेंगे और फिलहाल उनके करोड़ों चाहने वालों के लिए ये राहत भी कम नहीं।

गौरतलब है कि अपना लिमिटेड ओवर करियर बढ़ाने के लिए ही धोनी ने 2014 में टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लिया था और उनकी फिटनेस को लेकर आज तक कोई सवाल नहीं उठा है। वर्ल्ड कप 2019 तक वे 38 साल के जरूर हो जाएंगे लेकिन अभी भी जिस ऊर्जा के साथ वे खेल रहे हैं, उसे देखते हुए ये कहीं से नहीं लगता कि अगले तीन-चार साल उम्र उनके खेल के आड़े आएगी। पाकिस्तान के यूनिस खान और मिसबाह-उल-हक का ही उदाहरण लें। ये क्रिकेटर 40 की उम्र पार करने के बाद भी अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट खेल रहे हैं। इसीलिए कोई कारण नहीं दिखता कि 2019 वर्ल्ड कप तक वे टीम के साथ न रहें।

भारतीय खिलाड़ियों की बात करें तो हमारे सामने एक उदाहरण धोनी के साथी खिलाड़ी आशीष नेहरा का है जिन्होंने 37 की उम्र में वापसी की, तो दूसरी ओर 2011 वर्ल्ड कप के हीरो युवराज सिंह और गौतम गंभीर जैसे खिलाड़ी हैं जो 2019 वर्ल्ड कप खेलने की दावेदारी रखते हैं। ऐसे में धोनी क्यों नहीं?

टीम इंडिया के पूर्व निदेशक रवि शास्त्री बिल्कुल सही कहते हैं कि धोनी जब तक खेल का आनंद उठा रहे हैं, उन्हें खेलते रहना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि “धोनी कपिल देव, सुनील गावस्कर और सचिन तेंदुलकर के समकक्ष खिलाड़ी हैं। वह एक बड़े खिलाड़ी हैं और उनमें 2019 का वर्ल्ड कप खेलने की क्षमता है। भारत को धोनी की जरूरत है और मुझे यकीन है कि वह यूं ही टीम को छोड़कर नहीं जाएंगे।”

सच तो यह है कि धोनी केवल भारत के सबसे सफल कप्तान ही नहीं हैं, भारतीय क्रिकेट का चेहरा और तेवर बदलने का श्रेय भी उन्हें ही जाता है। क्रिकेट की वर्तमान पीढ़ी के लिए वे एक ‘प्रतीक-पुरुष’ हैं और उनमें बहुत क्रिकेट बाकी है अभी। बस खुद को हमेशा की तरह फिट बनाए रखते हुए वे वर्ल्ड कप 2019 के लिए टीम तैयार करने में जुट जाएं। बाकी सब कुछ आने वाला समय खुद-ब-खुद तय कर देगा।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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संसार के हर त्योहार से विलक्षण है छठ

समय के साथ सब कुछ बदलता है। आपके तौर-तरीके ही नहीं, त्योहार तक बदल जाते हैं। तकनीक ने हमें बाहर जितना विस्तार दिया, भीतर उसी अनुपात में सिमटते गए हम और इस ‘संकुचन’ को बड़ी बेशर्मी से ‘आधुनिकता’ का नाम दिया हमने। आयातित बोली, आयातित शिक्षा, आयातित परिधान, आयातित संगीत, आयातित नृत्य, आयातित साहित्य, आयातित सिनेमा, आयातित उपकरण… इस आधुनिकता में सब कुछ आयातित था। आयात-आधारित इस आधुनिकता में हम विचारधारा भी आयात करने लगे और अब तो त्योहार आयात करने में भी हमें संकोच नहीं होता हमें। इसे हम समय के साथ बदलना कहने लगे हैं।

