अब बैंकों में होंगे ‘इस्लामिक विंडो’

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने पारंपरिक बैंकों में ‘इस्लामिक विंडो’ खोलने का प्रस्ताव रखा है ताकि देश में धीरे-धीरे शरिया के अनुकूल या ब्याजमुक्त बैंकिंग लागू की जा सके। बता दें कि रिजर्व बैंक और केन्द्र सरकार लम्बे समय से इस्लामिक बैंकिंग शुरू करने की संभावना तलाश रहे हैं। इसका मकसद समाज के उन तबकों का वित्तीय समावेशन सुनिश्चित करना बताया जा रहा है जो धार्मिक कारणों से अब तक फाइनेंसियल सिस्टम से बाहर हैं।

गौरतलब है कि इस्लामिक या शरिया बैंकिंग मुख्य रूप से ब्याज नहीं लेने के सिद्धांत पर आधारित है क्योंकि इस्लाम में सूदखोरी को हराम माना गया है। इस्लाम सूद के खिलाफ इसलिए है कि ब्याज की बुनियाद पर बनी व्यवस्था में बहुत सारे लोगों के पैसे चंद लोगों के हाथ में आ जाते हैं। इसके मुकाबले ‘जकात’ (बचत के एक हिस्से का दान) की व्यवस्था है, जिससे कुछ लोगों का पैसा बहुत सारे लोगों के पास जाता है। ब्याज की व्यवस्था के मुकाबले इस्लाम का कहना है कि नफे और नुकसान में कर्ज देने और लेने वाले दोनों ही बराबर के हिस्सेदार हैं। यानि संक्षेप में कहें तो इस्लामिक बैंकिंग साझेदारी वाली व्यवस्था है।

बहरहाल, वित्त मंत्रालय को लिखे पत्र में रिजर्व बैंक ने कहा है कि “सोच-विचार से बनी हमारी राय में इस्लामिक फाइनेंस की पेचीदगियों और इस मामले से जुड़े विभिन्न नियामिकीय एवं पर्यवेक्षीय चुनौतियों के मद्देनजर भारत में क्रमबद्ध तरीके से इस्लामिक बैंकिंग शुरू की जा सकती है।” रिजर्व बैंक मानता है कि इस क्षेत्र में भारतीय बैंकों को कोई अनुभव नहीं है। इसीलिए सरकार की ओर से जरूरी अधिसूचनाएं जारी किए जाने के बाद पारंपरिक बैंकों में इस्लामिक विंडो के जरिए शुरू-शुरू में कुछ ऐसे सामान्य प्रोडक्ट्स लाने पर विचार होगा जो पारंपरिक बैंकों से मिलते-जुलते हैं। नफे-नुकसान वाले पेचीदे प्रोडक्ट के साथ पूरी इस्लामिक बैंकिंग पर बाद में अनुभव के आधार पर विचार किया जाएगा।

वैसे चलते-चलते ये बताना निहायत जरूरी है कि भारत में इस्लामिक बैंकिंग के लिए दरवाजा खोलने का श्रेय किसी और को नहीं हमारे मौजूदा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जाता है। आपको शायद हैरत हो लेकिन भारत में पहला इस्लामिक बैंक खोलने को हरी झंडी उनके गृहराज्य और उन्हीं की पार्टी द्वारा शासित गुजरात में मिली। पारंपरिक बैंकों में इस्लामिक विंडो का प्रस्ताव वास्तव में इसका अगला चरण है, जिससे आगे चलकर देश भर में इस्लामिक बैंक स्वतंत्र रूप से अस्तित्व में आ सकते हैं।

गौरतलब है कि भारत ऐसा पहला गैर इस्लामिक देश है जहाँ इस्लामिक बैंक की सेवा मौजूद होगी। इस ‘उदार’ पहल के लिए रिजर्व बैंक और केन्द्र सरकार की सराहना की जानी चाहिए लेकिन शर्त यह कि उससे पहले ‘समान नागरिक संहिता’ की पुनर्व्याख्या हो। नहीं तो देखने वाले इसके पीछे ‘तुष्टिकरण’ को देखेंगे और आप उनकी आँखें बंद नहीं कर पाएंगे।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

 

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मोदी को समझने से पहले इंदिरा को समझें

हाल के कुछ वर्षों में नरेन्द्र मोदी देश की राजनीतिक बहसों का केन्द्र होते चले गए हैं। देश के किसी भी कोने में कोई भी पार्टी हो, मोदी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप में उसकी रणनीति को प्रभावित करने की स्थिति में हैं, इसमें कोई दो राय नहीं। प्रशासक के तौर पर देखें तो पिछले कुछ दिनों में सर्जिकल स्ट्राइक और नोटबंदी जैसे बड़े फैसलों के बाद उनकी ‘सख्त’ (सकारात्मक अर्थ में) छवि सामने आई है। उनके इन फैसलों को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिली। सर्जिकल स्ट्राइक पर तो अमूमन सारी पार्टियों ने दिल खोलकर उनका साथ दिया लेकिन नोटबंदी पर राजनीतिक पार्टियों से लेकर आम जनता तक बंटी नज़र आती है। हालांकि विरोध नोटबंदी से ज्यादा उसके बाद मची ‘अफरा-तफरी’ को लेकर है। कहा जा रहा है कि इतने बड़े फैसले से पहले सरकार ने पूरा ‘होमवर्क’ नहीं किया था। अगर इसे मान भी लिया जाय तो भी उनके राजनीतिक साहस और इच्छाशक्ति की सराहना उनके विरोधी तक कर रहे हैं, भले ही उनमें से कुछ सार्वजनिक तौर पर इसे स्वीकार न करें।

