तेजस्वी के विभागीय व्हाट्सएप पर शादी के 44000 प्रस्ताव!

बिहार के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों – लालू प्रसाद यादव एवं राबड़ी देवी – के उपमुख्यमंत्री बेटे तेजस्वी यादव इन दिनों परेशान हैं। आप कुछ और सोचें उससे पहले ही बता दें कि उनकी परेशानी के मूल में कोई विपक्षी दल या नेता नहीं, पार्टी और सरकार भी मजे में चल रही है। फिर भी यकीन मानें लालू के छोटे लाडले बेहद परेशान हैं। चलिए, पहलियां बुझाने की बजाय आपको वजह बताते हैं। दरअसल इस पूर्व क्रिकेटर की परेशानी यह है कि इन दिनों वे ‘लव यू’ के बाउंसर झेल रहे हैं। जी हाँ, उन्हें व्हाट्सएप पर पिछले कुछ महीनों में शादी के 44000 प्रस्ताव मिल चुके हैं और मजे की बात यह कि जो व्हाट्सएप नंबर इन प्रस्तावों का गवाह बना है वो उनका पर्सनल नंबर नहीं, उनके विभाग का नंबर है।
दरअसल, उपमुख्यमंत्री सह पथ निर्माण मंत्री तेजस्वी ने यह नंबर खराब सड़कों की जानकारी देने के लिए जारी किया था। उन्होंने लोगों से कहा था कि अगर कोई सड़क बदहाल दिखे तो उसकी तस्वीर और सड़क कहाँ है इसकी जानकारी भेजें। लेकिन इस व्हाट्सएप का हाल यह है कि इस पर अब तक आए 47000 मैसेज में से लगभग 44000 मैसेज में उनसे शादी का प्रस्ताव रखा गया है। सिर्फ 3000 मैसेज ऐसे हैं जिनमें सड़कों का मरम्मत कराने की बात कही गई है।
विभाग के अधिकारी बताते हैं कि ज्यादातर लड़कियों ने व्हाट्सएप पर अपनी पर्सनल जानकारी शेयर की है जिसमें फिगर से लेकर त्वचा का रंग और लंबाई भी शामिल है। हालांकि सावधानी बरतते हुए यह भी कहा कि शायद लड़कियों को लगा हो कि यह तेजस्वी का पर्सनल नंबर है। वहीं तेजस्वी ने इस ‘अभूतपूर्व’ समस्या पर कहा कि अगर वह शादीशुदा होते तो ऐसे पर्सनल मैसेज से मुश्किल में पड़ जाते। उन्होंने कहा – “भगवान का शुक्र है कि मैं सिंगल हूँ।”
इस बाबत आगे कोई सवाल न हो, यह भांपकर तेजस्वी ने पहले ही कह दिया कि वे अरेंज्ड मैरेज करना पसंद करेंगे। यह सुन पता नहीं वे 44000 लड़कियों क्या करेंगी जो व्हाट्सएप पर अपना ‘भविष्य’ तलाशने में जुटी हैं। शायद उनमें से कई अपने ‘लव’ (अगर सचमुच हो तब भी, ना हो तब भी) को ‘अरेंज्ड’ करने की जुगत में लग भी गई हों!

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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2019 के आईने में जेडीयू का राजगीर अधिवेशन

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ‘संघमुक्त भारत’ के अपने अभियान की औपचारिक घोषणा कर दी। राजगीर में जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद संभालने के बाद उन्होंने सभी विपक्षी दलों से मुद्दों के आधार पर एक मंच पर आने की अपील की। उन्होंने कहा कि वे गैर बीजेपी दलों के साथ आने को तैयार हैं। नीतीश कुमार का यह कदम 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले गैर बीजेपी दलों का साझा मंच बनाने की कोशिश का हिस्सा है और कहने की जरूरत नहीं कि वह यह मंच अपनी अगुआई में चाहते हैं। दो दिनों के इस अधिवेशन में पार्टी ने नीतीश कुमार को साझे मंच का पीएम उम्मीदवार भी माना, हालांकि इतनी ‘सावधानी’ जरूर बरती गई कि राजनीतिक प्रस्तावना में इस बात का जिक्र ना हो।

इस अधिवेशन में नीतीश ने सर्जिकल स्ट्राइक पर पहली बार मोदी सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि वे शुरू से इस मुद्दे पर सरकार के साथ हैं और रहेंगे लेकिन अब इस मुद्दे पर बीजेपी राजनीति करने लगी है। उन्होंने कहा कि नरेन्द्र मोदी देश के पीएम हैं, किसी एक दल के नेता मात्र नहीं और उनका व्यवहार उसी अनुरूप होना चाहिए। पाकिस्तान मुद्दे पर सरकार को और कड़ा रुख अपनाने की सलाह देते हुए नीतीश ने कहा कि मोदी सरकार को पाकिस्तान को ‘लव लेटर’ लिखना बंद कर देना चाहिए। तीन तलाक के मुद्दे पर भी उन्होंने सरकार पर निशाना साधा और कहा कि यह सब धार्मिक संगठनों के ऊपर छोड़ दिया जाना चाहिए। उन्होंने मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि विकास के मामले में पूरी तरह फेल होने के कारण वह ऐसे मुद्दे उठा रही है।

नीतीश कुमार ने अध्यक्ष पद संभालने के बाद घोषणा की कि अब वे सभी राज्यों का दौरा करेंगे। उन्होंने अपनी पार्टी के विस्तार और समान विचार वाले गैर बीजेपी दलों के साथ गठबंधन बनाने की बात भी कही। इसके अलावा उन्होंने सभी विपक्षी दलों से 16 नवंबर से होने वाले संसद सत्र के दौरान बड़े मुद्दों पर एक साथ मिलकर सरकार पर हमला बोलने का आग्रह किया।

कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि जेडीयू के राजगीर अधिवेशन से नीतीश और उनकी पार्टी की 2019 के चुनाव को ‘मोदी बनाम नीतीश’ का रूप देने की कोशिश और तेज हुई। इस अधिवेशन में विशिष्ट अतिथि के तौर पर पड़ोसी राज्य झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबुलाल मरांडी की उपस्थिति भी अकारण नहीं थी। बिहार चुनाव में जीत हासिल करने के बाद से ही नीतीश मिशन 2019 के तहत बिहार के बाहर पैर पसारने में दिन-रात एक कर रहे हैं। शरद यादव की जगह उनका अध्यक्ष बनना हो, यूपी चुनाव को लेकर चहलकदमी हो, शराबबंदी को राष्ट्रव्यापी अभियान बनाने की कोशिश हो या फिर राजगीर अधिवेशन से उठाये जाने वाले स्वर – ये सारी कवायद अपना कद बढ़ाने और प्रधानमंत्री पद पर दावेदारी जताने की खातिर है जिसे समझने के लिए आपका राजनीति का पंडित होना जरूरी नहीं।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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मधेपुरा में द्वि दिवसीय बिहार कला दिवस का आयोजन

लगभग 3000 वर्ष पूर्व ‘चामर ग्राहिणी यक्षिणी’ की लाजवाब ओपदार चमकवाली मौर्यकालीन ‘चुनार पत्थर’ से बनी इस मूर्ति की खूबसूरती दुनिया में प्रसिद्धि प्राप्त कर चुकी है | कहा जाता है कि इसके सामने पिकासो की पेंटिंग भी फीकी है |

यहाँ यह भी बता दें कि जहाँ पटना संग्रहालय की इस उत्कृष्ट ऐतिहासिक ‘चामर ग्राहिणी यक्षिणी’ की मूर्ति को देखकर बिहार की नीतीश सरकार ने इस मूर्ति के पटना के दीदारगंज से 18 अक्टूबर 1917 को प्राप्त होने के सौवें वर्ष को राज्य के सभी जिलों में 18 अक्टूबर 2016 को एक दिवसीय ‘बिहार कला दिवस’ के रुप में मनाये जाने का निर्देश दिया है, वहीं मधेपुरा जिला में इसके लिए यहां के डायनेमिक डी.एम.  मो.सोहैल (भा.प्र.से.) ने द्विदिवसीय आयोजन की घोषणा की है और चाक्षुष एवं प्रदर्श कला की सफलता के लिए डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी की अध्यक्षता में 7 सदस्यीय समिति भी गठित कर दी जिसमें डॉ.ए.के. मंडल, रेखा यादव, प्रदीप कुमार झा, मो.शौकत अली, तुरबसु एवं उद्घोषक अरुण कुमार सदस्य हैं |

DM Md.Sohail, S.P. Vikash Kumar, Dr.Madhepuri, DDC Mithilesh Kumar, Dr.Shanti Yadav, Kishore Kumar, A.K.Bachchan & J.K.Yadav inaugurating "Bihar Kala Diwash-2016".
DM Md.Sohail, S.P. Vikash Kumar, Dr.Bhupendra Madhepuri, DDC Mithilesh Kumar, Dr.Shanti Yadav, Kishore Kumar, A.K.Bachchan & J.K.Yadav inaugurating “Bihar Kala Diwash-2016”.

यह भी जानिये कि समिति द्वारा जिले के तेरहो प्रखंडों एवं दूर-दराज के गांवों की वैसी प्रतिभाओं की खोज की गई है जिन्हें कभी इतना बड़ा मंच नसीब नहीं हुआ था | दिनांक 14-15 अक्टूबर को सौ से ऊपर कलाकारों का विभिन्न विधाओं में निबंधन किया गया |

अक्टूबर 18 को 10:00 बजे पूर्वाहन में जिलाधिकारी मो.सोहैल, एसपी विकास कुमार, आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ.मधेपुरी, डीडीसी मिथिलेश कुमार, एन.डी.सी. मुकेश कुमार,  डी.पी.ओ.राखी कुमारी, जयकृष्ण यादव, डॉ.शान्ति यादव, डॉ.ए.के.मंडल, ध्यानी यादव, प्रदीप कुमार झा, मो.शौकत अली, तुरबसु, श्यामल कुमार सुमित्र, अरुण कुमार उद्घोषक व अन्य द्वारा सम्मिलित रूप से दीप प्रज्वलित कर विधिवत “बिहार कला दिवस-2016” का उद्घाटन किया गया |

इस अवसर पर डीएम मो.सोहैल ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी प्रतिभाओं को मंच देकर प्रोत्साहित करना ही इस समारोह का उद्देश्य है | संदेश के रूप में उन्होंने कहा कि कला-संस्कृति का संरक्षण कर हम सभी समाज को संकीर्णता से उबार सकते हैं | जहाँ अपने संबोधन में एसपी विकास कुमार ने कहा कि कला-संस्कृति से ही अन्यत्र हमारी पहचान बनती है वहीं कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने कहा कि प्रदर्शनी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में ग्रामीण क्षेत्र के कलाकारों के अलावा शहर के कलाकारों को भी पूरा मौका दिया जा रहा है | अध्यक्ष डॉ.मधेपुरी द्वारा “बिहार कला दिवस-2016” के निमित्त तैयार किये गये “एक अत्यंत खूबसूरत लीफलेट” सभी दर्शकों एवं कलाकारों के बीच बांटा गया जिसमें ‘चामर ग्राहिणी यक्षिणी’ प्राप्त होने के रोचक ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को दर्शाया गया है तथा विकास का पर्याय बन चुके बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार और कला, संस्कृति एवं युवा विभाग एवं मधेपुरा जिला प्रशासन टीम को हृदय से साधुवाद दिया गया है | साथ ही डॉ.मधेपुरी ने डी.एम. मो.सोहैल द्वारा द्विदिवसीय आयोजन करने हेतु उनकी भावना व तत्परता की खूब सराहना की है |