इस ‘आधुनिकता’ की होड़ में गांव बड़ी तेजी से शहरों में खोते जा रहे हैं। डिब्बाबंद दूध, ‘डेलिवर’ किए गए फास्ट फूड और बोतलबंद पानी पर बड़ी हुई पीढ़ी ‘ईएमआई’ चुकाना भले सीख ले, मिट्टी का ‘कर्ज’ चुकाने के संस्कार से वो कोसों दूर रहेगी। हम गौर से देखें, जड़ तक जाकर पड़ताल करें तो पाएंगे कि हमारे सारे व्रत और त्योहार हमारी मिट्टी से जुड़े हैं। हम आजीवन अपनी मिट्टी से जो लेते हैं दरअसल व्रत रखकर और त्योहार मनाकर उसी का आभार जताते हैं हम। पर लानत है हम पर कि अब हम अपनी मिट्टी तक में ‘मिलावट’ करने लगे हैं। इसी का परिणाम है कि होली, दीपावाली जैसे त्योहारों का बड़ी तेजी से ‘शहरीकरण’ होने लगा है। या यूँ कहें कि अब इन त्योहारों को हम ‘आधुनिक’ तरीके से मनाने लगे हैं।

आधुनिकता की इस चकाचौंध में भी अगर हमारी आँखें पूरी तरह चुंधिया नहीं गई हैं तो इसका बहुत बड़ा श्रेय छठ को जाता है। अपनी जड़ों से कटकर महानगरों के आसमान में उड़ना सीख गए बच्चे होली-दीपावली चाहे जहाँ मना लें पर छठ के लिए वे अपने ‘घोंसले’ को लौट आते हैं। उन बच्चों के बच्चे जान पाते हैं कि ‘टू बेडरूम फ्लैट’ से बाहर की दुनिया कितनी बड़ी होती है और दो इकाईयों के साथ रहने से बने परिवार और कई परिवारों के जुड़ने से बने परिवार में क्या फर्क होता है। वे समझ पाते हैं कि ‘डिस्कवरी’ पर नदियों को देखना और उसे छूकर महसूसना कितना अलग होता है। वे जान पाते हैं कि क्या होता है सूप, कैसा होता है दौउरा, कौन बनाते हैं इन चीजों को और समाज के कितने अभिन्न अंग हैं वे। छठ ही बताता है उन्हें डाभ, चकोतरा (टाब नींबू), सिंघाड़ा, अल्हुआ और सुथनी जैसे फलों का अस्तित्व।

छठ धर्म से ज्यादा समाज का, सामूहिकता का और समानता का त्योहार है। समाजवाद का सबसे जीवंत दृश्य आपको छठ घाट पर दिखेगा। मालिक और मजदूर दोनों एक समान सिर पर प्रसाद का दौउरा ढोते मिलेंगे आपको। सबके सूप का मोल-महत्व एक समान होगा। कोई आडम्बर नहीं। किसी को भी पुरोहित की ‘मध्यस्थता’ नहीं चाहिए होती। बस आस्था होनी चाहिए, आपकी पूजा सीधे छठी मईया तक पहुँच जाती है। हिन्दू-मुसलमान के बीच खड़ी ‘दीवार’ भी इस आस्था के आगे सिर झुकाती है। ऐसा कोई बाज़ार नहीं जिसमें छठ की पूजन सामग्री बेचने वालों में मुस्लिम समाज के लोग ना हों। उनकी श्रद्धा और उत्साह में रत्ती भर भी कमी निकाल कर दिखा दें आप। और तो और आप शिद्दत से ढूँढेंगे तो कुछ घाट ऐसे भी होंगे जहाँ अर्ध्य देतीं मुस्लिम माताएं और बहनें भी दिख जाएंगी आपको।

अगर छठ ना हो तो आज के युग में ‘डूबते सूरज’ को प्रणाम करना हम सीख ही नहीं पाएंगे। बेटियों को कोख में ही मार देने वाले कभी नहीं जान पाएंगे कि किसी पर्व में बेटियों की भी मन्नत मांगी जाती है। हिन्दू समाज का ये सम्भवत: एकमात्र पर्व है जिसमें अराधना के लिए किसी ‘मूर्ति’ की जरूरत नहीं पड़ती। व्रत करने वाली हर नारी छठी मईया का रूप होती है और उम्र में आपसे छोटी ही क्यों ना हों उनके पैर छूकर ही प्रसाद ग्रहण करना होता है आपको। नारी-सशक्तिकरण के किसी नारे में इतनी ताकत हो तो बताएं।