बहरहाल, मोदी के इन कठोर फैसलों के आलोक में विश्लेषक उनकी तुलना पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से कर रहे हैं। आज जबकि संयोग से इंदिराजी की जयंती भी है, क्यों न उनके कुछ बेहद साहसी और कठोर फैसलों की चर्चा करें जिन्होंने भारत की दशा और दिशा बदलने में अहम भूमिका निभाई।

सबसे पहले 1971 का युद्ध। भारत और पाकिस्तान के बीच तीसरे युद्ध के दौरान इंदिरा गांधी के कठोर तेवरों की बहुत चर्चा होती है। वो भी तब जब माना जा रहा था कि वैश्विक मंच पर अमेरिका पाकिस्तान को शह दे रहा था। उस युद्ध में पाकिस्तान को हार का सामना करना पड़ा और दुनिया को बांग्लादेश के तौर पर एक नया मुल्क मिला। उनके इस फैसले के कारण ही उन्हें ‘आयरन लेडी’ कहा जाता है।

इसके बाद आता है 1974 का परमाणु परीक्षण। इंदिरा गांधी ने बतौर प्रधानमंत्री मई, 1974 में परमाणु परीक्षण करने की मंजूरी दी। राजस्थान के पोखरण में हुए इस परमाणु परीक्षण की भनक दुनिया के पांच शक्तिशाली देशों तक को नहीं लगी थी। इस परीक्षण के बाद ही भारत ने परमाणु संपन्न देश होने की दिशा में कदम बढ़ाए थे।

अब बात करें 1967 में शुरू हुई हरित क्रांति की। 1966 में जब इंदिरा गांधी भारत की प्रधानमंत्री बनीं, तब देश में भुखमरी की स्थिति थी। भारत अनाज के मामले में दूसरे देशों पर निर्भर था। इन परिस्थितियों में हरित क्रांति शुरू हुई और भारत जल्द ही अनाज उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर बन गया। इंदिरा गांधी ने इसमें अहम भूमिका निभाई थी।

1969 में बैंकों का राष्ट्रीयकरण एक और ऐसा निर्णय था जो इंदिरा गांधी के कारण ही संभव हो पाया। 14 जुलाई 1969 की आधी रात को उन्होंने 14 बैंकों का राष्ट्रीयकरण कर दिया। उनके लिए ये फैसला आसान नहीं था। यहां तक कि कांग्रेस के अंदर भी इस पर एक राय नहीं थी। लेकिन इंदिरा ने ये कठिन निर्णय लिया और देश में आर्थिक स्थायित्व का दौर शुरू हुआ।

इंदिरा गांधी की बात हो और उनके नारे ‘गरीबी हटाओ’ की बात न हो ऐसा नहीं हो सकता। 1971 के चुनाव से ठीक पहले उन्होंने देश भर में ‘गरीबी हटाओ’ का नारा दिया। गरीबों और बेरोजगारों के लिए उन्होंने कई योजनाएं शुरू कीं। हालांकि समय के साथ उनका ये नारा अपनी चमक खोता गया, लेकिन आप इससे इनकार नहीं कर सकते कि मोदी के चुनावी नारे ‘अच्छे दिन आने वाले हैं’ से पहले तक यह देश का सबसे बड़ा चुनावी नारा बना रहा।

इन फैसलों के अलावे इंदिरा गांधी ने कुछ ऐसे फैसले भी लिए जो विवादास्पद रहे। जून 1975 में आपातकाल की घोषणा, जून 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार और अपने दो कार्यकाल में राष्ट्रपति शासन का हथियार की तरह (कुल 50 बार) इस्तेमाल करने को लेकर उन्हें खासी आलोचना झेलनी पड़ी। ऑपरेशन ब्लू स्टार की कीमत तो उन्हें जान देकर चुकानी पड़ी। इस ऑपरेशन के चार महीने बाद ही उनके सिख अंगरक्षकों बेअंत सिंह और सतवंत सिंह ने गोलियों से छलनी कर उनकी हत्या कर दी।

इंदिरा गांधी को दिवंगत हुए 33 साल बीत गए। पर एक बात बिना किसी झिझक के कही जा सकती है कि इस 33 पर शून्य लग जाने के बाद भी उनके अवदानों को नहीं भुलाया जा सकता। स्वतंत्र भारत का इतिहास उनके बिना पूरा होगा, इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। ठीक वैसे ही जैसे हमारी इक्कीसवीं सदी का इतिहास मोदी के बिना पूरा होगा, ऐसा सोचना नामुमकिन है।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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महाकवि जयशंकर प्रसाद के काव्य में विविध विमर्श

बी.एन.मंडल वि.वि. हिन्दी स्नातकोत्तर विभागाध्यक्ष डॉ.इन्द्र नारायण यादव की अध्यक्षता में बहुमुखी प्रतिभा के धनी, मानवता के प्रतिष्ठापक कवि एवं हिन्दी काव्य में छायावाद के संस्थापक महाकवि “जयशंकर प्रसाद के काव्य में विविध विमर्श” पर एक भव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें बी.आर.अंबेडकर वि.वि. में हिन्दी के विभागाध्यक्ष रह चुके डॉ.नन्द किशोर नंदन ने महाकवि प्रसाद के कला पक्ष एवं भाव पक्ष पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि श्रीप्रसाद मानवता की प्रतिष्ठा तो करते ही हैं साथ ही आधुनिक संदर्भों में मिथकों का प्रयोग भी करते हैं |