बाद में बी.एन.मंडल स्टेडियम हॉल में आयोजित चाक्षुषकला का मुआयना डी.एम.  मो.सोहैल की पूरी टीम एवं अध्यक्ष डॉ.मधेपुरी के सारे सहयोगियों ने किया | हॉल में लगभग 5 दर्जन चित्रकला, मूर्तिकला, मधुबनी पेंटिंग आदि के कलाकारों द्वारा तथा प्रो.अविनाश के “चित्रालय” के छात्र-छात्राओं द्वारा ‘चामर ग्राहिणी यक्षिणी’ सहित ढेर सारे मनमोहक कलाकारी का प्रदर्शन किया गया | नवाचार रंग मंडल के शहंशाह की पूरी टीम कलाकारी करते देखे गये | प्रायः कलाकार अपने चित्रों व पेंटिंग के साथ डी.एम. मो.सोहैल, डी.डी.सी.मिथिलेश कुमार एवं अध्यक्ष डॉ.मधेपुरी के साथ फोटोग्राफ एवं ऑटोग्राफ लेने में मशगुल दिखे  |

All the artists engaged in taking photographs $ autographs of DM, DDC & Dr.Madhepuri in BN Mandal Stadium Hall on this occasion of Bihar Kala Diwas Samaroh.
All the artists engaged in taking photographs and autographs of DM, DDC & Dr.Madhepuri in BN Mandal Stadium Hall on this occasion of Bihar Kala Diwas Samaroh.

दूसरे दिन 19 अक्टूबर को समारोह समापन के समय प्रत्येक विधा में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले एक प्रतिभा पुत्र अथवा पुत्री को जिला पदाधिकारी द्वारा प्रशस्ति प्रमाण-पत्र एवं मोमेंटो दिया जायगा |

निर्णायक मंडल के सदस्य के रूप में प्रो. रीता कुमारी, प्रो. अरुण कुमार ‘बच्चन’, प्रो. रविरंजन के साथ-साथ संगीत साधिका हेमा कुमारी, वन्दना कुमारी, चंद्रिका यादव एवं  चिरामणि यादव, राम स्वरूप यादव आदि अन्त तक समारोह में अपनी उपस्थिति बनाये रखें |

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बिहार का गौरव राष्ट्रीय अंडर-19 शतरंज चैम्पियन

अररिया के 14 वर्षीय कुमार गौरव ने आंध्रप्रदेश में हुई 46वीं राष्ट्रीय अंडर-19 शतरंज प्रतियोगिता का खिताब अपने नाम कर लिया। इस उपलब्धि के साथ गौरव विश्व जूनियर शतरंज में भारत का प्रतिनिधित्व करने के भी पात्र हो गए हैं। अब वह जूनियर वर्ल्ड चैम्पियनशिप, एशियन जूनियर चैम्पियनशिप और कॉमनवेल्थ चेस चैम्पियशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। बता दें कि गौरव बिहार के राष्ट्रीय जूनियर शतरंज विजेता बनने वाले तीसरे खिलाड़ी हैं। इससे पहले प्रमोद कुमार सिंह 1980 और 1981 में दो बार और मनीषी कृष्ण 1989 में बिहार के लिए यह खिताब जीत चुके हैं।

गौरतलब है कि बिहार के इस लाल ने 8 अक्टूबर को शुरू हुई अंडर-19 चेस चैम्पियनशिप का गोल्ड बिहार सहित अन्य राज्यों के 136 खिलाड़ियों को पीछे छोड़ कर जीता है जिनमें कई अन्तर्राष्ट्रीय मास्टर भी थे। यह पहला मौका नहीं है जब गौरव ने बिहार का मान बढ़ाया है। इसके पूर्व भी वह कई राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुके हैं। पिछले वर्ष कॉमनवेल्थ चेस चैम्पियनशिप अंडर-18 में उन्होंने कांस्य पदक अपने नाम किया था। 2014 में वह दिल्ली में आयोजित पार्श्वनाथ इंटरनेशनल चेस फेस्टिवल के चैम्पियन बने जिसमें 41 देशों के खिलाड़ियों ने भाग लिया था, और 2013 में पार्श्वनाथ इंटरनेशनल ओपन चेस टूर्नामेंट में उन्होंने बांग्लादेश की चेस क्वीन व वुमेन इंटरनेशनल मास्टर (डब्ल्यूआईएम) खिताबधारी 65 वर्षीया रानी हमीद को हराकर तहलका मचा दिया था। कभी हार ना मानने वाला जज्बा गौरव की सबसे बड़ी ताकत रही है।
ये जानकर सुखद आश्चर्य होगा कि बिहार के अररिया शहर के शिवपुरी निवासी व अधिवक्ता देवनंदन दिवाकर के पुत्र कुमार गौरव में तो शतरंज की विलक्षण प्रतिभा है ही, उनके छोटे भाई-बहन भी इस खेल में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं। गौरव के छोटे भाई सौरभ आनंद 2012 में राष्ट्रीय अंडर-9 शतरंज चैम्पियन रह चुके हैं और इस समय सीनियर बिहार चैम्पियन हैं, जबकि उनकी छोटी बहन गरिमा गौरव राष्ट्रीय स्कूल शतरंज की विजेता रह चुकी हैं।
कहने की जरूरत नहीं कि कुमार गौरव की उपलब्धि से आज पूरा बिहार गौरवान्वित है। उनकी सफलता बिहार शतरंज में नई जान फूंकेगी। शतरंज के इस नन्हे उस्ताद ने साबित कर दिया है कि वह विश्व चैम्पियनशिप जीतने की भी क्षमता रखता है। पर इस चमकते सिक्के का दूसरा पहलू यह है कि प्रचंड प्रतिभा के धनी इस खिलाड़ी की राह में आर्थिक दिक्कतें बाधा बनती रही हैं। अगर उसे समुचित सुविधा मिले तो वह एक दिन शतरंज की सबसे ऊँची मीनार पर परचम लहराएगा, इसमें कोई दो राय नहीं।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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तो यूपी में अगली सरकार भाजपा की!