संसार का कोई त्योहार, कोई पर्व एक साथ इतनी विलक्षण खूबियों को अपने में नहीं समा सकता, इसीलिए छठ ‘महापर्व’ है। हमारी आस्था का, हमारे संस्कार का, हमारी पवित्रता का, हमारे विस्तार का ‘महापर्व’। मिट्टी के सोंधेपन से सने छठ के गीत सुनकर जब तक आपके रोम-रोम झंकृत होते रहेंगे तब तक समझिए अपनी जड़ से जुड़े हैं आप और तथाकथित ‘आधुनिकता’ की कैसी भी आंधी क्यों ना हो बहुत मजबूती से टिके हैं आप।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप  

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मधेपुरा के पदाधिकारी व खिलाड़ी कर रहे ओलंपिक की तैयारी

कुछ ही दिन पहले की बात है-बी.एन.मंडल स्टेडियम के मैदान में डायनेमिक डी.एम. मो.सोहैल की टीम द्वारा आयोजित राज्यस्तरीय कबड्डी प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया गया कि जिले के तमाम खेल प्रेमियों के ओठों से अनायास ये बातें लोगों को सुनाई देने लगी कि आयोजन केवल कहने भर के लिए राज्यस्तरीय था अन्यथा हर दृष्टिकोण से यह बिल्कुल राष्ट्रीय स्तर का था | स्टेडियम के मैदान में फैले 38 जिले के बालक-बालिकाओं की रंग-बिरंगी इन्द्रधनुषी टीमों द्वारा फ्लैग मार्च का नजारा रियोओलंपिक की याद को ताजा करता रहा |

यह भी जानिए कि इन्हीं नजारों के बीच मंचासीन जिलाधिकारी सहित एसपी विकास कुमार, डीडीसी  मिथिलेश कुमार, एएसपी राजेश कुमार, एसडीएम संजय कुमार निराला, एनडीसी मुकेश कुमार, डॉ. डी.के.सिंह, सचिव अरुण कुमार, स्काउट गाइड आयुक्त जयकृष्ण यादव आदि गणमान्यों की उपस्थिति में सामाजिक सरोकारों में अव्वल रहने वाले समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने कहा कि कबड्डी को ओलंपिक में शामिल कर लिया जाना चाहिए | बहरहाल कबड्डी को ओलंपिक में शामिल करने में भले ही देर हो जाय लेकिन विगत माह में ही तो भारत तीसरी बार विश्व चैंपियन बन गया है |

और अब बारी है- मधेपुरा के बी.पी.मंडल नगर भवन में चार दिवसीय (11-14 नवंबर) अन्तर-जिला  टेबल टेनिस टूर्नामेंट की जिसमें बिहार के 38 जिलों के 100 सेअधिक टेबल टेनिस खिलाड़ियों की जमघट होगी | इस प्रतियोगिता को भी कुछ स्तरीय स्वरुप प्रदान करने हेतु जिलाधिकारी मो.सोहैल (भा.प्र.से.) एवं आरक्षी अधीक्षक विकास कुमार (भा.पु.से.),  जिला टेबल टेनिस संघ के संरक्षक डॉ. भूपेन्द्र मधेपुरी, आई.एम.ए. के अध्यक्ष मिथिलेश कुमार, एनडीसी मुकेश कुमार, लीड बैंक ऑफिसर संतोष झा आदि ने सचिव प्रदीप श्रीवास्तव, कोषाध्यक्ष संदीप शांडिल्य सहित आयोजन समिति के सदस्यों प्रशांत कुमार, अमित कुमार मोनी, त्रिदीप गांगुली, चंद्रशेखर यादव, मो.असफाक आलम, पुष्पेंद्र कुमार, किशोर कुमारआदि के साथ बैठकर तैयारी की समीक्षा की | इसी क्रम में सचिव प्रदीप श्रीवास्तव ने विगत आयोजनों की चर्चाएँ करते हुए जिले के बैंकों से आर्थिक सहयोग की चर्चा की | आगे खिलाड़ियों के भोजन एवं उत्तम आवासीय व्यवस्था की बातें सुनने के बाद अध्यक्षता कर रहे डायनेमिक डीएम मो.सोहैल ने आयोजन समिति को आश्वस्त किया कि जिला प्रशासन हरसंभव सहयोग करेगा तथा राज्य स्तरीय टेबल टेनिस प्रशिक्षण केन्द्र चलाने हेतु भी हर प्रकार की मदद करेगा |