यह भी बता दें कि टी.एम. वि.वि. भागलपुर में पी.जी. हिन्दी के विभागाध्यक्ष रहे डॉ.एन.पी.वर्मा ने जयशंकर प्रसाद को जहाँ हिन्दी कविता में संस्कृति को स्वर देने वाले अन्यतम कवि कहा है वहीं मगध वि.वि. के डॉ.सुनील कुमार ने प्रसादजी को मूल्य एवं संस्कृति का प्रस्तोता माना है |

यूँ आरम्भ में मंडल वि.वि. के हिन्दी के वरीय प्राध्यापक एवं सिद्धहस्त गजलगो डॉ.सिद्धेश्वर काश्यप ने जहाँ विस्तार से विषय-प्रवर्तन करते हुए यही कहा कि भावना प्रधान कहानी लेखक व महाकवि जयशंकर प्रसाद अपने समय की राष्ट्रीयता एवं राष्ट्रीय अस्मिता के प्रतिष्ठापक कवि हैं वहीं विभागाध्यक्ष रह चुके डॉ.विनय कुमार चौधरी ने प्रसादजी को कविता, कहानी, नाटक, उपन्यासकार के साथ-साथ मनोविज्ञान के ज्ञाता कवि ही नहीं बल्कि मानव मनोवृत्तियों के चितेरा कवि माना है |

अंत में विभागाध्यक्ष डॉ.इन्द्र नारायण यादव ने अपने संक्षिप्त अध्यक्षीय भाषण में यही कहा कि महाकवि के रूप में सुविख्यात जयशंकर प्रसाद हिन्दी नाट्य जगत एवं कथा साहित्य में भी एक विशिष्ट स्थान रखते हैं और वे एक मानववादी कवि हैं | इस मौके पर डॉ.रेणुका मल्लिक, डॉ.मनोज विद्यासागर आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किये |

सुधी श्रोता के रूप में प्रमुख रहे डॉ.एस.बी.प्रसाद, डॉ.के.डी.राय, डॉ.एस.एन.विश्वास, डॉ.मनोरंजन प्रसाद, प्रो.गोपाल कुमार झा, प्रो.योगेन्द्र, विकास, कृष्ण मुरारी, डॉ.राणा, राजकिशोर, सुनील आदि | धन्यवाद ज्ञापन कृष्ण मुरारी ने किया |

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मधेपुरा कॉलेज में राष्ट्रीय सेमिनार

कॉलेज मधेपुरा के विशाल सभागार में “सामाजिक परिवर्तन में शिक्षकों की भूमिका” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का उद्घाटन करते हुए बी.एन.मंडल वि.वि. के पूर्व परीक्षा नियंत्रक व समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने अपने उद्घाटन भाषण में इस धरती पर सामाजिक परिवर्तन लाने वाले गुरुऔं, समाजसेवियों एवं जनप्रतिनिधियों की सप्रसंग व्याख्या विस्तार से की और सामने शांतिपूर्वक बैठे सुधी श्रोतागण रस लेते हुए बीच-बीच में तालियां बजा-बजा कर और बहुत कुछ कहने का संकेत देते रहे, प्रोत्साहित करते रहे |

उद्घाटनकर्ता डॉ.मधेपुरी ने अपने संबोधन में विस्तारपूर्वक सामाजिक परिवर्तन से सम्बद्ध बाबू रास बिहारी लाल मंडल, शिवनंदन प्रसाद मंडल, भूपेन्द्र नारायण मंडल, बीपी मंडल, कीर्ति नारायण मंडल एवं कमलेश्वरी त्रय एवं झल्लू बाबू की चर्चा करते हुए कहा कि ये लोग समाजसेवी से अधिक सामाजिक परिवर्तन के योद्धाओं के रूप में अपनी पहचान बना-बनाकर दुनिया को अलविदा कह गये | डॉ.मधेपुरी ने यह भी कहा कि रास बिहारी बाबू ने जहां दहेज व बाल विवाह पर चोट किया वहीं शिवनंदन बाबू शिक्षा के बाबत यही कहते रहे- Not a single soul should remain uneducated on the Earth .

डॉ.मधेपुरी ने पुनः कहा कि जहाँ भूपेन्द्र बाबू ने छुआछूत पर चोट किया वहीं बी.पी. मंडल ने दुनिया में सामाजिक न्याय का परचम लहराया और जहां कीर्तिनारायण मंडल व कमलेश्वरी त्रय ने शिक्षा संस्थानों का निर्माण किया वही रामानंद मंडल उर्फ झल्लू बाबू ने नारी शिक्षा का दीप जलाया |

Audience attending the National Seminal Inaugural Function at Madhepura College Hall.
Audience attending the National Seminar Inaugural Function at Madhepura College Hall.