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा के लिए अच्छी ख़बर! इंडिया टुडे-एक्सिस द्वारा हाल में किए गए जनमत सर्वेक्षण के अनुसार यूपी विधान सभा चुनाव में भाजपा के सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरने के आसार हैं, जबकि बसपा सुप्रीमो मायावती मुख्यमंत्री के तौर पर पहली पसंद के तौर पर उभरी हैं। इस सर्वेक्षण की मानें तो सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी के हाथों से सत्ता की चाबी निकलती दिख रही है।

5 सितंबर से 5 अक्टूबर के बीच कराए गए इस सर्वेक्षण में 31% वोट और 170-183 सीटों के साथ भाजपा पहले और 28% वोट एवं 115-124 सीटों के साथ बसपा दूसरे स्थान पर है। सपा को इस सर्वेक्षण में 25% वोट तथा 94-103 सीटों के साथ तीसरा स्थान मिला है, जबकि यूपी को लेकर कई नए प्रयोगों में जुटी कांग्रेस के हिस्से में केवल 6% वोट और 8-12 सीटें आई हैं। अन्य के खाते में 1-10 सीटें और 10% वोट हैं।

सर्वेक्षण के विस्तार में जाएं तो पूर्वी (167 सीट) तथा पश्चिमी यूपी (136 सीट) में भाजपा को स्पष्ट बढ़त है। पूर्वी यूपी में भाजपा 33% वोटों के साथ सबसे आगे है। बसपा को 28%, सपा को 22% और कांग्रेस को 5% वोट मिल सकते हैं। उधर पश्चिमी यूपी में भाजपा के खाते में 31% वोट हैं, जबकि बसपा-सपा को 27%-27% और कांग्रेस को 4% वोट मिल सकते हैं।

81 सीटों वाले मध्य यूपी में सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की प्रतिष्ठा थोड़ी बचती दिख रही है। यहाँ 29 प्रतिशत वोटों के साथ सपा बाकियों से आगे है, जबकि 28% वोटों के साथ बसपा कुछ ही पीछे है। भाजपा को यहाँ 26% वोट मिल रहे हैं और कांग्रेस यहाँ भी दहाई के आंकड़े को नहीं छू पा रही है और उसके हिस्से में 6% वोट ही जा रहे हैं। शेष 11% वोटर अन्य के खाते में जाते दिख रहे हैं।

19 सीटों वाले बुंदेलखंड की बात करें तो 34% वोटों के साथ यहाँ बसपा को बढ़त मिल रही है। भाजपा 32% वोटों के साथ दूसरे और सपा 16% वोटों के साथ तीसरे स्थान पर है। कांग्रेस को यहाँ भी 6% वोटों के साथ संतोष करना पड़ रहा है।

बतौर मुख्यमंत्री मायावती 31% लोगों की पहली पसंद हैं, जबकि मौजूदा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को इस पद के लिए 27% लोगों ने पसंद किया है। भाजपा से गृहमंत्री राजनाथ सिंह 18% और योगी आदित्यनाथ 14% लोगों की पसंद हैं। हालांकि भाजपा ने अभी तक मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के नाम की घोषणा नहीं की है। वहीं कांग्रेस को निराशा होगी कि इस पद के लिए उनकी घोषित उम्मीदवार शीला दीक्षित मात्र 1% लोगों की पसंद हैं, जबकि प्रियंका गांधी को इस पद के लिए 2% लोगों ने पसंद किया।

बता दें कि यह सर्वे सर्जिकल स्ट्राईक के कुछ दिन पहले से लेकर बाद तक का है और इसके लिए वहाँ के 403 विधानसभा क्षेत्रों में 22,231 लोगों की राय ली गई।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप 

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भारतरत्न डॉ. कलाम की जयंती पर मधेपुरा में मिठाईयां बंटीं