अन्त में डॉ.मधेपुरी ने कहा कि मधेपुरा की रियांशी और पायल बिहार की नंबर वन और टू पर काबिज है | रियांशी तो सर्वाधिक 22 बार नेशनल भी खेल चुकी है | उन्होंने कहा कि रियांशी, पायल, विजया……… शिवम आदि खिलाड़ियों को यदि अंतर्राष्ट्रीय कोच की व्यवस्था हो जाय तो वह दिन दूर नहीं जब रियांशी और पायल ओलंपिक में भारत के लिए सफल भागीदारी निभा पायेंगी |

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पाक को हरा भारत ने जीती एशियन चैम्पियंस ट्रॉफी हॉकी

भारतीय हॉकी टीम ने अपने देशवासियों को दीपावली का यादगार तोहफा दिया। रविवार को कुआंटान (मलेशिया) में ‘भारत माता की जय’ के उद्घोष के बीच एशियन चैम्पियंस ट्रॉफी हॉकी के फाइनल में पाकिस्तान को 3-2 से हरा कर हमारी टीम ने देश की दीपावली को और जगमग कर दिया। मैच के दौरान स्टेडियम में दोनों ही देशों के लगभग बराबर समर्थक थे, लेकिन नारे ‘भारत माता की जय’ के ही सुनाई देते रहे। लीग मैच में भी भारत ने पाकिस्तान को 3-2 से ही हराया था। भारत के सरदार सिंह ‘प्लेयर ऑफ द फाइनल’ रहे, जबकि 11 गोल करके टूर्नामेंट के टॉप स्कोरर रहे रूपिंदर पाल सिंह ‘बेस्ट प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ बने। सेमीफाइनल के हीरो रहे पीआर श्रीजेश चोट की वजह से फाइनल मैच नहीं खेल पाए। उनकी जगह आकाश छिकते भारत के गोलकीपर रहे।

इस महामुकाबले में भारत की तरफ से पहला गोल 18वें मिनट में रूपिंदर पाल सिंह ने, दूसरा गोल 23वें मिनट में अफ्फान यूसुफ ने और तीसरा व निर्णायक गोल 51वें मिनट में निकिन थिमैया ने किया। वहीं पाकिस्तान की ओर से मोहम्मद अलीम बिलाल (26वें मिनट में) और अली शान (38वें मिनट में) गोल करने में सफल रहे। इस दिलचस्प मैच के दूसरे हाफ तक दोनों टीमें 2-2 गोल कर बराबर थीं। लेकिन भारत ने दूसरे हाफ में गजब की तेजी दिखाई, जिसका उसे लाभ मिला और पाकिस्तान की टीम दबाव में आकर मैच गंवा बैठी।

इससे पहले बीते शनिवार को हुए पहले सेमीफाइनल में भारत ने दक्षिण कोरिया को पहले 2-2 से ड्रॉ पर रोका और फिर पेनाल्टी शूट आउट में 5-4 से रोमांचक जीत हासिल की। भारत के गोलकीपर कप्तान श्रीजेश ने कोरियन खिलाड़ी देईयोल ली के प्रयास को रोक कर यह जीत भारत की झोली में डाली थी। उधर दूसरे सेमीफाइनल में पाकिस्तान ने मेजबान मलेशिया को पेनाल्टी शूटआउट में ही 3-2 से हराकर फाइनल में जगह बनाई थी।