अंत में डॉ.मधेपुरी ने डॉ.कलाम को उद्धृत करते हुए कहा कि भारतरत्न डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम महामहिम राष्ट्रपति बनने से पूर्व भी शिक्षक थे और बाद भी शिक्षक ही बने | जीवन के अंतिम सांस तक उन्होंने शिक्षक धर्म का पालन किया तथा विश्व के शिक्षकों को अपने कर्तव्य बोध की सीख देते-देते अनायास ही दुनिया को अलविदा कह दिया | ताजिंदगी डॉ.कलाम सामाजिक परिवर्तन में अपनी अहम भूमिका का निर्वहन करते रहे |

यह भी बता दें कि समारोह के मुख्य अतिथि के रुप में सरकारी बीएड कॉलेज सहरसा के विद्वान प्राचार्य डॉ.राणा जयराम सिंह ने कहा कि शिक्षकों को सदैव अपनी विरासत को याद करते हुए सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन हेतु सर्वश्रेष्ठ भूमिका का निर्वहन करना चाहिए | डॉ.राणा ने यह भी कहा कि अब कोसी के युवाओं को एम.एड. करने के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा | अब सहरसा को एमएड की पढ़ाई करने की अनुमति NCTE से प्राप्त हो गयी है | उन्होंने डॉ.मधेपुरी को उद्धृत करते हुए प्रशिक्षुओं को ढेर सारे जीवनोपयोगी टिप्स भी दिये |

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि द्वय टी.पी.कालेज के शिक्षा संकायाध्यक्ष डॉ.विनोद शुक्ल एवं डॉ.राजीव कुमार सहित प्राचार्य डॉ.पूनम कुमारी , डॉ.विनय कुमार चौधरी, डॉ.सिद्धेश्वर काश्यप, डॉ.आलोक कुमार ने भी अपने-अपने विचार से प्रशिक्षुओं को लाभांवित किया |

आरंभ में इस उद्घाटन सत्र का शुभारंभ मधेपुरा कॉलेज के प्राचार्य सह समारोह के अध्यक्ष डॉ.अशोक कुमार ने यह कहते हुए किया कि शिक्षा वह प्रणाली है जो समाज को अपने अनुरूप ढालता है | इसके बाद अध्यक्ष के निदेशानुसार डॉ.मधेपुरी, डॉ.राणा एवं अध्यक्ष सहित सभी गण्यमान्यों ने दीप प्रज्वलित कर समारोह का उद्घाटन किया और लगे हाथ अतिथियों द्वारा स्मारिका का विमोचन भी किया गया |

जहां अतिथियों का स्वागत बीएड की छात्रा मधुलिका-श्वेता आदि ने की वहीं बीएड के सर्वेसर्वा व संयोजक विज्ञानानंद सिंह ने अतिथियों को अंगवस्त्रम , पाग व पुष्प गुच्छ देकर सम्मानित किया | सुधी श्रोता के रूप में प्रो.मनोज भटनागर, प्रो.मुस्ताक मोहम्मद, प्रो.संजय परमार, प्रो.विनोद आदि अंत तक रहे | अंत में मंच संचालक प्रो.गौतम कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित कर अध्यक्ष के निदेशानुसार लंच के लिए मंच के कार्यक्रम-समाप्ति की घोषणा की |

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दो दिवसीय युवा उत्सव का भव्य समापन

नीतीश सरकार के कला संस्कृति एवं युवा विभाग और जिला प्रशासन मधेपुरा के संयुक्त तत्वावधान में स्थानीय बी.एन.मंडल कला भवन में दो दिवसीय युवा-उत्सव को महोत्सव का स्वरूप स्थाई कला-समिति के सदस्यों- डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी, डॉ.शांति यादव, शौकत अली एवं कबड्डी संघ के सचिव अरुण कुमार द्वारा दिये जाने की सराहना तो की गई परंतु कुछ विधाओं में अकारण प्रतिभागियों की उपस्थिति में कमी इस ओर संकेत करता है कि जिले के सभी 13 प्रखंडों में जितना प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए था वह भी अकारण नहीं किया जा सका |

यह भी बता दें कि विभिन्न विधाओं में प्रथम-द्वितीय एवं तृतीय स्थान पाने वाले प्रतिभागी इस प्रकार हैं- चित्रकला में प्रथम- हिमांशु कुमार, द्वितीय- अभिषेक कुमार एवं तृतीय (दो) हिमांशु कुमार एवं आफरीन उद्दीन | लोकगीत में प्रथम स्थान पाई है सोनी कुमारी, द्वितीय आलोक कुमार एवं तृतीय (दो) अंकित राज व नंदन कुमारी | जहां फोटोग्राफी में प्रथम रहा सुमित कुमार वहीँ दूसरे नंबर पर आई समीक्षा यदुवंशी |

और यह भी जानिये कि जहां एकांकी नाटक में नवाचार रंगमंच के अमित आनंद एवं साथी प्रथम हुए, वहीं इप्टा के सोनू कुमार एवं साथी दूसरे स्थान पर रहे |

इसके अलावे हस्तशिल्प में प्रथम आई पूजा कुमारी वहीं मूर्ति कला में प्रथम स्थान पर रहे दिलीप कुमार | लोकगाथा में जहां शंकर कुमार प्रथम स्थान पाये वहीं हारमोनियम वादन मे आलोक कुमार नंबर वन रहे | आगे एक ओर जहां समूह लोकगीत में निशू प्रिया एवं साथी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया वहीं समूह लोकनृत्य में स्वर शोभिता संगीत महाविद्यालय की अनुष्का दास व गणेश दास की टीम ने प्रथम स्थान पाया |