15 अक्टूबर 2016 को महान वैज्ञानिक भारतरत्न डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की 86वीं जयंती समारोह बिल्कुल सादगी के साथ डॉ. भूपेन्द्र मधेपुरी के निवास ‘वृंदावन’ में स्थानीय तुलसी पब्लिक स्कूल के छात्रों, शिक्षकों एवं स्कूल के निदेशक श्यामल कुमार सुमित्र व प्राचार्य डॉ. हरिनंदन प्रसाद यादव एवं रंगकर्मी विकास-वरुण-विभीषण आदि की उपस्थिति में मनाई गई तथा बच्चे-बच्चियों, शिक्षकों एवं अखबारनवीसों के बीच मिठाईयां बांटी गईं। इस समारोह में रेणु-रोजी-शिवानी, प्रियंका-मनीषा-गजाला सहित अपर्णा-निगम-संध्या, स्वर्णा-कल्पना-अदिति परमार की उपस्थिति अंत तक बनी रही।

इस अवसर पर सभी गणमान्यों द्वारा डॉ. कलाम को श्रद्धांजलि दी गई तथा पुष्पांजलि अर्पित की गई। डॉ. मधेपुरी ने अवरुद्ध कंठ से उन शब्दों को रखा जो अविस्मरणीय मुलाकात के क्षणों में महामहिम राष्ट्रपति के रूप में डॉ. कलाम ने अपने सहयोगी-शिष्य डॉ. अरुण कुमार तिवारी की उपस्थिति में कहा था – “ये आँखें दुनिया को दुबारा नहीं देख पाएंगीं, अस्तु तुम्हारे अंदर जो बेहतरीन है वह दुनिया को देकर जाना, बच्चों को देकर जाना..!”

हाल ही में शिष्य अरुण कुमार तिवारी द्वारा लिखी गई जीवनी ‘डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम – एक जीवन’ की पंक्तियों को उद्धृत करते हुए उपस्थित छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों से डॉ. मधेपुरी ने कहा – “डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम आज भी जीवित हैं और आगे भी बच्चों की कल्पनाओं में, युवाओं एवं वयस्कों के विचारों में, वैज्ञानिकों के आविष्कारों में… महान राष्ट्र-निर्माण के सपनों में सदैव जीवित रहेंगे।”

अंत में डॉ. मधेपुरी ने कहा – “विश्व की प्रगति, समृद्धि और शान्ति का सपना देखने वाला विश्वगुरु डॉ. कलाम कभी भी विश्व-क्षितिज से विलीन नहीं होगा और आने वाली कई पीढ़ियों के लिए एक शाश्वत उपहार बना रहेगा।”

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तो राबड़ीजी ने आरएसएस के हाफ पैंट को फुल कर दिया!

आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की चुप्पी इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई थी। और तो और, ट्विटर और फेसबुक पर भी उनकी ओर से सन्नाटा-सा पसरा था। पर लालूजी आखिर लालूजी हैं। अपनी चुप्पी पर कयासों का बाज़ार गर्म होते देख उन्होंने सबको और खासकर भाजपा को अपने अंदाज में चुप कराने (या चर्चा को शहाबुद्दीन से हटाने) की खातिर खासा दिलचस्प ट्वीट किया है। अपने मसालेदार बयानों से ‘मंच को लूटने’ में माहिर लालूजी ने इस बार ऐसा बयान दे डाला कि पहली बार में कोई भी सकते में आ जाए और कुछ भी प्रतिक्रिया करते ना बने। जी हाँ, ट्वीट के माध्यम से दिए अपने बयान में उन्होंने आरएसएस के हाफ पैंट के फुल पैंट में तब्दील होने का श्रेय अपनी पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को दिया है।

बीते मंगलवार को पोस्ट किए अपने ट्वीट में लालू ने लिखा है कि राबड़ी के एक बयान से ही आरएसएस का खाकी पैंट हाफ से फुल हो गया। लालू ने अपने अगले ट्वीट में लिखा कि हमने आरएसएस को फुल पैंट पहनवा ही दिया। राबड़ी देवी ने सही कहा था कि इन्हें संस्कृति का ज्ञान नहीं, शर्म नहीं आती, बूढ़े-बूढ़े लोग हाफ पैंट में घूमते हैं। लालू की तीखी टिप्पणी यहीं नहीं रुकी। आगे उन्होंने कहा कि अभी तो हमने हाफ को फुल पैंट करवाया है, माइंड को भी फुल करवाएंगे, पैंट ही नहीं सोच भी बदलवाएंगे. हथियार भी डलवाएंगे, जहर नहीं फैलाने देंगे। इसी के साथ उन्होंने कुछ तस्वीरें भी शेयर की हैं जिनमें संघ के लोग अब फुल पैंट पहने दिख रहे हैं।
बता दें कि राबड़ी देवी ने इसी साल जनवरी में आरजेडी के एक कार्यक्रम में कहा था कि पब्लिक के सामने हाफ पैंट पहनने पर आरएसएस नेताओं को शर्म नहीं आती? उन्होंने कहा था – “बूढ़ा-बूढ़ा आदमी सब हाफ पैंट पहनता है… खराब भी नहीं लगता।” अब बाकी लोग जो कहें, लालूजी को राबडी देवी का बयान ‘तर्कपूर्ण’ और ‘आक्रामक’ लगता है और वे बेहिचक अपनी अर्द्धांगिनी को संघ की अब तक चली आ रही परम्परा को तोड़ने का श्रेय भी दे रहे हैं।
बहरहाल, लालूजी तो ट्वीट करके निकल लिए। अब ये भाजपा और संघ पर है कि इस पर चुप रहें, प्रतिक्रिया दें या फिर मौके पर मारे गए चौके को लेकर सिर धुनें। संघ ने चाहे जिस कारण 90 वर्ष पुराने पहनावे में बदलाव किया हो, इस पर राबड़ी की टिप्पणी पहले ही आ गई थी, इससे इनकार कैसे किया जाय? और लालूजी से आप चाहे जितने असहमत हों, उन्हें इसे राबड़ी के बयान का ‘आफ्टर इफेक्ट’ बताने से कैसे रोका जाय?