गौरतलब है कि भारत और पाकिस्तान दो-दो बार यह टूर्नामेंट जीत चुके हैं। पाकिस्तान ने 2012 और 2013 में यह टाइटल जीता था, जबकि भारत ने 2011 में इनॉगरल एडिशन जीतने के बाद अब 2016 में खिताब अपने नाम किया। जहाँ तक तीसरे स्थान की बात है, तो मेजबान मलेशिया ने रविवार को ही दक्षिण कोरिया को पेनाल्टी शूट आउट में 3-1 से हराकर लगातार चौथी बार उस पर अपना कब्जा बरकरार रखा।

 ‘मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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अब कोसी के हर घर से निकलेंगे आईआईटीयन

9 मई, 1981 को बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ.जगन्नाथ मिश्र द्वारा मधेपुरा को जिला बनाया गया तथा प्रथम डीएम-एस.पी.सेठ (भा.प्र.से.) एवं प्रथम एस.पी.अभयानंद (भा.पु.से.) बने | कौन जानता था कि मधेपुरा नगर पालिका के तत्कालीन वाइस चेयरमैन डॉ. भूपेन्द्र मधेपुरी, जिन्होंने उन दिनों जिस अभयानंद को एसपी के रूप सम्मानित किया था- आज उसी अभयानंद को, सुपर-30 के ‘आई जी अंकल’ के नाम प्रसिद्धि प्राप्त करने के बाद, पुनः मधेपुरा की इसी ऐतिहासिक धरती पर फिजिक्स के लोकप्रिय प्रोफेसर व साहित्यकार के रूप में भारतरत्न डॉ. कलाम को समर्पित- ‘छोटा लक्ष्य एक अपराध है’ पुस्तक भेंट कर ऐसे-ऐसे समाजसेवियों एवं दिग्गज बुद्धिजीवियों के बीच सम्मानित करेंगे | डॉ. मधेपुरी ने अभयानंद के सम्मान में उद्गार व्यक्त करते हुए अंत में कहा- 48वां डीजीपी अभयानंद ने अपने योग्य पिता जगदानंद (28 वाँ डीजीपी, बिहार) के योग्यतम पुत्र तो खुद को साबित कर ही दिया है, अब आजकल ग्रामीण क्षेत्र के प्रतिभावान छात्र-छात्राओं के गॉडफादर बनकर पसीना बहा रहे हैं तथा समाज सेवियों को जगाने का काम कर रहे हैं |

डॉ.अमोल राय की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में उपस्थित बुद्धिजीवियों व समाजसेवियों- डॉ. भूपेन्द्र मधेपुरी, प्राचार्यगण प्रो.श्यामल किशोर यादव, डॉ.अशोक कुमार, डॉ.एच.एल.एस.जौहरी, अभिषद सदस्य डॉ.जवाहर पासवान, अधिषद सदस्य डॉ.नरेश कुमार, डॉ.रामचंद्र मंडल, डॉ.आलोक कुमार, प्रो.दीनानाथ मेहता, प्रो.किशोरचौधरी, रामसुंदर दास उर्फ़ बाबा जी, डॉ.संजय कुमार, मनोज कुमार, राजीव कुमार, पृथ्वीराज यदुवंशी, सामाजिक एवं राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय विनोद कुमार सहित मीडिया के सुभाषचंद्र, तुरबसु, अमिताभ, दिलखुश आदि अन्य को संबोधित करते हुए पूर्व डी.जी.पी.अभयानंद ने कहा- “ग्रामीण इलाकों के बच्चों की भले ही अंग्रेजी  कमजोर होती है, परंतु गणित को समझने और उससे जुड़े सवालों को सुलझाने की अद्भुत क्षमता उनमें होती है तभी तो बिना सूत्र जाने ही वे कठिन से कठिन सवाल को पल में ही हल कर देते हैं |”