और तो और शास्त्रीय नृत्य में प्रथम स्थान पर रही रुचिका सिन्हा तथा शास्त्रीय वादन (तबला) में प्रथम स्थान पर रहे ओम आनंद | जहां भाषण में प्रथम- हर्षवर्धन सिंह, द्वितीय- समीक्षा यदुवंशी एवं तृतीय आशीष कुमार मिश्र रहे वही सुगम संगीत में प्रथम आलोक कुमार, द्वितीय सचिन कुमार एवं तृतीय चाँदनी ऋषिदेव रही तथा शास्त्रीय गायन में कुमारी पुष्पलता प्रथम, रवि प्रकाश द्वितीय एवं चांदनी कुमारी तृतीय स्थान पर रहे |

अंत में इस द्वि-दिवसीय युवा-उत्सव समारोह के समापन सत्र में पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र वितरण करने हेतु जिला प्रशासन की ओर से आये एस.डी.एम. संजय कुमार निराला ने युवाओं, अभिभावकों एवं बुद्धिजीवियों को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में हार-जीत तो लगा ही रहता है | यदि जीत हुई तो सराहना मिलती है और हार हुई तो पुनः आगे की तैयारी करने हेतु जज्बा पैदा होता है | वही साहित्यकार व समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने प्रतिभागियों को राज्य स्तर से चयनित होकर राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा में भाग लेने की शुभकामनाएं देते हुए यही कहा कि सूरज की तरह चमकने के लिए सूरज की तरह जलना पड़ता है |

सभी विजेताओं को पुरस्कार व प्रमाण-पत्र दिया अनुमंडलाधिकारी संजय कुमार निराला, स्थाई कला समिति के सदस्यगण- डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी, डॉ.शांति यादव, शौकत अली, अरुण कुमार मंच संचालक के साथ-साथ वार्ड पार्षद ध्यानी यादव, निर्णायकगण उपेन्द्र प्रसाद यादव, डॉ.रवि रंजन, प्रो.अविनाश, स्काउट एंड गाइड आयुक्त जयकृष्ण यादव, प्रो.रामअवध सिंह, स्वर शोभिता की प्राचार्या हेमा कुमारी एवं पीटीआई मनोज कुमार व रितेश रंजन आदि |

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लालू ने कहा, नोटबंदी आम जनता का ‘फेक एनकाउंटर’ है !

नोटबंदी के बाद एक ओर देश भर में अफरातफरी मची है, बैंक और एटीएम में लोगों की कतार छोटी होने का नाम नहीं ले रही, तमाम विपक्षी दल संसद में सरकार को घेरने की रणनीति बना रहे हैं तो दूसरी ओर प्रधानमंत्री मोदी कालेधन के खिलाफ जारी अपनी जंग को आगे भी जारी रखने की बात कह  रहे हैं और बेनामी सम्पत्ति उनका अगला निशाना होगी। नोटबंदी के बाद चाहे आमलोगों की परेशानी हो या फिर सियासी तकरार, बिहार में भी चरम पर है। सोमवार को इसको लेकर भाकपा, माले, आइसा और इनौस कार्यकर्ताओं ने राज्यव्यापी विरोध दिवस मनाया। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी महासचिव और सांसद तारिक अनवर ने भी विमुद्रीकरण को बिना सोचे समझे जल्दबाजी में उठाया कदम करार दिया। सत्तारूढ़ महागठबंधन भी अपने तरीके से राज्य से लेकर केन्द्र तक इस मुद्दे को उठाने में जुटा हुआ है।

इन सारी गहमागहमी के बीच आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने एक के बाद एक कई ट्वीट कर माहौल को और गरमा दिया है। उन्होंने 500 और 1000 बड़े नोट बंद करने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से बड़े तल्ख अंदाज में पूछा है कि किसानों को किन पापों की सजा और पूंजीपति मित्रों को किन कर्मों का पुण्य दे रहे हैं? अपने ट्विटर हैंडल पर एक के बाद एक कई पोस्ट कर उन्होंने प्रधानमंत्री पर जमकर निशाना साधा और कहा कि गांवों में बैंक नहीं हैं और हैं भी तो उनमें पैसे नहीं हैं। किसानों की खरीफ पैदावार पड़ी है। कोई खरीदने वाला नहीं है। रबी की बुआई के लिए पैसा नहीं है। एसी कमरों में नीति बनाने वालों को किसानी का ‘क’ भी नहीं पता है। किसान मर रहे हैं। इन हालात में जनता को भाषण नहीं राशन चाहिए।

नोटबंदी को लेकर लालू पहले भी मोदी पर भड़ास निकाल चुके हैं। अपने एक बयान में उन्होंने नोटबंदी को मोदी का फर्जिकल स्ट्राइक बताया है। उन्होंने कहा कि इतनी परेशानी के बाद भी अगर जनता के खातों में 15-15 लाख नहीं आए तो इसका मतलब साफ होगा कि नरेन्द्र मोदी का यह फर्जिकल स्ट्राइक था। इसी के साथ आम जनता का फेक एनकाउंटर भी। लालू का कहना है कि वह खुद कालाधन के खिलाफ हैं, लकिन प्रधानमंत्री के काम में दूरदर्शिता का पूरा अभाव दिख रहा है। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि अगर मोदी कालाधन को समाप्त करना चाहते हैं तो फिर दो हजार का नोट क्यों ला रहे हैं?