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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गुरुवार को भी नहीं सुधरे हालात बिहारीगंज के

उन्मादी भीड़ न तो किसी की बात सुनती है और न ही किसी की बात मानने को तैयार होती है- चाहे वो मंत्री, सांसद, विधायक, कमिश्नर, कलक्टर, डी.आई.जी., एस.पी.,  एस.डी.एम., डी.एस.पी., दरोगा और कोई भी क्यों ना हो !

यह भी बता दें कि बिहारीगंज में हालात भले ही बिगड़ गये हों, लेकिन प्रशासन और पुलिस यदि संयम नहीं बरती होती तो वहां की स्थिति और भी बदतर हो गयी होती | मंगलवार और बुधवार को स्वयं डी.एम. मो.सोहैल अकेले मोर्चा संभालते नजर आये | जब दूसरे पक्ष के उन्मादी लोग उग्र होकर ललकारते हुए चले आ रहे थे तो डी.एम. के समझाने के बावजूद भी भीड़ नहीं रुकी और न मानी तो डीएम अचानक बीच सड़क पर ही लेट गये और जोर-जोर से कहने लगे कि अगर हंगामा ही करना है तो मेरी लाश पर से पहले गुजरना होगा |

फिर तो बिहारीगंज की स्थिति को संभालने तथा शांति बहाली की अपील करने निकल पड़े- आपदा प्रबंधन मंत्री प्रो.चंन्द्रशेखर, सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव, विधायक निरंजन मेहता, पूर्व मंत्री सह विधायक नरेंद्र नारायण यादव, किशोर कुमार मुन्ना आदि पर ही उपद्रवियों की उन्मादी भीड़ ने पथराव कर दिया | कुछ को चोटें भी लगीं | इस बीच एसपी विकास कुमार ने बिहारीगंज के थानाध्यक्ष को निलंबित कर दिया | भीड़ को तितर-बितर करने के लिए कई राउंड अश्रु-गैस के गोले दागे गये और लाठियां भी भांजी गईं | स्थिति तनावपूर्ण देखते हुए डीएम मो.सोहैल और एस.पी. विकास कुमार ने खुद मोर्चा संभाला | लगभग 40 उपद्रवियों को हिरासत में लिया गया | मंगलवार से ही डीएम और एसपी बिहारीगंज में दोनों पक्षों के उपद्रवियों से जूझ रहे हैं | ना रात में उन्हें नीन्द आती है और ना ही दिन में चैन से कभी बैठ पाते हैं | दोनों वहीं कैंप कर रहे हैं |

उपद्रवियों को फिर भी नजर नहीं आती कि बगल के चौसा में एक ही मैदान में दुर्गा माता की प्रतिमा और मुहर्रम का ताजिया शांति-सद्भाव और भाईचारे का नमूना पेश कर रहा है तो कटिहार के डहेरिया में दोनों पक्षों की एकजुटता का उदाहरण पेश करते लोग थकते नहीं | बगल के समस्तीपुर जिले में खुदनेश्वर शिव मंदिर में शिवलिंग के बगल में मुस्लिम महिला खुदनी के मजार पर साथ-साथ लोग पुष्पांजलि करते हैं, पूजा करते हैं | और तो और दुनिया की सबसे अधिक मुस्लिम आबादी वाले देश इंडोनेशिया में “नोट” पर भगवान शिव के पुत्र गणेशजी की तस्वीर छपी होती है और वहां के लोग ‘राम-कथा’ का मंचन-प्रदर्शन संसार भर में भाईचारे को जिन्दा रखने के लिए करते हैं |

काश ! दोनों पक्ष के उपद्रवियों द्वारा अपने अन्दर के उन्मादी रावण को जलाया जाता और मुहर्रम में सच के लिए दी गई कुर्वानियों को याद किया जाता तो जनता के विकास के कार्यों को बाधित कर डी.एम. मो.सोहैल, एसपी विकास कुमार एवं जन प्रतिनिधियों को इस कदर मुख्यालय छोड़कर बिहारीगंज में धरना नहीं देना पड़ता |

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और फिर से जीवित हो गया जटायु..!