यह भी बता दें कि अभयानंद ने ग्रामीण क्षेत्र के वैसे प्रतिभावान बच्चे-बच्चियों को आगे लाने हेतु यह कहा कि 18 दिसंबर 2016 को स्थानीय शिवनंदन प्रसाद मंडल इंटर स्तरीय माध्यमिक विद्यालय मधेपुरा में अभयानंद सुपर-30 में दाखिले के लिए टेस्ट होने जा रहा है | टेस्ट में सफल बच्चों को आई.आई.टी. प्रवेश परीक्षा हेतु पूरी तरह से नि:शुल्क तैयारी कराई जाएगी |

यह भी जानिए कि पूर्व डीजीपीअभयानंद ने यहां के अच्छे शिक्षकों को इस तरह के सामाजिक कार्यों के लिए आगे आने का आह्वान किया तथा यहां के बुद्धिजीवियों, शिक्षकों एवं समाजसेवियों को एक कमिटी बना लेने की सलाह भी दी ताकि मेधावी ग्रामीण बच्चों को आगे बढ़ाने हेतु मधेपुरा में भी अभयानंद सुपर-30 का मार्ग प्रशस्त हो सके |

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पटना या दिल्ली में नहीं लगता नीतीश का मन

विकास यात्रा, न्याय यात्रा, प्रवास यात्रा, धन्यवाद यात्रा जैसी कई यात्राओं के बाद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब ‘निश्चय यात्रा’ पर निकलेंगे। छठ पूजा के बाद 9 नवंबर को निश्चय यात्रा पर निकलने की घोषणा करते हुए नीतीश ने कहा कि “पटना या दिल्ली में मेरा मन नहीं लगता, मुझे ग्रामीण क्षेत्रों से ज्यादा लगाव है।”  निश्चय यात्रा के दौरान नीतीश जिला स्तर पर पूर्ण शराबबंदी के प्रभाव और सरकार के सात निश्चयों के तहत हो रहे विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा करेंगे।

बिहार के मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को पटना में सात निश्चयों में शामिल ‘घर तक पक्की गली-नलियां’ का शुभारम्भ करते हुए कहा कि “विधानसभा चुनाव के दौरान किए गए वादों को एक-एक कर कार्यान्वित किया जा रहा है। इसकी समीक्षा के लिए 9 नवंबर से मैं निश्चय यात्रा पर निकलूंगा। इस दौरान लोगों से मिलकर इन विकास कार्यों के विषय में जानकारी लूंगा।” बता दें कि इससे पहले नीतीश प्रमंडल स्तर पर शराबबंदी और सात निश्चयों के तहत हो रहे विकास कार्यों की समीक्षा कर चुके हैं।

गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव से पहले महागठबंधन ने लोगों से सात निश्चयों के तहत कई वादे किए थे। इसके तहत ‘हर घर, नल का जल’, ‘शौचालय निर्माण – घर का सम्मान’ सहित कई विकास योजनाएं शामिल हैं। बकौल नीतीश ये सारी योजनाएं ग्रामीणों से बातचीत और उनके अनुभव के आधार पर ही बनाई गई हैं।

बहरहाल, नीतीश को उनकी नई यात्रा के लिए शुभकामनाएं। ये अच्छी बात है कि नीतीश ‘मन लगाने’ को गांवों-कस्बों और जिलों की ओर रुख कर रहे हैं। उन्हें पता है कि वे देश-दुनिया में चाहे जितना घूम-टहल लें, उनके हर पथ का ‘पाथेय’ बिहार में ही है। जड़ को मजबूत रखे बिना शाखाएं और टहनियां सुरक्षित नहीं रह सकतीं, इसका भान उन्हें जब तक रहेगा, तब तक वे बिहार और देश की राजनीति में प्रासंगिक बने रहेंगे।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

 

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