बिहार के उपमुख्यमंत्री और लालू के छोटे बेटे तेजस्वी भी ट्वीट-युद्ध और मोदी पर तंज कसने में अपने पिता से पीछे नहीं। उन्होंने ट्वीट कर प्रधानमंत्री से कहा है कि जनता की परेशानी पर अगर दिल पसीज जाए तो थोड़ी रहम कर देंगे। बैंक में पैसा रहते पति का इलाज पैसे के अभाव में नहीं करा सकने के एक महिला के ट्वीट को रिट्वीट कर तेजस्वी ने कहा कि कहीं इससे पीएम का दिल पसीज जाए। इसी तरह इलाज न कराने का दर्द बयां करते एक विडियो भी उन्होंने ट्वीट किया और कहा कि पीएम इन पीड़ितों के लिए कुछ करें।

बहरहाल, अभी न तो बैंक और एटीएम की कतार छोटी हो रही, न ही नेताओं के बयान की तल्खियां। लेकिन प्रधानमंत्री ने जिस विश्वास और संकल्प के साथ नोटबंदी का इतना बड़ा कदम उठाया, अगर वो सच साबित हो जाए तो स्थिति एकदम भिन्न होगी। तब शायद अभी की परेशानियां याद न रहें – आमलोगों के साथ-साथ नेताओं को भी।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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हम क्यों मनाते हैं बाल दिवस ?

14 नवंबर यानि चाचा नेहरू का जन्मदिन जिसे हम बाल दिवस के रूप में मनाते हैं। अगर पूछा जाय कि क्यों मनाते हैं तो आपका जवाब होगा कि ऐसा इसलिए क्योंकि पं जवाहरलाल नेहरू बच्चों से बहुत स्नेह करते थे। आपकी ये बात सही तो होगी लेकिन अधूरी होगी क्योंकि पं. नेहरू बच्चों से केवल स्नेह ही नहीं करते थे, प्रौढ़ों और युवाओं की तुलना में उन्हें अधिक महत्व भी देते थे।

पं. नेहरू का स्पष्ट मानना था कि आज जन्मा शिशु भविष्य में राजनीतिज्ञ, शिक्षक, लेखक, डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक या फिर किसान और मजदूर ही क्यों न बने, राष्ट्र निर्माण का दायित्व उन्हीं के कंधों पर होता है। कहने का तात्पर्य यह कि पं. नेहरू बच्चों को देश का भविष्य मानते थे और यही इस दिन को बाल दिवस के रूप में मनाने का औचित्य है। बल्कि और बेहतर तरीके से यह कहा जाना चाहिए कि 14 नवंबर केवल स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री को याद करने का दिन ही नहीं, उनके बहाने बच्चों में विश्वास जताने का दिन भी है।

वैसे जब हम बाल दिवस की बात कर ही रहे हैं तो हमें यह जरूर जानना चाहिए कि बाल दिवस केवल भारत में ही नहीं दुनिया भर में मनाया जाता है लेकिन अलग-अलग तारीखों में। चलिए जानते हैं कैसे हुई इसकी शुरुआत?

असल में बाल दिवस की नींव 1925 में रखी गई थी, जब बच्चों के कल्याण पर विश्व-कांफ्रेंस में बाल दिवस मनाने की घोषणा हुई। 1954 में इसे दुनिया भर में मान्यता मिली। संयुक्त राष्ट्र ने यह दिन 20 नवंबर के लिए तय किया लेकिन अलग-अलग देशों में यह अलग दिन मनाया जाता है। हालांकि कुछ देश 20 नवंबर को भी बाल दिवस मनाते हैं। 1950 से बाल संरक्षण दिवस यानि 1 जून भी कई देशों में बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है।

खैर, इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि बाल दिवस हम 14 नवंबर को मनाते हैं, 20 नवंबर को मनाते हैं, 1 जून को मनाते हैं या किसी और दिन। महत्वपूर्ण यह है कि हम इस दिन पं. नेहरू के बच्चों में जताए विश्वास को याद करें। हम जानें और मानें कि हर बच्चा खास है और देश के बेहतर भविष्य के लिए उन्हें बेहतर जीवन देना बेहद जरूरी है। इन बच्चों का शरीर, मस्तिष्क या संस्कार जितना कुपोषित होगा, हमारे समाज, देश और दुनिया को भी उसी अनुपात में कुपोषण झेलना पड़ेगा, इस सच से नज़र चुराने की भूल हमें हरगिज नहीं करनी चाहिए। यही इस दिन का संदेश है।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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मधेपुरा में दो दिवसीय युवा-उत्सव आयोजित

जिला प्रशासन एवं बिहार सरकार के कला, संस्कृति एवं युवा विभाग द्वारा दो दिवसीय युवा-उत्सव को महोत्सव का स्वरूप प्रदान किया गया | जिले के तेरहो प्रखंड के 15 से 35 वर्ष आयु वाले विभिन्न कलाओं से लैश 100 से अधिक निबंधित हुनरमंद युवाओं को सरकारी स्तर पर प्रोत्साहित किये जाने हेतु यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है |