अगर रामकथा में आपकी रुचि है और आपने रामायण एक बार भी पढ़ी, सुनी या टीवी पर देखी है तो पक्षीराज जटायु को भूल जाएं, ऐसा हो नहीं सकता। जब रावण माता सीता का हरण कर उन्हें लंका ले जा रहा था तब जटायु ने रावण से युद्ध किया था और वीरगति को प्राप्त हुए थे। उन्हीं जटायु को समर्पित है हाल में बन कर तैयार हुआ केरल का जटायु नेचर पार्क। कहते हैं इस अनोखे पार्क में जटायु की विशाल प्रतिमा ठीक उसी जगह पर बनाई गई है जहाँ रावण द्वारा पंख काटे जाने पर जटायु मरणासन्न होकर गिरे और प्राण त्यागे थे।
जटायु नेचर पार्क केरल के कोल्लम जिले के चदयामंगलम गांव में बनाया गया है। यहाँ जटायु की जो प्रतिमा बनाई गई है उसे दुनिया का सबसे बड़ा स्कल्पचर कहा जा रहा है। बता दें कि यह स्कल्पचर 200 फीट लंबा, 150 फीट चौड़ा और 70 फीट ऊँचा है। 15000 वर्गफुट के प्लेटफॉर्म पर बनाए गए इस स्कल्पचर को तैयार करने में 7 साल का वक्त लगा है और केरल सरकार ने इस पर 100 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।
पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक जटायु अरुण देवता के पुत्र थे। इनके भाई का नाम सम्पाती था। रामायण में सीताजी के हरण के प्रसंग में जटायु का उल्लेख प्रमुखता से हुआ है। जब श्रीराम और लक्ष्मण विकल हो सीताजी को खोज रहे थे तब उन्होंने जटायु को मरणासन्न अवस्था में पाया था। जटायु ने ही श्रीराम को बताया कि रावण माता सीता का हरण करके लंका ले गया है और उन्हीं की गोद में अपने प्राण त्याग दिए। तत्पश्चात् श्रीराम ने अनुज लक्ष्मण के साथ मिलकर पुण्यात्मा जटायु का अंतिम संस्कार किया।
देखा जाय तो सम्पूर्ण रामकथा ‘पक्षीराज’ की ऋणी है। ये सोचना मुश्किल है कि अगर जटायु ना होते तो श्रीराम को सीताजी के हरण की जानकारी कैसे हो पाती! ये अलग बात है कि श्रीराम साक्षात् ब्रह्म थे, पर वो लीला कर रहे थे, ये कैसे भूला जा सकता है? गौर से देखें तो जटायु रामायण के पूर्वार्द्ध और उत्तरार्द्ध के सूत्रधार हैं। रामकथा के इस किरदार का महत्व जितना राम के प्रति उनके नि:स्वार्थ प्रेम और भक्ति के कारण है उतना ही इस बात के लिए कि वे मनुष्य और अन्य जीवों के अन्योन्याश्रय संबंध – वसुधैव कुटुम्बकम् – के बहुत बड़े प्रतीक हैं। यही कारण है कि रामायण में संक्षिप्त उपस्थिति के बावजूद उनका अमर और अमिट स्थान है।
कहना गलत ना होगा कि कल तक जो केरल अपनी खूबसूरती के लिए मशहूर था, अब उसके टूरिस्ट मैप पर हमारी संस्कृति का अत्यन्त महत्वपूर्ण अध्याय जटायु नेचर पार्क के तौर पर अंकित हो गया है। अपने समृद्ध अतीत को सहेजने का इससे बेहतर तरीका और क्या हो सकता है भला! वैसे चलते-चलते पर्यटन प्रेमियों को ये बता देना जरूरी है कि जटायु नेचर पार्क में बनी उनकी विशाल प्रतिमा के भीतर आप डिजिटल म्यूजियम और 6डी थियेटर का आनंद भी ले सकते हैं। और हाँ, केरल की प्रसिद्ध आयुर्वेद चिकित्सा सुविधा भी इस नेचर पार्क में आपके इंतजार में होगी।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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74वें पड़ाव पर कभी ना बुझने वाली लौ

कल 74 साल के हो गए अमिताभ। अमिताभ यानि कभी ना बुझने वाली लौ। अपने काम से अपने नाम को परिभाषित करने वाले बिरले ही होते हैं और अमिताभ बच्चन नाम का ये शख्स उन्हीं चंद लोगों में एक है। कितनी अद्भुत बात है कि पिता हरिवंश राय बच्चन के घनिष्ठ मित्र सुमित्रानंदन पन्त जन्म के बाद बालक अमिताभ को देखने नर्सिंग होम गए थे और देखते ही कहा था – कितना शांत दिखाई दे रहा है, मानो ध्यानस्थ अमिताभ। यह सुनकर माता-पिता ने अपने बच्चे को यही नाम दे दिया और उस बच्चे को देखिए, उसने उस नाम में उसके अर्थ से कहीं अधिक ‘आभा’ भर दी।

अमिताभ आज ‘संज्ञा’ से ‘विशेषण’ में तब्दील हो चुके हैं। सफलता के पर्याय बन चुके हैं। सिनेमा से जुड़ा हर शख्स उनके जैसा बनना-दिखना चाहता है। उनकी कामयाबी को दोहराना चाहता है। कारण यह कि उनके व्यक्तित्व में जीवन के वो सारे रंग हैं, जिन्हें पाने के लिए इंसान को सदियां लग जाती हैं। कहना गलत ना होगा कि आधुनिकता और परंपरा का जितना सुन्दर और सटीक मिश्रण उनमें है, जीवित भारतीयों में उतना किसी और में नहीं। वे सही मायनों में ‘सम्पूर्ण’ हैं और ये सम्पूर्णता जितनी नैसर्गिक और दैवी है उतनी ही हाड़तोड़ मेहनत और अथक संघर्ष है उसके पीछे।

पढ़ाई-लिखाई के बाद अमिताभ को कोलकाता के एक फर्म में नौकरी मिल गई थी। पर उनके मन में सपने कुछ और थे। खैर, मुंबई जाने से पहले उन्होंने 1963 से 1968 तक पाँच साल कलकत्ता में गुजारे। इस बीच दो प्राइवेट कम्पनियों में काम किया। नौकरी के साथ मटरगश्ती भी खूब की। कोयले का व्यवसाय करने वाली बर्ड एंड हिल्जर्स कम्पनी में उनकी पहली पगार पाँच सौ रुपए थी तो दूसरी कम्पनी ब्लैकर्स में उनकी अंतिम पगार थी 1680 रुपए।