इस अवसर पर भीड़ भरे कला भवन में दो दिवसीय युवा उत्सव का उद्घाटन उपविकास आयुक्त मिथिलेश कुमार,  एडीएम मो.मुर्शीद आलम, समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी, शौकत अली, जिला उपनिर्वाची पदाधिकारी महेश पासवान द्वारा निर्णायक मंडल के सदस्य डॉ.शान्ति यादव, प्रो.अविनाश, डॉ.रविरंजन, उपेन्द्र प्रसाद यादव एवं किशोर कुमार  की उपस्थिति में दीप प्रज्वलित कर किया गया | मौके पर डीडीसी श्री कुमार ने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि जिला स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कलाकारों एवं साहित्यकारों को राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का सुनहरा अवसर मिलेगा | वहीं एडीएम मुर्शीद आलम ने कहा कि कला एवं संस्कृति को ऊंचाई प्रदान करने के लिए प्रशासन का पूरा सहयोग मिलेगा |

Dr.Madhepuri addressing the artists and Yava Sahityakar at BN Mandal Kala Bhawan Madhepura on the eve of Yuva Utsav .
Dr.Madhepuri addressing the artists and Yava Sahityakar at BN Mandal Kala Bhawan Madhepura on the eve of Yuva Utsav .

यह भी बता दें कि जिले के स्थायी कला समिति के सदस्य डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी की देख-रेख में आयोजित इस युवा महोत्सव में उन्होंने जिले भर के युवाओं से डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के संदेश को विस्तार से कहते हुए अंत में यही कहा- “ये आँखें दुनिया को दुबारा नहीं देख पायेंगी, इसलिए तुम्हारे अंदर जो बेहतरीन है वह दुनिया को देकर जाना, बच्चों को देकर जाना !”

डॉ.मधेपुरी ने जिला पदाधिकारी मो.सोहैल की पूरी टीम द्वारा जिले के विकास के बाबत कई मामले में राज्य में नंबर वन स्थान पाने के लिए, युवाओं की जोरदार तालियों के बीच, स्वागत किया और बधाई भी दी |

युवा उत्सव के प्रथम दिन यानि 12 नवंबर, 2016 को शास्त्रीय नृत्य, शास्त्रीय गायन, सुगम संगीत और भाषण प्रतियोगिता का आयोजन पूरा कर लिया गया | कार्यक्रम का संचालन जिला कबड्डी संघ के सचिव अरुण कुमार ने किया |

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मधेपुरा में बिहार स्टेट इंटर डिस्ट्रीक्ट टेबल टेनिस टूर्नामेंट

बिहार स्टेट टेबल टेनिस चैंपियनशिप का उद्घाटन डायनेमिक डीएम मो.सोहैल, समाजसेवी डॉ. भूपेन्द्र मधेपुरी, आजीवन खेल को समर्पित विनय कुमार झा, प्रदीप श्रीवास्तव, अरुण कुमार, प्रशांत कुमार, ऋषिकेश कुमार ने खेल पदाधिकारी मुकेश कुमार, अशफाक आलम, पुष्पेंद्र कुमार, विकास कुमार, पारसमल सोनी, थानाध्यक्ष मनीष कुमार, चंद्रिका यादव, वंदना घोष, संदीप शांडिल्य एवं अधिवक्ता धीरेंद्र कुमार झा आदि की गरिमामयी उपस्थिति में दीप प्रज्वलित कर किया | और हाँ ! इससे पूर्व इन अतिथियों सहित मीडिया के ब्यूरो चीफ अमिताभ, रुपेश कुमार, दिलखुश व सुभाषचंद्र आदि का स्वागत पुष्पगुच्छ देकर किया गया |

संक्षिप्त उद्घाटन भाषण में जिलाधिकारी मो.सोहैल (भा.प्र.से.) ने कहा कि यहां खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं | टेबल टेनिस के खिलाड़ी यदि मेहनत करें और राष्ट्रीय स्तर के कोच का उन्हें मार्गदर्शन मिलता रहे तो वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना कर मधेपुरा का नाम संसार के खेल जगत में रौशन कर सकते हैं |

इस अवसर पर समाजसेवी डॉ. मधेपुरी ने जिलाधिकारी मो.सोहैल को डायनेमिक डीएम बताते हुए कहा कि विकास के कार्यों में एक नहीं कई विधाओं में इन्होंने जिले को राज्य सरकार की सूची में एक नंबर पर लाकर जिले का सम्मान तो बढाया ही है, साथ ही कुछ दिन पूर्व राज्यस्तरीय कबड्डी को राष्ट्रीय स्तर की ऊंचाई प्रदान कर मधेपुरा वासियों के दिल में जगह पा लिया है | डॉ.मधेपुरी ने इंडोर स्टेडियम एवं बी.पी.मंडल नगर भवन के बाबत जिलाधिकारी से खेल को प्रोत्साहित करने हेतु की गई बातों की चर्चाएं विस्तार से की- जिसे सुनकर राज्य के विभिन्न जिलों से आये खिलाड़ियों एवं स्थानीय प्रबुद्धजनों व शहर के प्रमुख व्यवसायीयों द्वारा तालियों की गड़गड़ाहट से हर दिल अजीज डीएम मो.सोहैल को सम्मान दिया गया, बारंबार अभिनंदन किया गया | अंत में उन्होंने मधेपुरा के टेबल टेनिस नेशनल खिलाड़ी रियांशी-पायल-रिया………… शिवम् आदि का नाम लेते हुए कहा कि ऐसे आयोजन से इन खिलाड़ियों का हौसला और बुलन्द होगा |

अंत में मंच संचालक टेबल टेनिस को समर्पित प्रदीप श्रीवास्तव धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि राज्य के विभिन्न जिलों से डेढ़ सौ से अधिक खिलाड़ियों का आगमन हुआ है | उन्होंने कहा कि इस राज्य स्तरीय टूर्नामेंट में बाहर से आये नामचीन पुराने खिलाड़ियों तपन कांति दास, राहुल दास, संजय कुमार आदि को भी सम्मानित किया गया | साथ ही यह भी जानकारी दी कि पहले दिन के खेल में पटना ने बाजी मारी | निर्णायक मंडली में पटना के पंकज पांडेय, सोमनाथ राय, बेगूसराय के प्रदीप मिश्रा एवं मधेपुरा के उदय झा शामिल थे |

 

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मधेपुरा में दस दिवसीय गोपाष्टमी समारोह आयोजित

शहर के श्रीकृष्ण गौशाला परिसर में 10 दिवसीय गोपाष्टमी महोत्सव का उद्घाटन ए.डी.जे. रमण कुमार रमण, जिला परिषद अध्यक्षा मंजू देवी समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी , अध्यक्ष डॉ.सुरेश प्रसाद यादव द्वारा चिकित्सक डॉ.आर.के.पप्पू, पूर्व मुख्य पार्षद डॉ.विजय कुमार विमल, पूर्व रजिस्ट्रार सचिंद्र महतो, सचिव चंद्रशेखर, प्रमंडलीय शिक्षक नेता परमेश्वरी प्रसाद यादव आदि की पावन उपस्थिति में दीप प्रज्जवलित कर किया गया |

उद्गार व्यक्त करते हुए उद्घाटनकर्ता ए.डी.जे. रमण कुमार रमण एवं मुख्य अतिथि जिला परिषद अध्यक्षा मंजू देवी व अध्यक्ष डॉ.सुरेश प्रसाद यादव सहित सभी वक्ताओं ने गौ संरक्षण पर ध्यान देते हुए इस गौशाला को सौन्दर्योपासना का अद्भुत स्थल बनाने पर बल दिया |

वर्तमान निर्माणाधीन श्री कृष्ण मंदिर के संरक्षक समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए यही कहा कि यदि भारतीय वांग्यमय से 16 कला से पूर्ण श्रीकृष्ण और मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम को अलग कर दिया जाए तो सामाजिक जीवन की सरसता और समरसता समाप्त हो जायेगी |

डॉ.मधेपुरी ने विश्व के महान समाजवादी चिंतक डॉ राम मनोहर लोहिया को उद्धृत करते हुए कहा कि इतिहासकारों ने राम और कृष्ण को अनुकरणीय की कोटी से बाहर रखकर सर्वथा पूजनीय बना दिया ऐसा करके इतिहासकारों ने भारतीय युवजनों को सर्वाधिक क्षति पहुंचाया है | उन्होंने कहा कि राम और कृष्ण भी तो मनुष्य की ही तरह हैं, जैसे हर आदमी जन्म से मृत्यु तक षटविकार से घिरा रहता है उसी तरह ये दोनों भी षटविकार से बिल्कुल मुक्त नहीं रहे हैं |

बकौल डॉ. मधेपुरी व्यापार मंडल के अध्यक्ष योगेन्द्र प्राणसुखका के दादाश्री रामेश्वर प्राणसुखका  सहित सागरमल प्राणसुखका और जीवन सर्राफ आदि जैसे दानवीरों द्वारा इस गौशाला को 300 बीघे  से अधिक जमीन दान में दी गई थी | तब पूरे शहर में गोपाष्टमी के दिन गायों की कतारें जिधर से गुजरती उधर ही बहनें और मातायें सजधज कर पूजा करने के लिए इंतजार कर रही होती थी और आज स्थिति यह है कि गौशाला की जमीन सिकुड़ती चली जा रही है और गौशाला केवल नाम का रह गया है, जहां गाय की कौन कहे पूंछ वाली बाछी तक नहीं दिखती |

यह भी बताया डॉ.मधेपुरी ने की गाय हमारी माता क्यों कहलाती है क्योंकि हिरोशिमा नागासाकी में जब बम विस्फोट किया गया था तो वहां वर्षों विकलांग बच्चे पैदा होते रहे जिस के निवारण हेतु उस रेडिएशन को निष्क्रिय करने के लिए गौ माता के ही गोबर से लोग अपने घर आंगन को बरसों लिपते रहे और अब तो गौ मूत्र पान करके लोग कैंसर से युद्ध लड़कर जीतने भी लगे हैं |

इस गोपाष्टमी समारोह के कर्ताधर्ता पृथ्वीराज यदुवंशी, स्वागताध्यक्ष अशोक आनंद एवं सर्वाधिक धन्यवाद की पात्र है समीक्षा यदुवंशी जिनके सद्प्रयास से यहां डिजनीलैंड जैसे झूले,  मौत के कुएं और कई तरह के खेल तमाशे के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर के वृंदावनवासी भागवत कथा वाचकों एवं कृष्ण लीला-रासलीला की प्रस्तुति देने वालों को देख-सुनकर बच्चे-बूढ़े-नौजवान सभी सप्ताह भर रसास्वादन करते रहेंगे |

इस अवसर पर सुधी श्रोताओं में डॉ.सुरेश भूषण, शिक्षा प्रेमी मक्केश्वर यादव, स्काउट गाइड आयुक्त जय कृष्ण यादव, अधिवक्ता सारंगधर यादव छात्र नेता राहुल यादव, शिक्षक द्वय अमरेंद्र यादव, कामेश्वर यादव आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे |

 

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