नौकरी से अमिताभ की बाहरी जरूरतें भले ही पूरी होती रही हों लेकिन भीतर की भूख ज्यों की त्यों थी। नौकरी करते हुए भी अपनी दिनचर्या को उन्होंने थियेटर और सिनेमा के अपने शौक पर हावी ना होने दिया। वो ना केवल बना रहा बल्कि बढ़ता रहा। रंगमंच पर वे लगातार खुद को मांजते रहे और एक दिन फिल्मों की ओर रुख कर लिया। कोलकाता से वे मद्रास पहुँचे और वहाँ से मुंबई। अभिनेता बनने के आकांक्षी अमिताभ बच्चन का पहला फोटो अलबम उनके छोटे भाई अजिताभ ने तैयार कराया था, जो अब काम आने वाला था।

पहली फिल्म सात हिन्दुस्तानी में काम के बदले अमिताभ को मेहनताने में पाँच हजार रुपए मिले थे। यह फिल्म उन्होंने दिल्ली के शीला सिनेमा में अपने माता-पिता के साथ देखी थी। जब इस फिल्म को देख कर मशहूर अदाकारा मीना कुमारी ने उनकी तारीफ की तो अमिताभ लजा गए थे। शुरुआती दिनों में वे जलाल आगा की विज्ञापन कम्पनी में अपनी आवाज़ भी उधार दिया करते और बदले में प्रति विज्ञापन पचास रुपए पाते, जो तब उनके लिए पर्याप्त रकम हुआ करती। ये वो दिन थे जब काम की तलाश और खाली जेब साथ-साथ चला करती और अमिताभ वर्ली स्थित सिटी बेकरी से आधी रात के समय आधे दाम में मिलने वाले टूटे-फूटे बिस्कुट खरीदते और चाय के साथ खाकर गुजारा करते।

अमिताभ की शुरुआती एक दर्जन फिल्में बुरी तरह फ्लॉप हुईं। फिल्म इंडस्ट्री में उन्हें ‘अपशकुनी’ हीरो माना जाने लगा। कोई उन्हें घर लौट जाने की सलाह देता तो कोई कवि बनने की। ऐसे में ‘जंजीर’ आई और फिर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती, सो नहीं हुई।

‘जंजीर’ में अमिताभ ने पुलिस इंस्पेक्टर की भूमिका की थी। पुलिस की वर्दी में वे जंचेंगे या नहीं, प्रकाश मेहरा (इस फिल्म के निर्माता और निर्देशक) को शक था। तब सलीम-जावेद ने कहा था कि इस रोल के लिए अमिताभ बच्चन से अच्छी कोई चॉइस हो ही नहीं सकती। इस बात का विश्वास मेहरा को पहले दिन की शूटिंग के दौरान ही हो गया। हुआ यूँ कि पुलिस चौकी के इस दृश्य में खान के रूप में प्राण साहब आते हैं और इंस्पेक्टर अमिताभ के सामने रखी कुर्सी पर बैठने लगते हैं। प्राण को बैठने का अवसर ना देते हुए अमिताभ कुर्सी को धकेलकर संवाद बोलते हैं – ये पुलिस स्टेशन है, तुम्हारे बाप का घर नहीं..। शॉट देने के बाद प्राण प्रकाश मेहरा को हाथ पकड़कर एक ओर ले जाते हैं और कहते हैं – प्रकाश, अभिनय तो कई वर्षों से करता आ रहा हूँ, पर ऐसा जबर्दस्त अनुभव मुझे कभी नहीं हुआ। मैं तुम्हें आज ही बता देता हूँ कि हिन्दी सिनेमा को एक बड़ा भारी एक्टर मिल गया है। दीवार पर लिखी इबारत मुझे साफ नजर आ रही है। शायद ये ‘ग्रेटेस्ट स्टार’ होगा।

प्राण साहब का कहा सच हुआ। आज अमिताभ बॉलीवुड के बिग बी हैं, शहंशाह हैं, सदी के महानायक हैं और उनका ये डायलॉग हकीकत बन चुका है कि वो जहाँ खड़े हो जाते हैं, लाइन वहीं से शुरू होती है। अभिनय के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार (चार बार) और फिल्म फेयर पुरस्कार (11 बार) समेत पुरस्कारों और पद्मश्री, पद्मभूषण और पद्म विभूषण समेत सम्मानों की लम्बी फेहरिस्त है उनके नाम।

आज आनंद, अभिमान, जंजीर, दीवार, शोले, चुपके-चुपके, कभी-कभी, अमर अकबर एंथनी, मुकद्दर का सिकन्दर, त्रिशूल, डॉन, काला पत्थर, लावारिस, सिलसिला, नमक हलाल, शक्ति, कुली, शराबी, मर्द, शहंशाह, अग्निपथ, हम, खुदा गवाह, मोहब्बतें, कभी खुशी कभी गम, कभी अलविदा ना कहना, आँखें, बागबान, ब्लैक, सरकार, चीनी कम, भूतनाथ, पा, पीकू, वजीर और पिंक जैसी फिल्में उनके खाते में है और इनमें उनके अभिनय के इतने रंग हैं कि एक्टिंग का पूरा स्कूल खुल जाय, पर अपनी हर अगली फिल्म में कुछ नया करने और देने की उनकी छटपटाहट आज भी ज्यों की त्यों है। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनका उत्साह और जुनून आज की पीढ़ी के अभिनेताओं से बीस ठहरेगा। यही कारण है कि आज जबकि उनके तमाम समकालीन अभिनेता अपनी चमक बिखेर कर गायब हो चुके हैं, अमिताभ करोड़ों दिलों पर राज कर रहे हैं। सचमुच अद्भुत हैं अमिताभ। ईश्वर उन्हें चिरायु प्रदान करें!

  ‘मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप 

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